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बिहार में ₹1.30 लाख करोड़ के ऊर्जा निवेश की तैयारी, 6 कंपनियों ने दिखाई रुचि; सौर-पवन परियोजनाओं पर जोर

बिहार राज्य ने 1.30 लाख करोड़ रुपये के बड़े पैमाने के ऊर्जा निवेश की योजना की घोषणा की, जिसमें छह प्रमुख कंपनियों ने अपना रुचि व्यक्त किया है; यह कदम राज्य की बिजली आपूर्ति को सुदृढ़ करने और हरित ऊर्जा उत्पादन को तेज करने का उद्देश्य रखता है।
निवेश के तहत सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय स्रोतों में विस्तृत परियोजनाएँ लागू होंगी, जिससे उद्योग और घरेलू दोनों क्षेत्रों में बंपर रोजगार सृजन की उम्मीद है।बिहार में ऊर्जा निवेश का इतिहास देखे तो पिछले दशकों में केवल पारंपरिक थर्मल प्लांटों पर ही ध्यान केंद्रित रहा था। हालांकि, 2015 में शुरू हुए जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील नीतियों ने राज्य सरकार को नवीकरणीय ऊर्जा की ओर धकेल दिया। इस संदर्भ में, 2022 में बिहार ने राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत 1 गिगावॉट की स्थापित क्षमता का लक्ष्य रखा था, परंतु परियोजनाओं की गति धीमी रही।

नई योजना के तहत, राज्य सरकार ने विशेष आर्थिक ज़ोन (SEZ) और पावर ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जिससे निवेशकों को आसान लाइसेंसिंग, कर छूट और तेज़ अनुमोदन प्रक्रिया मिल सकेगी। इसके साथ ही, बिजली ग्रिड की अपग्रेड और स्टोरेज तकनीक में भी बड़ी राशि निवेशित होगी, जिससे उत्पादन‑से‑उपभोग तक की आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ेगी।

पहली प्रमुख कंपनी, क्रिलोस्कर ब्रदर लिमिटेड, ने 25 बिलियन रुपये के सौर परियोजना निवेश की घोषणा की है, जो बिहार के दक्षिणी जिलों में 500 मेगावॉट क्षमता स्थापित करेगी। कंपनी ने कहा कि यह परियोजना स्थानीय किसानों को भूमि पट्टा के रूप में उपलब्ध कराएगी और उन्हें न्यूनतम आय प्रदान करेगी।

दूसरे चरण में, हिंदुस्तान पावर एक्सचेंज ने 30 बिलियन रुपये के पवन ऊर्जा योजना पर काम करने का इरादा जताया है। यह योजना मुख्यतः बक्सर और भागलपुर के पवन संभावित क्षेत्रों में स्थापित होगी, जहाँ औसत वार्षिक पवन गति 7 मी/सेकंड दर्ज की गई है। कंपनी ने कहा कि यह परियोजना 12 हज़ार सीधे रोजगार और 40 हज़ार परोक्ष रोजगार सृजित करेगी।

तीसरी प्रमुख इकाई, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज, ने 20 बिलियन रुपये के हाइड्रोजन उत्पादन और स्टोरेज प्रौद्योगिकी में निवेश का संकेत दिया है। यह परियोजना गंगा नदी के किनारे स्थित होगी और नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न हाइड्रोजन को उद्योगों को सप्लाई करने के लिए तैयार करेगी। कंपनी ने बताया कि यह पहल बिहार को भारत के हाइड्रोजन हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।

अन्य तीन कंपनियों में एशिया एग्रीवोल्टाइक कॉर्पोरेशन, सोलारिया टेक्नोलॉजीज और इकोपावर लिमिटेड शामिल हैं, जो क्रमशः कृषि‑ऊर्जा एकीकरण, सोलर पैनल निर्माण और ऊर्जा‑सहेज इलेक्ट्रिक ग्रिड समाधान में निवेश करने की योजना बना रहे हैं। इन कंपनियों ने कहा कि वे स्थानीय उद्यमियों के साथ सहयोग कर तकनीकी हस्तांतरण और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देंगे।

राज्य के ऊर्जा मंत्री ने इस निवेश को बिहार के ऊर्जा स्वावलंबन की दिशा में एक निर्णायक मोड़ कहा और बताया कि सभी कंपनियों को आवश्यक जमीन, जल और बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए विभाग तत्पर है। उन्होंने कहा कि अगले दो महीनों में सभी प्रोजेक्ट्स के विस्तृत समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

बिहार के उद्योग एवं वाणिज्य मंडल के अध्यक्ष ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह निवेश न केवल बिजली की आपूर्ति को स्थिर करेगा, बल्कि ग्रामीण उद्योगों को भी नई ऊर्जा स्रोतों के साथ जोड़ देगा। उन्होंने कहा कि इस निवेश से छोटे उद्योगों की उत्पादन क्षमता में 15 % तक वृद्धि की उम्मीद है।

विपक्षी दल के नेता ने इस योजना पर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जबकि निवेश का पैमाना प्रशंसनीय है, लेकिन पारदर्शिता और पर्यावरणीय अनुमोदन प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य सरकार को स्थानीय समुदायों के साथ विस्तृत परामर्श करने की अपील भी की।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि 1.30 लाख करोड़ रुपये का निवेश बिहार की जीडीपी को अगले पांच वर्षों में लगभग 2 % तक बढ़ा सकता है। इसके साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार सृजन से उपभोक्ता खर्च में वृद्धि होगी, जिससे सामाजिक स्थिरता में सुधार होगा।

सामाजिक दृष्टिकोण से, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण से स्थानीय किसानों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को उचित पुनर्वास पैकेज और भूमि उपयोग योजना तैयार करनी चाहिए, ताकि सामाजिक विरोध को रोका जा सके।

Bihar’s ₹1.30 lakh‑crore clean‑energy push could turn the state from a chronic power‑shortage zone into a regional green‑tech hub, pulling in skilled jobs and raising industrial output.

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