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ईरान युद्ध और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,097 अंक टूटा, निवेशकों के ₹13 लाख करोड़ डूबे

भारत के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद

6 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 1,097 अंक टूटकर 78,918.90 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी-50 करीब 315 अंक गिरकर 24,450.45 पर आ गया। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के कारण देखी गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित तेल पर निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है।


चार दिनों में निवेशकों को भारी नुकसान

पिछले चार कारोबारी सत्रों में बाजार में लगातार बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट आई। रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ चार दिनों में निवेशकों की संपत्ति लगभग 13.46 लाख करोड़ घट गई। कुल बाजार पूंजीकरण करीब 463.25 लाख करोड़ से गिरकर 449.79 लाख करोड़ रह गया।

यह गिरावट इस बात का संकेत है कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।


युद्ध का असर: तेल, मुद्रा और बाजार पर दबाव

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं है।

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
  • डॉलर मजबूत होना
  • उभरते बाजारों से विदेशी निवेश की निकासी

इन सभी कारणों से भारतीय वित्तीय बाजार दबाव में हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस तनाव के कारण तेल की कीमतों में 2026 में अब तक लगभग 16% की वृद्धि हो चुकी है।

तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत के आयात बिल और महंगाई पर पड़ता है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ जाती है।


RBI को भी करनी पड़ी दखलअंदाजी

बाजार और मुद्रा पर बढ़ते दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।

रिपोर्ट के अनुसार, रुपये को स्थिर रखने के लिए आरबीआई ने लगभग 12 अरब डॉलर तक बाजार में हस्तक्षेप किया

युद्ध के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से धन निकालना शुरू किया, जिससे रुपये में गिरावट आई। आरबीआई ने डॉलर बेचकर और विभिन्न वित्तीय उपकरणों के जरिए रुपये को संभालने की कोशिश की।


किन सेक्टरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर

इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर कुछ खास सेक्टरों पर पड़ा:

1. बैंकिंग और वित्तीय शेयर

बैंकिंग सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई।
एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

2. तेल विपणन कंपनियां (OMCs)

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे रिफाइनिंग मार्जिन और LPG सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है

3. निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर

लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखा गया क्योंकि इनकी कई परियोजनाएं पश्चिम एशिया से जुड़ी हैं।


किन सेक्टरों को मिला फायदा

हालांकि बाजार में गिरावट रही, लेकिन कुछ सेक्टरों ने मजबूती भी दिखाई।

1. रक्षा क्षेत्र (Defence Stocks)

ईरान-इज़राइल संघर्ष के कारण रक्षा कंपनियों के शेयरों में तेजी आई।
रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों में निवेश बढ़ता देखा गया।

2. अपस्ट्रीम तेल कंपनियां

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों को फायदा हो सकता है।


वैश्विक बाजारों का भी पड़ा असर

भारतीय बाजार की कमजोरी का कारण सिर्फ घरेलू परिस्थितियां नहीं हैं।

  • अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए
  • एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही
  • निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़े

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ गई है।


क्या आगे भी गिर सकता है बाजार?

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है तो बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि:

  • तेल की कीमतें बढ़ती रहीं तो महंगाई बढ़ेगी
  • विदेशी निवेश कम हो सकता है
  • बाजार में अल्पकालिक दबाव बना रहेगा

हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध से जुड़े बाजार गिरावट अक्सर अस्थायी होती हैं और बाद में बाजार में तेजी लौट सकती है


आने वाले दिनों में इन शेयरों पर नजर

मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में कुछ शेयरों पर विशेष नजर रखी जाएगी:

  • ONGC
  • Oil India
  • Indian Oil
  • GAIL
  • Mazagon Dock
  • GRSE

इन कंपनियों के शेयर वैश्विक ऊर्जा बाजार और रक्षा क्षेत्र की मांग से प्रभावित हो सकते हैं।

Stock Market Today: सेंसेक्स 900 अंक उछला, निफ्टी 24,750 के पार; मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारतीय बाजार में जोरदार रिकवरी

भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को शानदार वापसी करते हुए निवेशकों को बड़ी राहत दी। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट के बाद बाजार में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों तेजी के साथ बंद हुए।

दिन के कारोबार के अंत में BSE Sensex लगभग 900 अंकों की तेजी के साथ 80,000 के करीब बंद हुआ, जबकि Nifty 50 करीब 285 अंकों की बढ़त के साथ 24,750 के ऊपर पहुंच गया। इस उछाल के साथ ही निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, गिरावट के बाद सस्ती वैल्यूएशन और कई सेक्टरों में मजबूत खरीदारी ने बाजार की तेजी को गति दी।

लगातार गिरावट के बाद बाजार में वापसी

पिछले चार दिनों से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दौर चल रहा था। इसके पीछे मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव था। खासकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को दबाव में रखा था।

हालांकि गुरुवार को बाजार ने इस नकारात्मक माहौल से बाहर निकलते हुए जोरदार रिकवरी दिखाई। कई बड़े निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने गिरावट का फायदा उठाते हुए बाजार में खरीदारी की।

इससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांक तेजी के साथ ऊपर चढ़ गए और बाजार में सकारात्मक माहौल बन गया।

किन सेक्टरों ने बाजार को दिया सहारा

आज के कारोबार में कई सेक्टरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। खासकर बैंकिंग, मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑयल-एंड-गैस सेक्टर के शेयरों में तेजी रही।

1. बैंकिंग सेक्टर

बैंकिंग शेयरों ने बाजार की तेजी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई प्रमुख बैंकों के शेयरों में 2% से 4% तक की तेजी दर्ज की गई।

बैंकिंग सेक्टर में निवेशकों का भरोसा बढ़ने का कारण मजबूत आर्थिक संकेत और बेहतर लोन ग्रोथ की उम्मीद है।

2. मेटल सेक्टर

मेटल कंपनियों के शेयरों में भी शानदार उछाल देखने को मिला। वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में तेजी के कारण इस सेक्टर में खरीदारी बढ़ी।

एल्यूमिनियम और स्टील कंपनियों के शेयरों में 3% से 6% तक की तेजी देखी गई।

3. इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स

सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और निवेश बढ़ने की उम्मीद के चलते इंफ्रा सेक्टर में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।

इससे कई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी तेजी

आज के कारोबार में केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

कई मिड-कैप कंपनियों के शेयरों में 3% से 5% तक की तेजी देखी गई। इससे बाजार की चौड़ाई सकारात्मक रही।

यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही है।

इन दिग्गज कंपनियों के शेयरों में आई तेजी

आज के कारोबार में कई ब्लू-चिप कंपनियों के शेयरों ने बाजार को मजबूती दी।

तेजी वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे:

  • Reliance Industries
  • Larsen & Toubro
  • Adani Ports
  • Hindalco
  • Tata Steel

इन कंपनियों के शेयरों में 2% से 4% तक की तेजी देखी गई, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी को मजबूती मिली।

निवेशकों की संपत्ति में भारी बढ़ोतरी

शेयर बाजार में आई तेजी का सीधा फायदा निवेशकों को हुआ।

BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक ही दिन में कई लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। इससे निवेशकों की कुल संपत्ति में भी बड़ा इजाफा हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में जब बड़े पैमाने पर खरीदारी होती है तो उसका असर पूरे बाजार की वैल्यूएशन पर दिखाई देता है।

वैश्विक बाजारों का असर

भारतीय शेयर बाजार पर हमेशा वैश्विक बाजारों का प्रभाव पड़ता है।

हाल के दिनों में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया था। इस कारण तेल की कीमतें बढ़ीं और निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बना।

लेकिन गुरुवार को एशियाई बाजारों में कुछ स्थिरता देखने को मिली, जिससे भारतीय बाजार को भी समर्थन मिला।

कच्चे तेल की कीमतें अभी भी चिंता का विषय

हालांकि बाजार में तेजी आई, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव पैदा कर सकती है।

यदि तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो इससे महंगाई और चालू खाता घाटा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

विदेशी निवेशकों की भूमिका

भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बड़ी भूमिका होती है।

हाल के दिनों में एफआईआई ने भारतीय बाजार से कुछ पूंजी निकाली थी, जिससे बाजार पर दबाव बना था। लेकिन गुरुवार को घरेलू निवेशकों और म्यूचुअल फंड्स की खरीदारी ने बाजार को संभाल लिया।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि एफआईआई फिर से भारतीय बाजार में निवेश बढ़ाते हैं तो बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है।

Rajya Sabha Elections : कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए 6 उम्मीदवार घोषित किए, सिंहवी और नेताम को फिर मौका

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी ने कुल छह नेताओं को अलग-अलग राज्यों से राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। इस सूची में वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी और आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को दोबारा मौका दिया गया है। इसके अलावा तेलंगाना, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु से नए नाम भी शामिल किए गए हैं।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब 16 मार्च 2026 को राज्यसभा की कई सीटों के लिए चुनाव होने वाले हैं। इन चुनावों में कई वरिष्ठ सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और राजनीतिक दल अपनी रणनीति के अनुसार नए उम्मीदवार मैदान में उतार रहे हैं।

कांग्रेस की ओर से जारी सूची से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पार्टी अनुभवी नेताओं और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन कर रही है।

राज्यसभा चुनाव: क्यों अहम है यह सूची

भारत की संसद के उच्च सदन राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य चुनते हैं। हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं।

2026 में भी इसी प्रक्रिया के तहत कई राज्यों में चुनाव हो रहे हैं। इस बार करीब 37 सीटों पर मतदान होना है, जिनमें से कई सीटें कांग्रेस और अन्य दलों के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

राज्यसभा में संख्या बल किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यही सदन कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

कांग्रेस की उम्मीदवारों की सूची

कांग्रेस ने जिन छह नेताओं को उम्मीदवार बनाया है, उनमें कई अनुभवी और कुछ नए चेहरे शामिल हैं।

1. अभिषेक मनु सिंहवी – तेलंगाना

वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता रहे अभिषेक मनु सिंहवी को फिर से राज्यसभा भेजने का फैसला किया गया है। उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था और पार्टी ने उनकी संसदीय और कानूनी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें दोबारा मौका दिया है।

सिंहवी कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली बौद्धिक चेहरों में गिने जाते हैं। वे कई संवैधानिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट में पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं और संसद में भी पार्टी की आवाज बुलंद करते रहे हैं।

उनका राज्यसभा में यह पाँचवां कार्यकाल हो सकता है।

2. वेम नरेंद्र रेड्डी – तेलंगाना

कांग्रेस ने तेलंगाना से दूसरी सीट के लिए वेम नरेंद्र रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है। वे राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चयन तेलंगाना में कांग्रेस सरकार की मजबूती और क्षेत्रीय नेतृत्व को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

3. फूलो देवी नेताम – छत्तीसगढ़

कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ से आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को फिर से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। नेताम वर्तमान में भी राज्यसभा सदस्य हैं और पार्टी ने उनके अनुभव और जनाधार को देखते हुए उन्हें दोबारा मौका दिया है।

फूलो देवी नेताम छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय की मजबूत आवाज मानी जाती हैं। उनके पुनर्नामांकन को सामाजिक संतुलन और आदिवासी प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय माना जा रहा है।

4. करमवीर सिंह बौद्ध – हरियाणा

हरियाणा से कांग्रेस ने करमवीर सिंह बौद्ध को उम्मीदवार बनाया है। यह नाम राज्य की सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर तय किया गया माना जा रहा है।

हरियाणा में राज्यसभा की सीटों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है।

5. अनुराग शर्मा – हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस ने अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण पार्टी इस सीट को जीतने की स्थिति में मानी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस नाम के जरिए पार्टी संगठन और राज्य नेतृत्व को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।

6. एम. क्रिस्टोफर तिलक – तमिलनाडु

तमिलनाडु से कांग्रेस ने एम. क्रिस्टोफर तिलक को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। राज्य में कांग्रेस, द्रमुक के साथ गठबंधन में है और गठबंधन की सीट बंटवारे की रणनीति के तहत यह सीट कांग्रेस के हिस्से में आई है।

पार्टी नेतृत्व की बैठक के बाद हुआ फैसला

सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवारों के चयन को लेकर कांग्रेस नेतृत्व के बीच कई दौर की चर्चा हुई। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और कई वरिष्ठ नेताओं ने राज्यों से आए प्रस्तावों पर विचार किया।

तेलंगाना में तो लगभग 16 से ज्यादा नेताओं के नाम चर्चा में थे, लेकिन अंततः अनुभव और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए अंतिम सूची तय की गई।

तेलंगाना पर कांग्रेस का खास फोकस

कांग्रेस के लिए तेलंगाना इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। राज्य में हाल ही में कांग्रेस सरकार बनने के बाद पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहती है।

राज्य विधानसभा में कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या है, इसलिए पार्टी दोनों सीटें जीतने का दावा कर रही है।

यदि दोनों उम्मीदवार जीतते हैं तो राज्यसभा में तेलंगाना से कांग्रेस की संख्या और बढ़ सकती है, जिससे पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति मजबूत होगी।

आदिवासी और सामाजिक संतुलन की रणनीति

कांग्रेस की इस सूची में सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखा गया है।

  • फूलो देवी नेताम के जरिए आदिवासी समुदाय
  • करमवीर सिंह बौद्ध के जरिए सामाजिक संतुलन
  • विभिन्न राज्यों से क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है।

राज्यसभा चुनाव का पूरा परिदृश्य

2026 के राज्यसभा चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण हैं। इस बार देश के विभिन्न राज्यों की कुल 37 सीटों के लिए चुनाव होने हैं।

इन चुनावों के परिणाम से संसद के उच्च सदन में राजनीतिक दलों का शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।

राज्यसभा का कार्यकाल छह साल का होता है और हर दो साल में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

भाजपा और अन्य दलों की रणनीति

जहां कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, वहीं भाजपा और अन्य दल भी अपनी सूची जारी कर रहे हैं।

कई राज्यों में मुकाबला सीधे भाजपा और कांग्रेस के बीच देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यसभा के चुनाव अक्सर विधानसभा की संख्या पर निर्भर करते हैं, इसलिए जिन राज्यों में किसी दल की सरकार है, वहां उस दल की जीत की संभावना ज्यादा रहती है।

कांग्रेस के लिए क्या मायने रखता है यह चुनाव

राज्यसभा में कांग्रेस की संख्या पिछले कुछ वर्षों में कम हुई है। ऐसे में यह चुनाव पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

यदि कांग्रेस इन सीटों में से अधिकांश जीतने में सफल रहती है तो संसद के उच्च सदन में उसकी ताकत बढ़ सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राज्यसभा में मजबूत उपस्थिति होने से विपक्षी दलों को सरकार के विधेयकों पर प्रभाव डालने का मौका मिलता है।

बिहार में आग उगलने लगा सूरज, 5 जिलों में बारिश और बिजली गिरने का येलो अलर्ट जारी

बिहार में मार्च के महीने में होली की हल्की गुलाबी ठंड का अहसास होता था, लेकिन इस बार फरवरी बीतते ही सूरज आग उगलने लगा है। राज्य के कई हिस्सों में पारा 33 डिग्री के पार जा चुका है और दोपहर की धूप अब बदन झुलसाने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ेगा, लेकिन 10 मार्च को सुपौल, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार में हल्की बारिश, तेज हवा और बिजली गिरने की संभावना है।

राज्य में दिन के समय धूप की तीखी तपिश लोगों को परेशान करने लगी है। कई जिलों में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। बीते 24 घंटों में बांका में सबसे ज्यादा 33.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया, जबकि पटना, गया और मुजफ्फरपुर समेत कई शहरों में दोपहर के समय गर्मी साफ महसूस की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में अभी भी सुबह और देर रात हल्की ठंडक बनी हुई है।

मौसम विभाग ने 10 मार्च को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। बिहार के सीमांचल और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में मौसम पलटी मारेगा। सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी आशंका है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम के इस बदलाव को देखते हुए सतर्क रहें।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटों में राज्य के अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, न्यूनतम तापमान में भी 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की संभावना है। एक सप्ताह के भीतर कई जिलों में तापमान 35 से 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस साल का वेदर पैटर्न बेहद पेचीदा नजर आ रहा है। ला-नीना के कमजोर पड़ने और हिंद महासागर की तटस्थ स्थिति के कारण 2026 में मानसून का गणित बिगड़ सकता है। आशंका जताई जा रही है कि उत्तर बिहार जहां बाढ़ की चपेट में आ सकता है, वहीं दक्षिण बिहार को सूखे का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में जल संकट गहराने की भी चेतावनी दी गई है।

Historic Turn in Bihar Politics: Nitish Kumar राज्यसभा की ओर, भाजपा के पहले मुख्यमंत्री की राह साफ; Amit Shah की पटना यात्रा से सियासी हलचल तेज

सत्ता परिवर्तन की आहट : बिहार की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। लंबे समय से राज्य की सत्ता की धुरी रहे मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की तैयारी की खबरों ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। यदि यह कदम औपचारिक रूप लेता है, तो राज्य में नेतृत्व परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah का पटना दौरा इस पूरे घटनाक्रम को और भी महत्वपूर्ण बना रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह केवल एक नामांकन कार्यक्रम नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव की भूमिका भी हो सकता है।

राज्यसभा नामांकन: क्या है पूरा घटनाक्रम?

बिहार में राज्यसभा की रिक्त सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से जिन नामों की चर्चा हो रही है, उनमें सबसे प्रमुख नाम मुख्यमंत्री Nitish Kumar का है।

बताया जा रहा है कि वे पटना में नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin भी नामांकन भर सकते हैं।

केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी इस कार्यक्रम को प्रतीकात्मक से अधिक रणनीतिक बना रही है। गृह मंत्री Amit Shah की उपस्थिति से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी इस बदलाव को गंभीरता से ले रही है।

क्या मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे?

संविधान के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति राज्यसभा का सदस्य बनता है तो वह मुख्यमंत्री पद पर बने नहीं रह सकता, जब तक कि वह राज्य विधानसभा का सदस्य न हो। ऐसे में यदि Nitish Kumar राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते हैं, तो उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।

यही वह बिंदु है जिसने पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को संवेदनशील बना दिया है। पिछले दो दशकों से अधिक समय तक बिहार की राजनीति का चेहरा रहे नेता का राज्य की सक्रिय राजनीति से हटना एक युगांतकारी बदलाव माना जाएगा।

भाजपा के पहले मुख्यमंत्री की संभावना

पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि गठबंधन धर्म के तहत मुख्यमंत्री पद जदयू के पास रहा, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती दिख रही हैं।

यदि Nitish Kumar राज्यसभा चले जाते हैं, तो भाजपा को पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल सकता है। यह पार्टी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।

संभावित नामों में कई वरिष्ठ नेताओं की चर्चा है। उपमुख्यमंत्री स्तर के नेताओं से लेकर केंद्रीय मंत्रियों तक कई चेहरे रेस में बताए जा रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।

जदयू के भीतर हलचल

जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर इस संभावित बदलाव को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया है। कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं का मानना है कि राज्य की राजनीति में Nitish Kumar की भूमिका अभी भी आवश्यक है।

वहीं कुछ का तर्क है कि राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका और प्रभाव बढ़ाने के लिए राज्यसभा जाना रणनीतिक कदम हो सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्वयं लेंगे।

विपक्ष का हमला

मुख्य विपक्षी दल Rashtriya Janata Dal ने इस पूरे घटनाक्रम को सत्ता के भीतर की रणनीतिक चाल करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि यह बदलाव जनता के जनादेश के अनुरूप नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरणों का परिणाम है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री बदलते हैं तो सरकार को नए सिरे से जनता का विश्वास प्राप्त करना चाहिए।

सत्ता हस्तांतरण की तैयारी?

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नामांकन और परिणाम की औपचारिकताओं के बाद सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

संभावना जताई जा रही है कि राज्यसभा चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया जा सकता है और फिर नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।

इस बीच भाजपा विधायक दल की बैठक, केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और नए नेता के चयन की प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।

क्या नई पीढ़ी को मिलेगा मौका?

चर्चाओं में यह भी सामने आया है कि मुख्यमंत्री के परिवार से भी किसी सदस्य की सक्रिय राजनीति में एंट्री हो सकती है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि आने वाले समय में नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है

राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका

यदि Nitish Kumar राज्यसभा जाते हैं, तो वे राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। वे पहले भी केंद्र में मंत्री रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव व्यापक है।

राज्यसभा के माध्यम से वे नीति निर्माण, संसदीय बहस और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

रास तनूरा रिफाइनरी पर फिर ड्रोन हमला: सऊदी अरामको के सबसे बड़े तेल संयंत्र को निशाना, वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता

सऊदी अरब की ऊर्जा सुरक्षा को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। देश की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco के सबसे बड़े घरेलू रिफाइनरी परिसर रास तनूरा पर मंगलवार को ड्रोन हमला किया गया। इस घटना की पुष्टि Saudi Ministry of Defence के एक प्रवक्ता ने की। उन्होंने बताया कि ड्रोन को लक्ष्य बनाकर भेजा गया था, लेकिन सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया।

रास तनूरा सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित है और यह न केवल देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी है, बल्कि दुनिया के प्रमुख तेल निर्यात केंद्रों में से एक भी है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे में इस तरह का हमला केवल सऊदी अरब ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

रणनीतिक महत्व का केंद्र

रास तनूरा रिफाइनरी सऊदी अरामको की सबसे अहम परिसंपत्तियों में गिनी जाती है। इसकी रिफाइनिंग क्षमता प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चे तेल को संसाधित करने की है। यह परिसर अरब खाड़ी के तट पर स्थित है, जिससे यहां से तेल टैंकर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचते हैं। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े एशियाई देश सऊदी तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के हमलों से उत्पादन या निर्यात में बाधा आती है, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। पहले भी जब सऊदी तेल संयंत्रों पर हमले हुए हैं, तब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।

नुकसान का आकलन जारी

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन को इंटरसेप्ट कर लिया गया था और सुरक्षा बलों ने तत्काल कार्रवाई की। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि हमले से किसी प्रकार का भौतिक नुकसान हुआ या नहीं। साथ ही, यह भी जानकारी नहीं दी गई है कि तेल उत्पादन या निर्यात पर कोई असर पड़ा है या नहीं।

आपातकालीन टीमों को तुरंत घटनास्थल पर भेजा गया और सुरक्षा मानकों के तहत पूरे क्षेत्र की जांच की जा रही है। मंत्रालय ने कहा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और ऊर्जा आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान की आशंका नहीं है।

बढ़ते क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब की तेल अवसंरचना पर कई बार ड्रोन और मिसाइल हमले हो चुके हैं। इन हमलों ने यह दिखाया है कि आधुनिक ड्रोन तकनीक किस तरह रणनीतिक ठिकानों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। खाड़ी क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच ऊर्जा संयंत्र अक्सर निशाने पर रहे हैं।

रास तनूरा पर दोबारा हमला यह संकेत देता है कि क्षेत्र में अस्थिरता अभी भी बनी हुई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमले वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की संवेदनशीलता को उजागर करते हैं।

वैश्विक बाजार की नजर

दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश के रूप में सऊदी अरब की स्थिरता अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए बेहद अहम है। इस घटना के बाद कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क दामों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशक और व्यापारी अब सऊदी अरामको की ओर से आने वाले आधिकारिक अपडेट का इंतजार कर रहे हैं।

यदि उत्पादन प्रभावित होता है, तो ओपेक प्लस (OPEC+) देशों की भविष्य की उत्पादन रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि देश की ऊर्जा अवसंरचना पूरी तरह सुरक्षित है और आपूर्ति सामान्य रूप से जारी रहेगी।

US–Israel–Iran War वैश्विक तेल आपूर्ति पर संकट: भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, व्यापार, बाजारों और महंगाई पर बढ़ता दबाव और सरकार की तैयारी का पूरा विश्लेषण

पश्चिम एशिया में तेज़ी से बिगड़ते हालात ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर गंभीर आशंकाएँ पैदा कर दी हैं। इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है, और तेल आयात पर अत्यधिक निर्भर भारत के लिए यह स्थिति आर्थिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।

तेल की कीमतों में उछाल, समुद्री मार्गों पर खतरा, बीमा लागत में वृद्धि और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता — इन सबने भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा, महंगाई और व्यापार घाटे की नई चिंताएँ खड़ी कर दी हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह युद्ध भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित कर सकता है और सरकार किन कदमों पर विचार कर रही है।

पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक तेल बाजार पर असर

पश्चिम एशिया दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है। यदि यहां संघर्ष बढ़ता है, तो तेल की आपूर्ति बाधित होना तय है। हाल के सैन्य हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण बाजार में यह डर बढ़ गया है कि कहीं प्रमुख तेल निर्यात मार्ग प्रभावित न हो जाएं।

विशेष रूप से Strait of Hormuz को लेकर चिंता सबसे अधिक है। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। यदि यहां किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है।

तेल की कीमतों में पहले ही तेज़ उछाल देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा चला तो कीमतें 90-100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं।

भारत की तेल निर्भरता: क्यों बढ़ रही है चिंता?

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85-90% आयात करता है। इसमें से बड़ी मात्रा पश्चिम एशियाई देशों से आती है। खास बात यह है कि इन देशों से आने वाला अधिकांश तेल Strait of Hormuz से होकर गुजरता है।

इसका सीधा मतलब है कि यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर तात्कालिक प्रभाव पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत के आयात बिल में लगभग 2 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
  • इससे चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) बढ़ सकता है।
  • रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकता है।
  • महंगाई दर में उछाल आ सकता है।

महंगाई पर असर: आम जनता की जेब पर सीधा प्रहार

तेल सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं है। यह परिवहन, उर्वरक, बिजली उत्पादन और पेट्रोकेमिकल उद्योगों का आधार है। यदि तेल महंगा होता है, तो:

  • परिवहन लागत बढ़ेगी
  • खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी
  • उर्वरक महंगे होंगे
  • विमानन ईंधन की लागत बढ़ेगी

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पिछले कुछ वर्षों से स्थिर रखी गई हैं। लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो सरकार और तेल कंपनियों के लिए इन कीमतों को नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है।

भारतीय बाजारों में हलचल

तेल कीमतों में तेजी का असर शेयर बाजार और बॉन्ड बाजार पर भी दिखाई देने लगा है।

  • निवेशकों में घबराहट
  • विदेशी निवेशकों की बिकवाली
  • बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
  • सुरक्षित निवेश (जैसे सोना) की ओर झुकाव

रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है क्योंकि अधिक आयात बिल के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत होगी।

सरकार की रणनीति: संकट से निपटने की तैयारी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार और तेल कंपनियां कई विकल्पों पर विचार कर रही हैं।

1. ईंधन निर्यात पर रोक या कटौती

भारत रिफाइंड पेट्रोल और डीजल का निर्यात भी करता है। आवश्यकता पड़ने पर निर्यात घटाकर घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है।

2. रणनीतिक भंडार का उपयोग

भारत के पास लगभग 17-18 दिनों की कच्चे तेल की रणनीतिक भंडारण क्षमता है। यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो इन भंडारों का उपयोग किया जा सकता है।

3. वैकल्पिक स्रोतों की तलाश

भारत पहले भी रूस सहित अन्य देशों से तेल आयात बढ़ा चुका है। आवश्यकता पड़ने पर सप्लाई स्रोतों का और विविधीकरण किया जा सकता है।

4. एलपीजी और गैस की आपूर्ति प्रबंधन

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए औद्योगिक उपयोग पर नियंत्रण की नीति अपनाई जा सकती है।

कृषि और उद्योग पर संभावित प्रभाव

तेल कीमतों में वृद्धि से उर्वरक उत्पादन महंगा होगा। इससे किसानों की लागत बढ़ सकती है। यदि सरकार सब्सिडी बढ़ाती है तो राजकोषीय दबाव भी बढ़ेगा।

उद्योगों के लिए:

  • कच्चे माल की लागत बढ़ेगी
  • उत्पादन महंगा होगा
  • निर्यात प्रतिस्पर्धा घट सकती है

क्या लंबा चलेगा संकट?

विश्लेषकों की राय बंटी हुई है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव सीमित समय का हो सकता है और बाजार जल्द स्थिर हो जाएंगे। वहीं अन्य का मानना है कि यदि समुद्री मार्गों पर वास्तविक अवरोध पैदा होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में 2022 जैसा ऊर्जा संकट दोबारा देखने को मिल सकता है।

दीर्घकालिक समाधान: ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

यह संकट भारत के लिए एक चेतावनी भी है। भविष्य में ऐसे झटकों से बचने के लिए:

  • नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) पर निवेश बढ़ाना
  • इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना
  • जैव ईंधन का विस्तार
  • रणनीतिक भंडार क्षमता बढ़ाना
  • ऊर्जा स्रोतों का और अधिक विविधीकरण

भारत पहले से ही हरित ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन मौजूदा संकट ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता को और अधिक रेखांकित करता है।

बिहार में होली और रमजान के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद, 30 हजार पुलिसकर्मी तैनात

बिहार में होली और रमजान एक साथ पड़ने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। प्रशासन ने किसी भी तरह की चूक नहीं करने का फैसला किया है, और इसके लिए शीर्ष स्तर पर तैयारी की गई है। मुख्य सचिव और डीजीपी विनय कुमार ने संयुक्त बैठक की, जिसमें सभी जिलों के डीएम और एसपी को स्पष्ट निर्देश दिए गए। संवेदनशील और अति-संवेदनशील इलाकों की पहचान कर ली गई है और वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जा रहा है।

राज्यभर में 30 हजार से अधिक अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिनमें दंगा निरोधी दल और क्विक रिस्पॉन्स टीम शामिल हैं। जिलों में फ्लैग मार्च शुरू हो चुका है और शांति समिति की बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य भाईचारा और सौहार्द बनाए रखना है।

डीजीपी ने बताया कि शांति भंग करने की आशंका वाले लोगों पर निवारक कार्रवाई की जा रही है। अब तक लगभग 13 हजार असामाजिक तत्वों से बॉन्ड भरवाया गया है, और 30 हजार से ज्यादा लोगों के खिलाफ एसडीओ कोर्ट में कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने साफ कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी और हिंसा की स्थिति में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीण इलाकों में मुखिया, सरपंच और वार्ड सदस्यों से सहयोग मांगा गया है और अफवाह या तनाव की सूचना तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है। सोशल मीडिया पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है, और साइबर सेल भड़काऊ पोस्ट और अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखेगा। प्रशासन का कहना है कि शांति और सौहार्द सर्वोच्च प्राथमिकता है, और पुलिस हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Bihar News Today Live 27 February 2026: बिहार की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, मौसम, शिक्षा और क्राइम की ताज़ा अपडेट

27 फरवरी 2026 के लिए बिहार ब्रेकिंग न्यूज़ और मुख्य ताजा घटनाओं का लाइव अपडेट है 👇

  • 📌 केंद्रीय मंत्री का आह्वान: कृषि मंत्री राम नाथ ठाकुर ने बिहार में मखाना अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिकों से काम करने का आह्वान किया है, जिससे कृषि विकास को नई दिशा मिलेगी।
  • 📊 CAG रिपोर्ट में खामियाँ: कैग ने बिहार में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना के कार्यान्वयन में कमियों का हवाला दिया है, जिसमें लाभार्थियों तक जागरूकता और सेवाओं के वितरण में असंतुलन दिखा।
  • 📈 ‘Destination Bihar 2026’ एक्सपो शुरू: पटना में निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन का औद्योगिक एक्सपो शुरू हुआ, जिसमें स्थानीय उत्पादन और रोजगार के अवसरों को प्रदर्शित किया जा रहा है।
  • 🏙️ पाँव की राहें सुदृढ़ करने का अभियान: बिहार सरकार ने राज्यव्यापी फुटपाथ अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाने का आदेश जारी किया है, ताकि पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते सुनिश्चित हो सकें।
  • 🚓 दारू तस्करी में गिरफ्तारियाँ: उत्तर प्रदेश के बल्लिया जिले में 3 तस्करों को बिहार के लिए शराब तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया गया और 471 बॉक्स शराब जब्त हुई।
  • 📜 बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन आज 27 फरवरी से शुरू हो गया है। सुरक्षा व्यवस्था के साथ कई केंद्रों पर जांच कार्य जारी है, और परिणाम मार्च मध्य से अंतिम सप्ताह तक जारी होने की संभावना जताई जा रही है।
  • 🌤️ आज उत्तर भारत, विशेषकर यूपी–बिहार क्षेत्र में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहेगा, हालांकि कुछ राज्यों में बारिश / अलर्ट जारी है। तापमान में वृद्धि जारी रहने के संकेत हैं।
  • 🗳️ राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। महागठबंधन व एनडीए के शीर्ष नेताओं की बैठकों का दौर जारी है, जिसके बाद उम्मीदवारों के नामों का ऐलान होने के संकेत हैं।

बिहार के जिलावार मुख्य ताज़ा समाचार | 27 फरवरी 2026

📍 पटना

राजधानी पटना में ‘डेस्टिनेशन बिहार 2026’ इंडस्ट्रियल एक्सपो का शुभारंभ हुआ, जिसमें राज्य में निवेश आकर्षित करने और युवाओं को रोजगार देने पर जोर दिया गया। वहीं, नगर निगम ने अतिक्रमण हटाओ अभियान तेज करते हुए मुख्य सड़कों और फुटपाथों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की है। राजनीतिक हलकों में राज्यसभा चुनाव को लेकर बैठकों का दौर जारी है।

📍 गया

गया जिले में पुलिस ने अवैध बालू खनन के खिलाफ विशेष अभियान चलाया, जिसमें कई ट्रैक्टर और ट्रकों को जब्त किया गया। बोधगया क्षेत्र में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जिला प्रशासन ने आगामी पर्व-त्योहारों को लेकर शांति समिति की बैठक भी की।

📍 भागलपुर

भागलपुर में गंगा नदी के जलस्तर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है। सिल्क उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जिला उद्योग विभाग ने विशेष कार्यशाला आयोजित की। वहीं, अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस ने रात में सघन वाहन जांच अभियान चलाया।

📍 मुज़फ़्फ़रपुर

मुज़फ़्फ़रपुर में लीची किसानों के लिए कृषि विभाग ने प्रशिक्षण शिविर लगाया, जिसमें फसल सुरक्षा और उत्पादन बढ़ाने के उपाय बताए गए। शहर में सड़क मरम्मत कार्य तेज कर दिया गया है। साथ ही, उत्पाद विभाग ने शराबबंदी कानून के तहत कई जगह छापेमारी की।

📍 दरभंगा

दरभंगा में भूमि विवाद को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात किया है। विश्वविद्यालय में परीक्षा मूल्यांकन कार्य शुरू हो गया है। नगर परिषद ने स्वच्छता अभियान चलाकर बाजार क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया है।

📍 पूर्णिया

पूर्णिया में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क सुरक्षा अभियान चलाया गया, जिसमें हेलमेट और सीट बेल्ट जांच की गई। कृषि विभाग ने मक्का किसानों को अनुदान योजना की जानकारी दी। सीमावर्ती इलाकों में एसएसबी द्वारा गश्त बढ़ाई गई है।

📍 आरा

आरा में बिजली आपूर्ति में सुधार को लेकर विभाग ने नई लाइन बिछाने का काम शुरू किया है। पुलिस ने एक बड़ी चोरी की घटना का खुलासा करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। ग्रामीण क्षेत्रों में जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत पौधारोपण अभियान की तैयारी की जा रही है।

📍 छपरा

छपरा में गंडक नदी के तटबंधों का निरीक्षण किया गया। जिला प्रशासन ने बाढ़ पूर्व तैयारी की समीक्षा बैठक की। वहीं, रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त काउंटर खोले गए हैं।

कानपुर के PSIT कॉलेज में छात्रों का हंगामा: लाठीचार्ज में कई घायल, कॉलेज 8 मार्च तक बंद

कानपुर के पनकी स्थित प्रोडेशन्स इंजीनियरिंग कॉलेज (PSIT) में बुधवार को छात्रों ने हंगामा किया, जिसमें कॉलेज की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। यह हंगामा सोमवार को कॉलेज कैंपस में एक छात्र की जेसीबी से टकराकर मौत होने के बाद हुआ था। छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और न्याय की मांग की।

मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति बिगड़ गई और पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्र घायल हो गए। पुलिस और छात्रों के बीच झड़प होने के बाद कॉलेज को 8 मार्च तक बंद कर दिया गया है।

इस मामले में कॉलेज प्रबंधन ने छात्रों की मांगों को मान लिया है और उन्हें आश्वस्त किया है कि जल्द ही कॉलेज की टाइमिंग में बदलाव किया जाएगा। फिलहाल, कॉलेज में पीएसी तैनात है और सभी छात्रों को वहां से हटा दिया गया है।

सोमवार को हुए हादसे में बीसीए फाइनल ईयर के छात्र प्रखर सिंह की मौत हो गई थी, जो जेसीबी से टकरा गए थे। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने निर्माण काम के दौरान सुरक्षा इंतजाम नहीं किए थे, जिससे यह हादसा हुआ। कॉलेज प्रबंधन ने इस मामले में जांच का आश्वासन दिया है।

इस मामले में डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आब्दी, एडीसीपी वेस्ट कपिलदेव, एसीपी कल्याणपुर आशुतोष कुमार, और एसीपी अमरनाथ यादव ने छात्रों से बातचीत की और उन्हें शांत करने की कोशिश की। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और 10 एंबुलेंस भी मौके पर पहुंची थीं।

Bihar News Today 25 फरवरी 2026 Live: विधानसभा हंगामा, दुल्हन को गोली, अमित शाह का दौरा – दिनभर की टॉप खबरें

Bihar में आज कई अहम घटनाक्रम सामने आए हैं। अपराध, राजनीति, विकास और प्रशासन से जुड़ी प्रमुख खबरें इस प्रकार हैं:

🔴 शादी के मंच पर दुल्हन को गोली

Buxar जिले से चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जयमाला के दौरान एक युवक ने कथित तौर पर दुल्हन को गोली मार दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। दुल्हन को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है।


🏛 शराबबंदी पर विधानसभा में बहस

राजधानी Patna में विधानसभा सत्र के दौरान शराबबंदी कानून और कानून-व्यवस्था को लेकर जोरदार बहस हुई। विपक्ष ने राज्य में बढ़ते अपराध के मुद्दे पर सरकार को घेरा, वहीं सरकार ने विकास योजनाओं और औद्योगिक निवेश के आंकड़े पेश किए। शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी नई गाइडलाइन जारी की गई है। प्रशासन ने प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।


🏭 BIADA ने 14 औद्योगिक इकाइयों को जमीन आवंटित की

राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए Bihar Industrial Area Development Authority (BIADA) ने 14 नई औद्योगिक इकाइयों को करीब 10 एकड़ भूमि आवंटित की है। इससे लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और 1200 से ज्यादा रोजगार सृजन की संभावना है। इस पहल को राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।


🌾 चीनी मिलों में टिशू कल्चर और मिट्टी जांच लैब

राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सभी चीनी मिलों में टिशू कल्चर लैब, मिट्टी जांच केंद्र और बायो-कंट्रोल लैब स्थापित करने की योजना बनाई है। इससे गन्ना उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


🛡 अमित शाह का सीमांचल दौरा

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah बिहार के Seemanchal क्षेत्र के दौरे पर हैं। इस दौरान वे सीमा सुरक्षा, जनसांख्यिकीय बदलाव और कानून-व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


📍 गया

Gaya में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष अभियान शुरू किया है। बोधगया क्षेत्र में सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि पर्यटकों की संख्या में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। रेलवे स्टेशन और प्रमुख मंदिरों के आसपास निगरानी बढ़ाई गई है।


📍 मुज़फ्फरपुर

Muzaffarpur में साइबर अपराध के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। पुलिस ने ऑनलाइन लॉटरी और फर्जी कॉल सेंटर गिरोह के खिलाफ अभियान चलाया है। कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है। आम लोगों को अज्ञात लिंक और कॉल से सावधान रहने की अपील की गई है।


📍 भागलपुर

Bhagalpur में गंगा नदी के जलस्तर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रशासन ने निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। साथ ही, शहर में सड़क निर्माण परियोजनाओं को तेज करने का निर्देश दिया गया है। स्थानीय किसानों ने सिंचाई व्यवस्था सुधारने की मांग की है।

24 फरवरी 2026 की बिहार की टॉप 10 बड़ी खबरें: पटना CBI जांच से लेकर विधानसभा हंगामा तक, पढ़ें इस वक्त की 10 बड़ी खबरें

आज बिहार के अलग-अलग जिलों में राजनीति, उद्योग, शिक्षा, परिवहन और प्रशासन से जुड़ी कई अहम गतिविधियां देखने को मिलीं। यहां पढ़िए जिला और स्थान के अनुसार राज्य की 10 बड़ी खबरें:

1. पटना में नीट छात्रा मौत मामले में CBI जांच तेज

पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। एजेंसी ने SIT के अधिकारियों से पूछताछ की है और कई दस्तावेज जब्त किए हैं। परिवार ने पहले ही स्थानीय जांच पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद केस सीबीआई को सौंपा गया। छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। सीबीआई अब कॉल डिटेल, हॉस्टल रिकॉर्ड और कोचिंग संस्थान से जुड़े लोगों से भी पूछताछ कर रही है। आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


2. 27 फरवरी से इंटर कॉपियों का मूल्यांकन शुरू

Bihar School Examination Board ने 27 फरवरी से इंटरमीडिएट परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन की तिथि घोषित कर दी है। राज्यभर में बनाए गए केंद्रों पर शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। बोर्ड ने निर्देश दिया है कि मूल्यांकन कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। परीक्षार्थियों को मार्च अंत तक परिणाम जारी होने की उम्मीद है। बोर्ड इस बार डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग कर रहा है ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी और त्रुटिरहित रहे। शिक्षकों को समय पर केंद्रों पर पहुंचने और दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।


3. बिहार पुलिस भर्ती कैलेंडर 2026 जारी

Central Selection Board of Constable ने बिहार पुलिस भर्ती 2026 का कैलेंडर जारी कर दिया है। इसमें सिपाही और अन्य पदों पर बहाली की तिथियां शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और परीक्षा तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं। लाखों अभ्यर्थियों को इस भर्ती का इंतजार था। बोर्ड ने साफ किया है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी होगी और शारीरिक दक्षता परीक्षा सख्ती से आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थियों को आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित अपडेट देखने की सलाह दी गई है।


4. सीमांचल दौरे पर केंद्रीय गृह मंत्री

Amit Shah तीन दिवसीय सीमांचल दौरे पर बिहार पहुंच सकते हैं। इस दौरान वे सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। अवैध घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन जैसे मुद्दों पर बैठकें प्रस्तावित हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ भी उनका संवाद कार्यक्रम तय है। राजनीतिक हलकों में इस दौरे को आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और स्थानीय स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।


5. विधानसभा में हंगामा, पोस्टरबाजी

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी विधायकों ने कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। हंगामे के बीच मार्शल को हस्तक्षेप करना पड़ा और पोस्टर जब्त किए गए। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर अनावश्यक बाधा डालने का आरोप लगाया। सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनाव को देखते हुए आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है।


6. दरभंगा रेल मार्ग पर बड़ी साजिश नाकाम

दरभंगा रेल रूट पर ट्रेन दुर्घटना की साजिश को समय रहते विफल कर दिया गया। रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध सामग्री मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने तुरंत कार्रवाई की। बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की। इस घटना के बाद रेल सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी होगी। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे प्रशासन सतर्क है।


7. स्कूलों के पास मांस-मछली बिक्री पर रोक की तैयारी

राज्य सरकार स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास मांस व मछली की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार निर्धारित दूरी के भीतर बिक्री की अनुमति नहीं होगी। सरकार का कहना है कि यह कदम स्वच्छता और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है। व्यापारी संगठनों ने इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की है। जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी हो सकती है।


8. घूस लेते दो सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार

राज्य निगरानी ब्यूरो ने रिश्वत लेते हुए दो सरकारी कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने काम कराने के एवज में पैसे की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाकर कार्रवाई की गई। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया है। सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही है और विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।


9. राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी

बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दल अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम पर मंथन कर रहे हैं। सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव का असर आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। सभी दल अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं।


10. 24 मिनट में चार विधेयक पारित

बिहार विधानसभा में महज 24 मिनट के भीतर चार विधेयक पारित कर दिए गए। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया, जबकि सरकार ने इसे समय की बचत और प्रभावी कार्यशैली बताया। विधेयकों में प्रशासनिक सुधार और वित्तीय प्रावधान शामिल हैं। इस तेज प्रक्रिया पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है और विपक्ष ने विस्तृत चर्चा की मांग की है।

पटना हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन: विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार समेत 42 विधायकों को नोटिस, चुनावी हलफनामे में गड़बड़ी के आरोप से मचा सियासी भूचाल

Patna High Court Notice to 42 MLAs: बिहार की राजनीति में उस समय भारी हलचल मच गई जब पटना उच्च न्यायालय ने एक साथ 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इन विधायकों में कोई साधारण नाम नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार, वरिष्ठ मंत्री विजेंद्र यादव, विधायक चेतन आनंद, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा और राजद विधायक अमरेंद्र प्रसाद जैसे प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं।

इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए अपने नामांकन पत्र यानी चुनावी हलफनामे (Affidavit) में संपत्ति, आपराधिक मामलों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को या तो छुपाया या गलत तरीके से प्रस्तुत किया। अदालत की इस सख्त कार्रवाई ने सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों खेमों में एक साथ हलचल पैदा कर दी है।

क्या है पूरा मामला? चुनावी हलफनामे से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला बिहार विधानसभा चुनाव के बाद दायर की गई चुनाव याचिकाओं से जुड़ा है। जिन सीटों पर हारने वाले प्रत्याशियों को पराजय का सामना करना पड़ा, उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि विजयी उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे में गलत या अधूरी जानकारी दी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि—

  • कुछ विधायकों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का पूरा विवरण नहीं दिया।
  • आपराधिक मामलों से संबंधित सूचनाएं स्पष्ट नहीं की गईं।
  • कुछ मामलों में शपथपत्र में तथ्यात्मक त्रुटियां या भ्रामक विवरण प्रस्तुत किए गए।
  • मतदान प्रक्रिया के दौरान भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इन आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए संबंधित सभी 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है।

किन-किन दिग्गजों को मिला नोटिस?

नोटिस पाने वाले नेताओं में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक शामिल हैं। यह तथ्य इस मामले को और व्यापक बना देता है। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—

  • प्रेम कुमार – बिहार विधानसभा अध्यक्ष
  • विजेंद्र यादव – वरिष्ठ मंत्री
  • जीवेश मिश्रा – भाजपा विधायक
  • चेतन आनंद – विधायक
  • अमरेंद्र प्रसाद – राजद विधायक

सूत्रों के अनुसार अन्य कई विधायकों को भी नोटिस जारी हुआ है, जिनके मामलों की सुनवाई अलग-अलग याचिकाओं के आधार पर की जाएगी।

अदालत की टिप्पणी ने बढ़ाई गंभीरता

सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि चुनावी हलफनामा केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना स्रोत है।

अदालत ने स्पष्ट किया—

“मतदाता को यह जानने का अधिकार है कि उसका प्रतिनिधि बनने जा रहा व्यक्ति किस प्रकार की पृष्ठभूमि रखता है, उसकी संपत्ति कितनी है और उस पर आपराधिक मामले लंबित हैं या नहीं।”

यदि कोई उम्मीदवार जानबूझकर जानकारी छुपाता है या गलत जानकारी देता है, तो यह न केवल चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध भी है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: सभी ने कहा—कानून का करेंगे पालन

इस मामले पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती देना लोकतांत्रिक अधिकार है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रत्याशी को लगता है कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। उन्होंने कहा कि अब यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।

भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने कहा कि अदालत के सवालों का जवाब अदालत में ही दिया जाएगा। उन्होंने इसे सामान्य कानूनी प्रक्रिया बताया।

कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने भी कहा कि यदि किसी को लगता है कि गलत हुआ है तो न्यायालय जाना उसका अधिकार है। जो भी कानूनी प्रक्रिया होगी, उसका पालन किया जाएगा।

राजनीतिक रूप से देखा जाए तो इस मामले में किसी एक दल को निशाना नहीं बनाया गया है, बल्कि विभिन्न दलों के विधायक इसमें शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मामला विशुद्ध रूप से कानूनी और प्रक्रियात्मक है।

चुनावी हलफनामा क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

भारत में चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन के साथ एक शपथपत्र देना अनिवार्य होता है। इसमें निम्नलिखित जानकारियां देना जरूरी है—

  • कुल चल और अचल संपत्ति का विवरण
  • जीवनसाथी और आश्रितों की संपत्ति
  • लंबित आपराधिक मामले
  • शैक्षणिक योग्यता
  • देनदारियां

इस शपथपत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता पूरी जानकारी के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुन सके। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि पारदर्शिता लोकतंत्र की आत्मा है।

संभावित कानूनी परिणाम क्या हो सकते हैं?

यदि अदालत पाती है कि किसी विधायक ने जानबूझकर गलत जानकारी दी है, तो संभावित परिणाम हो सकते हैं—

  1. चुनाव निरस्त किया जा सकता है।
  2. संबंधित विधायक की सदस्यता रद्द हो सकती है।
  3. दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया जा सकता है।
  4. दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।

हालांकि यह सब अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

बिहार की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

बिहार की राजनीति पहले ही कई मुद्दों को लेकर गरम है। ऐसे में 42 विधायकों को एक साथ नोटिस मिलना बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। यदि अदालत का फैसला कठोर आता है तो—

  • विधानसभा की संरचना प्रभावित हो सकती है।
  • सत्ताधारी गठबंधन की संख्या पर असर पड़ सकता है।
  • विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा मिल सकता है।
  • चुनावी सुधार पर नई बहस शुरू हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि नैतिक जवाबदेही से भी जुड़ा है।

Bihar Breaking News Live 19 February 2026: हाईकोर्ट का 42 विधायकों को नोटिस, नीट छात्रा केस में जांच तेज, कई जिलों में बड़ी घटनाएं

पटना, 19 फरवरी 2026। संक्षिप्त सारांश: होली को लेकर स्पेशल ट्रेनों की घोषणा और राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। पटना हाईकोर्ट ने विधानसभा से जुड़े मामले में 42 विधायकों को नोटिस जारी कर सियासी हलचल बढ़ा दी है। नीट छात्रा मौत मामले में जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और पूछताछ का दायरा बढ़ाया गया है। वैशाली, मुजफ्फरपुर और सहरसा में हत्या, मारपीट और सड़क हादसे जैसी घटनाओं से कानून-व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। सरकार ने 537 ब्लॉक कार्यालयों में सीसीटीवी लगाने की योजना की घोषणा की है।

वैशाली में रहस्यमयी मौत:
हाजीपुर के कौनहारा घाट पर एक व्यक्ति का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। परिजन जमीन विवाद का हत्या का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस पोस्टमार्टम कर रही है।

🔹 पटना हाईकोर्ट ने 42 विधायकों को नोटिस भेजा:
राजनीति में सियासी हलचल तेज़; उच्च न्यायालय ने स्पीकर प्रेम कुमार समेत 42 विधायकों को जवाबतलब किया है।

🔹 नक्सली सुरेश कोड़ा ने आत्मसमर्पण किया:
तीन लाख का इनामी नक्सली AK-47 और इंसास राइफल पुलिस को सौंपते हुए आत्मसमर्पण कर दिया।

🔹 नीट छात्रा केस में बड़ा अपडेट:
जहानाबाद केस में अब तक कई साक्ष्यों की पड़ताल जारी है; जांच एजेंसियाँ पूरी कोशिश कर रही हैं।

🔹 सड़क हादसा:
सहरसा के पास एक स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त; पाँच लोग घायल।

🔹 मुजफ्फरपुर में मारपीट:
कार साइड की बात पर विवाद, बीयर की बोतल से हमला; तीन घायल।

🔹 इनामी अपराधियों की लिस्ट:
वैशाली एसपी ने 12 कुख्यात अपराधियों की सूची जारी कर दी।


🏛️ राजनीति और सरकारी फैसले

📌 बिहार विधानसभा का बजट सत्र

बजट सत्र चल रहा है, विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच कई मुद्दों पर बहस जारी है — विशेषकर कचरे के मुद्दे पर भी विवाद हुआ।

📌 537 ब्लॉक कार्यालयों में CCTV योजना

बिहार सरकार ने घोषणा कि राज्य के 537 ब्लॉक कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे — यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता व भ्रष्टाचार रोकने के लिए।

📌 अमित शाह की बिहार यात्रा (25 फरवरी)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार के सीमावर्ती इलाकों का दौरा करेंगे — खासकर नेपाल और बांग्लादेश सीमा क्षेत्रों में पर्यावरण, सुरक्षा और डेमोग्राफी से जुड़े मुद्दों को देखने।


👮 क्राइम और सुरक्षा समाचार

🔹 पटना नीट छात्रा केस में CBI पूछताछ:
सीबीआई टीम सस्पेंडेड पुलिस अधिकारियों से पूछताछ कर रही है।

🔹 बांका में सॉल्वर गैंग पकड़ा गया:
मैट्रिक परीक्षा में पेपर सॉल्विंग के लिए 10,000 रुपये चार्ज करने वाला गिरोह पकड़ा गया।

🔹 मोबाइल ऐप से साइबर ठगी:
पूर्वी चंपारण के मोतिहारी से फर्जी ऐप के ज़रिये करोड़ों की ठगी करने वाला आरोपी हरियाणा से गिरफ्तार।


✳️ होली स्पेशल ट्रेनें 2026:


होली के त्यौहार के लिए रेलवे द्वारा बिहार समेत दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, पुणे और अहमदाबाद से स्पेशल ट्रेनें संचालित होंगी — यात्रियों को सुविधा मिल सके।


🔴 विधानसभा में तीखा टकराव, सरकार पर विपक्ष का हमला

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। विपक्षी दलों ने विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। मुख्यमंत्री Nitish Kumar की नीतियों पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने राज्य में बढ़ती चुनौतियों का मुद्दा उठाया।

वहीं सत्ता पक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी से काम कर रही है। सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति भी बनी रही।


🍷 शराबबंदी नीति पर पुनर्विचार की मांग

राज्य में लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन National Democratic Alliance (एनडीए) के कुछ सहयोगी दलों ने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि नीति का उद्देश्य सही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में खामियां हैं, जिससे आर्थिक नुकसान और प्रशासनिक दबाव बढ़ रहा है।

सरकार ने फिलहाल नीति में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान बढ़ता दिख रहा है।


🚨 फिरोजाबाद में बिहार के लिए भेजी जा रही शराब की बड़ी खेप जब्त

उत्तर प्रदेश के Firozabad में पुलिस ने लगभग एक करोड़ रुपये की अवैध शराब की खेप पकड़ी, जिसे बिहार भेजा जाना था। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्करी की कोशिशें जारी हैं, जिससे प्रशासन की चुनौतियां बढ़ रही हैं।


🌾 राजगीर के पास अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़

Rajgir के समीप एक गांव में पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध अफीम की खेती का खुलासा किया। अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में अफीम की फसल नष्ट कर दी है। मामले में आगे की जांच जारी है और संलिप्त लोगों की पहचान की जा रही है।


🏥 खगड़िया में प्रसाद खाने से करीब 100 लोग बीमार

Khagaria जिले में महाशिवरात्रि के अवसर पर वितरित प्रसाद खाने के बाद लगभग 100 लोग बीमार पड़ गए। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। सभी को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।


💥 राजस्थान फैक्ट्री विस्फोट में बिहार के 7 मजदूरों की मौत

Rajasthan में हाल ही में हुए एक फैक्ट्री विस्फोट में बिहार के सात प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। ये सभी पूर्वी चंपारण जिले के निवासी थे। जिला प्रशासन ने मृतकों की पहचान कर ली है और परिजनों को सरकारी सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पूर्वी चंपारण East Champaran के जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार की प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना के तहत पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।


🏛️ नालंदा विश्वविद्यालय में ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन

अल्पसंख्यक समुदायों के विकास और कल्याण योजनाओं की समीक्षा के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय Ministry of Minority Affairs द्वारा Nalanda University में दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नीति निर्माण, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे विषयों पर चर्चा की गई।


🏠 पटना में जमीन रजिस्ट्री महंगी होगी, सर्किल रेट में भारी बढ़ोतरी

राजधानी Patna में 1 अप्रैल से जमीन रजिस्ट्री की नई दरें लागू होंगी। कई इलाकों में सर्किल रेट तीन गुना तक बढ़ाए जाने की तैयारी है। इससे रियल एस्टेट बाजार में हलचल मच सकती है और संपत्ति खरीदने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

रजिस्ट्रेशन विभाग का कहना है कि बाजार दर और सरकारी दर के बीच के अंतर को कम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

बिहार विधानसभा में हंगामा और तीखे सवालों के बीच कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित, बजट सत्र की दूसरी पाली में फिर शुरू होगी बहस

पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सदन की कार्यवाही उस समय दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी, जब प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान सत्ताधारी दल के विधायकों के तीखे सवालों में मंत्री खुद ही घिरते नजर आए। लंच ब्रेक के बाद सदन की कार्यवाही पुनः आरंभ होने की घोषणा की गई है। सुबह से ही सदन का माहौल गरम रहा और कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपनी ही सरकार से जवाब तलब किए।

प्रश्नकाल में सरकार पर ही उठे सवाल

बजट सत्र के दौरान आज का दिन राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा था। विपक्ष की ओर से सरकार को घेरने की रणनीति पहले से तय थी, लेकिन स्थिति उस समय दिलचस्प हो गई जब सत्ताधारी दल के विधायकों ने भी विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर मंत्रियों से सीधे और तीखे सवाल पूछने शुरू कर दिए।

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और नगर विकास विभाग से जुड़े प्रश्नों पर मंत्री संतोषजनक जवाब देने में असहज दिखे। कुछ विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अधूरी योजनाओं, लंबित भुगतान, खराब सड़कों और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

एक विधायक ने अपने क्षेत्र में स्वीकृत पुल निर्माण योजना के लंबित रहने का मुद्दा उठाया और पूछा कि बजट आवंटन के बावजूद कार्य प्रारंभ क्यों नहीं हुआ। इस पर संबंधित मंत्री ने विभागीय प्रक्रिया और तकनीकी स्वीकृति का हवाला दिया, लेकिन विधायक ने जवाब को अपर्याप्त बताते हुए नाराजगी जताई।

सत्ता पक्ष के भीतर असंतोष के संकेत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष के विधायकों द्वारा इस तरह के सवाल उठाया जाना सरकार के भीतर बढ़ते दबाव का संकेत हो सकता है। कई विधायक आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं।

कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि यदि योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक नहीं पहुंचेगा, तो इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। ऐसे में सदन के भीतर ही सरकार को आईना दिखाने की कोशिश की जा रही है।

विपक्ष ने भी साधा निशाना

हालांकि आज का केंद्र बिंदु सत्ता पक्ष के सवाल रहे, लेकिन विपक्ष ने भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि जब सत्ताधारी दल के विधायक ही सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में भारी खामियां हैं। उन्होंने मांग की कि बजट सत्र के दौरान सभी विभागों की विस्तृत समीक्षा कराई जाए और लंबित परियोजनाओं की सूची सार्वजनिक की जाए।

स्पीकर ने बनाए रखा अनुशासन

सदन में बढ़ते शोर-शराबे और लगातार हस्तक्षेप के बीच अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल की गरिमा बनाए रखने की अपील की। कुछ समय के लिए सदन में तीखी बहस भी हुई, जिसके बाद दोपहर 2 बजे तक कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा की गई।

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि लंच के बाद सदन की दूसरी पाली में बजट सत्र की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाई जाएगी और सदस्यों को अपने प्रश्न रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

Patna NEET Student Death Case: परिवार को दूसरी बार जान से मारने की धमकी, CBI जांच के बीच गांव में बढ़ाई गई सुरक्षा

पटना/जहानाबाद। बिहार की राजधानी पटना से जुड़े बहुचर्चित NEET छात्रा मौत मामले ने एक बार फिर सनसनी फैला दी है। जिस घटना ने पहले ही राज्यभर में आक्रोश और सवालों का तूफान खड़ा कर दिया था, अब उसमें धमकी भरे पर्चों की एंट्री ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। जहानाबाद स्थित छात्रा के पैतृक गांव में परिजनों को लगातार दूसरी बार जान से मारने की धमकी दी गई है। इससे परिवार गहरे सदमे और भय के माहौल में जीने को मजबूर है।

पुलिस की तैनाती के बावजूद घर के किचन की खिड़की पर धमकी भरे पर्चे मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। पूरे मामले की जांच अब केंद्रीय एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) कर रही है, जबकि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।

किचन की खिड़की पर मिला पहला धमकी भरा पर्चा

परिजनों के अनुसार पहला पर्चा शुक्रवार की रात घर के किचन की खिड़की पर रखा मिला। उस पर्चे में साफ शब्दों में लिखा था— “तुम सब लोग मारे जाओगे।”

परिवार ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। शकूराबाद थाना की टीम मौके पर पहुंची और पर्चे को जब्त कर जांच शुरू की। पुलिस ने आश्वासन दिया कि सुरक्षा में कोई चूक नहीं होने दी जाएगी।

हालांकि परिवार अभी पहले पर्चे के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही दिनों बाद एक और धमकी ने माहौल को और भयावह बना दिया।

दूसरे पर्चे ने बढ़ाई दहशत: “2 दिन में तेरा बेटा भी मरेगा”

मंगलवार को उसी किचन की खिड़की पर एक और पर्चा मिला। इस बार भाषा और भी ज्यादा खतरनाक और व्यक्तिगत थी। उसमें लिखा था—
“जिस तरह बेटी मरी है, 2 दिन में तेरा बेटा भी मरेगा।”

इस संदेश ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। बेटी की मौत के गम से उबर नहीं पाए माता-पिता के सामने अब बेटे की जान की धमकी ने मानसिक दबाव कई गुना बढ़ा दिया है।

परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इतनी सुरक्षा के बीच कोई घर तक पहुंचकर पर्चा कैसे रख जा रहा है। गांव में पुलिस की तैनाती है, आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है, फिर भी यह घटना सुरक्षा में सेंध की ओर इशारा करती है।

गांव में पुलिस की तैनाती, फिर भी कैसे पहुंचा धमकी देने वाला?

धमकी भरे पर्चे मिलने के बाद पुलिस ने घर के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। आने-जाने वालों की पूछताछ की जा रही है। गांव में रात के समय गश्ती बढ़ा दी गई है।

इसके बावजूद सवाल यह है कि जब घर की निगरानी हो रही थी तो आखिर पर्चा रखने वाला व्यक्ति वहां तक कैसे पहुंचा? क्या कोई स्थानीय व्यक्ति इसमें शामिल है? या फिर सुरक्षा में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जा रही है। आसपास लगे संभावित सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। गांव के संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है।

एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य

मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम गांव पहुंची। टीम ने किचन की खिड़की, दीवारों और आसपास के हिस्सों से फिंगरप्रिंट, हैंडराइटिंग और अन्य फॉरेंसिक नमूने जुटाए।

पर्चों की लिखावट की जांच कराई जा रही है ताकि यह पता चल सके कि दोनों पर्चे एक ही व्यक्ति ने लिखे हैं या अलग-अलग लोगों ने। कागज और स्याही की जांच से भी सुराग मिलने की उम्मीद है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह धमकी महज डराने की कोशिश भी हो सकती है या फिर किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा भी। इसलिए हर पहलू को गंभीरता से खंगाला जा रहा है।

6 जनवरी को हॉस्टल में मिली थी बेहोश

यह पूरा मामला 6 जनवरी से शुरू हुआ, जब छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में बेहोश पाई गई थी। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला।

11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश फैला दिया। छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच की जिम्मेदारी Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी।

सीबीआई की सक्रियता, गांव पहुंचकर की पूछताछ

CBI की टीम तीन दिनों के भीतर दो बार छात्रा के गांव पहुंच चुकी है। अधिकारियों ने परिजनों से घंटों पूछताछ की। छात्रा के दोस्तों, रिश्तेदारों और गांव के अन्य लोगों से भी जानकारी ली जा रही है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा की मौत आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या फिर इसके पीछे कोई साजिश। मोबाइल कॉल डिटेल, चैट रिकॉर्ड, हॉस्टल स्टाफ के बयान और मेडिकल रिपोर्ट की गहन जांच जारी है।

अब धमकी भरे पर्चों की घटना ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या धमकियों का संबंध सीधे छात्रा की मौत की जांच से है।

परिवार पर मानसिक दबाव

बेटी की असमय मौत के बाद से परिवार पहले ही गहरे सदमे में था। अब लगातार मिल रही धमकियों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।

परिजनों का कहना है कि उन्हें अपनी और बेटे की सुरक्षा की चिंता सता रही है। वे चाहते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें स्थायी सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

गांव के लोगों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि धमकी देने वालों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

तेजस्वी यादव का बड़ा ऐलान: RJD अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में करेगी विस्तार

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान देकर पार्टी के भविष्य के दृष्टिकोण और दिशा को लेकर बड़ा पन्ना खोला है। पटना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब राष्ट्रीय जनता दल सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पार्टी जल्द ही देश के अन्य राज्यों में अपने पैर पसारने का प्रयास करेगी और राष्ट्रीय पार्टी बनने की आकांक्षा रखती है

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब RJD ने हाल ही में बिहार विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल नहीं की थी। तेजस्वी का बयान पार्टी के पुराने राजनीतिक रुख से एक बड़ा बदलाव दर्शाता है और पार्टी की राजनीतिक सोच में विस्तार को उजागर करता है।

तेजस्वी यादव के बयान की प्रमुख बातें

तेजस्वी यादव ने पटना में दिए अपने बयान में कहा:
📌 “अब हमारी पार्टी सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी। हम आने वाले समय में **अन्य राज्यों में भी चुनाव लड़ने, संगठन का विस्तार करने और राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में काम करेंगे।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि RJD ने पहले अन्य राज्यों में चुनाव न लड़ने का फैसला इसलिए किया था ताकि धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा न हो और सहयोगी दलों को लाभ मिले, लेकिन अब समय बदल गया है और पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर है

तेजस्वी ने यह भी कहा:
➡️ “हम बिहार विधानसभा में चुनाव हार गए, इसका मतलब यह नहीं कि पार्टी कमजोर है, बल्कि परिस्थितियाँ प्रतिकूल थीं। हमारा समय फिर आएगा।”

यहां ये शब्द RJD के कारणों और चुनौतियों को समझने में मदद करते हैं — उन्होंने हार को अस्थायी बताया और पार्टी कार्यकर्ताओं को आशा तथा दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

नीतीश कुमार पर हमला और RJD की राजनीति

तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी आरोप लगाए हैं कि वह “अपने फैसलों में प्रभावित अधिकारियों और अपने सहयोगी दल के दबाव में हैं” और इसलिए राज्य की जनता के मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की 100 दिनों की सीमा के बाद वे सरकार की विफलताओं पर जोर देंगे और जनता के बीच यह मामला उठाएंगे कि चुनाव में जिन वादों को उन्होंने लिया था, वे पूरा नहीं किए गए।

यह बयान RJD के राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता है, जिसमें विपक्षी दल सत्ता पक्ष की नीतियों और कार्यों की आलोचना करते हुए खुद को जनता की आवाज़ के रूप में पेश करते हैं।

राष्ट्रीय पार्टी बनने की महत्वाकांक्षा क्यों?

भारत में राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के लिए केंद्र सरकार के चुनाव आयोग के मानदंडों को पूरा करना होता है। इसके लिए दल को विभिन्न राज्यों में समर्थन और सक्रिय वोट बैंक दिखाना आवश्यक होता है।

RJD का यह कदम पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। तेजस्वी का मानना है कि RJD के पास वह राजनीतिक विरासत, विचारधारा और समर्थन है जो इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली दल बना सकता है।

उनके इस दृष्टिकोण के पीछे यह तर्क भी दिखता है कि भारतीय राजनीति में संवैधानिक रूप से सेक्युलर और सामाजिक न्याय की विचारधारा वाली पार्टियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी बनना चाहिए ताकि वे देशभर के मुद्दों पर अपनी आवाज उठा सकें।

RJD का इतिहास और अब का नवाचार

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की स्थापना 1997 में लालू प्रसाद यादव ने की थी और पार्टी ने बिहार में अपनी एक मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई। लालू यादव के नेतृत्व में RJD ने सामाजिक न्याय, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दों को आगे बढ़ाया और राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली दल के रूप में उभरी।

तेजस्वी यादव, जो लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं, ने धीरे-धीरे पार्टी में अपनी भूमिका बढ़ाई और जनवरी 2025 में उन्हें RJD का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। इससे तेजस्वी को पार्टी के फैसलों में अधिक अधिकार और नेतृत्व निभाने का अवसर मिला।

अब तेजस्वी यादव ने पार्टी को एक नई दिशा देने का निश्चय किया है — वह चाहते हैं कि RJD केवल बिहार तक सीमित न रहे बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराए

बिहार सरकार ने मांस और मछली की खुले में बिक्री पर प्रतिबंध लगाया

पटना, 17 फरवरी 2026: बिहार सरकार ने राज्य में मांस और मछली की खुले में (सड़क, फुटपाथ या खुले बाजार सहित) बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। यह नया फैसला जनसाधारण स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।

राज्य के डिप्टी चीफ मिनिस्टर विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि अब से केवल लाइसेंसधारी एवं मान्यता प्राप्त दुकानदारों को ही मांस और मछली बेचने की अनुमति होगी। बिना लाइसेंस के किसी भी प्रकार की खुले में बिक्री को कानूनी अपराध माना जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

📌 संक्षेप:
✔️ बिहार में अब सड़क, फुटपाथ या खुले स्थानों पर मांस / मछली नहीं बेची जा सकेगी।
✔️ केवल लाइसेंसधारी दुकानें ही मांस और मछली बेच सकेंगी।
✔️ नियम तोड़ने पर जुर्माना और सख्त कार्रवाई होगी।

सरकार ने यह भी कहा है कि नियम पालन न करने वाले दुकानदारों पर जुर्माना या अन्य दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे ताकि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी और स्वास्थ्य जोखिम न फैले। साथ ही मांस की बिक्री के लिए निर्धारित मानकों और स्वच्छता नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

इस निर्णय को लागू करने के पीछे सरकार का उद्देश्य न केवल स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों को मजबूत करना है, बल्कि राजकीय प्रक्रियाओं के तहत व्यवसायिक गतिविधियों को भी व्यवस्थित करना है।

बिहार की इस समय की 10 बड़ी खबरें (जिला वार) 17 फरवरी 2026

पटना | 17 फरवरी 2026

बिहार में मंगलवार, 17 फरवरी को अलग-अलग जिलों से कई महत्वपूर्ण खबरें सामने आईं। प्रशासनिक फैसलों से लेकर सड़क हादसे, विकास योजनाओं और कृषि से जुड़ी गतिविधियों तक राज्यभर में हलचल रही। पढ़िए जिला वार पूरी रिपोर्ट—

📍 पटना

राजधानी पटना में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। शिक्षा विभाग में नई बहाली प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और शहरी विकास परियोजनाओं को गति देने पर निर्णय लिया गया। आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और जिला प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है।

विधानसभा में हंगामा: बिहार विधानसभा में RJD नेताओं ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को “बेचारा” कहे जाने का मुद्दा उठाया, जिससे माहौल गरमा गया और हंगामे के बीच बहस जारी रही।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिजेरियन डिलीवरी सुविधा : बिहार के 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अब सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery) की सुविधा लागू कर दी गई है। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में महिलाओं को बेहतर मातृ-सेवा मिलेगी और समय रहते चिकित्सा सहायता उपलब्ध होगी।

रेलवे ने बढ़ाए विशेष ट्रेनें (होली के लिए) : रेलवे प्रशासन ने होली मेलों और यात्रियों की भीड़ को देखते हुए 9 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला लिया है। इन ट्रेनों का परिचालन बिहार के प्रमुख रूट्स और पड़ोसी राज्यों के मार्गों पर होगा, जिससे त्योहार सीज़न में सफर आसान होगा।

मैट्रिक परीक्षा की शुरुआत : बिहार में आज से बोर्ड मैट्रिक (10वीं) परीक्षा शुरू हो गई है। परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की बड़ी संख्या के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। विभाग ने परीक्षा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं।

📍 मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर के पताही एयरपोर्ट को फिर से चालू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रनवे निर्माण और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति दी गई है। लंबे समय से बंद पड़े एयरपोर्ट के चालू होने से उत्तर बिहार के लोगों को हवाई यात्रा की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

सड़क हादसा: मुजफ्फरपुर में एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो शिक्षकों की मौत हुई और कई लोग घायल हो गए। घटना की जांच जारी है।

गैरकानूनी गतिविधियों पर कार्रवाई: मुजफ्फरपुर में एक मामला सामने आया है, जिसमें व्यक्ति को गोली मारकर कार से फेंकने की घटना हुई; यह जांच के दायरे में है और पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है।

📍 गया (बोधगया)

पर्यटन नगरी बोधगया में विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पर्यटन सीजन को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। महाबोधि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। होटल व्यवसायियों के अनुसार, इस बार बुकिंग में अच्छी वृद्धि हुई है।

📍 भागलपुर

गंगा नदी का जलस्तर सामान्य बना हुआ है, फिर भी तटवर्ती इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। दूसरी ओर, सिल्क उद्योग से जुड़े व्यापारियों को राज्य सरकार की नई प्रोत्साहन योजना का लाभ मिलने की घोषणा की गई है, जिससे स्थानीय उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

📍 दरभंगा

दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में नई अत्याधुनिक जांच मशीनों की शुरुआत की गई। इससे मरीजों को अब कई महत्वपूर्ण जांचों के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर जिला प्रशासन ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया है।

📍 रोहतास (सासाराम)

सासाराम में एनएच-319 पर देर रात भीषण सड़क हादसा हुआ। बस और ट्रक की टक्कर में दो शिक्षकों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

तीन साल पुराने हत्या मामले में सज़ा : रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र के 2023 के हत्याकांड में अदालत ने अभियुक्त को धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और जुर्माना की सज़ा सुनाई है।

📍 पूर्णिया

पूर्णिया में किसानों के लिए विशेष कृषि शिविर का आयोजन किया गया। कृषि विशेषज्ञों ने आधुनिक खेती तकनीक, फसल विविधीकरण और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। किसानों ने नई तकनीकों में रुचि दिखाई और सरकार से निरंतर सहयोग की मांग की।

📍 सारण (छपरा)

अपराध नियंत्रण अभियान के तहत पुलिस ने छपरा में अवैध हथियार के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।

📍 बेगूसराय

बेगूसराय के औद्योगिक क्षेत्र में नई फैक्ट्री का उद्घाटन हुआ, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। उद्घाटन समारोह में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

📍 भोजपुर (आरा)

जमीन रजिस्ट्री के नए नियमों को लेकर भोजपुर जिले में जागरूकता अभियान चलाया गया। प्रशासन ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए प्रावधानों के तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। लोगों को आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी गई।

📍 जहानाबाद

मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी का खुलासा : प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत चल रहे मध्याह्न (मिडडे मील) कार्यक्रम में जहानाबाद जिले के दो स्कूलों में निरीक्षण के दौरान छात्रों की वास्तविक उपस्थिति और अनुपस्थिति के आंकड़ों में बड़ा अंतर पाया गया है, जिससे विभाग ने चेतावनी जारी की।

बिहार में महिला सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल: CM Nitish Kumar ने 25 लाख महिलाओं के खातों में भेजे 2500 करोड़, 2 लाख तक की चरणबद्ध सहायता का रोडमैप तैयार

पटना : बिहार में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत राज्य की 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की पहली किस्त ट्रांसफर की। कुल 2500 करोड़ रुपये की यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई। पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक क्लिक के साथ राशि जारी की, जबकि जिला, प्रखंड, संकुल और ग्राम संगठन स्तर पर भी समानांतर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

यह पहल केवल आर्थिक सहायता का वितरण भर नहीं है, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करने, उन्हें वित्तीय रूप से सशक्त बनाने और परिवार तथा समाज में उनकी भूमिका को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना चरणबद्ध तरीके से महिलाओं को अधिकतम दो लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराएगी, ताकि वे छोटे व्यवसाय, कृषि-आधारित गतिविधियों, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई, फूड प्रोसेसिंग या अन्य स्थानीय उद्यम शुरू कर सकें।

राज्यभर में बहुस्तरीय आयोजन, 38 जिलों में एक साथ कार्यक्रम

मुख्यमंत्री द्वारा राशि जारी किए जाने के साथ ही राज्य के सभी 38 जिला मुख्यालयों में जिला पदाधिकारियों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 150 से 200 महिलाएं शामिल हुईं।

इन आयोजनों का उद्देश्य केवल राशि वितरण की औपचारिकता निभाना नहीं था, बल्कि महिलाओं को योजना की आगामी किस्तों, पात्रता शर्तों, स्वरोजगार के विकल्पों और प्रशिक्षण सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देना भी था। कई जिलों में लाभार्थी महिलाओं ने मंच से अपने अनुभव साझा किए और बताया कि प्रारंभिक सहायता से वे किस प्रकार छोटे व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रही हैं।

राज्य सरकार के मुताबिक, जिला स्तर पर आयोजित इन कार्यक्रमों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पटना मुख्यालय से जोड़ा गया, जिससे मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी सीधे तौर पर जिलों की गतिविधियों से अवगत हो सके। इससे पारदर्शिता और निगरानी की व्यवस्था को भी मजबूती मिली।

1680 संकुल स्तरीय संघों और 70 हजार ग्राम संगठनों तक पहुंच

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का दायरा केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रहा। जीविका कार्यक्रम के तहत राज्य के 1680 संकुल स्तरीय संघों (Cluster Level Federation) में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रत्येक संकुल स्तरीय संघ में कम से कम 100 स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने भाग लिया।

इन कार्यक्रमों में महिलाओं को बताया गया कि किस प्रकार वे सामूहिक उद्यम मॉडल अपना सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, कई संकुलों में डेयरी, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, अगरबत्ती निर्माण, मसाला प्रोसेसिंग और सिलाई केंद्र जैसी गतिविधियों के मॉडल प्रस्तुत किए गए।

इसके अतिरिक्त, राज्य के लगभग 70,000 ग्राम संगठनों में भी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया। ग्राम स्तर पर यह सुनिश्चित किया गया कि अधिकतम महिलाएं योजना की जानकारी से अवगत हों और उन्हें आवेदन एवं आगे की प्रक्रिया समझने में कोई दिक्कत न हो। ग्राम संगठनों में बैठकों के दौरान बैंकिंग प्रक्रिया, डिजिटल लेन-देन और डीबीटी के महत्व पर भी चर्चा की गई।

पांच चरणों में 2 लाख रुपये तक की सहायता

योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी चरणबद्ध वित्तीय सहायता संरचना है। पहले चरण में 10,000 रुपये की राशि महिलाओं को उनके खाते में भेजी गई है। इसके बाद सहायता इस प्रकार दी जाएगी:

  • दूसरे चरण में 20,000 रुपये
  • तीसरे चरण में 40,000 रुपये
  • चौथे चरण में 80,000 रुपये
  • पांचवें और अंतिम चरण में 60,000 रुपये

इस प्रकार कुल मिलाकर प्रत्येक पात्र महिला को दो लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का कहना है कि चरणबद्ध भुगतान से यह सुनिश्चित होगा कि राशि का उपयोग नियोजित उद्यम के लिए ही हो। प्रत्येक चरण से पहले महिला की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, ताकि यह देखा जा सके कि पहले दी गई राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया। यदि लाभार्थी ने सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय शुरू किया है और उसका विस्तार संभव है, तो अगली किस्त जारी की जाएगी।

3398 वार्डों में विशेष कर्मियों की तैनाती

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने 3398 वार्डों में विशेष कर्मियों की तैनाती का निर्णय लिया है। ये विशेष कर्मी ग्रामीण और शहरी निकायों के वार्ड स्तर पर जाकर लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) करेंगे।

भौतिक सत्यापन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सहायता राशि वास्तव में पात्र महिलाओं तक पहुंचे और उसका उपयोग स्वरोजगार गतिविधियों में हो। विशेष कर्मी यह भी जांच करेंगे कि महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी है या नहीं, उसका व्यवसाय किस चरण में है, और उसे प्रशिक्षण या मार्गदर्शन की आवश्यकता है या नहीं।

सरकार के अनुसार, पात्रता की पूरी पहचान के बाद ही अगली किस्त की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे योजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण सुनिश्चित होगा।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना केवल तात्कालिक आर्थिक राहत कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह राज्य की दीर्घकालिक महिला सशक्तिकरण रणनीति का हिस्सा है। बिहार में बड़ी संख्या में महिलाएं कृषि और अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं, लेकिन उनके पास पूंजी और बाजार तक पहुंच की कमी होती है।

इस योजना के जरिए सरकार महिलाओं को वित्तीय सहायता के साथ-साथ प्रशिक्षण, बाजार संपर्क और बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास कर रही है। स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क का उपयोग कर महिलाओं को संगठित किया जा रहा है, जिससे वे सामूहिक रूप से कच्चा माल खरीद सकें, उत्पाद तैयार कर सकें और बेहतर दाम पर बेच सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से हुआ, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। छोटे-छोटे उद्यमों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे पलायन की प्रवृत्ति में भी कमी आ सकती है।

डीबीटी के माध्यम से पारदर्शी वितरण

पूरी राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से महिलाओं के बैंक खातों में भेजी गई है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।

राज्य सरकार ने बैंकिंग तंत्र के साथ समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया कि राशि समय पर खातों में पहुंचे। कई जिलों में लाभार्थी महिलाओं को मोबाइल संदेश के जरिए राशि जमा होने की सूचना दी गई।

डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को बैंक खाते संचालित करने, यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

योजना का सामाजिक प्रभाव भी व्यापक माना जा रहा है। जब महिलाओं के हाथ में आर्थिक संसाधन आते हैं, तो परिवार के स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण पर सकारात्मक असर पड़ता है। कई अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि महिलाओं द्वारा अर्जित आय का बड़ा हिस्सा परिवार के कल्याण पर खर्च होता है।

इसके अलावा, आर्थिक रूप से सशक्त महिला घरेलू और सामाजिक निर्णयों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाती है। इससे लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलता है।

बिहार सरकार का दावा है कि यह योजना राज्य की लाखों महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने की क्षमता रखती है। यदि सभी चरणों में सहायता राशि समय पर जारी होती है और प्रभावी निगरानी होती है, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

बिहार के प्रमुख शहरों के इस समय के न्यूज़ पोस्ट

आज (16 फरवरी 2026) के ताज़ा अपडेट

🏙️ 1. पटना (राजधानी)

  • विधानसभा में विपक्ष का हंगामा और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम जारी।
  • मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: फरवरी में 25 लाख महिलाओं के खाते में 10,000 आर्थिक सहायता का पैसा ट्रांसफर हुआ — लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है।
  • मौसम में बदलाव: धूप बढ़ने के साथ तापमान में उछाल, आने वाले दिनों में गर्मी की शुरुआत का अनुमान है।
  • भूमि पोर्टल में सुधार:
    डिप्टी सीएम द्वारा बिहार भूमि पोर्टल की तकनीकी खामियों को ठीक कराकर उपयोगकर्ताओं को बेहतर सेवा उपलब्ध करने का आदेश जारी किया गया।

🚩 2. मुजफ्फरपुर

  • बड़े पैमाने पर अग्निवीर भर्ती (Agniveer Recruitment) शुरू हुई — 15 जिलों के 7040 उम्मीदवार शामिल होंगे।
  • शहर में मौसम गर्मी की ओर उभर रहा है, धूप अधिक मिलेगी।

🛕 3. भागलपुर

  • मौसम अपडेट: धूप और बढ़ता तापमान, लेकिन तापमान में दैनिक उतार-चढ़ाव बना है।
  • पक्षी बुखार से पहले अलर्ट (कुछ सप्ताह पहले नउगाचिया में कौओं की मौत से सावधानी बरती जा रही है) — प्रशासन सतर्क है।
  • GRP विवाद: भागलपुर में एक GRP कांस्टेबल का भोजपुरी गानों पर डांस करते वीडियो वायरल होने के कारण पुलिस विभाग की छवि पर सवाल उठे हैं।

🔍 4. दरभंगा

  • शहर और आसपास के क्षेत्रों में मौसम उम्मीद से गर्मी की ओर बढ़ रहा है।
  • शिक्षा से जुड़ी खबरों में बोर्ड और परीक्षा संबंधी अपडेट जारी (जैसे शेखपुरा के आदर्श परीक्षा सेंटर का समाचार) — दरभंगा सहित आसपास के जिलों के लिए।

📊 5. गया

  • मौसम में आम गर्मी का अनुभव, धूप और तापमान में तेजी।
  • स्थानीय प्रशासन और शिक्षा-समाचार में अपडेट के लिए लाइव समाचार चल रहे हैं।

📌 6. समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी और भोजपुर

  • अग्निवीर भर्ती केंद्रों में शामिल उम्मीदवारों की सूची में ये जिले शामिल हैं — भर्ती से जुड़े कई युवा शामिल हो रहे हैं।
  • मौसम सामान्य रूप से अन्य शहरों की तरह गर्मी की ओर।

📍 7. जहानाबाद में गोलीकांड:

जहानाबाद में सिगरेट के विवाद पर एक व्यक्ति को गोली मार दी गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने आरोपियों को पकड़कर पिटाई की। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

📍 राशन कार्डधारकों के लिए eKYC चेतावनी:

राज्य सरकार ने राशन कार्डधारकों से 28 फ़रवरी तक eKYC प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया है अन्यथा राशन सूची से निकलने का खतरा है।

बिहार में शिक्षा विभाग का 2024 छुट्टी कैलेंडर जारी; इस बार कई बदलाव किये गये हैं

सोमवार को बिहार के शिक्षा विभाग ने 2024 वर्ष के लिए स्कूलों की छुट्टी तालिका जारी कर दी । 2024 छुट्टी कैलेंडर में इस बार कई बदलाव किये गये हैं। BJP नेताओं ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार पर हिंदू त्योहारों के लिए छुट्टियां कम करने और मुस्लिम त्योहारों के लिए छुट्टियां बढ़ाने का आरोप लगाया।

बिहार शिक्षा विभाग ने सोमवार को 2024 के लिए अवकाश कैलेंडर जारी किया और कहा कि शिक्षा के अधिकार के तहत कम से कम 220 शिक्षण दिवस सुनिश्चित करने के लिए चार्ट बनाया गया है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने नीतीश कुमार को “तुष्टिकरण का मुखिया” बताते हुए दावा किया कि महागठबंधन का “हिंदू विरोधी चेहरा” फिर से सामने आ गया है, उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार “वोट बैंक के लिए सनातन से नफरत करती है।”

उन्होंने X पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा “एक बार फिर चाचा-भतीजा सरकार का हिंदू विरोधी चेहरा सामने आया। एक तरफ, स्कूलों में मुस्लिम त्योहारों की छुट्टियां बढ़ाई जा रही हैं, जबकि हिंदू त्योहारों की छुट्टियां खत्म की जा रही हैं, ।

छुट्टी कैलेंडर में रक्षाबंधन की छुट्टी को खत्म कर दिया गया है। वहीं, गर्मी की छुट्टी 15 अप्रैल से 15 मई तक केवल छात्र-छात्राओं के लिए रहेगी। शिक्षक और कर्मी अन्य शैक्षणिक, प्रशासनिक कार्य करेंगे।

दिवाली में एक दिन और छठ में तीन दिनों की छुट्टी रहेगी। तीज और जिउतिया की छुट्टी खत्म कर दी गई है। ईद व बकरीद के मौके पर तीन-तीन दिनों की छुट्टी रहेगी। होली पर दो व दुर्गापूजा में 3 दिनों की छुट्टी रहेगी।

विभाग ने जारी आदेश में कहा है कि किसी जिले में विशेष अवसर पर यदि जिला पदाधिकारी किसी प्रकार का अवकाश घोषित करना चाहें तो उन्हें मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। किसी भी स्कूल में प्रधानाध्यापक अपने स्तर से स्कूल में अवकाश की घोषणा नहीं करेंगे, अन्यता उनके विरुद्ध कार्रवाई होगी। सभी स्कूलों में वार्षिकोत्सव, गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती तथा अन्य महापुरुषों की जयंती मनाई जाएगी।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हिंदू त्योहारों के दौरान राज्य के स्कूलों में छुट्टियों की संख्या कथित तौर पर कम करने और मुस्लिम त्योहारों के लिए इसे बढ़ाने के लिए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार के खिलाफ एक और आक्रामक हमला किया।

Bihar News Live Updates: पटना : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 26 वीं बैठक

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  • Bihar News: बिहार सरकार ने 2021 में देश के IAS टॉपर शुभम कुमार की पोस्टिंग कर दी ।
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बिहार कैबिनेट की बैठक में 35 एजेंडे पर मुहर; फ्री बिजली कनेक्शन पेंशनरों का DA 4% बढ़ा

शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल की बैठक में 35 प्रस्तावों पर स्वीकृति दी गई। उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के विदेश दौरे से लौटने के बाद यह बैठक हुई । कैबिनेट की बैठक में 35 एजेंडे पर मुहर, किसानों की योजना के लिए दो हजार करोड़ रुपए से ज्यादा स्वीकृत। दिवाली से पहले पेंशनरों के लिए खुशखबरी, उनका डीए 4% प्रतिशत बढ़ा दिया गया है ।

मुख्यमंत्री कृषि विद्युत संबंध योजना के दूसरे चरण में इच्छुक किसानों के लिए योजना हर खेत को जल के तहत निशुल्क कृषि विद्युत कनेक्शन प्रदान करने के साथ-साथ आवश्यक विद्युत संरचना के निर्माण के लिए 2190 करोड रुपए की नई योजना की स्वीकृति प्रदान की गई। यह जानकारी मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री एस. सिद्धार्थ ने मीडिया से बात करते हुए दी।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के लिए 1063 करोड़ 46 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई। इस राशि से जलापूर्ति संबंधित पूरी व्यवस्था का निर्माण होगा तथा 5 वर्षों तक इसके परिचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी।

nitishkumar

डायल 112 योजना का विस्तारीकरण – अब 112 नंबर पर कॉल करके राज्य के ग्रामीण इलाके के लोग भी आकस्मिक सेवा का लाभ उठा सकेंगे। इसके जरिये पुलिस, एंबुलेंस और आगलगी की घटना की जानकारी इस नंबर पर देकर सरकारी सहयोग पाया जा सकता है। इस नंबर से इंट्रीगेटेड सर्विस मिलेगी। इस योजना पर द्वितीय चरण के लिए 766 करोड़ 71 लाख 35 हजार रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

बिहार कैबिनेट ने चालक भर्ती नियमावली में भी बदलाव किया है। राज्य में हर विभाग में वाहन चालक की बहाली अब तकनीकी चयन आयोग करेगा।

जल संसाधन विभाग के 9 एजेंडों पर कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में ऊर्जा विभाग के तहत न्यू पुनाईचक स्थित आवासीय क्षेत्र में खेल परिसर का निर्माण होगा, जिसके लिए कैबिनेट ने 42.10 करोड़ रुपए स्वीकृत किए।

BPSC 67th final results 2023: पटना के अमन आनंद ने परीक्षा में किया टॉप, जहानाबाद की निकिता को दूसरा रैंक

बिहार लोक सेवा आयोग ने बीपीएससी 67वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (सीसीई) के अंतिम परिणाम 2023 घोषित कर दिए हैं। बीपीएससी 67वीं मुख्य परीक्षा 2023 में उत्तीर्ण होने वाले 2,104 उम्मीदवारों में से कुल 2,090 उम्मीदवार व्यक्तिगत साक्षात्कार में उपस्थित हुए। फाइनल दौर के उम्मीदवार बीपीएससी 67वीं के परिणाम आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in से देख सकते हैं।

BPSC 67वीं मेन्स कट-ऑफ: कुल 802 रिक्तियों के विरुद्ध 799 उम्मीदवारों का चयन किया गया है।

आयोग ने कहा कि साक्षात्कार में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की संयुक्त मेरिट सूची बीपीएससी 67वीं मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त कुल अंकों को जोड़कर तैयार की गई थी।

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आयोग द्वारा अधिसूचित कुल 802 रिक्तियों के विरुद्ध 799 उम्मीदवारों का चयन किया गया है। बीपीएससी 67वीं टॉपर्स सूची के अनुसार, छह महिला उम्मीदवारों ने शीर्ष 10 में स्थान हासिल किया है।

BPSC 67th final results 2023 Topper list : बीपीएससी 67वीं टॉपर्स सूची

1 अमन आनंद
2 निकिता कुमारी
3 अंकिता चौधरी
4 अपेक्षा मोदी
5 सोनल सिंह
6 मुकेश कुमार यादव
7 उज्जवल कुमार
8 शालू कुमारी
9 रूपेश कुमार
10 सोनाली

सुपौल में हाइड्रा क्रेन पलटने से हुई मौत, दुर्घटना में एक की हुई मौत

PRL कम्पनी के प्लांट में हाइड्रा से मशीन हटाने के क्रम में हाइड्रा पलट गया और उसके अंदर दबने से एक सुपरवाइजर की मौत हो गयी

राघोपुर थाना क्षेत्र के फिंगलास पंचायत के नरहा वार्ड नम्बर 05 की घटना

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Bihar BPSC TRE Result 2023 : बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी; हिंदी में 3221 पद के लिए सिर्फ 525 उम्मीदवार सफल हुए

BPSC TRE Result 2023 । बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने अभी 11वीं 12वीं उच्चतर माध्यमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम की घोषणा की है। BPSC ने उच्च माध्यमिक के लिए हिंदी विषय के शिक्षकों का रिजल्ट जारी किया गया है । हिंदी में 3221 पद के लिए सिर्फ 525 उम्मीदवार सफल हुए हैं।

BPSC ने अभी हिंदी विषय का परिणाम अपने ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड किया है। हिंदी विषय में शशिकांत पाण्डेय टॉपर बने हैं। रविशंकर दूसरे और राकेश कुमार पाण्डेय को तीसरा स्थान मिला है। चौथे स्थान पर ऋषिकेश तिवारी हैं और पांचवें परआभास कुमार हैं।

बिहार  शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट bpsc.bih.nic.in पर चेक किया जा सकता है। बिहार लोक प्रशासनिक सेवा ने अगस्त में 1.70 लाख सीट पर शिक्षकों की भर्ती परीक्षा की परीक्षा ली थी जिसके बाद से ही राज्य में परीक्षा के रिजल्ट को लेकर इंतजार था। 

BPSC
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बिहार में उच्च माध्यमिक शिक्षक के पदों की कुल संख्या 57,616 है जिसके लिए 39 हज़ार उमीदवारों ने फॉर्म भरा था। हिंदी में 3221 पद के लिए सिर्फ 525 उम्मीदवार सफल हुए हैं।

BPSC बिहार टीचर भर्ती परीक्षा में पास होने के लिए जनरल कैंडिडेट्स को कम से कम 40 फीसदी मार्क्स, ओबीसी को 36.5 फीसदी, एससी व एसटी को 34 फीसदी और दिव्यांग कैंडिडेट्स को 32 फीसदी मार्क्स लाने जरूरी हैं।

BPSC बिहार टीचर भर्ती 2023 की लिखित परीक्षा पास करने के बाद अब काउंसलिंग होगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आयोग ने कहा है कि काउंसलिंग के समय बीपीएससी के वाटरमार्क के बिना कोई प्रमाण पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। काउंसलिंग और डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन की प्रकिया के बाद कैंडिडेट्स का मेडिकल टेस्ट होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने जाति जनगणना को लेकर बिहार सरकार को भेजा नोटिस, आंकड़ों पर रोक लगाने से किया इनकार

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह बिहार सरकार को जाति जनगणना का विवरण प्रकाशित करने से नहीं रोकेगा, यह कहते हुए कि वह राज्य के नीति निर्धारण निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।

बिहार में जाति जनगणना को लेकर दायर याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ ने पटना उच्च न्यायालय के 1 अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक औपचारिक नोटिस जारी किया, जिसमें बिहार में जाति सर्वेक्षण को मंजूरी दी गई थी। इसने मामले को जनवरी 2024 में सूचीबद्ध किया।

याचिकाकर्ताओं के वकील के अनुसार, जाति जनगणना के आंकड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार एकत्र नहीं किए गए थे और सर्वेक्षण के लिए विवरण एकत्र करने का कोई वैध उद्देश्य नहीं था।

SC ने याचिकाकर्ताओं की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि राज्य सरकार आगे और आंकड़े जारी न करे। पीठ ने कहा, ‘हम इस समय कुछ भी नहीं रोक रहे हैं। हम राज्य सरकार या किसी भी सरकार को नीतिगत निर्णय लेने से नहीं रोक सकते। यह गलत होगा।’

Supreme-court-on-Bihar-caste-based-survey
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याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि मामले में गोपनीयता का उल्लंघन है और हाईकोर्ट का आदेश गलत है। इस पर पीठ ने कहा कि चूंकि किसी भी व्यक्ति का नाम और अन्य पहचान प्रकाशित नहीं की गई है, इसलिए यह तर्क कि गोपनीयता का उल्लंघन हुआ है, सही नहीं हो सकता है।

2 अक्टूबर को, बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले अपनी जाति जनगणना के निष्कर्ष जारी किए। आंकड़ों से पता चला कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) राज्य की कुल आबादी का 63 प्रतिशत हिस्सा हैं।

बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की जल्द रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर SC ने सुनवाई नवंबर तक स्थगित कर दी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई नवंबर तक स्थगित कर दी । पूर्व IAS अधिकारी जी. कृष्णैया की पत्नी की याचिका पर SC ने सुनवाई 3 नवंबर तक के लिए टाल दी ।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ समय की कमी के कारण मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई नहीं कर सकी क्योंकि यह बोर्ड में शीर्ष पर सूचीबद्ध नहीं था और अब इस पर 3 नवंबर को सुनवाई करेगी।

यह याचिका गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी.कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की ओर से दायर की गई है। उमा कृष्णैया की याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार सरकार ने 10 अप्रैल 2023 के संशोधन के जरिए पूर्व व्यापी प्रभाव से बिहार जेल नियमावली 2012 में संशोधन किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोषी आनंद मोहन को छूट का लाभ दिया जाए।

AnandMohan in SC

इससे पहले अगस्त में सुनवाई के दौरान SC ने बिहार सरकार से पूर्व सांसद की रिहाई पर जवाब मांगा था। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जेल मैनुअल में संशोधन के बाद सजा पाने वाले कितने दोषियों को पूर्व सांसद आनंद मोहन के साथ इस साल अप्रैल में रिहा किया गया, इस पर जवाब देते हुए बिहार सरकार ने कोर्ट को बताया कि आनंद मोहन सहित 97 दोषियों को सजा में छूट देकर जेल से रिहा किया गया था। 11 अगस्त को शीर्ष अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी थी और इसे सितंबर के आखिरी सप्ताह में पोस्ट किया था।

1994 में, गोपालगंज के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट कृष्णैया को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था, जब उनके वाहन ने गैंगस्टर छोटन शुक्ला के अंतिम संस्कार के जुलूस को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी। भीड़ को आनंद मोहन सिंह ने उकसाया था। इस मामले मे आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा मिली थी।