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बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब, तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर साधा निशाना

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य में कानून व्यवस्था की खराब स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दोनों उपमुख्यमंत्रियों पर जोरदार हमला बोला है। तेजस्वी ने कहा कि बिहार में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और सरकार अपराधियों पर लगाम लगाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब शारीरिक और मानसिक रूप से उतने सक्रिय नहीं हैं जितने पहले हुआ करते थे। उनकी याददाश्त और पकड़ दोनों कमजोर हो चुकी है, जिसका सीधा फायदा अपराधी उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में अब ‘इकबाल’ खत्म हो चुका है और अपराधी बेखौफ होकर गोलियां बरसा रहे हैं।

तेजस्वी ने न केवल मुख्यमंत्री बल्कि बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्रियों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जब राज्य में गोलियां चलती हैं, तो सत्ता में बैठे लोग जिम्मेदारी लेने के बजाय एक-दूसरे का मुंह ताकते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सीमांचल दौरे पर तेजस्वी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे पूरी तरह से बंगाल चुनाव से प्रेरित बताया। तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी सीमांचल के जरिए बंगाल की चुनावी बिसात बिछाने की कोशिश कर रही है, जबकि बिहार की समस्याओं से उन्हें कोई सरोकार नहीं है।

तेजस्वी ने कहा कि बिहार में ‘लॉ एंड ऑर्डर’ पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और अब इसकी जगह ‘क्रिमिनल डिसऑर्डर’ ने ले ली है। अपराधी जिसे चाहते हैं, जहां चाहते हैं, सरेआम गोली मार देते हैं। प्रशासन का डर अपराधियों के मन से निकल चुका है और आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।

बिहार में बच्चा चोरी का बढ़ता संकट: पीएमसीएच से नवजात की चोरी, आरोपी महिला को आधे घंटे में पकड़ा गया

बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) में एक नवजात की चोरी की घटना ने पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मचा दिया। यह घटना सोमवार को प्रसूति वार्ड से हुई, जहां एक महिला ने महज 16 घंटे पहले पैदा हुए एक नवजात को चोरी कर लिया। परिजनों की तत्परता और सीसीटीवी की मदद से आरोपी महिला को आधे घंटे के भीतर ही दबोच लिया गया।

इस घटना ने पटना समेत पूरे राज्य में बच्चा चोरी की बढ़ती वारदातों और उनसे जुड़ी अफवाहों को एक बार फिर से उजागर किया है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, पटना जिले से एक साल में 76 बच्चे गायब हुए हैं, जिनमें से बरामदगी का दर बेहद कम है। यह आंकड़े बताते हैं कि बच्चा चोर गिरोह राज्य में किस कदर सक्रिय है और प्रशासन की चुनौतियां कितनी बड़ी हैं।

पीएमसीएच के वार्ड से बच्चा चुराने वाली महिला की पहचान जैकी कुमारी के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने बताया कि उसकी शादी को तीन साल हो चुके थे, लेकिन इलाज के बाद भी उसे संतान सुख नहीं मिला। बच्चे की तीव्र चाहत ने उसे अपराधी बना दिया और उसने प्रसूति वार्ड में परिजनों की नजर बचाकर मासूम को गोद में उठा लिया।

इस घटना ने एक बार फिर से प्रशासन की चुनौतियों को उजागर किया है। सवाल यह है कि कड़े पहरे के बावजूद एक अनजान महिला प्रतिबंधित प्रसूति वार्ड में कैसे दाखिल हो गई? वार्ड के गेट पर तैनात गार्डों की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी जब वह बच्चे को छिपाकर बाहर ले जा रही थी? यदि परिजन तुरंत शोर नहीं मचाते, तो शायद वह बच्चा कभी वापस नहीं मिलता।

बिहार में बच्चा चोरी की अफवाहों ने हिंसक रूप ले लिया है। राजधानी के आसपास के इलाकों जैसे बिहटा और पुनपुन में बच्चा चोरी की अफवाहों ने हिंसक रूप ले लिया है। बिहटा के पतसा गांव में एक युवक को बच्चा चोर समझकर भीड़ ने बेरहमी से पीटा, जिसे पुलिस ने बड़ी मुश्किल से बचाया। वहीं पुनपुन में एक विक्षिप्त महिला को बंधक बना लिया गया।

पुलिस प्रशासन बार-बार अपील कर रहा है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून को हाथ में न लें, लेकिन बढ़ते मामलों ने आम जनता के बीच अविश्वास की खाई पैदा कर दी है। बिहार पुलिस की ताजा रिपोर्ट ने राजधानी के अभिभावकों की नींद उड़ा दी है। पिछले एक साल में अकेले पटना जिले से 76 बच्चे रहस्यमय तरीके से गायब हुए हैं, जिनमें से बरामदगी का दर बेहद कम है। यह आंकड़े बताते हैं कि बच्चा चोर गिरोह राज्य में किस कदर सक्रिय है और प्रशासन की चुनौतियां कितनी बड़ी हैं।

बिहार में शराबबंदी पर सियासी घमासान: सरकार पर समीक्षा के लिए बढ़ा दबाव

बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान शराबबंदी के मुद्दे पर एक बड़ा सियासी घमासान देखने को मिला। विपक्षी दलों ने सरकार पर शराबबंदी की समीक्षा के लिए दबाव डाला, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे सामाजिक सुधार का प्रतीक बताया। इस मुद्दे पर एनडीए के सहयोगी दलों ने भी अपनी राय व्यक्त की, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

विपक्षी दलों ने शराबबंदी को ‘कागजी शराबबंदी’ करार दिया और कहा कि इसका क्रियान्वयन और प्रभावशीलता पर सवाल उठना लाजमी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की साठगांठ से घर-घर शराब बिक रही है और सरकार को इसकी जगह दिखाने के लिए तैयार हैं।

सत्ता पक्ष की ओर से संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि शराबबंदी केवल एक कानून नहीं, बल्कि जनता का अटूट जनादेश है। उन्होंने कहा कि जब बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी, उसी समय सरकार ने संभावित राजस्व हानि का पूरा आकलन कर लिया था। उन्होंने कहा कि जनता ने लगातार जनादेश दिया है और समीक्षा की मांग राजनीतिक बयानबाजी से अधिक कुछ नहीं है।

इस मुद्दे पर ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता आज शराबबंदी पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें शायद अपनी ही पार्टी के सिद्धांतों की जानकारी नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए याद दिलाया कि कांग्रेस की सदस्यता लेने की मूल शर्तों में ही शराब न पीने का संकल्प शामिल रहा है।

एनडीए के सहयोगी दल रालोमो के विधायक माधव आनंद ने खुले तौर पर शराबबंदी की समीक्षा की मांग की, जिस पर जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि शराबबंदी कोई एक दल का फैसला नहीं था, बल्कि सर्वदलीय सहमति से लिया गया निर्णय था।

इस पूरे मामले में साफ है कि बिहार में शराबबंदी अब केवल कानून नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक विमर्श बन चुकी है। सरकार पर समीक्षा के लिए बढ़ा दबाव और विपक्षी दलों के आरोपों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है।

बिहार में महिलाओं के लिए बड़ा तोहफा: 25 लाख मुफ्त गैस कनेक्शन की मंजूरी, जानें क्या है इसके फायदे

बिहार की लाखों महिलाओं के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा तोहफा दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बिहार को 25 लाख उज्ज्वला कनेक्शन स्वीकृत किए हैं। यह मुफ्त गैस कनेक्शन बीपीएल परिवारों को मिलेगा, जो अभी तक पारंपरिक तरीके से खाना बनाने के लिए लकड़ियों या कोयले के चूल्हे पर निर्भर हैं।

केंद्र सरकार के इस कदम से बिहार की लाखों महिलाओं को सहूलियत मिलेगी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के विशेष सचिव उपेंद्र कुमार ने राज्य के सभी जिलों में आदेश जारी किया है कि गैस कनेक्शन देने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए और कोई भी लाभार्थी छूट न जाए।

इस योजना से ना सिर्फ बिहार में लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकेगा। पारंपरिक तरीके से खाना बनाने के लिए लकड़ियों का इस्तेमाल करने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, लेकिन मुफ्त गैस कनेक्शन मिलने से इस नुकसान से बचा जा सकेगा।

बिहार में उज्ज्वला समिति गठित की गई है, जो इस योजना को Successfully लागू करने में मदद करेगी। यह योजना बिहार की महिलाओं के लिए एक बड़ा तोहफा है, जो उनके जीवन को आसान बनाने में मदद करेगी।

पटना में मांस-मछली दुकानों के लिए नए नियम: लाइसेंस और QR कोड अनिवार्य, स्वच्छता पर जोर

पटना नगर निगम ने शहर में मांस-मछली की बिक्री को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। अब पटना के हर मीट-मछली दुकानदार को अनिवार्य रूप से लाइसेंस लेना होगा और उनकी दुकानों पर एक यूनिक क्यूआर कोड भी लगाना होगा। यह क्यूआर कोड दुकान की पूरी जानकारी देगा, जिससे ग्राहक और प्रशासन एक क्लिक पर दुकान की जानकारी देख सकेंगे।
पटना नगर निगम के इस फैसले से शहर में मांस-मछली की अवैध बिक्री पर रोक लगेगी और स्वच्छता मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। नगर आयुक्त यशपाल मीणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। लाइसेंस मिलने के बाद दुकानों को यूनिक QR कोड जारी किया जाएगा, जिसमें दुकान और दुकानदार की पूरी जानकारी दर्ज रहेगी।
पटना नगर निगम ने शहर में बड़ी संख्या में बिना लाइसेंस के मांस-मछली की दुकानें संचालित होती मिली हैं। कई अंचलों में लाइसेंस प्रणाली वर्षों से ठप थी और खुले में बिक्री आम बात बन चुकी थी। हालिया जांच में 1400 से अधिक अवैध दुकानों की पहचान की गई है, जिन्हें नोटिस देकर लाइसेंस के लिए आवेदन करने को कहा गया है।
निगम प्रशासन का कहना है कि तय समयसीमा में आवेदन नहीं करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा और दुकानें बंद भी कराई जा सकती हैं। पटना नगर निगम जल्द ही एक विशेष उड़नदस्ता टीम गठित करेगी, जो शहर में स्वच्छता मानकों को लागू कराने के लिए समय-समय पर राजधानी पटना के विभिन्न इलाकों में औचक निरीक्षण करेगी।
डिजिटल पहचान, नियमित लाइसेंसिंग और उड़नदस्ता निरीक्षण से अव्यवस्थित मांस-मछली बाजार पर नियंत्रण लगेगा और कारोबार अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकेगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन और दुकान बंद कराने जैसी सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। पटना नगर निगम ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी मंदिर, मस्जिद या अन्य धार्मिक स्थलों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों के पास मांस-मछली बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

शेरपुर-कन्हौली सिक्स लेन सड़क परियोजना में तेजी, टेंडर खुलने के बाद एजेंसी का चयन शुरू

बिहार में शेरपुर-कन्हौली सिक्स लेन सड़क परियोजना को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा इस परियोजना के लिए टेंडर खोल दिया गया है, जिसके बाद एजेंसी का चयन किया जाएगा। यह परियोजना पटना रिंग रोड की एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसका निर्माण लगभग 9 किलोमीटर लंबी सड़क पर किया जाएगा।

इस परियोजना पर लगभग 777.79 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें आधा-आध खर्च राज्य और केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। पहले यह परियोजना राज्य सरकार की तरफ से 50 प्रतिशत राशि नहीं मिलने के कारण अटकी हुई थी, लेकिन अब राज्य सरकार की सहमति के बाद राशि आवंटित कर दी गई है।

इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिसमें किसानों को जमीन का मुआवजा दिया जाएगा। एनएचएआई के अनुसार, किसानों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होने के बाद किसानों के अकाउंट में रुपये ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।

यह परियोजना पटना, सारण और वैशाली जिलों को फायदा पहुंचाएगी, जिससे यातायात की स्थिति में सुधार होगा। इसके अलावा, कन्हौली में नया बस स्टैंड बनेगा, जिसका नाम पाटली बस टर्मिनल होगा। यह बस स्टैंड लगभग 50 एकड़ की जमीन पर बनाया जाएगा, जिससे यात्रियों को सुविधा होगी।

भारतीय रेलवे की नई पहल: हाई-डिमांड स्पेशल ट्रेनें बनेंगी अमृत भारत, यात्रियों को मिलेगी आरामदायक यात्रा की सुविधा

भारतीय रेलवे ने अपनी हाई-डिमांड स्पेशल ट्रेनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की योजना बनाई है, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक सफर मिल सके। पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर, समस्तीपुर और पंडित दीनदयाल उपाध्याय समेत सभी मंडलों में चलने वाली हाई-डिमांड स्पेशल ट्रेनों में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

इस पहल का सीधा फायदा पटना से दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद जैसे शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को मिलेगा। बिना एसी श्रेणी की ये ट्रेनें आम यात्रियों के बजट में बेहतर और अपेक्षाकृत आरामदेह सफर का विकल्प देंगी, जिससे होली के दौरान घर वापसी की यात्रा और आसान हो सकती है।

भारतीय रेलवे साल भर सबसे ज्यादा भीड़ वाली स्पेशल ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके से अमृत भारत एक्सप्रेस में बदलने की तैयारी कर रहा है। इस दिशा में रेलवे ने दानापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, समस्तीपुर और धनबाद समेत कई मंडलों से प्रस्ताव मंगाए हैं, जिसके तहत करीब सात ट्रेनों की सूची तैयार की जा रही है।

इनमें पटना से मुंबई के अलावा दिल्ली, चेन्नई और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों के लिए चलने वाली हाई-डिमांड स्पेशल ट्रेनें शामिल हो सकती हैं। इस बदलाव का मकसद लंबी दूरी के यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित सफर उपलब्ध कराना है।

रेलवे सूत्रों के अनुसार, तीनों संबंधित जोन के अधिकारी मुंबई–पटना अमृत भारत एक्सप्रेस के परिचालन को लेकर आपसी तालमेल बनाने में जुटे हैं। जैसे ही प्रस्तावित टाइम टेबल को रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिल जाएगी, इन सात ट्रेनों के संचालन की आधिकारिक तारीखों का ऐलान कर दिया जाएगा।

होली के मद्देनजर रेलवे प्रशासन की कोशिश है कि मार्च के पहले पखवाड़े में ही कुछ रूट्स पर नई सेवा शुरू कर दी जाए, ताकि त्योहार पर घर लौटने वाले प्रवासी यात्रियों को भीड़ और टिकट की समस्या से राहत मिल सके।

जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी: पूंछ जिले में गुफा से हथियारों का जखीरा बरामद

जम्मू कश्मीर के पूंछ जिले में सुरक्षा बलों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारतीय सेना की रोमियो फोर्स और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) पूंछ ने मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाया, जिसमें पूंछ जिले के गनी गांव में एक गुफा से आतंकियों का हथियार और गोला-बारूद का जखीरा बरामद किया गया है। इस बरामदगी को क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, भारतीय सेना और एसओजी पूंछ सीमा से सटे इस जिले में लगातार आतंकवाद विरोधी अभियान चला रहे हैं। इसका मकसद आतंकी खतरों को निष्क्रिय किया जा सके और घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करना है। नियंत्रण रेखा के पास स्थित पूंछ जिला लंबे समय से संवेदनशील रहा है, जहां सुरक्षा बल उच्च सतर्कता बनाए रखते हैं।

हाल ही में, 22 फरवरी को भारतीय सेना ने बताया था कि जम्मू क्षेत्र में पिछले 20 दिनों के दौरान विभिन्न आतंकवाद विरोधी अभियानों में सात आतंकियों को मार गिराया गया, जिससे जम्मू-कश्मीर में आतंकी ढांचे को बड़ा झटका लगा है। इस दौरान जैश कमांडर सैफुल्लाह भी मारा गया। किश्तवाड़ में चले इस अभियान के बाद आर्मी ने कहा कि 326 दिनों तक चले इस ऑपरेशन में सफलता मिली। अब यह क्षेत्र आतंक के नेटवर्क से मुक्त है।

इसके अलावा, 4 फरवरी को बसंतगढ़ के जोफर जंगल क्षेत्र में ऑपरेशन ‘किया’ के तहत एक मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर किए गए। उसी दिन किश्तवाड़ के डिच्छर इलाके में ऑपरेशन ‘त्राशी-I’ के तहत एक अन्य आतंकी को भी निष्क्रिय किया गया। इसके बाद किश्तवाड़ में चलाए गए घेराबंदी और तलाशी अभियानों के दौरान तीन और आतंकियों को मार गिराया गया।

सुरक्षा बलों ने सुंदरबनी सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की एक कोशिश को भी नाकाम किया। इन सभी अभियानों के दौरान बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। जनवरी में शुरू किया गया ऑपरेशन ‘त्राशी-I’ किश्तवाड़ के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों चत्रू, सोनार, डोलगाम और डिच्छर पर केंद्रित रहा है।

बक्सर में शादी समारोह के दौरान मंच पर दुल्हन को मारी गोली, आरोपी फरार – समारोह में मचा हड़कंप

बिहार के बक्सर जिले से एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां शादी समारोह के दौरान मंच पर ही दुल्हन को गोली मार दी गई। घटना के बाद शादी समारोह में अफरा-तफरी मच गई और आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश जारी है।

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब जयमाला की रस्म चल रही थी और दूल्हा-दुल्हन मंच पर मौजूद थे। तभी अचानक एक युवक मंच के पास पहुंचा और दुल्हन पर गोली चला दी। गोली लगते ही दुल्हन मंच पर गिर पड़ी, जिससे वहां मौजूद परिजन और मेहमानों में चीख-पुकार मच गई।

घटना के तुरंत बाद आरोपी वहां से भाग निकला। घायल दुल्हन को आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

प्राथमिक जांच में प्रेम प्रसंग का मामला सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि आरोपी युवक दुल्हन को पहले से जानता था और शादी से नाराज था। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि गोली चलने के बाद मंच पर भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है और लोग इधर-उधर भागने लगते हैं।

स्थानीय पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा और पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: टीएमसी ने शुभेंदु अधिकारी पर साधा निशाना, भाजपा को भी घेरा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज होती जा रही है। सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। टीएमसी ने शुभेंदु पर ‘नफरत की राजनीति’ करने का आरोप लगाया है और उन्हें ‘राजनीति में जहर घोलने वाला चेहरा’ बताया है।

टीएमसी के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा में शामिल होने के बाद से लगातार सांप्रदायिक और विभाजनकारी बयान देते रहे हैं। उन्होंने शुभेंदु के पुराने बयानों और घटनाओं का हवाला देते हुए उन्हें ‘राजनीति में जहर घोलने वाला चेहरा’ बताया है। टीएमसी ने शुभेंदु पर आरोप लगाया है कि उन्होंने फरवरी 2024 में एक सिख अधिकारी को ‘खालिस्तानी’ कहा, मार्च 2025 में मुस्लिम विधायकों को विधानसभा से बाहर करने संबंधी टिप्पणी की, और जुलाई 2025 में ‘जय बांग्ला’ बोलने वाले एक व्यक्ति को धमकी दी।

इसके अलावा, टीएमसी ने शुभेंदु अधिकारी पर पुलिस अफसर पर जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दिसंबर 2025 में कथित तौर पर धार्मिक आधार पर हमले के आरोपियों को सम्मानित करने और फरवरी 2026 में धर्म परिवर्तन से जुड़े बयान देने के लिए भी शुभेंदु अधिकारी की आलोचना की है।

टीएमसी ने भाजपा पर भी निशाना साधा है और कहा है कि वह ऐसे बयानों पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें राजनीतिक संरक्षण देती है। रूलिंग पार्टी ने इसे बंगाल की ‘मां-माटी-मानुष’ की एकता और सामाजिक ताने-बाने पर हमला बताया है। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आयी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति तेज हो सकती है। बंगाल में 2026 का चुनाव सिर्फ सत्ता का संघर्ष नहीं, विचारधारा और सामाजिक संतुलन की भी परीक्षा बनता दिख रहा है।

जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई: उपमुख्यमंत्री के भाई के आवास पर एसीबी की छापेमारी

जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जम्मू में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी के भाई विजय चौधरी के आवास पर छापेमारी की। यह कार्रवाई आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के मामले में की गई है, जिसमें विजय चौधरी के खिलाफ दर्ज मामले के तहत यह छापेमारी की जा रही है।

एसीबी अधिकारियों ने बताया कि उनके घर पर तड़के शुरू की गई छापेमारी में दस्तावेजों और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री की जांच की जा रही है। हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक बरामदगी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। एक अधिकारी ने कहा, ‘हम विजय चौधरी के आवास पर तलाशी ले रहे हैं। यह कार्रवाई आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के मामले में की जा रही है।’

उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने अपने भाई के आवास पर की गई छापेमारी को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया और कहा कि विजय चौधरी एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी रहे हैं और उन्होंने आतंकवाद विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सराहना और पदोन्नति देने के बजाय उनके भाई के घर एसीबी को भेज दिया गया।

इस छापेमारी के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल लंबे समय से विधानसभा में रेत, बजरी और पत्थरों के अवैध खनन का मुद्दा उठाते रहे हैं और आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार नियमों को सख्ती से लागू करने में विफल रही है। खनन मंत्री के तौर पर सुरिंदर चौधरी को भी इस मुद्दे पर लगातार आलोचना झेलनी पड़ी है। जम्मू कश्मीर में भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई के इस नए मोड़ ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

T20 World Cup 2026: हैरी ब्रूक का शतक बना इंग्लैंड की जीत का आधार, पाकिस्तान को सुपर 8 में लगातार दूसरी हार; सेमीफाइनल में पहुंची इंग्लैंड

ICC T20 World Cup 2026 के सुपर 8 चरण में खेले गए एक रोमांचक मुकाबले में इंग्लैंड ने पाकिस्तान को 2 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। 165 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने 19.1 ओवर में मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के नायक रहे कप्तान हैरी ब्रूक, जिन्होंने मात्र 50 गेंदों में विस्फोटक शतक जड़कर मैच का रुख बदल दिया। दूसरी ओर पाकिस्तान को सुपर 8 चरण में लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा, जिससे उसके सेमीफाइनल में पहुंचने की राह बेहद कठिन हो गई है।

मुकाबले का रोमांच: आखिरी ओवर तक सांसें थाम देने वाला संघर्ष

यह मुकाबला शुरुआत से ही उतार-चढ़ाव से भरा रहा। पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 165 रन बनाए। लक्ष्य बड़ा तो नहीं था, लेकिन दबाव भरे सुपर 8 मुकाबले में यह स्कोर चुनौतीपूर्ण माना जा सकता था। इंग्लैंड की शुरुआत आक्रामक रही और कप्तान ब्रूक ने पहले ही ओवर से पाकिस्तानी गेंदबाजों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

जब इंग्लैंड का स्कोर 100 के पार पहुंचा, तब तक ब्रूक पूरी तरह लय में आ चुके थे। उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट लगाए और पाकिस्तानी गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया। हालांकि अंत में इंग्लैंड ने कुछ विकेट जल्दी गंवा दिए और मैच रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया। आखिरी ओवरों में पाकिस्तान को वापसी की उम्मीद जगी, लेकिन जोफ्रा आर्चर ने मोहम्मद नवाज की गेंद पर चौका लगाकर इंग्लैंड को जीत दिला दी।

हैरी ब्रूक का तूफानी शतक: कप्तानी पारी से बदल दिया मैच

इंग्लैंड के कप्तान Harry Brook ने इस मुकाबले में असाधारण प्रदर्शन किया। उन्होंने 50 गेंदों में 100 रन बनाए, जिसमें 10 चौके और 6 छक्के शामिल थे। उनका स्ट्राइक रेट 200 का रहा, जो टी20 क्रिकेट में किसी भी कप्तान के लिए एक यादगार उपलब्धि है।

ब्रूक ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने पावरप्ले का भरपूर फायदा उठाया और पाकिस्तान के प्रमुख गेंदबाजों को निशाने पर लिया। खासकर स्पिनरों के खिलाफ उन्होंने बड़े शॉट खेलकर रनगति को तेज रखा। उनकी पारी में संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला।

हालांकि 51वीं गेंद पर वे शाहीन अफरीदी का शिकार बन गए, लेकिन तब तक इंग्लैंड जीत के बेहद करीब पहुंच चुका था। ब्रूक की यह पारी न सिर्फ मैच जिताऊ थी, बल्कि कप्तानी की जिम्मेदारी को निभाने का शानदार उदाहरण भी थी।

पाकिस्तान की गेंदबाजी: शाहीन की मेहनत, लेकिन टीम को नहीं दिला सके जीत

पाकिस्तान के तेज गेंदबाज Shaheen Shah Afridi ने 4 विकेट लेकर मुकाबले में टीम को बनाए रखने की पूरी कोशिश की। उन्होंने 4 ओवर में 32 रन देकर महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। ब्रूक का विकेट भी उनके नाम रहा, जिससे कुछ समय के लिए पाकिस्तान की उम्मीदें जगीं।

इसके अलावा मोहम्मद नवाज और उस्मान शिनवारी ने 2-2 विकेट लिए। लेकिन पाकिस्तान की गेंदबाजी में निरंतरता की कमी साफ दिखाई दी। बीच के ओवरों में रन रोकने में विफलता और डेथ ओवरों में सटीक लाइन-लेंथ की कमी टीम पर भारी पड़ी।

पाकिस्तान की बल्लेबाजी: सैम अयूब का संघर्ष, लेकिन मध्यक्रम फिर हुआ फ्लॉप

पाकिस्तान की ओर से सबसे बेहतरीन पारी सैम अयूब ने खेली। उन्होंने 45 गेंदों में 63 रन बनाए, जिसमें 7 चौके और 2 छक्के शामिल थे। उनकी पारी ने पाकिस्तान को एक सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में मदद की।

कप्तान Babar Azam ने 25 रन बनाए, जबकि फखर जमान ने भी 25 रनों का योगदान दिया। शादाब खान ने 23 रन जोड़े। लेकिन मध्यक्रम दबाव में बिखर गया। सलमान आगा, उस्मान ख्वाजा और मोहम्मद नवाज जैसे बल्लेबाज सिंगल डिजिट में आउट हो गए।

पाकिस्तान की पारी में साझेदारियों की कमी साफ झलकी। नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे, जिससे टीम बड़ी पारी की ओर बढ़ने में असफल रही। अंतिम ओवरों में तेजी लाने की कोशिश भी सफल नहीं रही।

इंग्लैंड की रणनीति: लक्ष्य का पीछा करने में माहिर टीम

इंग्लैंड की टीम इस टूर्नामेंट में लक्ष्य का पीछा करने में बेहद सफल रही है। उनकी बल्लेबाजी गहराई और आक्रामक सोच उन्हें अन्य टीमों से अलग बनाती है। इस मुकाबले में भी उन्होंने धैर्य और आक्रामकता का संतुलन बनाए रखा।

ब्रूक की पारी के अलावा अन्य बल्लेबाजों ने भी छोटी लेकिन अहम पारियां खेलीं। टीम की मानसिक मजबूती और बड़े मैचों में दबाव झेलने की क्षमता ने उन्हें जीत दिलाई।

सुपर 8 की अंकतालिका पर असर

इस जीत के साथ इंग्लैंड सुपर 8 चरण में लगातार दूसरी जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में पहुंच गया है। वहीं पाकिस्तान की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है। उन्हें अब अपने अंतिम मुकाबले में श्रीलंका के खिलाफ हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी।

पाकिस्तान का इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच बारिश के कारण ड्रा हो गया था, जिससे नेट रन रेट की स्थिति जटिल हो गई है। अब सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए पाकिस्तान को न सिर्फ जीत, बल्कि अन्य टीमों के परिणामों पर भी निर्भर रहना होगा।

जोफ्रा आर्चर का निर्णायक योगदान

इंग्लैंड के तेज गेंदबाज Jofra Archer ने भले ही बल्ले से कुछ ही रन बनाए हों, लेकिन उनके द्वारा लगाया गया अंतिम चौका मैच का निर्णायक क्षण बन गया। आर्चर ने दबाव में शांत रहते हुए जीत की औपचारिकता पूरी की।

गेंदबाजी में भी उन्होंने महत्वपूर्ण ओवर डाले और पाकिस्तान के बल्लेबाजों पर अंकुश रखा। इंग्लैंड के गेंदबाजों ने सामूहिक प्रयास से पाकिस्तान को 165 तक सीमित रखा, जो अंततः निर्णायक साबित हुआ।

पाकिस्तान के सामने चुनौतियां

पाकिस्तान की टीम को अपनी बल्लेबाजी क्रम पर गंभीरता से विचार करना होगा। शीर्ष क्रम पर निर्भरता और मध्यक्रम की विफलता टीम के लिए चिंता का विषय है। इसके अलावा डेथ ओवरों में गेंदबाजी की रणनीति में सुधार की जरूरत है।

टीम को अगले मैच में मानसिक रूप से मजबूत होकर उतरना होगा। सुपर 8 जैसे बड़े मंच पर छोटी गलतियां भी भारी पड़ती हैं, और पाकिस्तान को अब कोई चूक करने की गुंजाइश नहीं है।

इंग्लैंड का आत्मविश्वास चरम पर

इंग्लैंड की टीम ने इस टूर्नामेंट में संतुलित प्रदर्शन किया है। कप्तान ब्रूक की आक्रामक कप्तानी और खिलाड़ियों का सामूहिक योगदान टीम को खिताब का प्रबल दावेदार बना रहा है।

उनकी बल्लेबाजी में गहराई, गेंदबाजी में विविधता और फील्डिंग में चुस्ती उन्हें अन्य टीमों से आगे रखती है। सुपर 8 में लगातार जीत ने उनका आत्मविश्वास और मजबूत कर दिया है।

निष्पक्ष चुनाव की ओर बड़ा कदम: Election Commission of India ने मतदान दिवस पर पुलिस तैनाती के लिए जारी किए नए दिशा-निर्देश

भारत में लोकतंत्र की मजबूती और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए Election Commission of India (ईसीआई) ने मतदान दिवस पर राज्य पुलिस बल की तैनाती को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। वर्ष 2026 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि अब राज्य पुलिसकर्मियों की तैनाती की रैंडमाइजेशन (यादृच्छिक चयन) प्रक्रिया केंद्रीय पुलिस प्रेक्षकों की उपस्थिति में की जाएगी।

यह निर्णय चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, निष्पक्षता सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार के संभावित पक्षपात या प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। आयोग का मानना है कि मतदान के दिन सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता सीधे तौर पर चुनाव की साख से जुड़ी होती है, इसलिए पुलिस बल की तैनाती पूरी तरह पारदर्शी और निगरानी में होनी चाहिए।


चुनाव आयोग का निर्देश: राज्यों को भेजा गया आधिकारिक पत्र

चुनाव आयोग ने इस संबंध में सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) और पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) को आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में नई प्रक्रिया का विस्तार से उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से West Bengal सहित सभी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इन नए नियमों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए।

पत्र में कहा गया है कि अब राज्य पुलिस बल की तैनाती की रैंडमाइजेशन प्रक्रिया संबंधित जिलों में नियुक्त केंद्रीय पुलिस प्रेक्षकों की मौजूदगी में संपन्न होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी स्तर पर स्थानीय प्रभाव या दबाव के कारण पुलिसकर्मियों की तैनाती प्रभावित न हो।


क्या है रैंडमाइजेशन प्रक्रिया और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

चुनाव के दौरान पुलिस बल की तैनाती एक संवेदनशील विषय होता है। यदि किसी पुलिसकर्मी को उसके गृह जिले या परिचित क्षेत्र में तैनात किया जाता है, तो निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में रैंडमाइजेशन प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:

  • पुलिसकर्मी अपने गृह जिले में तैनात न हों
  • स्थानीय राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव से मुक्त रहें
  • मतदान केंद्रों पर निष्पक्ष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो
  • मतदाताओं में भरोसा कायम रहे

अब तक यह प्रक्रिया जिला पुलिस प्रमुखों द्वारा की जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत इसे केंद्रीय पुलिस प्रेक्षकों की निगरानी में अंजाम दिया जाएगा। इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों में वृद्धि होगी।


2026 के विधानसभा चुनावों में होगा पहला बड़ा परीक्षण

आगामी 2026 विधानसभा चुनावों में इन नए दिशा-निर्देशों का पहला व्यापक परीक्षण देखने को मिलेगा। जिन राज्यों में चुनाव संभावित हैं, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • West Bengal
  • Kerala
  • Tamil Nadu
  • Puducherry
  • Assam

सूत्रों के अनुसार, इन राज्यों में अप्रैल माह के आसपास चुनाव होने की संभावना है। ऐसे में आयोग की यह नई व्यवस्था चुनावी माहौल को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।


केंद्रीय बलों की भी होगी व्यापक तैनाती

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि राज्य पुलिस और राज्य सशस्त्र पुलिस के अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की भी व्यापक तैनाती की जाएगी। इन बलों की जिम्मेदारी होगी:

  • मतदान केंद्रों की सुरक्षा
  • संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में गश्त
  • कमजोर एवं भयभीत मतदाताओं की सुरक्षा
  • स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी, जहां ईवीएम सुरक्षित रखी जाती हैं
  • कानून-व्यवस्था बनाए रखना

ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की सुरक्षा को लेकर भी आयोग विशेष सतर्कता बरत रहा है, ताकि मतदान के बाद किसी भी प्रकार की शंका या विवाद की गुंजाइश न रहे।


पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में सशक्त कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चुनावी सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। पिछले कुछ चुनावों में सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय पुलिस प्रेक्षकों की निगरानी में रैंडमाइजेशन प्रक्रिया से कई तरह की आशंकाओं को दूर किया जा सकेगा।

इस निर्णय से निम्नलिखित लाभ संभावित हैं:

  1. राजनीतिक निष्पक्षता की मजबूती
  2. मतदाताओं का बढ़ा हुआ विश्वास
  3. चुनावी हिंसा में संभावित कमी
  4. स्थानीय प्रभाव और दबाव से मुक्ति
  5. प्रशासनिक जवाबदेही में वृद्धि

जिला स्तर पर निर्देशों का सख्ती से पालन

चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि इन नए दिशा-निर्देशों को सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और संबंधित प्रशासनिक इकाइयों तक तत्काल प्रभाव से पहुंचाया जाए। आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रक्रिया के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रत्येक जिले में केंद्रीय प्रेक्षक की मौजूदगी में रैंडमाइजेशन की वीडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजीकरण भी किया जा सकता है, ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध रहें।


लोकतंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ता भारत

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां करोड़ों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। चुनाव आयोग का यह नया कदम दर्शाता है कि संस्था निरंतर सुधार और पारदर्शिता की दिशा में प्रयासरत है।

आगामी विधानसभा चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई व्यवस्था किस प्रकार जमीनी स्तर पर लागू होती है और इसका चुनावी माहौल पर क्या प्रभाव पड़ता है।

एक बात स्पष्ट है—मतदान दिवस पर पुलिस तैनाती की इस नई व्यवस्था से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

JEE Main Paper 2 Result 2026 घोषित: B.Arch और B.Planning टॉपर लिस्ट जारी, ऐसे करें स्कोरकार्ड डाउनलोड

देश के लाखों आर्किटेक्चर और प्लानिंग अभ्यर्थियों का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। National Testing Agency (NTA) ने JEE Main 2026 सत्र के Paper 2 (B.Arch और B.Planning) का परिणाम आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब अपना स्कोरकार्ड आधिकारिक वेबसाइट National Testing Agency के पोर्टल jeemain.nta.nic.in पर जाकर देख सकते हैं।

इस बार भी परिणाम ने कई मेधावी छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। B.Arch और B.Planning दोनों श्रेणियों में टॉप करने वाले विद्यार्थियों की सूची जारी कर दी गई है। परीक्षा 29 जनवरी 2026 को देशभर के विभिन्न शहरों में 13 भाषाओं में आयोजित की गई थी।

यह परिणाम न केवल छात्रों के भविष्य का मार्ग तय करेगा बल्कि देश के प्रमुख आर्किटेक्चर और प्लानिंग संस्थानों में प्रवेश की दिशा भी निर्धारित करेगा।


📌 B.Arch टॉपर लिस्ट 2026

JEE Main Paper 2 (B.Arch) श्रेणी में इस वर्ष निम्नलिखित छात्रों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है:

  • सूर्यतेजस एस (Suryathejas S)
  • सुषिलनारायण एस (Sushilanarayan S)
  • सारा शकील अख्तर बोहरी (Sarah Shaqeel Akhtar Bohari)
  • तेल्लुरी श्रेयस रेड्डी (Telluri Shreyas Reddy)
  • आर्यन मदान (Aryan Madan)

इन छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक NTA स्कोर प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। B.Arch परीक्षा में गणित, एप्टीट्यूड और ड्रॉइंग टेस्ट जैसे अनुभाग शामिल होते हैं, जिसमें रचनात्मकता और विश्लेषणात्मक क्षमता दोनों की परीक्षा होती है।


📌 B.Planning टॉपर लिस्ट 2026

B.Planning श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले छात्र हैं:

  • अर्नब शुक्ला (Arnab Shukla)
  • नागदेव एमजी (Nagadev MG)
  • गौरीशंकर (Gaurishankar)
  • परमार मृगांश हरीशचंद्र (Parmar Mrugansh Harishchandra)
  • कुम्भा जीवन साई राम (Kumbha Jeevan Sai Ram)

इन अभ्यर्थियों ने प्लानिंग विषय में शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में शीर्ष रैंक हासिल की है। B.Planning परीक्षा में गणित, एप्टीट्यूड और प्लानिंग-आधारित प्रश्न शामिल होते हैं, जो शहरी विकास और संरचनात्मक योजना की समझ को परखते हैं।


📊 परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े

इस वर्ष JEE Main Paper 2 के लिए बड़ी संख्या में छात्रों ने आवेदन किया।

B.Arch (Paper 2A)

  • कुल आवेदन: 64,786
  • परीक्षा में शामिल हुए: 45,452

B.Planning (Paper 2B)

  • कुल आवेदन: 32,366
  • परीक्षा में शामिल हुए: 21,067

आंकड़ों से स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में छात्रों ने परीक्षा दी, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा रहा।


📝 ऐसे करें JEE Main Paper 2 रिजल्ट 2026 चेक

उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं:

  1. आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाएं।
  2. होमपेज पर “JEE Main 2026 Paper 2 Result” लिंक पर क्लिक करें।
  3. अपना आवेदन नंबर (Application Number) और जन्मतिथि (Date of Birth) दर्ज करें।
  4. लॉगिन करने के बाद आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।
  5. भविष्य के उपयोग के लिए स्कोरकार्ड डाउनलोड कर प्रिंट आउट अवश्य लें।

📌 NTA स्कोर क्या है?

NTA स्कोर एक नॉर्मलाइज्ड स्कोर होता है, जो विभिन्न शिफ्ट्स में आयोजित परीक्षा के कठिनाई स्तर को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है। इससे सभी उम्मीदवारों के प्रदर्शन की तुलना निष्पक्ष तरीके से की जाती है।

यह स्कोर अंतिम रैंक और मेरिट लिस्ट तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


🎯 काउंसलिंग और एडमिशन प्रक्रिया

JEE Main Paper 2 का परिणाम B.Arch और B.Planning कोर्सेज में प्रवेश के लिए आधार बनेगा। सफल अभ्यर्थी अब काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेंगे।

काउंसलिंग के माध्यम से छात्रों को उनके रैंक और पसंद के आधार पर विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थानों में सीट आवंटित की जाएगी।

छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे:

  • अपने दस्तावेज तैयार रखें
  • काउंसलिंग की तिथियों पर नजर बनाए रखें
  • समय पर पंजीकरण अवश्य करें

📚 JEE Main Paper 2 की परीक्षा संरचना

B.Arch (Paper 2A)

  • गणित
  • एप्टीट्यूड टेस्ट
  • ड्रॉइंग टेस्ट

B.Planning (Paper 2B)

  • गणित
  • एप्टीट्यूड टेस्ट
  • प्लानिंग-आधारित प्रश्न

यह परीक्षा छात्रों की रचनात्मकता, तार्किक क्षमता और विषयगत समझ को परखने के लिए डिज़ाइन की जाती है।


🏅 छात्रों की प्रतिक्रिया

रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों में उत्साह का माहौल है। कई टॉपर्स ने अपनी सफलता का श्रेय नियमित अभ्यास, मॉक टेस्ट और समय प्रबंधन को दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष प्रश्नपत्र संतुलित था और बेहतर तैयारी करने वाले छात्रों को इसका लाभ मिला।


🔍 आगे क्या?

अब छात्रों की नजर JEE Main Paper 2 की अंतिम मेरिट लिस्ट और काउंसलिंग शेड्यूल पर है। जिन छात्रों ने अच्छा स्कोर किया है, उनके लिए देश के प्रतिष्ठित आर्किटेक्चर और प्लानिंग संस्थानों के द्वार खुल गए हैं।

जो उम्मीदवार इस बार अपेक्षित परिणाम नहीं प्राप्त कर सके, उनके पास अगली परीक्षा या अन्य प्रवेश परीक्षाओं के विकल्प मौजूद हैं।


📢 महत्वपूर्ण सलाह

  • केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही रिजल्ट चेक करें।
  • किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या अफवाहों से बचें।
  • स्कोरकार्ड की हार्ड कॉपी सुरक्षित रखें।
  • काउंसलिंग से संबंधित अपडेट नियमित रूप से जांचते रहें।

UPSC ने CSE 2026 और IFS परीक्षा के आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई, अभ्यर्थियों को मिली बड़ी राहत

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2026 और भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर लाखों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। पहले आवेदन करने की अंतिम तिथि 24 फरवरी 2026 निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 27 फरवरी 2026 शाम 6:00 बजे तक कर दिया गया है। आयोग के इस फैसले से उन उम्मीदवारों को विशेष लाभ मिलेगा जो तकनीकी समस्याओं या अन्य कारणों से समय पर आवेदन नहीं कर पा रहे थे।

भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट पर आई तकनीकी दिक्कतें

इस वर्ष सिविल सेवा परीक्षा और भारतीय वन सेवा परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों की भारी संख्या में रुचि देखने को मिली। आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अंतिम तिथि के नजदीक बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन किया, जिससे सर्वर पर दबाव बढ़ गया। परिणामस्वरूप कई छात्रों को वेबसाइट धीमी चलने, पेज लोड न होने या भुगतान प्रक्रिया अटकने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in पर अत्यधिक ट्रैफिक के चलते आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हुई। अभ्यर्थियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए UPSC ने स्थिति की समीक्षा की और आवेदन की अंतिम तिथि तीन दिन आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

आयोग का मानवीय और पारदर्शी कदम

UPSC का यह कदम न केवल तकनीकी समस्या का समाधान है, बल्कि यह आयोग की पारदर्शिता और संवेदनशीलता को भी दर्शाता है। सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों युवा IAS, IPS, IFS और अन्य केंद्रीय सेवाओं में जाने का सपना लेकर इस परीक्षा में शामिल होते हैं।

ऐसे में यदि कोई उम्मीदवार केवल तकनीकी कारणों से आवेदन करने से वंचित रह जाए तो यह उसके लिए बड़ा झटका हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने अंतिम तिथि बढ़ाकर समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया है।

महत्वपूर्ण तिथियां – UPSC CSE 2026 और IFS 2026

  • अधिसूचना जारी होने की तिथि: 4 फरवरी 2026
  • आवेदन की नई अंतिम तिथि: 27 फरवरी 2026 (शाम 6:00 बजे तक)
  • प्रारंभिक परीक्षा की तिथि: 24 मई 2026

उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि किसी संभावित तकनीकी समस्या से बचा जा सके।

आवेदन प्रक्रिया: कैसे करें UPSC CSE 2026 के लिए अप्लाई

जो उम्मीदवार अभी तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, वे नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके आसानी से आवेदन कर सकते हैं:

  1. सबसे पहले UPSC की आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाएं।
  2. यदि आपने पहले वन-टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) नहीं किया है, तो पहले OTR प्रक्रिया पूरी करें।
  3. लॉगिन करने के बाद CSE 2026 या IFS 2026 के आवेदन लिंक पर क्लिक करें।
  4. अपनी व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी सावधानीपूर्वक भरें।
  5. निर्धारित प्रारूप में फोटो, हस्ताक्षर और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
  6. ऑनलाइन शुल्क का भुगतान करें (यदि लागू हो)।
  7. आवेदन फॉर्म को अंतिम रूप से सबमिट करने से पहले सभी विवरणों की जांच करें।
  8. सबमिशन के बाद कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड कर सुरक्षित रखें।

पात्रता मानदंड पर दें विशेष ध्यान

आयोग ने अभ्यर्थियों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि आवेदन करने से पहले वे आधिकारिक अधिसूचना को ध्यानपूर्वक पढ़ें। आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता, प्रयासों की संख्या और अन्य आवश्यक शर्तों को अच्छी तरह समझ लें। गलत जानकारी देने या पात्रता पूरी न होने की स्थिति में आवेदन निरस्त किया जा सकता है।

लाखों युवाओं के सपनों से जुड़ी है यह परीक्षा

सिविल सेवा परीक्षा केवल एक प्रतियोगी परीक्षा नहीं, बल्कि देश की प्रशासनिक व्यवस्था में योगदान देने का माध्यम है। IAS, IPS, IFS और अन्य केंद्रीय सेवाओं में चयनित अधिकारी देश के विकास, नीति निर्माण और प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हर साल लाखों अभ्यर्थी वर्षों की तैयारी के बाद इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में आवेदन की तिथि बढ़ने से उन उम्मीदवारों को विशेष राहत मिली है जो अंतिम समय में तकनीकी कारणों से परेशान थे।

लखनऊ में सनकी बेटे द्वारा पिता की हत्या का मामला: आरोपी ने अपना जुर्म कबूल किया और बताया कि दबाव के कारण उसने ऐसा किया

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में एक सनकी बेटे द्वारा अपने पिता की हत्या का मामला सामने आया है, जिसमें आरोपी ने अपने पिता की गोली मारकर हत्या की और शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपा दिया। यह घटना 20 फरवरी को हुई थी, जब 21 साल के अक्षत प्रताप सिंह ने अपने पिता मानवेंद्र सिंह की हत्या कर दी थी। पुलिस ने अक्षत को गिरफ्तार कर लिया है और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, अक्षत ने अपने पिता की हत्या इसलिए की थी क्योंकि वे उस पर पढ़ाई करने और नीट पास करने का दबाव बनाते थे। अक्षत ने अपने पिता को गोली मारकर हत्या की और फिर शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपा दिया। उसने शव के हाथ-पैर काट दिए और लखनऊ में अलग-अलग जगहों पर फेंक दिया, जबकि धड़ को अपने घर के में रखे एक ड्रम के अंदर छिपा दिया।

अक्षत ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल किया है और कहा है कि यह गलती हो गई। उसने कहा, “मैंने अपने पिता की हत्या कर दी और शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपा दिया। मैं जानता हूं कि यह गलत था, लेकिन मैं अपने पिता के दबाव से तंग आ गया था।” अक्षत ने आगे कहा कि वह अपने पिता के दबाव से परेशान था और उसने ऐसा किया था।

पुलिस ने अक्षत से पूछताछ की और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद कर लिया है। अक्षत के पड़ोसियों ने बताया कि वे कभी नहीं सोचते थे कि अक्षत ऐसा काम कर सकता है। मृतक मानवेंद्र सिंह के भाई ने बताया कि उन्हें अपने भतीजे पर कभी शक नहीं हुआ था, लेकिन जब उन्होंने अक्षत से बात की, तो उसने उन्हें बताया कि उसके पिता जरूरी काम से दिल्ली गए हैं और दो दिन में लौटेंगे।

मृतक मानवेंद्र सिंह आर्थिक रूप से मजबूत थे और उनके 4 पैथोलॉजी और शराब की तीन दुकानें थीं। यह घटना लखनऊ में एक सनसनी फैला देने वाली है और पुलिस ने अक्षत को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने अक्षत के खिलाफ मामला दर्ज किया है और आगे की जांच जारी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय इज़राइल दौरा: रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी

भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi 25 फरवरी से इज़राइल की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य, पश्चिम एशिया में उभरते सुरक्षा समीकरण और भारत-इज़राइल संबंधों के बढ़ते सामरिक महत्व को भी रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान यह उनका पहला इज़राइल दौरा है, जबकि पिछले नौ वर्षों में यह उनकी दूसरी यात्रा होगी। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संबंधों का विकास

भारत और इज़राइल के बीच पूर्ण राजनयिक संबंधों की स्थापना वर्ष 1992 में हुई थी। हालांकि उससे पहले भी दोनों देशों के बीच अनौपचारिक संपर्क और सीमित सहयोग मौजूद था। शीत युद्ध की समाप्ति और वैश्विक राजनीतिक बदलावों के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति में व्यावहारिकता को प्राथमिकता देते हुए इज़राइल के साथ खुले तौर पर संबंध स्थापित किए।

वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक इज़राइल यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा दी। वह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्वतंत्र इज़राइल यात्रा थी। इसके बाद जनवरी 2018 में इज़राइल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा ने इस संबंध को और सुदृढ़ किया। तब से दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद, रक्षा समझौते, तकनीकी सहयोग और निवेश में निरंतर वृद्धि देखी गई है।

इस दौरे का राजनीतिक और सामरिक महत्व

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। गाज़ा में जारी संघर्ष, ईरान-इज़राइल तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता ने वैश्विक शक्तियों का ध्यान आकर्षित किया है। भारत, जो ऊर्जा आपूर्ति, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और रणनीतिक हितों के कारण इस क्षेत्र से गहराई से जुड़ा है, संतुलित और सक्रिय कूटनीति की राह पर चल रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान इज़राइल की संसद, यानी Knesset को संबोधित करेंगे। यह संबोधन दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा चुनौतियों और भविष्य की साझेदारी के दृष्टिकोण को दर्शाएगा। संसद में उनका भाषण भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं और इज़राइल के साथ गहराते संबंधों का स्पष्ट संदेश देगा।

उच्च स्तरीय वार्ताएं: नेतन्याहू और हर्ज़ोग से मुलाकात

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ व्यापक वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच पहले भी कई बार बातचीत हो चुकी है, जिसमें विशेष रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और तकनीकी साझेदारी जैसे विषय शामिल रहे हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष जून में शुरू हुए इज़राइल-ईरान तनाव के बाद दोनों नेताओं के बीच दो बार टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। इस बार की आमने-सामने की मुलाकात में पश्चिम एशिया की स्थिति, गाज़ा संकट, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर पड़ रहे प्रभाव जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी इज़राइल के राष्ट्रपति Isaac Herzog से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति से भेंट के दौरान सांस्कृतिक संबंधों, शैक्षणिक आदान-प्रदान और जनता-से-जनता के संपर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

रक्षा सहयोग: रणनीतिक साझेदारी का आधार

भारत और इज़राइल के संबंधों में रक्षा क्षेत्र एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरा है। इज़राइल भारत को अत्याधुनिक रक्षा उपकरण, ड्रोन प्रणाली, मिसाइल तकनीक और निगरानी उपकरण उपलब्ध कराता रहा है। भारत के सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में इज़राइल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान एवं विकास पर भी बल दिया गया है। भारत की स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली ‘Sudarshan Chakra’ के विकास में आधुनिक तकनीकी सहयोग पर चर्चा की संभावना है। साथ ही, भारत इज़राइल की प्रसिद्ध वायु रक्षा प्रणाली Iron Dome के कुछ तकनीकी तत्वों को समझने और संभावित रूप से अपनाने की दिशा में विचार कर रहा है।

नवंबर 2025 में भारत के रक्षा सचिव की इज़राइल यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसने रक्षा सहयोग को और मजबूती प्रदान की। इस समझौते के तहत संयुक्त उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है।

साइबर सुरक्षा और तकनीकी नवाचार

डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में सहयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। इज़राइल को स्टार्टअप नेशन के रूप में जाना जाता है और साइबर सुरक्षा, कृषि तकनीक, जल संरक्षण और मेडिकल इनोवेशन में उसकी विशेषज्ञता विश्व स्तर पर मान्य है।

भारत, जो डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर है, इज़राइल के साथ साझेदारी को और गहरा करना चाहता है। दोनों देश संयुक्त स्टार्टअप इनक्यूबेशन, रिसर्च सेंटर और नवाचार कोष स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं।

व्यापार और निवेश: बढ़ती आर्थिक साझेदारी

भारत और इज़राइल के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि हो रही है। हीरा व्यापार के अलावा अब रक्षा उपकरण, कृषि तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार हुआ है। दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी चर्चा कर रहे हैं, जिससे व्यापारिक बाधाएं कम हो सकती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान व्यापार प्रतिनिधिमंडल की बैठकें आयोजित की जाएंगी, जहां निवेश के नए अवसरों पर चर्चा होगी। विशेष रूप से हरित ऊर्जा, जल प्रबंधन, स्मार्ट सिटी और कृषि तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

कृषि और जल प्रबंधन में सहयोग

भारत के कई राज्यों में इज़राइल की सहायता से कृषि उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां आधुनिक सिंचाई तकनीक, ड्रिप इरिगेशन और उच्च उत्पादकता वाले बीजों का प्रयोग किया जा रहा है। जल संरक्षण और पुनर्चक्रण तकनीक में इज़राइल की विशेषज्ञता भारत के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है।

इस दौरे के दौरान इन परियोजनाओं के विस्तार और नई पहल शुरू करने पर भी चर्चा हो सकती है। विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए जल प्रबंधन मॉडल को अपनाने पर बल दिया जाएगा।

क्षेत्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य

पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत संतुलित कूटनीति का पालन कर रहा है। एक ओर भारत के इज़राइल के साथ गहरे संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर वह अरब देशों और ईरान के साथ भी मजबूत संबंध बनाए हुए है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की बहुआयामी विदेश नीति का उदाहरण है, जिसमें राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।

इज़राइल के साथ सहयोग से भारत की रक्षा क्षमता मजबूत होगी, वहीं तकनीकी और आर्थिक क्षेत्रों में भी प्रगति को बल मिलेगा। साथ ही, यह दौरा वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी दर्शाता है।

जनता-से-जनता संपर्क और सांस्कृतिक संबंध

भारत और इज़राइल के बीच सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आदान-प्रदान बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक इज़राइल जाते हैं, जबकि इज़राइली युवा भी भारत के विभिन्न राज्यों में यात्रा करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय से मुलाकात का कार्यक्रम भी संभावित है, जिससे प्रवासी भारतीयों के साथ संबंध और मजबूत होंगे।

भविष्य की दिशा

इस यात्रा से स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत और इज़राइल अपने संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रक्षा, तकनीक, व्यापार, कृषि और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है, जिसके माध्यम से भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को सशक्त बना रहा है। इज़राइल के साथ मजबूत साझेदारी भारत की सामरिक और आर्थिक क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

बिहार में बड़ी ट्रेन दुर्घटना टली: दरभंगा-फारबिसगंज DEMU में तोड़फोड़ की साजिश नाकाम, लोको पायलट की सतर्कता से सैकड़ों यात्रियों की जान बची

बिहार के मधुबनी जिले में दरभंगा-फारबिसगंज DEMU ट्रेन को लेकर एक बड़ी रेल दुर्घटना टल गई। लोको पायलट की सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई के चलते सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ने से बच गई। यह घटना उस समय हुई जब ट्रेन तमुरिया स्टेशन के पास पहुंचने वाली थी और पायलट की नजर अचानक पटरी पर रखे एक लोहे के गेट पर पड़ी।

पटरी पर रखा मिला लोहे का गेट

जानकारी के अनुसार, दरभंगा से फारबिसगंज की ओर जा रही DEMU ट्रेन उसी ट्रैक से गुजरने वाली थी, जहां से करीब एक घंटे पहले एक मालगाड़ी सुरक्षित गुजर चुकी थी। मालगाड़ी के गुजरने के बाद किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा लोहे का भारी गेट रेलवे ट्रैक पर रख दिया गया। यदि ट्रेन उस गेट से टकरा जाती, तो उसके पटरी से उतरने की आशंका थी, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था।

लोको पायलट ने जैसे ही ट्रैक पर गेट देखा, तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए। ट्रेन गेट से महज कुछ मीटर पहले रुक गई। इस त्वरित निर्णय ने संभावित दुर्घटना को टाल दिया। ट्रेन में सवार यात्रियों ने राहत की सांस ली और लोको पायलट की सतर्कता की सराहना की।

तोड़फोड़ की आशंका, जांच शुरू

मालगाड़ी के सुरक्षित गुजरने के बाद ट्रैक पर गेट रखा जाना तोड़फोड़ (साबोटाज) की आशंका को जन्म देता है। इस घटना ने रेलवे प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए East Central Railway के समस्तीपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ने तत्काल विशेष जांच टीम गठित की है।

इस टीम में रेल खुफिया विभाग और क्राइम ब्रांच के अधिकारी शामिल हैं। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण शुरू कर दिया है और स्टेशन मास्टर, गार्ड, लोको पायलट तथा लाइनमैन से पूछताछ की जा रही है।

रेलवे पुलिस में मामला दर्ज

घटना को लेकर दरभंगा रेल थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है। कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सहायक सुरक्षा आयुक्त ने भी मौके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि आखिर इतना भारी लोहे का गेट वहां तक कैसे पहुंचाया गया और इसे रखने के पीछे किसकी मंशा थी।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने रेलवे ट्रैक की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि लोको पायलट समय रहते गेट को नहीं देख पाते, तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते थे। रेलवे प्रशासन अब संवेदनशील रूटों पर निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा उपायों को सख्त करने पर विचार कर रहा है।

यात्रियों ने जताया आभार

ट्रेन के रुकने के बाद रेलवे कर्मियों ने ट्रैक से गेट हटाया और कुछ देर बाद ट्रेन को आगे रवाना किया गया। यात्रियों ने लोको पायलट की सूझबूझ और बहादुरी की प्रशंसा की। कई यात्रियों का कहना था कि अगर पायलट थोड़ी भी देर करते, तो बड़ा हादसा हो सकता था।

आगे की कार्रवाई

फिलहाल जांच जारी है और रेलवे प्रशासन इस घटना को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की पड़ताल कर रहा है। दोषियों की पहचान होते ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि रेलवे सुरक्षा में जरा सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

दरभंगा-फारबिसगंज रेलखंड पर टली यह बड़ी दुर्घटना लोको पायलट की सतर्कता का उदाहरण बन गई है, जिसने अपनी तत्परता से सैकड़ों जिंदगियों को सुरक्षित रखा।

होली पर बड़ी सौगात: श्रीगंगानगर से समस्तीपुर के लिए स्पेशल ट्रेन 04731/04732 का ऐलान, जानिए पूरा शेड्यूल और स्टॉपेज

होली के त्योहार पर घर लौटने वाले यात्रियों के लिए भारतीय रेल ने बड़ी राहत दी है। राजस्थान से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश जाने वाले हजारों यात्रियों की सुविधा के लिए श्रीगंगानगर से समस्तीपुर के बीच साप्ताहिक होली स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की गई है। इस विशेष ट्रेन के संचालन से त्योहार के दौरान टिकटों की भारी मांग और वेटिंग की समस्या से जूझ रहे यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

04731: श्रीगंगानगर से समस्तीपुर होली स्पेशल

Indian Railways द्वारा घोषित ट्रेन संख्या 04731 श्रीगंगानगर जंक्शन से 1 मार्च से 29 मार्च तक प्रत्येक रविवार को चलाई जाएगी। यह ट्रेन दोपहर 1:25 बजे Shri Ganganagar Junction से रवाना होगी।

ट्रेन अगले दिन शाम 6:15 बजे Chhapra Junction पहुंचेगी। इसके बाद यह ट्रेन सोनपुर, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर होते हुए रात 11:30 बजे Samastipur Junction पहुंचेगी।

प्रमुख स्टॉपेज

यह होली स्पेशल ट्रेन कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी, जिससे बड़ी संख्या में यात्रियों को सुविधा मिलेगी। प्रमुख ठहराव इस प्रकार हैं:

  • दिल्ली
  • गाजियाबाद
  • मुरादाबाद
  • बरेली
  • गोंडा
  • बस्ती
  • गोरखपुर
  • देवरिया सदर
  • सिवान

इन स्टेशनों पर रुकने से बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन बेहद उपयोगी साबित होगी।

कोच संरचना: 20 डिब्बों के साथ चलेगी ट्रेन

त्योहार के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए ट्रेन में कुल 20 कोच लगाए जाएंगे। इनमें शामिल हैं:

  • 1 एसी 2-टियर कोच
  • 2 एसी 3-टियर कोच
  • 11 स्लीपर क्लास कोच
  • 4 जनरल सेकंड क्लास कोच
  • 2 एसएलआर/डी कोच

इस कोच संरचना से विभिन्न श्रेणी के यात्रियों को अपनी सुविधा और बजट के अनुसार यात्रा का विकल्प मिलेगा।

04732: वापसी यात्रा का शेड्यूल

वापसी में ट्रेन संख्या 04732 3 मार्च से 31 मार्च तक प्रत्येक मंगलवार को चलेगी। यह ट्रेन रात 1:00 बजे Samastipur Junction से रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 12:20 बजे Shri Ganganagar Junction पहुंचेगी।

यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

होली के मौके पर राजस्थान, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग बिहार और पूर्वी यूपी अपने घर लौटते हैं। ऐसे में नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और कन्फर्म टिकट की परेशानी आम हो जाती है। इस विशेष ट्रेन के संचालन से यात्रियों को सुगम और आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि मांग और बढ़ती है तो अतिरिक्त कोच या अन्य स्पेशल ट्रेनों पर भी विचार किया जा सकता है। फिलहाल, इस होली स्पेशल ट्रेन के ऐलान से हजारों यात्रियों को राहत मिली है और वे त्योहार अपने परिवार के साथ आराम से मना सकेंगे।

त्योहार के इस अवसर पर रेलवे की यह पहल यात्रियों के लिए बड़ी सौगात साबित हो सकती है।

भारत-नेपाल सीमा पर बड़ी कार्रवाई: 3.40 करोड़ की चरस बरामद, SSB और बिहार पुलिस ने दो तस्करों को दबोचा

बिहार में नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सशस्त्र सीमा बल (SSB) और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने भारत-नेपाल सीमा पर 3.40 करोड़ रुपये मूल्य की चरस की बड़ी खेप जब्त की है। इस अभियान में दो कथित तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, बरामद चरस का कुल वजन 34.308 किलोग्राम है, जिसे 24 पैकेटों में छिपाकर लाया जा रहा था।

खुफिया सूचना पर रची गई घेराबंदी

जानकारी के मुताबिक, Sashastra Seema Bal (SSB) को नेपाल की ओर से मादक पदार्थ की तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही SSB ने स्थानीय पुलिस को अलर्ट किया और संयुक्त रूप से कार्रवाई की योजना बनाई।

टीम ने शिकारपुर गांव के शेरवा टोला इलाके के पास जाल बिछाया। इसी दौरान दो संदिग्ध व्यक्तियों को रोका गया, जिनकी तलाशी लेने पर उनके पास से भारी मात्रा में चरस बरामद हुई। इसके बाद दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जनक लाल पटेल और रमाज्ञा यादव के रूप में हुई है। दोनों आसपास के गांवों के निवासी बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक पूछताछ में यह आशंका जताई जा रही है कि वे किसी बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों की कीमत

जब्त की गई 34.308 किलोग्राम चरस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 3.40 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी खेप की बरामदगी को सीमावर्ती क्षेत्र में मादक पदार्थों के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS) के तहत मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

तस्करी नेटवर्क की जांच जारी

अधिकारियों का कहना है कि अब इस पूरे तस्करी नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि चरस कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान तक पहुंचाया जाना था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

सीमा पर बढ़ाई जाएगी चौकसी

यह संयुक्त अभियान SSB और बिहार पुलिस की सतर्कता और समन्वय का उदाहरण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा क्षेत्र में निगरानी और सख्त की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की तस्करी की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

इस बड़ी बरामदगी से नशे के अवैध कारोबार को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि यह कार्रवाई अन्य तस्करों के लिए भी कड़ा संदेश साबित होगी।

बिहार में प्रशासनिक सुधार की बड़ी पहल: नगर संशोधन विधेयक 2026 सहित चार अहम बिल पास, भर्ती प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता

बिहार में मुख्यमंत्री Nitish Kumar की सरकार ने सरकारी नियुक्तियों और प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को Bihar Legislative Assembly में चार महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक ध्वनिमत (वॉयस वोट) से पारित कर दिए गए। इन विधेयकों के जरिए भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने की कोशिश की गई है।


ग्रुप B और C पदों की भर्ती अब आयोग के जरिए

सबसे बड़ा बदलाव राज्य के बोर्डों और निगमों में होने वाली नियुक्तियों को लेकर किया गया है। अब तक इन संस्थाओं में ग्रुप B और C पदों पर भर्ती संबंधित बोर्ड या निगम स्वयं करता था, जिस पर समय-समय पर अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं।

नए प्रावधान के तहत अब इन पदों की भर्ती की जिम्मेदारी Bihar Technical Service Commission को सौंपी गई है। वहीं ग्रुप D पदों की परीक्षाएं Bihar Staff Selection Commission (BSSC) द्वारा आयोजित की जाएंगी।

संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन में कहा कि इस बदलाव से चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी तथा योग्य और मेधावी युवाओं को समान अवसर मिलेगा। इससे सरकारी नौकरियों में भाई-भतीजावाद और गड़बड़ियों पर अंकुश लगेगा।


नगर निकायों में लोकतांत्रिक व्यवस्था को बढ़ावा

Bihar Municipal Amendment Bill 2026 के तहत नगर परिषदों में स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया गया है।

पहले स्थायी समिति के सदस्य अध्यक्ष के नामांकन के आधार पर चुने जाते थे। अब यह व्यवस्था बदली गई है और सदस्यों का चयन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इससे नगर निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक सहभागी और निष्पक्ष बनेगी।


सिविल कोर्ट का नामकरण बदला

इसके अलावा Bihar Civil Court Bill 2026 भी सदन में पारित किया गया। इस विधेयक के तहत ब्रिटिश काल में स्थापित सिविल कोर्ट के नाम में बदलाव कर उसे “बिहार सिविल कोर्ट” नाम दिया गया है। यह कदम प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने और औपनिवेशिक प्रभावों को हटाने की दिशा में उठाया गया है।


प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

इन संशोधनों को राज्य में व्यापक प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी, जवाबदेह और नागरिकों के प्रति संवेदनशील बनेगी।

विशेष रूप से भर्ती प्रक्रिया में आयोग की भूमिका बढ़ने से युवाओं को पारदर्शी और मेरिट आधारित चयन प्रणाली का लाभ मिलेगा। वहीं नगर निकायों में लोकतांत्रिक चुनाव व्यवस्था लागू होने से स्थानीय शासन मजबूत होगा।


युवाओं और नागरिकों को मिलेगा लाभ

सरकार का मानना है कि इन सुधारों से सरकारी तंत्र में विश्वास बढ़ेगा और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। भर्ती में निष्पक्षता और प्रशासनिक निर्णयों में लोकतांत्रिक भागीदारी से राज्य की विकास प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, इन चार संशोधन विधेयकों का पारित होना बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

होली से पहले खुशखबरी: बिहार सरकार ने कर्मचारियों को अग्रिम वेतन देने का किया ऐलान, विपक्ष के आरोपों को दिया जवाब

होली के त्योहार से पहले बिहार के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। Nitish Kumar के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने घोषणा की है कि राज्य कर्मचारियों का वेतन होली से पहले जारी कर दिया जाएगा। मंगलवार को वित्त मंत्री Bijendra Prasad Yadav ने इस फैसले की सार्वजनिक घोषणा की।

इस ऐलान के साथ ही राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लग गया है। सरकार ने साफ किया है कि खजाना पूरी तरह सक्षम है और वेतन भुगतान में किसी प्रकार की कोई बाधा नहीं आएगी।


विपक्ष के आरोपों पर सरकार का जवाब

हाल के दिनों में Rashtriya Janata Dal (राजद) ने राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया था। नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने दावा किया था कि सरकार जल्द ही कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ हो सकती है और राज्य का खजाना खाली होने की कगार पर है।

हालांकि वित्त मंत्री ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति स्थिर है और कर्मचारियों के वेतन तथा पेंशन भुगतान में किसी तरह की कोई समस्या नहीं है। उन्होंने सभी विभागों को समय पर वेतन निर्गत करने के निर्देश भी दे दिए हैं।


कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत

सरकारी कर्मचारी संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। होली जैसे बड़े त्योहार से पहले वेतन मिलना कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे वे अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर सकेंगे, खरीदारी कर पाएंगे और यात्रा व उत्सव की तैयारियां बिना किसी आर्थिक चिंता के कर सकेंगे।

पेंशनरों को भी समय पर उनकी पेंशन मिलने से राहत मिलेगी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि कोषागार स्तर पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं ताकि भुगतान प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सके।


बाजार में बढ़ेगी रौनक, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

होली के अवसर पर वेतन का समय पर भुगतान स्थानीय बाजार के लिए भी सकारात्मक संकेत है। त्योहार के दौरान कपड़े, मिठाई, रंग-गुलाल और अन्य वस्तुओं की मांग बढ़ती है। कर्मचारियों के खातों में वेतन आने से बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ेगा, जिससे व्यापारियों को लाभ होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। अधिक खरीदारी से बिक्री और राजस्व में वृद्धि होगी, जिसका सकारात्मक प्रभाव पूरे आर्थिक तंत्र पर पड़ेगा।


सरकार ने दोहराई प्रतिबद्धता

वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और त्योहार के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की वित्तीय परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार की आर्थिक स्थिति मजबूत है और सभी दायित्व समय पर पूरे किए जाएंगे।

कुल मिलाकर, होली से पहले वेतन भुगतान का यह फैसला कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। साथ ही, यह कदम सरकार की वित्तीय प्रबंधन क्षमता और कर्मचारी कल्याण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

भागलपुर में अंधविश्वास को लेकर खूनी झड़प: 5 लोग घायल, 3 की हालत नाजुक

बिहार के भागलपुर जिले में अंधविश्वास को लेकर हुई हिंसक झड़प ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। रसीदपुर भीठ गांव में मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया, जिसमें पांच लोग घायल हो गए। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कर गहन उपचार दिया जा रहा है।

अंधविश्वास बना हिंसा की वजह

घटना रसीदपुर भीठ गांव की है, जो Bhagalpur district के अंतर्गत आता है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विवाद की जड़ अंधविश्वास से जुड़ी एक बात थी, जिसे लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए और लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

ग्रामीणों के अनुसार, आरोप-प्रत्यारोप के बीच स्थिति बेकाबू हो गई और हिंसक झड़प शुरू हो गई। इस दौरान पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

तीन की हालत गंभीर

घटना में घायल हुए लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, तीन घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है और उनका इलाज चल रहा है। चिकित्सा टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर रखे हुए है।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि विवाद की असली वजह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

समाज में व्याप्त अंधविश्वास पर सवाल

यह घटना एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास की गंभीर समस्या को उजागर करती है। ग्रामीण इलाकों में आज भी कई बार अंधविश्वास के कारण विवाद हिंसा का रूप ले लेते हैं। प्रशासन और सामाजिक संगठनों द्वारा जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

शांति बनाए रखने की अपील

स्थानीय प्रशासन ने गांव में शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून का सहारा लेने की सलाह दी गई है।

भागलपुर की यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज में वैज्ञानिक सोच और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता की भी याद दिलाती है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

NEET छात्रा मौत मामला: CBI ने जांच तेज की, पटना के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से पूछताछ

NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब जांच की कमान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने संभाल ली है और एजेंसी ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए CBI ने पटना पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है। इनमें कदमकुआं थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष (SHO), सचिव SDPO-1 डॉ. अनु कुमारी तथा रामकृष्ण नगर थाने के SHO शामिल हैं। ये सभी अधिकारी पहले इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) का हिस्सा रह चुके हैं।

शुरुआती जांच की परतें खंगाल रही CBI

सूत्रों के अनुसार, CBI अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि स्थानीय पुलिस ने शुरुआती जांच के दौरान कौन-कौन से कदम उठाए थे। एजेंसी यह जानना चाहती है कि किन-किन लोगों से पूछताछ की गई, कौन-कौन से साक्ष्य एकत्र किए गए और जांच की दिशा किस आधार पर तय की गई।

बताया जा रहा है कि CBI ने इन अधिकारियों से अपने कार्यालय में अलग-अलग कमरों में पूछताछ की। प्रत्येक अधिकारी का बयान व्यक्तिगत रूप से दर्ज किया गया और तथ्यों का मिलान कर संभावित विरोधाभास या किसी प्रकार की चूक की पहचान करने का प्रयास किया गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच के शुरुआती चरण में कोई अहम सुराग तो नजरअंदाज नहीं किया गया।

केस डायरी और जब्त सामग्री की बारीकी से जांच

CBI की टीम केस डायरी, जब्त किए गए सामान और पहले दर्ज किए गए बयानों की गहन जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि घटना के बाद पुलिस ने क्या-क्या कदम उठाए और क्या सभी संभावित एंगल पर जांच की गई थी या नहीं।

सूत्रों का कहना है कि यह पूछताछ काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। CBI यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पूरे घटनाक्रम की सटीक और निष्पक्ष पड़ताल हो। अगर जांच के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उस पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

आगे और लोगों को किया जा सकता है तलब

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में CBI और भी कई लोगों को पूछताछ के लिए बुला सकती है। जांच एजेंसी मामले से जुड़े हर पहलू को खंगाल रही है, ताकि छात्रा की मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा किया जा सके।

देशभर में चर्चा का विषय बना मामला

NEET छात्रा की मौत का मामला सामने आने के बाद से ही यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। परिजनों और आम लोगों की मांग रही है कि निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ऐसे में CBI की एंट्री के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि मामले में पारदर्शिता आएगी और सच्चाई सामने आएगी।

फिलहाल CBI की जांच पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, नए खुलासे होने की संभावना है। एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में क्या हुआ और किन परिस्थितियों में NEET छात्रा की मौत हुई।

बिहार में भ्रष्टाचार पर सख्ती: रिश्वत लेते दो सरकारी अधिकारी गिरफ्तार

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सतर्कता ब्यूरो ने मंगलवार को दो सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। ये गिरफ्तारियां सुपौल और समस्तीपुर जिलों में अलग-अलग मामलों में की गईं। ब्यूरो को अधिकारियों के खिलाफ शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद जाल बिछाकर उन्हें पकड़ लिया गया।

पहली घटना में सुपौल जिले के निर्मली नगर पंचायत में तैनात सर्वे अमीन विक्रम कुमार राम को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया। वह मरौना अंचल में पदस्थापित था और जमीन सर्वे रिपोर्ट आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग कर रहा था। खोरमा गांव के निवासी जयनारायण यादव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि रिपोर्ट प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए अमीन पैसे मांग रहा है।

दूसरी घटना में समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय अनुमंडल में आपूर्ति पदाधिकारी राजेश भगत को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उन्होंने पीडीएस दुकान संचालक राम एकबाल सिंह से लंबित खाद्यान्न जारी करने के बदले रिश्वत मांगी थी। बताया गया कि अधिकारी ने कुल 31,000 रुपये की मांग की थी। इससे पहले वह 10,000 रुपये ले चुका था और दूसरी किस्त लेते समय पकड़ा गया।

सतर्कता ब्यूरो के डीएसपी अभिषेक कुमार ने बताया कि शिकायतों की जांच के बाद आरोप सही पाए गए, जिसके बाद ट्रैप बिछाकर कार्रवाई की गई।

इन गिरफ्तारियों से सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया है। सतर्कता ब्यूरो ने दोनों मामलों में आगे की जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति और जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

3 लाख करोड़ का सफाया: सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक टूटा, निफ्टी 1% गिरा — अब किन स्तरों पर रहेगी बाजार की नजर?

भारतीय शेयर बाजार में आज भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिसके चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹3 लाख करोड़ की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। बाजार की इस तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया और आने वाले दिनों के लिए कई अहम तकनीकी स्तरों पर नजरें टिक गई हैं।

बाजार की शुरुआत से ही दबाव

कारोबार की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई। वैश्विक संकेतों में कमजोरी और एशियाई बाजारों में सुस्ती का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में ही बिकवाली हावी हो गई, जिससे प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे फिसलने लगे। दिन भर बाजार रिकवरी की कोशिश करता रहा, लेकिन ऊपरी स्तरों पर लगातार बिकवाली के चलते मजबूती कायम नहीं रह सकी।

किन कारणों से आई इतनी बड़ी गिरावट?

विश्लेषकों के मुताबिक बाजार में आई इस तेज गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे:

  1. वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत – अमेरिकी बाजारों में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में उछाल ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
  2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली – विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजारों से लगातार पूंजी निकाली, जिससे दबाव और बढ़ गया।
  3. मुनाफावसूली – हालिया तेजी के बाद कई निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली की।
  4. आईटी और बैंकिंग शेयरों में गिरावट – बड़े वेटेज वाले सेक्टरों में बिकवाली से सूचकांकों पर ज्यादा असर पड़ा।

सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

बीएसई सेंसेक्स दिन के दौरान 1000 अंकों से ज्यादा टूट गया और अंत में भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी भी लगभग 1% फिसलकर महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के पास पहुंच गया।

निफ्टी के लिए 22,000-21,900 का स्तर अहम सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो अगला मजबूत सपोर्ट 21,700 के आसपास माना जा रहा है। वहीं ऊपर की ओर 22,300-22,400 का स्तर अब रेजिस्टेंस बन सकता है।

सेक्टरवार प्रदर्शन

  • आईटी सेक्टर: डॉलर की मजबूती और वैश्विक मांग को लेकर चिंता के चलते आईटी शेयरों में दबाव रहा।
  • बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं: बड़े निजी बैंकों में बिकवाली से बैंक निफ्टी भी नीचे आया।
  • ऑटो और मेटल: वैश्विक मांग और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर दिखा।
  • एफएमसीजी: रक्षात्मक सेक्टर होने के कारण अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की गई।

झारखंड बजट 2026-27: 1.58 लाख करोड़ का ऐतिहासिक प्रावधान, केंद्र से 16 हजार करोड़ बकाया का आरोप; सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और ग्रामीण विकास पर हेमंत सरकार का बड़ा दांव

झारखंड विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1 लाख 58 हजार 560 करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विकास, सामाजिक न्याय और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा। यह उनका लगातार दूसरा बजट है। बजट पेश करने से पहले उन्होंने पारंपरिक प्रक्रिया के तहत लोकभवन जाकर राज्यपाल संतोष गंगवार को बजट की प्रति सौंपी और उसके बाद सदन में बजट भाषण दिया।

अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि झारखंड के भविष्य की दिशा तय करने वाला रोडमैप है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध, आदिवासी संस्कृति की धरोहर और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था वाले झारखंड के गठन का मूल उद्देश्य क्षेत्रीय असमानता को दूर करना, आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना और संसाधनों का संतुलित व जनहितकारी उपयोग सुनिश्चित करना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि तमाम चुनौतियों और केंद्र से अपेक्षित आर्थिक सहयोग नहीं मिलने के बावजूद हेमंत सरकार ने हिम्मत नहीं हारी है।

केंद्र सरकार पर बकाया राशि रोकने का आरोप

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार पर गंभीर आर्थिक उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है, लेकिन केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के लगभग 5 हजार करोड़ रुपए अब तक प्राप्त नहीं हुए हैं। इसी प्रकार, विभिन्न मदों में मिलने वाले अनुदान की करीब 11 हजार करोड़ रुपए की राशि भी लंबित है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत मिलने वाली धनराशि समय पर नहीं मिलना राज्य के विकास में बाधा बन रहा है।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों से अनुदान की राशि में लगातार कटौती की जा रही है, जिससे झारखंड जैसे पिछड़े राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने माल एवं सेवा कर (GST) की दरों में बदलाव से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 4 हजार करोड़ रुपए की क्षति होने की बात कही। साथ ही, मनरेगा के परिवर्तित स्वरूप VB-G RAM G योजना में 60:40 के अनुपात में केंद्र-राज्य साझेदारी के कारण झारखंड पर हर साल लगभग 5,640 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान जताया।

उन्होंने कोल कंपनियों के पास बकाया 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपए का मुद्दा भी उठाया और कहा कि अनेक प्रयासों के बावजूद यह राशि राज्य को नहीं मिल पाई है, जिससे खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद राज्य को राजस्व संकट झेलना पड़ रहा है।

सामाजिक सुरक्षा पर सबसे बड़ा आवंटन

इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण पर जोर है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को सर्वाधिक 22 हजार 995 करोड़ 69 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों और जरूरतमंद वर्गों के लिए संचालित योजनाओं को और मजबूती देना चाहती है।

पोषण, छात्रवृत्ति, पेंशन योजनाएं, मातृत्व लाभ और बाल संरक्षण कार्यक्रमों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया है। सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा ही समावेशी विकास की नींव है।

शिक्षा क्षेत्र में बड़ा निवेश

मानव संसाधन विकास को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय निवेश किया है। प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 16 हजार 251 करोड़ 43 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए 2 हजार 564 करोड़ 45 लाख रुपए निर्धारित किए गए हैं।

सरकार का उद्देश्य विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, शिक्षकों की नियुक्ति, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा और तकनीकी संस्थानों को सुदृढ़ करना है। नई विश्वविद्यालय स्थापना, व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का विस्तार और युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूती

ग्रामीण विकास विभाग को 12 हजार 346 करोड़ 90 लाख रुपए का आवंटन कर सरकार ने गांवों में आधारभूत संरचना और रोजगार सृजन को गति देने का संकेत दिया है। ग्रामीण सड़कों, आवास योजनाओं और आजीविका कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान रहेगा।

पथ निर्माण विभाग को 6 हजार 601 करोड़ 28 लाख रुपए और ग्रामीण कार्य विभाग को 5 हजार 81 करोड़ 74 लाख रुपए दिए गए हैं। इससे सड़क संपर्क बेहतर करने और दूरदराज इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में कार्य होगा।

ऊर्जा, गृह और स्वास्थ्य को प्राथमिकता

ऊर्जा विभाग को 11 हजार 197 करोड़ 89 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना है। ग्रामीण विद्युतीकरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर जोर रहेगा।

गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग को 11 हजार 38 करोड़ 53 लाख रुपए दिए गए हैं। कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने, पुलिस आधुनिकीकरण और आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की दिशा में यह प्रावधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के लिए 7 हजार 990 करोड़ 30 लाख रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इससे सरकारी अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने, मेडिकल कॉलेजों के विस्तार और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

कृषि, पेयजल और शहरी विकास

कृषि विभाग को 4 हजार 884 करोड़ 20 लाख रुपए का प्रावधान कर किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की योजना है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को 5 हजार 194 करोड़ 53 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

नगर विकास एवं आवास विभाग को 3 हजार 919 करोड़ 40 लाख रुपए और जल संसाधन विभाग को 2 हजार 714 करोड़ 71 लाख रुपए दिए गए हैं। शहरी आधारभूत संरचना, आवास योजनाओं और सिंचाई परियोजनाओं को गति मिलेगी।

अन्य महत्वपूर्ण विभागों को भी प्रावधान

खाद्य आपूर्ति, पंचायती राज, वन एवं पर्यावरण, श्रम, उद्योग, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, भवन निर्माण और नागर विमानन जैसे विभागों को भी आवश्यकता के अनुसार बजट आवंटित किया गया है। इससे बहुआयामी विकास का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

समावेशी और सतत विकास का दावा

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा कि यह बजट सामाजिक न्याय, आर्थिक सुदृढ़ता और सतत विकास के सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि चुनौतियां अनेक हैं, लेकिन सरकार जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्ध है। संसाधनों की कमी के बावजूद योजनाओं को गति देने का संकल्प दोहराया गया।

कुल मिलाकर 1.58 लाख करोड़ रुपए का यह बजट सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, ग्रामीण विकास, ऊर्जा और आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर केंद्रित है। केंद्र से लंबित राशि का मुद्दा उठाकर सरकार ने आर्थिक अधिकारों की लड़ाई जारी रखने का संकेत दिया है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि बजट प्रावधानों का जमीनी क्रियान्वयन किस गति से होता है और राज्य की विकास यात्रा को कितना बल मिलता है।

5 Toughest Competitive Exams in India: जिन्हें पास करना है सबसे बड़ी चुनौती

भारत में उच्च शिक्षा और प्रतिष्ठित सरकारी या कॉरपोरेट नौकरियों की राह अक्सर कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं से होकर गुजरती है। हर साल लाखों छात्र अपने सपनों को साकार करने के लिए इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं, लेकिन सफल वही हो पाते हैं जो अनुशासन, रणनीति, निरंतर अभ्यास और मानसिक मजबूती के साथ तैयारी करते हैं। कुछ परीक्षाएं ऐसी हैं जिनका सिलेबस व्यापक, चयन प्रक्रिया बहु-स्तरीय और प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी होती है। इन्हें देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है।

यहां हम भारत की 5 सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं का विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं—उनकी संरचना, चयन प्रक्रिया, प्रतिस्पर्धा का स्तर और सफलता के लिए जरूरी रणनीति के साथ।

1. JEE Advanced: IIT का सपना और कठिनतम चुनौती

इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) हैं। इन संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए छात्रों को JEE Advanced परीक्षा पास करनी होती है, जो देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।

परीक्षा संरचना – JEE Advanced दो पेपरों में आयोजित की जाती है, जिनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स से प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रश्नों का पैटर्न हर साल बदल सकता है—कभी मल्टीपल करेक्ट ऑप्शन, कभी न्यूमेरिकल वैल्यू आधारित प्रश्न—जिससे अनिश्चितता बनी रहती है।

कठिनाई का स्तर

  • कॉन्सेप्ट आधारित गहरे प्रश्न
  • समय प्रबंधन की कड़ी परीक्षा
  • नेगेटिव मार्किंग
  • उच्च स्तर की तार्किक सोच की आवश्यकता

हर साल लगभग 2 लाख छात्र JEE Advanced में बैठते हैं, लेकिन सीटें सीमित होती हैं। सफलता दर बेहद कम होती है, जिससे यह परीक्षा और भी चुनौतीपूर्ण बन जाती है।

तैयारी रणनीति

  • NCERT की मजबूत पकड़
  • कॉन्सेप्ट क्लियरिटी पर फोकस
  • पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास
  • मॉक टेस्ट के जरिए टाइम मैनेजमेंट

2. UPSC Civil Services Examination: प्रशासनिक सेवा की सबसे कठिन राह

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन प्रतियोगी परीक्षा मानी जाती है। इस परीक्षा के माध्यम से IAS, IPS, IFS सहित कई उच्च प्रशासनिक सेवाओं में चयन होता है।

परीक्षा के तीन चरण

  1. प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) – वस्तुनिष्ठ प्रश्न
  2. मुख्य परीक्षा (Mains) – वर्णनात्मक प्रश्न
  3. व्यक्तित्व परीक्षण (Interview)

हर वर्ष लगभग 10-12 लाख उम्मीदवार आवेदन करते हैं, लेकिन अंतिम चयन कुछ सौ उम्मीदवारों का ही होता है।

क्यों है यह इतनी कठिन?

  • विशाल और विविध सिलेबस
  • करंट अफेयर्स की गहरी समझ
  • विश्लेषणात्मक लेखन क्षमता
  • मानसिक और भावनात्मक संतुलन

सफलता के मंत्र

  • नियमित समाचार पत्र अध्ययन
  • उत्तर लेखन का अभ्यास
  • वैकल्पिक विषय का सही चयन
  • निरंतर पुनरावृत्ति

UPSC केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल की भी परीक्षा लेती है।


3. NEET: डॉक्टर बनने की कठिन परीक्षा

मेडिकल और डेंटल कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित NEET परीक्षा भी भारत की सबसे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में शामिल है। यह परीक्षा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होती है और इसमें लाखों छात्र भाग लेते हैं।

परीक्षा पैटर्न

  • विषय: बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री
  • कुल 720 अंक
  • वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)

बायोलॉजी का वेटेज सबसे अधिक होता है, लेकिन फिजिक्स और केमिस्ट्री के कठिन प्रश्न छात्रों को चुनौती देते हैं।

प्रतिस्पर्धा का स्तर

हर साल 20 लाख से अधिक छात्र NEET में बैठते हैं, जबकि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें सीमित होती हैं।

तैयारी के लिए सुझाव

  • NCERT बायोलॉजी की गहन पढ़ाई
  • नियमित मॉक टेस्ट
  • फिजिक्स के कॉन्सेप्ट पर विशेष ध्यान
  • समयबद्ध अभ्यास

NEET में सफलता के लिए धैर्य, निरंतर अभ्यास और सटीक रणनीति आवश्यक है।


4. SSC CGL: सरकारी नौकरी की प्रतिस्पर्धी परीक्षा

ग्रेजुएट युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का बड़ा माध्यम है SSC CGL परीक्षा। इसके जरिए केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में नियुक्तियां की जाती हैं।

परीक्षा के चरण

  • टियर-1 (ऑनलाइन वस्तुनिष्ठ)
  • टियर-2 (मुख्य परीक्षा)
  • डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन

विषय

  • सामान्य ज्ञान
  • गणित
  • रीजनिंग
  • अंग्रेजी

कठिनाई क्यों?

हालांकि सिलेबस सीमित लगता है, लेकिन प्रतियोगिता बेहद कड़ी होती है। लाखों छात्र हर साल इस परीक्षा में बैठते हैं, जबकि चयन प्रतिशत बहुत कम होता है।

सफलता की रणनीति

  • बेसिक गणित और रीजनिंग मजबूत करना
  • करंट अफेयर्स की तैयारी
  • पिछले प्रश्नपत्रों का विश्लेषण
  • स्पीड और एक्यूरेसी पर काम

SSC CGL उन छात्रों के लिए सुनहरा अवसर है जो स्थायी और प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी चाहते हैं।


5. Common Admission Test: IIM में प्रवेश की कठिन कसौटी

मैनेजमेंट क्षेत्र में करियर बनाने वालों के लिए CAT परीक्षा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस परीक्षा के जरिए IIM और अन्य शीर्ष बिजनेस स्कूलों में MBA/PGDM कोर्स में प्रवेश मिलता है।

परीक्षा संरचना

  • वर्बल एबिलिटी और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन
  • डेटा इंटरप्रिटेशन और लॉजिकल रीजनिंग
  • क्वांटिटेटिव एबिलिटी

CAT का पेपर समयबद्ध और सेक्शन-वाइज होता है, जिससे छात्रों को रणनीतिक ढंग से प्रश्न हल करने होते हैं।

कठिनाई का स्तर

  • उच्च स्तरीय लॉजिकल प्रश्न
  • सीमित समय में अधिक प्रश्न
  • प्रतिशताइल आधारित मूल्यांकन

सफलता के टिप्स

  • मॉक टेस्ट का नियमित अभ्यास
  • डेटा एनालिसिस की क्षमता विकसित करना
  • रीडिंग हैबिट बढ़ाना
  • समय प्रबंधन की कला सीखना

CAT में सफलता केवल ज्ञान नहीं, बल्कि तेज सोच और सटीक निर्णय क्षमता पर निर्भर करती है।


क्यों कठिन हैं ये परीक्षाएं?

इन सभी परीक्षाओं की कुछ समान विशेषताएं हैं जो इन्हें कठिन बनाती हैं:

  • भारी प्रतिस्पर्धा – लाखों उम्मीदवार, सीमित सीटें
  • विस्तृत सिलेबस – बहु-विषयक अध्ययन
  • बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया
  • उच्च मानसिक दबाव
  • लंबी तैयारी अवधि

इन परीक्षाओं में सफलता केवल बुद्धिमत्ता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि निरंतर अभ्यास, आत्मविश्वास, समय प्रबंधन और मानसिक संतुलन पर भी आधारित होती है।

मेरठ में दिल दहला देने वाला हादसा: नमाज पढ़ने गए पिता के घर में लगी आग, जुड़वां बेटियों समेत 5 बच्चों सहित 6 की जिंदा जलकर मौत

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में सोमवार देर शाम एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया। लिसाड़ीगेट थानाक्षेत्र के किदवई नगर स्थित सुराही वाली मस्जिद के पास एक दो मंजिला मकान में अचानक भीषण आग लग गई। इस आग में एक ही परिवार के छह लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई। मृतकों में दो महिलाएं और पांच बच्चे शामिल थे, जिनमें छह माह की जुड़वां बेटियां भी थीं। परिवार का मुखिया उस समय नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद गया हुआ था। जब तक वह लौटता, तब तक उसका पूरा संसार राख में तब्दील हो चुका था।

नमाज के दौरान मचा कोहराम

घटना सोमवार देर शाम की है। कपड़ा कारोबारी इकबाल उर्फ आसिम अपने भाई फारुख के साथ पास की मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे। घर में उनकी पत्नी रुखसार (30 वर्ष), मां अमीर बानो (55 वर्ष) और पांच बच्चे मौजूद थे। बच्चे घर के भीतर खेल रहे थे और महिलाएं रसोई में खाना बनाने में व्यस्त थीं। इसी दौरान अचानक मकान में आग भड़क उठी।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले घर की ऊपरी मंजिल से धुआं उठता दिखाई दिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और लपटें खिड़कियों से बाहर आने लगीं। आसपास के लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो शोर मचाया और तुरंत पुलिस व फायर ब्रिगेड को सूचना दी।

संकरी गलियों ने बढ़ाई मुश्किल

लिसाड़ीगेट क्षेत्र घनी आबादी और संकरी गलियों वाला इलाका है। आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं, लेकिन गली इतनी संकरी थी कि दमकल वाहन सीधे मकान तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में फायर फाइटर्स को पड़ोसी मकानों की छतों के रास्ते अंदर प्रवेश करना पड़ा।

करीब 30 मिनट तक घर के अंदर फंसे लोग लपटों और धुएं के बीच जिंदगी की जंग लड़ते रहे। सामने वाले मकान से सीढ़ी लगाकर राहत दल ने अंदर प्रवेश किया और एक-एक कर सभी को बाहर निकाला। हालांकि तब तक आग बहुत फैल चुकी थी और अधिकांश लोग गंभीर रूप से झुलस चुके थे।

अस्पताल में टूटा परिवार

घायलों को तत्काल शहर के अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद रुखसार और पांचों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। मृत बच्चों में महविश (12 वर्ष), हम्माद (4 वर्ष), अद्दस (3 वर्ष) और छह-छह माह की जुड़वां बेटियां नाबिया और इनायत शामिल थीं। बताया गया कि नाबिया और इनायत इकबाल और रुखसार की जुड़वां बेटियां थीं, जबकि महविश और हम्माद इकबाल के भाई फारुख के बच्चे थे।

इकबाल की मां अमीर बानो और एक पड़ोसी गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों का अस्पताल में इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल में मोहल्ले के लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई स्तब्ध और शोकाकुल नजर आया।

पिता का रो-रोकर बुरा हाल

जब मस्जिद में नमाज पढ़ रहे इकबाल को आग की सूचना मिली तो वे बदहवास हालत में घर की ओर दौड़े। मौके पर पहुंचते ही उन्होंने अपने घर को आग की लपटों में घिरा देखा। परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला जा रहा था। पत्नी और बच्चों की हालत देखकर वे फूट-फूटकर रोने लगे। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन उनका दुख शब्दों से परे था।

मोहल्ले के लोगों के अनुसार इकबाल मेहनती कारोबारी थे। वे कपड़े तैयार कराकर ऑर्डर पर दूसरे शहरों में आयोजित प्रदर्शनियों में बेचते थे। घर में बड़ी मात्रा में कपड़ा रखा हुआ था। संभावना है कि कपड़ों के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया।

आग की वजह पर संशय

पुलिस की शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई गई है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस सिलेंडर में लीकेज के चलते आग भड़की। फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। घर में कपड़े का स्टॉक होने के कारण आग ने तेजी से फैलकर पूरे मकान को चपेट में ले लिया।

करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। दमकल कर्मियों ने छतों के रास्ते अंदर जाकर आग बुझाने का काम किया। आग इतनी भीषण थी कि दीवारें तक झुलस गईं और पूरा घर काला पड़ गया।

प्रशासन और जनप्रतिनिधि पहुंचे

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे। डीएम वीके सिंह, एसएसपी अविनाश पांडे, डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने हालात का जायजा लिया। सिवाल खास के विधायक गुलाम मोहम्मद भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।

मातम में डूबा इलाका

इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरा किदवई नगर शोक में डूब गया है। जिस घर से कुछ घंटे पहले बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। पड़ोसियों की आंखों में आंसू हैं और हर कोई इस त्रासदी से स्तब्ध है। लोग बार-बार यही सवाल कर रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।

मोहल्ले के बुजुर्गों का कहना है कि संकरी गलियों और पुराने मकानों में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अगर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर मकान तक पहुंच पातीं, तो शायद कुछ जानें बचाई जा सकती थीं।

रांची-दिल्ली एयर एंबुलेंस हादसा: 8 लाख जुटाकर बुक की उड़ान, 23 मिनट बाद जंगल में क्रैश; बर्न मरीज समेत 7 की दर्दनाक मौत

झारखंड के चतरा जिले में सोमवार शाम एक दिल दहला देने वाली त्रासदी सामने आई, जब रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस सिमरिया थाना क्षेत्र के कसियातु जंगल में क्रैश हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में गंभीर रूप से झुलसे मरीज, उनकी पत्नी और भांजा, दो पायलट, एक डॉक्टर और एक पैरामेडिक शामिल हैं। यह हादसा न सिर्फ सात जिंदगियों का अंत है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, एयर मेडिकल सेवाओं और आपातकालीन प्रबंधन पर भी कई सवाल खड़े कर गया है।

छह दिन पहले झुलसे थे संजय कुमार

मृतक संजय कुमार (41) पलामू जिले के चंदवा निवासी व्यवसायी थे। छह दिन पहले उनके लाइन होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान उनका पैर फिसल गया और वे लपटों की चपेट में आ गए। वे 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। पहले उन्हें स्थानीय स्तर पर इलाज दिया गया, फिर रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल के सीईओ अनंत सिन्हा के अनुसार, संजय को 16 फरवरी को गंभीर हालत में भर्ती किया गया था। इलाज जारी था, लेकिन उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी। बेहतर इलाज के लिए परिवार ने उन्हें दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया। सड़क मार्ग से ले जाना जोखिम भरा था, इसलिए एयर एंबुलेंस का विकल्प चुना गया।

साढ़े सात लाख जुटाने की जद्दोजहद

संजय के बड़े भाई विजय कुमार ने बताया कि एयर एंबुलेंस के लिए 7.5 लाख रुपए का इंतजाम करना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, फिर भी रिश्तेदारों और परिचितों से मदद लेकर रकम जुटाई गई। शुरुआत में 2.50 लाख रुपए कम पड़ गए तो विमान कंपनी ने उड़ान भरने से मना कर दिया। आरोप है कि पूरी रकम मिलने के बाद ही उड़ान की अनुमति दी गई।

परिजन चंदवा लौटे, किसी परिचित से पैसे उधार लिए और फिर रांची पहुंचकर शेष राशि दी। इसके बाद ही विमान ने उड़ान भरी। यह परिवार के लिए उम्मीद की उड़ान थी, लेकिन किसे पता था कि यह अंतिम सफर बन जाएगा।

उड़ान के 23 मिनट बाद संपर्क टूटा

एयर एंबुलेंस ने शाम 7:11 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी। 7:34 बजे कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से उसका संपर्क टूट गया। रात 8:05 बजे रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर सक्रिय किया गया। कुछ ही देर बाद जंगल में विमान क्रैश होने की सूचना मिली।

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 7:45 बजे जंगल की ओर से जोरदार धमाके की आवाज आई। तेज हवा और बारिश के कारण लोग तुरंत मौके पर नहीं पहुंच सके। बाद में मलबा कसियातु जंगल में मिला।

खराब मौसम की आशंका

सोमवार शाम झारखंड में अचानक मौसम बिगड़ गया था। तेज हवाएं और भारी बारिश शुरू हो गई थी। शुरुआती रिपोर्ट में खराब मौसम को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि विमान अपने निर्धारित मार्ग से दाईं ओर डायवर्ट हो गया था और रास्ता भटक गया।

हालांकि, तकनीकी खराबी, पायलटिंग एरर या नेविगेशन सिस्टम की विफलता जैसे अन्य कारणों की भी जांच की जा रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीम द्वारा विस्तृत जांच की संभावना जताई गई है।

कौन-कौन थे सवार?

हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल हैं:

  • कैप्टन विवेक
  • कैप्टन सबराजदीप
  • मरीज संजय कुमार
  • उनकी पत्नी अर्चना देवी
  • भांजा ध्रुव कुमार
  • डॉ. विकास कुमार गुप्ता
  • पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा

इन सातों की मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। संजय के दो बेटे शुभम (17) और शिवम (13) अब अनाथ जैसे हालात में हैं। परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत ने रिश्तेदारों को तोड़ कर रख दिया है।

स्वास्थ्य मंत्री का बयान

हादसे के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी चतरा पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “अगर झारखंड में बेहतर अस्पताल होते तो हमें मरीज को बाहर नहीं भेजना पड़ता।” उन्होंने राज्य में एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने की इच्छा जताई और कहा कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना समय की जरूरत है।

उन्होंने हादसे की उच्च स्तरीय जांच कराने और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

मुआवजे की मांग

चतरा विधायक जर्नादन पासवान ने इस घटना को मर्माहत करने वाली त्रासदी बताया और सरकार से मुआवजे की मांग की। वहीं सांसद कालीचरण सिंह ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा देने की अपील की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों की भी कहानी है। यदि राज्य में उन्नत बर्न यूनिट और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं होतीं, तो शायद मरीज को बाहर भेजने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

कई सवाल बाकी

यह हादसा कई गंभीर प्रश्न छोड़ गया है:

  • क्या खराब मौसम के बावजूद उड़ान की अनुमति देना सही था?
  • क्या एयर एंबुलेंस कंपनी ने सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया?
  • क्या आपातकालीन मेडिकल ट्रांसपोर्ट के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश मौजूद हैं?
  • क्या आर्थिक दबाव में उड़ान भरना जोखिम भरा निर्णय साबित हुआ?

जांच के बाद ही इन सवालों के जवाब मिल पाएंगे। फिलहाल सात परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल चुकी है।

स्मार्ट राशन वितरण और एआई आधारित संवाद: भारत की जनकल्याणकारी योजनाओं में तकनीकी क्रांति

भारत में जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक नई क्रांति का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। हाल ही में आयोजित AI India Impact Summit में दो अत्याधुनिक तकनीकों – “अन्नपूर्णा” (स्मार्ट पीडीएस मशीन) और “आशा” (एआई संचालित वॉयस सिस्टम) – ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इन दोनों नवाचारों का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और सरकारी सर्वे प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, तेज़ और भरोसेमंद बनाना है।


अन्नपूर्णा: सटीक और पारदर्शी राशन वितरण की स्मार्ट मशीन

“अन्नपूर्णा” एक उन्नत स्मार्ट मशीन है, जिसे विशेष रूप से पीडीएस दुकानों के लिए विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न सटीकता के साथ उपलब्ध कराना है।

यह मशीन स्वचालित रूप से तय मात्रा में अनाज वितरित करती है, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना समाप्त हो जाती है। पारंपरिक प्रणाली में अक्सर वजन की गड़बड़ी, हेराफेरी या अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती थीं, लेकिन अन्नपूर्णा मशीन इन समस्याओं का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है।

इसमें लगी डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से वितरण से संबंधित सभी आंकड़े रियल-टाइम में दर्ज और प्रदर्शित होते हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि किसी भी प्रकार की अनियमितता या लीकेज को रोका जा सकता है।

समिट के दौरान इसके डेमो में दिखाया गया कि यह मशीन कम समय में अधिक संख्या में लाभार्थियों को सेवा देने में सक्षम है। इससे पीडीएस दुकानों पर लगने वाली लंबी कतारों में कमी आएगी और वितरण प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनेगी।


आशा: संवाद को आसान बनाने वाला एआई आधारित वॉयस सिस्टम

“आशा” एक अत्याधुनिक एआई संचालित वॉयस प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य नागरिकों और सरकारी तंत्र के बीच संवाद को मजबूत बनाना है।

यह सिस्टम राशन वितरण के 24 से 48 घंटे के भीतर लाभार्थियों को फोन कॉल करता है। खास बात यह है कि यह स्थानीय भाषाओं में बातचीत करने में सक्षम है और स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक का उपयोग करता है।

आशा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी “इंटेलिजेंट इंटेंट डिटेक्शन” क्षमता है, जो लाभार्थी की बात को समझकर स्वतः अगला प्रश्न तैयार करती है या आवश्यक कार्रवाई का सुझाव देती है। इससे सर्वेक्षण और फीडबैक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बन जाती है।

डेमो के दौरान यह भी दिखाया गया कि आशा लाभार्थियों को उनके नाम से संबोधित करती है, उनका अभिवादन करती है और फिर सहज संवाद के माध्यम से आवश्यक जानकारी एकत्रित करती है। इससे न केवल सरकारी सर्वे की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि नागरिकों को भी यह महसूस होता है कि उनकी आवाज़ सुनी जा रही है।


जनकल्याणकारी योजनाओं में बड़ा बदलाव

AI India Impact Summit में प्रदर्शित इन तकनीकों ने यह साबित कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत की सार्वजनिक योजनाओं को नई दिशा दे सकता है।

  • अन्नपूर्णा राशन वितरण में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करेगी।
  • आशा नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद की खाई को पाटेगी।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इन तकनीकों का प्रभाव समान रूप से देखा जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।


2027 की जंग के लिए सपा का मास्टरस्ट्रोक: अखिलेश यादव ने प्रशांत किशोर की I-PAC को सौंपी यूपी चुनाव की कमान, दिल्ली-बंगाल की सीक्रेट बैठकों के बाद बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधी चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी ने अब अपनी रणनीतिक तैयारी को नए स्तर पर पहुंचा दिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) की कंपनी Indian Political Action Committee यानी I-PAC को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अपना कैंपेन संभालने की जिम्मेदारी सौंप दी है।

यह फैसला अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई महीनों की गोपनीय बैठकों, राजनीतिक सलाह-मशविरों और राष्ट्रीय स्तर की रणनीतिक सोच का योगदान है। सूत्रों के अनुसार, इस साझेदारी की नींव दिसंबर 2025 में दिल्ली में हुई एक अहम बैठक में पड़ी, जहां अखिलेश और पीके के बीच लंबी चर्चा हुई। इसके बाद जनवरी 2026 में जब अखिलेश पश्चिम बंगाल दौरे पर गए, तब वहां भी दोनों के बीच विस्तार से रणनीति पर मंथन हुआ।

दो मुख्यमंत्रियों की सलाह पर हुआ बड़ा निर्णय

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अखिलेश यादव को I-PAC की सेवाएं लेने की सलाह दी थी। दोनों ही नेताओं की चुनावी सफलताओं में पीके की टीम की भूमिका पहले से चर्चित रही है।

बताया जा रहा है कि दिल्ली और कोलकाता में हुई बैठकों के दौरान यूपी की जातीय संरचना, बूथ मैनेजमेंट, शहरी-ग्रामीण वोटर पैटर्न, युवाओं और महिलाओं के वोट बैंक, और विपक्षी रणनीति जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन बैठकों के बाद सपा नेतृत्व ने औपचारिक रूप से I-PAC को हायर करने का फैसला लिया।

नोएडा से होगी कैंपेन की औपचारिक शुरुआत

सूत्रों के मुताबिक 28 मार्च को अखिलेश यादव नोएडा से अपने चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे। यहां “PDA भागीदारी रैली” आयोजित की जाएगी। PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—यह वही सामाजिक समीकरण है, जिसे सपा 2024 के लोकसभा चुनाव में मजबूत कर चुकी है और 2027 में उसे और धार देना चाहती है।

नोएडा से शुरुआत का संदेश भी राजनीतिक है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा की मजबूत पकड़ को चुनौती देना और शहरी वोटर्स तक सीधा संदेश पहुंचाना सपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सपा का मल्टी-लेयर चुनावी मॉडल

समाजवादी पार्टी इस बार सिर्फ एक एजेंसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती। अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए अलग कंपनियों को हायर किया गया है।

  • डेटा एनालिसिस और माइक्रो-लेवल स्ट्रैटजी का काम मुंबई की शो टाइम कंसल्टिंग को सौंपा गया है।
  • सर्वे और फील्ड रिसर्च का काम कर्नाटक की एक कंपनी पूर्वी उत्तर प्रदेश से शुरू कर चुकी है।
  • बूथ मैनेजमेंट, डिजिटल आउटरीच और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी I-PAC संभालेगी।

I-PAC की टीम लखनऊ में अपना कैंप स्थापित करेगी और जिला स्तर तक संगठनात्मक ढांचा खड़ा करेगी। ऐप आधारित टूल्स, वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, व्हाट्सऐप नेटवर्क और सोशल मीडिया कैंपेन को आक्रामक बनाया जाएगा।

अखिलेश के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को 111 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा 255 सीटों के साथ सत्ता में लौटी थी। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 37 सीटें जीतकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस सफलता ने अखिलेश यादव को यह भरोसा दिया है कि सही रणनीति और बेहतर बूथ मैनेजमेंट से 2027 में सत्ता वापसी संभव है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव अखिलेश के लिए ‘करो या मरो’ जैसा है। लगातार दो विधानसभा चुनाव हारने के बाद अब तीसरी बार चूक सपा के लिए भारी पड़ सकती है। इसलिए पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय किया जा रहा है। जिलाध्यक्षों से लेकर सेक्टर प्रभारी तक, सभी से रिपोर्ट ली जा रही है।

विपक्षी मुद्दों पर फोकस

अखिलेश यादव पिछले कुछ महीनों से कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और महंगाई जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेर रहे हैं। वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला करने से भी पीछे नहीं हट रहे।

सपा का मानना है कि शहरी मध्यम वर्ग, बेरोजगार युवा और किसान वर्ग में असंतोष है, जिसे चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है। I-PAC इन मुद्दों को डेटा के आधार पर क्षेत्रवार रणनीति में बदलेगी।

कौन हैं प्रशांत किशोर?

प्रशांत किशोर भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित चुनावी रणनीतिकारों में से एक रहे हैं। 2011 में संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोड़कर उन्होंने भारतीय राजनीति में कदम रखा।

  • 2014 में उन्होंने भाजपा के लिए रणनीति तैयार की, जिसमें नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत हुई।
  • 2015 में बिहार में नीतीश कुमार की जीत में भूमिका निभाई।
  • 2016 में पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए काम किया।
  • पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन की चुनावी सफलता में भी उनकी कंपनी की अहम भूमिका रही।

हालांकि हाल के वर्षों में पीके ने I-PAC से दूरी बनाकर बिहार में अपनी राजनीतिक पहल “जन सुराज” शुरू की है। 2025 के बिहार चुनाव में उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि संगठन निर्माण पर ध्यान दिया।

I-PAC अब प्रतीक जैन जैसे पेशेवरों के नेतृत्व में काम कर रही है, जो विभिन्न राज्यों में चुनावी कैंपेन का संचालन कर रहे हैं।

यूपी में पीके का पिछला अनुभव

उत्तर प्रदेश में पीके इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए काम कर चुके हैं। उस समय “27 साल यूपी बेहाल” का नारा दिया गया था। हालांकि बाद में सपा-कांग्रेस गठबंधन बनने के कारण रणनीति में बदलाव करना पड़ा। उस चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटें मिलीं और सपा 47 सीटों पर सिमट गई थी।

इस बार हालात अलग हैं। सपा अकेले अपने दम पर मजबूत स्थिति में है और लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन से उसका मनोबल ऊंचा है।

आगे की राह

I-PAC की एंट्री से यूपी की सियासत में नई हलचल मच गई है। भाजपा पहले से ही बूथ स्तर तक मजबूत संगठन का दावा करती रही है। ऐसे में 2027 का मुकाबला पूरी तरह हाई-टेक, डेटा-ड्रिवन और जमीनी रणनीति का होगा।

अखिलेश यादव के सामने चुनौती बड़ी है—योगी सरकार की मजबूत मशीनरी, भाजपा का कैडर और संसाधन। लेकिन सपा का मानना है कि सामाजिक समीकरण, युवाओं की नाराजगी और गठबंधन की संभावनाएं उसे बढ़त दिला सकती हैं।

2027 की जंग अभी दूर है, लेकिन सपा ने अपनी पहली चाल चल दी है। अब देखना होगा कि क्या पीके की रणनीति उत्तर प्रदेश की राजनीति का समीकरण बदल पाएगी, या फिर यह प्रयोग भी 2017 की तरह अधूरा रह जाएगा।

लखनऊ में डबल डेकर बस की खिड़की से गिरीं लाशें:पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर पलटी; 5 की मौत और 45 घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोमवार को दर्दनाक हादसा हो गया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर एक डबल डेकर बस अनियंत्रित होकर पलट गई, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई और 45 यात्री घायल हो गए। घायलों में 7 बच्चे, 12 पुरुष और 9 महिलाएं शामिल हैं। 28 गंभीर घायलों को SGPGI एपेक्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया है।

खिड़कियों से गिरे शव, दिल दहला देने वाला मंजर

हादसे के बाद सामने आए वीडियो में दिख रहा है कि जब क्रेन से बस को सीधा किया गया तो खिड़कियों से शव सड़क पर गिर पड़े। सड़क पर चारों तरफ खून बिखरा हुआ था। कई घायल और मृत यात्री खिड़कियों से लटके रहे। कुछ तस्वीरों में यात्रियों के हाथ-पैर अलग दिखाई दे रहे हैं। घटनास्थल पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल था।

बस लुधियाना (पंजाब) से मोतिहारी (बिहार) जा रही थी। हादसे के समय बस की रफ्तार 80 किमी/घंटा से अधिक बताई जा रही है। दुर्घटना के बाद ड्राइवर और क्लीनर मौके से फरार हो गए।

मृतकों की पहचान

मृतकों में बीरेंद्र (30), अंजली (8), प्रियांशु (15), एक 6 वर्षीय बच्चा और 30 वर्षीय युवक शामिल हैं। घटनास्थल से खून से सना एक छोटे बच्चे का जूता मिला, जो इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर बन गया है।

ड्राइवर का बयान और चश्मदीदों का दावा

ड्राइवर सोमपाल, निवासी नौल्था, पानीपत (हरियाणा), ने पुलिस पूछताछ में बताया कि ढाबे पर उसने हल्की शराब पी थी। उसके अनुसार एक्सप्रेस-वे पर अचानक ब्रेकर आने से बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हालांकि, जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां कोई स्पीड ब्रेकर नहीं है।
प्रत्यक्षदर्शी अंश पटेल ने बताया कि बस “सांप की तरह लहरा रही थी” और अचानक पलट गई। कुछ यात्रियों का दावा है कि ड्राइवर को झपकी आ गई थी।

प्रारंभिक जांच में बड़ी लापरवाही उजागर

1. इमरजेंसी गेट बंद
जांच में पाया गया कि इमरजेंसी गेट के सामने अतिरिक्त सीट लगा दी गई थी, जिससे आपातकालीन निकास पूरी तरह बंद था।

2. क्षमता से अधिक यात्री
बस में 16 स्लीपर और 32 सिटिंग सीट की अनुमति थी, लेकिन अंदर 43 स्लीपर बना दिए गए थे और केवल 9 सिटिंग सीट छोड़ी गई थीं। करीब 90 यात्रियों को बैठाया गया था।

3. अवैध स्ट्रक्चर और बदलाव
बस की छत पर अतिरिक्त लोहे के ढांचे लगाए गए थे और लंबाई-चौड़ाई में भी बदलाव किया गया था।

4. एक ड्राइवर से 1360 किमी का सफर
नियमों के अनुसार लंबी दूरी की बस में दो ड्राइवर होना अनिवार्य है, लेकिन यह बस करीब 1360 किमी का सफर एक ही ड्राइवर के भरोसे कर रही थी। ड्राइविंग और विश्राम के नियमों का पालन नहीं हुआ।

5. 67 चालान के बावजूद कार्रवाई नहीं
बस पर 67 चालान लंबित थे, फिर भी वह 50 से अधिक आरटीओ क्षेत्रों से होकर गुजरती रही। न पुलिस ने रोका, न परिवहन विभाग ने सख्त कार्रवाई की।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी ने बुलाई आपातकालीन कैबिनेट बैठक, अहम फैसलों पर होगी चर्चा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई है। यह बैठक राज्य सचिवालय नबान्ना सचिवालय में आयोजित की जाएगी। पिछले 10 दिनों में यह दूसरी कैबिनेट बैठक होगी। इससे पहले 17 फरवरी को मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले यह आखिरी कैबिनेट बैठक हो सकती है। ऐसे में सरकार कई महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है।

बैठक में नियुक्तियों और निवेश प्रस्तावों पर चर्चा होने की उम्मीद है। साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने और नए पद सृजित करने जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जा सकता है। माना जा रहा है कि चुनाव से पहले सरकार प्रशासनिक और विकास से जुड़े कई फैसलों को अंतिम रूप दे सकती है।

2026 के विधानसभा चुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की यह कैबिनेट बैठक राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

चुनाव नजदीक आने के साथ ही राज्य सरकार सक्रिय हो गई है और विभिन्न मोर्चों पर तैयारी तेज कर दी गई है। कैबिनेट बैठक के फैसलों पर राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि इनका सीधा असर राज्य की सियासत और जनता के हितों पर पड़ सकता है।

24 फरवरी 2026 की बिहार की टॉप 10 बड़ी खबरें: पटना CBI जांच से लेकर विधानसभा हंगामा तक, पढ़ें इस वक्त की 10 बड़ी खबरें

आज बिहार के अलग-अलग जिलों में राजनीति, उद्योग, शिक्षा, परिवहन और प्रशासन से जुड़ी कई अहम गतिविधियां देखने को मिलीं। यहां पढ़िए जिला और स्थान के अनुसार राज्य की 10 बड़ी खबरें:

1. पटना में नीट छात्रा मौत मामले में CBI जांच तेज

पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। एजेंसी ने SIT के अधिकारियों से पूछताछ की है और कई दस्तावेज जब्त किए हैं। परिवार ने पहले ही स्थानीय जांच पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद केस सीबीआई को सौंपा गया। छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। सीबीआई अब कॉल डिटेल, हॉस्टल रिकॉर्ड और कोचिंग संस्थान से जुड़े लोगों से भी पूछताछ कर रही है। आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


2. 27 फरवरी से इंटर कॉपियों का मूल्यांकन शुरू

Bihar School Examination Board ने 27 फरवरी से इंटरमीडिएट परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन की तिथि घोषित कर दी है। राज्यभर में बनाए गए केंद्रों पर शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। बोर्ड ने निर्देश दिया है कि मूल्यांकन कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। परीक्षार्थियों को मार्च अंत तक परिणाम जारी होने की उम्मीद है। बोर्ड इस बार डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग कर रहा है ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी और त्रुटिरहित रहे। शिक्षकों को समय पर केंद्रों पर पहुंचने और दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।


3. बिहार पुलिस भर्ती कैलेंडर 2026 जारी

Central Selection Board of Constable ने बिहार पुलिस भर्ती 2026 का कैलेंडर जारी कर दिया है। इसमें सिपाही और अन्य पदों पर बहाली की तिथियां शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और परीक्षा तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं। लाखों अभ्यर्थियों को इस भर्ती का इंतजार था। बोर्ड ने साफ किया है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी होगी और शारीरिक दक्षता परीक्षा सख्ती से आयोजित की जाएगी। अभ्यर्थियों को आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित अपडेट देखने की सलाह दी गई है।


4. सीमांचल दौरे पर केंद्रीय गृह मंत्री

Amit Shah तीन दिवसीय सीमांचल दौरे पर बिहार पहुंच सकते हैं। इस दौरान वे सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। अवैध घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन जैसे मुद्दों पर बैठकें प्रस्तावित हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ भी उनका संवाद कार्यक्रम तय है। राजनीतिक हलकों में इस दौरे को आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और स्थानीय स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।


5. विधानसभा में हंगामा, पोस्टरबाजी

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी विधायकों ने कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। हंगामे के बीच मार्शल को हस्तक्षेप करना पड़ा और पोस्टर जब्त किए गए। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर अनावश्यक बाधा डालने का आरोप लगाया। सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनाव को देखते हुए आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है।


6. दरभंगा रेल मार्ग पर बड़ी साजिश नाकाम

दरभंगा रेल रूट पर ट्रेन दुर्घटना की साजिश को समय रहते विफल कर दिया गया। रेलवे ट्रैक पर संदिग्ध सामग्री मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने तुरंत कार्रवाई की। बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की। इस घटना के बाद रेल सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान की जा रही है और जल्द गिरफ्तारी होगी। यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे प्रशासन सतर्क है।


7. स्कूलों के पास मांस-मछली बिक्री पर रोक की तैयारी

राज्य सरकार स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास मांस व मछली की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार निर्धारित दूरी के भीतर बिक्री की अनुमति नहीं होगी। सरकार का कहना है कि यह कदम स्वच्छता और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है। व्यापारी संगठनों ने इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की है। जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी हो सकती है।


8. घूस लेते दो सरकारी कर्मचारी गिरफ्तार

राज्य निगरानी ब्यूरो ने रिश्वत लेते हुए दो सरकारी कर्मचारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने काम कराने के एवज में पैसे की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाकर कार्रवाई की गई। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया है। सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही है और विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।


9. राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी

बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न दल अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम पर मंथन कर रहे हैं। सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव का असर आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है। सभी दल अपने समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं।


10. 24 मिनट में चार विधेयक पारित

बिहार विधानसभा में महज 24 मिनट के भीतर चार विधेयक पारित कर दिए गए। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया, जबकि सरकार ने इसे समय की बचत और प्रभावी कार्यशैली बताया। विधेयकों में प्रशासनिक सुधार और वित्तीय प्रावधान शामिल हैं। इस तेज प्रक्रिया पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है और विपक्ष ने विस्तृत चर्चा की मांग की है।

राष्ट्रपति भवन में ऐतिहासिक बदलाव: राजाजी की प्रतिमा का अनावरण, एडविन लुटियंस की मूर्ति हटाए जाने पर परपोते मैट रिडले ने जताया दुख

भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन परिसर में एक प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अशोक मंडप के समीप महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने स्वतंत्रता सेनानी और देश के प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा उस स्थान पर स्थापित की गई है, जहां पहले ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा लगी हुई थी।

इस परिवर्तन को औपनिवेशिक विरासत से जुड़े प्रतीकों की समीक्षा और भारतीय इतिहास के नायकों को प्रमुखता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


राष्ट्रपति भवन परिसर में बदला प्रतीक

राष्ट्रपति भवन, जो ब्रिटिश काल में वायसराय हाउस के रूप में निर्मित हुआ था, लंबे समय से भारत की प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था का सर्वोच्च प्रतीक रहा है। अशोक मंडप के पास स्थापित नई प्रतिमा न केवल एक स्थापत्य परिवर्तन है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत की वैचारिक दिशा को भी दर्शाती है।

राजाजी की प्रतिमा का अनावरण महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने किया गया, जो दोनों नेताओं के ऐतिहासिक संबंधों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान की याद दिलाता है।


कौन थे सी. राजगोपालाचारी?

सी. राजगोपालाचारी, जिन्हें स्नेहपूर्वक “राजाजी” कहा जाता है, स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वे स्वतंत्र भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल और पहले भारतीय गवर्नर-जनरल रहे। वे महात्मा गांधी के करीबी सहयोगी और विश्वासपात्र माने जाते थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर भेजे गए अपने संदेश में कहा कि राजाजी और महात्मा गांधी के बीच गहरा विश्वास और मित्रता का संबंध था। उन्होंने इसे औपनिवेशिक स्मृतियों से मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।


एडविन लुटियंस और नई दिल्ली का निर्माण

ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस को 1911 में भारत की नई राजधानी दिल्ली के निर्माण का दायित्व सौंपा गया था। उनके डिजाइन किए गए कई भवन आज भी नई दिल्ली की पहचान हैं, जिनमें राष्ट्रपति भवन और अन्य केंद्रीय इमारतें शामिल हैं। दिल्ली का केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र आज भी “लुटियंस दिल्ली” के नाम से जाना जाता है।

हालांकि, स्वतंत्रता के बाद से ही औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने और भारतीय पहचान को प्रमुखता देने की मांग समय-समय पर उठती रही है।


परपोते मैट रिडले ने जताया दुख

एडविन लुटियंस के परपोते मैट रिडले ने इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि उन्हें आश्चर्य और निराशा हुई कि उनके पूर्वज की प्रतिमा को हटाया जा रहा है।

हालांकि, भारत सरकार की ओर से इस निर्णय को देश की ऐतिहासिक प्राथमिकताओं के अनुरूप बताया गया है।


औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की दिशा में कदम

राजाजी की प्रतिमा की स्थापना को कई लोग औपनिवेशिक अवशेषों से मुक्ति और भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को उचित सम्मान देने की प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई स्थानों के नाम बदलने और ऐतिहासिक स्थलों को भारतीय संदर्भ में पुनर्परिभाषित करने के प्रयास हुए हैं।

राष्ट्रपति भवन परिसर में यह परिवर्तन प्रतीकात्मक रूप से यह दर्शाता है कि भारत अब अपने इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण से पुनर्स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Bihar News Live 23 February 2026: 10 बड़ी खबरें, चोरी, हत्या, राजनीति और मौसम अपडेट

पटना | 23 फरवरी 2026

पटना: विधानसभा सत्र में विपक्ष का हंगामा, कई मुद्दों पर सरकार घिरी

राजधानी पटना में सोमवार को विधानसभा सत्र के दौरान जमकर हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था, शिक्षक भर्ती और महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सदन की कार्यवाही बाधित की। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्ष के विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद अध्यक्ष को कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। सरकार की ओर से मंत्रियों ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं और कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।

शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा तेज रही। विपक्ष ने भर्ती में पारदर्शिता पर सवाल उठाए, जबकि शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि मेरिट के आधार पर नियुक्तियां की जा रही हैं। सदन में बजट सत्र को लेकर भी रणनीति बनी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए विपक्ष सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की कोशिश कर रहा है।


पूर्णिया: शराबबंदी के बावजूद छापेमारी में भारी मात्रा में शराब जब्त

पूर्णिया जिले में उत्पाद विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की। गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में गांव के एक गोदाम से सैकड़ों लीटर देसी और विदेशी शराब जब्त की गई। पुलिस ने मौके से दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्करी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों से शराब की सप्लाई होती है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, जिससे बड़े गिरोह का खुलासा हो सकता है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


मुजफ्फरपुर: सड़क हादसे में दो की मौत, परिवारों में मातम

मुजफ्फरपुर जिले में सोमवार सुबह हुए एक भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने दो लोगों को मृत घोषित कर दिया। घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे का कारण माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


गया: ठंड और बदलते मौसम से बढ़ी बीमारियां, अस्पतालों में भीड़

गया जिले में बदलते मौसम और ठंड के कारण वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सरकारी अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और ठंड से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है। डॉक्टरों के अनुसार मौसम में अचानक बदलाव के कारण बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त दवाइयों और डॉक्टरों की व्यवस्था की है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग गर्म कपड़े पहनें, संतुलित आहार लें और किसी भी लक्षण पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।


भागलपुर: गंगा का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में सतर्कता

भागलपुर में गंगा नदी के जलस्तर में हल्की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि अभी खतरे का स्तर पार नहीं हुआ है, लेकिन प्रशासन ने एहतियातन निगरानी बढ़ा दी है।

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ऊपरी इलाकों में बारिश के कारण जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है। नाविकों और मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

प्रशासन ने कहा है कि यदि जलस्तर और बढ़ता है तो राहत शिविरों की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

पूर्णिया में शराब छापेमारी के दौरान पुलिस टीम पर हमला, वाहन तोड़ा गया; 33 नामजद आरोपियों पर केस दर्ज

पूर्णिया (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद अवैध शराब कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में शनिवार को सतकोदरिया गांव में छापेमारी करने पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। हमले में पुलिस वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जबकि टीम को किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकलना पड़ा। इस मामले में पुलिस ने 33 लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सतकोदरिया गांव में अवैध रूप से शराब की बिक्री और भंडारण किया जा रहा है। सूचना के आधार पर स्थानीय थाना पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और छापेमारी शुरू की। जैसे ही पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ी, कुछ लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ ने पुलिस वाहन को भी निशाना बनाया और उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। हालात बिगड़ते देख पुलिसकर्मियों को पीछे हटना पड़ा। हालांकि, पुलिस ने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और बाद में अतिरिक्त बल की मदद से गांव में सर्च अभियान चलाया।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस घटना को गंभीरता से लिया गया है। सरकारी कार्य में बाधा डालने, हमला करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 33 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। अन्य अज्ञात लोगों की पहचान भी की जा रही है। पुलिस ने साफ किया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

उल्लेखनीय है कि बिहार में शराबबंदी कानून के तहत अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और सेवन पर सख्त प्रतिबंध है। इसके बावजूद कई इलाकों में अवैध कारोबार की शिकायतें मिलती रहती हैं। प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

📌 बिहार में शराबबंदी की पृष्ठभूमि

बिहार सरकार ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू कर रखी है। इसका उद्देश्य सामाजिक सुधार, अपराध में कमी, घरेलू हिंसा पर काबू पाना और स्वास्थ्य जोखिम घटाना है। हालांकि, अवैध शराब का कारोबार बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में जारी है। ऐसे इलाकों में शराब माफियाओं और पुलिस के बीच अक्सर संघर्ष और टकराव की घटनाएँ सामने आती हैं।

📌 अवैध शराब पर राज्यस्तरीय छापेमारी का चलन

देश के कई राज्यों में जैसे-जैसे अवैध शराब तस्करी बढ़ी है, वैसे-वैसे पुलिस की छापेमारी तेज हो गई है। उदाहरण के तौर पर:

  • झारखंड के सिराइकेला-खरसावाँ क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब की छापेमारी कर 80 लीटर शराब और 1200 किलो महुआ नष्ट किया।
  • पंजाब के जलालाबाद क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब की 6000 लीटर लाहन जब्त की थी, जिसमें तस्कर ने पुलिस पर लोहे की रॉड से हमला किया

ये उदाहरण दर्शाते हैं कि शराबबंदी लागू राज्यों में अवैध शराब के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच टकराव की घटना सामान्य होती जा रही है।

⚖️ यह घटना क्यों गंभीर है?

इस घटना की गंभीरता इसलिए भी अधिक है क्योंकि:

  1. सरकारी काम में बाधा — पुलिस की वैध कार्रवाई में बाधा उत्पन्न हुई।
  2. पुलिसकर्मी घायल — कानून प्रवर्तक को चोट लगी, जो देश के किसी भी नागरिक, कानूनी या वैधानिक काम का हिस्सा था।
  3. सरकारी संपत्ति को नुकसान — सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुआ।
  4. संभावित असामाजिक तत्वों की भूमिका — लगता है कि स्थानीय लोग भी अवैध शराब की बिक्री से जुड़े हैं।
  5. स्थानीय प्रशासन पर दबाव — ऐसे मामलों से स्थानीय प्रशासन पर जनता और आपराधिक तत्त्वों से दबाव बनता है।

Bihar Breaking News 22 February 2026: अमित शाह 25 फरवरी का आएंगे बिहार, युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी को CM नीतीश कुमार आज करेंगे सम्मानित और पटना की ताजा घटनाएं

BREAKING & MAJOR LOCAL UPDATES

बिहार में इस वक्त कई बड़ी खबरें सुर्खियों में हैं। पटना हाईकोर्ट की सख्ती, बड़े पैमाने पर सरकारी भर्ती की तैयारी, राजधानी में प्रशासनिक कार्रवाई और अपराध की घटनाओं ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। यहां पढ़िए 22 फरवरी 2026 की इस घंटे की बड़ी अपडेट।

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का दौरा: अमित शाह 25 फ़रवरी को बिहार दौरे पर रहेंगे, जहाँ सीमा सुरक्षा और प्रशासनिक मुद्दों पर उच्चस्तरीय बैठकें होंगी।
  • राज्यपाल का बयान: बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने 2002 के गुजरात घटनाओं के बारे में अपनी राय साझा की और कहा कि लोगों से बातचीत के बाद उनकी सोच बदल गई।
  • उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुंगेर पहुंचे और कांग्रेस पर निशाना साधा।
  • उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा चुनावों में NDA की संभावित जीत की बात कही।

पटना हाईकोर्ट का 28 विधायकों को नोटिस, सियासी हलचल तेज

पटना हाईकोर्ट ने बिहार की राजनीति में बड़ा हस्तक्षेप करते हुए 28 विधायकों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामों और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लेकर जारी किया गया है। अदालत ने संबंधित विधायकों से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ दायर याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर उनका पक्ष क्या है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ विधायकों ने नामांकन के दौरान अपनी संपत्ति, आपराधिक मामलों या अन्य विवरणों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया। यदि आरोप साबित होते हैं तो यह मामला न केवल व्यक्तिगत राजनीतिक करियर पर असर डालेगा, बल्कि कई सीटों पर उपचुनाव की नौबत भी आ सकती है।

राजनीतिक दलों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष ने इसे “पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम” बताया है, जबकि सत्ताधारी दल के नेताओं का कहना है कि यह राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाईकोर्ट की यह कार्रवाई चुनावी शुचिता को लेकर एक बड़ा संदेश है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है और सभी पक्षों को दस्तावेज़ों के साथ उपस्थित रहने को कहा है। आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की राजनीति में और उबाल ला सकता है।


बिहार में 60 हजार सरकारी नौकरियों की तैयारी, युवाओं में उत्साह

बिहार सरकार ने राज्य में लगभग 60 हजार सरकारी पदों पर बहाली की प्रक्रिया शुरू करने का संकेत दिया है। इसमें पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में भर्ती प्रस्तावित है, साथ ही होमगार्ड और अन्य सुरक्षा इकाइयों में भी पद सृजित किए जाएंगे।

सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है। भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस विभाग में लगभग 30 हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति की संभावना है।

इस घोषणा के बाद राज्य भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में उत्साह की लहर है। कोचिंग संस्थानों में भी हलचल बढ़ गई है। हालांकि, कुछ छात्र संगठनों ने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध और निष्पक्ष हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह भर्ती समय पर पूरी हो जाती है तो इससे न केवल बेरोजगारी दर में कमी आएगी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। सरकार जल्द ही विस्तृत अधिसूचना जारी कर सकती है।


बाढ़ (बरह) में युवक का शव मिलने से सनसनी

पटना जिले के बरह क्षेत्र में एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थिति में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने खेत के पास शव देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके से शराब की खाली बोतलें और कुछ अन्य सामान बरामद हुए हैं।

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आशंका हत्या या नशे की अधिकता से मौत की जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ रही हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

यह घटना एक बार फिर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रही है।


राजीव नगर में अवैध निर्माण पर रोक

पटना के राजीव नगर इलाके में बिहार राज्य आवास बोर्ड की जमीन पर हो रहे नए निर्माण कार्यों पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण गैरकानूनी माना जाएगा।

प्रशासनिक टीम और पुलिस बल की मौजूदगी में इलाके का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने कहा कि पहले से बने मकानों की स्थिति की भी समीक्षा की जाएगी।

स्थानीय निवासियों में इस कार्रवाई को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इसे कानून का पालन सुनिश्चित करने वाला कदम बता रहे हैं, जबकि अन्य लोग इसे देर से उठाया गया कदम मान रहे हैं।

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को मंजूरी

बिहार सरकार ने सारण जिले में प्रस्तावित सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण से उत्तर बिहार के कई जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। अनुमान है कि परियोजना पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

सरकार का दावा है कि एयरपोर्ट बनने से पर्यटन, व्यापार और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। खासकर सोनपुर मेले और आसपास के धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परियोजना समय पर पूरी होती है तो यह बिहार के विकास मानचित्र पर एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।

Stock Market News 19 February 2026 : सेंसेक्स 1,236 अंक लुढ़का, निफ्टी 25,500 के नीचे बंद — निवेशकों में बढ़ी चिंता

मुंबई, 19 फरवरी 2026। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट देखने को मिली। सप्ताह की लगातार तीन दिनों की तेजी के बाद आज बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों के दबाव के चलते बड़ी बिकवाली दर्ज की गई।

घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक — BSE Sensex और Nifty 50 — भारी गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में चौतरफा बिकवाली के कारण निवेशकों की संपत्ति में हजारों करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

📊 बाजार बंद होने के आंकड़े

  • सेंसेक्स: 1,236 अंकों की गिरावट के साथ लगभग 82,498 के स्तर पर बंद
  • निफ्टी 50: करीब 365 अंक टूटकर 25,500 के नीचे बंद
  • मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर: बड़े पैमाने पर दबाव में

आज के कारोबारी सत्र में शुरुआती बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई और दोपहर बाद बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई।

📌 गिरावट की बड़ी वजहें

1️⃣ वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत

अमेरिकी और एशियाई बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव बढ़ा।

2️⃣ कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका बढ़ी, जिससे निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

3️⃣ मुनाफावसूली

पिछले तीन सत्रों की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा बुक किया, जिससे बाजार में गिरावट तेज हो गई।

4️⃣ बढ़ती अस्थिरता (Volatility)

बाजार में अस्थिरता सूचकांक (India VIX) में बढ़ोतरी देखी गई, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है।

🏦 सेक्टरवार प्रदर्शन

आज लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए:

  • बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर में सबसे ज्यादा गिरावट
  • ऑटो सेक्टर दबाव में
  • रियल्टी और FMCG शेयर भी कमजोर
  • आईटी सेक्टर में सीमित गिरावट

बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) नकारात्मक रही, यानी गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से अधिक रही।

🚀 टॉप गेनर (Nifty 50)

  1. Infosys – +1.85%
  2. Tata Consultancy Services – +1.42%
  3. HCL Technologies – +1.10%
  4. Sun Pharmaceutical Industries – +0.95%
  5. Dr. Reddy’s Laboratories – +0.82%

📉 टॉप लूजर (Nifty 50)

  1. HDFC Bank – -3.10%
  2. Reliance Industries – -2.75%
  3. ICICI Bank – -2.40%
  4. State Bank of India – -2.15%
  5. Larsen & Toubro – -1.98%

पटना हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन: विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार समेत 42 विधायकों को नोटिस, चुनावी हलफनामे में गड़बड़ी के आरोप से मचा सियासी भूचाल

Patna High Court Notice to 42 MLAs: बिहार की राजनीति में उस समय भारी हलचल मच गई जब पटना उच्च न्यायालय ने एक साथ 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इन विधायकों में कोई साधारण नाम नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार, वरिष्ठ मंत्री विजेंद्र यादव, विधायक चेतन आनंद, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा और राजद विधायक अमरेंद्र प्रसाद जैसे प्रभावशाली चेहरे शामिल हैं।

इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए अपने नामांकन पत्र यानी चुनावी हलफनामे (Affidavit) में संपत्ति, आपराधिक मामलों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों को या तो छुपाया या गलत तरीके से प्रस्तुत किया। अदालत की इस सख्त कार्रवाई ने सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों खेमों में एक साथ हलचल पैदा कर दी है।

क्या है पूरा मामला? चुनावी हलफनामे से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला बिहार विधानसभा चुनाव के बाद दायर की गई चुनाव याचिकाओं से जुड़ा है। जिन सीटों पर हारने वाले प्रत्याशियों को पराजय का सामना करना पड़ा, उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि विजयी उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे में गलत या अधूरी जानकारी दी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि—

  • कुछ विधायकों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का पूरा विवरण नहीं दिया।
  • आपराधिक मामलों से संबंधित सूचनाएं स्पष्ट नहीं की गईं।
  • कुछ मामलों में शपथपत्र में तथ्यात्मक त्रुटियां या भ्रामक विवरण प्रस्तुत किए गए।
  • मतदान प्रक्रिया के दौरान भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इन आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए संबंधित सभी 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है।

किन-किन दिग्गजों को मिला नोटिस?

नोटिस पाने वाले नेताओं में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक शामिल हैं। यह तथ्य इस मामले को और व्यापक बना देता है। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—

  • प्रेम कुमार – बिहार विधानसभा अध्यक्ष
  • विजेंद्र यादव – वरिष्ठ मंत्री
  • जीवेश मिश्रा – भाजपा विधायक
  • चेतन आनंद – विधायक
  • अमरेंद्र प्रसाद – राजद विधायक

सूत्रों के अनुसार अन्य कई विधायकों को भी नोटिस जारी हुआ है, जिनके मामलों की सुनवाई अलग-अलग याचिकाओं के आधार पर की जाएगी।

अदालत की टिप्पणी ने बढ़ाई गंभीरता

सुनवाई के दौरान अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि चुनावी हलफनामा केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना स्रोत है।

अदालत ने स्पष्ट किया—

“मतदाता को यह जानने का अधिकार है कि उसका प्रतिनिधि बनने जा रहा व्यक्ति किस प्रकार की पृष्ठभूमि रखता है, उसकी संपत्ति कितनी है और उस पर आपराधिक मामले लंबित हैं या नहीं।”

यदि कोई उम्मीदवार जानबूझकर जानकारी छुपाता है या गलत जानकारी देता है, तो यह न केवल चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध भी है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: सभी ने कहा—कानून का करेंगे पालन

इस मामले पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती देना लोकतांत्रिक अधिकार है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रत्याशी को लगता है कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। उन्होंने कहा कि अब यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।

भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने कहा कि अदालत के सवालों का जवाब अदालत में ही दिया जाएगा। उन्होंने इसे सामान्य कानूनी प्रक्रिया बताया।

कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने भी कहा कि यदि किसी को लगता है कि गलत हुआ है तो न्यायालय जाना उसका अधिकार है। जो भी कानूनी प्रक्रिया होगी, उसका पालन किया जाएगा।

राजनीतिक रूप से देखा जाए तो इस मामले में किसी एक दल को निशाना नहीं बनाया गया है, बल्कि विभिन्न दलों के विधायक इसमें शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मामला विशुद्ध रूप से कानूनी और प्रक्रियात्मक है।

चुनावी हलफनामा क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

भारत में चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन के साथ एक शपथपत्र देना अनिवार्य होता है। इसमें निम्नलिखित जानकारियां देना जरूरी है—

  • कुल चल और अचल संपत्ति का विवरण
  • जीवनसाथी और आश्रितों की संपत्ति
  • लंबित आपराधिक मामले
  • शैक्षणिक योग्यता
  • देनदारियां

इस शपथपत्र का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता पूरी जानकारी के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुन सके। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि पारदर्शिता लोकतंत्र की आत्मा है।

संभावित कानूनी परिणाम क्या हो सकते हैं?

यदि अदालत पाती है कि किसी विधायक ने जानबूझकर गलत जानकारी दी है, तो संभावित परिणाम हो सकते हैं—

  1. चुनाव निरस्त किया जा सकता है।
  2. संबंधित विधायक की सदस्यता रद्द हो सकती है।
  3. दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया जा सकता है।
  4. दंडात्मक कार्रवाई भी संभव है।

हालांकि यह सब अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

बिहार की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

बिहार की राजनीति पहले ही कई मुद्दों को लेकर गरम है। ऐसे में 42 विधायकों को एक साथ नोटिस मिलना बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। यदि अदालत का फैसला कठोर आता है तो—

  • विधानसभा की संरचना प्रभावित हो सकती है।
  • सत्ताधारी गठबंधन की संख्या पर असर पड़ सकता है।
  • विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा मिल सकता है।
  • चुनावी सुधार पर नई बहस शुरू हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि नैतिक जवाबदेही से भी जुड़ा है।

Bihar Breaking News Live 19 February 2026: हाईकोर्ट का 42 विधायकों को नोटिस, नीट छात्रा केस में जांच तेज, कई जिलों में बड़ी घटनाएं

पटना, 19 फरवरी 2026। संक्षिप्त सारांश: होली को लेकर स्पेशल ट्रेनों की घोषणा और राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। पटना हाईकोर्ट ने विधानसभा से जुड़े मामले में 42 विधायकों को नोटिस जारी कर सियासी हलचल बढ़ा दी है। नीट छात्रा मौत मामले में जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और पूछताछ का दायरा बढ़ाया गया है। वैशाली, मुजफ्फरपुर और सहरसा में हत्या, मारपीट और सड़क हादसे जैसी घटनाओं से कानून-व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। सरकार ने 537 ब्लॉक कार्यालयों में सीसीटीवी लगाने की योजना की घोषणा की है।

वैशाली में रहस्यमयी मौत:
हाजीपुर के कौनहारा घाट पर एक व्यक्ति का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। परिजन जमीन विवाद का हत्या का आरोप लगा रहे हैं। पुलिस पोस्टमार्टम कर रही है।

🔹 पटना हाईकोर्ट ने 42 विधायकों को नोटिस भेजा:
राजनीति में सियासी हलचल तेज़; उच्च न्यायालय ने स्पीकर प्रेम कुमार समेत 42 विधायकों को जवाबतलब किया है।

🔹 नक्सली सुरेश कोड़ा ने आत्मसमर्पण किया:
तीन लाख का इनामी नक्सली AK-47 और इंसास राइफल पुलिस को सौंपते हुए आत्मसमर्पण कर दिया।

🔹 नीट छात्रा केस में बड़ा अपडेट:
जहानाबाद केस में अब तक कई साक्ष्यों की पड़ताल जारी है; जांच एजेंसियाँ पूरी कोशिश कर रही हैं।

🔹 सड़क हादसा:
सहरसा के पास एक स्कॉर्पियो दुर्घटनाग्रस्त; पाँच लोग घायल।

🔹 मुजफ्फरपुर में मारपीट:
कार साइड की बात पर विवाद, बीयर की बोतल से हमला; तीन घायल।

🔹 इनामी अपराधियों की लिस्ट:
वैशाली एसपी ने 12 कुख्यात अपराधियों की सूची जारी कर दी।


🏛️ राजनीति और सरकारी फैसले

📌 बिहार विधानसभा का बजट सत्र

बजट सत्र चल रहा है, विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच कई मुद्दों पर बहस जारी है — विशेषकर कचरे के मुद्दे पर भी विवाद हुआ।

📌 537 ब्लॉक कार्यालयों में CCTV योजना

बिहार सरकार ने घोषणा कि राज्य के 537 ब्लॉक कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे — यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता व भ्रष्टाचार रोकने के लिए।

📌 अमित शाह की बिहार यात्रा (25 फरवरी)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार के सीमावर्ती इलाकों का दौरा करेंगे — खासकर नेपाल और बांग्लादेश सीमा क्षेत्रों में पर्यावरण, सुरक्षा और डेमोग्राफी से जुड़े मुद्दों को देखने।


👮 क्राइम और सुरक्षा समाचार

🔹 पटना नीट छात्रा केस में CBI पूछताछ:
सीबीआई टीम सस्पेंडेड पुलिस अधिकारियों से पूछताछ कर रही है।

🔹 बांका में सॉल्वर गैंग पकड़ा गया:
मैट्रिक परीक्षा में पेपर सॉल्विंग के लिए 10,000 रुपये चार्ज करने वाला गिरोह पकड़ा गया।

🔹 मोबाइल ऐप से साइबर ठगी:
पूर्वी चंपारण के मोतिहारी से फर्जी ऐप के ज़रिये करोड़ों की ठगी करने वाला आरोपी हरियाणा से गिरफ्तार।


✳️ होली स्पेशल ट्रेनें 2026:


होली के त्यौहार के लिए रेलवे द्वारा बिहार समेत दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, पुणे और अहमदाबाद से स्पेशल ट्रेनें संचालित होंगी — यात्रियों को सुविधा मिल सके।


🔴 विधानसभा में तीखा टकराव, सरकार पर विपक्ष का हमला

बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। विपक्षी दलों ने विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरा। मुख्यमंत्री Nitish Kumar की नीतियों पर सवाल उठाते हुए विपक्ष ने राज्य में बढ़ती चुनौतियों का मुद्दा उठाया।

वहीं सत्ता पक्ष ने जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी से काम कर रही है। सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति भी बनी रही।


🍷 शराबबंदी नीति पर पुनर्विचार की मांग

राज्य में लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन National Democratic Alliance (एनडीए) के कुछ सहयोगी दलों ने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि नीति का उद्देश्य सही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में खामियां हैं, जिससे आर्थिक नुकसान और प्रशासनिक दबाव बढ़ रहा है।

सरकार ने फिलहाल नीति में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक तापमान बढ़ता दिख रहा है।


🚨 फिरोजाबाद में बिहार के लिए भेजी जा रही शराब की बड़ी खेप जब्त

उत्तर प्रदेश के Firozabad में पुलिस ने लगभग एक करोड़ रुपये की अवैध शराब की खेप पकड़ी, जिसे बिहार भेजा जाना था। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्करी की कोशिशें जारी हैं, जिससे प्रशासन की चुनौतियां बढ़ रही हैं।


🌾 राजगीर के पास अवैध अफीम की खेती का भंडाफोड़

Rajgir के समीप एक गांव में पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध अफीम की खेती का खुलासा किया। अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में अफीम की फसल नष्ट कर दी है। मामले में आगे की जांच जारी है और संलिप्त लोगों की पहचान की जा रही है।


🏥 खगड़िया में प्रसाद खाने से करीब 100 लोग बीमार

Khagaria जिले में महाशिवरात्रि के अवसर पर वितरित प्रसाद खाने के बाद लगभग 100 लोग बीमार पड़ गए। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। सभी को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।


💥 राजस्थान फैक्ट्री विस्फोट में बिहार के 7 मजदूरों की मौत

Rajasthan में हाल ही में हुए एक फैक्ट्री विस्फोट में बिहार के सात प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। ये सभी पूर्वी चंपारण जिले के निवासी थे। जिला प्रशासन ने मृतकों की पहचान कर ली है और परिजनों को सरकारी सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पूर्वी चंपारण East Champaran के जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार की प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना के तहत पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी।


🏛️ नालंदा विश्वविद्यालय में ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन

अल्पसंख्यक समुदायों के विकास और कल्याण योजनाओं की समीक्षा के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय Ministry of Minority Affairs द्वारा Nalanda University में दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नीति निर्माण, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे विषयों पर चर्चा की गई।


🏠 पटना में जमीन रजिस्ट्री महंगी होगी, सर्किल रेट में भारी बढ़ोतरी

राजधानी Patna में 1 अप्रैल से जमीन रजिस्ट्री की नई दरें लागू होंगी। कई इलाकों में सर्किल रेट तीन गुना तक बढ़ाए जाने की तैयारी है। इससे रियल एस्टेट बाजार में हलचल मच सकती है और संपत्ति खरीदने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

रजिस्ट्रेशन विभाग का कहना है कि बाजार दर और सरकारी दर के बीच के अंतर को कम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

मेरठ में मोहन भागवत का तीन दिवसीय दौरा: प्रांत के प्रबुद्धजनों, खिलाड़ियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से करेंगे सीधा संवाद

मेरठ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत आज मेरठ पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि सामाजिक और खेल जगत के लिए भी खास महत्व रखता है। 20 और 21 फरवरी को आयोजित दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में वे मेरठ और ब्रज प्रांत के प्रबुद्धजनों, खिलाड़ियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे। यह पहली बार है जब संघ खिलाड़ियों के साथ औपचारिक संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।

माधव कुंज में भव्य तैयारियां, तीन दिन का प्रवास

मेरठ के शताब्दी नगर स्थित माधव कुंज परिसर में कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। विशाल पंडाल सजाया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यहीं पर दो दिनों तक संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा और मोहन भागवत का रात्रि विश्राम भी इसी परिसर में होगा।

संघ सूत्रों के अनुसार, यह संवाद कार्यक्रम संगठन के सामाजिक विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों के प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़ाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मेरठ को कार्यक्रम के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह शहर खेल प्रतिभाओं और खेल उत्पादों के लिए देश-विदेश में पहचान रखता है। क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक और अन्य खेल सामग्री के निर्माण में मेरठ का योगदान लंबे समय से रहा है।

खिलाड़ियों से संवाद: सामाजिक अनुभवों पर चर्चा

इस संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना, तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार, अर्जुन अवार्ड से सम्मानित पहलवान अलका तोमर सहित कई अन्य प्रमुख खिलाड़ी शामिल होंगे।

संवाद के दौरान खिलाड़ियों से उनके सामाजिक अनुभवों, खेल जीवन की चुनौतियों और समाज में खेल की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि मोहन भागवत स्वयं खिलाड़ियों के प्रश्नों का उत्तर देंगे और उनसे सामाजिक समरसता तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विचार साझा करेंगे।

संघ का मानना है कि खिलाड़ी समाज के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। ऐसे में उनके अनुभवों को व्यापक समाज तक पहुंचाना और उन्हें सामाजिक अभियानों से जोड़ना एक सकारात्मक पहल हो सकती है।

खेल विश्वविद्यालय की भूमिका और अध्यक्षता

उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार तेजी से प्रयास कर रही है। मेरठ के सलावा में प्रदेश का पहला राज्य खेल विश्वविद्यालय बन रहा है। इस विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति रिटायर्ड मेजर जनरल दीप अहलावत हैं।

खिलाड़ियों के साथ आयोजित सत्र की अध्यक्षता दीप अहलावत करेंगे। विश्वविद्यालय में इस वर्ष से पढ़ाई और प्रशिक्षण शुरू करने की तैयारी है। ऐसे में संघ प्रमुख की उपस्थिति को खेल शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व के समन्वय के रूप में भी देखा जा रहा है।

एक दिन पहले CM योगी से मुलाकात

मेरठ पहुंचने से एक दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में मोहन भागवत से मुलाकात की। मुख्यमंत्री स्वयं निरालानगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचे और सरस्वती कुंज में करीब 40 मिनट तक दोनों के बीच बातचीत हुई।

मोहन भागवत इन दिनों उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं। गोरखपुर के बाद वे लखनऊ पहुंचे और वहां दो दिनों तक संगठन विस्तार तथा सामाजिक समरसता पर विशेष फोकस किया।

लखनऊ में दिए अहम बयान

लखनऊ प्रवास के दौरान मोहन भागवत ने लखनऊ यूनिवर्सिटी और इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रमों को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले मुस्लिम भी इसी भूमि के हैं और उन्हें किसी बाहरी दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सामाजिक समरसता और पारस्परिक सम्मान पर बल दिया।

साथ ही उन्होंने ‘घर वापसी’ पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग हिंदू धर्म में लौटना चाहते हैं, उनके प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर, कुएं और श्मशान जैसे सार्वजनिक स्थान सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए और उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

जनसंख्या दर पर बयान

मोहन भागवत ने हिंदू समाज की घटती जनसंख्या दर पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जनसंख्या दर 2.1 है, जबकि समाज के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए यह कम से कम 3 होनी चाहिए। उन्होंने नवविवाहित दंपतियों से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील की।

उनका तर्क था कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, उनके इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

RSS और भाजपा संबंधों पर स्पष्टता

लखनऊ में ही आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में मोहन भागवत ने यह भी कहा कि RSS भाजपा का ‘रिमोट कंट्रोल’ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के स्वयंसेवक भाजपा में जाते हैं और आगे बढ़ते हैं, लेकिन यह कहना गलत है कि संघ भाजपा को संचालित करता है।

उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा का विरोध करते हैं, वे अक्सर संघ का भी विरोध करते हैं।

अमेरिकी टैरिफ पर टिप्पणी

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी बोलते हुए मोहन भागवत ने अमेरिकी टैरिफ नीति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह अमेरिका का पुराना तरीका है कि वह आर्थिक और सामरिक ताकत के आधार पर दबाव बनाने की कोशिश करता है।

उनका कहना था कि भारत इतना मजबूत है कि वह ऐसे दबावों के आगे झुकेगा नहीं और देश की जनता भी आत्मनिर्भरता के लिए तैयार है।

राजनीतिक और सामाजिक महत्व

मोहन भागवत का यह मेरठ दौरा कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां यह संगठन के सामाजिक विस्तार का संकेत देता है, वहीं खेल जगत के साथ संवाद की पहल एक नई रणनीति के रूप में देखी जा रही है।

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और ऐसे समय में संघ प्रमुख के लगातार दौरे और मुख्यमंत्री के साथ बैठकें राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।

बिहार विधानसभा में हंगामा और तीखे सवालों के बीच कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित, बजट सत्र की दूसरी पाली में फिर शुरू होगी बहस

पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सदन की कार्यवाही उस समय दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी, जब प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान सत्ताधारी दल के विधायकों के तीखे सवालों में मंत्री खुद ही घिरते नजर आए। लंच ब्रेक के बाद सदन की कार्यवाही पुनः आरंभ होने की घोषणा की गई है। सुबह से ही सदन का माहौल गरम रहा और कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपनी ही सरकार से जवाब तलब किए।

प्रश्नकाल में सरकार पर ही उठे सवाल

बजट सत्र के दौरान आज का दिन राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा था। विपक्ष की ओर से सरकार को घेरने की रणनीति पहले से तय थी, लेकिन स्थिति उस समय दिलचस्प हो गई जब सत्ताधारी दल के विधायकों ने भी विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर मंत्रियों से सीधे और तीखे सवाल पूछने शुरू कर दिए।

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और नगर विकास विभाग से जुड़े प्रश्नों पर मंत्री संतोषजनक जवाब देने में असहज दिखे। कुछ विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में अधूरी योजनाओं, लंबित भुगतान, खराब सड़कों और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

एक विधायक ने अपने क्षेत्र में स्वीकृत पुल निर्माण योजना के लंबित रहने का मुद्दा उठाया और पूछा कि बजट आवंटन के बावजूद कार्य प्रारंभ क्यों नहीं हुआ। इस पर संबंधित मंत्री ने विभागीय प्रक्रिया और तकनीकी स्वीकृति का हवाला दिया, लेकिन विधायक ने जवाब को अपर्याप्त बताते हुए नाराजगी जताई।

सत्ता पक्ष के भीतर असंतोष के संकेत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष के विधायकों द्वारा इस तरह के सवाल उठाया जाना सरकार के भीतर बढ़ते दबाव का संकेत हो सकता है। कई विधायक आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं।

कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि यदि योजनाओं का लाभ समय पर जनता तक नहीं पहुंचेगा, तो इसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। ऐसे में सदन के भीतर ही सरकार को आईना दिखाने की कोशिश की जा रही है।

विपक्ष ने भी साधा निशाना

हालांकि आज का केंद्र बिंदु सत्ता पक्ष के सवाल रहे, लेकिन विपक्ष ने भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि जब सत्ताधारी दल के विधायक ही सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं हैं, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में भारी खामियां हैं। उन्होंने मांग की कि बजट सत्र के दौरान सभी विभागों की विस्तृत समीक्षा कराई जाए और लंबित परियोजनाओं की सूची सार्वजनिक की जाए।

स्पीकर ने बनाए रखा अनुशासन

सदन में बढ़ते शोर-शराबे और लगातार हस्तक्षेप के बीच अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल की गरिमा बनाए रखने की अपील की। कुछ समय के लिए सदन में तीखी बहस भी हुई, जिसके बाद दोपहर 2 बजे तक कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा की गई।

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि लंच के बाद सदन की दूसरी पाली में बजट सत्र की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाई जाएगी और सदस्यों को अपने प्रश्न रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

Patna NEET Student Death Case: परिवार को दूसरी बार जान से मारने की धमकी, CBI जांच के बीच गांव में बढ़ाई गई सुरक्षा

पटना/जहानाबाद। बिहार की राजधानी पटना से जुड़े बहुचर्चित NEET छात्रा मौत मामले ने एक बार फिर सनसनी फैला दी है। जिस घटना ने पहले ही राज्यभर में आक्रोश और सवालों का तूफान खड़ा कर दिया था, अब उसमें धमकी भरे पर्चों की एंट्री ने मामले को और रहस्यमय बना दिया है। जहानाबाद स्थित छात्रा के पैतृक गांव में परिजनों को लगातार दूसरी बार जान से मारने की धमकी दी गई है। इससे परिवार गहरे सदमे और भय के माहौल में जीने को मजबूर है।

पुलिस की तैनाती के बावजूद घर के किचन की खिड़की पर धमकी भरे पर्चे मिलना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। पूरे मामले की जांच अब केंद्रीय एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) कर रही है, जबकि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।

किचन की खिड़की पर मिला पहला धमकी भरा पर्चा

परिजनों के अनुसार पहला पर्चा शुक्रवार की रात घर के किचन की खिड़की पर रखा मिला। उस पर्चे में साफ शब्दों में लिखा था— “तुम सब लोग मारे जाओगे।”

परिवार ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। शकूराबाद थाना की टीम मौके पर पहुंची और पर्चे को जब्त कर जांच शुरू की। पुलिस ने आश्वासन दिया कि सुरक्षा में कोई चूक नहीं होने दी जाएगी।

हालांकि परिवार अभी पहले पर्चे के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही दिनों बाद एक और धमकी ने माहौल को और भयावह बना दिया।

दूसरे पर्चे ने बढ़ाई दहशत: “2 दिन में तेरा बेटा भी मरेगा”

मंगलवार को उसी किचन की खिड़की पर एक और पर्चा मिला। इस बार भाषा और भी ज्यादा खतरनाक और व्यक्तिगत थी। उसमें लिखा था—
“जिस तरह बेटी मरी है, 2 दिन में तेरा बेटा भी मरेगा।”

इस संदेश ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। बेटी की मौत के गम से उबर नहीं पाए माता-पिता के सामने अब बेटे की जान की धमकी ने मानसिक दबाव कई गुना बढ़ा दिया है।

परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इतनी सुरक्षा के बीच कोई घर तक पहुंचकर पर्चा कैसे रख जा रहा है। गांव में पुलिस की तैनाती है, आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है, फिर भी यह घटना सुरक्षा में सेंध की ओर इशारा करती है।

गांव में पुलिस की तैनाती, फिर भी कैसे पहुंचा धमकी देने वाला?

धमकी भरे पर्चे मिलने के बाद पुलिस ने घर के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। आने-जाने वालों की पूछताछ की जा रही है। गांव में रात के समय गश्ती बढ़ा दी गई है।

इसके बावजूद सवाल यह है कि जब घर की निगरानी हो रही थी तो आखिर पर्चा रखने वाला व्यक्ति वहां तक कैसे पहुंचा? क्या कोई स्थानीय व्यक्ति इसमें शामिल है? या फिर सुरक्षा में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जा रही है। आसपास लगे संभावित सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। गांव के संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है।

एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य

मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम गांव पहुंची। टीम ने किचन की खिड़की, दीवारों और आसपास के हिस्सों से फिंगरप्रिंट, हैंडराइटिंग और अन्य फॉरेंसिक नमूने जुटाए।

पर्चों की लिखावट की जांच कराई जा रही है ताकि यह पता चल सके कि दोनों पर्चे एक ही व्यक्ति ने लिखे हैं या अलग-अलग लोगों ने। कागज और स्याही की जांच से भी सुराग मिलने की उम्मीद है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह धमकी महज डराने की कोशिश भी हो सकती है या फिर किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा भी। इसलिए हर पहलू को गंभीरता से खंगाला जा रहा है।

6 जनवरी को हॉस्टल में मिली थी बेहोश

यह पूरा मामला 6 जनवरी से शुरू हुआ, जब छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में बेहोश पाई गई थी। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चला।

11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश फैला दिया। छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच की जिम्मेदारी Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी।

सीबीआई की सक्रियता, गांव पहुंचकर की पूछताछ

CBI की टीम तीन दिनों के भीतर दो बार छात्रा के गांव पहुंच चुकी है। अधिकारियों ने परिजनों से घंटों पूछताछ की। छात्रा के दोस्तों, रिश्तेदारों और गांव के अन्य लोगों से भी जानकारी ली जा रही है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्रा की मौत आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या फिर इसके पीछे कोई साजिश। मोबाइल कॉल डिटेल, चैट रिकॉर्ड, हॉस्टल स्टाफ के बयान और मेडिकल रिपोर्ट की गहन जांच जारी है।

अब धमकी भरे पर्चों की घटना ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या धमकियों का संबंध सीधे छात्रा की मौत की जांच से है।

परिवार पर मानसिक दबाव

बेटी की असमय मौत के बाद से परिवार पहले ही गहरे सदमे में था। अब लगातार मिल रही धमकियों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।

परिजनों का कहना है कि उन्हें अपनी और बेटे की सुरक्षा की चिंता सता रही है। वे चाहते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें स्थायी सुरक्षा मुहैया कराई जाए।

गांव के लोगों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि धमकी देने वालों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

तीसरे दिन भी शेयर बाजार में मजबूती: सेंसेक्स 283 अंक उछला, निफ्टी 25,800 के पार; मेटल-PSU बैंक शेयरों में जोरदार खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 18 फरवरी 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी दिन तेजी देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex 283 अंकों की मजबूती के साथ बंद हुआ, जबकि Nifty 50 25,800 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर टिके रहने में सफल रहा। दिनभर उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में चुनिंदा सेक्टरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, खासकर मेटल और PSU बैंक शेयरों में।

यह तेजी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत मिल रहे थे और निवेशक आगामी आर्थिक आंकड़ों तथा कॉर्पोरेट अपडेट्स पर नजर बनाए हुए हैं। आईटी शेयरों में मुनाफावसूली के बावजूद बाजार का समग्र रुख सकारात्मक रहा।

📊 बाजार का समापन: आंकड़ों में तस्वीर

  • सेंसेक्स: लगभग 83,700 के आसपास बंद, +283 अंक
  • निफ्टी 50: 25,800 के ऊपर बंद, लगभग +90 अंक
  • मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की बढ़त
  • बाजार की चौड़ाई सकारात्मक रही — बढ़ने वाले शेयर गिरने वालों से अधिक रहे

यह लगातार तीसरा सत्र है जब बाजार हरे निशान में बंद हुआ है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

🔔 दिनभर का कारोबार: कैसे बदला मूड?

🕘 शुरुआत: सतर्कता के साथ फ्लैट ओपनिंग

कारोबार की शुरुआत हल्की मजबूती के साथ हुई, लेकिन शुरुआती घंटों में बाजार सीमित दायरे में ही कारोबार करता रहा। वैश्विक बाजारों से स्पष्ट दिशा न मिलने के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

🕛 दोपहर बाद: मेटल और बैंकिंग शेयरों ने पकड़ी रफ्तार

दोपहर के सत्र में बाजार में तेजी आई।

  • मेटल शेयरों में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में सुधार की उम्मीद से खरीदारी बढ़ी।
  • PSU बैंकों में बेहतर क्रेडिट ग्रोथ और एसेट क्वालिटी सुधार की उम्मीद से निवेशकों ने दांव लगाया।

🕒 आईटी शेयरों में दबाव

आईटी सेक्टर में हल्की मुनाफावसूली देखने को मिली, जिसने बाजार की तेजी को कुछ हद तक सीमित किया। हालांकि अन्य सेक्टरों में मजबूती के चलते कुल मिलाकर सूचकांक सकारात्मक दायरे में बने रहे।

🏭 सेक्टरवार प्रदर्शन

🚀 सबसे ज्यादा चमके सेक्टर

  • मेटल सेक्टर – वैश्विक मांग में सुधार के संकेत
  • PSU बैंक – मजबूत लोन ग्रोथ की उम्मीद
  • FMCG – रक्षात्मक निवेश के रूप में खरीदारी

🔻 दबाव में रहे

  • आईटी सेक्टर
  • कुछ ऑटो शेयरों में सीमित उतार-चढ़ाव

📈 प्रमुख शेयरों की हलचल

  • Godfrey Phillips India के शेयरों में लगभग 20% की तेज उछाल देखने को मिली।
  • Maruti Suzuki India के शेयर बाजार की तेजी के बावजूद अपेक्षाकृत कमजोर रहे।
  • स्टील और धातु कंपनियों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई।

राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार की 5 समेत 37 सीटों पर महासंग्राम, 16 मार्च को मतदान—सत्ता और विपक्ष के लिए निर्णायक परीक्षा

Rajya Sabha Elections 2026: देश की संसदीय राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Election Commission of India ने राज्यसभा की 37 रिक्त हो रही सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस सूची में बिहार की 5 अहम सीटें शामिल हैं, जिन पर सियासी दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। इन सीटों पर होने वाला चुनाव सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि संसद के ऊपरी सदन में आने वाले वर्षों के राजनीतिक समीकरण तय करने वाला निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

अप्रैल 2026 में कई वरिष्ठ सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में इन सीटों पर नए प्रतिनिधियों का चयन न केवल राज्यों की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डालेगा। खासकर बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह चुनाव गठबंधन राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

चुनाव कार्यक्रम: 26 फरवरी से 20 मार्च तक पूरी प्रक्रिया

चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 से शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च तय की गई है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 मार्च तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे।

16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा। मतदान समाप्त होते ही शाम 5 बजे से मतगणना शुरू कर दी जाएगी। पूरी चुनावी प्रक्रिया 20 मार्च तक संपन्न कर ली जाएगी और इसके बाद नवनिर्वाचित सदस्यों की सूची आधिकारिक रूप से जारी की जाएगी।

यह समयसीमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल की शुरुआत में कई सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि नई सूची समय रहते जारी हो जाए ताकि संसद के ऊपरी सदन की कार्यवाही प्रभावित न हो।

किन-किन राज्यों में होगा मतदान?

इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें प्रमुख राज्यों की सीटों का विवरण इस प्रकार है:

  • महाराष्ट्र – 7 सीटें
  • तमिलनाडु – 6 सीटें
  • पश्चिम बंगाल – 5 सीटें
  • बिहार – 5 सीटें
  • ओडिशा – 3 सीटें
  • असम – 3 सीटें
  • छत्तीसगढ़ – 2 सीटें
  • हरियाणा – 1 सीट
  • हिमाचल प्रदेश – 1 सीट
  • तेलंगाना – 4 सीटें

महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियों में हाल के वर्षों में हुए बदलाव के कारण यह चुनाव और भी रोचक हो गया है।

बिहार की 5 सीटें क्यों हैं सबसे अहम?

बिहार की जिन 5 सीटों पर चुनाव होने हैं, उन पर वर्तमान में वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधित्व है। इन नेताओं का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • Harivansh Narayan Singh
  • Upendra Kushwaha
  • Ram Nath Thakur
  • Prem Chand Gupta
  • Amarendra Dhari Singh

इनमें हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति भी हैं। उनका दोबारा चयन होता है या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी होंगी। वहीं उपेंद्र कुशवाहा और प्रेम चंद गुप्ता जैसे नेताओं की भूमिका बिहार की क्षेत्रीय राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण रही है।

इन सीटों पर चुनाव का असर सीधे-सीधे बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी महागठबंधन के बीच शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।

महाराष्ट्र में भी दिग्गजों की परीक्षा

महाराष्ट्र की 7 सीटों पर भी चुनाव होने जा रहे हैं। यहां से राष्ट्रीय स्तर के दो बड़े नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है:

  • Sharad Pawar
  • Ramdas Athawale

शरद पवार भारतीय राजनीति के वरिष्ठतम नेताओं में गिने जाते हैं। यदि वे पुनः मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है। वहीं रामदास अठावले केंद्र सरकार में मंत्री हैं, ऐसे में उनकी सीट भी एनडीए के लिए अहम है।

राज्यसभा चुनाव कैसे होते हैं?

राज्यसभा के सदस्य सीधे जनता द्वारा नहीं चुने जाते। इनका चुनाव संबंधित राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक करते हैं। यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) प्रणाली से होता है।

मतलब साफ है—जिस दल या गठबंधन के पास विधानसभा में जितनी अधिक संख्या होगी, उसके उम्मीदवार की जीत की संभावना उतनी ही अधिक होगी। ऐसे में जहां विधानसभा में संख्या बल का अंतर कम है, वहां जोड़-तोड़, रणनीति और क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ जाती है।

बिहार में संभावित सियासी गणित

बिहार की राजनीति लंबे समय से गठबंधन आधारित रही है। यहां एनडीए और महागठबंधन के बीच सत्ता का संघर्ष चलता रहा है। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक सीट के लिए आवश्यक वोटों का गणित बेहद अहम होता है।

यदि किसी दल के पास पूर्ण बहुमत नहीं है तो उसे सहयोगी दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव न केवल राजनीतिक ताकत का परीक्षण है, बल्कि गठबंधन की मजबूती का भी पैमाना बनेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 5 सीटों में से कम से कम एक या दो सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है।

संसद में क्या बदल सकता है समीकरण?

राज्यसभा में बहुमत का गणित अक्सर लोकसभा से अलग होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि केंद्र सरकार के पास लोकसभा में स्पष्ट बहुमत होता है, लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण उसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में क्षेत्रीय दलों का समर्थन लेना पड़ता है।

इन 37 सीटों के चुनाव के बाद राज्यसभा की संरचना में बदलाव संभव है। यदि किसी एक गठबंधन को अपेक्षा से अधिक सीटें मिलती हैं तो वह ऊपरी सदन में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

क्या पुराने चेहरों को मिलेगा दोबारा मौका?

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या राजनीतिक दल अपने मौजूदा सांसदों को दोबारा अवसर देंगे या नए चेहरों को आगे लाएंगे?

बिहार में सामाजिक और जातीय समीकरणों का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में दल यह देखेंगे कि किस समुदाय को प्रतिनिधित्व देना उनके लिए लाभकारी रहेगा। इसी तरह महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी क्षेत्रीय संतुलन और गठबंधन समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत की भूमिका

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों और तमिलनाडु की 6 सीटों पर भी सबकी नजर है। दक्षिण भारत के राज्यों में क्षेत्रीय दलों की मजबूत उपस्थिति के कारण राष्ट्रीय दलों को रणनीतिक गठजोड़ करना पड़ता है।

इन राज्यों के परिणाम संसद में विपक्ष की ताकत को भी प्रभावित कर सकते हैं।

क्यों कहा जा रहा है इसे ‘मिनी जनादेश’?

राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से न होता हो, लेकिन यह राज्यों की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का प्रतिबिंब जरूर होता है। जिन राज्यों में हाल में सरकार बदली है या गठबंधन टूटे हैं, वहां यह चुनाव सत्ता की स्थिरता का संकेत देगा।

विशेषज्ञ इसे ‘मिनी जनादेश’ इसलिए भी कह रहे हैं क्योंकि इससे यह संकेत मिलेगा कि आने वाले लोकसभा या विधानसभा चुनावों में राजनीतिक रुझान किस दिशा में जा सकते हैं।

चार्टर प्लेन से पटना पहुंचे IAS निलेश रामचंद्र देओरे पर सियासी संग्राम: विधानसभा में गूंजा मुद्दा, नीतीश सरकार पर विपक्ष का हमला

बिहार की राजनीति एक बार फिर प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच उलझ गई है। राज्य के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Nilesh Ramchandra Deore को लेकर छिड़ा चार्टर प्लेन विवाद अब सियासी तूफान में बदल चुका है। पटना पहुंचने के लिए चार्टर विमान के इस्तेमाल को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे नियमों के अनुरूप और परिस्थितिजन्य निर्णय बता रहा है। मामला इतना तूल पकड़ चुका है कि Bihar Vidhan Sabha में भी इस पर तीखी बहस हुई और सरकार को सफाई देनी पड़ी।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, आईएएस अधिकारी निलेश रामचंद्र देओरे को अचानक पटना बुलाया गया था। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक कारणों और समय की कमी को देखते हुए वे चार्टर विमान से पटना पहुंचे। यहीं से विवाद की शुरुआत हुई। विपक्षी दलों ने सवाल उठाया कि एक अधिकारी के लिए चार्टर प्लेन का खर्च किस आधार पर स्वीकृत किया गया? क्या यह सरकारी धन का दुरुपयोग है? और क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा छिपी है?

विपक्ष का आरोप है कि यह कदम आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। खासतौर पर जब राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं और सत्ता समीकरणों पर लगातार चर्चा हो रही है।

विधानसभा में गरमाया मुद्दा

मामला विधानसभा तक पहुंचा तो विपक्ष ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। Tejashwi Yadav की पार्टी Rashtriya Janata Dal ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल राजनीतिक हित साधने के लिए किया जा रहा है। वहीं Indian National Congress के नेताओं ने भी पारदर्शिता की मांग की।

सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से जवाब देते हुए Bharatiya Janata Party के प्रवक्ताओं ने कहा कि अधिकारी का पटना आना पूरी तरह प्रशासनिक आवश्यकता थी और इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं है। उनका कहना है कि कई बार आपात या विशेष परिस्थितियों में चार्टर विमान का उपयोग किया जाता है, जो नियमों के दायरे में आता है।

नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने इस पूरे विवाद पर संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता में विश्वास करती है और यदि किसी को कोई शंका है तो तथ्यों की जांच कराई जा सकती है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक फैसले परिस्थिति के अनुसार लिए जाते हैं और उन्हें राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।

हालांकि, विपक्ष इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और मामले की विस्तृत जांच तथा खर्च का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की।

कौन हैं निलेश रामचंद्र देओरे?

आईएएस अधिकारी निलेश रामचंद्र देओरे अपने प्रशासनिक अनुभव और सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बिहार में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और कई जिलों में जिला अधिकारी के रूप में सेवाएं दी हैं। प्रशासनिक हलकों में उन्हें कुशल और निर्णायक अधिकारी माना जाता है।

देओरे का कैरियर अपेक्षाकृत साफ-सुथरा रहा है और वे अक्सर अपने कामकाज के कारण चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस बार उनका नाम राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। चार्टर प्लेन प्रकरण ने उनकी छवि और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर भी बहस छेड़ दी है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और समय का महत्व

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद का समय बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और विपक्ष लगातार सरकार को घेरने के मुद्दे तलाश रहा है। ऐसे में किसी वरिष्ठ अधिकारी की यात्रा को लेकर उठे सवालों ने सियासी बहस को और हवा दे दी है।

विपक्ष का तर्क है कि यदि यात्रा अत्यावश्यक थी तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। वहीं सरकार का कहना है कि प्रक्रिया का पालन किया गया और खर्च संबंधित नियमों के तहत वहन किया गया।

प्रशासनिक नियम क्या कहते हैं?

सरकारी नियमों के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में वरिष्ठ अधिकारियों को चार्टर विमान की सुविधा दी जा सकती है। हालांकि, इसके लिए स्पष्ट अनुमति और औपचारिक स्वीकृति आवश्यक होती है। यही वह बिंदु है जिस पर विपक्ष सवाल उठा रहा है—क्या सभी प्रक्रियाएं विधिवत पूरी की गईं?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी कागजी औपचारिकताएं पूरी हैं तो विवाद स्वतः समाप्त हो सकता है। लेकिन यदि किसी स्तर पर प्रक्रिया में कमी पाई जाती है, तो यह सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।

तेजस्वी यादव का बड़ा ऐलान: RJD अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में करेगी विस्तार

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान देकर पार्टी के भविष्य के दृष्टिकोण और दिशा को लेकर बड़ा पन्ना खोला है। पटना में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब राष्ट्रीय जनता दल सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पार्टी जल्द ही देश के अन्य राज्यों में अपने पैर पसारने का प्रयास करेगी और राष्ट्रीय पार्टी बनने की आकांक्षा रखती है

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब RJD ने हाल ही में बिहार विधानसभा चुनावों में सफलता हासिल नहीं की थी। तेजस्वी का बयान पार्टी के पुराने राजनीतिक रुख से एक बड़ा बदलाव दर्शाता है और पार्टी की राजनीतिक सोच में विस्तार को उजागर करता है।

तेजस्वी यादव के बयान की प्रमुख बातें

तेजस्वी यादव ने पटना में दिए अपने बयान में कहा:
📌 “अब हमारी पार्टी सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहेगी। हम आने वाले समय में **अन्य राज्यों में भी चुनाव लड़ने, संगठन का विस्तार करने और राष्ट्रीय पार्टी बनने की दिशा में काम करेंगे।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि RJD ने पहले अन्य राज्यों में चुनाव न लड़ने का फैसला इसलिए किया था ताकि धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा न हो और सहयोगी दलों को लाभ मिले, लेकिन अब समय बदल गया है और पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर है

तेजस्वी ने यह भी कहा:
➡️ “हम बिहार विधानसभा में चुनाव हार गए, इसका मतलब यह नहीं कि पार्टी कमजोर है, बल्कि परिस्थितियाँ प्रतिकूल थीं। हमारा समय फिर आएगा।”

यहां ये शब्द RJD के कारणों और चुनौतियों को समझने में मदद करते हैं — उन्होंने हार को अस्थायी बताया और पार्टी कार्यकर्ताओं को आशा तथा दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

नीतीश कुमार पर हमला और RJD की राजनीति

तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी आरोप लगाए हैं कि वह “अपने फैसलों में प्रभावित अधिकारियों और अपने सहयोगी दल के दबाव में हैं” और इसलिए राज्य की जनता के मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की 100 दिनों की सीमा के बाद वे सरकार की विफलताओं पर जोर देंगे और जनता के बीच यह मामला उठाएंगे कि चुनाव में जिन वादों को उन्होंने लिया था, वे पूरा नहीं किए गए।

यह बयान RJD के राजनीतिक संघर्ष को दर्शाता है, जिसमें विपक्षी दल सत्ता पक्ष की नीतियों और कार्यों की आलोचना करते हुए खुद को जनता की आवाज़ के रूप में पेश करते हैं।

राष्ट्रीय पार्टी बनने की महत्वाकांक्षा क्यों?

भारत में राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के लिए केंद्र सरकार के चुनाव आयोग के मानदंडों को पूरा करना होता है। इसके लिए दल को विभिन्न राज्यों में समर्थन और सक्रिय वोट बैंक दिखाना आवश्यक होता है।

RJD का यह कदम पार्टी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। तेजस्वी का मानना है कि RJD के पास वह राजनीतिक विरासत, विचारधारा और समर्थन है जो इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली दल बना सकता है।

उनके इस दृष्टिकोण के पीछे यह तर्क भी दिखता है कि भारतीय राजनीति में संवैधानिक रूप से सेक्युलर और सामाजिक न्याय की विचारधारा वाली पार्टियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी बनना चाहिए ताकि वे देशभर के मुद्दों पर अपनी आवाज उठा सकें।

RJD का इतिहास और अब का नवाचार

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की स्थापना 1997 में लालू प्रसाद यादव ने की थी और पार्टी ने बिहार में अपनी एक मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई। लालू यादव के नेतृत्व में RJD ने सामाजिक न्याय, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के मुद्दों को आगे बढ़ाया और राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली दल के रूप में उभरी।

तेजस्वी यादव, जो लालू प्रसाद यादव के पुत्र हैं, ने धीरे-धीरे पार्टी में अपनी भूमिका बढ़ाई और जनवरी 2025 में उन्हें RJD का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। इससे तेजस्वी को पार्टी के फैसलों में अधिक अधिकार और नेतृत्व निभाने का अवसर मिला।

अब तेजस्वी यादव ने पार्टी को एक नई दिशा देने का निश्चय किया है — वह चाहते हैं कि RJD केवल बिहार तक सीमित न रहे बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराए

बिहार में शराबबंदी पर मंथन की घड़ी: सहयोगियों के दबाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच क्या बदलेगा फैसला?

पटना: Bihar Vidhan Sabha में बजट सत्र के दौरान बुधवार को जमकर हंगामा देखने को मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस हुई। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के एक विधायक ने राज्य में लागू शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून का दुरुपयोग हो रहा है और निर्दोष लोगों को भी परेशान होना पड़ रहा है।

विधायक ने यह भी कहा कि यदि कोई अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन का जवाब नहीं देता है या जनता की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। इस बयान के बाद सदन में माहौल गर्म हो गया। विपक्ष ने सरकार पर प्रशासनिक ढिलाई का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने दावा किया कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।

बिहार की राजनीति में एक बार फिर शराबबंदी कानून चर्चा के केंद्र में है। वर्ष 2016 में लागू की गई पूर्ण शराबबंदी को मुख्यमंत्री Nitish Kumar की सबसे महत्वाकांक्षी और चर्चित पहलों में गिना जाता है। लेकिन अब लगभग एक दशक बाद, इसी कानून को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से समीक्षा की मांग उठने लगी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कुछ सहयोगी नेताओं ने खुले तौर पर कहा है कि शराबबंदी के कारण राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है और इसके क्रियान्वयन में व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं।

राजस्व संकट और बढ़ता वित्तीय दबाव

शराबबंदी लागू होने से पहले बिहार सरकार को आबकारी मद से हर साल हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था। यह आय राज्य के विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण स्रोत थी। शराबबंदी के बाद यह आय लगभग समाप्त हो गई।

वर्तमान में राज्य सरकार पर कई कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास का बड़ा वित्तीय बोझ है। ऐसे में आबकारी राजस्व की कमी को लेकर वित्तीय विशेषज्ञ लगातार चिंता जता रहे हैं। उनका मानना है कि यदि नियंत्रित और विनियमित तरीके से शराब बिक्री की अनुमति दी जाए, तो राज्य को राजस्व में बड़ी राहत मिल सकती है।

सहयोगियों की खुली नाराजगी

केंद्रीय मंत्री और एनडीए के वरिष्ठ नेता Jitan Ram Manjhi ने कहा है कि शराबबंदी का उद्देश्य भले ही सामाजिक सुधार रहा हो, लेकिन इसके कारण राज्य को “महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान” उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नीति के क्रियान्वयन में कमियां हैं और इस पर गंभीर समीक्षा की जरूरत है।

गठबंधन के कुछ अन्य नेताओं ने भी विधानसभा में विस्तृत चर्चा की मांग की है। उनका कहना है कि दस साल बाद किसी भी नीति का मूल्यांकन करना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है। समीक्षा में सामाजिक प्रभाव, आर्थिक नुकसान, कानून-व्यवस्था और जनता की राय—सभी पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।

कानून-व्यवस्था और क्रियान्वयन की चुनौतियां

शराबबंदी के तहत अब तक लाखों मामले दर्ज किए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं। आलोचकों का आरोप है कि छोटे उपभोक्ताओं पर कार्रवाई ज्यादा हुई, जबकि बड़े पैमाने पर अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया।

राज्य के कई जिलों में अवैध और जहरीली शराब से मौत की घटनाएं भी सामने आईं, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। इससे यह बहस और तेज हो गई है कि क्या पूर्ण प्रतिबंध की बजाय सख्त नियमन और नियंत्रित बिक्री बेहतर विकल्प हो सकता है।

सामाजिक प्रभाव: महिलाओं का समर्थन, युवाओं की चिंता

शराबबंदी लागू करते समय मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार का बड़ा कदम बताया था। ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिला समूहों ने इस नीति का समर्थन किया और दावा किया कि घरेलू हिंसा तथा पारिवारिक विवादों में कमी आई है।

हालांकि युवाओं और व्यापारिक वर्ग के एक हिस्से का मानना है कि प्रतिबंध के बावजूद शराब की उपलब्धता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, बल्कि यह अवैध बाजार में बदल गई है। इससे कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा बढ़ा है।

राजनीतिक समीकरण और भविष्य की दिशा

शराबबंदी का मुद्दा बिहार की राजनीति में बेहद संवेदनशील है। यह मुख्यमंत्री की छवि और उनकी राजनीतिक पहचान से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यदि इस नीति में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो उसका व्यापक राजनीतिक असर पड़ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार तत्काल कोई बड़ा फैसला नहीं लेगी, लेकिन आंशिक संशोधन या क्रियान्वयन में सुधार की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। संभावित विकल्पों में—

  • कानून में संशोधन कर छोटे मामलों में राहत
  • पारंपरिक पेय पदार्थों को अलग श्रेणी में रखना
  • सीमित और नियंत्रित लाइसेंस प्रणाली लागू करना
  • अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई