भारत के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद
6 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 1,097 अंक टूटकर 78,918.90 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी-50 करीब 315 अंक गिरकर 24,450.45 पर आ गया। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के कारण देखी गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयातित तेल पर निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है।
चार दिनों में निवेशकों को भारी नुकसान
पिछले चार कारोबारी सत्रों में बाजार में लगातार बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट आई। रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ चार दिनों में निवेशकों की संपत्ति लगभग 13.46 लाख करोड़ घट गई। कुल बाजार पूंजीकरण करीब 463.25 लाख करोड़ से गिरकर 449.79 लाख करोड़ रह गया।
यह गिरावट इस बात का संकेत है कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
युद्ध का असर: तेल, मुद्रा और बाजार पर दबाव
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं है।
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
- डॉलर मजबूत होना
- उभरते बाजारों से विदेशी निवेश की निकासी
इन सभी कारणों से भारतीय वित्तीय बाजार दबाव में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस तनाव के कारण तेल की कीमतों में 2026 में अब तक लगभग 16% की वृद्धि हो चुकी है।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत के आयात बिल और महंगाई पर पड़ता है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ जाती है।
RBI को भी करनी पड़ी दखलअंदाजी
बाजार और मुद्रा पर बढ़ते दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, रुपये को स्थिर रखने के लिए आरबीआई ने लगभग 12 अरब डॉलर तक बाजार में हस्तक्षेप किया।
युद्ध के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से धन निकालना शुरू किया, जिससे रुपये में गिरावट आई। आरबीआई ने डॉलर बेचकर और विभिन्न वित्तीय उपकरणों के जरिए रुपये को संभालने की कोशिश की।
किन सेक्टरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर कुछ खास सेक्टरों पर पड़ा:
1. बैंकिंग और वित्तीय शेयर
बैंकिंग सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई।
एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े बैंकिंग शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
2. तेल विपणन कंपनियां (OMCs)
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे रिफाइनिंग मार्जिन और LPG सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है।
3. निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर
लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखा गया क्योंकि इनकी कई परियोजनाएं पश्चिम एशिया से जुड़ी हैं।
किन सेक्टरों को मिला फायदा
हालांकि बाजार में गिरावट रही, लेकिन कुछ सेक्टरों ने मजबूती भी दिखाई।
1. रक्षा क्षेत्र (Defence Stocks)
ईरान-इज़राइल संघर्ष के कारण रक्षा कंपनियों के शेयरों में तेजी आई।
रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों में निवेश बढ़ता देखा गया।
2. अपस्ट्रीम तेल कंपनियां
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों को फायदा हो सकता है।
वैश्विक बाजारों का भी पड़ा असर
भारतीय बाजार की कमजोरी का कारण सिर्फ घरेलू परिस्थितियां नहीं हैं।
- अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए
- एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही
- निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़े
मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ गई है।
क्या आगे भी गिर सकता है बाजार?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है तो बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि:
- तेल की कीमतें बढ़ती रहीं तो महंगाई बढ़ेगी
- विदेशी निवेश कम हो सकता है
- बाजार में अल्पकालिक दबाव बना रहेगा
हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध से जुड़े बाजार गिरावट अक्सर अस्थायी होती हैं और बाद में बाजार में तेजी लौट सकती है।
आने वाले दिनों में इन शेयरों पर नजर
मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में कुछ शेयरों पर विशेष नजर रखी जाएगी:
- ONGC
- Oil India
- Indian Oil
- GAIL
- Mazagon Dock
- GRSE
इन कंपनियों के शेयर वैश्विक ऊर्जा बाजार और रक्षा क्षेत्र की मांग से प्रभावित हो सकते हैं।



































