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छठ से पहले बिहार आने वाली ट्रेनों में नो रूम, दीघवारा स्टेशन पर भीड़; यात्रियों के सामने टिकट संकट

सारण: छठ में घर लौटने की राह मुश्किल, ट्रेनों में नो रूम; दीघवारा काउंटर पर भीड़, एक को मिला कन्फर्म टिकट छठ पावन पर्व के निकट आते ही भारत के कई राज्यों में बसे बिहारियों के लिए घर वापसी का मार्ग अत्यधिक जटिल हो गया है। रेलवे विभाग की नवीनतम जानकारी के अनुसार, बिहार में प्रवेश करने वाली अधिकांश ट्रेनों में छठ से पहले किसी भी वर्ग में सीट उपलब्ध नहीं है। प्रमुख एक्सप्रेस और लोकल ट्रेनों में “नो रूम” की स्थिति बनी हुई है, जबकि कुछ सीमित रूट में प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) के नाम हजारों की संख्या तक पहुँच चुके हैं। इस असामान्य परिदृश्य ने प्रवासी परिवारों में भारी चिंता उत्पन्न कर दी है, जो इस पावन अवसर पर अपने मातृभूमि लौटने की आशा कर रहे थे।पृष्ठभूमि में देखते हुए, भारत में दीर्घकालिक प्रवासी प्रवाह और मौसमी प्रवासियों की संख्या में निरंतर वृद्धि ने रेलवे के मौसमी मांग को बढ़ा दिया है। पिछले पाँच वर्षों में बिहार की ओर आने वाली प्रवासी ट्रेनें औसत 15 % अधिक यात्रियों को संभाल रही थीं, विशेषकर त्यौहारों के दौरान। इसके अलावा, इस वर्ष की मौसमी बारिश और पूर्वी घाटी में बाढ़ की संभावनाओं ने ट्रेन शेड्यूल में बदलाव को बाध्य किया, जिससे कई नई ट्रेनों को रद्द या पुनर्निर्धारित किया गया। इस प्रकार, मौसमी माँग और प्राकृतिक कारकों का संयोग ट्रेनों की क्षमता पर दबाव डाल रहा है।

दिवाली के बाद, बिहार की ओर लौटने वाले यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। भारतीय रेलवे ने इस प्रवाह को अनुमानित करने के लिए पिछले पाँच वर्षों का डेटा विश्लेषण किया और पाया कि छठ के आसपास की अवधि में टिकट बुकिंग की मांग सामान्य से 30 % अधिक रहती है। इस आंकड़े को देखते हुए, रेलवे ने अतिरिक्त कोच जोड़ने और विशेष एक्सप्रेस ट्रेनों को संचालित करने की घोषणा की थी, परन्तु इन उपायों को भी सीमित समय में पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। परिणामस्वरूप, कई यात्रियों को टिकट नहीं मिलने की स्थिति का सामना करना पड़ा।

छठ के अवसर पर प्रमुख ट्रेनों की स्थिति को समझना आवश्यक है। राजधानी एक्सप्रेस, पटना‑दिल्ली, ने पहले दो सप्ताह में सभी वर्गों में “नो रूम” घोषित किया, जबकि रत्नागिरी‑पटना शताब्दी एक्सप्रेस में केवल जनरल वर्ग में प्रतीक्षा सूची के नाम 1,200 तक पहुँचे। इसके अतिरिक्त, शताब्दी एक्सप्रेस के अलावा पटनाग्राम-रॉजर्स के बीच चलने वाली सुपरफास्ट ट्रेनों में भी सीटों की कमी स्पष्ट रही। रेलवे द्वारा जारी किए गए आधिकारिक समय सारणी में यह उल्लेख है कि कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है, जिससे यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग तलाशने पड़ रहे हैं।

प्रवासी समुदाय के भीतर इस संकट की अभिव्यक्ति स्पष्ट है। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी कठिनाइयों को साझा किया, जहाँ दीघवारा काउंटर पर लंबी कतारों और अत्यधिक प्रतीक्षा समय की शिकायतें प्रमुख थीं। कुछ यात्रियों ने बताया कि उन्होंने एक घंटे से अधिक समय तक लाइन में खड़े रहने के बाद भी टिकट नहीं प्राप्त किया, जबकि कुछ को केवल कन्फर्म टिकट मिलने पर ही राहत मिली। इस दौरान, रेलवे काउंटर पर कर्मचारियों के पास भी टिकट वितरण की प्रक्रिया को संभालने में कठिनाई उत्पन्न हुई, जिससे सेवा गुणवत्ता पर सवाल उठे।

ट्रेनिंग और स्टेशन स्टाफ की प्रतिक्रिया भी इस मुद्दे को उजागर करती है। कई स्टेशन प्रबंधकों ने कहा कि टिकट बुकिंग की अत्यधिक माँग के कारण सिस्टम ओवरलोड हो गया है, जिससे ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों बुकिंग में देरी और त्रुटियां बढ़ गईं। रेलवे के प्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया कि अतिरिक्त कोच जोड़ने और विशेष बुकिंग विंडो खोलने के लिए उपाय किए जा रहे हैं, परन्तु इन्हें लागू करने में समय लग सकता है। इस बीच, यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग, जैसे बस या निजी टैक्सी, अपनाने की सलाह दी जा रही है, हालांकि इन विकल्पों की लागत भी बढ़ी हुई है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से इस स्थिति पर विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रिया देखी गई। बिहार के मुख्यमंत्री ने प्रदेश में लौटने वाले प्रवासियों की कठिनाइयों को लेकर चिंता व्यक्त की और रेल मंत्रालय से त्वरित समाधान की मांग की। वहीं, केंद्र सरकार के रेल मंत्री ने कहा कि मौसमी प्रवासियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त ट्रेनों को त्वरित रूप से तैनात करने की योजना है, परन्तु इसे लागू करने में कई नियामक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार को प्रवासी वर्ग के लिए अधिक सुदृढ़ बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना चाहिए।

 

Updated: September 11, 2026

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