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3 लाख करोड़ का सफाया: सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक टूटा, निफ्टी 1% गिरा — अब किन स्तरों पर रहेगी बाजार की नजर?

भारतीय शेयर बाजार में आज भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिसके चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹3 लाख करोड़ की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। बाजार की इस तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया और आने वाले दिनों के लिए कई अहम तकनीकी स्तरों पर नजरें टिक गई हैं।

बाजार की शुरुआत से ही दबाव

कारोबार की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई। वैश्विक संकेतों में कमजोरी और एशियाई बाजारों में सुस्ती का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में ही बिकवाली हावी हो गई, जिससे प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे फिसलने लगे। दिन भर बाजार रिकवरी की कोशिश करता रहा, लेकिन ऊपरी स्तरों पर लगातार बिकवाली के चलते मजबूती कायम नहीं रह सकी।

किन कारणों से आई इतनी बड़ी गिरावट?

विश्लेषकों के मुताबिक बाजार में आई इस तेज गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे:

  1. वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत – अमेरिकी बाजारों में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
  2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली – विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजारों से लगातार पूंजी निकाली, जिससे दबाव और बढ़ गया।
  3. मुनाफावसूली – हालिया तेजी के बाद कई निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली की।
  4. आईटी और बैंकिंग शेयरों में गिरावट – बड़े वेटेज वाले सेक्टरों में बिकवाली से सूचकांकों पर ज्यादा असर पड़ा।

सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

बीएसई सेंसेक्स दिन के दौरान 1000 अंकों से ज्यादा टूट गया और अंत में भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी भी लगभग 1% फिसलकर महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के पास पहुंच गया।

निफ्टी के लिए 22,000-21,900 का स्तर अहम सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो अगला मजबूत सपोर्ट 21,700 के आसपास माना जा रहा है। वहीं ऊपर की ओर 22,300-22,400 का स्तर अब रेजिस्टेंस बन सकता है।

सेक्टरवार प्रदर्शन

  • आईटी सेक्टर: डॉलर की मजबूती और वैश्विक मांग को लेकर चिंता के चलते आईटी शेयरों में दबाव रहा।
  • बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं: बड़े निजी बैंकों में बिकवाली से बैंक निफ्टी भी नीचे आया।
  • ऑटो और मेटल: वैश्विक मांग और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर दिखा।
  • एफएमसीजी: रक्षात्मक सेक्टर होने के कारण अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई।

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