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दिल्ली में तीसरे दिन के विरोध में 500 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी, CEC अध्यक्ष पदत्याग की माँगें तेज़।

दिल्ली में तीसरे दिन जारी प्रदर्शन में लगभग पाँच सौ लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जो भारतीय चुनाव आयोग (CEC) के अध्यक्ष के पदत्याग की माँग कर रहे थे। सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में विरोधियों को रोकने के लिए रौडब्लॉक और जलाने की रणनीति अपनाई, जिससे शहर के प्रमुख राजमार्गों पर ट्रैफिक जाम हो गया। इस कार्रवाई के दौरान कई युवा सक्रियकर्मी, पत्रकार और सामान्य नागरिक भी गिरफ़्तार हुए।

प्रदर्शन का मूल कारण 2024 के लोकसभा चुनाव में मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ी और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर चिंता है। पिछले दो हफ़्तों में विभिन्न राज्यों में समान स्वर के प्रदर्शन हुए थे, पर दिल्ली ने इस बार अधिक तीव्रता दिखाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि CEC के अध्यक्ष को पद से हटाने के बिना निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है।

विरोध का इतिहास 2019 के चुनावों से शुरू होता है, जब कई विपक्षी दलों ने वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। बाद में 2022 में एक हाई-कोर्ट के आदेश ने चुनाव परिणामों के पुनरावलोकन की मांग की थी, जिससे जनता में संदेह की लहर दौड़ गई। इस माह के प्रारंभ में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी CEC की कार्यवाही की वैधता पर प्रश्न उठाए थे।

पिछले दो दिनों में दिल्ली पुलिस ने विभिन्न सार्वजनिक स्थानों को बंद कर दिया था, जिसमें संसद के पास स्थित लोटस टेम्पल भी शामिल है। प्रदर्शन के दौरान कई नालियां और जल स्रोत बंद कर दिए गए, जिससे जल आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हुई। पुलिस ने बताया कि यह कदम सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिये आवश्यक था।

जिला प्रशासन ने रात भर के दौरान सख्त प्रतिबंध लगा दिया, जिसमें नाबालिगों के बाहर निकलने पर प्रतिबंध, सार्वजनिक सभाओं पर प्रतिबंध और मोबाइल नेटवर्क पर भी कुछ सीमाएँ शामिल थीं। इन उपायों के खिलाफ कई नागरिक अधिकार समूहों ने आपातकालीन न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने कहा कि यह प्रतिबंध मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

दूसरी ओर, दिल्ली की पुलिस ने कहा कि उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण रूप से समेटने की कोशिश की, पर कुछ समूहों ने हिंसक तरीकों को अपनाया। पुलिस ने बताया कि कई बार बैनरों को जलाते हुए, तड़के लगाते हुए और सड़कों को अवरुद्ध करते हुए प्रदर्शनकारियों ने बल प्रयोग किया। इन घटनाओं के कारण कई पुलिस कर्मियों को चोटें आईं, पर कोई गंभीर चोट दर्ज नहीं हुई।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश श्री भुयन ने इस मुद्दे पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रक्रिया लाखों मतदाताओं को वोट देने से वंचित कर रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप कर सकती है, यदि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अड़चन आती है। न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय को निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।

मुख्य राजनीतिक दलों ने इस विकास पर अलग-अलग रुख अपनाया है। विपक्षी दलों ने CEC के अध्यक्ष के पदत्याग की माँग को दोहराया और कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बचाने के लिये आवश्यक है। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि सभी लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जा रहा है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिये कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

विपक्षी राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष ने कहा कि यह स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा बन सकती है, यदि मतदान प्रक्रिया में विश्वास नहीं बना पाता। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव आयोग ने अब तक कोई त्रुटि नहीं दिखायी है और जनता को इस पर भरोसा रखना चाहिए।

आर्थिक प्रभावों की बात करें तो, दिल्ली में व्यापारिक गतिविधियों पर प्रतिबंध के कारण कई छोटे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई रेस्टॉरेंट, होटल और खुदरा स्टोर ने अपनी बिक्री में 30-40 प्रतिशत गिरावट दर्ज की। इस कारण कई कर्मचारियों को वेतन में कटौती या नौकरी से निकाला जाना पड़ सकता है।

सामाजिक स्तर पर, इस संघर्ष ने विभिन्न वर्गों के बीच तनाव बढ़ा दिया है। छात्रों, युवा कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों के बीच मतभेद स्पष्ट हो रहे हैं। कई स्कूल और कॉलेजों ने अस्थायी रूप से क्लासेस को रद्द कर दिया है, जिससे शिक्षण कार्य में बाधा उत्पन्न हुई। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएँ उठी हैं, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में हिंसा के मामले सामने आए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि

Updated: October 5, 2026


Summary: Delhi police detained around five hundred protesters on their third day of rallies demanding the Election Commission chief’s resignation, citing concerns over voter‑list flaws and election transparency, while imposing roadblocks, curfews and limited mobile service that have snarled traffic and hit local businesses. The crackdown has drawn criticism from opposition parties, human‑rights groups and the Supreme Court, which warned that the restrictions could disenfranchise millions ahead of the 2024 Lok Sabha poll.

Delhi’s escalating crackdown reveals a paradox: the state’s heavy‑handed security tactics are amplifying the very distrust in the electoral system they aim to protect, nudging neutral citizens toward the opposition’s narrative.
If the judiciary steps in now, it could become the decisive arbiter that either restores faith

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