स्वच्छ एवं हरित विद्यालय कार्यक्रम का प्रारम्भ 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर किया गया, जिसका उद्देश्य शारीरिक स्वच्छता, जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और हरे-भरे वातावरण को स्कूलों में स्थापित करना है। केंद्र सरकार ने इस पहल को शैक्षिक नीति के प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित किया, और राज्य एवं जिला स्तर पर नोडल पदाधिकारी इस कार्यान्वयन की निगरानी करते हैं। विभिन्न राज्यों में इस कार्यक्रम को विभिन्न चरणों में लागू किया गया, जिससे विद्यालयों में जल शोधन, सौर ऊर्जा उपयोग और कचरा प्रबंधन जैसी पहलें सफल हुईं।
पंचदेवरी प्रखंड में 61 विद्यालयों में से अधिकांश ने राष्ट्रीय पोर्टल पर स्वनामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं की, जिससे रेटिंग की अद्यतन रिपोर्टिंग में बाधा उत्पन्न हुई। बीइओ विकास कुमार ने बताया कि कई विद्यालयों ने तकनीकी कारणों, अभिलेखीय त्रुटियों और जागरूकता की कमी को मुख्य कारण बताया है। इस संदर्भ में, स्थानीय शैक्षणिक अधिकारी और स्कूल प्रबंधन निकायों के बीच संचार में भी खामियां पाई गईं, जिससे समय सीमा का पालन न हो पाया।
इस कार्रवाई के पहले चरण में बीइओ ने सभी 61 संस्थानों को आधिकारिक पत्र जारी किया, जिसमें 15 दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया। पत्र में उल्लेखित था कि यदि समय पर उत्तर नहीं दिया गया तो अनुशासनात्मक उपाय, जैसे कि वित्तीय सहायता में कटौती और रेटिंग में नकारात्मक प्रभाव, लागू किए जा सकते हैं। इस प्रक्रिया में डिजिटल दस्तावेज़ीकरण, पोर्टल लॉगिन डेटा और पूर्व रिपोर्टों की जांच भी शामिल होगी।
प्रमुख घटनाक्रम में बताया गया कि पंचदेवरी के कई सरकारी विद्यालयों ने पोर्टल पर नामांकन के लिए आवश्यक दस्तावेज़ीकरण पूरा नहीं किया था, जबकि कुछ निजी संस्थानों ने तकनीकी त्रुटियों के कारण डेटा अपलोड नहीं कर सके। बीइओ ने स्थानीय आईटी टीम की सहायता के लिए विशेष कार्यदल तैयार किया, जिससे इन तकनीकी बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया गया। इस बीच, जिला शिक्षा अधिकारी (DEA) ने भी स्थिति की समीक्षा के लिए एक समन्वय बैठक बुलाई, जिसमें सभी संबंधित पक्षों को आमंत्रित किया गया।
बीइओ विकास कुमार ने इस कदम को राष्ट्रीय शैक्षिक मानकों के अनुपालन में आवश्यक माना, और बताया कि स्वच्छ एवं हरित विद्यालय कार्यक्रम के बिना शैक्षिक संस्थानों की पर्यावरणीय जिम्मेदारी अधूरी रहेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से न केवल विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि छात्रों की स्वच्छता एवं स्वास्थ्य जागरूकता भी बढ़ेगी। इस प्रकार, यह पहल स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय पर्यावरणीय नीतियों के कार्यान्वयन में एक महत्वपूर्ण कड़ी बनती है।
प्रखंड के प्रमुख विद्यालय प्रधानाध्यापकों ने उत्तर में कहा कि उन्हें पोर्टल की तकनीकी जटिलताओं के कारण कठिनाइयाँ हुईं, और उन्होंने बीइओ से सहायता एवं विस्तृत मार्गदर्शन की मांग की। कई निजी विद्यालय संचालकों ने बताया कि बजट प्रतिबंध और मानवीय संसाधनों की कमी के कारण समय पर डेटा प्रविष्टि संभव नहीं हो पाई। कुछ प्रधान शिक्षकों ने यह भी संकेत दिया कि पोर्टल पर आवश्यक प्रशिक्षण कार्यशालाओं का अभाव था, जिससे कर्मचारी सही ढंग से प्रक्रिया नहीं समझ सके।
राज्य शिक्षा विभाग ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला विभागीय निरीक्षण का हिस्सा है और सभी स्कूलों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना अनिवार्य है। विभाग ने कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण को अनिवार्य किया जाएगा, और समय-समय पर ऑडिट की व्यवस्था की जाएगी। केंद्र सरकार के शैक्षिक नीति विभाग ने भी बताया कि SGV रेटिंग के तहत सभी विद्यालयों को समान अवसर प्रदान किया जा रहा है, और कोई भी संस्थान इस प्रक्रिया से बाहर नहीं रहना चाहिए।
स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में पर्यावरणीय पहल को प्राथमिकता देना आवश्यक है, और उन्होंने बीइओ को आवश्यक संसाधन एवं समर्थन प्रदान करने का आश्वासन दिया। पंचदेवरी के विधायक ने कहा कि इस प्रकार की अनुपालन समस्या से निपटने के लिए जिला स्तर पर एक समर्पित निगरानी इकाई स्थापित की जाएगी, जिससे भविष्य में ऐसी चूक नहीं होगी।
आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग के तहत प्राप्त मान्यता से विद्यालयों को विभिन्न सरकारी अनुदानों तथा ग्रांट
Updated: September 11, 2026
BEO Vikas Kumar has issued notices to 61 schools in Panchdevari, Gopalganj, for failing to complete the Swachh aur Harit Vidyalaya portal registration, demanding explanations within 15 days and warning of financial penalties. The move underscores the push to meet national clean‑and‑green school standards and highlights technical, staffing and training gaps hampering compliance.
The BEO’s crackdown exposes a deeper gap: without robust digital literacy, green‑school incentives become a paperwork exercise rather than a catalyst for real environmental change.
If the district can turn this compliance push into sustained training and tech support, the SGV rating will evolve from a punitive checklist into a genuine lever for
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