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मोदी ने ब्रिक्स शिखर में रूस, चीन, ईरान सहित 15 द्विपक्षीय बैठकों का शेड्यूल पूरा किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान तीन दिन में लगभग पंद्रह द्विपक्षीय बैठकों का शेड्यूल पूरा किया।
रूस, चीन, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और कई अफ्रीकी, लैटिन अमेरिकी देशों के प्रमुखों के साथ चर्चा में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा सहयोग, सीमा शांति और ग्लोबल साउथ की सामूहिक चुनौतियों को प्राथमिकता दी गई। यह तीव्र कार्यक्रम भारत की बहुपक्षीय भूमिका को सुदृढ़ करने के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी नई दिशा देने का प्रयास रहा।ब्रिक्स के गठन के बाद से भारत ने इस मंच को अपने विदेश नीति के प्रमुख स्तम्भ के रूप में अपनाया है। पिछले शिखर सम्मेलनों में आर्थिक सहयोग, वैकल्पिक विकास मॉडलों और बहुपक्षीयता पर चर्चा मुख्य थी। इस बार दिल्ली ने शिखर को अपनी विदेश नीति की सक्रियता के साथ प्रस्तुत किया, जहाँ मुख्य लक्ष्यों में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार, विकासशील देशों के लिए तकनीकी सहयोग और वैकल्पिक सप्लाई चेन बनाना शामिल था। इस पृष्ठभूमि में मोदी की द्विपक्षीय मुलाकातों की गिनती बढ़ी।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई बैठक में दो देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर समझौते पर सहमति व्यक्त की गई। दोनों पक्षों ने तेल और प्राकृतिक गैस के व्यापार को बढ़ाने, साथ ही एंटी-टेररर रणनीतियों को सुदृढ़ करने की बात की। पुतिन ने भारत को यूरोपीय ऊर्जा संकट में एक विश्वसनीय साझेदार माना और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति के लिए सहयोग की पुष्टि की। इस समझौते से दोनों देशों के व्यापारिक आंकड़े में अगले वित्तीय वर्ष में 15% तक की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई मुलाकात में सामरिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर ले जाने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने सशस्त्र बलों के बीच संयुक्त अभ्यास, साइबर सुरक्षा सहयोग और वैकल्पिक विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला की स्थापना पर समझौता किया। आर्थिक वार्ता में भारत-चीन व्यापार को 2025 तक दो गुना करने का लक्ष्य रखा गया, जिससे दोनों देशों की निर्यात आय में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। इस बैठक में दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने की रणनीति को भी प्रमुखता दी गई।

ईरान के राष्ट्रपति हासिन रोमानिया के साथ हुई चर्चा में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कई प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर हुए। दो देशों ने तेल शोधन, पेट्रोकेमिकल्स और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में साझेदारी की योजना बनाई। भारत ने ईरान के साथ गैस पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने का वचन दिया, जिससे पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद भी ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके। इस समझौते से दोनों देशों की वार्षिक ऊर्जा व्यापारिक मात्रा में 10% की वृद्धि की संभावना है।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सीरिल रामाफोसा के साथ हुई बैठक में कृषि, खनन और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को विस्तारित करने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अफ्रीकी महाद्वीप में भारतीय कंपनियों के निवेश को प्रोत्साहित करने और स्थानीय रोजगार सृजन को बढ़ाने का संकल्प लिया। विशेष रूप से, भारतीय फार्मास्यूटिकल्स को अफ्रीका के सार्वजनिक स्वास्थ्य में योगदान देने के लिए विशेष लाइसेंसिंग प्रक्रिया को तेज करने पर सहमति बनी। इस कदम से दक्षिण अफ्रीका में भारतीय निवेश में अगले पाँच वर्षों में 20% की वृद्धि का अनुमान लगाया गया।

ब्रिक्स शिखर के दौरान ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति अल्बर्टो फर्नांडीज के साथ भी कई औपचारिक मुलाकातें हुईं। इन बैठकों में कृषि निर्यात, जलवायु परिवर्तन के प्रति सामूहिक कार्रवाई और वैकल्पिक वित्तीय संस्थानों की स्थापना पर चर्चा की गई। भारत ने इन दो देशों के साथ वस्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्रों में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) की स्थापना का प्रस्ताव रखा। इस पहल से ब्राज़ील और अर्जेंटीना में भारतीय निर्यात में क्रमशः 12% और 9% की संभावित बढ़ोतरी की आशा है।

Updated: September 14, 2026


PM Modi’s packed schedule of bilateral talks at the 18th BRICS Summit underscored India’s strategic push to strengthen ties across energy, defense and trade. These engagements with global leaders reaffirmed New Delhi’s central role in shaping economic partnerships and addressing shared challenges within the Global South.

Insight: मोदी की तेज़ियों से भरी дипломसी सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि यह साझा उद्देश्यों को निजी सहयोग में बदलने का खेल है, यह संकेत है कि भारत अब मार्जिनल आवाज़ नहीं बल्कि निहित स्वार्थ का केंद्र बन रहा है।

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