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उत्तर प्रदेश के बड़गाँव में पवन टरबाइन से बिजली आपूर्ति में 80 % वृद्धि, नई ग्रामीण ऊर्जा योजना का पहला सफल पायलट

पहले ही सुबह की धुंध में, उत्तर प्रदेश के छोटे से गाँव बड़गाँव के चारों ओर स्थित पवन टरबाइनें धीरे‑धीरे घूमना शुरू हो गईं। गाँव के किसान रघु राज ने बताया कि आज से उनका घर बिजली की लाइटों से उज्ज्वल हो गया है, जबकि पहले केवल दो‑तीन घंटे ही बिजली मिलने की

आशा रहती थी। इस परिवर्तन का स्रोत केंद्र सरकार की नई योजना है, जिसमें गाँव‑गाँव में बिजली की बुनियादी ढाँचा सुधारने के लिए 10 000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। ऊर्जा मंत्री रवि कुमार ने इस पहल को भारत के ग्रामीण ऊर्जा सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

वर्तमान में

ग्रामीण भारत में लगभग 15 % घर अभी भी बिना बिजली के हैं, और अधिकांश क्षेत्रों में अनियमित सप्लाई और वोल्टेज उतार‑चढ़ाव की समस्या बनी हुई है। पिछले कुछ दशकों में सरकार ने ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए कई योजनाएँ चलाईं, परन्तु इनका प्रभाव सीमित रहा। 2022 में राष्ट्रीय ग्रामीण इलेक्ट्रिफिकेशन मिशन (NRLM) ने 7 000

करोड़ रुपये का निवेश किया था, लेकिन कई क्षेत्रों में बुनियादी ट्रांसफॉर्मर, वितरण लाइनें और उपभोक्ता कनेक्शन पुरानी और घटिया स्थिति में थे। इस पृष्ठभूमि को देखते हुए, नई योजना का उद्देश्य केवल कनेक्शन बढ़ाना नहीं, बल्कि विश्वसनीय, सतत और किफायती बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

आगे चलकर, इस योजना के तहत हर

गांव में कम से कम दो ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जाएंगे, तथा मौजूदा वितरण नेटवर्क को हाई‑वोल्टेज केबलों से बदल दिया जाएगा। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा को प्राथमिकता देते हुए माइक्रोग्रिड सिस्टम का प्रयोग किया जाएगा। योजना के अनुसार, 2025 तक 1.5 लाख मीगावॉट के नवीकरणीय ऊर्जा

स्रोतों को ग्रामीण नेटवर्क में जोड़ा जाएगा, जिससे न केवल बिजली की पहुँच बढ़ेगी, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। इस पहल में स्थानीय ठेकेदारों को रोजगार प्रदान करने के साथ‑साथ, तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।

वित्तीय वर्ष 2024‑25 के बजट में इस योजना को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ऊर्जा

मंत्रालय ने बताया कि इस बजट में 5 000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष रूप से ग्रिड विस्तार के लिए, 2 000 करोड़ रुपये नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए, और शेष 3 000 करोड़ रुपये प्रशिक्षण, भर्ती और कर्मचारियों के कल्याण के लिए earmarked किए गए हैं। इस वित्तीय ढाँचे में, केंद्रीय और राज्य सरकारों के बीच सहयोग

को भी बढ़ावा दिया गया है, जिससे परियोजनाओं की तेज़ी से कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके। योजना के प्रारम्भिक चरण में 1 200 गांवों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया, जहाँ से प्राप्त डेटा के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

पायलट प्रोजेक्ट के पहले महीने में, बड़गाँव में बिजली की उपलब्धता में 80 %

की वृद्धि दर्ज की गई। स्थानीय बिजली उपभोक्ता संघ के अध्यक्ष मोहन लाल ने बताया कि अब किसानों को फसल कटाई के समय भी अतिरिक्त पावर मिल रही है, जिससे वे संधि मशीनरी का प्रयोग कर सकते हैं। इसी तरह, गांव के प्राथमिक विद्यालय में नई लाइटिंग और कंप्यूटर लैब स्थापित की गई,

जिससे बच्चों की पढ़ाई में सुधार की संभावना बढ़ी। इस सफलता को देखते हुए, कई अन्य जिलों ने भी समान मॉडल अपनाने की इच्छा व्यक्त की है।

परियोजना के कार्यान्वयन में मुख्य चुनौतियों में पुरानी बुनियादी ढाँचा, स्थानिक भू‑आकृति और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव शामिल हैं। उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बरसात

के कारण ट्रांसफ़ॉर्मर को नुकसान पहुँचने की संभावनाएँ अधिक हैं, इसलिए मजबूत और जलरोधक उपकरणों की व्यवस्था आवश्यक है। इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों में तकनीकी कौशल की कमी के कारण, कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देना अनिवार्य बना दिया गया है। ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि इस उद्देश्य से 200 प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना

की जाएगी, जहाँ स्थानीय युवाओं को विद्युत सुरक्षा, रख‑रखाव और नवीकरणीय ऊर्जा के संचालन की शिक्षा दी जाएगी।

जिला प्रशासन ने भी इस पहल का स्वागत किया। जिला आयुक्त सविता सिंह ने कहा कि इस योजना से न केवल बिजली की आपूर्ति सुधरेगी, बल्कि ग्रामीण रोजगार में भी इज़ाफ़ा होगा। उन्होंने बताया कि ट्रांसफॉर्मर

और लाइन स्थापित करने के लिए स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे आर्थिक विकास के साथ‑साथ सामाजिक सुदृढ़ीकरण भी होगा। कुछ गैर‑सरकारी संगठनों ने भी इस योजना को सराहा, परन्तु उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और फंड की सही उपयोगिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने निगरानी के लिए स्वतंत्र ऑडिट समूह स्थापित करने

का प्रस्ताव रखा।

राजनीतिक वर्ग में इस योजना को लेकर विविध प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। केंद्र सरकार के विपक्षी दल ने कहा कि ग्रामीण ऊर्जा समस्याओं को हल करने में यह कदम सराहनीय है, परन्तु योजना के कार्यान्वयन में देरी और भ्रष्टाचार

Updated: September 16, 2026

The scheme expands reliable electricity to villages, supporting agriculture, education and local businesses. It also integrates renewable‑energy micro‑grids, aiming to reduce carbon emissions while creating rural employment and technical‑skill opportunities.

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