बिहार में कृषि यंत्रीकरण के इतिहास की जड़ें 2015 में शुरू हुईं, जब राज्य ने पहले बार कृषि उपकरणों पर 30 % तक की सब्सिडी की घोषणा की थी। तब से हर वर्ष अनुदान के प्रतिशत में क्रमिक वृद्धि हुई, लेकिन 2025‑26 के बजट में केवल 1.2 लाख किसानों को लाभ मिला था, जबकि कुल कृषक वर्ग 2.5 करोड़ से अधिक है। इस असंतुलन को पाटने के लिए नई योजना में अनुदान प्रतिशत को 50 % तक बढ़ाया गया है, तथा उच्चतम सब्सिडी राशि को 5 लाख तक बढ़ाया गया है, जिससे बड़े ट्रैक्टर एवं मल्टी‑फंक्शनल यंत्रों की खरीद को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
पिछले वर्षों में राज्य में कृषि उत्पादन में धीमी गति, जलवायु परिवर्तन के कारण फसल विफलता और श्रम की कमी के मुद्दे प्रमुख रहे हैं। सरकार ने इन चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजिटल कृषि, सटीक खेती और मशीन‑आधारित उत्पादन को मुख्य रणनीति बनाया। इस दिशा में, 2024‑25 में 1.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर ट्रैक्टर‑संचालित खेती का विस्तार किया गया, जिससे प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन में 12 % की वृद्धि दर्ज हुई। नई योजना का उद्देश्य इस प्रगति को दोगुना करके राज्य को भारत का प्रमुख कृषि‑टेक हब बनाना है।
योजना का कार्यान्वयन बिहार कृषि विकास निगम (BADC) और राज्य कृषि विभाग के संयुक्त सहयोग से होगा। इच्छुक किसान को पहले ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा, उसके बाद वैध पहचान प्रमाण, भूमि रिकॉर्ड और आय प्रमाणपत्र अपलोड करने होंगे। आवेदन की स्वीकृति के बाद, किसान को चयनित मशीनरी निर्माता या डीलर से सीधे उपकरण खरीदने का अधिकार मिलेगा, जहाँ सरकार अनुदान राशि को सीधे विक्रेता को ट्रांसफ़र करेगी।
न्यूनतम 1 लाख रुपये की कीमत वाले यंत्रों के लिए अनुदान का अधिकतम प्रतिशत 50 % है, जबकि 2 लाख रुपये तक के यंत्रों पर 60 % तक की सहायता दी जाएगी। यदि ट्रैक्टर की कीमत 5 लाख रुपये से अधिक हो, तो अतिरिक्त 10 % अतिरिक्त सब्सिडी के रूप में प्रदान की जाएगी, बशर्ते किसान ने पिछले दो वर्षों में कृषि में न्यूनतम 80 % भूमि को यंत्र‑संचालित किया हो। योजना में विशेष रूप से छोटे किसानों को लक्षित किया गया है, इसलिए 1 लाख रुपये से कम कीमत वाले यंत्रों पर कोई अनुदान नहीं दिया जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया में प्राथमिकता उन किसानों को दी जाएगी जो पहले से ही बीज, उर्वरक और जल प्रबंधन के लिए सरकारी स्कीमों का लाभ ले रहे हैं। इस वर्गीकरण को डिजिटल भूमि रिकॉर्ड (DLC) और किसान आयु वर्गीकरण (KIS) के माध्यम से सत्यापित किया जाएगा। योजना के तहत एक बार अनुदान मिल जाने पर, वही किसान अगले दो वर्षों में पुनः आवेदन नहीं कर पाएगा, जिससे अनुदान का उचित वितरण सुनिश्चित हो सके।
बिहार के कृषि मंत्री ने योजना की घोषणा के बाद बताया कि इस वर्ष 3 लाख मशीनों की डिलीवरी लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे कुल 15 लाख किसान लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस योजना को सफल बनाने के लिए विभिन्न यंत्र निर्माताओं के साथ विशेष मूल्य समझौते किए हैं, जिससे किसानों को बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपकरण मिल सकें।
किसान संघों ने योजना को सराहते हुए कहा कि यह छोटे किसानों को आर्थिक दबाव से बाहर निकालने में मदद करेगा। विशेष रूप से किसान परामर्श समिति के अध्यक्ष ने कहा कि सब्सिडी की राशि पर्याप्त है, परन्तु उन्हें प्रक्रिया को सरल बनाना आवश्यक है, ताकि बिन‑तकनीकी किसान भी सहजता से आवेदन कर सके। उन्होंने आवेदन फॉर्म में भाषा समर्थन और ग्रामीण स्तर पर हेल्पडेस्क की मांग भी रखी।
विपरीत रूप में, कुछ कृषि उपकरण डीलरों ने संकेत दिया कि अनुदान राशि की घोषणा से उनके मार्जिन पर दबाव पड़ेगा, जिससे उच्च‑गुणवत्ता वाले यंत्रों की उपलब्धता में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को डीलर‑शोरूम में स्टॉक को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त नियामक उपाय अपनाने चाहिए, ताकि कीमतों में अस्थिरता न हो।
राज्य
Updated: September 13, 2026
Bihar’s new “Kisan Yojana 2026‑27” will subsidise up to 50‑60% of the cost of tractors and other farm equipment priced above ₹1 lakh, with a maximum grant of ₹5 lakh per machine, and applications open until 30 September 2026. The scheme, aimed at small and marginal farmers, seeks to accelerate mechanisation, boost yields and position the state as a leading agri‑tech hub.
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