Press "Enter" to skip to content

विश्वकर्मा पूजा के कारण 17 सितम्बर को राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल बंद, कई राज्यों में 19‑20 सितम्बर तक कुल चार दिन की छुट्टी की घोषणा.

सप्ताह के मध्य में घोषित स्कूल अवकाश ने छात्रों और अभिभावकों में मिश्रित प्रतिक्रिया उत्पन्न की है; १७ सितम्बर २०२६ को राष्ट्रीय स्तर पर विश्वकर्मा पूजा के कारण कई राज्यों में स्कूल बंद रहने की घोषणा की गई, और इसके बाद १९ व २० सितम्बर को सामान्य शनिवार‑रविवार की छुट्टियों के साथ, कुल मिलाकर चार दिन तक शिक्षण संस्थान बंद रह सकते हैं। यह जानकारी शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस में स्पष्ट रूप से दी गई है, जिसमें बताया गया कि यदि किसी राज्य या निजी स्कूल का नियमित शनिवार को कार्यदिवस नहीं है, तो वह केवल १७ सितम्बर को ही बंद रहेगा, जबकि अन्य स्कूलों को १७, १९ और २० सितम्बर को अवकाश मिलेगा।

वर्ष २०२६ की शैक्षणिक कैलेंडर में इस प्रकार की बड़ी सार्वजनिक छुट्टी पहले भी कई बार देखी गई है; परंपरागत रूप से विश्वकर्मा पूजा को भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश के रूप में मान्यता मिली है। शिक्षा मंत्रालय ने इस वर्ष भी इसी दिशा में कदम उठाते हुए, सभी केंद्र शासित प्रदेशों और कई राज्य सरकारों को इस दिन को अवकाश घोषित करने के लिए निर्देश जारी किया। पिछले दशकों में इस तरह की छुट्टियों ने विद्यालयीन कार्यक्रम में लचीलापन प्रदान किया है, जिससे विद्यार्थियों को धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिला है।

हालांकि, सभी राज्यों में इस अवकाश की अवधि समान नहीं है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, और मध्य प्रदेश जैसी प्रमुख राज्य सरकारों ने आधिकारिक रूप से १७ सितम्बर को स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने स्थानीय स्तर पर ही इस निर्णय को लागू करने का विकल्प चुना। कई निजी विद्यालयों ने भी अपने शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार इस छुट्टी को समायोजित किया है, जिससे प्रत्येक संस्थान में अलग‑अलग समय-सारिणी बन गई है।

इस निर्णय के बाद, कई विद्यालयों ने अपने अभिभावक संचार प्रणाली के माध्यम से तुरंत सूचना जारी की। दिल्ली के एक प्रमुख निजी विद्यालय ने ई‑मेल और एसएमएस के जरिए बताया कि १७ सितम्बर को आध्यात्मिक कार्यक्रम के कारण स्कूल बंद रहेगा, और १९‑२० सितम्बर के सप्ताहांत के साथ कुल तीन दिन की निरंतर बंदी होगी। इसी प्रकार, लखनऊ स्थित सरकारी स्कूलों ने अपने आधिकारिक बोर्ड पर नोटिस प्रकाशित कर बताया कि सभी कक्षाएँ १७ सितम्बर को स्थगित की जाएँगी, जिससे शिक्षकों को भी इस दिन का लाभ मिल सके।

वहीं, कुछ स्कूलों ने इस अवकाश को पढ़ाई की रफ्तार बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कक्षाएँ जोड़ने की योजना बनायी है। चेन्नई स्थित एक सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय ने घोषणा की है कि २१ सितम्बर को वैकल्पिक कक्षा आयोजित की जाएगी, ताकि पढ़ाई में कोई व्यवधान न हो। इसी तरह, कोलकाता के कई संस्थानों ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म पर अतिरिक्त सामग्री प्रदान करने का वचन दिया है, जिससे शैक्षणिक निरंतरता सुनिश्चित हो सके।

प्रमुख शैक्षिक संघों ने इस निर्णय को लेकर औपचारिक टिप्पणी जारी की। राष्ट्रीय शैक्षिक संस्थान संघ (NEIS) ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों के कारण विद्यालय बंद रखना एक सामान्य प्रथा है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि यह छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर असर न डालने के लिए उचित योजना बनानी चाहिए। कई राज्य शिक्षा परिषदों ने भी कहा कि स्कूलों को इस अवकाश के दौरान छात्रों को स्वाध्याय या परियोजना कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए, जिससे उनके कौशल विकास में मदद मिल सके।

राजनीतिक पक्षों ने भी इस मुद्दे पर अपने-अपने विचार रखे हैं। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री ने कहा कि विश्वकर्मा पूजा को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देना सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है, और इस कारण स्कूल बंद रखना एक समझदार कदम है। विपक्षी दल के कई नेता इस निर्णय को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार छुट्टियों से शैक्षणिक कैलेंडर में गड़बड़ी हो सकती है, और उन्होंने बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों पर संभावित असर को उजागर किया।

आर्थिक विश्लेषकों ने इस स्कूल अवकाश के संभावित आर्थिक प्रभावों को भी नोट किया है। छोटे शहरों में शिक्षण संस्थानों के बंद रहने से स्थानीय सेवाओं, जैसे कि कैफ़ेटेरिया, परिवहन, और पुस्तकालयों की आय पर अस्थायी कमी आ सकती है। वहीं, पर्यटन उद्योग को इस अवधि में धार्मिक यात्रा के कारण लाभ हो सकता है, क्योंकि कई परिवार इस अवसर पर अपने पूर्वजों के गाँव या पवित्र स्थलों की ओर रुख कर सकते हैं।

सामाजिक दृष्टिकोण से, इस अवकाश ने कई समुदायों को अपने सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का अवसर दिया है। गांवों में विश्वकर्मा पूजा के विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें स्कूल के बच्चे भी भाग ले रहे हैं। इस प्रकार, शैक्षिक संस्थानों का बंद होना स्थानीय सामाजिक बंधन को मजबूत करता है, और बच्चों को पारंपरिक मूल्यों से परिचित कराता है।

शिक्षा नीति विशेषज्ञ डॉ. अंजली वर्मा ने कहा कि ऐसी सार्वजनिक छुट्टियाँ शैक्षण

Updated: September 15, 2026


National‑level Vishwakarma Puja on 17 Sept 2026 has prompted most schools to shut, extending the break to three consecutive days when combined with the weekend, though the exact dates vary across states and private institutions. Authorities urge make‑up classes or online resources to offset learning loss, while educators and politicians debate the cultural merit versus potential disruption to the academic calendar.

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from बड़ी खबरMore posts in बड़ी खबर »

Be First to Comment

    प्रातिक्रिया दे

    आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *