तहत गंगा नदी के दोनों तटों पर क्रमशः बांधों की संरचना के ऊपर फोरलेन सड़क स्थापित की जाएगी, जिससे प्रदेश के 12 जिलों को सीधे एकीकृत नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह पहल बिहार के बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने और आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
बक्सर-भागलपुर
फोरलेन एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव कई वर्षों से चर्चा में रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों में ही इसे औपचारिक रूप से तेज़ी से आगे बढ़ाया गया। गंगा नदी के दोनों किनारों पर समानांतर दो पंक्तियों में बांधों की योजना, जल प्रबंधन और सड़कों के स्थायित्व को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इस
परियोजना के लिये अनुमानित लागत 30,000 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें केंद्र सरकार, बिहार राज्य तथा निजी निवेशकों की साझेदारी शामिल होगी। यह योजना बिहार के पूर्वी भाग में जलस्रोत संरक्षण, कृषि जलसिंचाई और सड़कों के दीर्घकालिक रखरखाव को भी समाहित करती है।
बिहार के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों को जोड़ने
वाले इस एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 350 किलोमीटर होगी, जिसमें बक्सर, भागलपुर, सासाराम, मोरादाबाद, गया, जहानाबाद, और नालंदा सहित 12 प्रमुख जिलों को कवर किया जाएगा। इन जिलों में औद्योगिक इकाइयाँ, कृषि उत्पादकता और पर्यटन स्थल स्थित हैं, जिन्हें इस सड़क के माध्यम से बेहतर बाजार पहुंच प्राप्त होगी। इस पहल का उद्देश्य न
केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ाना है, बल्कि स्थानीय वस्तुओं की समय पर डिलीवरी और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार को भी साकार करना है।
निर्माण कार्य की शुरुआत बक्सर जिले में स्थित गंगा किनारे से होगी, जहाँ पहले चरण में 80 किमी की दूरी पर दो बड़े बांधों का निर्माण होगा। इन बांधों के
ऊपर फोरलेन सड़कों को तैयार किया जाएगा, जिससे पानी के प्रवाह को नियंत्रित करते हुए स्थिर आधार स्थापित किया जा सके। निर्माण में प्रयुक्त आधुनिक तकनीक, जैसे प्री-फैब्रिक्ड कंक्रीट स्लैब और हाई-टेंशन स्टील स्ट्रक्चर, को अपनाया जाएगा, जिससे कार्य की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो।
बग़लपुर में स्थित प्रमुख निर्माण कंपनियों
को इस कार्य के लिए मुख्य ठेकेदार नियुक्त किया गया है, और उन्होंने कहा कि अगले तीन महीनों में बेसिक फाउंडेशन तैयार कर दिया जाएगा। स्थानीय मजदूरों को इस परियोजना में रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्र में बेरोजगारी में कमी की उम्मीद है। साथ ही, पर्यावरणीय मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, गंगा के जलवायु
पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि बांधों की डिजाइन में जल प्रवाह को प्राकृतिक रूप से जारी रखने की व्यवस्था रखी गई है।
राज्य के प्रमुख अधिकारियों ने इस परियोजना को ‘बिहार की धड़कन’ कहा है, और कहा कि यह एक्सप्रेसवे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से भी जुड़कर एक बड़े ट्रांसपोर्ट हब की भूमिका निभाएगा।
इस संदर्भ में बक्सर, भागलपुर और आसपास के जिलों में कई छोटे-छोटे कस्बे भी इस सड़कीय नेटवर्क से जुड़ेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। कार्यवाही के दौरान स्थानीय प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी सामाजिक और सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
बिहार के मुख्यमंत्री ने
इस परियोजना को राज्य की विकास योजना में प्रमुख स्थान दिया है और कहा कि फोरलेन एक्सप्रेसवे से व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में उल्लेखनीय सुधार आएगा। उन्होंने बताया कि यह सड़क राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से भी तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे बिहार के उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा। इस बीच, केंद्रीय
परिवहन विभाग के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने के लिए आवश्यक अनुमोदन प्रक्रियाओं को शीघ्रता से पूरा करेंगे।
बिहार के प्रमुख व्यापार संघों ने इस पहल का स्वागत किया है और कहा कि फोरलेन एक्सप्रेसवे से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, जिससे छोटे और बड़े
उद्यमों को लाभ होगा। उन्होंने बताया कि अब वस्तु परिवहन में लगने वाला समय घटने से कृषि उत्पादकों को बेहतर मूल्य मिल सकेगा, और उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति में सुविधा होगी। इसके साथ ही, स्थानीय पर्यटन स्थलों जैसे पटना, गया और नालंदा को भी इस सड़क के माध्यम से अधिक पर्यटक मिलेंगे,
जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण संगठनों ने भी इस योजना पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गंगा के किनारों पर दो समानांतर बांध बनाना जल प्रवाह और जैव विविधता पर असर डाल सकता है, इसलिए पर्यावरणीय मॉनिटरिंग को लगातार चलाना आवश्यक है। उन्होंने प्रस्ताव रखा
The Bihar government approved a 350‑km four‑laned Buxar‑Bhagalpur expressway that will straddle the Ganga on parallel bridges, cutting travel time between the two cities to about two hours and linking twelve districts. Estimated at ₹30,000 crore, the project aims to boost trade, agriculture and tourism while pledging minimal environmental impact and creating local jobs.
Bihar’s new 350‑km four‑lane bypass promises to slashing travel time and turn the state into a logistics corridor—making farmers’ produce hit markets faster and keeping the rail‑linked industry humming. Yet the real gamble is whether the river‑banked concrete arteries can survive seasonal floods without eroding the
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