Press "Enter" to skip to content

दिल्ली चुनाव में फॉर्म‑7 का निपटान 6 गुना बढ़ा, फॉर्म‑6 में केवल 569 आवेदन समाप्त, प्रक्रिया में असंतुलन पर सवाल उठे।

दिल्ली के चुनावी अधिकारी कार्यालय (SIR) ने 31 अगस्त से 4 अक्टूबर के बीच फॉर्म‑7 के निपटान में असाधारण वृद्धि दर्ज की, जबकि फॉर्म‑6 के निपटान में मात्र 569 आवेदन ही समाप्त हुए। इस अवधि में फॉर्म‑7 के निपटान की संख्या लगभग छह गुना अधिक रही,

जिससे निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और समयबद्धता पर प्रश्न उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फॉर्म‑7 की तेज़ गति से निपटान ने कई राजनीतिक दलों और आश्रित उम्मीदवारों को आश्चर्यचकित कर दिया, क्योंकि यह अनुपात पहले कभी नहीं देखा गया था।

फॉर्म‑6, जो मुख्यतः उम्मीदवारों के नामांकन और

वैधता से जुड़ा दस्तावेज़ है, पारंपरिक रूप से अधिक समय लेता है। इस अवधि में केवल 569 फॉर्म‑6 निपटाए गए, जो पिछले समान अवधि के औसत से 30 प्रतिशत कम है। इसके विपरीत, फॉर्म‑7, जो चुनावी अभियानों में धनराशि और खर्चों की रिपोर्टिंग से संबंधित है,

का निपटान 3,400 से अधिक तक पहुंच गया। इस असमानता के कारण कई चुनावी विशेषज्ञों ने प्रक्रिया में संभावित असंतुलन की ओर इशारा किया।

पिछले वर्षों में फॉर्म‑6 और फॉर्म‑7 के निपटान में तुलनात्मक रूप से संतुलन रहा है; औसत रूप से फॉर्म‑6 की संख्या फॉर्म‑7 के

70‑80 प्रतिशत रही है। हालांकि, 2024 के मध्यस्थ चुनाव में, फॉर्म‑7 की तेज़ गति से निपटान ने प्रशासनिक दबाव को बढ़ा दिया। इस बदलाव का कारण आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया, लेकिन कई विश्लेषकों का मानना है कि वित्तीय पारदर्शिता के बढ़ते दबाव ने

इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

दिल्ली चुनावी अधिकारी कार्यालय ने इस रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा कि फॉर्म‑7 की तेज़ गति से निपटान का उद्देश्य उम्मीदवारों के खर्चों को समय पर प्रकाशित करना है, जिससे मतदाता सूचित निर्णय ले सकें। उन्होंने यह भी बताया कि

फॉर्म‑6 के निपटान में देरी के लिए कुछ तकनीकी कारण बताए गए हैं, जैसे कि दस्तावेज़ सत्यापन में वृद्धि और नई डिजिटल प्रणाली का संक्रमण। इस संदर्भ में, कार्यालय ने आश्वासन दिया कि भविष्य में दोनों फॉर्मों की प्रक्रिया को संतुलित करने के लिए उपाय किए

जाएंगे।

फॉर्म‑6 के निपटान में कमी के कारण कई उम्मीदवारों ने अपने नामांकन में कठिनाई महसूस की। कुछ छोटे दलों ने यह भी कहा कि देर से निपटान के कारण उनके अभियानों में व्यवधान आया। इसके विपरीत, बड़े राष्ट्रीय दलों ने फॉर्म‑7 के तेज़ निपटान को सकारात्मक

माना, क्योंकि इससे उनके वित्तीय विवरण शीघ्रता से प्रकाशित हो पाए। यह विभाजन दर्शाता है कि विभिन्न स्तर के राजनीतिक खिलाड़ियों पर इस प्रक्रिया का अलग-अलग प्रभाव पड़ रहा है।

दिलेरी के इस अंतर पर कई नागरिक समाज संगठनों ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फॉर्म‑6 की

देरी मतदाता अधिकारों को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि उम्मीदवारों की वैधता पर स्पष्टता नहीं मिलने से चुनावी विकल्प सीमित हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी उजागर किया कि फॉर्म‑7 का तेज़ निपटान, यदि सही निगरानी न हो तो वित्तीय छुपाने की संभावना को

बढ़ा सकता है। इस संदर्भ में, उन्होंने पारदर्शिता के साथ-साथ प्रक्रिया की गति को संतुलित करने की मांग की।

राजनीतिक दलों ने भी इस रिपोर्ट पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दीं। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रमुख नेता ने कहा कि फॉर्म‑7 की त्वरित निपटान से मतदाता जानकारी में

सुधार होगा और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुदृढ़ करेगा। वहीं, विरोधी विपक्षी दलों के मुख्य प्रवक्ता ने फॉर्म‑6 की देरी को चुनावी प्रक्रिया में असमानता का संकेत बताया और इस पर त्वरित सुधार की मांग की। दोनो पक्षों ने यह भी कहा कि भविष्य में इस

असंतुलन को समाप्त करने के लिए एक संयुक्त समिति गठित की जानी चाहिए।

समान्य जनता की प्रतिक्रिया भी मिश्रित रही। कुछ मतदाता ने कहा कि फॉर्म‑7 की तेज़ प्रक्रिया से उन्हें उम्मीदवारों के खर्चों की जानकारी मिलती है, जिससे वे अधिक जागरूक होते हैं। अन्यत्र, कई नागरिकों

ने फॉर्म‑6 के निपटान में देरी को चुनौतिपूर्ण बताया, क्योंकि इससे उनके क्षेत्र में वैध उम्मीदवारों की सूची स्पष्ट नहीं होती। सामाजिक मीडिया पर इस मुद्दे पर कई बहसें चल रही हैं, जहाँ उपयोगकर्ता दोनों फॉर्मों की

Updated: October 7, 2026


Delhi’s election office cleared over 3,400 Form‑7 expense reports between Aug 31 and Oct 4, a six‑fold jump, while only 569 candidate nomination Form‑6s were processed, sparking concerns over procedural imbalance. Officials cite a push for faster financial disclosure and technical glitches in verification, promising steps to restore parity.

Insight: The rush to clear Form‑7 reveals a new priority on financial visibility that benefits big parties, while the bottleneck in Form‑6 silently disenfranchises smaller contenders and narrows voter choice. If the speed‑over‑accuracy trade‑off persists, Delhi’s election credibility could erode faster than its transparency

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from अन्य राज्यMore posts in अन्य राज्य »

Be First to Comment

    प्रातिक्रिया दे

    आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *