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भोजपुर में सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या पर रोष, आरा-सासाराम हाईवे 5 घंटे बंद

भोजपुर के चरपोखरी थाना के गड़हनी गांव में सामाजिक कार्यकर्ता मो. जकी की हत्या के बाद आरा‑सासाराम स्टेट हाईवे पर पाँच घंटे तक भीड़भाड़ बनी, जहाँ ग्रामीणों ने शराब बेचने के विरोध को लेकर हुए इस कांड पर तीव्र असंतोष जताया।
स्थानीय प्रशासन ने घटना की गंभीरता स्वीकार कर सुरक्षा उपायों को कड़ाई से लागू करने का आश्वासन दिया, जबकि पीड़ित के परिवार ने न्याय की मांग की। यह घटना प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और शराबबंदी नीति के प्रभाव को लेकर व्यापक बहस का कारण बन रही है।गड़हनी गांव में मो. जकी कई वर्षों से शराब के अनुचित व्यापार को रोकने, शराब निर्भरता से पीड़ित परिवारों की मदद करने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के काम में लगे थे। उनकी पहल ने कई गांवों में शराब के दुरुपयोग को कम करने में योगदान दिया, लेकिन स्थानीय शराब विक्रेताओं और उनके समर्थकों के बीच टकराव भी बढ़ा। इस संदर्भ में, पिछले वर्ष इसी क्षेत्र में शराब बेचने के विरुद्ध कई विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिनमें पुलिस द्वारा कुछ ही गिरफ्तारियों के बाद स्थिति सामान्य हुई थी।

पिछले महीने भी इसी तरह के विरोध में युवा समूहों ने शराब की दुकानों के सामने जलती हुई मोमबत्तियों के साथ धरना दिया था, परन्तु स्थानीय व्यापारियों ने दंगे की संभावना जताते हुए पुलिस से सुरक्षा की मांग की। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों ने शराब पर प्रतिबंध की मांग की और पुलिस को कठोर कार्रवाई करने का आह्वान किया। इन घटनाओं के बीच, मो. जकी की सामाजिक कार्यशैली ने उन्हें स्थानीय लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया, जबकि शराब व्यवसायियों ने उन्हें अपने व्यापार के लिए बाधा माना।

शुक्रवार देर शाम, जब मो. जकी अपने घर में शराब बिक्री को लेकर आयोजित विरोध बैठक से लौटे, तो दो सशस्त्र व्यक्तियों ने उनके घर में प्रवेश कर उन्हें एक बार गोलियों से मार दिया। यह घटना तब हुई जब जकी ने अपने घर के बाहर स्थित शराब विक्रेता के खिलाफ आवाज उठाई थी। शुटआउट के बाद जकी को गंभीर अवस्था में स्थानीय परिजन ने तुरंत निकटतम निजी अस्पताल, आरा, ले जाया, जहाँ कई घंटे इलाज के बाद उनका निधन हो गया।

घटना के तुरंत बाद, गड़हनी गांव के निवासी और जकी के परिजन ने पुलिस को कई बार फोन करके सहायता का आग्रह किया, परन्तु पुलिस के जवाब में देर से प्रतिक्रिया मिलने की शिकायत की गई। स्थानीय मीडिया ने बताया कि पुलिस ने घटना स्थल पर पहुंचने में दो घंटे से अधिक समय लिया, जिससे जकी को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी। इस कारण से ग्रामीणों में पुलिस पर भरोसा कम हो गया, और उन्होंने न्याय की मांग के लिए बड़े स्तर पर प्रदर्शन करना शुरू किया।

जैसे ही मौत की खबर फैली, गड़हनी गांव के मुख्य मार्ग पर स्थित आरा‑सासाराम स्टेट हाईवे पर भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय निवासियों ने इस हाईवे को बंद कर दिया, जिससे लगभग पाँच घंटे तक ट्रैफ़िक जाम बना रहा। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने रूट बदलने के निर्देश जारी किए, जबकि कई बस और ट्रक यात्रियों को अस्थायी रूप से रुकना पड़ा। यह जाम न केवल स्थानीय यात्रा को प्रभावित कर रहा था, बल्कि प्रदेश के व्यापारिक गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर डाल रहा था।

इस कांड पर राज्य सरकार के पुलिस प्रमुख ने टिप्पणी कर, हम इस अपराध की गंभीरता को समझते हैं और तुरंत मामले की जांच शुरू कर दी है। अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए विशेष बल तैनात कर दिया है और गांव में नियमित गश्तें बढ़ा दी गई हैं।

वहीं, बिहार के मुख्यमंत्री ने सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने का वचन दिया। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की हिंसा दोबारा घटती रही, तो कड़े प्रतिबंध और कस्टडी में सुधार किए जाएंगे। इसके साथ ही, शराब व्यापार को लेकर राज्य सरकार ने एक नई नीति तैयार करने का संकेत भी दिया, जिसमें शराब विक्रेताओं को लाइसेंसिंग प्रक्रिया में कड़े मानदंड लागू किए जाएंगे।

समानांतर रूप से, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने इस घटना को सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ व्यवस्थित हिंसा कहा और कहा कि सरकार को तुरंत न्यायिक प्रक्रिया तेज करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शराब नियंत्रण के मुद्दे पर एक व्यापक सार्वजनिक चर्चा आयोजित की जानी चाहिए, जिससे न केवल विक्रेताओं बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

विरोधी शराब नीतियों के समर्थक समूहों ने भी इस हत्या को शराब विरोधी आंदोलन पर दबाव के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि मो. जकी की मौत से सामाजिक कार्यकर्ताओं को भयभीत किया जा रहा है और यह लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को कमजोर करता है। इन समूहों ने अगले हफ्ते एक बड़े पैमाने पर शांति मार्च का आयोजन करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें शराब व्यापार को समाप्त करने की मांग प्रमुख होगी।

आर्थिक दृष्टिकोण से, शराब उद्योग पर प्रतिबंध के कारण स्थानीय व्यापारियों को गंभीर नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

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