उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ यूनिट ने वाराणसी के हरहुआ रिंग रोड के पास से अमित यादव को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में पहले से मुकदमा दर्ज है।
गिरफ्तार अमित यादव वाराणसी के मैदागिन क्षेत्र का निवासी है। पूछताछ में उसने बताया कि वह हरिश्चंद्र पोस्टग्रेजुएट कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुका है और समाजवादी पार्टी की युवा सभा में राज्य सचिव की जिम्मेदारी भी निभा चुका है।
कैसे जुड़ा नेटवर्क से नाम?
एसटीएफ के अनुसार, कॉलेज के दिनों में उसकी मुलाकात शुभम जायसवाल से हुई थी। जांच में सामने आया है कि शुभम के पिता भोला प्रसाद की कंपनी ‘शैली ट्रेडर्स’ पर एबॉट कंपनी की ‘फेंसेडिल’ कफ सिरप की अवैध सप्लाई और तस्करी का आरोप है। कोडीनयुक्त कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाता है, जिसकी मांग पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक बताई जा रही है।
पुलिस का दावा है कि अधिक मुनाफे के लालच में अमित यादव ने अपनी कंपनी ‘जीएल सर्जिकल’ के नाम से एक लाख से ज्यादा बोतलें खरीदीं। बाद में फर्जी कागजों के जरिए इन्हें दूसरी कंपनी के नाम पर ऊंची कीमत पर बेचा गया।
गंभीर आपराधिक मामले पहले से दर्ज
अधिकारियों के मुताबिक अमित यादव पर दंगा, हत्या के प्रयास और धोखाधड़ी जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस पूरे प्रदेश में कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने विधानसभा में विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सरकार के पास नकली दवाओं या कोडीन सिरप से मौत की कोई ठोस जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि मामले में शामिल कुछ आरोपियों के संबंध समाजवादी पार्टी से जुड़े पाए गए हैं।
सीएम योगी ने दावा किया था कि आरोपी अमित यादव की तस्वीर Akhilesh Yadav के साथ देखी गई है और कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल भी सपा से जुड़ा रहा है।
वहीं, अखिलेश यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष पर आरोप मढ़ रही है और निष्पक्ष जांच नहीं हो रही।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश में कथित तौर पर कफ सिरप के सेवन से 20 बच्चों की मौत के बाद यह मामला सुर्खियों में आया। जांच में खुलासा हुआ कि करीब 57 करोड़ रुपये की 37 लाख से ज्यादा कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें फर्जी दस्तावेजों और लाइसेंस के जरिए बेची गईं। यूपी पुलिस के अनुसार यह पूरा सिंडिकेट करीब 2,000 करोड़ रुपये के अवैध कारोबार से जुड़ा हो सकता है।
18 अक्टूबर को सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज में आबकारी विभाग ने दो संदिग्ध कंटेनरों से 11,967 बोतलें कोडीन कफ सिरप बरामद की थीं। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है। कई जिलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 77 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
सरकार का कहना है कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। वहीं विपक्ष प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे संभव हैं।