हाल ही में अस्पताल में कई बार डॉक्टरों के वेतन न मिलने और सॉलिडरिटी पेमेन्ट में देरी के कारण विरोध प्रदर्शन हुए थे; इन विरोधों के दौरान कुछ डॉक्टरों ने पत्रकारों और बाहरी निरीक्षकों को भी निशाना बनाया था। इस पृष्ठभूमि में अभिषेक कुमार की रिपोर्टिंग का समय आया, जब उन्होंने एमडीएम से पीड़ित बच्चों की स्थिति को उजागर करने का प्रयास किया। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इस समय कार्यशाला में मौजूद डॉक्टरों को बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं थी।
अभिषेक के अनुसार, रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने एक डॉक्टर से पूछताछ की, जिसके बाद दो नर्सें और एक एम्बुलेंस चालक ने उन्हें धक्का मारते हुए कई बार मारपीट की। उन्होंने कहा कि डॉक्टर ने उन्हें बिना अनुमति के यहाँ प्रवेश करने का आरोप लगाते हुए गाली‑गलौज किया और उनके मोबाइल फोन को छीन लिया। यह घटना तब हुई जब अभिषेक ने बच्चों की चिकित्सा रिपोर्ट और उपचार के तरीके को नोट किया था, जिसे अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने अनुचित माना।
सदर अस्पताल के मुख्य चिकित्सक ने बाद में बताया कि रिपोर्टिंग के दौरान कुछ अज्ञात व्यक्ति अस्पताल परिसर में प्रवेश कर गए थे, जो संभवतः बाहरी लोगों द्वारा भड़काए गए थे। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने केवल अपने कार्य को बाधित करने की कोशिश करने वाले लोगों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन हिंसा के स्तर तक नहीं पहुँचा। अस्पताल के प्रशासन ने कहा कि वह तुरंत घटना स्थल की जाँच कर रहा है और जिम्मेदारों की पहचान के बाद उचित कार्रवाई करेगा।
पुलिस ने इस शिकायत के बाद घटना स्थल पर फॉरेन्सिक टीम भेजी; रिपोर्ट के अनुसार, अभिषेक के शरीर पर कई चोटें दर्ज की गईं, जिनमें चोटिल हाथ और पीठ के किनारे पर चोटें शामिल थीं। पुलिस ने कहा कि वह सभी शामिल पक्षों के बयान ले रहा है और आरोपित कर्मचारियों को तुरंत हिरासत में ले कर पूछताछ करेगा। इस बीच, अभिषेक ने बताया कि उन्होंने अपने मोबाइल में घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग की थी, जिसे वह जांच में प्रस्तुत करने की योजना बना रहे हैं।
सहरसा के जिला मजिस्ट्रेट ने तुरंत आदेश जारी किया कि इस मामले की गहन जांच की जाए और सभी संलग्न अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा संविधान द्वारा सुनिश्चित है और इस तरह के हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने अस्पताल प्रशासन को आदेश दिया कि वे अपने कर्मचारियों को पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने की निर्देशावली जारी करें।
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने भी इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अस्पताल में कर्मचारियों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग ने कहा कि वह अस्पताल के प्रबंधन को अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश देगा और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगा। विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि वह इस मामले में निपटारा करने के लिए सभी प्रासंगिक दस्तावेज़ एकत्र कर रहे हैं।
सहरसा के स्थानीय पत्रकार संघ ने इस घटना को गंभीर माना और सभी मीडिया संस्थाओं को सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को सुरक्षित रूप से कार्य करने का अधिकार है और इस तरह के हमले से समाचार स्वतंत्रता को खतरा है। संघ ने जिला प्रशासन से मांग की कि वह इस मामले में शीघ्रता से कार्रवाई करे और भविष्य में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय अपनाए।
राजनीतिक वर्ग में भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सुनाई दे रही हैं; कई विपक्षी नेता इस मामले को सरकार की सुरक्षा नीतियों की विफलता कहकर आलोचना कर रहे
Insight: इस हमले के पीछे केवल तनाव नहीं, बल्कि खराब व्यवस्था की लागत पर वापसी और मीडिया को दिमाग बनकर उनकी कमियों को ढकने का प्रयास है।