कि 18 सितंबर को ही इन चार राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों को अवकाश रहेगा। इस नई सूचना के प्रकाश में, छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को अपने कैलेंडर को पुनः संशोधित करना आवश्यक हो गया है, ताकि अनावश्यक व्यवधान से बचा जा सके।
पश्चिम बंगाल में इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी का निर्धारण 17 सितंबर के बजाय 18 सितंबर
किया गया, यह बदलाव राज्य शिक्षा विभाग ने 28 अगस्त को जारी किए गए आधिकारिक नोटिस में स्पष्ट किया। इस निर्णय का कारण था कि 17 सितंबर को कुछ स्थानीय प्रशासनिक कार्य और वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी चल रही थी, जिससे शैक्षणिक कैलेंडर पर अनावश्यक दबाव उत्पन्न हो सकता था। इस संदर्भ में, पश्चिम बंगाल के प्रमुख
शैक्षणिक संस्थानों ने पहले ही अपने कैलेंडर में संशोधन कर लिया है, जिससे छात्रों को आगामी परीक्षाओं की तैयारी में निरंतरता मिल सके।
बिहार और झारखंड में भी इस वर्ष की विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी 18 सितंबर निर्धारित की गई है। दोनों राज्यों के शिक्षा विभागों ने एक साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस निर्णय
को स्पष्ट किया और कहा कि यह तिथि राष्ट्रीय कैलेंडर के साथ सामंजस्य स्थापित करती है। बिहार में कई जिलों में इस छुट्टी के साथ ही वार्षिक गणित और विज्ञान परीक्षा का प्रारंभिक सत्र भी तय किया गया है, जिससे छात्रों को दो‑तीन अतिरिक्त दिन मिलेंगे। झारखंड में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की
गई, जहाँ स्थानीय स्कूल बोर्ड ने परीक्षा शेड्यूल को पुनः व्यवस्थित किया है।
उत्तर प्रदेश में यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि यहाँ के कई सरकारी और निजी कॉलेजों में 17 सितंबर को ही मध्यावधि परीक्षा निर्धारित थी। राज्य शिक्षा अधिकारी ने कहा कि 18 सितंबर को छुट्टी देने से परीक्षा का पुनर्निर्धारण
संभव हो जाएगा और छात्रों को पर्याप्त तैयारी का समय मिलेगा। इस निर्णय के बाद, कई कॉलेजों ने परीक्षा शेड्यूल में बदलाव कर 20 सितंबर से नई तिथियों की घोषणा की। इस प्रक्रिया में छात्रों ने अभिभावकों से मिलकर अपनी पढ़ाई के कार्यक्रम को पुनः व्यवस्थित किया।
इन चार राज्यों में छुट्टी की तिथि तय
होने के बाद, कई स्कूलों ने विशेष कार्यक्रमों की योजना बनायी है। पश्चिम बंगाल में कई विद्यालयों ने विश्वकर्मा पूजा के सम्मान में शैक्षिक कार्यशालाएँ आयोजित करने का प्रस्ताव रखा है, जहाँ छात्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिल्पकला के क्षेत्रों में प्रयोगात्मक सीखने को प्राप्त करेंगे। बिहार में कुछ उच्च विद्यालयों ने इस अवसर को उपयोगी
बनाने के लिए विज्ञान मेले की व्यवस्था की, जहाँ छात्र अपने प्रोजेक्ट्स को प्रस्तुत करेंगे। झारखंड में कई ग्रामीण स्कूलों ने इस दिन को स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर शिल्प सत्र आयोजित करने का विचार किया है।
छात्रों और अभिभावकों ने इस नई तिथि के बारे में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ व्यक्त कीं। कुछ ने कहा
कि 18 सितंबर को छुट्टी मिलने से परीक्षा की तैयारी में अतिरिक्त दो‑तीन दिन मिलेंगे, जो उनकी शैक्षणिक प्रगति में सहायक होगा। वहीं कुछ अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चों की निजी ट्यूशन और अतिरिक्त कक्षाओं की समय-सारणी पहले ही 17 सितंबर के अनुसार बनाई गई थी, जिससे उन्हें पुनः समायोजन करना पड़ेगा। इस बीच, शिक्षकों ने
भी इस बदलाव को सकारात्मक रूप में देखा, क्योंकि इससे वे पाठ्यक्रम को अधिक व्यवस्थित ढंग से समाप्त कर सकते हैं।
राजनीतिक दलों ने भी इस निर्णय पर टिप्पणी की। प्रमुख राज्य सरकारें इसे एक उचित कदम मानती हैं, जिससे शिक्षा क्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी। विपक्षी दलों ने कहा कि पिछले वर्षों में
कई बार तिथियों में बदलाव के कारण भ्रम उत्पन्न हुआ, परंतु इस बार स्पष्ट निर्देश मिलने से स्थिति सुधार होगी। आर्थिक रूप से, कई छोटे व्यापारियों ने बताया कि इस छुट्टी के कारण स्थानीय बाजार में उपभोग का स्तर बढ़ेगा, क्योंकि छात्र और अभिभावक इस दिन बाहर जाने की योजना बनाते हैं।
सामाजिक रूप
से, विश्वकर्मा पूजा का महत्व केवल शैक्षिक संस्थानों तक सीमित नहीं है। इस दिन कई समुदायों में कारीगरों की पूजा और पारम्परिक संगीत कार्यक्रम आयोजित होते हैं। पश्चिम बंगाल के कुछ ग्रामीण इलाकों में इस अवसर पर कारीगरों के लिए विशेष मेले लगते हैं, जहाँ हथकरघा, लोहार और चित्रकारी के कार्य प्रदर्शित होते हैं। इसी
प्रकार, बिहार में भी इस दिन ग्राम सभा में कारीगरों को सम्मानित किया जाता है, जिससे स्थानीय रोजगार में वृद्धि होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तिथि-समायोजन से शिक्षा प्रणाली की लचीलापन बढ़ती है। शैक्षणिक विश्लेषक डॉ. अर्चना मिश्रा ने कहा कि जब
Updated: September 16, 2026
The centre has issued a clear notice that schools and colleges in Uttar Pradesh, Bihar, Jharkhand and West Bengal will observe a single World Karma Puja holiday on 18 September 2026, ending previous date‑confusion. The uniform date lets institutions adjust exam schedules and plan extra‑curricular events, while students and parents re‑align their calendars accordingly.
Insight: This development could shape future developments as the situation continues to evolve.
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