मार्गों के साथ उसकी कनेक्टिविटी को भी सुदृढ़ करती है। इस जहाज़ को सुरक्षित रूप से लंगर डालने के बाद, पोर्ट प्राधिकरण ने औपचारिक तौर पर इस सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर मान्य किया, जिससे भविष्य में बड़े शिप्स को आकर्षित करने की संभावनाएँ बढ़ गईं।
V.O.C. पोर्ट
का इतिहास 1970 के दशक से शुरू होता है, जब इसे मुख्यतः छोटे मछली पकड़ने वाले जहाज़ों के लिए विकसित किया गया था। दशकों के दौरान, पोर्ट ने क्रमिक रूप से गहराई, टर्निंग बेसिन और लोडिंग उपकरणों में सुधार किया। 2010 के दशक में, भारत सरकार ने ‘स्मार्ट
पोर्ट’ पहल के तहत बड़े कंटेनर शिप्स को संभालने की दिशा में बड़े निवेश किए। इस प्रक्रिया में डीप-ड्राफ्ट टर्निंग बेसिन का निर्माण, स्वचालित कंटेनर हैंडलिंग सिस्टम और उन्नत नेविगेशन टूल्स को स्थापित किया गया।
इन सुधारों ने पोर्ट को पहले से अधिक गहरा और विस्तृत बना दिया,
जिससे 300 मीटर से अधिक लम्बे जहाज़ों का प्रवेश संभव हुआ। विशेष रूप से, पोर्ट की जलगहराई को 18 मीटर तक बढ़ाया गया, जिससे बड़ी टनज में शिपिंग कंपनियों को आकर्षित करने की क्षमता में इज़ाफा हुआ। साथ ही, एआई‑आधारित ट्रैफ़िक मैनेजमेंट सिस्टम ने जहाज़ों की प्रवेश‑निकास को
समय पर नियंत्रित किया, जिससे देरी कम हुई और सुरक्षा मानकों को उन्नत किया गया।
इस अभिलेख को स्थापित करने वाला जहाज़, “एमेराल्ड ग्रैंड” नामक 335.23 मीटर लंबाई वाला कंटेनर कैरियर, 23,000 कंटेनर TEU क्षमता के साथ विश्व के सबसे बड़े शिप्स में से एक है। यह जहाज़
एशिया‑यूरोप व्यापार मार्ग पर संचालित होता है और इस बार भारत के दक्षिणी तट पर स्थित V.O.C. पोर्ट का पहला प्रवेश था। पोर्ट प्रबंधन ने बताया कि लोडिंग‑अनलोडिंग के लिए नई हाई‑सिलिकॉन क्रेन और स्वचालित गाइडेड व्हील्स का उपयोग किया गया, जिससे 24 घंटे में 2,500 कंटेनर का
संचालन संभव हो पाया।
पोर्ट के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी, श्री अजीत राव, ने इस सफल संचालन पर प्रकाश डाला कि “यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के समुद्री लॉजिस्टिक्स के भविष्य के लिए एक रणनीतिक कदम है।” उन्होंने कहा कि अब पोर्ट ने बड़े आकार के
शिप्स को समायोजित करने की क्षमता हासिल कर ली है, जिससे निर्यात‑आयात कंपनियों को लागत में कमी और समय में बचत होगी। राव ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सुरक्षा प्रोटोकॉल को कड़ा किया गया, जिसमें दो‑स्तरीय रडार मॉनिटरिंग और समुद्री मौसम पूर्वानुमान प्रणाली का उपयोग
शामिल है।
आगामी महीनों में, V.O.C. पोर्ट ने कई अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को आकर्षित करने की योजना बनाई है। विशेष रूप से, यूरोपीय और मध्य‑पूर्वी बाजारों के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए पोर्ट ने नई कनेक्टिविटी रूट्स की घोषणा की है। इस दिशा में, पोर्ट प्रशासन ने किनारे
पर 500 मीटर लंबी नई डॉकेजिंग एरिया के निर्माण को तेज़ करने का इरादा जताया है, जिससे बड़ी मात्रा में माल की हैंडलिंग और तेज़ टर्नअराउंड टाइम सुनिश्चित हो सके।
इसी दौरान, स्थानीय मछली पकड़ने वाले समुदाय ने इस बड़े जहाज़ के प्रवेश को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त
की। कुछ मछुआरे चिंतित हैं कि गहरी ड्राफ्ट और तेज़ ट्रैफ़िक से पारंपरिक मछली पकड़ने के क्षेत्र में बाधा उत्पन्न हो सकती है। दूसरी ओर, कई मछुआरे आशावादी हैं कि पोर्ट की वृद्धि से स्थानीय अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बुनियादी ढाँचा सुधार से उनकी जीविका
में सुधार हो सकता है।
वाणिज्य मंडल के प्रमुख, श्रीमती लता शुक्ला, ने बताया कि “बड़े कंटेनर शिप्स का आगमन हमारे निर्यातकों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकता है, लेकिन साथ ही हमें पर्यावरणीय प्रभावों को भी गहराई से देखना होगा।” उन्होंने कहा कि पोर्ट प्रशासन को
जल गुणवत्ता निगरानी और उत्सर्जन नियंत्रण के लिए सख्त मानक अपनाने चाहिए, ताकि समुद्री पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि V.O.C. पोर्ट की इस नई क्षमता से भारत की समुद्री व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ेगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि पोर्ट ने वार्षिक
Updated: September 15, 2026
V.O.C. पोर्ट ने 335‑मीटर लंबी “एमेराल्ड ग्रैंड” कंटेनर शिप को सुरक्षित रूप से संभाल कर भारत के समुद्री लॉजिस्टिक्स में नई क्षमता और वैश्विक कनेक्टिविटी का मील‑पत्थर स्थापित किया। इस उपलब्धि से बड़े जहाज़ों को आकर्षित करने, निर्यात‑आयात लागत घटाने और स्थानीय आर्थिक व रोजगार अवसरों को बढ़ाने की उम्मीद है।
Insight: The handling of a 335‑meter container vessel demonstrates V.O.C. Port’s upgraded depth and equipment, confirming its ability to service ultra‑large ships. This expands the port’s capacity, enhancing India’s integration with global maritime trade routes.
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