सौर ऊर्जा पर भारत की राष्ट्रीय नीति भी इस दिशा में प्रोत्साहित करती है। 2023 में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 2030 तक 40 % विद्युत उत्पादन को नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। बिहार ने इस राष्ट्रीय दिशा-निर्देश के अनुरूप अपने स्कूलों में सौर पैनल लगाने की योजना को प्राथमिकता दी। इस योजना में तीन चरणों में कार्यवाही करने का प्रावधान है, जिससे प्रारंभिक चरण में 69 हजार विद्यालयों में पैनल स्थापित किए जाएंगे, और शेष को क्रमिक रूप से जोड़ने की योजना है।
पहले चरण में चयनित 69 हजार स्कूलों में 150 वॉट से 300 वॉट तक की क्षमताओं वाले सौर पैनल स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक विद्यालय में सौर पैनल के साथ इन्वर्टर, बैटरियों और नियंत्रण प्रणाली भी स्थापित की जाएगी, जिससे दिन में उत्पन्न ऊर्जा को संग्रहित करके रात में उपयोग किया जा सके। इस चरण के लिए राज्य ऊर्जा विकास एजेंसी (SEDA) को कार्यान्वयन का मुख्य जिम्मा सौंपा गया है, और ठेकेदारों को चयनित बोलीदाताओं के माध्यम से नियुक्त किया जाएगा। अनुमानित है कि इस चरण को पूरी तरह से 2027 तक समाप्त किया जाएगा।
दूसरे चरण में शेष 9 हजार स्कूलों को कवर किया जाएगा, जिसमें अधिकतम ऊर्जा उत्पादन के लिए बड़े आकार के पैनल और ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली स्थापित की जाएगी। इस चरण में मौजूदा पैनलों की कार्यक्षमता की निगरानी भी शामिल होगी, जिससे समय पर रखरखाव और अपडेट सुनिश्चित हो सके। तीसरा चरण ऊर्जा दक्षता के मूल्यांकन एवं भविष्य के विस्तार हेतु डेटा संग्रहण पर केंद्रित रहेगा, जिससे अन्य सरकारी संस्थानों में समान मॉडल को लागू करने की संभावनाएं जांची जा सकें। सभी चरणों में स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण देकर रोजगार सृजन पर भी बल दिया जाएगा।
केंद्रीय और राज्य दोनों स्तरों से इस योजना के लिए वित्तीय सहयोग की व्यवस्था की गई है। राज्य बजट में 600 करोड़ रुपये की आवंटन के साथ केंद्र सरकार से 200 करोड़ रुपये की ग्रांट मिलने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार के सौर ऊर्जा विकास कार्यक्रम (Solar Mission) के तहत दी जा रही रियायती दरों से पैनलों की लागत में भी कमी आई है। इन वित्तीय संसाधनों के उपयोग से न केवल योजना की लागत प्रभावी बनी रहेगी, बल्कि दीर्घकालिक रूप से सरकार के ऊर्जा खर्च में उल्लेखनीय कमी भी आएगी।
स्थानीय स्तर पर कई शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधकों ने इस पहल को सकारात्मक रूप में देखा है। कई स्कूलों के प्रधानाचार्य ने बताया कि सौर पैनल स्थापित होने के बाद वे रात में भी कक्षाओं का संचालन, कंप्यूटर लैब का उपयोग और डिजिटल शिक्षण सामग्री को आसानी से चलाने में सक्षम होंगे। कुछ जिलों में तो इस योजना के कारण अतिरिक्त को-करिकुलर कार्यक्रमों की शुरुआत भी हो रही है, क्योंकि ऊर्जा की निरंतर उपलब्धता ने साक्षरता कार्यक्रमों को नई दिशा दी है। हालांकि, कुछ प्रबंधकों ने प्रारंभिक स्थापना में तकनीकी चुनौतियों और रखरखाव की आवश्यकता को लेकर सतर्कता भी जताई है।
राज्य शिक्षा विभाग ने बताया कि पैनल की स्थापना के बाद बिजली बिल में लगभग 70 % की कमी की उम्मीद है। वर्तमान में स्कूलों द्वारा भुगतान किए जाने वाले 60 करोड़ रुपये के बिल में से लगभग 42 करोड़ रुपये की बचत होगी, जिससे शेष राशि को शैक्षिक सामग्री, शिक्षक वेतन या बुनियादी ढांचे में निवेश किया जा सकेगा। साथ ही, बिजली कटौती के कारण होने वाले अध्यापन समय की हानि भी समाप्त हो जाएगी, जिससे छात्रों की निरंतर शिक्षा सुनिश्चित होगी। इस आर्थिक बचत को पुनः निवेशित कर स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और डिजिटल कक्षाओं को सुदृढ़ करने की योजना भी तैयार की गई है।
Be First to Comment