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तेजस्वी यादव ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की, 7-8 अक्टूबर को बिहार में बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान

बिहार में चुनावी प्रक्रिया को लेकर तीव्र असंतोष का माहौल बन रहा है। राज्य के उपमुख्य मंत्री एवं राजकीय विरोधी गठबंधन के प्रमुख नेता तेजस्वी यादव ने आज सुबह नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे बिहार में बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने का आदेश दिया, साथ ही वे केंद्रीय निर्वाचन आयोग (CEC) के अध्यक्ष के इस्तीफ़े की माँग कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यदि मतदाता की आवाज़ को नजरअंदाज किया जाता है तो लोकतंत्र का स्वरूप खतरे में पड़ जाएगा”। यह घोषणा अगले दो हफ्तों में शुरू होने वाले विरोधों की रूपरेखा को स्पष्ट करती है, जहाँ कई जिलों में रैलियाँ, धरने और सार्वजनिक बंदी की सम्भावना है।तेजस्वी यादव ने इस कदम के पीछे की पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया। पिछले महीने बिहार में आयोजित चुनाव में कई मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के कार्य में गड़बड़ी की खबरें सामने आईं। विपक्षी दल ने इस पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि मशीनों की तकनीकी खामियों के कारण मतों का वास्तविक प्रतिबिंब नहीं दिख रहा है। इसके अलावा, कई मतदाताओं ने वोटिंग के दौरान पहचान पत्र दिखाने को लेकर कठिनाइयों का सामना किया, जिससे चुनाव प्रक्रिया में विश्वास की कमी स्पष्ट हुई।

इन आरोपों पर CEC के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्होंने सभी मतदान केंद्रों में तकनीकी जाँच कर ली है और कोई भी गंभीर त्रुटि नहीं पाई गई। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि चुनाव आयोग ने स्वतंत्र निरीक्षणकर्ताओं को नियुक्त किया था और उनके रिपोर्टों में कोई वैध गड़बड़ी नहीं मिली। फिर भी, विरोधी दल ने यह तर्क दिया कि निरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही और कई क्षेत्रों में निरीक्षकों का प्रवेश संभव नहीं रहा, जिससे असंतोष का स्तर बढ़ा।

आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी ने बताया कि उन्होंने इस निर्णय को विभिन्न सामाजिक वर्गों के साथ व्यापक परामर्श के बाद लिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बिहार के कई प्रमुख शहरों में पहले से ही छोटे स्तर पर रैली आयोजित की जा रही है, जिसमें जनता ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।

प्रदर्शन की तैयारियों में कई स्थानीय संगठन और सामाजिक समूह भी शामिल हो रहे हैं। कुछ प्रमुख शहरों में, जैसे पटना, दरभंगा और भागलपुर, ने पहले ही मार्ग बंदी और सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन की घोषणा की है। इन कार्यक्रमों में स्थानीय व्यवसायियों, छात्रों और महिला समूहों की भागीदारी की अपेक्षा है, जिससे आंदोलन के सामाजिक दायरे का विस्तार होगा।

इस बीच, सुरक्षा बलों ने भी तैयारियां बढ़ा ली हैं। राज्य पुलिस ने कहा कि वे सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कर्मियों को तैनात करेंगे और संभावित अव्यवस्था को रोकने के लिए विशेष उपाय करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी अवैध कार्य या हिंसा नहीं सहन की जाएगी और कानून का पूरा पालन किया जाएगा।

राजनीतिक प्रतिक्रिया विविध रूप से सामने आई है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष ने इस कदम को “लोकतंत्र के मूल्यों के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति” कहा, जबकि कुछ अन्य गठबंधन के नेताओं ने इसे “राजनीतिक उकसावे” का लेबल दिया। कई विपक्षी नेता तेजस्वी यादव के इस कदम को “सच्ची जन शक्ति का प्रयोग” मानते हुए समर्थन व्यक्त कर रहे हैं।

विरोधी पक्ष के कई वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि इस आंदोलन से मतदाता के अधिकारों की रक्षा होगी और यह चुनावी प्रक्रिया में सुधार लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि CEC के अध्यक्ष को इस्तीफ़ा नहीं दिया जाता तो यह आंदोलन अधिक तीव्रता से जारी रहेगा। इस बीच, कई सामाजिक कार्यकर्ता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि आंदोलन के दौरान शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जानी चाहिए।

सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कई आधिकारिक बयानों में कहा गया है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है और CEC की कार्यवाही को चुनौती नहीं दी जाएगी। राज्य के मुख्य मंत्री ने कहा कि वह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करेंगे और जनता को शांत रहने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई भी असामान्य घटना हुई तो उसे कड़ी कार्रवाई के तहत संभाला जाएगा।

आर्थिक प्रभाव की भी चर्चा शुरू हो चुकी है। कई व्यापारियों ने कहा कि यदि प्रदर्शन लंबे समय तक चलता रहा तो स्थानीय व्यापार और रोज़गार पर असर पड़ सकता है। विशेषकर छोटे व्यापारियों और रोज़गार-आधारित उद्योगों को संभावित नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, पर्यटन क्षेत्र में भी गिरावट की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि कई दर्शक स्थल और सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द हो सकते हैं।

समाजिक रूप से, इस आंदोलन ने विभिन्न वर्गों में विचार-विमर्श को जन्म दिया है। कुछ समूह इस कदम को लोकतंत्र की रक्षा के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे राजनैतिक संघर्ष का हिस्सा मानते हैं। महिलाओं और युवा वर्ग ने विशेष रूप से इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभाई है, जहाँ उन्होंने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की है।

Updated: October 5, 2026


Tejashwi Yadav has called for a statewide protest in Bihar, demanding the resignation of the CEC chairman over alleged EVM glitches and voter‑ID hassles, with rallies and roadblocks slated across major cities. While opposition frames the march as a defence of democratic rights, the state government warns of strict law‑enforcement and cautions that prolonged unrest could hit local businesses and tourism.

Insight: Tejaswi Yadav’s call for mass protests signals that opposition leaders are willing to use civil unrest as a bargaining chip, framing electoral grievances as a democratic crusade rather than mere politics. If the CEC’s head stays, the movement risks devolving into a prolonged, economically damaging standoff that could

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