पिछले दो दिनों में शिखर सम्मेलन में विविध कार्यशालाएँ और बहुपक्षीय सत्र आयोजित किए गए, जिसमें जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, और डिजिटल बुनियादी ढाँचा प्रमुख चर्चा के विषय थे। विशेष रूप से, ब्रिक्स के वित्तीय संस्थान, नविन बँक, ने विकासशील देशों के लिए सस्ते ऋण उपलब्ध कराने की योजना को विस्तारित करने का प्रस्ताव रखा। इसके अलावा, सदस्य देशों ने स्वास्थ्य सुरक्षा, विशेषकर कोविड-19 जैसी महामारी से निपटने के लिए एक संयुक्त रिसर्च फंड की घोषणा की। ये कदम समूह की सामरिक दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
आज के मुख्य बिंदु में प्रधानमंत्री मोदी की चार द्विपक्षीय बैठकों को प्रमुखता दी गई है। पहली बैठक में वे दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सीरिल रामाफोसा के साथ आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करेंगे। दूसरी बैठक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा निर्यात के मुद्दे प्रमुख रहे हैं।
तीसरी मुलाकात में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ तकनीकी साझेदारी और डिजिटल बुनियादी ढाँचे की संभावनाओं को लेकर वार्ता होगी। अंत में, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुईज़ इनासियो लुला दा सिल्वा के साथ कृषि व व्यापार सहयोग को सुदृढ़ करने पर चर्चा की जाएगी।
प्रत्येक द्विपक्षीय सत्र में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है, जिससे नीति निर्माताओं को तकनीकी एवं आर्थिक डेटा उपलब्ध कराते हुए अधिक सटीक निर्णय लेने में मदद मिल सके। इस दौरान, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नई ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, विशेषकर हाइड्रोजन और बैटरी उत्पादन में सहयोग के प्रस्ताव रखे हैं। साथ ही, डिजिटल भुगतान प्रणाली के अंतरराष्ट्रीय मानकों को स्थापित करने हेतु एक संयुक्त कार्यसमिति का गठन भी प्रस्तावित किया गया। यह सभी पहलें ब्रिक्स के आर्थिक एकीकरण को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखती हैं।
वास्तव में, आज के समिट में कई द्विपक्षीय समझौतों को औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करने की संभावना है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच व्यापारिक टैरिफ को कम करने के लिए एक व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। रूस के साथ ऊर्जा सहयोग में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए दीर्घकालिक अनुबंध तैयार किया जा रहा है। चीन के साथ तकनीकी सहयोग में 5G और क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने की योजना है। इन सभी समझौतों का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक निर्भरता को बढ़ाना और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करना है।
सत्र के बाद विभिन्न देशों के राजनयिक प्रतिनिधियों ने इस शिखर सम्मेलन को समय की मांग कहा। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने कहा कि विकासशील देशों को वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के माहौल में एकजुट होना चाहिए। रूसी प्रतिनिधिमंडल ने उल्लेख किया कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए ब्रिक्स का सहयोग आवश्यक है। चीन के प्रवक्ता ने कहा कि डिजिटल अर्थव्यस्था में सहयोग से दोनों पक्षों को लाभ होगा। ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने कृषि निर्यात के नए बाजारों की तलाश को प्राथमिकता देने की बात दोहराई। इन सब बयानों से स्पष्ट होता है कि सदस्य देशों की अपेक्षाएँ सामरिक और आर्थिक दोनों ही पहलुओं में गहरी हैं।
Updated: September 13, 2026
The summit’s bilateral meetings aim to formalize agreements that could deepen economic, energy and technology cooperation among BRICS members.
Such coordination is expected to strengthen the group’s collective influence in global trade and development discussions.