मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपने पिछले दो वर्षों के कार्यकाल में उत्तराखंड के विकास के प्रमुख बिंदु भी उजागर किए। उन्होंने जल-संकट समाधान, पर्यटन प्रोत्साहन और पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा सुधार के लिये उठाए गए कदमों को रेखांकित किया।
समारोह में उत्तराखंड के कई विधायक, केंद्रीय मंत्री और सामाजिक संगठनों के प्रमुख भी शामिल हुए। सभी ने प्रधानमंत्री की नीतियों की सराहना की और राज्य की प्रगति में उनके सहयोग की आशा व्यक्त की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रार्थना सभा के बाद एक संक्षिप्त संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड के विकास में धामी सरकार के प्रयासों को सराहा और “देश के सभी कोनों में शांति और समृद्धि की कामना” व्यक्त की।
धामी ने कहा कि मोदी जी के मार्गदर्शन में भारत ने कई चुनौतियों का सामना किया है और उन्हें पार किया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य की नई नीतियों को केंद्र सरकार के समर्थन से और तेज़ी से लागू किया जाएगा।
उत्तरी भारतीय राज्य के प्रमुख नेताओं ने इस अवसर पर मोदी के आर्थिक सुधारों, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल पहल के लाभों पर चर्चा की। कई सांसदों ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने “विकास की गति” को नई दिशा दी है।
राज्य सरकार ने अपने प्रमुख बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं, जैसे हाइलाइटेड हाइड्रोइलेक्ट्रिक योजना और पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कों के विकास, को प्रधानमंत्री के “विकास के अभूतपूर्व” ढाँचे के साथ जोड़ते हुए कहा।
एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री की नीतियों ने उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद की है।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में उत्तराखंड को केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता राशि में 15% की वृद्धि हुई है, जो राज्य की विकास परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाने में सहायक होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि धामी सरकार की इस पहल से उत्तराखंड में भाजपा की लोकप्रियता में वृद्धि हो सकती है, क्योंकि यह प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और समर्थन को दर्शाती है।
आर्थिक विशेषज्ञों ने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री की नीतियों के चलते उत्तराखंड में पर्यटन राजस्व में 12% की वार्षिक वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय उद्योगों को लाभ मिला है।
समाजशास्त्री डॉ. अंजली सिंह ने बताया कि इस प्रकार की प्रार्थना सभा सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देती है, लेकिन यह भी जरूरी है कि राजनैतिक समर्थन के साथ ठोस विकास कार्य भी जारी रहें।
आगे के कई सप्ताहों में उत्तराखंड में नई विकास योजनाओं की घोषणा की उम्मीद है, जिसमें पहाड़ी क्षेत्रों में जलवायु अनुकूलन परियोजनाएं, स्वास्थ्य सेवा विस्तार और डिजिटल बुनियादी ढांचा शामिल होगा। इस दिशा में केंद्र और राज्य के सहयोग को और सुदृढ़ किया जाएगा।
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