गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
मनिकपुर-पारु रोड की घटना

BPSC TRE Result 2023 । बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने अभी 11वीं 12वीं उच्चतर माध्यमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम की घोषणा की है। BPSC ने उच्च माध्यमिक के लिए हिंदी विषय के शिक्षकों का रिजल्ट जारी किया गया है । हिंदी में 3221 पद के लिए सिर्फ 525 उम्मीदवार सफल हुए हैं।
BPSC ने अभी हिंदी विषय का परिणाम अपने ऑफिशियल वेबसाइट पर अपलोड किया है। हिंदी विषय में शशिकांत पाण्डेय टॉपर बने हैं। रविशंकर दूसरे और राकेश कुमार पाण्डेय को तीसरा स्थान मिला है। चौथे स्थान पर ऋषिकेश तिवारी हैं और पांचवें परआभास कुमार हैं।
बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा का रिजल्ट bpsc.bih.nic.in पर चेक किया जा सकता है। बिहार लोक प्रशासनिक सेवा ने अगस्त में 1.70 लाख सीट पर शिक्षकों की भर्ती परीक्षा की परीक्षा ली थी जिसके बाद से ही राज्य में परीक्षा के रिजल्ट को लेकर इंतजार था।

बिहार में उच्च माध्यमिक शिक्षक के पदों की कुल संख्या 57,616 है जिसके लिए 39 हज़ार उमीदवारों ने फॉर्म भरा था। हिंदी में 3221 पद के लिए सिर्फ 525 उम्मीदवार सफल हुए हैं।
BPSC बिहार टीचर भर्ती परीक्षा में पास होने के लिए जनरल कैंडिडेट्स को कम से कम 40 फीसदी मार्क्स, ओबीसी को 36.5 फीसदी, एससी व एसटी को 34 फीसदी और दिव्यांग कैंडिडेट्स को 32 फीसदी मार्क्स लाने जरूरी हैं।
BPSC बिहार टीचर भर्ती 2023 की लिखित परीक्षा पास करने के बाद अब काउंसलिंग होगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आयोग ने कहा है कि काउंसलिंग के समय बीपीएससी के वाटरमार्क के बिना कोई प्रमाण पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। काउंसलिंग और डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन की प्रकिया के बाद कैंडिडेट्स का मेडिकल टेस्ट होगा।
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह बिहार सरकार को जाति जनगणना का विवरण प्रकाशित करने से नहीं रोकेगा, यह कहते हुए कि वह राज्य के नीति निर्धारण निर्णय में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।
बिहार में जाति जनगणना को लेकर दायर याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और एसवीएन भट्टी की पीठ ने पटना उच्च न्यायालय के 1 अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर एक औपचारिक नोटिस जारी किया, जिसमें बिहार में जाति सर्वेक्षण को मंजूरी दी गई थी। इसने मामले को जनवरी 2024 में सूचीबद्ध किया।
याचिकाकर्ताओं के वकील के अनुसार, जाति जनगणना के आंकड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार एकत्र नहीं किए गए थे और सर्वेक्षण के लिए विवरण एकत्र करने का कोई वैध उद्देश्य नहीं था।
SC ने याचिकाकर्ताओं की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि राज्य सरकार आगे और आंकड़े जारी न करे। पीठ ने कहा, ‘हम इस समय कुछ भी नहीं रोक रहे हैं। हम राज्य सरकार या किसी भी सरकार को नीतिगत निर्णय लेने से नहीं रोक सकते। यह गलत होगा।’

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि मामले में गोपनीयता का उल्लंघन है और हाईकोर्ट का आदेश गलत है। इस पर पीठ ने कहा कि चूंकि किसी भी व्यक्ति का नाम और अन्य पहचान प्रकाशित नहीं की गई है, इसलिए यह तर्क कि गोपनीयता का उल्लंघन हुआ है, सही नहीं हो सकता है।
2 अक्टूबर को, बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने 2024 के लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले अपनी जाति जनगणना के निष्कर्ष जारी किए। आंकड़ों से पता चला कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) राज्य की कुल आबादी का 63 प्रतिशत हिस्सा हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिहार के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई नवंबर तक स्थगित कर दी । पूर्व IAS अधिकारी जी. कृष्णैया की पत्नी की याचिका पर SC ने सुनवाई 3 नवंबर तक के लिए टाल दी ।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ समय की कमी के कारण मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई नहीं कर सकी क्योंकि यह बोर्ड में शीर्ष पर सूचीबद्ध नहीं था और अब इस पर 3 नवंबर को सुनवाई करेगी।
यह याचिका गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी.कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की ओर से दायर की गई है। उमा कृष्णैया की याचिका में आरोप लगाया गया है कि बिहार सरकार ने 10 अप्रैल 2023 के संशोधन के जरिए पूर्व व्यापी प्रभाव से बिहार जेल नियमावली 2012 में संशोधन किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दोषी आनंद मोहन को छूट का लाभ दिया जाए।

इससे पहले अगस्त में सुनवाई के दौरान SC ने बिहार सरकार से पूर्व सांसद की रिहाई पर जवाब मांगा था। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जेल मैनुअल में संशोधन के बाद सजा पाने वाले कितने दोषियों को पूर्व सांसद आनंद मोहन के साथ इस साल अप्रैल में रिहा किया गया, इस पर जवाब देते हुए बिहार सरकार ने कोर्ट को बताया कि आनंद मोहन सहित 97 दोषियों को सजा में छूट देकर जेल से रिहा किया गया था। 11 अगस्त को शीर्ष अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी थी और इसे सितंबर के आखिरी सप्ताह में पोस्ट किया था।
1994 में, गोपालगंज के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट कृष्णैया को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था, जब उनके वाहन ने गैंगस्टर छोटन शुक्ला के अंतिम संस्कार के जुलूस को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी। भीड़ को आनंद मोहन सिंह ने उकसाया था। इस मामले मे आनंद मोहन को उम्रकैद की सजा मिली थी।
नई दिल्ली । शुक्रवार को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और 14 अन्य आरोपियों को नौकरी के लिए भूमि घोटाला ( Land For Job Scam ) मामले में नए आरोप पत्र के संबंध में समन जारी किया। सभी राउज एवेन्यू कोर्ट में 4 अक्तूबर को पेश हाेंगे ।
इस मामले में लालू यादव के बेटे और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की 21 सितंबर को दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन सुनवाई टल गई और अब यह सुनवाई आज यानी की 22 सितंबर हुई है । इससे पहले इस मामले की सुनवाई 8 अगस्त को होनी थी, जो टल गई थी, इसके बाद सुनवाई को बढ़ाकर 12 सितंबर तक किया गया था, जिसे कोर्ट 21 सितंबर तक टाल दिया था ।
CBI ने 3 जुलाई को कथित भूमि-नौकरी घोटाले में RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 14 अन्य को नामित करते हुए आरोप पत्र दायर किया था। एजेंसी ने अदालत को सूचित किया था कि लालू और 3 रेलवे अधिकारियों – महीप कपूर, मनोज पांडे और पीएल बनकर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी की आवश्यकता होगी।

गुरुवार को, CBI ने अदालत को सूचित किया कि उन्हें इस सप्ताह की शुरुआत में कपूर, पांडे और बनकर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल गई है। एजेंसी ने पहले अदालत को सूचित किया था कि लालू के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी भी इस महीने की शुरुआत में गृह मंत्रालय से मिल गई थी।
विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने 3 जुलाई को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दायर एक नए आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को समन जारी करते हुए 4 अक्टूबर को उसके सामने पेश होने के लिए कहा है।
Land For Job Scam उस समय का है जब RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव साल 2004 से 2009 के बीच UPA सरकार में रेल मंत्री थे। CBI ने आरोप लगाया है कि 2004 से 2009 के बीच भारतीय रेलवे के विभिन्न जोन में ग्रुप D के पदों पर कई लोगों की नियुक्ति की गई, जिन्होंने अपनी जमीन तत्कालीन रेल मंत्री के परिवार के सदस्यों के नाम कर दी ।
इस मामले में CBI जांच के बाद लालू प्रसाद यादव और उनकी बेटी मीसा भारती के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अब आरोप है कि जो जमीनें ली गईं थी, वो लालू यादव ने पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती के नाम पर ली थी।
Latest News of Bihar – बिहार की इस समय की बड़ी खबरें


पटना । बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने गुरुवार को दो अलग-अलग अधिसूचना जारी कर राज्य के 9 आईएएस अधिकारियों समेत 6 एसडीओ का भी तबादला कर दिया है। सामान्य प्रशासन निभाग की तरफ से तबादले की अधिसूचना जारी कर दी। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 8, भारतीय रेल सेवा (IRSS ) के 1 व बिहार प्रशासनिक सेवा के 6 अधिकारियों को स्थानांतरित कर दिया गया है।




पटना । 16 सितंबर को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उन्हें इस बहिष्कार की जानकारी नहीं थी। उन्होंने उल्लेख किया कि ऐसा लगता है कि केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी ने कुछ पत्रकारों का समर्थन प्राप्त कर लिया है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने I.N.D.I.A के पत्रकार बहिष्कार की जानकारी से इनकार किया। उन्होंने कहा :- ‘
“हम नहीं जानते हैं कौन पत्रकार का सूची निकाला है , ई सब गलत बात है।” “हमको कुछ नहीं पता है , हम सब पत्रकार को सपोर्ट करते हैं।”
I.N.D.I.A गठबंधन ने 14 टीवी एंकरों की एक सूची प्रकाशित की है, जिन्हें आने वाले दिनों में बहिष्कार का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 14 सितंबर को एक मंच पर इस फैसले की घोषणा की और कहा, “यह निर्णय आज पहले आयोजित एक आभासी बैठक के दौरान भारत मीडिया समिति द्वारा किया गया था।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विशिष्ट पत्रकार शो का बहिष्कार करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (I.N.D.I.A) की आलोचना की और उनके दृष्टिकोण को “अत्यधिक दमनकारी, तानाशाही और प्रतिकूल” बताया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए I.N.D.I.A गठबंधन पर बरसे और कहा बिहार में मोदी जी के समर्थन में 2019 के चुनावों का 39 सीट का रिकार्ड टूटेगा, NDA 2024 के आम चुनाव में बिहार की सभी 40 लोकसभा सीटें जीतेगा।
इससे पहले मधुबनी के झंझारपुर में बिहार BJP के अध्यक्ष स्मार्ट चौधरी बोले “इस देश में जो घमंडी गठबंधन के लोग और बिहार में जो लठबंधन के साथी बने हैं इसको उखाड़ कर फेंकने का काम इस झंझारपुर से करेंगे” ।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा- ‘बिहार के अंदर गोलीबारी, लूट, अपहरण, पत्रकारों की हत्या और दलितों की हत्या के किस्से बढ़ते जा रहे हैं’। उन्होंने कहा, “बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति हर दिन खराब होती जा रही है और महागठबंधन की मौजूदगी से आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाएगी।”
केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने कहा ‘कुछ दिन पहले लालू-नीतीश ने फतवा जारी किया कि बिहार में रक्षाबंधन और जन्माष्टमी की छुट्टी नहीं होगी लेकिन इसके बाद जनता ने जो आक्रोश दिखाया मैं उसका सम्मान करता हूं’। ‘बिहार सरकार ने हिंदू त्योहारों की छुट्टियां घटाईं, ये लोग अब सनातन पर हमला कर रहे हैं’ ।
अमित शाह ने कहा- ‘लालू जी एक्टिव हो गए हैं, नीतीश जी इनएक्टिव, अब आप समझ जाओ बिहार कैसा चलेगा’ बिहार में हर तरफ जंगल राज’ हैं । नीतीश-लालू गठबंधन तेल और पानी के मिश्रण की तरह है और “वे लंबे समय तक बरकरार नहीं रह सकते।” उन्होंने दावा किया कि गठबंधन ने राम मंदिर निर्माण का विरोध किया था और इसके निर्माण को रोकने की पूरी कोशिश की थी ।

गृह मंत्री Amit Shah ने कहा कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद और बिहार के मुख्यमंत्री एवं जदयू प्रमुख नीतीश कुमार कभी नहीं चाहते थे कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया जाये ।
उन्होंने कहा, “लालू अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं और नीतीश कुमार पीएम बनना चाहते हैं। लेकिन उनकी इच्छाएं कभी पूरी नहीं होंगी। मोदीजी 2024 में पीएम बनेंगे। अगर मोदीजी दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बने तो पूरा सीमांचल क्षेत्र घुसपैठियों से भर जाएगा। यह वोट बैंक की राजनीति करने के लिए लालू कुछ भी करने के लिए तैयार हैं।
केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने कहा लालू जी गरीबों की बात करते हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि उन्होंने गरीबों के लिए क्या किया है? मोदी जी ने 86 लाख किसानों को हर साल 6,000 रुपये दिये और बिहार के किसानों के खाते में सीधे 19,800 करोड़ रुपये ट्रांसफर किये। मिथिला के मखाने को जीआइ टैग देने का काम मोदीजी ने किया। किसानों को इससे फायदा होगा। सवा चार सौ करोड़ की लागत से कई स्टेशनों का पुन: विकास करने का काम हमारी सरकार कर रही है। मैं लालू जी से पूछ रहा हूं। 10 साल आप केंद्र में मंत्री थे, बिहार को क्या दिया।
दरभंगा AIIMS पर गृह मंत्री अमित शाह का नीतीश कुमार को जवाब, ‘नीतीश जी जरा गड्ढे वाली जमीन में झुककर देखिए और बताइए इसमें AIIMS कहां बनेगा’ ।
Amit Shah ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण ही अफ्रीकी संघ को G-20 में शामिल किया गया। शाह ने कहा कि चंद्रयान जब लैंड किया तो मन आनंद से भर गया। यह भारत के आर्थिक विकास का नक्शा खींचने वाला है। कई देश भारत के साथ व्यापार करने को लालायित हैं। उन्हें भारत पर विश्वास है। मोदी जी ने G-20 के माध्यम से भारत को विश्व में स्थापित किया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज 16 सितंबर को बिहार दौरे पर रहेंगे । आगामी Lok Sabha Election 2024 को लेकर BJP पार्टी के कद्दावर नेता बिहार का दौरा कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज अमित शाह बिहार का दौरा करेंगे। गृह मंत्री का पिछले एक साल में बिहार का छठा दौरा होगा।
गृहमंत्री के आगमन को लेकर सीमा पर तैनात सशस्त्र सुरक्षा बलों के द्वारा सीमा पर ज्वाइंट पेट्रोलिंग कराई जा रही है। सीमावर्ती इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भारत-नेपाल के जोगबनी स्थित इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट पर जाने का कार्यक्रम है। अमित शाह यहां पर SSB जवानों के लिए आवासीय भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही SSB 56 बटालियन स्थित भवन का भी ऑनलाइन उद्घाटन करेंगे।

गृहमंत्री अमित साह एक बजकर दस मिनट पर दरभंगा एयरपोर्ट से हेलीकॉप्टर से चलेंगे और एक बजकर 25 मिनट पर झंझारपुर स्टेडियम पहुंचेंगे। एक बजकर तीस मिनट पर वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे। झंझारपुर के ललित कर्पूरी स्टेडियम में दोपहर 2 बजे एक रैली को करेंगे संबोधित।
यह इलाका लालू यादव का गढ़ है। यादव और मुस्लिम, आरजेडी का MY समीकरण माना जाता है। झंझारपुर की जनसभा से अमित शाह एक साथ दो इलाकों को साधेंगे। मिथिलांचल में अमित शाह जहां पर अपनी यह सभा करेंगे यह इलाका ( दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर सुपौल, मधेपुरा, सहरसा ) सबसे अधिक यादव और मुस्लिम समुदाय बहुल क्षेत्र है। अमित शाह अपनी इस रैली से लालू के परंपरागता वोटरों में सेंघमारी करने का प्रयास करेंगे।
बिहार दौरा के क्रम में अमित शाह आज BJP कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगे। जोगबनी में लगभग एक हजार बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक होनी है जिसमें वे उन्हें 2024 चुनाव को लेकर गुरुमंत्र देंगे । माना जा रहा है कि अमित शाह बिहार दौरे पर 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए उनके साथ बैठक भी करेंगे।
कुल 2104 अभ्यर्थी हुए सफल
मुख्य परीक्षा 30, 31 दिसंबर 2022 और 7 जनवरी 2023 को पटना में आयोजित की गई थी

बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जाकर रिजल्ट देख सकते हैं

अभ्यर्थी BPSC 67th Mains Result 2023 ऐसे करें चेक
BPSC 67th मुख्य परीक्षा में हुए सभी सफल कैंडिडेट्स का 120 अंको का इंटरव्यू होगा, जिसके बाद ही फाइनल मेरिट लिस्ट घोषित की जाएगी। मुख्य परीक्षा रिजल्ट के 15 दिन बाद कैंडिडेट्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा, इंटरव्यू के एडमिट कार्ड इंटरव्यू तिथि के 1 सप्ताह पहले आधिकारिक वेबसाइट पर bpsc.bih.nic.in उपलब्ध कराये जाएंगे।
गुरुवार को हिंदी दिवस पर बिहार हिंदी ग्रंथ आकादमी में आयोजित कार्यक्रम को शिक्षा मंत्री संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने यह बयान दिया। उन्होंने हिंदू धार्मिक ग्रंथ रामचरितमानस की तुलना पोटेशियम साइनाइड से की। यह पहली बार नहीं है जब बिहार के मंत्री ने रामचरितमानस पर अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा किया है।
शिक्षा मंत्री चंद्र शेखर ने कहा, “यदि आप पचपन प्रकार के व्यंजन परोसें और उसमें पोटेशियम साइनाइड मिलाएं, तो क्या आप इसे खाएंगे? हिंदू धर्म के ग्रंथों का भी यही हाल है।” उन्होंने कहा कि बाबा नागार्जुन और लोहिया समेत कई लेखकों ने भी इसकी आलोचना की है।

“रामचरितमानस पर मेरी आपत्ति दृढ़ है, और यह जीवन भर बनी रहेगी। यहां तक कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी इस पर टिप्पणी की है, ”बिहार के मंत्री ने कहा।
उन्होंने कहा, “जब तक गटर में कदम रखने वालों की जातियां नहीं बदली जाएंगी, इस देश में आरक्षण और जाति जनगणना की जरूरत रहेगी।”
शिक्षा मंत्री चंद्र शेखर के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा। BJP प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, ”मंत्री चंद्र शेखर लगातार रामचरितमानस पर विवादित बयान दे रहे हैं। क्या नीतीश कुमार को यह बात सुनाई नहीं दे रही है? नीतीश कुमार लगातार सनातन का अपमान कर रहे हैं।”
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि चन्द्रशेखर को इससे कोई दिक्कत है तो उन्हें अपना धर्म बदल लेना चाहिए।
यह पहली बार नहीं है जब चंद्र शेखर ने रामचरितमानस पर अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा किया है। जनवरी में RJD मंत्री ने कहा था कि रामचरितमानस ‘समाज में नफरत फैलाता है’।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर BJP-RJD के नारों से भरी राजधानी पटना की दिवार। जिससे चुनावी माहौल अभी से बनना तैयार हो गया है।
राजधानी पटना की सड़क के किनारे की दीवार पर तरह-तरह के नारे लिखे गए है। BJP द्वारा लिखवाए गए नारे के जवाब में RJD द्वारा भी नारे लिखवाए गए हैं।
पटना में आर ब्लॉक ब्रिज की दीवारों पर एक-दूसरे के बगल में ही भाजपा और राजद के नारे लिखे हुए हैं।

RJD के नारे
“मोदी सरकार से चाहिए छुटकारा, किसानों का है स्पष्ट इशारा”,
“मोदी सरकार से चाहिए छुटकारा, नौजवानों का है स्पष्ट इशारा”
“गरीबों का उपहास किया, मोदी सरकार ने जनता को निरासग किया”,
” बहुत हो चुकी महंगाई की मार, अबकी बार बदलेगी मोदी सरकार”
BJP के नारे
“घमंडीया गठबंधन, ना नीति, ना नियत, ना नेता”,
परिवारवाद से बनाना दूरी है, फिर एक बार मोदी जरुरी है”,
“दिया ना शिक्षा, ना दिया रोजगार,
पलटू कुमार को कबतक सहेगा बिहार”,
“हर मोर्चे पर असफल,
राष्ट्रीय जनता दल” ,
“कभी आपका तो कभी हमारा यार है,
असली बेवफा तो नीतीश कुमार है”
नई दिल्ली। मंगलवार को लैंड फॉर जॉब घोटाला (Land for Job Scam) मामले में गृह मंत्रालय ने लालू यादव के खिलाफ CBI को केस चलाने की अनुमति दे दी है। इसकी जानकारी सीबीआई ने इस बात की जानकार एवेन्यू कोर्ट को दी गई। दलीलों पर गौर करते हुए अदालत ने मामले को 21 सितंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
विशेष लोक अभियोजक अधिवक्ता डीपी सिंह के माध्यम से सीबीआई ने विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल को सूचित किया कि लालू प्रसाद के खिलाफ मंजूरी गृह मंत्रालय से मिल गई है, लेकिन रेलवे के तीन पूर्व अधिकारियों के खिलाफ मंजूरी अभी तक नहीं मिली है। सीबीआई ने आगे कहा कि शेष मंजूरी एक सप्ताह के भीतर प्राप्त होने की उम्मीद है।
लालू यादव 2004 से 2009 तक रेल मंत्री रहे थे। माना जा रहा है कि लालू के ऊपर रेलवे में नौकरी के बदले जमीन रजिस्ट्री कराने का मालला दर्ज था। इस मामले में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद की मुश्किलें बढ़ने वाली है।

इसके साथ ही इस मामले में डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के खिलाफ सीबीआई की तरफ से दायर चार्जशीट पर सुनवाई एक बार फिर से टल गई है। दिल्ली का राउज एवेन्यू कोर्ट में अब 21 सितंबर को मामले की सुनवाई होगी।
हाल ही में CBI ने लैंड फॉर जॉब कथित घोटाला मामले में लालू प्रसाद समेत बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है।
CBI के अनुसार, तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री, उनकी पत्नी, बेटे, पश्चिम मध्य रेलवे (डब्ल्यूसीआर) के तत्कालीन जीएम, डब्ल्यूसीआर के दो सीपीओ, निजी व्यक्तियों सहित 17 आरोपियों के खिलाफ नामित अदालत में यह दूसरा आरोपपत्र है। नौकरी के बदले जमीन घोटाले से संबंधित एक मामले में कंपनी भी शामिल है।
सनातन धर्म को लेकर लालू प्रसाद यादव की पार्टी RJD के बिहार अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बयान पर विवाद हो गया है। जगदानंद सिंह ने कहा कि टीका लगाकर घूमने वालों ने भारत को गुलाम बनाया है। भारत जब गुलाम हुआ तो न कर्पूरी ठाकुर थे, न लालू प्रसाद थे, न राम मनोहर लोहिया थे। सिर टीका लगाकर घूमने वालों के कारण भारत गुलाम बना।
हालाँकि JDU ने जगदानंद सिंह के बयान से किनारा किया है । JDU नेता और बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बने जमा खान ने कहा कि जदयू और जदयू के नेता नीतीश कुमार सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि जगदानंद सिंह को इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। देश में आपसी प्रेम और भाईचारा बना रहे यह हर किसी की जिम्मेवारी है।
जगदानंद सिंह ने RSS एवं BJP पर भी हमला बोला और कहा कि ये सिर्फ हिंदू मुसलमान करने में जुटे हैं, हिंदू- मुसलमान में भारत को बांटने से काम नहीं चलेगा। बना लो मंदिर और तोड़ तो मस्जिद, इससे भारत नहीं चलेगा। उन्होंने सनातन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिसमें भेदभाव हो, लोगों को जाति के नाम पर बांटा जाए, वो धर्म नहीं होता है।

इस बयान ने बिहार में सियासी घमासान मच गया। BJP इसका विरोध कर रही है। जगदानंद सिंह के बयान पर पटलवार करते हुए BJP प्रवक्ता अरविंद सिंह ने बताया कि भारत को वैसे टीकाधारी लोगों ने गुलाम बनाया था जो कुर्सी के लिए सत्ता के लिए, पद के लिए और राज के लिए अपना जमीर, जागीर और धर्म तक बेच दिया। उसी तरह से आज भी सावन में जानवरों का मांस पकाया और खाया जाता है सत्ता के लिए।
कुछ लोग मुख्यमंत्री बनने के लिए नकली बाइबिल और कुछ लोग प्रधानमंत्री बनने के लिए नकली जनेऊ धारण कर रहे हैं। ऐसे लोगों से देश को सावधान रहना होगा। पुत्र के लिए और सत्ता के लिए जो अपने धर्म का नहीं हो सका वह इस देश का क्या होगा। वह सबको बेच सकता है। और जो परवचन दे रहे हैं वह सबकुछ बेच चुके हैं।
बिहार की नीतीश सरकार पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का बड़ा आरोप ‘कल संभव है कि बिहार में शरिया लागू कर दी जाये और हिंदू त्योहार मनाने पर रोक लग जाये’।
गिरिराज सिंह ने ये X किया है
शिक्षा विभाग,बिहार सरकार द्वारा दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पूजा की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
— Shandilya Giriraj Singh (मोदी का परिवार) (@girirajsinghbjp) August 30, 2023
कल संभव है कि बिहार में शरिया लागू कर दी जाये और हिंदू त्योहार मनाने पर रोक लग जाये।
दरअसल, बिहार सरकार के माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से मंगलवार को पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक विद्यालयों में कम-से-कम 200 दिन और मध्य विद्यालयों में कम से कम 220 दिन क्लास चलना चाहिये। लेकिन चुनाव, परीक्षा, विधि-व्यवस्था, त्योहार, अनुष्ठान संबंधी आयोजन, बाढ़, प्राकृतिक आपदाओं, विभिन्न प्रकार के आयोग की परीक्षाओं /भर्ती परीक्षाओं के कारण स्कूलों में पढाई प्रभावित हो जाती है। इसके अलावा त्योहारों और अनुष्ठानों के मौके पर स्कूलों बंद होने की प्रक्रिया में एकरूपता नहीं है।

ऐसे में शिक्षा विभाग ने ये निर्णय लिया है कि सभी राजकीय / राजकीयकृत / प्रारंभिक और माध्यमिक/ उच्च माध्यमिक विद्यालयों में साल 2023 के बचे हुए दिनों के लिए एक समान अवकाश होगा।

शिक्षा विभाग के नये आदेश ने बिहार के सरकारी स्कूलों में इस साल की 15 दिनों की छुट्टियां रद्द की है। पहले से घोषित छुट्टी के मुताबिक 30 अगस्त से 31 दिसंबर तक सरकारी स्कूलों में 25 दिन की छुट्टी होनी थी। लेकिन शिक्षा विभाग ने इसमें से 15 दिनों की छुट्टी रद्द कर दी है।
रद्द छुट्टियां ये हैं…
अहम बात ये है कि जन्माष्टमी जैसे पर्व पर केंद्र सरकार ने एनआई एक्ट के तहत छुट्टी घोषित कर रखी है। यानि सारे सरकारी दफ्तर से लेकर बैंक तक उस दिन बंद रहेंगे लेकिन बिहार के सरकारी स्कूलों को खोलने का आदेश दिया गया है। बिहार सरकार ने 21 अक्टूबर को दुर्गा पूजा के महासप्तमी की छुट्टी घोषित कर रखी है। लेकिन शिक्षा विभाग ने महासप्तमी को स्कूल खोलने का आदेश जारी कर दिया है।
पटना । रविवार को बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने व्यापक पैमाने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग की । बिहार प्रशासनिक सेवा के चार दर्जन अफसरों के साथ IAS अफसर का भी स्थानांतरण आदेश जारी किया। तबादले किये अधिकारीयों में कई अनुमंडल पदाधिकारी और लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के साथ ही परिवहन एवं अन्य विभागों के अधिकारी शामिल है। इसमें कई अधिकारियों को नई जिम्मेवारी दी गई है तो कई कई अधिकारियों को साइडलाइन किया गया है।
बिहार सरकार ने 21 अनुमंडल में नए SDO की पोस्टिंग की है। बिहार प्रशासनिक सेवा के मूल कोटि और उप सचिव स्तर के अफसरों का ट्रांसफर किया गया है। कुल 48 अधिकारी इधर से उधर हुए हैं। 48 में से कुल 22 अधिकारियों को अनुमंडल पदाधिकारी के पद पर तैनाती की गई है। अनीता सिंह को अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी जहानाबाद बनाया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना रविवार को जारी की है।
Bihar Transfer-Posting : जानें कहां-कहां हुई ट्रांसफर-पोस्टिंग

नई दिल्ली । बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से बिहार के कई परियोजनाओं को लेकर मुलाकात की। तेजस्वी यादव ने कहा कि नितिन गडकरी से बहुत सकरात्मक बातचीत हुई है। नितिन गडकरी एक सकरात्मक व्यक्ति है और वो विकास को लेकर बहुत सकरात्मक रहते हैं।
दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। बातचीत के दौरन डिप्टी सीएम तेजस्वी ने केंद्रीय मंत्री से बिहार में एक्सप्रेसवे नहीं होने पर बात की। मुलाकात के दौरान तेजस्वी ने बिहार में परिवहन के विकास से जुड़ी कई मांगें रखीं।

बैठक में बक्सर से भागलपुर तक एक्सप्रेसवे, गंगा पर जेपी सेतु के समानांतर पुल, पटना से कोइलवर और अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण की मांग की गई. इसके अलावा केंद्र की लंबे अरसे से लंबित परियोजनाओं जैसे पटना-गया, हाजीपुर-छपरा, महेशखूंट-सहरसा-पूर्णिया एनएच, मुजफ्फरपुर बाईपास को शीघ्र पूर्ण कराने पर भी विमर्श हुआ।
मुलाकात के बाद तेजस्वी ने कहा कि नितिन गडकरी ने अपनी विशेष गाड़ी ‘हाइड्रोजन कार’ आजमाने के लिए कहा और इससे वो अपने आवास चल रहे हैं। यह कार इसलिए भी अहम है क्योंकि इस कार की अभी देश में टेस्टिंग चल रही है। यह कार सिर्फ नितिन गडकरी के पास है जो इस कार में सफर करते हैं।
Bihar Teacher Exam 2023 : बिहार में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा सबसे बड़ी शिक्षक नियुक्ति परीक्षा 24 से 26 अगस्त तक दो पालियों में आयोजित की जा रही है। 1.70 लाख पदों के लिए 8.10 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन दिया है। पटना में 40 सेंटर तो सूबे में 876 सेंटर पर इस परीक्षा का आयोजन हो रहा है।
बिहार के जिला और पुलिस प्रशासन को परीक्षा को कदाचार मुक्त कराने का निर्देश दिया है। सभी केन्द्रों पर धारा 144 लागू रहेगा। हर केन्द्र पर पर्यवेक्षक रहेंगे। परीक्षा केन्द्र के 100 गज के अंदर किसी को रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी। परीक्षा को लेकर अफवाह फैलाने वालों पर विशेष नजर रखी जाएगी। खासकर फर्जी प्रश्न पत्र वायरल करने वाले गैंग पर प्रशासन की विशेष नजर होगी।
कोई भी बिना अनुमति के परीक्षा केन्द्र से बाहर नहीं निकल सकते । परीक्षा में प्रश्न पत्र सीधे परीक्षा हॉल में भेजा जाएगा और अभ्यर्थियों के समक्ष खोला जाएगा। परीक्षा समाप्ति के बाद OMR सीट सील होगी। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। इसबार आयोग ने OMR बॉक्स को सील करने के लिए एक जैकेट तैयार किया है।
Bihar Teacher Exam 2023 : जाने परीक्षा के नियम और निर्देश

परीक्षा केंद्र सभी 38 जिलों में बनाए गए हैं। तीन दिन तक चलने वाली परीक्षा को देखते हुए सभी जिला मुख्यालयों के होटल और लॉज की बुकिंग अभ्यर्थियों ने पहले ही करा ली है। होटल में कमरे फुल हो चुके हैं। अभ्यर्थी सगे- संबंधियों और जाननेवालों के यहां भी पहुंच रहे हैं।
पटना हाईकोर्ट ने राज्य में जाति सर्वेक्षण के दौरान ट्रांसजेंडरओं को जाति की सूची में रखने के खिलाफ दायर हुई जनहित याचिका को निष्पादित करते हुए यह कहा है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को भूल वश ही जाति की सूची में दर्ज किया गया है। उन्हे इस सर्वेक्षण में एक जाति विशेष ना मानते हुए एक अलग ग्रुप माना जाए जिनकी अपनी एक निश्चित पहचान है।
चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने रेशमा प्रसाद की जनहित याचिका पर सुनवाई की।इन्ही ग्रुप के सदस्यों की सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक हालात से जुड़े जो आंकड़े जुटाए गए, वही तय करेंगे कि ट्रांस जेंडर के सामाजिक उत्थान के लिए उन्हे कल्याणकारी योजनाओं की कितनी ज़रूरत है ।
याचिकाकर्ता जो स्वयं एक ट्रांसजेंडर समुदाय से है, उसने हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि जाति सर्वेक्षण के आंकड़े जुटाना में एन्यूमैरेटरों को जो फार्म दिया गया है, उस फॉर्म में ट्रांसजेंडर को जाति की सूची में उल्लेखित किया गया है।

ये ट्रांसजेंडरों के अलग अस्तित्व एवं पहचान होने के मौलिक अधिकार का हनन है।राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि 24 अप्रैल,2023 को ही सभी जिला अधिकारियों को यह सूचित किया गया कि वह ट्रांसजेंडररो का जेंडर तय करने के लिए महिला पुरुष के साथ एक तीसरा विकल्प (बॉक्स )भी रखे,जो “अन्य” के नाम से जाना जाएगा ।
ट्रांसजेंडर इसी तीसरे विकल्प को भरेंगे।साथ ही वे जिस जाति से होंगे, वो जाति का उल्लेख करेंगे।
हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि जाति सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, इसलिए जनहित याचिकाकर्ता को या उसके ट्रांसजेंडर समुदाय के किसी भी सदस्यों को यह छूट दिया कोर्ट ने कि वह अपने जेंडर को तीसरे विकल्प में और अपनी जाति, जिसमें वह आते हैं।उसे जाति का विकल्प चुनने के लिए राज्य सरकार को अलग से अर्ज़ी दे सकते है।
मॉनसून की सक्रियता से बिहार में पिछले कुछ दिनों से झमाझम बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने शनिवार 12 अगस्त को भी उत्तर बिहार में कुछ जगहों पर भारी बरसात की चेतावनी जारी की है।
सावन में बिहार के लोगों ने उमस भरी गर्मी झेला है। बारिश के बाद एक बार फिर उमस भरी गर्मी से सभी परेशान हुए। लोग लंबे समय से यहां झमाझम वर्षा का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद बारिश की गतिविधि बढ़ी है। 3 दिनों से बारिश हो रही है ।
बिहार में बारिश को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। वर्षा, मेघ गर्जन और ठनका की चेतावनी है। राज्यभर में विभाग ने अलर्ट जारी किया है।

मौसम विज्ञान केंद्र पटना के पूर्वानुमान के मुताबिक शनिवार को पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी और सुपौल जिले के कुछ इलाकों में अति भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से सावधान रहने के लिए कहा गया है। वहीं, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, शिवहर, सहरसा एवं पूर्णिया जिले में भी कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका है।
बिहार में झमाझम बारिश का दौर फिलहाल एक-दो दिन और चलेगा। 14 अगस्त के बाद मॉनसून संबंधी गतिविधियों में कमी आने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को बीते 24 घंटे के भीतर दरभंगा और मधुबनी जिले में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। दरभंगा के हायाघाट में 89, घनश्यामपुर में 88 और मधुबनी के मधेपुर में 86 मिलमीटर पानी गिरा।
पश्चिम चंपारण समेत चार जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, तो मुजफ्फरपुर और पूर्णिया समेत पांच जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी हुआ है। इसके साथ ही उत्तर, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व बिहार सीमांचल में शनिवार को वज्रपात यानी ठनका गिरने की भी आशंका है।
SC ने शुक्रवार को बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन की समयपूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली पूर्व IAS अधिकारी जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और दीपांकर दत्ता की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की तारीख 26 सितंबर तय करते हुए कहा, हम इसे सितंबर में किसी भी गैर-विविध दिन पर उठाएंगे।
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व सांसद आनंद मोहन को मिली सजा में छूट के संबंध में मूल रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश किया है।
शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता जी कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया को मामले से संबंधित मूल फाइलों की प्रति प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार के समक्ष आवेदन करने को कहा।

सुनवाई के दौरान, बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने पीठ को अवगत कराया कि बिहार सरकार ने एक ही दिन में 97 दोषी व्यक्तियों की सजा में छूट पर विचार किया और उसने केवल गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन सिंह को सजा में छूट नहीं दी। इस पर, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कहा, क्या इन सभी 97 लोगों पर एक लोक सेवक की हत्या का आरोप लगाया गया था? उनका मामला यह है कि आनंद मोहन को रिहा करने के लिए नीति बदल दी गई।
जवाब में वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा कि वह उन दोषियों को वर्गीकृत करते हुए एक विस्तृत प्रतिक्रिया दाखिल करेंगे, जिन्हें उनके अपराध के आधार पर छूट दी गई है । सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को 2 सप्ताह की अवधि के भीतर एक अतिरिक्त जवाबी हलफनामा दायर करने की अनुमति दी ।
इसने याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर हलफनामा, यदि कोई हो, दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की अवधि भी दी। मारे गए नौकरशाह की विधवा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने उन्हें मामले से संबंधित आधिकारिक फाइलों की प्रति नहीं दी है।
जस्टिस संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने पटना हाईकोर्ट द्वारा जातीय सर्वेक्षण के मामलें में 1 अगस्त, 2023 को दिये फैसले के खिलाफ गैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘एक सोच एक प्रयास’ की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की।
वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने यह कहते हुए मामले की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया कि इसी मुद्दे पर सुनवाई वाली अन्य याचिकाएं सूचीबद्ध नहीं हैं। उन्होंने पीठ से मामले की सुनवाई 11 अगस्त या 14 अगस्त को करने का अनुरोध किया। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी मामले की सुनवाई 14 अगस्त को करने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने सहमति जताई।
NGO ‘एक सोच एक प्रयास’ की याचिका के अलावा एक अन्य याचिका नालंदा निवासी अखिलेश कुमार ने दायर की है। इसमें दलील दी गई है कि इस कवायद के लिए राज्य सरकार की अधिसूचना संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार केवल केंद्र सरकार ही जनगणना कराने का अधिकार रखती है।
इससे पहले पटना हाईकोर्ट अपने फैसले में जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को रद्द कर दिया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया था कि पटना हाईकोर्ट के इस मामलें में दिये गये फैसला का अध्ययन कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

इसके पूर्व राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केवियट दायर कर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि इस सम्बन्ध में कोई आदेश पारित करने के पहले राज्य सरकार का भी पक्ष सुना जाये।राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के जातीय सर्वेक्षण के सम्बन्ध में आदेश आने के बाद बड़ी जोर शोर से पुनः जातीय सर्वेक्षण का कार्य प्रारम्भ कर दिया है ।
इससे पूर्व पटना हाईकोर्ट ने मई,2023 में राज्य सरकार द्वारा जातीय सर्वेक्षण कराये जाने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।इसके बाद राज्य सरकार द्वारा कराये जा रहे जातीय सर्वेक्षण पर तत्काल विराम लग गया।
पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने 3 जुलाई,2023 से 7 जुलाई,2023 तक पांच दिनों की लम्बी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा।1अगस्त,2023 को पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को ख़ारिज कर दिया।
पटना हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गयी है।इस मामलें पर सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई किये जाने की संभावना है ।
पटना हाईकोर्ट द्वारा जातीय सर्वेक्षण के मामलें में 1अगस्त,2023 को दिये फैसले को अखिलेश कुमार ने एक याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट चुनौती दी गयी है। जिसपर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज होगी । सुप्रीम कोर्ट की वकील तान्याश्री व अधिवक्ता ऋतु राज ने अखिलेश कुमार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया है।
पटना हाईकोर्ट अपने फैसले में जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को रद्द कर दिया था।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया था कि पटना हाईकोर्ट के इस मामलें में दिये गये फैसला का अध्ययन कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
इसके पूर्व राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केवियट दायर कर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि इस सम्बन्ध में कोई आदेश पारित करने के पहले राज्य सरकार का भी पक्ष सुना जाये।राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के जातीय सर्वेक्षण के सम्बन्ध में आदेश आने के बाद बड़ी जोर शोर से पुनः जातीय सर्वेक्षण का कार्य प्रारम्भ कर दिया है ।

इससे पूर्व पटना हाईकोर्ट ने मई,2023 में राज्य सरकार द्वारा जातीय सर्वेक्षण कराये जाने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।इसके बाद राज्य सरकार द्वारा कराये जा रहे जातीय सर्वेक्षण पर तत्काल विराम लग गया।
पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने 3 जुलाई,2023 से 7 जुलाई,2023 तक पांच दिनों की लम्बी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा।1अगस्त,2023 को पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को ख़ारिज कर दिया।
पटना हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गयी है।इस मामलें पर सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई किये जाने की संभावना है ।
पटना हाईकोर्ट ने भागलपुर के पास अगवानी घाट पर गंगा नदी के ऊपर बन रहे पुल के ध्वस्त होने के मामलें पर सुनवाई की। अधिवक्ता मणिभूषण सेंगर व ललन कुमार की जनहित याचिकायों पर चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए निर्माण कंपनी एस पी सिंगला को हलफ़नामा दायर कर अंडरटेकिंग देने को कहा कि वह अपने खर्च से इस पुल के ध्वस्त भाग का निर्माण करेगा। इस मामलें पर अगली सुनवाई 25 अगस्त,2023 को होगी।
विकास कुमार मेहता की ओर से कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत करते हुए वरीय अधिवक्ता एस डी संजय ने कहा कि राज्य सरकार की रिपोर्ट की कॉपी उन्हें दी जाये। उस रिपोर्ट की कॉपी का अध्ययन करने के बाद वे अपना पक्ष कोर्ट के समक्ष रखेंगे।
इससे पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को घटना की पूरी जानकारी देते हलफ़नामा दायर करने का निर्देश दिया था। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर हलफ़नामा का जवाब देने के लिए याचिकाकर्ताओं को पुनः दो सप्ताह का समय दिया था।पिछली सुनवाई में कोर्ट में एस पी सिंगला कंपनी के एम डी एस पी सिंगला उपस्थित थे।
इससे पूर्व जस्टिस पूर्णेन्दु सिंह की सिंगल बेंच ने ग्रीष्मावकाश के दौरान ललन कुमार की याचिका पर सुनवाई की थी।उन्होंने गंगा नदी पर बन रहे खगड़िया के अगुबानी – सुल्तानगंज के निर्माणाधीन चार लेन पुल के ध्वस्त होने के मामलें को गंभीरता से लेते हुए निर्माण करने वाली कंपनी के एम डी को 21जून,2023 को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

इस मामलें में अधिवक्ता मणिभूषण प्रताप सेंगर ने एक जनहित याचिका दायर की थी।उन्होंने अपनी जनहित याचिका में कहा कि भ्रष्टाचार, घटिया निर्माण सामग्री और निर्माण कंपनी के घटिया कार्य से ये पुल दुबारा टूटा है।ये पुल 1700 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा था ।
उन्होंने इस याचिका में कहा है कि इस मामलें की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराये जाने या न्यायिक जांच कराया जाये।जो भी दोषी और जिम्मेदार है,उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने अपने जनहित याचिका में ये मांग की है कि इस निर्माण कंपनी को लिस्ट कर इससे और अन्य जिम्मेदार और दोषी लोगों से इस क्षति की वसूली की जाये।
कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता एस डी संजय व राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही और सरकारी अधिवक्ता अमीश कुमार ने पक्ष प्रस्तुत किया। इन मामलों पर अगली सुनवाई 25 अगस्त, 2023 को की जाएगी।
पटना हाईकोर्ट द्वारा जातीय सर्वेक्षण के मामलें में 1अगस्त,2023 को दिये फैसले को अखिलेश कुमार ने एक याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट चुनौती दी गयी है। सुप्रीम कोर्ट की वकील तान्याश्री व अधिवक्ता ऋतु राज ने अखिलेश कुमार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किया है।
पटना हाईकोर्ट अपने फैसले में जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को रद्द कर दिया था।याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया था कि पटना हाईकोर्ट के इस मामलें में दिये गये फैसला का अध्ययन कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
इसके पूर्व राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केवियट दायर कर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि इस सम्बन्ध में कोई आदेश पारित करने के पहले राज्य सरकार का भी पक्ष सुना जाये।राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के जातीय सर्वेक्षण के सम्बन्ध में आदेश आने के बाद बड़ी जोर शोर से पुनः जातीय सर्वेक्षण का कार्य प्रारम्भ कर दिया है ।

इससे पूर्व पटना हाईकोर्ट ने मई,2023 में राज्य सरकार द्वारा जातीय सर्वेक्षण कराये जाने पर अंतरिम रोक लगा दी थी।इसके बाद राज्य सरकार द्वारा कराये जा रहे जातीय सर्वेक्षण पर तत्काल विराम लग गया।
पटना हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने 3 जुलाई,2023 से 7 जुलाई,2023 तक पांच दिनों की लम्बी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा।1अगस्त,2023 को पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के जातीय सर्वेक्षण को सही ठहराते हुए इसके विरुद्ध दायर सभी याचिकायों को ख़ारिज कर दिया।
पटना हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी गयी है।इस मामलें पर सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई किये जाने की संभावना है ।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने जातीय जनगणना के मुद्दे पर हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि बिहार में जातीय जनगणना कराने का निर्णय उस राज्य सरकार का था, जिसमें भाजपा शामिल थी और उस समय राजद विपक्ष में था।
श्री मोदी ने कहा कि जातीय जनगणना के विरुद्ध याचिका दायर करने वाले का भाजपा से कोई संबंध नहीं है। राजद इसका श्रेय लेने के लिए अनर्गल आरोप न लगाये।

उन्होंने कहा कि भाजपा ऐसी दोमुंही राजनीति नहीं करती कि जिसके खिलाफ जाँच एजेंसियों को सबूत जुटा कर दें, उसी से हाथ मिला कर सत्ता हथिया लें।
श्री मोदी ने कहा कि भाजपा पहले भी जातीय जनगणना के पक्ष में थी, आज हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करती है और आगे भी जातीय जनगणना का समर्थन करेगी, ताकि सभी पिछड़ी जातियों को विकास की मुख्यधारा में लाने वाले कार्यक्रम लागू हो सकें।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार ने मजबूती से पैरवी की होती और संवैधानिक प्रश्नों का उत्तर ठीक से दिया होता, तो जातीय जनगणना पर बीच में रोक नहीं लगती।
श्री मोदी ने कहा कि कानूनी बाधाएँ दूर होने के बाद राज्य सरकार को जातीय जनगणना का काम अब तेजी से पूरा करना चाहिए।
पटना हाइकोर्ट कल 1अगस्त,2023 को राज्य सरकार द्वारा राज्य में जातियों की गणना एवं आर्थिक सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय देगा। चीफ जस्टिस के वी चंद्रन की खंडपीठ ने इस सम्बन्ध में 3 जुलाई,2023 से पांच दिनों की लम्बी सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रखा था।
पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी के शाही ने कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत किया था ।उन्होंने कहा कि ये सर्वे है,जिसका उद्देश्य आम नागरिकों के सम्बन्ध आंकड़ा एकत्रित करना,जिसका उपयोग उनके कल्याण और हितों के
किया जाना है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि जाति सम्बन्धी सूचना शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश या नौकरियों लेने के समय भी दी जाती है।एडवोकेट जनरल शाही ने कहा कि जातियाँ समाज का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हर धर्म में अलग अलग जातियाँ होती है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस सर्वेक्षण के दौरान किसी भी तरह की कोई अनिवार्य रूप से जानकारी देने के लिए किसीको बाध्य नहीं किया जा रहा है ।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि जातीय सर्वेक्षण का कार्य लगभग 80 फी सदी पूरा हो गया है।उन्होंने कहा कि ऐसा सर्वेक्षण राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र में है।

इससे पहले हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए राज्य सरकार द्वारा की जा रही जातीय व आर्थिक सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था।कोर्ट ने ये जानना चाहा था कि जातियों के आधार पर गणना व आर्थिक सर्वेक्षण कराना क्या कानूनी बाध्यता है।
कोर्ट ने ये भी पूछा था कि ये अधिकार राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में है या नहीं।साथ ही ये भी जानना कि क्या इससे निजता का उल्लंघन होगा।
पहले की सुनवाई में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार ने जातियों और आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट के समक्ष पक्ष प्रस्तुत करते हुए अधिवक्ता दीनू कुमार ने बताया कि सर्वेक्षण कराने का ये अधिकार राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र के बाहर है।ये असंवैधानिक है और समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
अधिवक्ता दीनू कुमार ने कोर्ट को ये भी बताया था कि राज्य सरकार जातियों की गणना व आर्थिक सर्वेक्षण करा रही है।उन्होनें ने बताया कि ये संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।
उन्होंने कहा था कि प्रावधानों के तहत इस तरह का सर्वेक्षण केंद्र सरकार करा सकती है।ये केंद्र सरकार की शक्ति के अंतर्गत आता है।उन्होंने बताया था कि इस सर्वेक्षण के लिए राज्य सरकार पाँच सौ करोड़ रुपए खर्च कर रही है।
मौसम विभाग के अनुसार बिहार के विभिन्न जिलों में अगले तीन-चार दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। इस दौरान कुछ स्थानों पर वज्रपात की भी चेतावनी जारी की गई है। उत्तर बिहार में मानसून के सक्रिय होने से 3 अगस्त तक सभी जिलों में बारिश होने की उम्मीद की जा रही है। पटना समेत आसपास के कुछ स्थानों पर मेघ गर्जन व वज्रपात की संभावना है। पूरे बिहार में राहत की बारिश का पूर्वानुमान 29 से 3 अगस्त के लिए जारी किया गया है।
राज्य में अभी तक 35 फीसदी कम बारिश हुई है। कुछ जिलों में बारिश का अलर्ट है। वहीं, 29 जुलाई के बाद से भारी बारिश का अलर्ट है।
मौसम विज्ञान केन्द्र पटना के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर पश्चिम बिहार, उत्तर मध्य बिहार, उत्तर पूर्व बिहार, दक्षिण पश्चिम बिहार, दक्षिण मध्य बिहार और दक्षिण पूर्व बिहार में बारिश के आसार हैं। इनमें कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया गया है। 28 जुलाई यानी शुक्रवार को बिहार के 32 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें से पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा और सुपौल जिले के कुछ स्थानों पर बारिश के आसार हैं।

वहीं पटना, गया, समेत 25 जिलों के एक या दो स्थानों पर बारिश होने की संभावना हैं। बक्सर, भोजपुर, रोहतास, भभुआ, औरंगाबाद, अरवल में मौसम शुष्क बने रहेंगे। यानी इन जिलों में आज गर्मी से लोग परेशान हैं।
मौसम विज्ञान केन्द्र पटना के अनुसार 30 और 31 जुलाई को राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना है। इसे लेकर मौसम विभाग की ओर से येलो अलर्ट जारी किया गया है।
आज से उत्तर बिहार में मानसून के सक्रिय होने की संभावना है : इसके प्रभाव से दो अगस्त तक बारिश होने की उम्मीद की जा रही है। भारत मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 30 जुलाई को कई जगहों पर अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है। इस दौरान कुछ स्थानों पर वज्रपात भी हो सकता है। तापमान में उतार-चढ़ाव रहेगा और आसमान में बादल छाए रहेंगे।

3 अगस्त तक सभी जिलों में बारिश के आसार है : मौसम विभाग ने 29 जुलाई से 3 अगस्त राज्य सभी 38 जिलों के कई इलाकों में बारिश की संभावना जताई है। उत्तर पश्चिम बिहार, उत्तर मध्य बिहार, उत्तर पूर्व बिहार, दक्षिण पश्चिम बिहार, दक्षिण मध्य बिहार और दक्षिण पूर्व बिहार में बारिश के आसार हैं। इनमें कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया गया है।
मौसम ने सावधानी बरतने की अपील की है : मौसम विभाग ने लोगों से अपील कि है कि खराब मौसम के दौरान अपने पशुधन और खुद को बाहर निकलने से बचें। मौसम साफ होने पर अपने काम संपादित करे। आंधी के दौरान संवेदनशील संरचनाओं से दूर रहें और मेघगर्जन के दौरान पेड़-पौधे के नीचे शरण न लें। ओलावृष्टि के समय सुरक्षित स्थान पर जाकर बैठ जाएं।
पटना हाईकोर्ट ने एलएन मिश्रा कॉलेज,मुजफ्फरपुर से एमबीए कर रही छात्रा यशी सिंह के अपहरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए एसपी, मुजफ्फरपुर को चार सप्ताह में अनुसंधान का ब्यौरा दायर करने का आदेश दिया। जस्टिस अनिल कुमार सिन्हा ने इस मामलें पर सुनवाई की।
साहेबगंज कॉलेज के पूर्व प्राचार्य राम प्रसाद राय की नतनी ऐसी सिंह का अपहरण 22 दिसंबर 2022 को कॉलेज जाते वक्त हो गया था।घटना के 6 माह बाद भी पुलिस अब तक छात्रा की बरामदगी नहीं कर पाई है।
लड़की के नाना,पिता, माता ने बिहार के मुख्यमंत्री, डीजीपी बिहार,आईजी मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,राष्ट्रीय महिला आयोग, आर्थिक अपराध विभाग ,एसपी मुजफ्फरपुर को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं।साथ ही उनसे मिलकर अपनी व्यथा सुना चुके हैं।
पर पुलिस ने अबतक कोई कार्रवाई नहीं की है।यहां तक कि पुलिस अनुसंधान में एक सोनू कुमार नाम के लड़के जो अपराधी किस्म का है, का नाम अपहरण के मामले में सामने आया है । उसने नशे की सुई देकर छात्रा को मुजफ्फरपुर की चतुर्भुज स्थान में जाकर बेच दिया है।

फिर भी मुजफ्फरपुर पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली है। बिहार के सभी सम्बन्धित वरीय अधिकारियों से मिलकर उनके माता-पिता थक चुके हैं।याचिकाकर्ता के वकील अरविंद कुमार ने बताया कि मेरी बात सम्बन्धित आईओ से हुई, तो उन्होंने बताया कि सोनू कुमार को पकड़ा गया था ।दो-तीन दिन रखने के बाद मैंने उसे छोड़ दिया,क्योंकि उसके खिलाफ मुझे कोई सबूत नहीं मिले।जबकि सोनू का नाम अपहरणकर्ता में जांच के दौरान आ चुका है।
अंत में पटना हाई कोर्ट में अपनी याचिका दायर की।इस पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए मुजफ्फरपुर के एसपी को पूरे अनुसंधान का ब्यौरा 4 सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।इस मामलें पर अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद की जाएगी।