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मेटा ने बाल यौन शोषण सामग्री को रोकने के उपाय बताए, NCPCR ने पारदर्शिता व त्वरित कार्यवाही की मांग की।

मेटा इंक. के अधिकारियों ने आज राष्ट्रीय बाल सुरक्षा आयोग (NCPCR) के मुख्यालय में साक्षात्कार दिया, जहाँ उन्होंने इंस्टाग्राम पर प्रदर्शित हुए बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) से संबंधित आरोपों पर जवाब दिया। यह सुनवाई जुलाई में केन्द्र सरकार द्वारा मेटा को विज्ञापन राजस्व पर रोक के स्वरूप में जारी कड़ी नोटिस के बाद हुई,

जिसमें प्लेटफ़ॉर्म को बाल शोषण सामग्री को हटाने के लिये कड़े उपाय अपनाने का आदेश दिया गया था। आयोग ने इस सत्र में मेटा के वरिष्ठ प्रबंधकों को बुलाकर इस मुद्दे की गंभीरता को समझने और तत्क्षण सुधारात्मक कदमों की मांग की।

पिछले दो वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों पर बाल शोषण सामग्री की

घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिसके कारण भारतीय सरकार ने डिजिटल नियमों को कड़ा किया है। 2022 में डिजिटल सेवाएँ अधिनियम (DSA) के तहत बाल सुरक्षा को प्रमुख प्रावधानों में शामिल किया गया, और 2023 में विज्ञापन राजस्व पर प्रतिबंध जैसी कड़ी कार्रवाई की गई। इस संदर्भ में, जुलाई में मेटा को जारी नोटिस

ने कंपनी को 48 घंटों के भीतर सभी संदिग्ध विज्ञापनों को हटाने तथा भविष्य में ऐसी सामग्री को रोकने के लिये स्वचालित मॉनीटरिंग सिस्टम स्थापित करने का निर्देश दिया था।

मेटा ने इस नोटिस के जवाब में कहा था कि उसने अपने प्लेटफ़ॉर्म पर CSEAM को रोकने के लिये कई तकनीकी उपाय लागू किए

हैं, जिनमें मशीन लर्निंग‑आधारित फ़िल्टर और उपयोगकर्ता रिपोर्टिंग तंत्र शामिल हैं। कंपनी ने यह भी दावा किया कि उसने 2023 के पहले छह महीनों में 1.2 मिलियन संभावित सामग्री को हटाया और 10,000 से अधिक उपयोगकर्ता खातों को बंद किया। फिर भी, आयोग के प्रतिनिधियों ने कहा कि इन आँकड़ों में पारदर्शिता की कमी है

और वास्तविक प्रभाव का आकलन करना कठिन है।

साक्षात्कार के दौरान, मेटा के प्रतिनिधि ने बताया कि उन्होंने भारत में स्थित एक विशेष कार्यदल का गठन किया है, जो स्थानीय कानूनों और सांस्कृतिक संवेदनाओं के अनुसार सामग्री मॉडरेशन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इंस्टाग्राम पर विज्ञापनदाता को पहले से ही CSEAM से

मुक्त सामग्री का प्रमाण देना अनिवार्य किया गया है, और उल्लंघन करने वाले विज्ञापनदाता को तुरंत ब्लॉक कर दिया जाता है। आयोग ने इस बात पर प्रश्न उठाया कि इन उपायों का व्यावहारिक कार्यान्वयन कितना प्रभावी है और क्या यह वास्तविक समय में सभी उल्लंघनों को पकड़ सकता है।

इंस्टाग्राम के एक प्रमुख विज्ञापनदाता,

जो भारत में युवा फैशन ब्रांड का प्रतिनिधित्व करता है, ने भी इस सत्र में उपस्थित होकर कहा कि प्लेटफ़ॉर्म ने उनके विज्ञापन को निरंतर ब्लॉक किया था, जिससे उनकी व्यावसायिक हानि हुई। उन्होंने कहा कि वे मेटा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन विज्ञापन की स्वीकृति प्रक्रिया में अस्पष्टता और अत्यधिक स्वचालन

के कारण कई बार वैध विज्ञापन भी गलतफहमी में ब्लॉक हो जाते हैं। यह स्थिति छोटे और मध्यम उद्यमों के लिये विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बन गई है।

इसी बीच, कई डिजिटल अधिकार समूहों ने आयोग के इस कदम की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी कि अत्यधिक नियंत्रण से अभिव्यक्ति

की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बाल शोषण सामग्री को रोकने के लिये तकनीकी उपाय आवश्यक हैं, परन्तु इन उपायों को पारदर्शी और जवाबदेह ढाँचे में लागू किया जाना चाहिए। आयोग ने इन समूहों के साथ मिलकर एक स्वतंत्र ऑडिट प्रक्रिया स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, ताकि मेटा की मॉनीटरिंग

प्रणाली की प्रभावशीलता को सार्वजनिक रूप से जाँच किया जा सके।

कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस सुनवाई में अपनी आवाज़ उठाई, यह कहकर कि बाल शोषण सामग्री का प्रसार न केवल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर बल्कि वास्तविक जीवन में भी अपराध को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि सरकार को सख्त नियमों के साथ

साथ, जागरूकता अभियानों को भी सुदृढ़ करना चाहिए, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों को इस खतरे के बारे में सही जानकारी मिल सके। इन कार्यकर्ताओं ने मेटा से आग्रह किया कि वह अपने उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित रखने के लिये अधिक सक्रिय कदम उठाए और संभावित सामग्री को हटाने में देरी न करे।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में,

इस मामले ने केंद्र सरकार की डिजिटल सवेंदनशीलता को लेकर नीति निर्धारण में नई दिशा प्रदान की है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि वह सभी बड़े सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि बाल शोषण सामग्री को रोकने में कोई चूक न हो। इस संदर्भ में, प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया पहल

के तहत, सरकार ने तकनीकी कंपनियों को सामाजिक उत्तरदायित्व का पालन करने के लिये प्रोत्साहित किया है, और उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी सजा का प्रस्ताव रखा है।

आर्थिक दृष्टिकोण से, विज्ञापन राजस्व पर प्रतिबंध ने कई डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों के लिये अनिश्चितता उत्पन्न की है। विज्ञापनदाता अब अपने विज्ञापन सामग्री के प्रमाणिकरण

Updated: September 10, 2026


Summary: मेटा ने राष्ट्रीय बाल सुरक्षा आयोग के समक्ष इंस्टाग्राम पर यौन शोषण सामग्री मुद्दे पर जवाब दिया और अपने प्रतिबंधों को हटाए जाने की अपेक्षा जताई. आयोग ने पारदर्शिता और स्वतंत्र ऑडिट की मांग करते हुए सामग्री पर नजर रखने के लिए अधिक सख्त कदमों की बात की है.

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