Press "Enter" to skip to content

दिल्ली घोषणापत्र में UNSC सुधार की मांग; चीन-रूस ने भारत-ब्राज़ील की स्थायी सदस्यता का विस्तृत समर्थन व्यक्त किया

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली में जारी किए गए दिल्ली घोषणापत्र ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधार की माँग को दोहराया, जबकि चीन और रूस ने भारत व ब्राज़ील की बढ़ती भूमिका के पक्ष में खुला समर्थन व्यक्त किया। यह समर्थन अंतरराष्ट्रीय मंच पर विकासशील देशों की आवाज़ को सुदृढ़ करने के लक्ष्य से मेल खाता है, जिससे ब्रिक्स समूह की सामूहिक शक्ति का नया स्वरूप उभरता दिख रहा है। इस कदम को कई विश्लेषकों ने वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव की शुरुआती संकेत के रूप में पढ़ा है, जहाँ पारंपरिक शक्ति संरचनाओं को चुनौती दी जा रही है।

ब्रिक्स समूह की उत्पत्ति 2010 में चीन, रूस, भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हुई थी। पहले आर्थिक पहलू पर केंद्रित इस समूह ने धीरे‑धीरे राजनीतिक आयाम भी ग्रहण किया, विशेषकर वैश्विक शासन के मंच पर अधिक प्रभाव की इच्छा से। 2023 में आयोजित शिखर सम्मेलन ने इस प्रवृत्ति को तीव्र किया, जहाँ सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की मांग को प्रमुख एजेंडा बना दिया। इस पृष्ठभूमि में दिल्ली घोषणापत्र का प्रस्तावना भाग इस बात को स्पष्ट करता है कि वैश्विक संस्थाओं में शक्ति का पुनर्वितरण आवश्यक है।

घोषणापत्र का मुख्य बिंदु यह है कि UNSC में स्थायी सदस्यता के साथ-साथ पाँच निरंतर सदस्य देशों को अतिरिक्त स्थायी सदस्यता प्रदान की जाए, जिससे भारत और ब्राज़ील को भी स्थायी सीट मिल सके। यह प्रस्ताव पारंपरिक पाँच स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) के भीतर संतुलन स्थापित करने की कोशिश है। साथ ही, विकासशील देशों की अधिक भागीदारी के लिए विशेष मतदान अधिकार और वित्तीय योगदान में पारदर्शिता की मांग की गई है। यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नई दिशा स्थापित करने की इच्छा को दर्शाता है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन और रूस ने इस प्रस्ताव पर स्पष्ट समर्थन व्यक्त किया। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत व ब्राज़ील को स्थायी सदस्यता देना वैश्विक शासन को अधिक समावेशी बनाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह कदम विश्व शांति व सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, क्योंकि विकसित देशों के साथ मिलकर विकासशील देशों की आवाज़ को भी मंच मिलेगा। इन देशों की इस सटीक घोषणा ने शिखर सम्मेलन में एकजुटता की भावना को बढ़ाया और भविष्य के सहयोगी कदमों की नींव रखी।

भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस समर्थन को सराहा, यह कहते हुए कि भारत हमेशा संयुक्त राष्ट्र की सुधार प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है। मंत्रालय ने कहा कि स्थायी सदस्यता के लिए भारत का मानदंड केवल आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि शांति स्थापना, विकास सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन में उसकी भूमिका भी है। भारत ने इस अवसर को अपने अंतरराष्ट्रीय स्थिति को सुदृढ़ करने का मंच माना और भविष्य में इस दिशा में अधिक राजनयिक प्रयासों की घोषणा की।

रूस के विदेश प्रतिनिधि ने बताया कि वर्तमान UNSC संरचना कई बार वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अक्षम साबित हुई है। उन्होंने कहा कि भारत और ब्राज़ील के स्थायी सदस्य बनना इस असंतुलन को सुधारने में सहायक होगा। इस संदर्भ में, रूस ने कहा कि वह इस सुधार प्रक्रिया में सभी विकासशील देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई गतिशीलता स्थापित हो सके।

अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इस प्रस्ताव पर सतर्क प्रतिक्रिया दी। जबकि उन्होंने विकासशील देशों की भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता को स्वीकार किया, उन्होंने कहा कि UNSC के सुधार में व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति आवश्यक है। इस बीच, कई यूरोपीय देशों ने कहा कि किसी भी परिवर्तन को पारदर्शी प्रक्रिया और मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में ही लागू किया जाना चाहिए।

अर्थव्यवस्था की दृष्टि से देखें तो भारत और ब्राज़ील के स्थायी सदस्य बनने से ब्रिक्स देशों की आर्थिक सहयोग में नई संभावनाएँ खुल सकती हैं। दोनों देशों की बढ़ती आर्थिक शक्ति और निवेश क्षमता को ध्यान में रखकर, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी, जिससे विकासशील देशों को अधिक वित्तीय सहायता मिल सकेगी। इस परिवर्तन से वैश्विक व्यापार संरचना में भी बदलाव की संभावना है, जहाँ दक्षिणी देशों को अधिक बाजार पहुंच मिल सकेगी।

सामाजिक स्तर पर, इस कदम को कई विकासशील देशों के नागरिक अधिकार संगठनों ने सकारात्मक रूप में देखा है। उन्होंने कहा कि यदि भारत व ब्राज़ील को स्थायी सदस्यता मिलती है, तो वैश्विक नीति निर्माण में मानवाधिकार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिल सकती है। इस संदर्भ में, कई NGOs ने इस सुधार के लिए सक्रिय समर्थन व्यक्त किया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक प्रतिनिधित्व की माँग को दोहराया।

राजनीतिक विश्लेषकों ने इस प्रस्ताव को वैश्विक शक्ति संतुलन में परिवर्तन की ओर इशारा किया है। वे मानते हैं कि भारत और ब्राज़ील का स्थायी सदस्य बनना एक बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा, जहाँ एक ही पाँच देशों का हुक्मरानी कम होगी

Updated: September 12, 2026

ब्रिक्स का UNSC सुधार पर जोर सिर्फ स्थायी सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि पश्चिमी एजेंडा की वैधता को चुनौती देने का एक ध्यान से बनाया गया राजनयिक हथियार है।
यह समर्थन ध्रुवीकरण को सहने के

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from अंतरराष्ट्रीय समाचारMore posts in अंतरराष्ट्रीय समाचार »