Press "Enter" to skip to content

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दो दिवसीय इज़राइल दौरा: रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी

भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi 25 फरवरी से इज़राइल की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य, पश्चिम एशिया में उभरते सुरक्षा समीकरण और भारत-इज़राइल संबंधों के बढ़ते सामरिक महत्व को भी रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान यह उनका पहला इज़राइल दौरा है, जबकि पिछले नौ वर्षों में यह उनकी दूसरी यात्रा होगी। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन और तकनीकी सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संबंधों का विकास

भारत और इज़राइल के बीच पूर्ण राजनयिक संबंधों की स्थापना वर्ष 1992 में हुई थी। हालांकि उससे पहले भी दोनों देशों के बीच अनौपचारिक संपर्क और सीमित सहयोग मौजूद था। शीत युद्ध की समाप्ति और वैश्विक राजनीतिक बदलावों के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति में व्यावहारिकता को प्राथमिकता देते हुए इज़राइल के साथ खुले तौर पर संबंध स्थापित किए।

वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक इज़राइल यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा दी। वह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली स्वतंत्र इज़राइल यात्रा थी। इसके बाद जनवरी 2018 में इज़राइल के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा ने इस संबंध को और सुदृढ़ किया। तब से दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद, रक्षा समझौते, तकनीकी सहयोग और निवेश में निरंतर वृद्धि देखी गई है।

इस दौरे का राजनीतिक और सामरिक महत्व

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। गाज़ा में जारी संघर्ष, ईरान-इज़राइल तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता ने वैश्विक शक्तियों का ध्यान आकर्षित किया है। भारत, जो ऊर्जा आपूर्ति, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और रणनीतिक हितों के कारण इस क्षेत्र से गहराई से जुड़ा है, संतुलित और सक्रिय कूटनीति की राह पर चल रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान इज़राइल की संसद, यानी Knesset को संबोधित करेंगे। यह संबोधन दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा चुनौतियों और भविष्य की साझेदारी के दृष्टिकोण को दर्शाएगा। संसद में उनका भाषण भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं और इज़राइल के साथ गहराते संबंधों का स्पष्ट संदेश देगा।

उच्च स्तरीय वार्ताएं: नेतन्याहू और हर्ज़ोग से मुलाकात

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ व्यापक वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच पहले भी कई बार बातचीत हो चुकी है, जिसमें विशेष रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और तकनीकी साझेदारी जैसे विषय शामिल रहे हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष जून में शुरू हुए इज़राइल-ईरान तनाव के बाद दोनों नेताओं के बीच दो बार टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। इस बार की आमने-सामने की मुलाकात में पश्चिम एशिया की स्थिति, गाज़ा संकट, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर पड़ रहे प्रभाव जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी इज़राइल के राष्ट्रपति Isaac Herzog से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति से भेंट के दौरान सांस्कृतिक संबंधों, शैक्षणिक आदान-प्रदान और जनता-से-जनता के संपर्क को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

रक्षा सहयोग: रणनीतिक साझेदारी का आधार

भारत और इज़राइल के संबंधों में रक्षा क्षेत्र एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरा है। इज़राइल भारत को अत्याधुनिक रक्षा उपकरण, ड्रोन प्रणाली, मिसाइल तकनीक और निगरानी उपकरण उपलब्ध कराता रहा है। भारत के सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में इज़राइल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान एवं विकास पर भी बल दिया गया है। भारत की स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली ‘Sudarshan Chakra’ के विकास में आधुनिक तकनीकी सहयोग पर चर्चा की संभावना है। साथ ही, भारत इज़राइल की प्रसिद्ध वायु रक्षा प्रणाली Iron Dome के कुछ तकनीकी तत्वों को समझने और संभावित रूप से अपनाने की दिशा में विचार कर रहा है।

नवंबर 2025 में भारत के रक्षा सचिव की इज़राइल यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसने रक्षा सहयोग को और मजबूती प्रदान की। इस समझौते के तहत संयुक्त उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है।

साइबर सुरक्षा और तकनीकी नवाचार

डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में सहयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। इज़राइल को स्टार्टअप नेशन के रूप में जाना जाता है और साइबर सुरक्षा, कृषि तकनीक, जल संरक्षण और मेडिकल इनोवेशन में उसकी विशेषज्ञता विश्व स्तर पर मान्य है।

भारत, जो डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर है, इज़राइल के साथ साझेदारी को और गहरा करना चाहता है। दोनों देश संयुक्त स्टार्टअप इनक्यूबेशन, रिसर्च सेंटर और नवाचार कोष स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं।

व्यापार और निवेश: बढ़ती आर्थिक साझेदारी

भारत और इज़राइल के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि हो रही है। हीरा व्यापार के अलावा अब रक्षा उपकरण, कृषि तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार हुआ है। दोनों देश मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी चर्चा कर रहे हैं, जिससे व्यापारिक बाधाएं कम हो सकती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान व्यापार प्रतिनिधिमंडल की बैठकें आयोजित की जाएंगी, जहां निवेश के नए अवसरों पर चर्चा होगी। विशेष रूप से हरित ऊर्जा, जल प्रबंधन, स्मार्ट सिटी और कृषि तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

कृषि और जल प्रबंधन में सहयोग

भारत के कई राज्यों में इज़राइल की सहायता से कृषि उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां आधुनिक सिंचाई तकनीक, ड्रिप इरिगेशन और उच्च उत्पादकता वाले बीजों का प्रयोग किया जा रहा है। जल संरक्षण और पुनर्चक्रण तकनीक में इज़राइल की विशेषज्ञता भारत के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई है।

इस दौरे के दौरान इन परियोजनाओं के विस्तार और नई पहल शुरू करने पर भी चर्चा हो सकती है। विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए जल प्रबंधन मॉडल को अपनाने पर बल दिया जाएगा।

क्षेत्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य

पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत संतुलित कूटनीति का पालन कर रहा है। एक ओर भारत के इज़राइल के साथ गहरे संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर वह अरब देशों और ईरान के साथ भी मजबूत संबंध बनाए हुए है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की बहुआयामी विदेश नीति का उदाहरण है, जिसमें राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।

इज़राइल के साथ सहयोग से भारत की रक्षा क्षमता मजबूत होगी, वहीं तकनीकी और आर्थिक क्षेत्रों में भी प्रगति को बल मिलेगा। साथ ही, यह दौरा वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी दर्शाता है।

जनता-से-जनता संपर्क और सांस्कृतिक संबंध

भारत और इज़राइल के बीच सांस्कृतिक संबंध भी मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आदान-प्रदान बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक इज़राइल जाते हैं, जबकि इज़राइली युवा भी भारत के विभिन्न राज्यों में यात्रा करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय से मुलाकात का कार्यक्रम भी संभावित है, जिससे प्रवासी भारतीयों के साथ संबंध और मजबूत होंगे।

भविष्य की दिशा

इस यात्रा से स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत और इज़राइल अपने संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रक्षा, तकनीक, व्यापार, कृषि और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है, जिसके माध्यम से भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को सशक्त बना रहा है। इज़राइल के साथ मजबूत साझेदारी भारत की सामरिक और आर्थिक क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

BiharNewsPost
The BiharNews Post

बिहार न्यूज़ पोस्ट - बिहार का नं. 1 न्यूज़ पोर्टल !

More from खबर बिहार कीMore posts in खबर बिहार की »