यह सम्मेलन 14 जनवरी 2023 को बिहार रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित किया गया था, लेकिन आउटपुट में इसका उल्लेख ही मिल रहा है। सेना और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच समन्वय बनाने और आपदा प्रबंधन के लिए तैयारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
आज भी भारत में कई जगहों पर बाढ़ की समस्या सामने आती है। ऐसे में, यह फ्लड रेस्क्यू सेमिनार बीते समय की तुलना में इस वर्ष थोड़ी अधिक समय पर आयोजित किया गया है, जो प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न बाढ़ से बचाव के लिए कुछ नया शोध का परिणाम है. इसी सेमिनार में राज्यपाल और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों में बाढ़ की समस्या काफी गंभीर रूप ले चुकी है, जिससे हमें पूर्ण रूप से तैयार रहना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि हमें आपदा प्रबंधन में नवाचार और आधुनिक तकनीक का उपयोग करना होगा।
बिहार रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित इस सेमिनार के दौरान, आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच के संचार में कम से कम दो दिन की गहरी चर्चा हुई। जिसमें, नागरिक एजेंसियों की भूमिका और सहयोग को सैन्य बलों तक पहुंचाने के तरीकों पर बहस हुई।
बहुपक्षीय वार्ता और सैन्य और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच के संवाद में कमी से बचाव के लिए तैयारी में निरंतर वृद्धि के संदर्भ में इस सेमिनार का लक्ष्य स्पष्ट था। इसमें किसी भी प्रकार के विश्लेषण का भी प्रयास किया गया।
इस बाढ़ प्रबंधन सेमिनार में आपदा प्रबंधन एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका कहना था कि आपदा प्रबंधन एजेंसियों में नवाचार और आधुनिक तकनीक के उपयोग से बाढ़ से बचाव के लिए प्रभावी तैयारी हो सकती है।
सेमिनार में जानकारी साझा करने के अलावा, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और सैन्य बलों के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया. जिनमें आपदा प्रबंधन में सैन्य बलों की भूमिका को दिया जाने वाला महत्व बढ़ाना और आपदा प्रबंधन में नागरिकों की सहभागिता को शामिल करना शामिल था।
यह फ्लड रेस्क्यू सेमिनार न केवल आपदा प्रबंधन में नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह सैन्य बलों, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और नागरिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का भी एक प्रभावी प्रयास है। इस तरह के प्रशिक्षण और विचार-विमर्श से बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित, संगठित और प्रभावी राहत एवं बचाव अभियान चलाने की क्षमता मजबूत होगी। साथ ही, आधुनिक तकनीक, संसाधनों और अनुभवों के आदान-प्रदान से भविष्य की आपदाओं से निपटने की तैयारियों को भी नई मजबूती मिलेगी।
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