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बिहार को केंद्र से यूरिया, डीएपी की पर्याप्त आपूर्ति, कोई कमी नहीं: सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने बिहार को यूरिया , डीएपी और अन्य उर्वरकों की प्रचुर मात्रा में आपूर्ति की, लेकिन राज्य सरकार की वितरण व्यवस्था फेल होने के कारण उर्वरक किसानों के बजाय कालाबाजारियों और तस्करों के पास पहुँच रहा है।

  • राज्य की वितरण व्यवस्था फेल , स्टॉक में पड़ा है उर्वरक
  • कालाबाजारी और नेपाल सीमा से तस्करी रोके सरकार

श्री मोदी ने कहा कि खाद का कोई किल्लत नहीं है, लेकिन विभागीय मंत्री गलतबयानी कर केंद्र को बदनाम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ महीने में बिहार को 2.41 लाख मीट्रिक टन यूरिया मिला और बिक्री के बाद भी 1.68 लाख मीट्रिक टन स्टॉक में पड़ा है।

उन्होंने कहा कि इस साल अक्टूबर में 1.84 लाख मीट्रिक टन और नवम्बर में 93 हजार मीट्रिक टन यूरिया बिहार को मिला।

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श्री मोदी ने कहा कि रबी फसल को ध्यान में रख कर केंद्र सरकार ने बिहार को यूरिया और पी एंड के उर्वरक के 122 रैक अक्टूबर माह में और 17 नवम्बर तक 85 रैक उपलब्ध कराये, लेकिन राज्य सरकार ने इसे किसानों तक पहुँचाने की चिंता नहीं की।

उन्होंने कहा कि बिहार को 1.62 लाख मीट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आपूर्ति की गई और बिक्री के बाद यह 90 हजार मीट्रिक टन स्टॉक में है, फिर भी कमी का रोना रोया जा रहा है।

श्री मोदी ने कहा कि सरकार को अफसरों की मिलीभगत से होने वाली खाद की कालाबाजारी और नेपाल सीमा से होने वाली तस्करी रोकने पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए।

BJP नेताओं को आवास खाली करने का नोटिस; दोनों पूर्व डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को मिला नोटिस

सरकार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) को पद तो मिल गया, लेकिन इस पद के लिए तय सरकारी बंगला अब तक नहीं मिला है। कारण, पूर्व उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद (Tarkishor Prasad) पद से हटने के बाद भी पुराने आवास में बने हुए हैं।

यही हाल पूर्व उप मुख्यमंत्री रेणु देवी (Renu Devi) का है। वह भी पद के साथ मिला बंगला नहीं छोड़ रही हैं। अब सरकार ने सख्ती करने का निर्णय लिया है। भवन निर्माण मंत्री डा. अशोक चौधरी ने कहा-ये मर्जी से आवास खाली नहीं करते हैं तो मजिस्ट्रेट तैनात कर खाली कराया जाएगा।

BJP नेताओं को आवास खाली करने का नोटिस। दोनों पूर्व डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को मिला नोटिस। लाखों का जुर्माना भी लगाया गया है।

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अपने जन सुराज पदयात्रा पर पूर्वी चंपारण पहुंचे

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अपने जन सुराज पदयात्रा पर निकले हुए है। 550 किमी पद यात्रा पूरी कर 18 नवंबर की रात पूर्वी चंपारण जिले में प्रवेश किया।

Prashant Kishore

प्रशांत ने 2 अक्तूबर को बापू की भूमि पश्चिम चंपारण के भितिहरवा गांधी आश्रम से इस यात्रा का शुरुआत किया था, जो 140 से अधिक पंचायतों और 350 से अधिक गांवों से गुजरते हुए पूर्वी चंपारण के पहाड़पुर प्रखंड में प्रवेश की।

पटना यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव के लिए हो रहा मतदान

पटना यूनिवर्सिटी में आज छात्र संघ चुनाव के लिए मतदान हो रहा। चुनाव के लिए 8 बजे से वोटिंग जारी है। जो दोपहर 2 बजे तक चलेगी।

Patna University

छात्र संघ चुनाव को लेकर यूनिवर्सिटी में कुल 51 बूथ बनाए गए हैं। जहां कुल 24395 छात्र-छात्राएं मतदान करेंगे। चुनाव में कुल 306 बैलट बॉक्स का इस्तेमाल किया जा रहा।

न जिला अस्पतालों की दशा सुधरी, न 705 डाक्टरों पर कार्रवाई हुई : सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव न 60 दिन में जिला अस्पतालों को सुधार पाये, न उन 705 डाक्टरों पर कोई कार्रवाई हुई, जिन्हें कई साल से “गायब” बताया गया है।

  • महागठबंधन सरकार में स्वास्थ्य सेवाएँ बद से बदतर
  • औचक निरीक्षण के बाद तेजस्वी के पास समीक्षा तक की फुर्सत नहीं

श्री मोदी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों से गायब डाक्टरों को अब तक वेतन कैसे मिल रहा है?

उन्होंने कहा कि सभी राशनकार्डधारी मरीजों को 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त देने की जो घोषणा की गई थी , उसका क्या हुआ?

श्री मोदी ने कहा कि जब डेंगू का प्रकोप चरम पर था, तब तेजस्वी यादव ने औचक निरीक्षण कर एक डाक्टर को सस्पेंड किया, लेकिन उसके बाद स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा तक नहीं की। मरीज भगवान भरोसे छोड़ दिये गए।

श्री मोदी ने कहा कि खगड़िया में बिना एनेस्थीसिया दिये महिला का बन्ध्याकरण आपरेशन किया जाना स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता और दुर्दशा, दोनों की गंभीरता बताने के लिए काफी है।

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उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में दवा, जांच, डाक्टर की उपलब्धता जैसी बुनियादी सुविधाओं को दो माह में ठीक करने का वादा हवा-हवाई ही साबित हुआ।

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव को स्वास्थ्य सहित आधा दर्जन प्रमुख विभागों का मंत्री बना दिया है। वे किसी विभाग को वक्त नहीं दे पा रहे हैं। उनके पास फुर्सत नहीं है और तकलीफ जनता को झेलनी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार में जन-कल्याण से सीधे जुड़े स्वास्थ्य विभाग की हालत बद से बदतर हो रही है।

जिस पार्टी की बुनियाद ही क्राइम और करप्शन पर हो, उसके नेता के मुँह से अपराध-भ्रष्टाचार से समझौता न करने की बात शोभा नहीं देती: सुशील मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जिस पार्टी की बुनियाद ही क्राइम और करप्शन पर हो, उसके नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के मुँह से अपराध -भ्रष्टाचार से समझौता न करने की बात शोभा नहीं देती।

  • बाहुबली, बलात्कारी तक को संरक्षण देने वाले लोग क्राइम-करप्शन पर चुप ही रहें
  • लालू परिवार एक मात्र ऐसा राजनीतिक कुनबा जिसके छह लोग चार्जशीटेड

श्री मोदी ने कहा कि तेजस्वी यादव 750 करोड़ रुपये के मॉल घोटाले में अभियुक्त हैं। उनके माता-पिता ( दोनों पूर्व मुख्यमंत्री) और तीन बहनें भी आईआरसीटीसी घोटाले में चार्जशीटेड हैं।

उन्होंने कहा कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद चारा घोटाला के सभी पांच मामलों में दोषी पाए गए और सजायाफ्ता हैं।

श्री मोदी ने कहा कि देश का कोई राजनीतिक परिवार ऐसा नहीं, जिसके 6 सदस्यों पर भ्रष्टाचार के इतने गंभीर मामले चल रहे हों।

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उन्होंने कहा कि यह राजद का आपराधिक चरित्र है कि वहाँ बाहुबली पूर्व सांसद शहाबुद्दीन से लेकर अनंत सिंह तक और बलात्कारी राजबल्लभ यादव से माफिया अरुण यादव तक को संरक्षण मिलता रहा।

श्री मोदी ने कहा कि जिस पार्टी के लोग शराब और बालू के अवैध धंधे में लगे हों और माफिया की फंडिंग से पार्टी चलती हो, उसके नेता को लोकलाज का ध्यान रख कर क्राइम-करप्शन पर जुबान बंद ही रखनी चाहिए।

हजारों नियुक्त लोगों को दोबारा नियुक्ति पत्र देने की बाजीगरी दिखा रहे नीतीश: सुशील कुमार मोदी

पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि एनडीए सरकार के समय उर्दू शिक्षक से लेकर दरोगा-सिपाही तक, जिन 10 हजार से ज्यादा लोगों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, उन्हीं को दोबारा नियुक्ति पत्र बाँटने की बाजीगरी से नीतीश कुमार बेरोजगारों की आँख में धूल झोंक रहे हैं।

  • अब तक नहीं हुई 10 लाख लोगों को स्थायी नौकरी देने वाली कैबिनेट की बैठक
  • 9 अगस्त के पहले पूरी हुई नियुक्ति प्रक्रिया का श्रेय न ले महागठबंधन सरकार

उन्होंने कहा कि गाँधी मैदान में कभी गिलास से रुमाल और खाली बर्तन से कबूतर निकालने की बाजीगरी दिखाने वाले मजमा लगाते थे , आज वहीं नीतीश कुमार फूँक मार कर हजारों नियुक्ति पत्र निकाल दे रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि बुधवार को जिन 10,459 लोगों को दरोगा-सिपाही के पद पर नियुक्ति पत्र दिये गए, उन्हें एक साल पहले जनवरी में ही संबंधित जोन के एसपी-डीआइजी नियुक्ति पत्र दे चुके हैं और उनका प्रशिक्षण भी चल रहा है। इन नियुक्तियों के लिए विज्ञापन 2019 में प्रकाशित हुआ था। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा के लोग जब बिना प्रशिक्षण पूरा किये पूरी वर्दी नहीं पहन सकते, तब नियुक्ति पत्र लेते समय वे वर्दी में कैसे दिखे? यह पहली बार हुआ।

सुशील कुमार मोदी

श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार अब यूपीए सरकार के मुख्यमंत्री हैं , लेकिन सारा लोकलाज छोड़ कर वे पिछली एनडीए सरकार के समय हुई नियुक्तियों की चिट्ठी बांट रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार और तेजस्वी प्रसाद यादव को उन नियुक्तियों के पत्र बाँट कर श्रेय लेने का कोई नैतिक अधिकार नहीं, जिनकी प्रक्रिया 9 अगस्त को सरकार बदलने से पहले शुरू हो चुकी थी।

श्री मोदी ने कहा कि महागठबंधन सरकार की पहली कैबिनेट में पहले दस्तखत से 10 लाख युवाओं को “स्थायी नौकरी” देने का जो वादा किया गया था, उसका समय तो अभी तक शुरू ही नहीं हुआ। क्या वे कैबिनेट की सौ बैठकों के बाद गिनती शुरू करेंगे?

नीतीश कुमार की विपक्षी एकता की मुहिम फ्लाप, किसी ने नेता नहीं माना: सुशील मोदी

सुशील कुमार मोदी – प्रेस विज्ञप्ति 11.11.2022
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार का न बिहार के बाहर कहीं प्रभाव है और न राज्य के भीतर वे अपना जनाधार बचा पाये, इसलिए विपक्षी एकता की उनकी मुहिम फ्लॉप कर गई। डेढ़ महीने में न कोई प्रमुख विपक्षी नेता उनसे मिलने आया, न वे किसी से मिलने गए।

  • बिहार में खिसका उनका लव-कुश,अतिपिछड़ा जनाधार
  • बिहार से बाहर केसीआर,केजरीवाल,अखिलेश का रुख ठंडा
  • जदयू का राजद में बिलय के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा

श्री मोदी ने कहा कि गोपालगंज और मोकामा के उपचुनाव में नीतीश कुमार अपना लव-कुश और अतिपिछड़ा वोट राजद को ट्रांसफर नहीं करा पाये। उनका आधार वोट भाजपा की तरफ खिसक गया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद न मल्लिकार्जुन खडगे ने और न भारत जोड़ो यात्रा पर निकले राहुल गांधी ने ही नीतीश कुमार को आमंत्रित किया।

श्री मोदी ने कहा कि विपक्षी एकता के नाम पर केसीआर बिहार आए थे, लेकिन नीतीश कुमार के साथ बात नहीं बनी। अब उन्होंने अपनी पार्टी को राष्ट्रीय बना कर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी से हाथ मिला लिया।

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उन्होंने कहा कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और केजरीवाल की पार्टी को एक साथ लाने में नीतीश कुमार कोई भूमिका नहीं निभा सके। दोनों जगह दोनों विपक्षी दल एक-दूसरे के खिलाफ भी लड़ रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि जब नीतीश कुमार को कोई नेता मानने को तैयार नहीं, तब विपक्षी एकता के नाम पर जदयू का राजद में विलय कराने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं है।

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों दिल्ली में केजरीवाल, चौटाला और अखिलेश यादव से नीतीश कुमार के मिलने का कोई फालोअप नहीं हुआ।

श्री मोदी ने कहा कि केजरीवाल ने कांग्रेस के साथ खड़ा होना नामंजूर कर दिया और आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में घिरे ओम प्रकाश चौटाला ने चुप्पी साध ली।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को भरोसेमंद दोस्त भाजपा का साथ छोड़ने के लिए पछताना पड़ेगा।

नीतीश कुमार की जिद के कारण टले निकाय चुनाव, शहरी विकास ठप – सुशील मोदी

सुशील कुमार मोदी – प्रेस विज्ञप्ति 10.11.2022
पटना । पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार की जिद के कारण निकाय चुनाव टल गए, जिससे अतिपिछड़ा वर्ग के सैकड़ों लोग मेयर-डिप्टी मेयर बनने से वंचित रह गए।

  • चुनाव की तारीख, आचार संहिता और नामांकन को लेकर स्पष्ट घोषणा करे सरकार
  • आरक्षण देने के लिए पहले आयोग बनाया होता तो नहीं होती फजीहत

श्री मोदी ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद भले ही सरकार झुकी और अतिपिछड़ों को राजनीतिक आरक्षण देने के लिए अतिपिछड़ा वर्ग आयोग को पुनर्जीवित कर दिया गया, लेकिन अभी तय नहीं कि कब आयोग की रिपोर्ट आयेगी और चुनाव कब होंगे?

उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव जब भी होंगे, तब फिर से नामांकन करना होगा या पहले के नामांकन ही मान्य होंगे, यह भी स्पष्ट नहीं है।
श्री मोदी ने कहा कि निकाय चुनाव टल गए, लेकिन आचार-संहिता लागू है, इसलिए पूरे राज्य में शहरी विकास का कोई नया काम नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि इन सारी बातों के लिए नीतीश कुमार जिम्मेदार हैं।

श्री मोदी ने कहा कि सरकार चुनाव की तारीख के बारे में स्पष्ट घोषणा करे, ताकि ऊहापोह की स्थिति समाप्त हो।

Sushil Modi

उन्होंने कहा कि जब महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में निकाय चुनाव पर रोक लगने का हवाला देकर एजी और राज्य निर्वाचन आयोग ने अतिपिछड़ों को आरक्षण देने के लिए विशेष आयोग बनाने और उसकी रिपोर्ट के अनुसार निकाय चुनाव कराने का मंतव्य दिया, तब नीतीश कुमार ने किसी की एक न सुनी।

श्री मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री के राजहठ के कारण अतंत: निकाय चुनाव पर रोक लगी और करना वही पड़ा, जो पहले
किया जा सकता था। इसका खामियाजा अतिपिछड़ों को उठाना पड़ा।

उपचुनावों में नीतीश नहीं बचा पाए आधार वोट, लोकप्रियता घटी : सुशील कुमार मोदी

पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा
दो उपचुनावों के परिणाम से साफ है कि जनता ने सात दलों की महागठबंधन सरकार को नकार दिया और नीतीश कुमार अपना आधार वोट भी नहीं बचा पाए।

  • जनता ने सात दलों के महागठबंधन को नकारा
  • मोकामा में भाजपा ने दी कड़ी टक्कर, गोपालगंज में बचाया अतिपिछड़ा आधार वोट

श्री मोदी ने कहा कि गोपालगंज में भाजपा अपने आधार वोट को एकजुट रखकर विजयी रही। उधर मोकामा में पार्टी का 63 हजार से ज्यादा वोट पाना और आतंक के पर्याय छोटे सरकार (अनंत सिंह) की पत्नी (राजद प्रत्याशी) को कड़ी टक्कर देना बड़ी बात है।

उन्होंने कहा कि मोकामा की जीत महागठबंधन की जीत नहीं, बल्कि छोटे सरकार की जीत है।

Sushil Modi

श्री मोदी ने कहा कि छोटे सरकार पार्टी बदल-बदल कर जीतते रहे, लेकिन इस बार तेजस्वी प्रसाद यादव और ललन सिंह के हेलीकाप्टर उतारने के बाद भी उनके प्रत्याशी की जीत का अंतर आधा हो गया।

उन्होंने कहा कि जदयू के राजद से फिर हाथ मिलाने के कारण नीतीश कुमार का लव-कुश और अतिपिछड़ा
वोट खिसक कर भाजपा के साथ आ गया। वे वोट ट्रांसफर करने की क्षमता खो चुके हैं।

गोपालगंज उपचुनाव पर भाजपा की जीत बरकरार; कुसुम देवी की 1794 वोट से हुई जीत

गोपालगंज-उपचुनाव अपडेट। मतगणना शुरू 24th राउंड तक आरजेडी प्रत्याशी मोहन प्रसाद गुप्ता को 68259 मिला वोट मिला।

बीजेपी प्रत्याशी कुसुम देवी को 70053 वोट मिला। 1794 वोट से बीजेपी की हुई जीत।

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मोकामा से राजद चुनाव जीता।

मोकामा विधानसभा उपचुनाव में महागठबंधन प्रत्याशी नीलम देवी की जीत

बिहार की दो सीटों के लिए हुए उपचुनाव में मोकामा सीट के नतीजे आ गए हैं. बिहार की हॉट सीट कहे जाने वाले मोकामा विधानसभा क्षेत्र से बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने चुनाव जीत लिया है. हालांकि इसका औपचारिक ऐलान शेष है. नीलम देवी मोकामा से महागठबंधन के तहत राजद की उम्मीदवार थीं. उन्होंने बीजेपी की महिला प्रत्याशी सोनम देवी को 16752 मतों से हराया है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मतगणना में नीलम देवी को 73893 वोट मिले जबकि उनकी प्रतिद्वंदी रही बीजेपी की सोनम देवी को 57141 वोट मिले. सोनम देवी मोकामा के ही एक अन्य बाहुबली ललन सिंह की पत्नी हैं. दरअसल चुनाव होने से पहले ही माना जा रहा था कि अपने पति अनंत सिंह की सीट से उनकी पत्नी नीलम देवी जीत का सिलसिला बरकरार रहेंगी लेकिन इस बीच बीजेपी ने एक अन्य बाहुबली ललन सिंह की पत्नी सोनम सिंह को चुनावी मैदान में उतारकर कड़ी टक्कर देने की कोशिश की।

रविवार को हो रही मतों की गनिती में शुरू से ही मोकामा के चुनाव परिणाम में अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी बढ़त लेकर चलती रहीं और अंतिम राउंड की जो गिनती हुई उसमें उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंदी सोनम देवी को करीब 17 हज़ार मतों से हराकर मोकामा सीट पर फिर से कब्जा जमा लिया है।

बिहार विधानसभा उप चुनाव का परिणाम तय करेगा बिहार किस दिशा में बढ़ रहा है

1991 में रोसड़ा लोकसभा क्षेत्र से जनता दल से रामविलास पासवान और बीजेपी से कामेश्वर चौपाल चुनाव लड़ रहे थे ।कामेश्वर चौपाल राम जन्मभूमि का शिलान्यास किये थे इसलिए रोसड़ा लोकसभा चुनाव काफी महत्वपूर्ण हो गया था क्यों कि उस समय मंडल और कमंडल की राजनीति चरम पर था।

कामेश्वर चौपाल के लिए संघ ,विहिप और बीजेपी अपनी पूरी ताकत झोंक दिया था और इतनी महंगी चुनाव मैंने आज तक नहीं देखा है ,उस दौर में पहली बार करोड़ों रुपये खर्च किये गये थे ।रामविलास पासवान का चार गाड़ी तो कामेश्वर चौपाल का 10 गाड़ी प्रचार में लगा हुआ था ।संशाधन में इतना बड़ा फर्क था लेकिन परिणाम आया तो कामेश्वर चौपाल का जमानत जप्त हो गया ।

वो दौर था जब मैंं पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया था हालांकि उस राजनीति की उतनी समझ नहीं थी लेकिन चुनाव परिणाम आने बाद मुझे लगा कि संसाधन और सवर्ण के सहारे ही चुनाव नहीं जीता जा सकता है ।

1998 के लोकसभा चुनाव में पहली बार एक पत्रकार के रूप में चुनाव कवर करने का मौका मिला और फिर यह सिलसिला शुरू हुआ वो अभी तक चला आ रहा है। बीजेपी को लेकर अभी भी धारणा यही है कि यह पार्टी सवर्ण और बनिया की पार्टी है। हिन्दू मुस्लिम नैरेटिव के बावजूद भी बिहार में बीजेपी अभी तक जातीय समीकरण में कोई बड़ी सेंधमारी नहीं कर पाई है ।वही 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में पहली बार ऐसा देखा गया कि बनिया वोटर बीजेपी से दूरी बनाने लगे और ऐसी सीट जहां राजद बनिया को टिकट दिया वहां राजद एनडीए के कोर वोटर बनिया के वोट मे सेंधमारी करने में कामयाब रहा था ।

ऐसे में कल मोकामा और गोपालगंज में जो उप चुनाव हुआ है उसमें राजद को बड़े मार्जिन से चुनाव जीतना चाहिए क्यों कि 2015 में जब नीतीश और लालू एक साथ चुनाव लड़ थे तो उस वक्त मोदी लहर के बावजूद बीजेपी का बिहार में सूपड़ा साफ हो गया था और इस बार तो सात सात पार्टी बीजेपी के खिलाफ एकजुट है।

इसलिए यह चुनाव नीतीश ,तेजस्वी और बीजेपी तीनों के लिए लिटमस टेस्ट है क्यों कि महागठबंधन के बाद जिस तरीके से नीतीश का #Body language और संवाद करने के तरीके में जो बदल आया है उसकी भी परीक्षा इस चुनाव में होने वाली है ।

इसी तरह राजद का यादव और मुसलमान समीकरण को साधु यादव और ओवैसी जैसे नेता सेंधमारी करने में कामयाब हो जाते हैं तो 2024 में ऐसे कई नेता के सहारे बीजेपी बिहार के इस मजबूत गठबंधन को ध्वस्त कर सकती है ।

इसी तरह बिहार का जो चुनावी गणित दिख रहा है उसी तरीके का परिणाम रहा तो फिर बीजेपी के लिए बिहार में वापसी करना नामुमकिन हो जायेगा देखिए आगे आगे होता है क्या लेकिन चुनाव भले ही दो विधानसभा में हो रहा है लेकिन बिहार किसी दिशा में बढ़ रहा है इन दो विधानसभा चुनाव के परिणाम से साफ हो जायेंगा।

बिहार ज्ञान की भूमि है, व्यवस्था ने इसे मजदूर स्प्लायर बना दिया है; इसी को बदलने के लिए पदयात्रा कर रहे हैं: प्रशांत किशोर

पिपरहिया, पश्चिम चम्पारण । जन सुराज पदयात्रा के दौरान योगापट्टी प्रखंड के पिपरहिया पंचायत में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि “मोटरसाइकिल चला रहे हैं हमारे लड़के, बनता हरयाणा और महाराष्ट्र में है।

हम लोग घर बनवाते हैं तो सीमेंट और छड़ लगता है, बनता मध्य प्रदेश में है। आप लोग गाड़ी चलाते हैं, गाड़ी कहां बनता है? गुजरात और तमिलनाडु में। आप लोग घर में टीवी देखते हैं, रेडियो सुनते हैं, ये मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में बनता है। हमारे यहां क्या बनता है ? हमारे यहां अब सिर्फ जवान लड़कों को मजदुर बनाया जाता है।

देश भर में जिसको भी मजदूरों की जरुरत होती है, बस भेज कर बिहार से मजदुर ले आते हैं। बिहार को लोगों ने लेबर का सप्लायर बना दिया है। ये ज्ञान की भूमि रही है बिहार, देवताओं को भी बिहार आकर ज्ञान मिला है। व्यवस्था को देखिये, व्यवस्था ने हमको आपको लो ग्रेड लेबर का सप्लायर बना दिया है।

prashantKishor

स्थिति बदलनी चाहिए, आपके लड़के जिंदगी भर मजदुर ना रहें इसलिए पदयात्रा करने निकले हैं।

Bihar By-Election: दोनों सीटों पर मतदान खत्म, मोकामा में 53 तो गोपालगंज में का 51 फ़ीसदी से ज्यादा हुई वोटिंग

बिहार विधानसभा की दो सीट मोकामा और गोपालगंज में उपचुनाव को लेकर मतदान खत्म हो गया . मोकामा में जहां 53.45% मतदान हुआ तो वही गोपालगंज में 51.48% मतदान हुआ। दोनों सीटों पर मुख्य रूप से महागठबंधन में शामिल राष्ट्रीय जनता दल और विपक्षी दल बीजेपी के बीच मुकाबला है.

गोपालगंज से नौ तो मोकामा से छह प्रत्याशी मैदान में हैं. गोपालगंज में लगातार पांचवीं बार जीत का परचम लहराने की कोशिश में बीजेपी जुटी है. मोकामा में जबरदस्त टक्कर होने वाली है. यहां ललन सिंह और अनंत सिंह की पत्नी आमने-सामने हैं.

मतदान को लेकर गोपालगंज और मोकामा में जो भी बूथ बनाए गए हैं वहां एक दिन पहले ही पूरी तैयारी हो चुकी थी. किसी भी मतदान केंद्र पर मोबाइल फोन को ले जाना वर्जित है. मतदान वाले क्षेत्र में धारा 144 लगाई गई थी. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरे भी लगाए गए थे. मोकामा के टाल क्षेत्र में अश्वारोही और ट्रैक्टर के माध्यम से भी निगरानी की गई. वहीं, जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह गोपालगंज के डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने चुनाव को लेकर सख्त निर्देश दिए थे. खास कर ईवीएम मशीन से कोई छेड़छाड़ या नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा तो प्रशासन गोली का सहारा लेकर निपटेगी. डीएम ने साफ कहा कि पहले चेतावनी देंगे. फिर भी बात नहीं मानी तो गोलियों का सहारा लिया जाएगा.

Mokama-election

मोकामा विधानसभा सीट पर आरजेडी से नीलम देवी उम्मीदवार.
बीजेपी से सोनम देवी हैं उम्मीदवार.अनंत सिंह की सदस्यता रद्द होने के कारण हो रहा है चुनाव.
मोकामा विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,81,248 मतदाता हैं. वहीं
गोपालगंज विधानसभा सीट पर आरजेडी से मोहन प्रकाश गुप्ता उम्मीदवार हैं. बीजेपी से कुसुम देवी बीजेपी से चार बार विधायक रहे सुभाष सिंह की पत्नी हैं। निधन के कारण उपचुनाव हो रहा है.
गोपालगंज विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,31,469 मतदाता हैं.
दोनों सीटों पर नतीजों की घोषणा छह नवंबर को की जाएगी.

गोपालगंज आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी का पैतृक जिला है. आरजेडी ने वैश्य समुदाय से ताल्लुक रखने वाले मोहन प्रकाश गुप्ता को बीजेपी के जातिगत समीकरणों को बिगाड़ने के लिए टिकट दिया है. वहीं राबड़ी देवी के भाई साधु यादव ने इस बार अपनी पत्नी इंदिरा यादव को बसपा उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतारा है.

मतदान खत्म होने के बाद अब नतीजों का इंतजार है देखना है ऊंट किस करवट बैठता है।

चुनाव प्रचार के अंतिम दिन अपने पैतृक जिला पहुंचे तेजस्वी यादव, जन समूह में की भावुक अपील

गोपालगंज में विधानसभा उप चुनाव प्रचार के अंतिम दिन राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। महागठबंधन की ओर से यहां एकता दिखाने की कोशिश की गयी है। डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा ने एक मंच से रैली किया।

गोपालगंज विधानसभा के उचकागांव प्रखंड के छोटका सांखे में महागठबंधन की रैली हुई। महागठबंधन की रैली में भाजपा निशाने पर रही।

बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने चुनावी मंच पर भावुक होकर कहा कि लालू प्रसाद आज तक भाजपा के सामने झुके नहीं है। उनपर मुकदमा पर मुकदमा किया गया और जब बीमार हैं तब भी छापेमारी कराया गया। जिस दिन सरकार बनाने के लिए बहुमत पेश कर रहे थे उस दिन भी भाजपा द्वारा रेड कराया गया। उन्होंने कहा कि लालू जी का बुढ़ापा हो गया। बाल पक गया लड़ते-लड़ते, लेकिन झुके नहीं और आज भी लड़ाई जारी है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर पिता सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ लड़ते हैं तो उनका बेटा भी झुकने को तैयार नहीं है।डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने यहां चुनावी रैली में इमोशनल हो गए।

सीएम नीतीश कुमार के चुनाव प्रचार नहीं किए जाने पर डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा कि जब उन्हें चोट लगा है और वे चुनाव प्रचार करने नहीं आ रहे हैं।तो बीजेपी वाले बोल रहे हैं कि हराना चाहते हैं। तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव प्रचार के लिए भाजपा उत्तर प्रदेश से लोगों को बुला रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बिहार से भाजपा को भगाया उस तरह से उत्तर प्रदेश से भी भाजपा को भगा दिया जाएगा।इसी काम में लालू और नीतीश कुमार लगे हुए हैं।

मोकामा उपचुनाव के लिए प्रचार खत्म, एक मंच पर जुटे महागठबंधन के दिग्गज; मगर CM नीतीश सीन से गायब!

बिहार में विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार के आखिरी दिन भी सीएम नीतीश कुमार प्रचार करने मैदान में नहीं उतरे।हालांकि, मोकामा में महगठबंधन के कई दिग्गजों का जमावड़ा रहा।

यहां बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी राजद की उम्मीदवार हैं और इनके लिए डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह, राजद के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी, मंत्री सुरेंद्र यादव और राजद नेता व प्रवक्ता शक्ति यादव ने चुनाव प्रचार किया।

घोसवरी में अपनी पहली सभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, इस चुनाव में महागठबंधन लड़ रहा है. मैं यहां लालू जी का संदेश लेकर आया हूं। नीतीश जी को चोट लगी है इसलिए नहीं आ पाए. मोकामा में कोई लड़ाई नहीं है. यहां सिर्फ यह देखना है कि नीलम देवी अपने पति अनंत सिंह से कितना ज्यादा वोट लाती हैं। चुनाव सिर्फ मार्जिन का है न कि हारने या जीतने का।

तेजस्वी यादव ने कहा कि बिकाऊ कभी टिकाऊ नहीं होता है. नीतीश कुमार गठबंधन में आने का बड़ा फैसला लिया है. जो ताकत आपने दी है उसे सूद समेत लौटाना है. हमारे साथ आने से पूरे देश के विपक्ष में जान आ गया है.

तेजस्वी यादव के साथ जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी सभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा, सीएम नीतीश कुमार आज मोकामा आने वाले थे, पर स्वास्थ्य कारणों से नहीं आ पाए। हालांकि, मोकामा के कई नेताओं से नीतीश कुमार ने बात की है।

बिहार में नगर निकाय के चुनाव का रास्ता साफ; सरकार ने कोर्ट को बताया कि अति पिछडे वर्ग के राजनीतिक पिछडेपन के लिए एक विशेष कमीशन का गठन किया गया है

राज्य में नगर निकाय के चुनाव का रास्ता साफ, अति पिछडे के आरक्षण के साथ साफ कर दिया। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने राज्य सरकार व अन्य की पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई की।

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि अति पिछडे वर्ग के राजनीतिक पिछडेपन के लिए एक विशेष कमीशन का गठन किया गया है।

ये कमीशन राज्य में अतिपिछडे वर्ग में राजनीतिक पिछडेपन पर अध्ययन कर राज्य सरकार को रिपोर्ट सौपेंगी।

Patnahighcourt


इसके बाद राज्य सरकार के रिपोर्ट के आधार पर राज्य चुनाव आयोग राज्य में नगर निकायों का चुनाव कराएगा। कोर्ट ने इसके साथ ही राज्य सरकार व अन्य द्वारा दायर पुनर्विचार याचिकाओं को निष्पादित कर दिया।

बिहार के स्कूलों में खिचड़ी बंट रही है और कॉलेजों में डिग्री,बिहार में शिक्षा की भयावह स्थिति: प्रशांत किशोर

बेतिया । प्रशांत किशोर ने की प्रेस वार्ता,नरकटियागंज के टीपी वर्मा कॉलेज परिसर में की पीसी। नीतीश कुमार पर जमकर बोला हमला, कहा-बिहार के स्कूलों में खिचड़ी बंट रही है और कॉलेजों में डिग्री, बिहार में शिक्षा की भयावह स्थिति ।

PrashantKishore

नीतीश कुमार के 17 साल के कार्यकाल का यह काला अध्याय है,पीएम आवास योजना में भी कमीशनखोरी हावी,लाभार्थियों के खातों की जांच कराने की मांग,बीडीओ स्तर से की जा रही है अनियमितता।

लोजपा मोकामा और गोपालगंज का उप-चुनाव नहीं लड़ेगी: चिराग पासवान

लोजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद दिल्ली में चिराग पासवान ने मीडिया से कहा कि लोजपा मोकामा और गोपालगंज का उप-चुनाव नहीं लड़ेगी।

समर्थन के सवाल पर चिराग ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि लोजपा का समर्थन किसे मिलेगा। उन्होंने कहा कि वो शुरू से नीतीश कुमार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं इसलिए जिस गठबंधन में नीतीश कुमार की जेडीयू होगी, उस गठबंधन को लोजपा का समर्थन नहीं मिलेगा।

Chiragpaswan

चिराग ने इसी मौके पर गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ने का भी ऐलान कर दिया।

हाईकोर्ट के फैसले पर आक्रामक मूड में बीजेपी, जहानाबाद में सीएम और डिप्टी सीएम का फूंका पुतला

आज जहानाबाद में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्यव्यापी आंदोलन के तहत अस्पताल मोड़ चौराहा पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव का पुतला फूंका।

बीजेपी के लोगों का कहना है कि सीएम नीतीश कुमार ने पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग को अपने वोट बैंक के रूप में उपयोग करने के चक्कर में बिहार में नगर निकाय के चुनाव को खत्म करवा दिया।

जिस तरह से बिना किसी प्रक्रिया पूरा किए हुए सरकार चुनाव में गई। इससे आम लोगों को काफी परेशानी झेलना पड़ा। ऐसे में जब कोर्ट ने इस पर रोक लगा दिया, तो इसके लिए सीधे बिहार सरकार जिम्मेदार है।

बीजेपी जिला अध्यक्ष ने यह मांग की है कि उम्मीदवारों के जो खर्च हुए हैं उन्हें सीएम नीतीश कुमार के द्वारा दिया जाना चाहिए।

प्रशांत किशोर का विपक्ष और नीतीश कुमार पर बड़ा हमला, बिहार में बदलाव जरूरी

जन सुराज पदयात्रा के दौरान पश्चिम चंपारण के जमुनिया गांव में प्रशांत किशोर ने कहा, “किसी से आजतक पैसा नहीं लिए हैं, अब ले रहे हैं।

बिहार में बदलाव के लिए उनसे फीस ले रहे हैं, जिनके लिए अब तक काम किया है, ताकि ये टेंट लगाया जा सके। मेहनत से, अपनी बुद्धि से 10 साल काम किए हैं, दलाली नहीं किए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “2014 में चुनाव हारने के बाद नीतीश कुमार ने दिल्ली आकर कहा कि हमारी मदद कीजिए। 2015 में हमलोगों ने उनको जिताने में कंधा लगाया, अभी 10-15 दिन पहले बुलाकर बोले कि हमारे साथ काम कीजिए, हमने कहा कि ये अब नहीं हो सकता है।

एक बार जो लोगों को वादा कर दिया है कि 3500 किमी चलकर गांव-गांव में जाकर लोगों को जगाना है, वही करेंगे। एक बार जनबल खड़ा हो गया, कोई टिकने वाला नहीं है लिखकर रख लीजिए।”

सामने आ गया जदयू-राजद का द्वंद, अंदर की लड़ाई सतह पर आ गई – शाहनवाज

आरा। कृषि मंत्री सुधाकर सिंह के इस्तीफे पर बोले पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन,कहा सामने आ गया जदयू-राजद का द्वंद , अंदर की लड़ाई सतह पर आ गई – शाहनवाज ।

भीतर की बात दूर तक पहुंची, कहा जदयू-राजद के भीतर चल रही बड़ी लड़ाई,आरा परिसदन में प्रेसवार्ता कर दिया बयान।

अपने बयानों की वजह से विवादों में रहे मंत्री सुधाकर सिंह का इस्तीफा, उनके पिता और पार्टी नेता जगदानंद सिंह ने की पुष्टि

इस वक्त की सबसे बड़ी खबर बिहार की सियासत से आ रही है। कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने अपना इस्तीफा सरकार को भेज दिया है। सुधाकर सिंह के पिता और आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने इसकी पुष्टि की है।

बता दें कि महागठबंधन की सरकार में आरजेडी कोटे से मंत्री बने सुधाकर सिंह ने भ्रष्टाचार को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। सुधाकर सिंह ने खुले मंच से अपने विभाग के अधिकारियों को चोर कहा या था और खुद को चोरों का सरकार बताया था।

कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इस बात को लेकर टोकने पर सुधाकर सिंह कैबिनेट की बैठक से उठकर चले गए थे। आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष और कृषि मंत्री सुधाकर सिंह के पिता जगदानंद सिंह ने उनके इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा है कि कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने अपना इस्तीफा सरकार के पास भेज दिया है।

जगदानंज सिंह ने कहा है कि बिहार के कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने किसानों के प्रश्न को उठाया है लेकिन सिर्फ प्रश्न उठाने से कुछ नहीं होता है उसके लिए त्याग भी करना पड़ता है। जगदानंद सिंह ने कहा है कि हम नहीं चाहते हैं कि कोई लड़ाई आगे बढ़े। सरकार अच्छी तरह से चले इसके लिए सुधाकर सिंह ने अपना इस्तीफा सरकार को सौंप दिया है।

गोपालगंज को डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने दी सौगात

गोपालगंज । डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने दी सौगात। गोपालगंज के थावे में की मेडिकल कॉलेज की घोषणा। मॉडल सदर अस्पताल के भवन बनाने का किया शिलान्यास।

थावे मंदिर के जीर्णोद्धार पर करोड़ो रुपए होंगे खर्च। 600 करोड़ राशि विकास योजनाओं पर होंगे खर्च।

क्या नीतीश वीपी सिंह के नक्शे कदम पर बढ़ रहे हैं?

क्या देश नीतीश में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह वाली छवि देख रही है!
मीडिया के एक सवाल के जवाब में ललन सिंह ने कहा था कि नीतीश कुमार को फूलपुर और मिर्जापुर के साथ साथ कई जगह से चुनाव लड़ने का संदेशा आया है लेकिन लोकसभा चुनाव में अभी बहुत वक्त है और नीतीश जी चुनाव लड़ेंगे इस पर अभी तक कोई विचार नहीं हुआ है इसलिए इस तरह के सवाल का कोई मतलब नहीं है।

लेकिन मीडिया ने इस खबर को ऐसा परोसा मानो ललन सिंह ने फूलपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दिया खबर ब्रेक होते ही राष्ट्रीय मीडिया में भूचाल आ गया शाम का सारा प्राइम डिबेट फूलपुर पर आकर ठहर गया देखते देखते सारा राष्ट्रीय चैनल फुलपूर की और प्रस्थान कर गया और गांव गांव ,चौक चौक पर लोगों से सवाल करने लगा नीतीश चुनाव लड़ने आ रहे हैं, आपकी क्या राय है।

खबरे भले ही 2024 का नब्ज टोटलने को लेकर जदयू द्वारा प्रायोजित किया गया था लेकिन मीडिया जब फूलपुर पहुंची तो ऐसे लगा जैसे उनके पहुंचने से पहले गांव गांव मे नीतीश के चुनाव लड़ने की चर्चा शुरु हो गयी है, सारे चैनल के रिपोर्ट को देखे तो बिहार से कही ज्यादा यूपी वाले इस खबर को लेकर उत्साहित हैं।

एक राष्ट्रीय चैनस का पत्रकार चलते चलते एक दरवाजे पर रुकता है और वहां बैठे लोगोंं से सवाल करता है नीतीश आ रहे हैं क्उया कहना है आपका उस व्यक्ति ने नीतीश के सहारे जो बाते कही रिपोर्टर साहब सोच में पड़ गये, गांव वालों ने गठबंधन अभी हुआ भी नहीं है लेकिन नाम भी रख दिया संयुक्त मोर्चा के उम्मीदवार नीतीश जी आय़ेंगे तो मोदी जी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा । जिस अंदाज में वहां बैठे लोग बोल रहे थे कि रिपोर्टर को रहा नहीं गया और उक्त व्यक्ति की जाति जानने के लिए नाम पुंछ डाला वहां बैठे सारे के सारे व्यक्ति ब्राह्मण थे रिपोर्टर हैरान आप लोग नीतीश की तारीफ कर रहे हैं मतलब नीतीश के नाम की चर्चा के साथ ही यूपी की राजनीति में भी एक अलग तरह माहौल अभी से ही बनना शुरू हो गया । इस खबर को जिस तरीके से राष्ट्रीय मीडिया ने कवर किया है अगर लड़ाई आमने सामने हुई तो मोदी का मीडिया मैनेजमेंट बहुत प्रभावित नहीं कर सकता है ऐसा नीतीश के बिहार से बाहर निकलने के बाद दिखने लगा है ।

Nitish Kumar

वैसे अधिकांश मीडिया हाउस के टॉप लेवल पर कोई ना कोई है जिनसे नीतीश कुमार को बेहतर रिश्ता रहा हैं साथ ही मोदी से जो प्रताड़ित वर्ग है वो पूरी तौर पर नीतीश के साथ होते जा रहा है जिस वजह से नीतीश को राष्ट्रीय स्तर पर फंड से लेकर अन्य स्रोतों तक पहुंच काफी तेजी से बढ़ती जा रही है फिर भी नीतीश काफी सावधान है और इस इमेज से बचना चाह रहे हैं कि नीतीश कुमार 2024 के पीएम उम्मीदवार है क्योंकि उनको पता है जब तक विपक्ष अलग अलग रहेंगा इसका कोई मतलब नहीं है।

इसलिए नीतीश कुमार की कोशिश यह है कि वीपी सिंह के नेतृत्व में जिस तरीके से 1989 में देश के सभी विपक्षी पार्टियां एक साथ मिलाकर जनता दल बनाया था ठीक उसी तरह से पहले देश स्तर पर बिखरे सारे विपक्ष को एक दल में विलय करा जाए ताकि टुकड़े टुकड़े में जीत कर आने के बाद पीएम पद की दावेदारी में वो मजबूती नहीं रहेंंगी जैसे विलय के बाद एक दल के रूप में जीत कर आने के बाद वो मजबूती नहीं रहेंगी इसलिए मीडिया जब फूलपुर से चुनाव लड़ने की बात कि तो नीतीश सिरे से खारिज कर दिया और कहां कि मेरी प्राथमिकता विपक्ष को पहले एक करना है ।

हालांकि जो खबर आ रही है राजद,जेडीएस और ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी से सहमति दे दी है और सपा से बातचीत चल रही है वैसे कल युवा चेहरे को आगे करने की बात कर नीतीश ने एक बड़ा दाव खेल दिया है वैसे 25 सितंबर को देवीलाल के जयंती के मौके पर आयोजित रैली में विपक्षी एकता को लेकर बड़ी घोषणा हो सकती है।

शाह ने नीतीश की घेरेबंदी शुरु की

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीमांचल के सहारे लोकसभा 2024 का आगाज करने 23 और 24 सितंबर को पूर्णिया और किशनगंज के दौरा पर आ रहे हैं स्वाभाविक है यह इलाका बीजेपी के हिन्दू मुस्लिम नैरेटिव में पूरी तरह से फिट बैठता है।
ऐसे में नीतीश कुमार के अलग होने के बाद बिहार की राजनीति में बने रहने के लिए अभी से ही यूपी की तरह यहां भी कैराना की खोज बीजेपी ने शुरु कर दी है हालांकि सीमांचल के अररिया, किशनगंज कटिहार और पूर्णिया इलाके में बीजेपी की पकड़ मजबूत हो इसके लिए संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद 1981 से ही कोशिश कर रहा है लेकिन अभी तक कामयाबी नहीं मिली है।

वैसे बीजेपी का कोई बड़ा नेता पहली बार बिहार के इन इलाकों में सेंधमारी करने की मुहिम शुरू करने जा रहा है कितना सफल होगा कहना मुश्किल है लेकिन पहली बार बड़ी कोशिश शुरु होने वाली है ये जरूर दिख रहा है और निशाने पर नीतीश है । क्यों कि इस इलाके में अभी भी नीतीश की पकड़ मजबूत है पिछले विधानसभा चुनाव में इन्ही इलाकों मेंं चिराग फैक्टर भी प्रभावी नहीं रहा था। सीमांचल के चुनावी समीकरण की बात करे तो यहां चार लोकसभा क्षेत्र हैंं जहां बिहार का सर्वाधिक मुस्लिम वोटर है ।किशनगंज यहां मुस्लिम वोटरों की संख्या 67 फीसदी है, कटिहार जहां मुस्लिम वोटर की संख्या 38 फीसदी, अररिया जहां 32 फीसदी है और पूर्णिया जहां 30 फीसदी मुस्लिम आबादी है।

इन लोकसभा क्षेत्र की बात करे तो एनडीए के साथ जब जब नीतीश साथ रहे 2009 के लोकसभा चुनाव में और 2019 के लोकसभा चुनाव में एनडीए जीत हासिल की है । नीतीश अकेले चुनाव लड़े तो 2014 के मोदी लहर में भी ये सारी सीटें बीजेपी हार गयी थी ,मतलब इन इलाको में मुस्लिम वोटर के अलावे बड़ी संख्या में अति पिछड़ा वोटर है और जब तक अति पिछड़ा वोटर को साधने में बीजेपी कामयाब नहीं हो जाती है तब तक बहुत मुश्किल है इन इलाकों में बीजेपी की वापस । वैसे ये जो इलाका है पूरी तौर पर कृषि आधारित इलाका है और शहरीकरण नहीं के बड़ाबड़ हुआ है ।वहीं यादव जो हिन्दू में मजबूत तबका है उसमें अभी भी लालू परिवार का तिलिस्म पूरी तौर पर खत्म नहीं हुआ है यू कहे तो अभी भी मजबूत स्थिति में है ऐसे में इन इलाकों में हिन्दू मुस्लिम नैरेटिव को आगे बढ़ना बहुत ही मुश्किल है साथ ही इन इलाकों में बीजेपी का वैसा जमीनी नेता पिछड़ी और अति पिछड़ी जाति में नहीं है जो माहौल बना सके ।

अररिया के सांसद जरुर अति पिछड़ी जाति से आते हैं लेकिन वो उतने प्रभावी नहीं हैं और क्षेत्र से भी बाहर ही रहते हैं ।वैसे यह इलाका कभी राजद का गढ़ माना जाता था लेकिन नीतीश कुमार यादव के खिलाफ अति पिछड़ों की राजनीति करके राजद को इन इलाकों से सफाया कर दिया था और अभी भी जदयू का सबसे मजबूत किला यही इलाका है, कटिहार और पूर्णिया में जदयू का सांसद है और आज भी जदयू का सबसे अधिक विधायक इन्ही इलाकों से जीत कर आया है ।इसलिए बीजेपी के लिए और भी बड़ा चुनौती है क्यों कि नीतीश कुमार के साथ जो वोटर है उसको हिन्दू मुस्लिम नैरेटिव में बांटना यादव की तुलना में मुश्किल है वैसे अमित शाह की यात्रा को लेकर जदयू कुछ ज्यादा ही सचेत है क्योंकि उन्हें पता है कि इस इलाके में नीतीश की पकड़ कमजोर हुई तो नीतीश की सियासत ही खत्म हो जायेंगी और यही वजह है कि अमित शाह के दौरा के बाद महागठबंधन इन इलाकों में गांव गांव में सम्मेलन करने का निर्णय लिया है।

मिशन 2024 की सफलता के लिए नीतीश को अपनी छवि बनाए रखनी होगी

मिशन 2024 की सफलता बिहार के कानून व्यवस्था की स्थिति पर निर्भर करेगा ।
—–बेगूसराय की घटना सरकार के साख पर सवाल है—–

बेगूसराय फायरिंग मामले की जांच के दौरान बिहार पुलिस मेंं प्रोफेशनलिज्म की कमी साफ देखने को मिला,ऐसे में मेरे जैसे व्यक्ति के लिए जो बिहार की पुलिसिंग पर खास नजर रखती है बेहद चिंता का विषय है।इस घटना के जांच के दौरान पुलिस की जो प्रवृत्ति देखी गयी है उससे आने वाले समय में अब हर घटना को जाति के चश्मे से देखने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और इसका प्रभाव राज्य के कानून व्यवस्था पर पड़ेगा यह तय है।

बेगूसराय फायरिंग मामले मेंं गिरफ्तार अपराधियों के खिलाफ साक्ष्य है लेकिन उस साक्ष्य को लेकर जिस स्तर तक पुलिस को काम करने कि जरुरत थी उसमें साफ कमी देखने को मिल रही है और इसका असर यह हुआ कि पुलिस बेगुनाह लोगों को जेल भेज दिया है ऐसी बात चर्चा में आनी शुरु हो गयी है और इस घटना में जो अपराधी शामिल है उसको पुलिस बचा रही है।

घटना 13 तारीख के शाम की है बेगूसराय पुलिस का हाल यह था कि 24 घंटे तक वो अंधेरे में ही तीर चला रहा था ,14 तारीख की शाम को पुलिस ने दो तस्वीर जारी किया और कहा कि यही वो चार अपराधी जो दो मोटरसाइकिल पर सवार होकर इस घटना को अंजाम दिया है। इतने महत्वपूर्ण केस में 15 तारीख की शाम मीडिया में खबर आने लगी कि इस कांड में शामिल अपराधी पकड़े गये और इस घटना में शामिल अपराधियों का नाम क्या है यह भी मीडिया में चलने लगा जबकि उस समय तक सभी कि गिरफ्तारी भी नहीं हुई थी उन अपराधियों का नाम कैसे बाहर आ गया बड़ा सवाल है।

फिर 16 तारीख के अहले सुबह बेगूसराय पुलिस के इनपुट पर झाझा रेलवे स्टेशन पर तैनात जीआरपी ने केशव उर्फ नागा को पकड़ा जो इस मामले की सबसे बड़ी गिरफ्तारी थी क्यों कि उससे पूछताछ के दौरान इस घटना के पीछे का खेल सामने आ सकता था लेकिन हुआ क्या जीआरपी थाना के प्रभारी फोटो खिंचवा कर 5 बजे सुबह में ही मीडिया को तस्वीर के साथ उसके गिरफ्तारी को सार्वजनिक कर दिया और मीडिया को फोनिंग देने लगा इसका असर यह हुआ कि 10 बजे नागा गैंग से जुड़े लोग बिहट चौक पर स्थित कुणाल लाइन होटल के सीसीटीव का फुटेज जारी कर बेगूसराय पुलिस की पूरी कार्रवाई पर ही सवाल खड़ा कर दिया।

देखिए जिसको पुलिस सूटर बता रही है वो घटना के समय लाइन होटल पर बैठा हुआ है जैसे ही यह खबर मीडिया में आयी बेगूसराय पुलिस सकते में आ गया और फिर पूछताछ छोड़ कर कितनी जल्दी इसको जेल भेजा जाए इस पर काम करना शुरू कर दिया ।

इसका असर यह हुआ कि केस का पूरी तौर पर खुलासा नहीं हो पाया बहुत सारी बाते सामने नहीं आ सकी और इस वजह से एसपी के सामने प्रेस रिलीज पढ़ने के अलावे को दूसरा चारा नहीं था । क्यों कि उनके पास क्रॉस क्यूसचन का जवाब नहीं था यही स्थिति एडीजीपी मुख्यालय का रहा मीडिया वाले सवाल करते रहे गिरफ्तार अपराधियों में गोली चलाने वाला कौन था नाम तक बताने कि स्थिति में वो नहीं थे ,केशव उर्फ नागा के होटल में बैठे होने कि बात सीसीटीवी में कैद होने पर सवाल किया गया तो कहां गया ये सब घटना की साजिश में शामिल थे, साजिश क्या है तो यह अनुसंधान का मसला है इस तरह से सवाल जवाब ने पुलिस के कार्रवाई को और भी संदेह के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया और सुशील मोदी और गिरिराज सिंह जैसे नेताओं को इस मामले की सीबीआई और एनआईए से जांच की मांग करने का मौका मिल गया।

इतने संवेदनशील मामले में इससे पहले कभी भी इस तरह की बाते देखने को नहीं मिली है पुलिस वाले सूचना लीक कर रहे थे और झाझा जीआरपी ने तो हद कर दी तस्वीर तक जारी कर दिया जो दिखाता है कि बिहार पुलिस की कार्य प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है।

याद करिए 1995 से 2005 का दौर राज्य में जो भी आपराधिक घटना घटित होता था सरकार उसको जाति से जोड़ देता था इस वजह से बिहार की पुलिसिंग धीरे धीरे कमजोर होती चली गयी वही सरकार के इस प्रवृत्ति का लाभ उठाते हुए अपराधियों ने भी अपने अपराध को छुपाने के लिए पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए जाति से जोड़ना शुरू कर दिया और धीरे धीरे पूरी व्यवस्था जाति के आधार पर एक दूसरे के साथ खड़े होने लगी और उसी का असर था कि बिहार की कानून व्यवस्था पटरी से उतर गया।

नीतीश कुमार इसी व्यवस्था पर चोट करके राज्य में कानून का राज्य स्थापित करने में कामयाब रहे थे लेकिन पहली बार वो किसी घटना को जातिवादी आधार से जोड़ते हुए बयान दिया और इसका असर बेगूसराय फायरिंग मामले में पुलिस के कार्यशैली पर साफ दिखाई दिया है।

हालांकि इसके लिए सिर्फ लालू प्रसाद या नीतीश कुमार ही जिम्मेवार नहीं है सुशील मोदी और गिरिराज सिंह जैसे नेता के साथ साथ यहां के सवर्णवादी मानसिकता वाले जो लोग है वो भी कम जिम्मेदार नहीं है क्योंकि उनको भी इसी तरह की राजनीति सूट करता है ।

बेगूसराय की घटना पूरी तरह से अपराधिक घटना है और सरकार या फिर किसी जिले में एसपी बदलने के बाद अपराधियों की यह प्रवृत्ति रही है कि इस तरह की घटना करके वह देखना चाहता है कि सरकार और पुलिस प्रशासन की सोच क्या है ।
याद करिए नीतीश कुमार 2005 में जब सत्ता में आये थे तो शुरुआती एक वर्ष तक किस तरीके से अपराधी सरकार को लगातार चुनौती दे रहे थे लेकिन जैसे ही अपराधियों को यह समझ में आ गया कि सरकार,कोर्ट और सत्ता में बैठे अपनी जाति वाले अधिकारियों से अब मदद मिलने वाली नहीं है स्थिति धीरे धीरे सुधरने लगी।

लेकिन बेगूसराय की घटना के बाद अपराधी और असामाजिक तत्व एक बार फिर से सिस्टम में बैठे अधिकारियों और नेताओं पर दबाव बनाना शुरु कर सकते हैं इस उदाहरण के साथ की मेरे साथ जाति के आधार पर भेदभाव हो रहा है हालांकि इस सोच को कितना बल मिलेगा यह कहना मुश्किल है लेकिन इन नेताओं की यही कोशिश होगी कि इस आधार पर समाज को बांटा जाये।

दस्तावेज तैयार करने को लेकर अनुमंडल कार्यालय के पास चहल पहल, नामांकन के लिए उमड़ रही भीड़

जहानाबाद जिले के चार नगर निकायों में चुनाव को लेकर नामांकन के तीसरे दिन तक किसी अभ्यर्थी ने नामजदगी का पर्चा दाखिल नहीं किया था। लेकिन चौथे दिन से प्रत्याशियों की भीड़ उमड़ने लगी है।

गुरुवार को सबसे ज्यादा वार्ड काउंसलर के लिए प्रत्याशियों ने नामांकन किया। घोसी वॉर्ड नंबर 6 से नामांकन करने वाले अरविंद कुमार ने बताया कि अपने वार्ड के विकास को लेकर वे चुनाव लड़ रहे हैं।

अरविंद कुमार, कैंडिडेट

नगर परिषद जहानाबाद, मखदुमपुर नगर पंचायत, घोसी नगर पंचायत और काको नगर पंचायत क्षेत्र के अभ्यर्थियों द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए प्रशासन द्वारा पुख्ता प्रबंध किया गया है।

अनुमंडल कार्यालय के आसपास के क्षेत्र को बैरिकेडिंग की गई है। दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारी के साथ जवानों की तैनाती की गई है। प्रवेश के लिए एक रास्ता बनाया गया है, जहां पुलिस जवान व पुलिस पदाधिकारी तैनात हैं।

दीपक रंजन, एसपी, जहानाबाद

नामजदगी का पर्चा दाखिल करने का समय 19 सितम्बर है। गुरुवार तक लगभग 530 उम्मीदवारों ने एनआर कटवाया है।

Municipal elections

नीतीश कुमार पर प्रशांत किशोर का हमला जारी, पूर्णिया में कहा – फेविकोल कंपनी को उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाना चाहिए

पूर्णिया । प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर फेविकोल कंपनी वाले मुझसे मिलेंगे तो मैं उनको सलाह दूंगा कि नीतीश कुमार जी को अपना ब्रांड एंबेसडर बना लें । किसी की भी सरकार हो , लेकिन वो कुर्सी से चिपके हुए रहते हैं ।

नीतीश कुमार के हालिया आरोप पर प्रशांत किशोर ने पलटवार करते हुए कहा, “एक महीने पहले तक 90 डिग्री के कोण पर झुक कर वो मोदी जी को प्राणाम करने वाले व्यक्ति अगर किसी को बीजेपी की बी टीम कह रहे हैं , तो इस पर हम हंसे या रोए।

Prashant Kishor

बीजेपी के साथ होने या ना होने में नीतीश जी के सर्टिफिकेट का जीरो वैल्यू है। मैं स्वतंत्र हूं और जो करना चाह रहा हूं वो कर रहा हूं।”