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बक्सा टाइगर रिजर्व में लौटी बाघों की दहाड़, तीन साल की बाघिन को जंगल में छोड़ा गया

बुशा रिज़र्व में तीन साल पुरानी बाघनी की आज़ादी, बाघ संरक्षण में नई आशा की किरण। बिहार के वाल्मीकि वन से ट्रांसफ़र की गई इस बाघनी को बुक्सा में धीरे‑धीरे मुक्त किया गया, जिससे इस क्षेत्र में स्थायी बाघ जनसंख्या स्थापित करने की योजना को गति मिली। वन विभाग ने कहा, यह पहला कदम है और भविष्य में और बाघों को यहाँ लाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

वाल्मीकि वन में बाघों की घटती संख्या ने राज्य को गंभीर चेतावनी दी थी। पिछले पाँच वर्षों में यहाँ बाघों की संख्या में ४० % की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाघ संरक्षण के लिए वैकल्पिक स्थल खोजने का दबाव बढ़ा। बुक्सा, जो पहले बाघों के अभयारण्य के रूप में जाना जाता था, अब इस कमी को पूरित करने के लिए चयनित किया गया।

बुक्सा रिज़र्व, उत्तर पश्चिमी बंगाल में स्थित, पहले से ही विभिन्न वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करता है। यहाँ का वनस्पति विविधता और पर्याप्त जल स्रोत बाघों के लिए अनुकूल माहौल बनाते हैं। पिछले दो दशकों में इस क्षेत्र में बाघों की उपस्थिति सीमित रही, पर अब इसे पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

बाघनी को ४५ किमी दूर वाले वाल्मीकि वन से बुक्सा तक ट्रांसफ़र किया गया। इस प्रक्रिया में वन्यजीव विशेषज्ञों ने विशेष परिवहन कंटेनर, तापमान नियंत्रण, और तनाव‑रहित माहौल सुनिश्चित किया। ट्रांसफ़र के दौरान बाघनी का स्वास्थ्य निरंतर मॉनिटर किया गया, और उसे उचित दवाओं और पोषक तत्वों से सपोर्ट किया गया।

रिलीज़ के दिन बुक्सा के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक छोटा समारोह आयोजित किया गया, जहाँ वन विभाग के प्रमुख, स्थानीय अधिकारी, और वन्यजीव संरक्षण संघ के प्रतिनिधि उपस्थित थे। बाघनी को खुले मैदान में धीरे‑धीरे छोड़ते समय उसे प्राकृतिक वातावरण में अनुकूलित करने के लिए पहले कुछ घंटे सीमित क्षेत्र में रखा गया।

रिलीज़ के बाद बाघनी को सीसीटीवी कैमरों और जीपीएस टैग के माध्यम से लगातार निगरानी में रखा गया। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि बाघनी ने नए माहौल में सक्रियता दिखाई और शिकार करने की कोशिशें शुरू कर दीं। वन विभाग ने कहा, यह सकारात्मक संकेत बाघों के पुनरुत्थान के लिए महत्वपूर्ण है।

स्थानीय समुदाय के कई सदस्य इस कदम का स्वागत कर रहे हैं। बुक्सा के आसपास के गाँवों में रहने वाले लोग वन्यजीव पर्यटन से आय की आशा रखते हैं। उन्होंने कहा कि बाघों की मौजूदगी से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

वहीं, कुछ पर्यावरणीय समूहों ने बाघों की पुनर्स्थापना के लिए पर्याप्त खाद्य स्रोत और आवास की तैयारी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बाघों की सफलता तभी संभव है जब उनकी प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला को मजबूत किया जाए। इन समूहों ने वन विभाग से विस्तृत योजना की माँग की।

राज्य सरकार ने बताया कि बुक्सा में बाघों की पुनर्स्थापना के लिए विशेष बजट आवंटित किया गया है। इस बजट में आवास सुधार, शिकार प्रबंधन, और स्थानीय लोगों के लिए जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। सरकार ने कहा, यह पहल राष्ट्रीय बाघ संरक्षण योजना के तहत आती है।

आर्थिक दृष्टिकोण से बाघों की उपस्थिति पर्यटन को बढ़ा सकती है, जिससे राज्य को विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाघ देखी जा सकने वाले पर्यटन स्थल बनते ही होटल, रेस्टोरेंट, और स्थानीय हस्तशिल्प बाजारों को लाभ होगा।

सामाजिक प्रभाव के लिहाज़ से बाघों की उपस्थिति स्थानीय लोगों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाएगी। शैक्षणिक संस्थानों ने बाघ संरक्षण पर विशेष कार्यशालाओं की योजना बनाई है, जिससे युवा वर्ग को पर्यावरणीय जिम्मेदारी समझाई जा सके।

पर्यावरणीय विशेषज्ञों ने कहा कि बुक्सा की जैव विविधता को संतुलित रखने के लिए बाघों के अलावा अन्य प्रजातियों के भी संरक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि एक समग्र पारिस्थितिक प्रबंधन योजना बनाकर ही बाघों का स्थायी विकास संभव होगा।

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Updated: October 2, 2026

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