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ब्रिक्स शिखर बैठक: नई दिल्ली में 11 सदस्य देशों का आर्थिक सहयोग पर फोकस

ब्रिक्स (BRICS) समूह ने 18 वें शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली में तैयारियां तेज़ कर ली हैं, जहाँ 11 सदस्य देशों की संयुक्त जनसंख्या विश्व की आधे से अधिक, वैश्विक जीडीपी का लगभग 40 % और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का 26 % हिस्सा प्रतिनिधित्व करेगी। यह आँकड़े समूह की

आर्थिक ताकत को उजागर करते हैं और विश्व मंच पर उनकी रणनीतिक महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं। नई दिल्ली में 12‑13 सितंबर को आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य आर्थिक सहयोग, विकासशील बाजारों में निवेश और बहुपक्षीय व्यापार को सुदृढ़ करना बताया गया है।

ब्रिक्स की उत्पत्ति दो दशकों पहले चार

देशों—ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन—के गठबंधन के रूप में हुई थी, जो तब उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह के रूप में पहचाने जाते थे। समय के साथ इस गठबंधन में दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, सऊदी अरब, इरान, संयुक्त अरब अमीरात और मेक्सिको जैसे देशों को जोड़कर 11‑देशीय गठबंधन

का रूप ले लिया। इस विस्तार ने समूह को भू‑राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही मोर्चों पर एक नई भूमिका प्रदान की, जिससे ब्रिक्स अब सिर्फ विकासशील देशों का क्लब नहीं रहा।

पिछले कुछ वर्षों में ब्रिक्स ने कई प्रमुख पहलों को लागू किया है, जिनमें नई डिजिटल भुगतान

प्रणाली, विकास बैंक का विस्तार और वैकल्पिक मुद्रा ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं। 2022 में लॉन्च किए गए न्यूट्रल कॉइन ने सदस्य देशों के बीच वित्तीय लेन‑देन को आसान बनाया, जबकि 2023 के अंत में ब्रिक्स विकास बैंक ने बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिए $150 बिलियन की निधि प्रतिबद्ध

की। इन कदमों ने समूह के भीतर आर्थिक एकजुटता को बढ़ाया और वैश्विक वित्तीय प्रणाली में विविधता लाने की दिशा में महत्वपूण्‍ण संकेत दिए।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ब्रिक्स के सदस्य देश मिलकर 2023 में 2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात‑आयात को नियंत्रित करते हैं, जो वैश्विक व्यापार के

एक तिहाई के बराबर है। इस आंकड़े से स्पष्ट होता है कि समूह की आर्थिक नीति में परिवर्तन वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। साथ ही, सदस्य देशों ने संयुक्त रूप से ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में नई समझौते

पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे उनका सामूहिक प्रभाव और भी विस्तृत हो गया है।

शिखर सम्मेलन में प्रमुख विषयों में वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा प्रणाली, जलवायु परिवर्तन के लिए सामूहिक वित्तीय तंत्र, और डिजिटल बुनियादी ढाँचा निर्माण शामिल होंगे। नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में 11 देशों के

प्रमुख विदेश मंत्रियों और आर्थिक सलाहकारों की भागीदारी निश्चित है। इस दौरान, ब्रिक्स ने मौजूदा वैश्विक वित्तीय संस्थानों के सुधार और नई बहुपक्षीय संस्थाओं की स्थापना की मांग दोहराई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में अधिक समावेशी ढांचा तैयार हो सके।

समारोह के पहले दिन, भारतीय प्रधान मंत्री

ने ब्रिक्स को विश्व के विकास का प्रमुख इंजन कहा और कहा कि नई दिल्ली इस मंच पर आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। रूसी विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के विरुद्ध सामूहिक प्रतिरोध की बात दोहराते हुए आर्थिक सहयोग को

सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। चीन के विदेश सचिव ने वैश्विक आर्थिक शासन में बहुस्तरीयता और पारस्परिक सम्मान की वकालत की, यह संकेत देते हुए कि ब्रिक्स का लक्ष्य मौजूदा व्यवस्था में सुधार करना है, न कि उसे समाप्त करना।

ब्राज़ील के आर्थिक सलाहकार ने कहा

कि ब्रिक्स की विस्तारित सदस्यता ने समूह को ऊर्जा, कृषि और प्रौद्योगिकी में विविधता प्रदान की है, जिससे आर्थिक जोखिमों का वितरण बेहतर हुआ। सऊदी अरब के प्रतिनिधि ने ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में सहयोग को प्रमुख बताया और बताया कि समूह के भीतर तेल व गैस

की आपूर्ति को स्थिर करने के लिए नई तंत्र विकसित किए जाएंगे। अर्जेंटीना के वित्त मंत्री ने विकासशील देशों के लिए ऋण सस्ते दरों पर उपलब्ध कराने की योजना को उजागर किया, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

इंडोनेशिया के प्रतिनिधिमंडल ने डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग को प्राथमिकता

दी, विशेषकर ई‑कॉमर्स और फिनटेक क्षेत्र में। इरान के विदेश मंत्री ने आर्थिक प्रतिबंधों के तहत सहयोग के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों का विकास आवश्यक है। संयुक्त अरब अमीर

Updated: September 11, 2026


BRICS is gearing up for its 18th summit in New Delhi, where eleven member nations—representing over half the world’s population, roughly 40 % of global GDP and a quarter of trade—will push for deeper economic ties, a new multilateral currency framework and expanded digital and infrastructure cooperation. The expanded bloc, now spanning Africa, Asia and Latin America, aims to reshape global finance and supply chains by championing alternative payment systems, climate financing and greater inclusivity in international institutions.

Insight: The summit brings together nations representing over half the world’s population and roughly 40 % of global GDP, underscoring the group’s economic weight. Outcomes could shape international trade, finance and multilateral cooperation frameworks.

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