की स्थापना अनिवार्य है, और इस दिशा में सरकार की नयी पहलें तुरंत कार्यान्वित होंगी। यह घोषणा तब हुई, जब भारतीय उद्योगपतियों और विदेशी निवेशकों का एक बड़ा समूह समिट के प्रमुख सत्र में भाग ले रहा था।
बिहार में उद्योग‑आधारित विकास का
विचार कई दशकों से चर्चा में है, परन्तु वास्तविक कार्यान्वयन में गति कम रही। पिछले दो दशकों में राज्य की जनसंख्या में वृद्धि के साथ रोजगार का अंतराल बढ़ता गया, जिससे युवा वर्ग बड़ी संख्या में बाहरी क्षेत्रों की ओर प्रवास कर रहा है।
इस प्रवाह को रोकने के लिये राज्य सरकार ने विभिन्न नीति‑उपायों की रूपरेखा तैयार की, परन्तु निजी क्षेत्र की भागीदारी के अभाव में कई योजनाएँ स्थगित रह गईं।
इसी पृष्ठभूमि में गुप्ता ने “आत्मनिर्भर बिहार” रोडमैप की तीन मुख्य स्तंभों का उल्लेख किया:
औद्योगिक क्लस्टर विकास, निवेश प्रोत्साहन नीति, और कौशल‑आधारित रोजगार सृजन। उन्होंने बताया कि इस रोडमैप के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की स्थापना की जाएगी, जिससे स्थानीय संसाधनों का कुशल उपयोग संभव हो सकेगा। साथ ही, नई निवेश नीतियों
के तहत कर छूट, भूमि उपलब्धता और नियामक प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा, ताकि उद्यमियों को आकर्षित किया जा सके।
समिट के दौरान गुप्ता ने विशेष रूप से सहरसा, भागलपुर और बेतिया जैसे क्षेत्रों को औद्योगिक केंद्र बनाते हुए उल्लेख किया। इन जिलों
में उपलब्ध कच्चा माल, जल संसाधन और सस्ती श्रम शक्ति को देखते हुए बड़े पैमाने पर उत्पादन इकाइयों की संभावना है। उन्होंने बताया कि सरकार पहले से ही इन क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा, जैसे सड़कों, रेल लिंक और बिजली सप्लाई, को उन्नत करने के
लिये कार्य कर रही है। यह कदम निवेशकों को भरोसा देगा कि दीर्घकालिक परियोजनाओं में जोखिम घटेगा।
समिट में उपस्थित अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों ने बिहार के प्रस्तावित क्लस्टर मॉडल में रुचि जताई। विशेष रूप से एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र के उद्योगपतियों ने कहा कि यदि सरकारी
नीतियाँ स्पष्ट हों और कार्यान्वयन में पारदर्शिता बनी रहे, तो वे बिहार में उत्पादन इकाइयों की स्थापना को गंभीरता से विचार करेंगे। कई प्रतिनिधियों ने कहा कि वे स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ साझेदारी करने और प्रशिक्षण संस्थानों से कुशल श्रमिकों की उपलब्धता को सुनिश्चित
करने में रुचि रखते हैं।
बिहार सरकार ने इस मंच पर उद्योग विकास के लिये विशेष निधि का प्रस्ताव रखा। यह निधि प्रारम्भिक निवेश, तकनीकी सहयोग और कौशल विकास कार्यक्रमों के लिये उपयोग की जाएगी। गुप्ता ने कहा कि इस निधि का प्रमुख
उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को वित्तीय सहायता देना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हो सके। साथ ही, इस निधि के माध्यम से नवाचार और अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे उत्पादन के मानकों में सुधार हो सके।
राज्य के
प्रमुख आर्थिक सलाहकार ने इस रोडमैप को “बिहार की आर्थिक पुनरुत्थान की नींव” कहा। उन्होंने बताया कि यदि उद्योग क्लस्टर सफलतापूर्वक स्थापित हो जाता है, तो अगले पाँच वर्षों में रोजगार सृजन में 15‑20 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। यह आंकड़ा वर्तमान में
मौजूद 30‑40 प्रतिशत युवा बेरोजगारी को काफी हद तक कम कर देगा, जिससे सामाजिक असंतोष में भी कमी आएगी।
विपक्षी दलों ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केवल नीति घोषणा से कुछ नहीं बदलेगा, वास्तविक कार्यान्वयन में पारदर्शिता
और भ्रष्टाचार‑मुक्त प्रबंधन होना आवश्यक है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि क्लस्टर विकास के लिये एक स्वतंत्र निगरानी आयोग स्थापित किया जाए, जो समय‑समय पर प्रगति रिपोर्ट पेश करे। यह मांग कई सामाजिक संगठनों द्वारा भी समर्थन प्राप्त कर रही
Bihar MLA E.I.P. Gupta used the BRICS 2026 summit in New Delhi to unveil an “Self‑Reliant Bihar” roadmap, pledging industrial clusters, tax incentives and skill‑driven jobs to curb youth out‑migration. The plan, targeting SEZs in districts like Saharsa and Bhagalpur, has attracted interest from Asian‑Pacific investors but faces opposition calls for transparent implementation.
Bihar’s “self‑reliant” roadmap could turn the state’s chronic brain‑drain into a growth engine, but only if the promised SEZs and tax breaks materialize fast enough to outpace competing hubs.
The real test will be transparent, corruption‑free execution—investors are













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