मेरठ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत आज मेरठ पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि सामाजिक और खेल जगत के लिए भी खास महत्व रखता है। 20 और 21 फरवरी को आयोजित दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में वे मेरठ और ब्रज प्रांत के प्रबुद्धजनों, खिलाड़ियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे। यह पहली बार है जब संघ खिलाड़ियों के साथ औपचारिक संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
माधव कुंज में भव्य तैयारियां, तीन दिन का प्रवास
मेरठ के शताब्दी नगर स्थित माधव कुंज परिसर में कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। विशाल पंडाल सजाया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यहीं पर दो दिनों तक संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा और मोहन भागवत का रात्रि विश्राम भी इसी परिसर में होगा।
संघ सूत्रों के अनुसार, यह संवाद कार्यक्रम संगठन के सामाजिक विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़ाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मेरठ को कार्यक्रम के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह शहर खेल प्रतिभाओं और खेल उत्पादों के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है। क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक और अन्य खेल सामग्री के निर्माण में मेरठ का योगदान लंबे समय से रहा है।
खिलाड़ियों से संवाद: सामाजिक अनुभवों पर चर्चा
इस संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना, तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार, अर्जुन अवार्ड से सम्मानित पहलवान अलका तोमर सहित कई अन्य प्रमुख खिलाड़ी शामिल होंगे।
संवाद के दौरान खिलाड़ियों से उनके सामाजिक अनुभवों, खेल जीवन की चुनौतियों और समाज में खेल की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि मोहन भागवत स्वयं खिलाड़ियों के प्रश्नों का उत्तर देंगे और उनसे सामाजिक समरसता तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विचार साझा करेंगे।
संघ का मानना है कि खिलाड़ी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। ऐसे में उनके अनुभवों को व्यापक समाज तक पहुंचाना और उन्हें सामाजिक अभियानों से जोड़ना एक सकारात्मक पहल हो सकती है।
खेल विश्वविद्यालय की भूमिका और अध्यक्षता
उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार तेजी से प्रयास कर रही है। मेरठ के सलावा में प्रदेश का पहला राज्य खेल विश्वविद्यालय बन रहा है। इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति रिटायर्ड मेजर जनरल दीप अहलावत हैं।
खिलाड़ियों के साथ आयोजित सत्र की अध्यक्षता दीप अहलावत करेंगे। विश्वविद्यालय में इस वर्ष से पढ़ाई और प्रशिक्षण शुरू करने की तैयारी है। ऐसे में संघ प्रमुख की उपस्थिति को खेल शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व के समन्वय के रूप में भी देखा जा रहा है।
एक दिन पहले CM योगी से मुलाकात
मेरठ पहुंचने से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में मोहन भागवत से मुलाकात की। मुख्यमंत्री स्वयं निरालानगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचे और सरस्वती कुंज में करीब 40 मिनट तक दोनों के बीच बातचीत हुई।
मोहन भागवत इन दिनों उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। गोरखपुर के बाद वे लखनऊ पहुंचे और वहां दो दिनों तक संगठन विस्तार तथा सामाजिक समरसता पर विशेष फोकस किया।
लखनऊ में दिए अहम बयान
लखनऊ प्रवास के दौरान मोहन भागवत ने लखनऊ यूनिवर्सिटी और इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रमों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले मुस्लिम भी इसी भूमि के हैं और उन्हें किसी बाहरी दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सामाजिक समरसता और पारस्परिक सम्मान पर बल दिया।
साथ ही उन्होंने ‘घर वापसी’ पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग हिंदू धर्म में लौटना चाहते हैं, उनके प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर, कुएं और श्मशान जैसे सार्वजनिक स्थान सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए और उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
जनसंख्या दर पर बयान
मोहन भागवत ने हिंदू समाज की घटती जनसंख्या दर पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जनसंख्या दर 2.1 है, जबकि समाज के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए यह कम से कम 3 होनी चाहिए। उन्होंने नवविवाहित दंपतियों से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील की।
उनका तर्क था कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, उनके इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
RSS और भाजपा संबंधों पर स्पष्टता
लखनऊ में ही आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में मोहन भागवत ने यह भी कहा कि RSS भाजपा का ‘रिमोट कंट्रोल’ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के स्वयंसेवक भाजपा में जाते हैं और आगे बढ़ते हैं, लेकिन यह कहना गलत है कि संघ भाजपा को संचालित करता है।
उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा का विरोध करते हैं, वे अक्सर संघ का भी विरोध करते हैं।
अमेरिकी टैरिफ पर टिप्पणी
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बोलते हुए मोहन भागवत ने अमेरिकी टैरिफ नीति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका का पुराना तरीका है कि वह आर्थिक और सामरिक ताकत के आधार पर दबाव बनाने की कोशिश करता है।
उनका कहना था कि भारत इतना मजबूत है कि वह ऐसे दबावों के आगे झुकेगा नहीं और देश की जनता भी आत्मनिर्भरता के लिए तैयार है।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
मोहन भागवत का यह मेरठ दौरा कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां यह संगठन के सामाजिक विस्तार का संकेत देता है, वहीं खेल जगत के साथ संवाद की पहल एक नई रणनीति के रूप में देखी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और ऐसे समय में संघ प्रमुख के लगातार दौरे और मुख्यमंत्री के साथ बैठकें राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।