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बिहार‑यूपी में अंतरराज्यीय हथियार तस्करी जाल का पर्दाफाश, गोपालगंज के श्रेयांश यादव को STF ने गिरफ्तार किया।

बिहार‑यूपी में अंतरराज्यीय हथियार तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश, गोपालगंज के श्रेयांश यादव को गिरफ्तार

यूपी के विशेष जांच बल (एसटीएफ) ने कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ी एक अंतरराज्यीय हथियार तस्करी साजिश का खुलासा किया है। इस ऑपरेशन में गोपालगंज के श्रेयांश यादव उर्फ बबलू सहित कुल पाँच संदिग्धों को गिरफ्तार कर लेटा गया। बल ने चार पिस्टल, चार मैगजीन, एक रिवाल्वर, पाँच कारतूस, साथ ही एक मोटरबाइक और एक स्कूटी को बरामद किया। सभी आरोपी पर आर्म्स एक्ट के तहत प्रथम प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस गिरफ्तारी से राज्य के भीतर हथियार तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की तीव्रता स्पष्ट होती है।

हथियार तस्करी की यह साजिश 2022‑23 के दौरान सक्रिय रही, जब लॉरेंस बिश्नोई नामक अंतरराष्ट्रीय स्तर के अपराधी समूह ने उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में अवैध हथियारों की आवाजाही को व्यवस्थित किया था। इस गिरोह ने बंधक, रिश्वत और स्थानीय गुटों के सहयोग से हथियारों को सीमाओं के पार ले जाने की योजना बनाई थी। बिहार को इस नेटवर्क का मुख्य बिंदु माना जा रहा था, जहाँ से हथियारों को उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान तक पहुँचाया जाता था।

पिछले साल के अंत में बिहार पुलिस ने इस तस्करी जाल के बारे में प्रारंभिक सूचना प्राप्त की, पर सीमित संसाधनों और जटिल जाल के कारण बड़े पैमाने पर कार्रवाई नहीं हो पाई। जब एसटीएफ को इस मामले की सूचना मिली, तो उन्होंने कई राज्यों के साथ समन्वय कर एक संयुक्त ऑपरेशन की योजना बनायी। इस योजना में डिजिटल ट्रैकिंग, बैंकिंग लेन‑देन की जाँच और गुप्त सूचना स्रोतों का उपयोग किया गया, जिससे अंततः गिरोह के प्रमुख सदस्य का पता चल सका।

ऑपरेशन के दौरान, एसटीएफ ने गोपालगंज के एक आवासीय इलाके में छिपे गोदाम को छेड़ा, जहाँ से हथियारों के साथ मोटरबाइक और स्कूटी भी बरामद हुई। बरामद सामग्री की सूची में चार पिस्टल, चार मैगजीन, एक रिवाल्वर, पाँच कारतूस, एक मोटरसाइकिल और एक स्कूटी शामिल है। यह सामग्री न केवल अवैध हथियारों की मात्रा को दर्शाती है, बल्कि तस्कर की मोबाइल नेटवर्क और परिवहन क्षमताओं को भी उजागर करती है।

हथियारों की बरामदगी के साथ ही, पुलिस ने तस्करियों के वित्तीय लेन‑देन के प्रमाण भी हासिल किए। बैंक खाते, मोबाइल रिचार्ज रसीदें और डीजिटल भुगतान रिकॉर्ड से पता चला कि इस नेटवर्क ने लाखों रुपए की धनराशि को विभिन्न चैनलों के माध्यम से धुंधला किया था। इन सबूतों को आगे की जांच में प्रयोग किया जाएगा, जिससे अन्य सहायक एवं सहयोगियों को भी उजागर किया जा सकेगा।

गिरोह के प्रमुख सदस्य श्रेयांश यादव को गिरफ्तार करने के बाद, एसटीएफ ने कहा कि यह कार्रवाई केवल एक शुरुआत है। उन्होंने बताया कि अभी भी कई छोटे‑बड़े तस्कर सक्रिय हैं, जो इस नेटवर्क की धुरी को बनाए रखने की कोशिश में लगे हैं। इस दिशा में आगे की कार्रवाई में अतिरिक्त टेम्पलेट्स, ड्रोन निगरानी और अंतरराज्यीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

गिरफ़्तारी के बाद, बिहार पुलिस के प्रमुख ने बताया कि इस केस में कई अन्य राज्यों की पुलिस भी सहयोगी रही है। उन्होंने कहा, “हथियार तस्करी का यह जाल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, और इसे रोकने के लिए हमें एकीकृत प्रयास करने होंगे।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब तक के सबूत इस बात की ओर संकेत करते हैं कि इस गिरोह ने राज्य सीमा पार भी बड़े पैमाने पर व्यापार किया है।

उपरोक्त घटना पर उत्तर प्रदेश के गृह मंत्री ने टिप्पणी की, “हमें इस प्रकार के अंतरराज्यीय अपराधों से निपटने के लिए तेज़ और सटीक कार्रवाई करनी होगी। इस गिरोह को रोकने के लिए हम सभी राज्यों के साथ मिलकर काम करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए विशेष निगरानी इकाइयों की स्थापना की जाएगी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी इस गिरफ्तारी को स्वागत किया, यह कहते हुए कि “हथियार तस्करी को लेकर सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं और अब यह स्पष्ट हो रहा है कि हमारे सुरक्षा एजेंसियां अंतरराज्यीय

Updated: September 16, 2026

The bust shows how digital forensics now outweighs brute‑force raids in dismantling cross‑state gun rings, turning the network’s own money trails into a self‑exposing ledger.
If inter‑state police units can sustain this data‑driven coordination, the “Bishnoi” syndicate

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