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तमिलनाडु के मदुरंताकाम‑धरणपुरम उपचुनावों में 86%‑80

तमिलनाडु के दो विधानसभा उपचुनावों—मदुरंताकाम और धरणपुरम—में मतदान प्रक्रिया जारी रही, जहाँ मतदाता भागीदारी क्रमशः 86.26 प्रतिशत और 80.3 प्रतिशत तक पहुँच गई। दोनोँ क्षेत्रों में मतपत्र डिब्बे (EVM) की तकनीकी गड़बड़ी की सूचना मिलने पर मतदान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा, परन्तु अंततः प्रक्रिया पुनः प्रारम्भ हुई

और उच्च मतदान प्रतिशत ने चुनावी उत्साह को दर्शाया। यह घटना राज्य के चुनावी प्रबंधन और प्रौद्योगिकी सुरक्षा के प्रश्न को उजागर करती है, जबकि प्रतिपक्षी दलों ने इस पर तीखी आलोचना की है।

मदुरंताकाम और धरणपुरम दोनों ही उपचुनाव तमिलनाडु विधान सभा के दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों में

आयोजित हुए। पिछले कुछ महीनों में राज्य में कई राजनीतिक हलचलें चल रही थीं, विशेषकर सामाजिक कल्याण योजनाओं और औद्योगिक विकास को लेकर विभिन्न पक्षों के बीच मतभेद स्पष्ट थे। इन क्षेत्रों में पूर्ववर्ती चुनावों में भी मतदाता भागीदारी उच्च रही थी, जिससे यह कहा जा सकता है कि

यहाँ नागरिकों की राजनीतिक जागरूकता और सक्रियता उल्लेखनीय है।

उपचुनावों से पहले चुनाव आयोग ने ईवीएम की कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिये कई तकनीकी जाँचें और ड्राई रन किए थे। फिर भी, मतदान के दौरान मदुरंताकाम के दो मतदान केंद्रों में ईवीएम की खराबी की रिपोर्ट आई, जहाँ

मशीनें त्रुटि संकेत दे रही थीं और कुछ बटन काम नहीं कर रहे थे। इसी प्रकार, धरणपुरम के एक मतदान केंद्र में भी ईवीएम के सॉफ़्टवेयर में गड़बड़ी के कारण मतदान को रोकना पड़ा। इन घटनाओं ने मतदाता और पार्टी कार्यकर्ताओं दोनों में असंतोष उत्पन्न किया।

प्रक्रिया को

पुनः आरम्भ करने के लिये चुनाव अधिकारी ने तुरंत तकनीशियन टीम को बुलाया और वैकल्पिक ईवीएम स्थापित कर समस्या का समाधान किया। मदुरंताकाम में दो केंद्रों में नई मशीनें स्थापित की गईं और धरणपुरम में भी एक नया ईवीएम तैनात किया गया। इस दौरान, चुनाव एजेंसी ने सभी प्रक्रियाओं

का रिकॉर्ड रखकर पारदर्शिता बनाए रखने का आश्वासन दिया। मतदान पुनः शुरू होने के बाद, दोनों क्षेत्रों में मतदान की गति तेज़ी से बढ़ी और अंततः उच्च टर्नआउट हासिल हुआ।

इन घटनाओं पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। मुख्य विपक्षी पार्टी के राज्य प्रमुख ने कहा कि

ईवीएम की तकनीकी गड़बड़ी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को खतरे में डालती है और इसे तुरंत जांचना आवश्यक है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि एक स्वतंत्र तकनीकी जांच आयोग का गठन किया जाए और दोषी कर्मियों को सख्त दंडित किया जाए। विपक्षी ने यह भी कहा कि

भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों से बचने के लिये ईवीएम की पूरी तरह से पुनरावृत्ति करनी चाहिए।

विपक्षी के बयान के विपरीत, सरकार ने कहा कि ईवीएम की गड़बड़ी असामान्य थी और इसे तुरंत सुधार लिया गया। राज्य चुनाव आयोग के प्रमुख ने स्पष्ट किया कि सभी तकनीकी समस्याओं

को तुरंत ठीक किया गया और मतदान प्रक्रिया में कोई व्यवधान नहीं आया। उन्होंने यह भी कहा कि ईवीएम की सुरक्षा और कार्यक्षमता पर कोई संदेह नहीं है, क्योंकि इस पर लगातार अद्यतन और परीक्षण होते रहते हैं। सरकार ने यह दावा किया कि मतदान के बाद परिणामों की

सत्यता सुनिश्चित करने के लिये इलेक्ट्रॉनिक और मैन्युअल गणना दोनों की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इन घटनाओं के सामाजिक प्रभाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उच्च मतदान प्रतिशत दर्शाता है कि नागरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, जबकि तकनीकी गड़बड़ी के कारण

उत्पन्न असुविधा ने मतदाता विश्वास को थोड़ा कम किया। कई नागरिकों ने कहा कि भविष्य में तकनीकी समस्याओं के कारण मतदान में देरी या भ्रमित होना उनके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। इस संदर्भ में नागरिक समाज ने अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय मतदान प्रणाली की मांग

की है।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो चुनावी प्रक्रिया में हुई देरी और अतिरिक्त तकनीकी उपायों के लिये अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। राज्य प्रशासन को ईवीएम की मरम्मत और प्रतिस्थापन के लिये अतिरिक्त बजट आवंटित करना पड़ा, जिससे चुनावी खर्च में वृद्धि हुई। यह खर्च न केवल राज्य

को बल्कि करदाताओं को भी प्रभावित करता है, इसलिए आर्थिक विशेषज्ञों ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की तकनीकी विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने हेतु पूर्वानुमानित खर्च का उचित नियोजन आवश्यक है।

राजनीतिक रूप से यह उपचुनाव तमिलनाडु की आगामी राजनीतिक दिशा को

Updated: October 6, 2026


Tamil Nadu’s by‑polls in Madurantakam and Dharapuram recorded turnout above 80%, but intermittent EVM glitches forced temporary suspensions before technicians swapped in fresh machines and voting resumed. The incidents sparked opposition calls for an independent probe, while officials defended the machines’ integrity and highlighted the high voter engagement.

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