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चुनाव आयोग ने टीएमसी‑जोराफुल गठबंधन के चुनाव चिन्हों पर प्रतिबंध लागू, दोनों दलों को नई प्रतीक पहचान तैयार करनी पड़ेगी।

कोलकाता—चुनाव आयोग ने गुरुवार रात तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चुनाव चिन्ह तथा नई गठित जोराफुल (J) के प्रतीक पर प्रतिबंध लागू करने का आधिकारिक आदेश जारी किया, जिससे आगामी उपचुनावों में दोनों दलों के लिए चुनावी पहचान को लेकर गंभीर अड़चन उत्पन्न हुई। आयोग का यह फैसला दो पक्षों से विस्तृत बातचीत के बाद

आया, जिसमें टीएमसी‑जोराफुल गठबंधन को प्रतीक‑संबंधी विवादों को सुलझाने का अवसर दिया गया, परन्तु अंतिम रूप से प्रतीक पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया। इस कदम के तुरंत बाद, राज्य विधानसभा के विपक्षी नेता रीतब्रत बनर्जी ने आधी रात को एक सोशल‑मीडिया पोस्ट में इस फैसले को लेकर अपनी असंतुष्टि व्यक्त की, जिससे

राजनीतिक माहौल में तनाव की नई लहर दौड़ गई।

टीएमसी‑जोराफुल गठबंधन का गठन 2023 के उत्तरदिशा चुनावों के बाद हुआ था, जिसमें ममता बनर्जी द्वारा स्थापित जॉर्जिया‑आधारित जोराफुल पार्टी ने प्रमुख भूमिका निभाई। यह गठबंधन मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के साथ मिलकर राज्य की सत्ता संरचना को

चुनौती देना चाहता था। चुनाव चिन्हों के संदर्भ में, टीएमसी ने 1972‑साल के तृणमूल कांग्रेस का प्रतीक—एक हरे पत्ती वाले तले पर तीन पंख वाले पक्षी—को अपना आधिकारिक चिन्ह घोषित किया था, जबकि जोराफुल ने एक लाल रंग के फूल को अपना प्रतीक बनाया था। दोनों प्रतीकों को लेकर कई बार विवाद उत्पन्न हुए,

विशेषकर जब दोनों दल ने एक ही चुनावी क्षेत्र में समान प्रतीक का प्रयोग करने की कोशिश की।

चुनाव आयोग ने अपने पिछले निर्णयों में कई बार प्रतीक‑संबंधी विवादों को सुलझाने के लिए विभिन्न पक्षों से सुनवाई की है। 2022 में, आयोग ने शिवसेना के लाल और सफेद ध्वज के प्रयोग पर प्रतिबंध

लगाया था, जब इस प्रतीक को राष्ट्रीय स्तर पर विवादास्पद माना गया। इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए, आयोग ने इस बार भी टीएमसी और जोराफुल दोनों को समान प्रतीक के उपयोग पर रोक लगाने का आदेश दिया, जिससे दोनों दलों को अपनी पहचान के नए विकल्प खोजने पड़ेंगे। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि

यह कदम चुनावी प्रक्रिया की स्पष्टता और मतदाता भ्रम को रोकने के लिए आवश्यक था।

निर्णय के बाद, टीएमसी के वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा कि गठबंधन ने इस प्रतिबंध को असंवैधानिक माना है और यह निर्णय राजनीतिक दायरे में हस्तक्षेप करता है। उन्होंने कहा कि गठबंधन ने पहले ही एक वैकल्पिक प्रतीक तैयार

किया है, परन्तु वह अभी तक चुनावी अधिकारियों द्वारा मान्य नहीं किया गया है। वहीं, जोराफुल के प्रवक्ता ने कहा कि उनका पार्टी हमेशा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करता है, परन्तु उन्हें प्रतीक‑परिवर्तन की प्रक्रिया में अतिरिक्त समय चाहिए होगा, जिससे आगामी उपचुनावों में उनकी रणनीति प्रभावित होगी।

विरोधी दल के नेता रीतब्रत

बनर्जी ने आधी रात को अपने सोशल‑मीडिया अकाउंट पर एक संक्षिप्त संदेश पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा, “निर्वाचक प्रक्रिया में निरंकुश प्रतिबंधों से लोकतंत्र के मूल सिद्धांत कमजोर होते हैं। हम इस निर्णय को चुनौती देने के लिए सभी कानूनी साधनों का प्रयोग करेंगे।” उनका यह बयान तत्काल ही कई विपक्षी नेताओं और मीडिया

विश्लेषकों के बीच बहस का कारण बना। रीतब्रत ने यह भी संकेत दिया कि उनका दल इस प्रतिबंध के खिलाफ न्यायालय में याचिका दायर करने की योजना बना रहा है, जिससे इस मामले का न्यायिक परीक्षण संभव हो सके।

टीएमसी‑जोराफुल गठबंधन के भीतर भी इस फैसले को लेकर विविध मतभेद देखे जा रहे

हैं। कुछ वरिष्ठ सदस्य मानते हैं कि प्रतीक बदलना केवल एक रणनीतिक कदम है, जिससे मतदाता आधार को पुनः स्थापित किया जा सके। अन्य सदस्य इस बात पर जोर देते हैं कि गठबंधन को अपनी मूल पहचान को बनाए रखना चाहिए, क्योंकि प्रतीक ही मतदाताओं के साथ भावनात्मक संबंध स्थापित करता है। इस बीच,

गठबंधन के रणनीतिक सलाहकारों ने कहा कि वे जल्द ही एक नई प्रतीकात्मक योजना तैयार करेंगे, जिसमें रंग, आकृति और प्रतीकात्मक अर्थ को सावधानीपूर्वक चयन किया जाएगा।

राज्य में कई छोटे दल और स्वतंत्र उम्मीदवार भी इस प्रतिबंध से प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि चुनाव चिन्हों का पुनः निर्धारण प्रक्रिया में समय लगना

संभावित रूप से चुनावी कैलेंडर को बदल सकता है। कई स्थानीय समाचार एजेंसियों ने बताया कि कुछ उम्मीदवार पहले से ही अपने प्रचार सामग्री में नई प्रतीकों की तैयारियों में जुटे हैं, परन्तु अब उन्हें मौजूदा प्रतिबंध को ध्यान में रखकर पुनः डिज़ाइन करना पड़ेगा। इस बदलाव से चुनावी खर्च में वृद्धि की आशंका

है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों को अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग का यह निर्णय न केवल प्रतीक‑संबंधी मुद्दों को सुलझाने का प्रयास है, बल्कि यह एक व्यापक रणनीतिक कदम भी हो सकता है, जिससे प्रमुख विपक्षी गठबंधन को चुनावी मैदान में व्यव

Updated: September 18, 2026


Election Commission barred both Trinamool Congress and the newly‑formed Jorafool from using their current symbols, forcing the alliance to scramble for new emblems ahead of the upcoming by‑polls. The move sparked outrage from opposition leader Ritabrata Banerjee, who vows legal challenge and adds fresh tension to West Bengal’s pre‑election landscape.

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