पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज होती जा रही है। सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। टीएमसी ने शुभेंदु पर ‘नफरत की राजनीति’ करने का आरोप लगाया है और उन्हें ‘राजनीति में जहर घोलने वाला चेहरा’ बताया है।
टीएमसी के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा में शामिल होने के बाद से लगातार सांप्रदायिक और विभाजनकारी बयान देते रहे हैं। उन्होंने शुभेंदु के पुराने बयानों और घटनाओं का हवाला देते हुए उन्हें ‘राजनीति में जहर घोलने वाला चेहरा’ बताया है। टीएमसी ने शुभेंदु पर आरोप लगाया है कि उन्होंने फरवरी 2024 में एक सिख अधिकारी को ‘खालिस्तानी’ कहा, मार्च 2025 में मुस्लिम विधायकों को विधानसभा से बाहर करने संबंधी टिप्पणी की, और जुलाई 2025 में ‘जय बांग्ला’ बोलने वाले एक व्यक्ति को धमकी दी।
इसके अलावा, टीएमसी ने शुभेंदु अधिकारी पर पुलिस अफसर पर जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दिसंबर 2025 में कथित तौर पर धार्मिक आधार पर हमले के आरोपियों को सम्मानित करने और फरवरी 2026 में धर्म परिवर्तन से जुड़े बयान देने के लिए भी शुभेंदु अधिकारी की आलोचना की है।
टीएमसी ने भाजपा पर भी निशाना साधा है और कहा है कि वह ऐसे बयानों पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें राजनीतिक संरक्षण देती है। रूलिंग पार्टी ने इसे बंगाल की ‘मां-माटी-मानुष’ की एकता और सामाजिक ताने-बाने पर हमला बताया है। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आयी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति तेज हो सकती है। बंगाल में 2026 का चुनाव सिर्फ सत्ता का संघर्ष नहीं, विचारधारा और सामाजिक संतुलन की भी परीक्षा बनता दिख रहा है।