बीते पाँच वर्षों में बिहार में कई प्रमुख कार्यक्रमों में भगदड़ और दंगे की घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 2021 में बक्सर में आयोजित वार्षिक मेला, 2022 में पटना के अंतरराष्ट्रीय खेल महोत्सव और 2023 में दरभंगा के राजनीतिक सभाओं में जनधारा का प्रबंधन विफल रहा। इन घटनाओं ने जनसुरक्षा में खामी दर्शाई, जिससे राज्य सरकार को भीड़‑प्रबंधन की कमजोरियों को सुधारने की दिशा में कदम उठाने पड़े।
DMRC के मुख्य अधिकारी प्रहलाद कुमार ने बताया कि नई गाइडलाइन में पहले से स्थापित पुलिस नियंत्रण बिंदुओं के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर अस्थायी रैडार‑सेंसर और मोबाइल वॉच‑टावर स्थापित किए जाएंगे। इन सेंसरों से प्राप्त डेटा को केंद्रित कमांड‑सेंटर में रीयल‑टाइम में प्रसारित किया जाएगा, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को भीड़ की गति और घनत्व की सटीक जानकारी मिल सके। इस तकनीकी सहायता से संभावित जोखिम क्षेत्रों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
नए नियमों के अनुसार, सभी बड़े कार्यक्रमों के लिए कम से कम दो सप्ताह पहले भीड़‑प्रबंधन योजना प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है। इस योजना में प्रवेश‑निकास मार्ग, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा, जल आपूर्ति और निकासी के लिए विशेष मार्गों का विवरण होना चाहिए। साथ ही, आयोजकों को स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड और अस्पतालों के साथ समन्वय स्थापित करके एकीकृत आपदा‑प्रतिक्रिया टीम बनानी होगी।
CCTV कैमरों की स्थापना के लिए राज्य के 12 जिलों में पहले से ही 5,000 से अधिक यूनिट स्थापित करने की योजना है, जो मुख्य प्रवेश‑द्वार, भीड़‑भाड़ वाले गलियारे और खुले मैदानों को कवर करेगी। कैमरों का डेटा क्लाउड‑सर्वर पर सुरक्षित रूप से संग्रहित रहेगा और केवल अधिकृत अधिकारियों को ही उपलब्ध होगा। यह कदम न केवल वास्तविक‑समय में निगरानी को सक्षम करेगा, बल्कि बाद में हुई किसी भी घटना की जाँच में भी सहायक होगा।
ड्रोन निगरानी के लिए भी विस्तृत प्रोटोकॉल तैयार किए गए हैं। ड्रोन ऑपरेटरों को विशेष लाइसेंस और रात्रिकालीन उड़ान के लिए अनुमति लेनी होगी। इन ड्रोन में उच्च‑रिज़ॉल्यूशन कैमरे, थर्मल इमेजिंग और भीड़‑सेंसर लगे होंगे, जो बड़े आयोजन स्थल पर भीड़ की गति और संभावित दबाव बिंदुओं को तुरंत पहचानेंगे। सरकार ने कहा कि आपातकालीन स्थिति में ड्रोन द्वारा प्रसारित लाइव फीड को सीधे कमांड‑सेंटर में भेजा जाएगा, जिससे त्वरित निर्णय ले सकेंगे।
इन दिशा‑निर्देशों पर राज्य पुलिस के प्रमुख ने तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहायता के साथ साथ पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाने और विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने से भीड़‑प्रबंधन की प्रभावशीलता में वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि नई प्रणाली के तहत पुलिस को रीयल‑टाइम में भीड़‑संख्या की जानकारी मिलेगी, जिससे वे भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त बिंदु चुन सकेंगे।
धार्मिक संगठनों ने भी अपने-अपने मंचों पर इस कदम की सराहना की। प्रमुख हिंदू मंदिर प्रबंधकों ने कहा कि CCTV और ड्रोन की मौजूदगी से भक्तों की सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार होगा और भविष्य में भगदड़ जैसी त्रासदियों की संभावना कम होगी। इसी तरह, मुस्लिम और सिख समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल को “सुरक्षा की नई दिशा” बताया। उन्होंने आग्रह किया कि इन तकनीकों का उपयोग सभी धार्मिक स्थलों में समान रूप से किया जाए।
राजनीतिक दलों ने इस कदम को दोनों ओर से देखा। कई विपक्षी नेता ने कहा कि यह कदम केवल सुरक्षा कारणों से नहीं, बल्कि सरकारी नियंत्रण को बढ़ाने की दिशा में भी है, और उन्होंने इस बात पर आशंका जताई कि निगरानी उपकरणों का दुरुपयोग हो सकता है। वहीं, गठबंधन सरकार के मुखिया ने स्पष्ट किया कि ये उपाय केवल जन सुरक्षा के लिए हैं और इनका कोई राजनीतिक प्रयोग नहीं होगा। उन्होंने कहा कि निगरानी के डेटा को स्वतंत्र निगरानी आयोग के सामने पारदर्शी रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।
आर्थिक दृष्टिकोण से विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर भीड़‑प्रबंधन से पर्यटन और बड़े कार्यक्रमों की विश्वसनीयता बढ़ेगी, जिससे राज्य की आय में वृद्धि होगी। सुरक्षित माहौल के कारण निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा, और भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल इवेंट या
Updated: October 7, 2026
Bihar’s tech‑heavy crowd‑control regime could transform public events into low‑risk showcases, nudging investors and tourists toward a perception of a “secure‑first” state.
Yet the same surveillance lattice raises a subtle power question: as real‑time data tightens governmental grip
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