वीर कुंवर सिंह चौक पर कई छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी कई डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की, जबकि अभी तक किसी को हिरासत
में नहीं लिया गया।
विक्टोरिया सेंट्रल स्कूल के एक पूर्व छात्र ने बताया कि अभिषेक कुमार ने एक समाचार लेख लिखते समय स्कूल के परिसर में छिपकली के बारे में तथ्य इकट्ठा करने के लिए कई शिक्षकों और छात्रों से जानकारी ली थी। इस दौरान उन्हें स्कूल के कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा बुलाया
गया और कहा गया कि वे इस मुद्दे को जल्दी से निपटाने में मदद करेंगे। लेकिन बाद में इन डॉक्टरों ने अभिषेक को अनजाने में अस्पताल के एक गुप्त कोड में ले जाकर मारपीट करने का आरोप लगाया, जिससे यह मामला सार्वजनिक रूप से उजागर हुआ।
पिछले दो हफ्तों में सहरसा में कई
बार डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों द्वारा छात्रों को बुलाकर मारपीट कराने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय अस्पतालों में रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मेडिकल कॉलेज के छात्रों को बिना कारण इंटर्नशिप के दौरान शारीरिक दंड दिया गया, जिससे छात्र संघों में गहरी नाराज़गी पाई जा रही है। इस प्रकार के आरोपों ने
स्वास्थ्य क्षेत्र में मौजूदा तनाव को और बढ़ा दिया है, जहाँ पहले से ही डॉक्टरों-रोगियों के बीच भरोसा क्षीण हो रहा था। इस पृष्ठभूमि में अभिषेक कुमार के साथ हुई घटना को एक बड़ा बिंदु माना जा रहा है।
रविवार को सुबह लगभग नौ बजे, वीर कुंवर सिंह चौक पर लगभग दो सौ
लोगों के समूह ने एकत्रित होकर प्रदर्शन शुरू किया। उन्होंने ध्वज फहराए, नारे लगाए और सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद के पुतले को दहन किया, जिसे कई लोगों ने इस क्षेत्र में डॉक्टरों के अनुचित व्यवहार के प्रतीक के रूप में देखा। प्रदर्शन के दौरान कई युवा ने पुलिस को झंडे सौंपे
और मौन धरना रखा, जबकि अन्य ने पृष्ठभूमि में शांति बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों का प्रबंधन किया। स्थानीय व्यापारियों ने भी इस विरोध को देखते हुए अपने व्यापारिक गतिविधियों को सीमित कर दिया।
पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने के लिए बड़ी संख्या में अधिकारी तैनात किए और राउंड्स के साथ सुरक्षा जाँच
की। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण रहने का संकल्प किया और कोई भी हिंसक कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने बताया कि वे घटना की पूरी जांच कर रहे हैं और सभी आरोपों की पुष्टि के बाद ही किसी को हिरासत में लेंगे। वहीं प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि 48 घंटे के भीतर आरोपी
डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो वे सहरसा शहर को बंद करने का अल्टीमेटम देंगे, जिससे शहर की सामान्य जीवनधारा में बाधा आएगी।
प्रदर्शन के बाद स्थानीय नागरिकों ने अपने विचार व्यक्त किए, कई लोग डॉक्टरों के खिलाफ सार्वजनिक न्याय की मांग कर रहे थे, जबकि कुछ ने इस
प्रकार के विरोध को अनावश्यक माना। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, यदि शहर बंद हो जाता है तो हमारा व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा, लेकिन न्याय का सवाल है, हमें भी इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। वहीं कुछ छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने कहा, हमें इस घटना को अनदेखा नहीं
किया जा सकता, यह शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों को प्रभावित करता है। इस प्रकार विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रियाएँ स्पष्ट रूप से विभाजित थीं।
सहरसा की पुलिस ने बताया कि अभिषेक कुमार के खिलाफ कोई आधिकारिक FIR दर्ज नहीं हुई है और अभी तक कोई साक्ष्य नहीं मिला है जो उन पर सीधे
मारपीट का आरोप सिद्ध करे। पुलिस ने यह भी कहा कि उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों के साथ मिलकर एक विशेष जांच टीम गठित की है, जो इस मामले को त्वरित रूप से सुलझाने के लिए काम करेगी। इसके अलावा, पुलिस ने स्थानीय मेडिकल कॉलेजों को भी इस मुद्दे पर सावधानी
बरतने की चेतावनी दी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।
सहरसा के स्वास्थ्य विभाग ने भी इस मामले पर अपनी टिप्पणी जारी की, जिसमें उन्होंने कहा कि अस्पतालों में सभी कर्मचारियों को पेशेवर आचार संहिता का पालन करना अन
Updated: September 13, 2026
Insight: The incident links alleged assault on a journalist to broader claims of misconduct by medical staff, prompting public protests. Authorities have initiated an investigation, while demonstrators are demanding arrests of the implicated doctors.