पिछले वर्ष के अंत में, राज्य सरकार ने पुलिस संरचना में सुधार हेतु एक व्यापक योजना प्रस्तुत की थी, जिसमें थानों का पुनर्रचना, नई तकनीकी सुविधाओं का परिचय और मानव संसाधन का पुनर्वितरण शामिल था। इस योजना के अंतर्गत अहियापुर थाने को तीन भागों में बाँटने का प्रस्ताव विशेष रूप से उभरा, क्योंकि इस क्षेत्र में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से २० प्रतिशत अधिक थी। योजना की प्रारम्भिक रूपरेखा में दो नए थानों के लिए भूमि अधिग्रहण, भवन निर्माण और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था शामिल थी।
नए थानों का स्थानिक निर्धारण स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्रमुखों के सामूहिक विचार-विमर्श के बाद तय किया गया। पहला नया थाना ‘अहियापुर‑पश्चिम’ के नाम से स्थापित होगा, जो मुख्य बाजार और प्रमुख राजमार्ग के निकट स्थित रहेगा। दूसरा ‘अहियापुर‑पूर्व’ थाना मुख्य रूप से आवासीय क्षेत्रों और औद्योगिक इकाइयों के करीब होगा। दोनों थानों में आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम, फायरिंग रेंज और डिजिटल केस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर स्थापित किया जाएगा, जिससे पुलिस कार्य में तकनीकी समर्थन बढ़ेगा।
साथ ही, मौजूदा अहियापुर थाने को भी पुनर्संरचना के तहत ‘अहियापुर‑केन्द्रीय’ के रूप में पुनः नामांकित किया जाएगा। इस थाने की जिम्मेदारी मुख्य प्रशासनिक कार्य, उच्चस्तरीय जांच और कोर्ट में प्रस्तुति पर केन्द्रित रहेगी। एसएसपी ने कहा कि प्रत्येक थाने को ५० पुलिस अधिकारियों की टीम से सुसज्जित किया जाएगा, जिसमें एन्काउंटर टीम, साइबरक्राइम सेल और महिला सुरक्षा इकाई शामिल होंगी।
इस पुनर्गठन प्रक्रिया की शुरुआत आधिकारिक तौर पर अगले महीने से होगी, और सभी नई सुविधाएँ दो वर्ष के भीतर पूर्णतया चालू हो जाएँगी। निर्माण कार्य के दौरान मौजूदा पुलिस कर्मचारियों को अस्थायी रूप से पुनः नियुक्त किया जाएगा, जिससे संचालन में कोई व्यवधान न हो। अतिरिक्त बजट की व्यवस्था राज्य वित्त आयोग ने मंजूर कर दी है, जिसमें प्रत्येक थाने के निर्माण, उपकरण और प्रशिक्षण के लिए लगभग ₹४५ करोड़ आवंटित किए गए हैं।
नए थानों की घोषणा पर स्थानीय राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय हो गए हैं। मुजफ्फरपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि ने कहा कि यह कदम ‘स्थानीय सुरक्षा की दिशा में एक सकारात्मक परिवर्तन’ है और उन्होंने पुलिस को नई जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाने का आश्वासन दिया। दूसरी ओर, कुछ नागरिक समूहों ने इस योजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर चिंताओं का اظہار किया, विशेषकर जब यह कृषि भूमि से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि उचित मुआवजा और पुनर्वास योजनाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पुलिस विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि थानों के पुनर्गठन के साथ साथ, स्थानीय पुलिस स्टेशन में डिजिटल रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी कवरेज का विस्तार और मोबाइल वॉच टावरों की स्थापना भी की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि नई व्यवस्था के तहत हर थाने को सप्ताह में कम से कम एक बार ‘सुरक्षा जागरूकता शिविर’ आयोजित करना अनिवार्य होगा, जिससे नागरिकों को सुरक्षा उपायों के बारे में शिक्षित किया जा सके।
राज्य पुलिस प्रमुख ने इस निर्णय को ‘पुलिस कार्यक्षमता में सुधार’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि यह मॉडल भविष्य में अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस पुनर्गठन के बाद, अहियापुर के अपराध दर में अपेक्षित गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि छोटे प्रशासनिक क्षेत्रों में निगरानी अधिक प्रभावी होगी।
वित्त मंत्री ने इस पुनर्गठन को ‘स्थानीय विकास को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक’ कहा और कहा कि पुलिस के साथ-साथ सार्वजनिक सेवाओं के समन्वय से सामाजिक स्थिरता में योगदान मिलेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस योजना के हिस्से के रूप में, स्थानीय प्रशासन को भी अपने कार्यों में सुधार लाने की आवश्यकता होगी, जिससे पुलिस के साथ मिलकर समस्या समाधान हो सके।
State police will split Ahiyapur police station in Muzaffarpur into three independent units—Ahiyapur‑West, Ahiyapur‑East and a renamed central hub—each staffed with 50 officers and equipped with modern tech to cut response times. The restructuring, backed by a ₹45‑crore budget, aims to curb the area’s rising crime rate while sparking mixed reactions over land acquisition and community impact.
Dividing Ahiyapur into three bite‑size precincts could turn a sprawling 35‑km² nightmare into a “neighborhood watch” model, where faster response times may actually deter crime rather than just chase it.