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ECI ने राहुल गांधी के फ़ॉर्म‑6 विवाद को ‘भ्रामक’ कहकर आदेश की वैधता की पुष्टि की

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने 27 मे 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखे गए बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के आदेश को लेकर राहुल गांधी के आरोपों को ‘भ्रामक’ कहा।
आयोग ने कहा कि 24 जून 2025 को जारी किया गया आदेश सभी सदस्यों की सर्वसम्मत मंजूरी से प्राप्त था और इस पर न्यायालय ने अपनी अंतिम पुष्टि दी है। यह स्पष्ट करने के बाद, आयोग ने राहुल गांधी द्वारा 26 सितंबर को जारी की गई ‘एक्स’ पोस्ट को उत्तर दिया, जिसमें उन्होंने Form 6 में बदलाव का आरोप लगाया था।राहुल गांधी ने पिछले सप्ताह सोशल मीडिया पर पोस्ट कर यह दावा किया था कि Form 6 में परिवर्तन करके चुनावी प्रक्रिया को विकृत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार में SIR के तहत जारी किए गए Form 6 के दस्तावेज़ों में अनधिकृत संशोधन किए गए हैं, जिससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठता है। यह बयान कई राजनीतिक और सामाजिक समूहों का ध्यान आकर्षित कर चुका है, जिससे इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

ECI ने अपने 26 सितंबर के प्रेस नोट में इस विषय पर स्पष्ट किया कि Form 6 के साथ संलग्न घोषणा‑पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। आयोग ने यह भी बताया कि इस घोषणा‑पत्र को लागू करने की प्रक्रिया में कोई अनियमितता नहीं हुई है और यह सभी नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप है। आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि Form 6 का उद्देश्य मतदाता सूची में सुधार लाना है, न कि किसी भी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाना।

बिहार में SIR का आदेश 2019 के चुनाव सुधारों के बाद से ही लागू था, जिसका मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाना था। इस आदेश के तहत, मतदाता सूची में त्रुटियों को दूर करने के लिए विशेष पुनरीक्षण किया गया, जिसमें विभिन्न दस्तावेज़ीकरण और तकनीकी उपाय शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट के 27 मे 2026 के फैसले ने इस आदेश को वैध माना, जिससे इसे किसी भी प्रकार के कानूनी चुनौती से मुक्त किया गया।

वर्तमान में, ECI ने बताया कि Form 6 के सभी प्रावधान राष्ट्रीय स्तर पर लागू हो रहे हैं और इसे लेकर कोई भी अनधिकृत परिवर्तन नहीं किया गया है। आयोग ने यह भी कहा कि Form 6 का उपयोग विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची की सटीकता को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है, जिससे चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। इस संदर्भ में, आयोग ने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल इस प्रक्रिया को अपने लाभ के लिए नहीं मोड़ सकता।

राहुल गांधी की पोस्ट के बाद, कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने ECI पर दबाव डाला कि वह इस मामले की पूरी जांच करे और सार्वजनिक रूप से परिणाम प्रस्तुत करे। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि यदि Form 6 में कोई अनियमितता पाई गई तो इसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।

वहीं, भाजपा ने इस विवाद को राजनीतिक उकसावे के रूप में खारिज किया और कहा कि ECI ने सभी नियमों का पालन किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी है, और इस पर किसी भी प्रकार की पुनः जांच की आवश्यकता नहीं है। भाजपा ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बरकरार रखना चाहिए, जिससे लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत बनी रहे।

विपक्षी दलों और स्वतंत्र अवलोकनकर्ताओं ने इस मुद्दे पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दीं। कुछ ने कहा कि Form 6 के उपयोग से मतदाता सूची में सुधार हुआ है, जबकि कुछ ने प्रक्रिया में संभावित अड़चनों को उजागर करने की आवश्यकता पर बल दिया। कई नागरिक संगठनों ने कहा कि चुनावी सुधारों को सार्वजनिक जांच के तहत रखना चाहिए, जिससे जनता का भरोसा बना रहे।

आर्थिक दृष्टिकोण से, चुनावी प्रक्रिया में विश्वसनीयता का अभाव निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है। यदि मतदाता सूची में त्रुटियों को लेकर व्यापक संदेह बना रहता है, तो राजनीतिक अस्थिरता का जोखिम बढ़ता है, जिससे बाजार में अनिश्चितता उत्पन्न हो सकती है। इस प्रकार, Form 6 के प्रभाव को सटीक रूप से समझना आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

समाजिक स्तर पर, मतदाता सूची की सटीकता लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देती है। यदि Form 6 के माध्यम से सूची में सुधार हो रहा है, तो यह मतदान के अधिकार को सुदृढ़ करेगा और नागरिकों में राजनीतिक जागरूकता बढ़ाएगा।

 

The Election Commission refuted Rahul Gandhi’s claim that Form 6 was tampered with under Bihar’s Special Intensive Review, saying the Supreme Court‑backed order was unanimously approved and fully compliant with regulations. While the Congress called for a probe, the BJP dismissed the allegation as political provocation, stressing the process’s legality and its role in improving voter‑list accuracy.

ECI’s firm dismissal of Rahul Gandhi’s “misleading” claims signals a broader confidence in the Supreme Court‑sanctioned SIR framework, suggesting that the commission expects political pressure to backfire rather than reshape voter‑list protocols.

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