बाढ़ के बाद राज्य सरकार ने तुरंत आपातकालीन उपायों की घोषणा की, जिसमें सैकड़ों टेंट, जल शुद्धिकरण इकाइयाँ और मोबाइल मेडिकल यूनिटें तैनात की गईं। मुंगेर में स्थापित बाढ़ राहत शिविर में अब तक 3,500 से अधिक बाढ़ पीड़ितों को अस्थायी आश्रय, भोजन व प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की जा रही है। इस शिविर को जिला प्रशासन, पुलिस और सामाजिक सेवा विभाग की संयुक्त देखरेख में चलाया जा रहा है, जिससे संचालन में पारदर्शिता बनी रहे।
मुख्यमंत्री ने शिविर के निरीक्षण के दौरान कहा कि बाढ़ के कारण हुए मानवीय संकट को समाप्त करने के लिए राज्य के सभी संसाधन जुटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जल निकासी के लिए अतिरिक्त पंप स्थापित किए जाएंगे और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द स्थायी पुनर्वास कार्य शुरू किए जाएंगे। इस बात को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि राहत कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्तर पर बाढ़ पीड़ितों के लिए वित्तीय सहायता के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने आपदा राहत के लिए विशेष निधि आवंटित की है, जिसमें प्रत्येक परिवार को 20,000 रुपये की तत्काल सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कृषि बीमा और पुनर्वास योजनाओं को तेज़ी से लागू किया जाएगा, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान कम हो सके।
शिविर में मौजूद कई परिवारों ने कहा कि अब तक मिली सहायता से उनके जीवन में कुछ राहत मिली है, परंतु खाद्य सामग्री की निरंतर आपूर्ति और साफ पानी की उपलब्धता अभी भी चुनौती बनी हुई है। एक महिला पीड़ित ने बताया कि उनके दो बच्चों को लगातार दस्त की समस्या हो रही है, जबकि साफ पानी की कमी ने स्वास्थ्य स्थितियों को और बिगाड़ दिया है। कई घरों में अभी भी बिजली नहीं आई है, जिससे रात में जीवनयापन कठिन हो रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए विशेष कार्यदल बनाकर 48 घंटे के भीतर जल निकासी कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई में रुकावट न आए। स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त टीकाकरण कैंप चलाने और रोग नियंत्रण के लिए विशेष टीमें तैनात करने की योजना बनाई है।
विरोधी दल के एक प्रतिनिधि ने कहा कि बाढ़ राहत में सरकार की पहल सराहनीय है, परंतु बुनियादी ढांचे की लापरवाही से ही ऐसी आपदा उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि जल निकासी प्रणाली में मौजूदा खामियों को जल्द से जल्द सुधारना आवश्यक है, नहीं तो भविष्य में समान स्थितियां दोहराई जा सकती हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य सरकार को बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में दीर्घकालिक पुनर्वास योजनाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
वित्त विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि बाढ़ राहत के लिए राज्य ने पहले ही 350 करोड़ रुपये की आपातकालीन निधि जारी कर दी है। इस निधि के तहत टेंट, खाद्य सामग्री, चिकित्सा उपकरण और जल शुद्धिकरण यूनिटों की खरीदारी की जा रही है। साथ ही, उन्होंने कहा कि अतिरिक्त 200 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जल्द ही मुंगेर में उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे राहत कार्य की गति बढ़ेगी।
Updated: September 16, 2026
The joint state‑centre visit signals a political shift from ad‑hoc disaster response to a more coordinated, cash‑plus‑infrastructure rescue model, but without fixing the chronic drainage gaps, relief will remain a temporary band‑aid.
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