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‘प्रशिक्षु IPS’ बनकर मध्य प्रदेश और बिहार में ठगी का खेल, पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

पटना – मध्य प्रदेश के औरंगाबाद शहर में एक युवक ने स्वयं को प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी घोषित कर स्थानीय पुलिस को धोखा दिया, जिससे कई शहरों में झांसे का सिलसिला शुरू हुआ।
पुलिस ने पिंटू कुमार और कुंदन कुमार को गिरफ्तार कर लिया, जबकि प्रमुख आरोपी विकास कुमार अभी भी फरार है। इस मामले में उपयोग में लाई गई सफेद स्कॉर्पियो कार को भी जब्त किया गया। घटनाक्रम में औरंगाबाद से लेकर पटना, गया, कैमूर तक के कई विभागीय अधिकारियों को भटकाने का प्रयास किया गया, जिससे पुलिस विभाग को भारी झंझट का सामना करना पड़ा।पिंटू कुमार, 28 वर्ष का रहने वाला, ने 12 जुलाई को औरंगाबाद के नगर थाना में अपना परिचय ‘प्रशिक्षु आईपीएस’ के रूप में दिया। उसने अपने कंधे पर बनावट वाले बेज़ल, पुलिस बैज और आधिकारिक दस्तावेज़ दिखाकर अधिकारीयों को विश्वास दिलाया। वह स्वयं को उत्तर प्रदेश के एक नई नियुक्त प्रशिक्षु अधिकारी बताता था, जिससे पुलिस की जाँच प्रक्रिया में तेजी आई। इस पहचान के पीछे उसकी मुख्य प्रेरणा आर्थिक लाभ और सामाजिक सम्मान की चाह थी, जैसा कि पुलिस रिपोर्ट में उल्लेख है।

कुंदन कुमार, जो पिंटू के साथियों में से एक था, ने इस योजना में तकनीकी सहायता प्रदान की। उन्होंने सोशल मीडिया पर नकली पहचान पत्र और आधिकारिक ईमेल अकाउंट तैयार किए, जिससे पिंटू को विभिन्न पुलिस विभागों में अधिकारिक रूप से मान्यता मिलने की सम्भावना बनी। दोनों ने मिलकर कई शहरों में समान रणनीति अपनाई, जिससे कई पुलिस थानों को झूठी छापेमारी और वाहन जाँच के आदेश जारी करने पर मजबूर किया गया।

औरंगाबाद में पहला झांसा तब शुरू हुआ जब पिंटू ने स्थानीय पुलिस को एक बड़े ड्रग केस की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में कार्रवाई करने वाले हैं और तत्काल समर्थन चाहिए। इस पर पुलिस ने उनके साथ एक टीम तैयार की, जिसमें दो वरिष्ठ इंस्पेक्टर और दो सीनियर इंस्पेक्टर शामिल थे। पिंटू ने अपने ‘अधिकार’ के दायरे में उन टीमों को निर्देशित किया, जिससे कई दस्तावेज़ और वाहन जाँच को नज़रअंदाज़ किया गया।

फिर पिंटू ने पटना में एक समान योजना चलाई। पटना के पुलिस विभाग में वह एक उच्च पदस्थ अधिकारी की नकल करके स्वयं को ‘प्रशिक्षु आईपीएस’ के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने एक बड़े धनशोधन केस की सूचना दी और तुरंत कार्रवाई का अनुरोध किया। इस पर पटना पुलिस ने विशेष टीम बनाकर केस की जांच शुरू की, जिससे कई सरकारी कर्मचारियों और व्यापारियों के खाते फ्रीज कर दिए गए। इस प्रक्रिया में पिंटू ने कई सरकारी वाहनों की जांच के बहाने से अपने सहयोगियों को आर्थिक लाभ पहुँचाया।

गया में भी इसी तरह का झांसा जारी रहा। पिंटू ने स्थानीय पुलिस को एक नकली टॉल फाइल प्रस्तुत की, जिसमें कहा गया था कि वह ‘स्थानीय पुलिस विभाग के साथ मिलकर एक बड़ी गिरफ़्तारी ऑपरेशन’ कर रहा है। पुलिस ने तुरंत उसके साथ मिलकर एक बड़ी ऑपरेशन चलाने की तैयारी की, परंतु ऑपरेशन के दौरान पिंटू की वास्तविक पहचान सामने आ गई। इस बीच, कुंदन ने कई फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर पिंटू को समर्थन दिया, जिससे पुलिस को और भी भ्रमित किया गया।

कैमूर में मामले की जाँच में पता चला कि पिंटू ने स्थानीय पुलिस को एक बड़ी चोरी की रिपोर्ट दी और कहा कि वह ‘ऑपरेशन लीडर’ है। इस पर पुलिस ने उसके साथ मिलकर एक बड़ी खोजबीन की, जिसमें कई सामान को जब्त किया गया। परन्तु, बाद में यह स्पष्ट हुआ कि वह स्वयं ही उन वस्तुओं के पीछे था और उसने पुलिस को फँसाने के लिए इस योजना को तैयार किया था।

पोलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया में कहा गया कि यह एक अत्यंत चतुर और जटिल धोखा था, जिसने कई स्तरों पर पुलिस कार्य को बाधित किया। औरंगाबाद के नगर थाना के इंस्पेक्टर ने बताया कि उन्होंने प्रारम्भिक जांच में पिंटू को प्रशिक्षु अधिकारी मान लिया था, जिससे आगे की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई। पटना में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि इस प्रकार के धोखे से जनता का भरोसा कमजोर होता है और विभाग को तुरंत कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

गया और कैमूर की पुलिस ने भी समान रूप से कहा कि इस मामले में फर्जी पहचान दस्तावेज़ों और सोशल मीडिया के माध्यम से जनसमूह को गुमराह करने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि उन्होंने पिंटू को पकड़ने के लिए विशेष टीम बनाकर कई स्थानों पर जाँच शुरू की और अंततः उसे पकड़ लिया। इन सभी प्रतिक्रियाओं में यह स्पष्ट हुआ कि पुलिस विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े उपाय अपनाएगा।

राज्य पुलिस ने इस घटना को एक ‘सुरक्षा उल्लंघन’ के रूप में वर्गीकृत किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी धोखाधड़ी न केवल पुलिस की कार्यवाही को बाधित करती है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था को भी खतरे में डालती है। इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए पुलिस ने नई पहचान सत्यापन प्रणाली लागू करने की योजना बनायी है,

Updated: September 12, 2026


Fake IPS officer scammed police across MP and Bihar using forged documents, leading to the arrest of two accomplices.
Authorities seized accomplices and a vehicle while the main suspect remains at large, prompting new verification protocols.

The impostor’s actions across multiple districts disrupted police operations and strained inter-departmental coordination.
Authorities are revising verification protocols to prevent future security breaches involving forged official credentials.

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