इन समस्याओं को लेकर स्थानीय जनता ने कई बार प्रतिनिधियों को लिखित आवेदन भी भेजे हैं, पर समाधान तक पहुंचने में समय लग रहा था।
गुज़रते वर्षों में बिहार सरकार ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के सुधार के लिए कई योजनाएं पेश की थीं, जिनमें नई ट्रैक लाइनें, सिग्नल अपग्रेड और स्टेशन पुनर्निर्माण शामिल थे। विशेषकर गोपालगंज‑बैकुंठपुर सेक्शन को प्राथमिकता दी गई थी, क्योंकि यह क्षेत्र कृषि उत्पादन और छोटे उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कनेक्शन प्रदान करता है। हालांकि, बजट आवंटन में देरी और कार्यान्वयन में अड़चनें इस क्षेत्र के विकास को बाधित कर रही थीं। इस संदर्भ में तिवारी ने बताया कि वर्तमान में चल रहे प्रोजेक्ट्स के बावजूद, यात्रियों को उचित सुविधाएं नहीं मिल पातीं।
बैठक के दौरान मिथिलेश तिवारी ने रेल राज्य मंत्री को थावे‑पटना इंटरसिटी ट्रेन की सुबह 5 बजे पटना प्रस्थान और शाम 7 बजे थावे आगमन की मौजूदा समय‑सारणी में बदलाव की मांग रखी। उन्होंने बताया कि इस समय‑सारणी से कामकाजी वर्ग और छात्रों को भारी असुविधा होती है, क्योंकि कई लोग सुबह जल्दी निकलने और देर शाम घर पहुँचने में कठिनाई का सामना करते हैं। तिवारी ने यह भी उल्लेख किया कि इस रूट पर मौसमी यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, जिससे अतिरिक्त ट्रेन या बेहतर अंतराल की आवश्यकता स्पष्ट हो रही है।
विमाननुसार, तिवारी ने इस मांग के समर्थन में प्रदेश के कई सांसदों और स्थानीय व्यापारियों के हस्ताक्षरित याचिका भी प्रस्तुत की। याचिका में बताया गया कि समय‑सारणी में सुधार से न केवल यात्रियों के समय की बचत होगी, बल्कि रेल आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि रेल मंत्रालय इस परिवर्तन को शीघ्रता से लागू कर देगा, तो प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों में सकारात्मक बदलाव आएगा और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इस पहल के लिए उन्होंने रेल मंत्रालय को तत्परता दिखाने का आग्रह किया।
रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने तिवारी की प्रस्तुतियों को ध्यानपूर्वक सुना और बताया कि मौजूदा समय‑सारणी में बदलाव के लिए तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय ने पहले ही इस रूट की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। सोमन्ना ने यह भी बताया कि आगामी तिमाही में इस रूट की टाइमटेबल में संभावित बदलाव की समीक्षा की जाएगी और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
मिथिलेश तिवारी ने इस प्रतिक्रिया को सकारात्मक मानते हुए कहा कि अब तक के प्रयासों से प्रदेश के रेल नेटवर्क को नई दिशा मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस तरह के सुधार जल्दी लागू हो जाते हैं तो यह प्रदेश की सामाजिक-आर्थिक प्रगति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन सकता है। तिवारी ने स्थानीय मीडिया को भी इस मुद्दे को निरंतर उठाने का अनुरोध किया, जिससे सार्वजनिक दबाव बना रहे और प्रक्रिया तेज हो। उन्होंने यह आशा व्यक्त की कि इस मुलाकात के बाद रेल मंत्रालय के निर्णय में तेजी आएगी।
रेल मंत्रालय के अन्य प्रतिनिधियों ने भी बैठक में उपस्थित होकर प्रदेश के रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर के व्यापक विकास की योजना पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष में रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण के लिए अतिरिक्त फंड आवंटित किए जाएंगे, जिसमें ट्रैक पुनर्निर्माण, सिग्नल अपग्रेड और स्टेशन सुविधाओं का सुधार शामिल है। इस दौरान बताया गया कि गोपालगंज‑बैकुंठपुर रूट को विशेष रूप से प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि यह क्षेत्र कई छोटे उद्योगों और कृषि उत्पादन केंद्रों को जोड़ता है। इन योजनाओं के कार्यान्वयन से यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों में सुधार की उम्मीद है।
The meeting seeks adjustments to the Thave‑Patna inter‑city timetable and additional services to address congestion and scheduling delays on the Gorakhpur‑Gopalganj‑Patna corridor.
Implementing these changes aims to improve passenger convenience and support regional economic activity.
Be First to Comment