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पटना में दाल-चावल की कीमतों में तेज़ी, उड़द ₹120-₹150 और चावल ₹48-₹65 किलो; बढ़ा रसोई का खर्च

पटना में किराना बाजार में दाल‑चावल के मूल्यों में तेज़ी देखी गई, जहाँ उड़द दाल 120 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 150 रुपये और चना दाल 100 रुपये तक पहुँच गई। यह उछाल त्योहारी मौसम की तैयारी के दौरान आया, जिससे घरेलू रसोई बजट पर दबाव बढ़ रहा है। उपभोक्ताओं ने महंगाई की आवाज़ उठाते हुए कीमतों में इस वृद्धि को लेकर चिंता व्यक्त की है।

पटना के किराना बाजार में चावल की कीमतें भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी हैं। पिछले महीने मध्यम गुणवत्ता वाले चावल की कीमत 48 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब 65 रुपये तक पहुँच गई है। इसी प्रकार, बासमती और सादा चावल के विभिन्न ग्रेड में 15‑20 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी देखी गई। यह वृद्धि स्थानीय व्यापारी संघ द्वारा पुष्टि की गई है।

किंमती बढ़ोतरी के पीछे कई कारक हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अनाज की आपूर्ति में गिरावट, जलवायु परिवर्तन से फसल उत्पादन में कमी और आयातित अनाज की लागत में वृद्धि मुख्य कारण माने जा रहे हैं। साथ ही, परिवहन लागत में बढ़ोतरी और ईंधन की कीमतों में उछाल ने भी कीमतों को ऊपर धकेला है।

विकास के साथ, पटना के प्रमुख किराना स्टोरों ने भी मौजूदा मूल्य संरचना को बदला है। कई खुदरा विक्रेताओं ने अधिकतम कीमत तय करने के लिए सीमित मात्रा में स्टॉक उपलब्ध कराया है, जिससे खरीदारों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति में उपभोक्ता समूहों ने मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की माँग की है।

स्थानीय कृषि विभाग ने बताया कि इस मौसम में धान की फसल में 8‑10 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। साथ ही, दाल की प्रमुख किस्मों में भी उत्पादन में गिरावट आई है, जिससे बाजार में कमी की भावना बढ़ी है। विभाग ने कहा कि यह कमी मौसमी कारकों के साथ-साथ खेती में उचित तकनीकी सहायता की कमी के कारण भी है।

पटना के बाजार निगरानी बोर्ड ने कहा कि वे इस मूल्य उछाल को नियंत्रित करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला की जांच करेंगे। बोर्ड ने यह भी कहा कि वे थोक बाजार में अनियमित लेन‑देन को रोकने के लिए कठोर कदम उठाएंगे, जिससे उपभोक्ताओं को उचित मूल्य मिल सके। इस पहल के तहत तत्काल जांच आदेश जारी किया गया है।

वाणिज्य संघ के अध्यक्ष ने कहा कि दाल‑चावल के मूल्य में अचानक वृद्धि से छोटे‑मोटे व्यापारियों को भी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों को अनावश्यक लाभ नहीं उठाना चाहिए और सरकारी निर्देशों का पालन करना चाहिए। संघ ने भीड़भाड़ वाले बाजारों में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग करने का आश्वासन दिया।

उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने इस मुद्दे पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कीमतों में असमानता को लेकर शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। आयोग ने बाजार में वैध मूल्य निर्धारण की निगरानी को सख़्त करने का संकेत दिया और उपभोक्ताओं को सलाह दी कि वे अधिकृत दुकानों से ही खरीदारी करें। आयोग ने संभावित दण्डात्मक कार्रवाई की भी चेतावनी दी।

राजनीतिक दलों ने भी इस कीमत उछाल को लेकर अपने-अपने बयान जारी किए। ruling party के नेता ने कहा कि सरकार मौसमी महंगाई को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी, जबकि विपक्षी दल ने सरकारी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि इससे आम जन की जीवनशैली पर बड़ा असर पड़ रहा है। दोनों पक्षों ने आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की माँग की।

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि दाल‑चावल के मूल्यों में यह उछाल मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर इस वृद्धि को रोकने के लिए त्वरित उपाय नहीं किए गए तो उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति घट सकती है और मौद्रिक नीति पर असर पड़ेगा। इस संदर्भ में उन्होंने मौसमी कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया।

सामाजिक दृष्टिकोण से, इस कीमत उछाल का असर निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अधिक होगा। कई घरों ने बताया कि बढ़ती कीमतों के कारण वे अपनी दैनिक पोषण की गुणवत्ता में कटौती कर रहे हैं। इस स्थिति में पोषण सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, खासकर बच्चों और वृद्धों के लिए। सामाजिक संगठनों ने राहत कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया।

वित्तीय संस्थानों ने इस विकास को देखते हुए कृषि ऋण की प्रक्रिया को तेज करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि किसानों को अधिक सस्ती ऋण सुविधाएं प्रदान करके उत्पादन बढ़ाने में मदद करनी चाहिए, जिससे दीर्

Updated: October 6, 2026


Patna’s grocery markets saw sharp spikes in dal and rice prices—urad lentils jumping from ₹120 to ₹150 per kg and medium‑grade rice climbing to ₹65—fueling consumer anxiety as festive season demand meets supply shortfalls and higher transport costs. Authorities and trade bodies warn of possible price‑fixing, promise tighter market monitoring and urge swift government action to curb inflation‑driven hardship for low‑income households.

Insight: The surge in dal‑rice prices, driven by supply squeezes and rising logistics costs, is likely to push Bihar’s inflation rate above the RBI’s tolerance band, forcing the central bank to consider tighter monetary policy just as election season looms.
At the same time, the strain on low‑income households could

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