है, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य‑संबंधी मानदंडों को पुनः परिभाषित करती है। रावत की इस उड़ान को राष्ट्रीय एविएशन असोसिएशन ने आधिकारिक तौर पर मान्य किया और इसे ‘उम्र‑सहिष्णुता’ की नई मिसाल के रूप में दर्ज किया गया।
रावत का जन्म 1952 में बिहार के एक
छोटे गाँव में हुआ था। वे पहले कृषि में कार्यरत थे और बाद में छोटे‑मोटे व्यापार में लगे। 2010 के दशक में उन्होंने पहली बार पैराग्लाइडिंग का परिचय प्राप्त किया और धीरे‑धीरे इस खेल के प्रति आकर्षित हो गए। पिछले पाँच वर्षों में उन्होंने लगभग 150 उड़ानें
भरी थीं, जिसमें अधिकांश भारत के विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों में थीं। उनकी निरंतर अभ्यास और शारीरिक फिटनेस ने उन्हें इस उम्र में भी उच्च‑ऊँचाई की उड़ान के योग्य बना दिया।
पैराग्लाइडिंग भारत में एक निचली लोकप्रियता वाला साहसिक खेल माना जाता है, परन्तु हाल के वर्षों
में इसे सख्त सुरक्षा मानकों के तहत व्यवस्थित किया गया है। राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग संघ (NPGA) ने 2020 में एक विशेष आयु‑सीमा निर्धारित की थी, जिसके तहत 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए अतिरिक्त मेडिकल चेक‑अप अनिवार्य हो गया। रावत ने इन सभी प्रक्रियाओं को
सफलतापूर्वक पूरा किया और अपने डॉक्टरों से साफ‑साफ अनुमति प्राप्त की। उनकी तैयारी में शारीरिक व्यायाम, पोषण संबंधी सलाह और तनाव‑मुक्ति तकनीकों का समावेश था।
रावत की इस उड़ान का प्रारम्भिक चरण द्रास के प्रमुख पैराग्लाइडिंग क्लब द्वारा आयोजित किया गया, जहाँ उन्होंने दो घंटे की
प्री‑फ़्लाइट ब्रीफ़िंग में भाग लिया। ब्रीफ़िंग के दौरान मौसम विज्ञान विशेषज्ञों ने ऊँचाई, हवा की दिशा और तापमान के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। रावत ने अपने पायलट गियर की जाँच करवाई, जिसमें पैराशूट, हेलमेट, GPS ट्रैकर और संचार उपकरण शामिल थे। अंत में, प्रशिक्षित पायलट
ने उन्हें लांच प्लेटफ़ॉर्म पर स्थित किया और सुरक्षा मानकों के अनुरूप रिहा किया।
उड़ान के दौरान रावत ने 24 हजार फीट की ऊँचाई तक पहुँचने पर अपने मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से वास्तविक‑समय डेटा रिकॉर्ड किया। इसमें ऊँचाई, गति, हवा की गति और दिशा के आंकड़े
शामिल थे। इस डेटा के अनुसार, उन्होंने औसत 120 किमी/घंटा की गति से यात्रा की और 45 मिनट तक निरंतर ऊँची उड़ान बनी रही। इस दौरान उन्होंने विभिन्न बिंदुओं पर फोटो और वीडियो भी कैप्चर किए, जो बाद में मीडिया और सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराए गए।
उड़ान के बाद रावत को स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी और पैराग्लाइडिंग संघ के प्रतिनिधियों ने बधाई दी। हिमाचल प्रदेश के पर्यटन विभाग के प्रमुख ने कहा कि यह घटना वरिष्ठ नागरिकों को सक्रिय जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है। उन्होंने इस प्रकार की ऊँची उड़ानों
के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को मजबूत करने का वचन भी दिया। रावत के परिवार ने भी उनके साहस की सराहना की और कहा कि उनकी यह उपलब्धि पूरे बिहार और भारत में गर्व की बात है।
रावत की इस उपलब्धि पर सामाजिक मीडिया में तीव्र
प्रतिक्रियाएँ देखी गईं। ट्विटर और फेसबुक पर कई उपयोगकर्ताओं ने #KapildevParagliding टैग के तहत बधाई संदेश पोस्ट किए। कई वरिष्ठ नागरिक समूहों ने इस घटना को वृद्धावस्था में सक्रियता की नई मिसाल बताया। वहीं, कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस तरह की जोखिम भरी गतिविधियों के लिए विस्तृत
मेडिकल स्क्रीनिंग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
राजनीतिक वर्ग से भी इस घटना पर टिप्पणी आई। बिहार के मुख्यमंत्री ने रावत को बढ़ते उम्र के बावजूद साहस और ऊर्जा का प्रतीक कह कर बधाई दी और कहा कि राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के लिए खेल और
फिटनेस सुविधाएँ बढ़ाने की आवश्यकता है। केंद्रीय खेल मंत्रालय ने इस उपलब्धि को राष्ट्रीय खेल गौरव का हिस्सा कहा और कहा कि भविष्य में ऐसी उपलब्धियों को समर्थन देने के लिये विशेष कार्यक्रम बनाये जाएंगे।
आर्थिक दृष्टिकोण से इस प्रकार की उच्च‑
Updated: September 13, 2026
The flight validates that senior citizens can meet stringent medical and safety standards for high‑altitude adventure sports. It also provides a data‑driven example for policymakers and health professionals promoting active ageing programs.
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