Press "Enter" to skip to content

स्वदेशी नागरिक विमान दो साल में बनेगा, सिविल एयविएशन मंत्रालय ने नई योजना की घोषणा किया।

भारत सरकार के सिविल एयविएशन मंत्रालय ने आज सुबह नई घोषणा की कि अगले दो वर्षों में देश का पहला पूर्ण रूप से स्वदेशी नागरिक विमान तैयार किया जाएगा। इस घोषणा को सिविल एयविएशन मंत्री के. राममोहन नायडू ने दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया, जहाँ उन्होंने कहा

कि एक संयुक्त उद्यम के माध्यम से यह लक्ष्य हासिल किया जाएगा। इस परियोजना का लक्ष्य भारतीय विमानन उद्योग को आत्मनिर्भर बनाना और विदेशियों पर निर्भरता घटाना है। मंत्रालय ने बताया कि इस समय भारतीय सिविल एयरोस्पेस सेक्टर के ऑर्डर बुक में 1,600 से अधिक विमानों की मांग दर्ज है,

जिससे इस पहल की महत्त्वता और स्पष्ट हो जाती है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने विमानन क्षेत्र में तेज़ी से विकास किया है, लेकिन अधिकांश बड़े जेट्स और टर्बोप्रॉप्स अभी भी विदेशी निर्माताओं से आयातित होते हैं। भारतीय सरकार ने 2016 में ‘Make in India’ पहल के तहत एयरोस्पेस को

प्रमुख क्षेत्र बनाते हुए कई नीतियों को लागू किया। उसी के तहत राष्ट्रीय एयरोस्पेस नीति 2020 ने घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ निजी निवेश को भी आकर्षित किया। इस पृष्ठभूमि में आज का कदम उद्योग के आत्मविश्वास को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना

जा रहा है।

जुड़े उद्यम में प्रमुख भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र कंपनियों के साथ-साथ कुछ विदेशी तकनीकी सहयोगी भी शामिल होंगे। मंत्रालय ने बताया कि इस संयुक्त उद्यम में भारत की राष्ट्रीय एयरोस्पेस लिमिटेड (NAL) और रक्षा उत्पादन निगम (DPC) के साथ-साथ एक निजी फर्म का सहयोग होगा, जो डिजाइन और उत्पादन

दोनों में भूमिका निभाएगी। विदेशी भागीदार के रूप में एक यूरोपीय एयरोस्पेस कंपनी को शामिल किया गया है, जिससे तकनीकी हस्तांतरण और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित किया जाएगा। इस सहयोग से उत्पादन लाइन को तेज़ी से स्थापित करने और दो साल की समय सीमा को पूरा करने में मदद मिलने

की उम्मीद है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारतीय एयरलाइन कंपनियों की ऑर्डर बुक लगभग 1,600 विमान की है, जिसमें टर्बोप्रॉप, जेट, और हाइब्रिड मॉडल शामिल हैं। यह आंकड़ा देश के बढ़ते घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय यात्रा मांग को दर्शाता है। इस मांग को पूरा करने के लिए

भारत को विदेशी विमानों पर भारी निर्भरता से बाहर निकलना आवश्यक है, इसलिए यह पहल राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि नई विमान परियोजना में पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए इंधन दक्षता और कम उत्सर्जन को प्राथमिकता दी जाएगी।

जोड़‑तोड़

के बाद, इस परियोजना की शुरुआती चरण में डिजाइन को अंतिम रूप देना और प्रमाणन प्रक्रिया को तेज़ करना शामिल है। भारतीय सिविल एविएशन ऑथॉरिटी (DGCA) ने कहा कि यदि आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा किया गया तो प्रमाणन प्रक्रिया को दो साल की अवधि में पूर्ण किया जा सकता

है। इसके साथ ही उत्पादन सुविधाओं की स्थापना, आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण, और प्रशिक्षित कार्यबल का विकास भी इस समयावधि में होना आवश्यक है। मंत्रालय ने बताया कि पहले वर्ष में प्रोटोटाइप निर्माण और परीक्षण पर फोकस रहेगा, जबकि दूसरे वर्ष में मालिकीय उत्पादन शुरू होगा।

मुख्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने इस

पहल को सकारात्मक रूप में देखा है। भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के प्रमुख संघ ने कहा कि यह कदम भारत को वैश्विक विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाता है और घरेलू नौकरियों के सृजन में मदद करेगा। निजी विमान निर्माता समूह ने कहा कि यह नई परियोजना आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगी

और छोटे तथा मध्यम आकार के उद्योगों को भी भागीदारी का मौका देगा। साथ ही, कई आपूर्ति कंपनियों ने कहा कि उन्हें इस उद्यम से नए अनुबंध मिलने की उम्मीद है, जिससे औद्योगिक विस्तार होगा।

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय विमान निर्माता कंपनियों ने इस विकास को करीब से देखा है। एक प्रमुख

यूरोपीय एयरोस्पेस कंपनी ने कहा कि वह तकनीकी सहयोग में भाग ले रहे हैं और यह भारत के लिए नई तकनीकों को अपनाने का अवसर है। अमेरिकी विमान निर्माताओं ने भी बताया कि वे भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नई रणनीति तैयार कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने

कहा कि भारत की स्वदेशी पहल का सम्मान किया जाएगा। इस बीच, एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र की कई एयरलाइनों ने भारतीय निर्मित विमानों में रुचि जताई है, जिससे निर्यात संभावनाओं को बढ़ावा मिल सकता है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया में मुख्य विपक्षी दल ने सरकार की इस पहल की

Updated: October 6, 2026


Summary: India’s civil aviation ministry announced a joint‑venture plan to roll out the country’s first fully indigenous passenger aircraft within two years, aiming to curb reliance on foreign makers amid a backlog of over 1,600 aircraft orders. The project pairs state firms and a private player with a European partner to fast‑track design, certification and production, promising a boost to domestic aerospace capability and export prospects.

The project aims to supply the domestic demand of over 1,600 aircraft, reducing reliance on imported jets. It also seeks to develop indigenous aerospace capabilities and associated supply chains within two years.

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from बिजनेसMore posts in बिजनेस »

Be First to Comment

    प्रातिक्रिया दे

    आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *