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Amit Shah Bengal Visit: मायापुर इस्कॉन मुख्यालय में करेंगे पूजा-अर्चना, भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर की 152वीं जयंती में शामिल होंगे गृह मंत्री

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah बुधवार को पश्चिम बंगाल के एक महत्वपूर्ण लेकिन गैर-राजनीतिक दौरे पर आ रहे हैं। इस बार उनका कार्यक्रम पूरी तरह धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप का है। वह नदिया जिले के मायापुर स्थित विश्वप्रसिद्ध International Society for Krishna Consciousness (इस्कॉन) के वैश्विक मुख्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में शामिल होंगे। भाजपा नेताओं ने स्पष्ट किया है कि इस यात्रा में किसी भी प्रकार की राजनीतिक सभा, संगठनात्मक बैठक या चुनावी कार्यक्रम शामिल नहीं है।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य की राजनीतिक हलचल तेज है, लेकिन गृह मंत्री का यह कार्यक्रम आध्यात्मिक महत्व से जुड़ा हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर इस यात्रा को अत्यंत संवेदनशील मानते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

दोपहर 1:35 बजे कोलकाता आगमन, बीएसएफ हेलीकॉप्टर से मायापुर प्रस्थान

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अमित शाह दोपहर 1:35 बजे विशेष विमान से कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगे। वहां से वह सीधे बीएसएफ के हेलीकॉप्टर से नदिया जिले के मायापुर के लिए रवाना होंगे। दोपहर 2:25 बजे से शाम 4:25 बजे तक वह इस्कॉन मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे।

करीब दो घंटे के प्रवास के दौरान वह विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे, संतों से मुलाकात करेंगे और आध्यात्मिक नेता की जयंती पर आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वह पुनः हेलीकॉप्टर से कोलकाता एयरपोर्ट लौटेंगे और वहीं से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

मायापुर: इस्कॉन का वैश्विक मुख्यालय और आध्यात्मिक केंद्र

नदिया जिले का मायापुर विश्वभर में गौड़ीय वैष्णव परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। यही International Society for Krishna Consciousness (इस्कॉन) का वैश्विक मुख्यालय है, जिसकी स्थापना A. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada ने की थी। मायापुर में स्थित भव्य मंदिर परिसर न केवल भारत, बल्कि अमेरिका, यूरोप, रूस, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है।

अमित शाह का यह दौरा मायापुर के धार्मिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक रेखांकित करता है। भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के कुछ वरिष्ठ नेताओं के भी उनके साथ मौजूद रहने की संभावना है, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि सीमित ही है।

शंखभवन और पद्मभवन में विशेष बैठक

सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री सबसे पहले इस्कॉन परिसर स्थित शंखभवन जाएंगे, जहां संतों और वरिष्ठ धार्मिक पदाधिकारियों के साथ उनकी एक विशेष बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद वे पद्मभवन का दौरा करेंगे। इस दौरान संगठन की आध्यात्मिक गतिविधियों, सामाजिक सेवाओं और वैश्विक विस्तार को लेकर चर्चा हो सकती है।

इसके बाद अमित शाह Bhaktisiddhanta Sarasvati Thakur की 152वीं जयंती पर आयोजित मुख्य समारोह में शामिल होंगे। भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर गौड़ीय वैष्णव परंपरा के प्रमुख आचार्य थे और इस्कॉन की वैचारिक परंपरा के आधार स्तंभ माने जाते हैं।

स्वामी प्रभुपाद को पुष्पांजलि, मंदिरों में पूजा-अर्चना

मंदिर परिसर में गृह मंत्री A. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके साथ ही वे भगवान नरसिंह, चैतन्य महाप्रभु और राधा-माधव के मंदिरों में जाकर विधिवत पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे।

यह कार्यक्रम धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस्कॉन के अनुयायियों के लिए यह अवसर विशेष उत्साह का विषय है, क्योंकि देश के गृह मंत्री स्वयं इस आयोजन में शामिल होकर आध्यात्मिक परंपरा के प्रति सम्मान प्रकट करेंगे।

पहले भी कर चुके हैं बंगाल का दौरा

गौरतलब है कि अमित शाह इससे पहले 31 जनवरी को पश्चिम बंगाल आए थे। उस दौरान उन्होंने उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर स्थित आनंदपुरी मैदान में सभा को संबोधित किया था और बाद में सिलीगुड़ी में कार्यकर्ता सम्मेलन में हिस्सा लिया था। उस दौरे का स्वरूप पूरी तरह राजनीतिक था।

हालांकि इस बार उनके आधिकारिक कार्यक्रम में किसी राजनीतिक गतिविधि का उल्लेख नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह दौरा विशुद्ध रूप से धार्मिक कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है।

नदिया जिला प्रशासन और पुलिस हाई अलर्ट पर

गृह मंत्री के आगमन को देखते हुए नदिया जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और प्रवेश द्वारों पर कड़ी जांच की व्यवस्था की गई है।

राज्य पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड में हैं। वीआईपी मूवमेंट के मद्देनजर यातायात व्यवस्था में भी अस्थायी बदलाव किए जा सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने आम श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की है।

ममता बनर्जी का बड़ा आरोप: ‘AI के जरिए 58 लाख वोटरों के नाम काटे’, चुनाव आयोग को बताया ‘टॉर्चर कमीशन’

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो Mamata Banerjee ने चुनावी माहौल के बीच बड़ा राजनीतिक विस्फोट करते हुए Election Commission of India पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में मतदाता सूची से 58 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं और इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने आयोग को “तुगलकी” और “सो कॉल्ड टॉर्चर कमीशन” तक कह डाला।

कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय नबान्न में आयोजित एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र के मूल अधिकारों से खिलवाड़ किया जा रहा है और यह सब एक राजनीतिक एजेंडे के तहत हो रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी Bharatiya Janata Party पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की आईटी सेल से जुड़े लोग तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर मतदाता सूची में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

58 लाख वोटरों के नाम हटाने का आरोप

ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा की आईटी सेल की एक महिला पदाधिकारी ने AI तकनीक का इस्तेमाल कर पश्चिम बंगाल में लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम हटवा दिए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “लोकतंत्र में वोट देने का अधिकार सबसे बड़ा अधिकार है। अगर मतदाता सूची से लाखों लोगों के नाम हटा दिए जाएं, तो यह सीधे-सीधे लोकतंत्र पर हमला है।”

हालांकि, इस दावे पर चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह बयान तीखी बहस का विषय बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग Supreme Court of India के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग मतदाताओं को “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” के नाम पर परेशान कर रहा है और वैध दस्तावेजों को भी अस्वीकार कर रहा है।

ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के दौरान राज्य में भारी दबाव और भय का माहौल बना। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के चलते डर और तनाव की वजह से 160 लोगों की जान चली गई।

हालांकि इन मौतों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे “लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला” करार दिया।

एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में व्यापक पैमाने पर नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी और भाजपा के निर्देश पर की गई।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है, तो राज्य सरकार उन अधिकारियों की रक्षा करेगी। इतना ही नहीं, उन्होंने घोषणा की कि जिन अधिकारियों को आयोग ने डिमोट किया है, उन्हें राज्य सरकार प्रमोशन देगी।

यह बयान अपने आप में असाधारण है और इससे केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव बढ़ने की आशंका है।

“तुगलकी कांड” और “हिटलरी अत्याचार” जैसे शब्दों का इस्तेमाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने चुनाव आयोग को “सो कॉल्ड टॉर्चर कमीशन” बताते हुए कहा कि वह इसे चुनाव आयोग कहने को तैयार नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “यह तुगलकी कांड है। हिटलरी अत्याचार हो रहे हैं। जनता वोट देकर सरकार चुनती है या कोई आयोग पहले से तय कर देता है कि किसे फायदा पहुंचाना है?”

मुख्यमंत्री के इस बयान से राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।

बिहार और हरियाणा का उदाहरण

ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि अगर बिहार में एसआईआर के दौरान कुछ दस्तावेज मान्य थे, तो वही दस्तावेज पश्चिम बंगाल में अमान्य क्यों कर दिए गए? उन्होंने कहा कि हरियाणा और बिहार में भी इस प्रक्रिया के खिलाफ शिकायतें आई थीं।

उन्होंने कहा, “सच को कोई दबा नहीं सकता। आज नहीं तो कल, सच सामने आएगा।”

बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर: कई प्रमुख चेहरे BJP में शामिल

कोलकाता, 17 फरवरी 2026 : पश्चिम बंगाल में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) से पहले आज राजनीति में बड़ा बदलाव देखा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मंगलवार को कोलकाता स्थित अपनी पार्टी मुख्यालय में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें कई जाने-माने सार्वजनिक हस्तियों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस कार्यक्रम में बीजेपी के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और पार्टी के राज्य अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

बीजेपी में शामिल हुए प्रमुख चेहरे

  1. दीपांजन चक्रवर्ती
    पूर्व नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) कमांडर और देश के पूर्व अंडरकवर एजेंट रहे चक्रवर्ती आज भाजपा में शामिल हुए। उन्हें सुरक्षा और खुफिया मामलों में लंबे अनुभव के लिए जाना जाता है।
  2. बिप्लब बिस्वास
    CRPF (सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स) के पूर्व DSP अधिकारी रहे बिस्वास ने भी आज भाजपा का दामन थामा। उनके जुड़ने से पार्टी को सुरक्षा-सेवा क्षेत्र के समर्थक वोटरों तक पहुंच बढ़ाने की उम्मीद है।
  3. कस्तूरी गोस्वामी
    पश्चिम बंगाल के दिग्गज लेफ्ट-फ्रंट नेता और पूर्व मंत्री खिती गोस्वामी की पुत्री कस्तूरी गोस्वामी ने भी भाजपा में शामिल होकर राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है।

प्रेस कॉन्फ़्रेंस में विवादित आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर जनता उन्नयन पार्टी (JUP) से जुड़े विधायक हुमायूं कबीर पर निशाना साधा। अधिकारी ने दावा किया कि मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने से पहले कबीर कई दिनों तक बांग्लादेश में थे और उनके बैंक खाते में बांग्लादेश से पैसे आ रहे हैं। उन्होंने इस मामले की गहन जांच कराने की मांग की।

India AI Impact Summit 2026: बिहार को ₹468 करोड़ का निवेश, IIT पटना में बनेगा रिसर्च पार्क और एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

नई दिल्ली : नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit & Expo 2026 के दौरान बिहार सरकार ने तकनीकी क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने कुल 468 करोड़ के निवेश समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे बिहार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिसर्च, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इनोवेशन को नई गति मिलेगी।

इस मौके पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और आईटी मंत्री श्रेयसी सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ समझौते किए। सरकार का दावा है कि इन निवेशों से 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे और हजारों युवाओं को हाई-टेक स्किल ट्रेनिंग मिलेगी।

IIT पटना में बनेगा 250 करोड़ का रिसर्च पार्क

सबसे बड़ा समझौता IIT Patna में ₹250 करोड़ के रिसर्च पार्क की स्थापना को लेकर हुआ है। यह पार्क शिक्षा और उद्योग के बीच एक सेतु का कार्य करेगा।

रिसर्च पार्क में स्थापित होंगी:

  • एआई और मशीन लर्निंग लैब
  • स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर
  • इंडस्ट्री-एकेडमिक कोलैबोरेशन हब
  • हाई-परफॉर्मेंस डेटा सेंटर

इस पहल से बिहार को पूर्वी भारत के प्रमुख टेक्नोलॉजी और रिसर्च हब के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

60 करोड़ का एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

बिहार सरकार ने 60 करोड़ की लागत से एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। इसमें Tiger Analytics उद्योग साझेदार और IIT Patna शैक्षणिक सहयोगी होंगे।

यह सेंटर:

  • युवाओं को डेटा साइंस और एआई में प्रशिक्षण देगा
  • एग्रीटेक, हेल्थटेक और ई-गवर्नेंस समाधान विकसित करेगा
  • स्टार्टअप्स को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में 50,000 से अधिक युवाओं को एआई आधारित कौशल प्रशिक्षण दिया जाए।

पटना में CIPL का कोर डेवलपमेंट सेंटर

Corporate Infotech Pvt Ltd (CIPL) ने बिहार सरकार के साथ समझौता कर पटना में कोर डेवलपमेंट सेंटर और एआई हब स्थापित करने की घोषणा की है।

इस परियोजना के तहत:

  • SAP आधारित एंटरप्राइज सॉल्यूशंस
  • क्लाउड कंप्यूटिंग
  • साइबर सुरक्षा
  • डेटा सेंटर सेवाएं

विकसित की जाएंगी। अगले पांच वर्षों में इस परियोजना से लगभग 2000 आईटी पेशेवरों को रोजगार मिलने की संभावना है।

अन्य कंपनियों से भी निवेश

बिहार सरकार ने निम्न कंपनियों के साथ भी निवेश समझौते किए हैं:

  • Red Cyber – 103 करोड़
  • GrowQR – 30 करोड़

इन निवेशों से राज्य में साइबर सुरक्षा, फिनटेक और डिजिटल पेमेंट सेक्टर को मजबूती मिलेगी।

नई आईटी नीतियों का प्रभाव

बिहार सरकार ने हाल ही में कई नई नीतियाँ लागू की हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • Bihar GCC Policy 2026
  • Bihar Semiconductor Policy 2026
  • Bihar IT Policy 2024

इन नीतियों के तहत निवेशकों को टैक्स छूट, इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट और भूमि आवंटन जैसी सुविधाएँ दी जाएंगी।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार अब केवल श्रम आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ज्ञान आधारित और डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ेगा। आईटी मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि राज्य के युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीकी शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

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Muzaffarpur Bribery Case: जिला कृषि पदाधिकारी हिमांशु कुमार 50 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार, SVU की बड़ी कार्रवाई

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में कृषि विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रभारी जिला कृषि पदाधिकारी हिमांशु कुमार और उनके ड्राइवर रामबाबू राय को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई ने न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि पूरे बिहार में प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत से गिरफ्तारी तक: कैसे बिछाया गया जाल

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक खाद दुकानदार की शिकायत से हुई। दुकानदार ने पटना स्थित विशेष निगरानी इकाई के कार्यालय में लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया कि जिला कृषि कार्यालय की ओर से उसे लगातार परेशान किया जा रहा है। शिकायत के मुताबिक, जांच के नाम पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था और दुकान का लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी जा रही थी।

दुकानदार ने आरोप लगाया कि मामले को “सुलझाने” के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई। यह रकम सीधे अधिकारी की बजाय उनके ड्राइवर के माध्यम से मांगी गई थी। आरोप यह भी था कि यदि तय रकम नहीं दी गई तो लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा, जिससे उसका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो सकता था।

शिकायत मिलते ही SVU ने मामले को गंभीरता से लिया और प्राथमिक स्तर पर गुप्त सत्यापन (वेरिफिकेशन) कराया। सत्यापन के दौरान शिकायत में प्रथमदृष्टया सच्चाई पाई गई। इसके बाद अधिकारियों ने ट्रैप कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।

ट्रैप टीम का गठन और सुनियोजित कार्रवाई

SVU ने इस ऑपरेशन के लिए एक विशेष धावा दल (ट्रैप टीम) का गठन किया। पुलिस उपाधीक्षक बिंदेश्वर प्रसाद और सुधीर कुमार के नेतृत्व में पूरी रणनीति तैयार की गई। टीम ने परिवादी (शिकायतकर्ता) को आवश्यक निर्देश दिए और तय योजना के अनुसार कार्रवाई का समय निर्धारित किया।

मंगलवार को मुजफ्फरपुर में पूरे प्लान के तहत जाल बिछाया गया। परिवादी को केमिकल-ट्रीटेड नोट दिए गए ताकि लेन-देन की पुष्टि वैज्ञानिक तरीके से की जा सके। जैसे ही ड्राइवर रामबाबू राय ने परिवादी से 50 हजार रुपये लिए, पहले से घात लगाए टीम के सदस्यों ने मौके पर ही दोनों आरोपियों को दबोच लिया।

मौके पर ही केमिकल टेस्ट (फेनॉलफ्थलीन परीक्षण) किया गया। परीक्षण में नोटों के संपर्क की पुष्टि हुई, जिससे रिश्वत लेने के आरोप की पुष्टि हो गई। टीम ने मौके से आवश्यक दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी जब्त किए।

कानूनी कार्रवाई: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

इस मामले में पटना निगरानी थाना में कांड संख्या 06/26 दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह धारा लोक सेवक द्वारा अवैध रूप से रिश्वत लेने या मांगने से संबंधित है।

फिलहाल दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह मामला अकेला है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

एक महीने में दूसरी बड़ी गिरफ्तारी

मुजफ्फरपुर कृषि विभाग में यह एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार को 18 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी।

उल्लेखनीय है कि उनकी गिरफ्तारी के बाद ही हिमांशु कुमार को जिला कृषि पदाधिकारी का प्रभार सौंपा गया था। लेकिन अब उनके खिलाफ भी इसी तरह के आरोप सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लगातार दूसरी गिरफ्तारी ने यह संकेत दिया है कि समस्या केवल व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवस्था के स्तर पर भी सुधार की आवश्यकता है।

लाइसेंस रद्द करने की धमकी: कारोबारियों में दहशत

खाद दुकानदारों का लाइसेंस कृषि विभाग द्वारा जारी किया जाता है। लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में संबंधित दुकानदार का पूरा व्यापार बंद हो सकता है। ऐसे में जांच के नाम पर दबाव बनाना और रिश्वत की मांग करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि कई बार छोटे व्यवसायियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। हालांकि, कई दुकानदार खुलकर सामने आने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन्हें प्रशासनिक प्रताड़ना का डर रहता है।

संपत्ति की जांच और आय से अधिक संपत्ति की पड़ताल

SVU की टीम अब आरोपियों की चल-अचल संपत्ति की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के आवास और अन्य ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के संकेत मिलते हैं तो अलग से मामला दर्ज किया जा सकता है।

जांच एजेंसी बैंक खातों, निवेश, अचल संपत्ति और परिजनों के नाम पर की गई संपत्तियों की भी पड़ताल कर सकती है। यदि बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।

Bhagalpur कलेक्ट्रेट को बम से उड़ाने की धमकी से दहला प्रशासन, हाई अलर्ट पर पुलिस; ईमेल भेजने वाले की तलाश तेज

बिहार के ऐतिहासिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर Bhagalpur में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब जिले के सबसे अहम प्रशासनिक केंद्र—समाहरणालय (कलेक्ट्रेट)—को बम से उड़ाने की धमकी मिलने की खबर सामने आई। ईमेल के जरिए भेजी गई इस सनसनीखेज धमकी ने न सिर्फ जिला प्रशासन बल्कि आम लोगों के बीच भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया। सूचना मिलते ही प्रशासनिक महकमा हरकत में आ गया और पूरे परिसर को तत्काल प्रभाव से खाली कराकर सुरक्षा घेरे में ले लिया गया।

ईमेल से मिली धमकी, तुरंत मचा हड़कंप

जानकारी के मुताबिक, समाहरणालय के आधिकारिक ईमेल पर एक धमकी भरा संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें दावा किया गया कि कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर विस्फोटक सामग्री रखी गई है और जल्द ही बड़ा धमाका किया जाएगा। संदेश में स्पष्ट रूप से प्रशासनिक भवन को निशाना बनाने की बात कही गई थी। जैसे ही यह ईमेल संबंधित अधिकारियों की नजर में आया, पूरे सिस्टम में अफरा-तफरी मच गई।

धमकी की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचित किया गया। कुछ ही मिनटों में पुलिस बल, बम निरोधक दस्ता (BDDS), डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई। एहतियातन पूरे कलेक्ट्रेट परिसर को खाली करा लिया गया और वहां मौजूद कर्मचारियों, अधिकारियों व आम नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया।

चप्पे-चप्पे की तलाशी, सील किया गया परिसर

सुरक्षा के मद्देनजर समाहरणालय के सभी प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए गए। परिसर के अंदर और बाहर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई। हर आने-जाने वाले व्यक्ति की सघन तलाशी ली जाने लगी। पार्किंग में खड़ी गाड़ियों की जांच की गई, फाइलों के ढेर, कमरों, शौचालयों, सीढ़ियों, छतों और यहां तक कि झाड़ियों तक को खंगाला गया।

बम निरोधक दस्ते ने अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से संदिग्ध स्थानों की जांच की। डॉग स्क्वायड की टीम ने भी विस्फोटक की मौजूदगी का पता लगाने के लिए पूरे परिसर का निरीक्षण किया। कई घंटों तक चले इस सर्च ऑपरेशन के दौरान प्रशासनिक भवन के आसपास का इलाका पूरी तरह पुलिस छावनी में तब्दील रहा।

वरिष्ठ अधिकारी मौके पर, खुद कर रहे निगरानी

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। डीएसपी ट्रैफिक और शहरी क्षेत्र के डीएसपी ने सर्च ऑपरेशन की कमान संभाली। पूरे अभियान की निगरानी उच्च स्तर पर की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरे परिसर की पूरी तरह से जांच नहीं हो जाती और ‘क्लीन चिट’ नहीं मिल जाती, तब तक अलर्ट जारी रहेगा।

सिविल कोर्ट के बाद अब कलेक्ट्रेट निशाने पर

गौरतलब है कि हाल के दिनों में सरकारी संस्थानों और अदालतों को धमकी भरे ईमेल भेजने का सिलसिला बढ़ा है। कुछ दिन पहले भागलपुर सिविल कोर्ट को भी इसी तरह बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। अब सीधे कलेक्ट्रेट को निशाना बनाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

पिछले दो सप्ताह के दौरान बिहार के कई जिलों में अदालतों और सरकारी दफ्तरों को ईमेल के जरिए धमकियां मिलने की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में जांच के बाद धमकी झूठी पाई गई, लेकिन प्रशासन कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।

साइबर सेल सक्रिय, ईमेल भेजने वाले की तलाश

धमकी भरे ईमेल की जांच के लिए पुलिस की साइबर सेल को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। तकनीकी टीम ईमेल के स्रोत, आईपी एड्रेस और सर्वर लोकेशन का पता लगाने में जुटी है। प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह किसी असामाजिक तत्व की शरारत भी हो सकती है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करना और भय का माहौल बनाना है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ईमेल की डिजिटल फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यदि यह फर्जी धमकी साबित होती है, तब भी संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आईटी एक्ट और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।

आम जनता से शांति बनाए रखने की अपील

घटना के बाद जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी साझा करने से बचें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा के सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

कलेक्ट्रेट परिसर और उसके आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया जा सके। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।

कर्मचारियों में दहशत, कामकाज प्रभावित

धमकी के कारण समाहरणालय में कामकाज कुछ समय के लिए पूरी तरह ठप हो गया। कई कर्मचारी भयभीत नजर आए। आमतौर पर रोजाना सैकड़ों लोग विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से प्रवेश सीमित कर दिया गया। कई जरूरी फाइलों और जनसेवा से जुड़े कार्यों में अस्थायी व्यवधान पड़ा।

हालांकि प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सुरक्षा जांच पूरी होते ही कामकाज सामान्य कर दिया जाएगा।

कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल

लगातार मिल रही धमकियों ने राज्य की कानून-व्यवस्था और साइबर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर इस तरह की धमकियां देना नई चुनौती बनती जा रही है। ऐसे मामलों में तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।

पुलिस की सख्त चेतावनी

पुलिस ने साफ कहा है कि इस तरह की झूठी धमकी देकर दहशत फैलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यदि यह किसी की शरारत साबित होती है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर भी इस घटना की जानकारी साझा की गई है और जरूरत पड़ने पर विशेष एजेंसियों की मदद ली जाएगी।

भारतीय शेयर बाज़ार में मिली-जुली चाल: सेंसेक्स और निफ़्टी दूसरे दिन भी बढ़त पर बंद

मुंबई, १७ फ़रवरी २०२६: भारतीय शेयर बाज़ार ने मंगलवार को बाजार खुलने पर नरमी के बीच शुरुआती गिरावट को पार करते हुए आखिरकार मजबूती दिखाई और प्रमुख सूचकांक BSE सेंसेक्स और NSE Nifty 50 ने लाभ के साथ सत्र समाप्त किया।

बाज़ार शुरुआत में कमजोरी के साथ गिरावट में खुला — निफ़्टी 50 खुलते समय लगभग 25,600 के स्तर के नीचे व्यापार कर रहा था और सेंसेक्स लगभग 200 अंकों की गिरावट के साथ लाल निशान में था।

लेकिन जैसे-जैसे दिन चला, खरीदारी का दबाव बढ़ा और निवेशकों ने मजबूत बाजार संकेतों की ओर रुख किया। अंत में निफ़्टी 50 25,700 के ऊपर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स लगभग 174 अंकों की बढ़त के साथ सकारात्मक क्षेत्र में बंद हुआ।

बाज़ार का विस्तृत प्रदर्शन

📊 मुख्य सूचकांकों की स्थिति:

  • BSE सेंसेक्स: लगभग 83,450 के स्तर पर बंद, 170+ अंकों की वृद्धि।
  • NSE Nifty 50: करीब 25,725 के स्तर पर बंद, 40+ अंकों की बढ़त।

दिन भर में बाजार ने तकनीकी समर्थन स्तर पर मजबूती पाई और निवेशक सकारात्मक रुख अपनाया, खासकर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और PSU बैंक क्षेत्रों में लाभ के साथ।

ख़ास क्षेत्रों और शेयरों की चाल

सेक्टरल प्रदर्शन:

  • PSU बैंक इंडेक्स ने लगभग 2% की मजबूती दिखायी।
  • IT क्षेत्र में लगभग 1% की बढ़त दर्ज हुई।
  • मेटल और रियल्टी क्षेत्र हल्की गिरावट के साथ पीछे रहे।

कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों ने भी मजबूती दिखाई, जिसमें आडानी उद्यम, आईटीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फ़ोसिस शामिल रहे। वहीं हिंदालको इंडस्ट्रीज़, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और टाटा स्टील जैसे शेयरों ने कुछ दबाव भी देखा।

बिहार सरकार ने मांस और मछली की खुले में बिक्री पर प्रतिबंध लगाया

पटना, 17 फरवरी 2026: बिहार सरकार ने राज्य में मांस और मछली की खुले में (सड़क, फुटपाथ या खुले बाजार सहित) बिक्री पर पाबंदी लगा दी है। यह नया फैसला जनसाधारण स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।

राज्य के डिप्टी चीफ मिनिस्टर विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि अब से केवल लाइसेंसधारी एवं मान्यता प्राप्त दुकानदारों को ही मांस और मछली बेचने की अनुमति होगी। बिना लाइसेंस के किसी भी प्रकार की खुले में बिक्री को कानूनी अपराध माना जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

📌 संक्षेप:
✔️ बिहार में अब सड़क, फुटपाथ या खुले स्थानों पर मांस / मछली नहीं बेची जा सकेगी।
✔️ केवल लाइसेंसधारी दुकानें ही मांस और मछली बेच सकेंगी।
✔️ नियम तोड़ने पर जुर्माना और सख्त कार्रवाई होगी।

सरकार ने यह भी कहा है कि नियम पालन न करने वाले दुकानदारों पर जुर्माना या अन्य दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे ताकि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी और स्वास्थ्य जोखिम न फैले। साथ ही मांस की बिक्री के लिए निर्धारित मानकों और स्वच्छता नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

इस निर्णय को लागू करने के पीछे सरकार का उद्देश्य न केवल स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों को मजबूत करना है, बल्कि राजकीय प्रक्रियाओं के तहत व्यवसायिक गतिविधियों को भी व्यवस्थित करना है।

मुजफ्फरपुर के थाना बेला में पुलिसकर्मी पर फायरिंग, कुख्यात अपराधी गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर, 17 फरवरी 2026 – मंगलवार को मुजफ्फरपुर के बेला थाना क्षेत्र में एक गंभीर अपराध की घटना सामने आई जहां बाइक सवार अपराधियों ने पुलिस के एक मुंशी पर गोलियां चलाईं। घटना में घायल पुलिसकर्मी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

घटना के अनुसार, बेला थाना के मुंशी विकास कुमार सिंह पर अचानक बाइक से आए हमलावरों ने फायरिंग की। गोली पेट के पास लगी, जिससे वह भारी घायल होकर जमीन पर गिर गए। यह मामला उस समय सामने आया जब पुलिस साइबर फ्रॉड के संदिग्धों पर छापेमारी कर रही थी।

📍 घटना के मुख्य बिंदु

  • बाइक से आए अपराधियों ने पहले बिना चेतावनी फायरिंग शुरू कर दी, जिससे माहौल फौरन अफरातफरी वाला हो गया
  • घायल मुंशी विकास कुमार सिंह को जैसे-तैसे अन्य पुलिस कर्मियों ने अस्पताल ले जाया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
  • पुलिस की त्वरित कार्रवाई में एक आरोपी पप्पू सहनी को पकड़ लिया गया, जो कुख्यात पंकज सहनी गिरोह से जुड़ा बताया जा रहा है। पिछले मामलों में वह पहले भी साइबर फ्रॉड में जेल जा चुका है
  • पकड़े गए आरोपी के पास से एक हथियार बरामद हुआ है, जिसे सबूत के रूप में जप्त कर आगे की छानबीन की जा रही है।

🛑 पुलिस का बयान

तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुमार ने बताया कि पुलिस की छापेमारी के दौरान अपराधियों ने फायरिंग की थी। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपी के बारे में पहले से जानकारी थी और अब मामले की आगे की जांच जारी है।

बारिश बनी ऑस्ट्रेलिया की दुश्मन: ZIM vs IRE मैच रद्द, ऑस्ट्रेलिया को T20 World Cup 2026 से बाहर

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ग्रुप बी से एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब जिम्बाब्वे और आयरलैंड के बीच खेला जाने वाला अहम मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो गया। इस एक मैच के धुलने से पूरे ग्रुप का समीकरण बदल गया और सबसे बड़ा झटका ऑस्ट्रेलिया को लगा। एक समय खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही ऑस्ट्रेलियाई टीम का सफर अब इस टूर्नामेंट में समाप्त हो चुका है।

बारिश के कारण मैच रद्द होने पर दोनों टीमों—Zimbabwe national cricket team और Ireland cricket team—को एक-एक अंक मिला। इस अतिरिक्त अंक ने जिम्बाब्वे को सुपर 8 में पहुंचा दिया, जबकि ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फिर गया। ग्रुप बी से पहले ही Sri Lanka national cricket team ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर क्वालीफाई कर लिया था। अब जिम्बाब्वे के पांच अंकों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचते ही ऑस्ट्रेलिया का बाहर होना तय हो गया।

बारिश ने बदला टूर्नामेंट का पूरा गणित

क्रिकेट में मौसम का दखल कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब किसी बड़े टूर्नामेंट में बारिश किसी टीम की किस्मत तय कर दे, तो चर्चा होना लाजमी है। जिम्बाब्वे और आयरलैंड के बीच यह मुकाबला ग्रुप बी के लिए निर्णायक साबित होने वाला था। ऑस्ट्रेलिया की नजरें इसी मैच पर टिकी थीं, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि आयरलैंड जिम्बाब्वे को हराएगा और उसके लिए सेमीफाइनल की राह खुल सकती है।

लेकिन मौसम ने सारी रणनीतियों को ध्वस्त कर दिया। लगातार बारिश के कारण मैच में टॉस तक संभव नहीं हो सका और अंपायरों ने अंततः मुकाबला रद्द घोषित कर दिया। इस फैसले के साथ ही जिम्बाब्वे को मिला एक अंक उसे पांच अंकों तक ले गया और वह सुपर 8 में पहुंच गई।

ऑस्ट्रेलिया के लिए यह परिणाम किसी झटके से कम नहीं था। टीम ने भले ही अपना अंतिम मुकाबला हारकर खुद स्थिति कमजोर की हो, लेकिन उम्मीद की एक किरण इस मैच से जुड़ी थी। वह भी बारिश ने छीन ली।

ग्रुप बी में ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन: उम्मीद से कम, निराशा ज्यादा

इस टी20 वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन उसके कद के अनुरूप नहीं रहा। टीम ने अब तक तीन मुकाबले खेले, जिनमें से सिर्फ एक में जीत हासिल कर सकी।

पहले मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने आयरलैंड को 67 रन से हराकर शानदार शुरुआत की थी। उस मैच में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में संतुलित प्रदर्शन देखने को मिला। ऐसा लगा कि टीम लय में है और आगे मजबूत दावेदारी पेश करेगी।

लेकिन दूसरे ही मैच में जिम्बाब्वे के खिलाफ 23 रन की हार ने टीम को झकझोर दिया। जिम्बाब्वे ने उस मुकाबले में आत्मविश्वास से भरा प्रदर्शन किया और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी को दबाव में ला दिया।

इसके बाद श्रीलंका के खिलाफ तीसरे मुकाबले में भी ऑस्ट्रेलिया को 8 विकेट से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। श्रीलंका ने लक्ष्य का पीछा करते हुए बेहद सहज अंदाज में जीत दर्ज की और ऑस्ट्रेलिया की कमजोरियों को उजागर कर दिया।

तीन मैचों में सिर्फ एक जीत और दो हार के साथ ऑस्ट्रेलिया के खाते में मात्र 2 अंक रहे। नेट रन रेट भी उसके पक्ष में नहीं था। ऐसे में टीम को आगे बढ़ने के लिए दूसरे मैचों के परिणाम पर निर्भर रहना पड़ा—और वहीं किस्मत ने साथ नहीं दिया।

जिम्बाब्वे की ऐतिहासिक छलांग

जिम्बाब्वे ने इस टूर्नामेंट में उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। टीम ने अपने पहले मुकाबले में शानदार जीत दर्ज की और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ी। ऑस्ट्रेलिया जैसी बड़ी टीम को हराकर उसने ग्रुप में हलचल मचा दी।

आयरलैंड के खिलाफ मैच रद्द होने के बावजूद उसे मिला एक अंक उसके लिए वरदान साबित हुआ। कुल 5 अंकों के साथ जिम्बाब्वे ने सुपर 8 में जगह बना ली।

यह उपलब्धि जिम्बाब्वे क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंच पर संघर्ष कर रही इस टीम ने दिखा दिया कि वह बड़े मंच पर भी दबाव झेल सकती है और परिणाम अपने पक्ष में कर सकती है।

श्रीलंका की स्थिरता और दबदबा

ग्रुप बी में श्रीलंका ने शुरुआत से ही संतुलित और आक्रामक क्रिकेट खेला। तीनों मैच जीतकर उसने 6 अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत ने उसकी स्थिति और मजबूत कर दी। बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों ने बेहतरीन तालमेल दिखाया। टीम ने यह साबित कर दिया कि अनुभव और रणनीति का सही इस्तेमाल कैसे किया जाता है।

सुपर 8 में श्रीलंका अब खिताब की प्रबल दावेदारों में से एक मानी जा रही है।

ग्रुप बी की प्वाइंट्स टेबल: एक नजर

ग्रुप बी के अंतिम समीकरण इस प्रकार रहे:

  • श्रीलंका – 3 मैच, 3 जीत, 6 अंक (पहला स्थान)
  • जिम्बाब्वे – 3 मैच, 2 जीत, 1 रद्द, 5 अंक (दूसरा स्थान)
  • आयरलैंड – 3 मैच, 1 जीत, 1 हार, 1 रद्द, 3 अंक (तीसरा स्थान)
  • ऑस्ट्रेलिया – 3 मैच, 1 जीत, 2 हार, 2 अंक (चौथा स्थान)
  • ओमान – 3 मैच, 3 हार, 0 अंक (पांचवां स्थान)

इस तालिका से स्पष्ट है कि ऑस्ट्रेलिया के लिए वापसी का कोई रास्ता नहीं बचा।

बिहार की इस समय की 10 बड़ी खबरें (जिला वार) 17 फरवरी 2026

पटना | 17 फरवरी 2026

बिहार में मंगलवार, 17 फरवरी को अलग-अलग जिलों से कई महत्वपूर्ण खबरें सामने आईं। प्रशासनिक फैसलों से लेकर सड़क हादसे, विकास योजनाओं और कृषि से जुड़ी गतिविधियों तक राज्यभर में हलचल रही। पढ़िए जिला वार पूरी रिपोर्ट—

📍 पटना

राजधानी पटना में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। शिक्षा विभाग में नई बहाली प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और शहरी विकास परियोजनाओं को गति देने पर निर्णय लिया गया। आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और जिला प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने को कहा गया है।

विधानसभा में हंगामा: बिहार विधानसभा में RJD नेताओं ने पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान को “बेचारा” कहे जाने का मुद्दा उठाया, जिससे माहौल गरमा गया और हंगामे के बीच बहस जारी रही।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिजेरियन डिलीवरी सुविधा : बिहार के 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अब सिजेरियन डिलीवरी (cesarean delivery) की सुविधा लागू कर दी गई है। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में महिलाओं को बेहतर मातृ-सेवा मिलेगी और समय रहते चिकित्सा सहायता उपलब्ध होगी।

रेलवे ने बढ़ाए विशेष ट्रेनें (होली के लिए) : रेलवे प्रशासन ने होली मेलों और यात्रियों की भीड़ को देखते हुए 9 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला लिया है। इन ट्रेनों का परिचालन बिहार के प्रमुख रूट्स और पड़ोसी राज्यों के मार्गों पर होगा, जिससे त्योहार सीज़न में सफर आसान होगा।

मैट्रिक परीक्षा की शुरुआत : बिहार में आज से बोर्ड मैट्रिक (10वीं) परीक्षा शुरू हो गई है। परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की बड़ी संख्या के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। विभाग ने परीक्षा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं।

📍 मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर के पताही एयरपोर्ट को फिर से चालू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रनवे निर्माण और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए करोड़ों रुपये की स्वीकृति दी गई है। लंबे समय से बंद पड़े एयरपोर्ट के चालू होने से उत्तर बिहार के लोगों को हवाई यात्रा की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

सड़क हादसा: मुजफ्फरपुर में एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो शिक्षकों की मौत हुई और कई लोग घायल हो गए। घटना की जांच जारी है।

गैरकानूनी गतिविधियों पर कार्रवाई: मुजफ्फरपुर में एक मामला सामने आया है, जिसमें व्यक्ति को गोली मारकर कार से फेंकने की घटना हुई; यह जांच के दायरे में है और पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है।

📍 गया (बोधगया)

पर्यटन नगरी बोधगया में विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पर्यटन सीजन को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। महाबोधि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। होटल व्यवसायियों के अनुसार, इस बार बुकिंग में अच्छी वृद्धि हुई है।

📍 भागलपुर

गंगा नदी का जलस्तर सामान्य बना हुआ है, फिर भी तटवर्ती इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। दूसरी ओर, सिल्क उद्योग से जुड़े व्यापारियों को राज्य सरकार की नई प्रोत्साहन योजना का लाभ मिलने की घोषणा की गई है, जिससे स्थानीय उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

📍 दरभंगा

दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में नई अत्याधुनिक जांच मशीनों की शुरुआत की गई। इससे मरीजों को अब कई महत्वपूर्ण जांचों के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर जिला प्रशासन ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया है।

📍 रोहतास (सासाराम)

सासाराम में एनएच-319 पर देर रात भीषण सड़क हादसा हुआ। बस और ट्रक की टक्कर में दो शिक्षकों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

तीन साल पुराने हत्या मामले में सज़ा : रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र के 2023 के हत्याकांड में अदालत ने अभियुक्त को धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और जुर्माना की सज़ा सुनाई है।

📍 पूर्णिया

पूर्णिया में किसानों के लिए विशेष कृषि शिविर का आयोजन किया गया। कृषि विशेषज्ञों ने आधुनिक खेती तकनीक, फसल विविधीकरण और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। किसानों ने नई तकनीकों में रुचि दिखाई और सरकार से निरंतर सहयोग की मांग की।

📍 सारण (छपरा)

अपराध नियंत्रण अभियान के तहत पुलिस ने छपरा में अवैध हथियार के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।

📍 बेगूसराय

बेगूसराय के औद्योगिक क्षेत्र में नई फैक्ट्री का उद्घाटन हुआ, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। उद्घाटन समारोह में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

📍 भोजपुर (आरा)

जमीन रजिस्ट्री के नए नियमों को लेकर भोजपुर जिले में जागरूकता अभियान चलाया गया। प्रशासन ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए प्रावधानों के तहत रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। लोगों को आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी गई।

📍 जहानाबाद

मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी का खुलासा : प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत चल रहे मध्याह्न (मिडडे मील) कार्यक्रम में जहानाबाद जिले के दो स्कूलों में निरीक्षण के दौरान छात्रों की वास्तविक उपस्थिति और अनुपस्थिति के आंकड़ों में बड़ा अंतर पाया गया है, जिससे विभाग ने चेतावनी जारी की।

सासाराम में आधी रात दर्दनाक सड़क हादसा: शैक्षणिक टूर बस पलटी, दो शिक्षकों की मौत, 11 बच्चे समेत कई घायल

सासाराम/भभुआ: बिहार में एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। सोमवार की देर रात बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में एक भीषण सड़क हादसे में दो शिक्षकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 11 बच्चे और कई शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा परसथूआ थाना क्षेत्र के सोहसा गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 319 (NH-319) पर हुआ, जब छात्रों और शिक्षकों से भरी एक शैक्षणिक टूर बस अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

यह बस कैमूर जिले के चैनपुर अंचल स्थित मध्य विद्यालय बढ़ौना से छात्रों और शिक्षकों को लेकर पटना जा रही थी। हादसा रात करीब 12:30 बजे हुआ, जब अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। अचानक हुए इस हादसे से बस में अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा।

कैसे हुआ हादसा?

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस तेज रफ्तार में थी और अचानक चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया। बताया जा रहा है कि बस सड़क किनारे पलट गई, जिससे उसमें सवार लोग बुरी तरह फंस गए। स्थानीय लोगों के अनुसार टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के आगे और साइड हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

दुर्घटना की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। लोगों ने बस के शीशे तोड़कर घायलों को बाहर निकाला। सूचना मिलते ही परसथूआ थाना की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

बस में कौन-कौन थे सवार?

इस शैक्षणिक भ्रमण पर निकली बस में कुल 44 लोग सवार थे, जिनमें 7 शिक्षक, 36 छात्र और एक अभिभावक शामिल थे। हादसे में दो शिक्षकों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा पांच शिक्षक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि 11 बच्चे जख्मी बताए जा रहे हैं। कई बच्चों को हल्की चोटें आई हैं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया गया है।

मृत शिक्षकों की हुई पहचान

पुलिस ने मृतकों की पहचान कर ली है। हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल हैं:

  • पुनीत कुमार सिन्हा, निवासी बगहवा गांव, जिला मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश)
  • संजय कुमार राय, निवासी भैसहट गांव, थाना चैनपुर, जिला कैमूर (बिहार)

दोनों शिक्षक मध्य विद्यालय बढ़ौना में कार्यरत थे और छात्रों के साथ शैक्षणिक यात्रा पर जा रहे थे। घटना के बाद स्कूल और गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल सासाराम भेज दिया गया है।

परिजनों में मचा कोहराम

जैसे ही हादसे की सूचना मृतकों के परिजनों तक पहुंची, घरों में कोहराम मच गया। पुनीत कुमार सिन्हा और संजय कुमार राय के परिवार के सदस्य सदमे में हैं। ग्रामीणों के अनुसार दोनों शिक्षक अपने व्यवहार और समर्पण के लिए जाने जाते थे।

छात्रों के अभिभावकों में भी भारी चिंता का माहौल है। कई अभिभावक रात में ही अस्पताल पहुंच गए और अपने बच्चों का हाल-चाल लिया। घायलों के परिजन अस्पताल के बाहर डटे रहे।

पुलिस कर रही जांच

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया दुर्घटना का कारण तेज रफ्तार और चालक का वाहन पर नियंत्रण खोना बताया जा रहा है, लेकिन अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। बस चालक से पूछताछ की जा रही है और वाहन की तकनीकी जांच भी कराई जाएगी।

प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और राहत कार्यों की समीक्षा की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि दुर्घटना के सही कारणों का पता लगाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

NH-319 पर बढ़ते हादसे

राष्ट्रीय राजमार्ग 319 पर पहले भी कई गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही और तेज रफ्तार के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग की है।

शैक्षणिक टूर पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद शैक्षणिक टूर के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रात में लंबी दूरी की यात्रा से बचना चाहिए, खासकर जब बस में छोटे बच्चे सवार हों। बस की फिटनेस, चालक की थकान और सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी है।

✈️ मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट को मिली नई उड़ान: 43 करोड़ के रनवे टेंडर से 2027 तक आसमान से जुड़ेगा उत्तर बिहार

Muzaffarpur बिहार : उत्तर बिहार के लोगों के लिए दशकों से प्रतीक्षित खुशखबरी आखिरकार साकार होती दिख रही है। करीब पांच दशकों से शांत पड़ा पताही हवाई अड्डा अब फिर से सक्रिय होने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा चुका है। बिहार सरकार ने मुजफ्फरपुर को फिर से देश के हवाई नक्शे पर स्थापित करने का संकल्प लिया है। यह केवल एक एयरपोर्ट परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, पहचान और संभावनाओं को नई उड़ान देने की तैयारी है।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में घोषणा की कि एयरपोर्ट के रनवे निर्माण के लिए 43.13 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया गया है। इस घोषणा के साथ ही वर्षों से अधर में लटकी परियोजना को वास्तविक गति मिल गई है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक यहां से नियमित उड़ानें शुरू हो जाएं।

पांच दशकों का इंतजार खत्म होने की ओर

मुजफ्फरपुर का पताही हवाई अड्डा कभी क्षेत्रीय संपर्क का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। लेकिन समय के साथ संचालन बंद हो गया और यह परिसर लगभग निष्क्रिय हो गया। स्थानीय लोगों के लिए यह हमेशा एक अधूरी आकांक्षा की तरह रहा कि उनका शहर भी हवाई सेवाओं से सीधे जुड़े।

उत्तर बिहार का यह प्रमुख शहर लंबे समय से सड़क और रेल परिवहन पर निर्भर रहा है। हवाई यात्रा के लिए लोगों को राजधानी पटना या दरभंगा तक जाना पड़ता था, जो समय और खर्च दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहा। खासकर व्यावसायिक यात्रियों, छात्रों, मरीजों और प्रवासी परिवारों के लिए यह असुविधा बड़ी समस्या थी।

अब राज्य सरकार और Airports Authority of India (AAI) के संयुक्त प्रयासों से यह स्थिति बदलने जा रही है।

72 करोड़ का व्यापक विकास खाका

एयरपोर्ट के पुनर्विकास के लिए कुल 72 करोड़ रुपये की विस्तृत योजना तैयार की गई है। यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी ताकि निर्माण कार्य व्यवस्थित और समयबद्ध ढंग से हो सके।

🔹 पहला चरण: बुनियादी संरचना का निर्माण

पहले चरण में लगभग 28.58 करोड़ रुपये की लागत से निम्नलिखित ढांचागत सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा—

  • आधुनिक टर्मिनल बिल्डिंग
  • एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर
  • फायर स्टेशन
  • अंडरग्राउंड संप हाउस
  • सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक तकनीकी ढांचा

यह चरण एयरपोर्ट संचालन के लिए आधार तैयार करेगा। टर्मिनल भवन को इस प्रकार डिजाइन किया जा रहा है कि भविष्य में यात्री संख्या बढ़ने पर विस्तार संभव हो।

🔹 दूसरा चरण: रनवे और परिचालन सुविधाएं

दूसरे चरण में 43 करोड़ रुपये से अधिक की राशि रनवे, टैक्सीवे और एप्रन निर्माण पर खर्च की जाएगी।

  • रनवे की लंबाई 1300 मीटर होगी
  • टैक्सीवे का निर्माण
  • विमानों की पार्किंग (एप्रन)
  • पेरिमीटर रोड और आपातकालीन सड़क
  • सुरक्षा क्षेत्र और वाहन लेन

एयरपोर्ट को कोड-2बी श्रेणी के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जिससे 19-सीटर विमानों का सुरक्षित संचालन संभव होगा। भविष्य में मांग बढ़ने पर बड़े विमानों के लिए भी विस्तार की संभावना रखी गई है।

लीची की राजधानी को मिलेगा सीधा लाभ

मुजफ्फरपुर को ‘लीची की राजधानी’ के नाम से देश-विदेश में पहचान मिली है। यहां की शाही लीची की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी है। अभी तक लीची और अन्य कृषि उत्पादों को हवाई मार्ग से भेजने के लिए पटना या अन्य शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था।

एयरपोर्ट चालू होने के बाद—

  • लीची निर्यात में तेजी आएगी
  • कृषि उत्पादों की त्वरित आपूर्ति संभव होगी
  • किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी
  • कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में निवेश बढ़ेगा

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को सीधा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

व्यापार और उद्योग को नई दिशा

मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। यहां से सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली और पूर्वी चंपारण जैसे जिलों का आर्थिक जुड़ाव है। एयरपोर्ट चालू होने से—

  • व्यावसायिक यात्राओं में समय की बचत होगी
  • निवेशकों का आकर्षण बढ़ेगा
  • छोटे और मध्यम उद्योगों को बाजार विस्तार का अवसर मिलेगा
  • स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र को गति मिलेगी

हवाई संपर्क किसी भी क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इससे क्षेत्रीय असंतुलन कम करने में मदद मिलती है।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

उत्तर बिहार में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। सीतामढ़ी को माता सीता की जन्मस्थली के रूप में मान्यता प्राप्त है। वैशाली का ऐतिहासिक महत्व है। यदि मुजफ्फरपुर से सीधी उड़ानें शुरू होती हैं तो देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों की आवाजाही आसान हो जाएगी।

हवाई संपर्क से—

  • धार्मिक पर्यटन को गति मिलेगी
  • होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को लाभ होगा
  • स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

आम लोगों को राहत

अभी तक हवाई यात्रा के लिए लोगों को लगभग 70-100 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। पटना या दरभंगा तक पहुंचने में कई बार आधा दिन लग जाता था।

एयरपोर्ट शुरू होने के बाद—

  • समय की बचत होगी
  • यात्रा खर्च में कमी आएगी
  • बुजुर्गों और मरीजों को सुविधा मिलेगी
  • छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को लाभ होगा

2027 तक उड़ान का लक्ष्य

सरकार ने वर्ष 2027 तक उड़ान संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा है। यदि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा होता है तो मुजफ्फरपुर से जल्द ही क्षेत्रीय उड़ानें शुरू हो सकती हैं। संभावना है कि प्रारंभिक चरण में दिल्ली, कोलकाता और अन्य प्रमुख शहरों से कनेक्टिविटी दी जाए।

यह परियोजना राज्य सरकार की क्षेत्रीय संतुलित विकास नीति का हिस्सा है, जिसके तहत छोटे शहरों को भी हवाई सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

बदलती तस्वीर, बढ़ती उम्मीदें

मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट का पुनरुद्धार केवल एक निर्माण परियोजना नहीं है। यह उत्तर बिहार की नई पहचान गढ़ने की पहल है। पांच दशकों के लंबे इंतजार के बाद अब शहर एक बार फिर आसमान से जुड़ने की तैयारी में है।

रनवे टेंडर जारी होने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार इस परियोजना को लेकर गंभीर है। आने वाले वर्षों में जब पताही हवाई अड्डे से पहली उड़ान भरेगी, तो वह केवल यात्रियों को नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आकांक्षाओं को अपने साथ लेकर उड़ान भरेगी।

मुजफ्फरपुर के लिए यह सचमुच एक नई शुरुआत है—एक ऐसी शुरुआत, जो व्यापार, कृषि, पर्यटन और आम जनजीवन को नई दिशा देने वाली है।

2027 का इंतजार अब उम्मीद में बदल चुका है, और उत्तर बिहार की जनता आसमान में अपने शहर का नाम देखने को तैयार है।

1 अप्रैल 2026 से बदलेगी जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया: बिहार में अब 13 अनिवार्य जानकारियों के बिना नहीं होगा निबंधन

पटना: बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2026 से राज्य में जमीन रजिस्ट्री का नया नियम लागू होने जा रहा है, जिसके तहत अब किसी भी जमीन के निबंधन (रजिस्ट्री) के लिए आवेदक को 13 अनिवार्य जानकारियां देनी होंगी। यह व्यवस्था डिजिटल माध्यम से लागू की जाएगी और पूरी प्रक्रिया को ई-निबंधन पोर्टल के जरिए संचालित किया जाएगा।

राज्य सरकार ने यह फैसला ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत लिया है, जिसका उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, भ्रष्टाचार पर रोक लगाना और आम नागरिकों को सरल व जवाबदेह सेवा उपलब्ध कराना है। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल तथा मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव की ओर से राज्य के सभी जिलाधिकारियों (कलेक्टरों) को पत्र भेजकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

क्यों जरूरी हुआ नया नियम?

बिहार में जमीन से जुड़े विवाद लंबे समय से एक गंभीर समस्या रहे हैं। गलत खाता-खेसरा, अधूरी जमाबंदी, फर्जी दस्तावेज, और जमीन के प्रकार को लेकर अस्पष्टता के कारण कई बार वर्षों तक मुकदमे चलते रहते हैं। कई मामलों में पाया गया कि जमीन की वास्तविक स्थिति और रजिस्ट्री दस्तावेज में दी गई जानकारी में अंतर होता है, जिससे बाद में कानूनी विवाद उत्पन्न होते हैं।

इन समस्याओं को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया कि जमीन की रजिस्ट्री के समय ही पूरी और अद्यतन जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी या विवाद की गुंजाइश न बचे। डिजिटल प्रणाली से जानकारी की जांच-पड़ताल भी आसान होगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकेगी।

रजिस्ट्री के लिए देनी होंगी ये 13 अनिवार्य जानकारियां

1 अप्रैल 2026 से जमीन रजिस्ट्री कराते समय आवेदक को निम्नलिखित 13 जानकारियां देना अनिवार्य होगा:

  1. निबंधन कार्यालय का नाम
  2. अंचल का नाम
  3. मौजा
  4. थाना
  5. खाता संख्या
  6. खेसरा संख्या
  7. भूमि का रकबा (क्षेत्रफल)
  8. चौहद्दी (चारों दिशाओं की सीमा)
  9. जमाबंदी विवरण
  10. जमाबंदी धारक का नाम
  11. क्रेता (खरीददार) का नाम
  12. विक्रेता का नाम
  13. भूमि का प्रकार (कृषि, आवासीय, व्यावसायिक आदि)

इन सभी जानकारियों को डिजिटल फॉर्मेट में ई-निबंधन पोर्टल पर भरना होगा। बिना इन सूचनाओं के दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

ई-निबंधन पोर्टल पर अनिवार्य लॉगिन

नई व्यवस्था के तहत आवेदक को सबसे पहले ई-निबंधन पोर्टल पर अपना अकाउंट बनाना होगा। इसके बाद लॉगिन कर संबंधित जमीन से जुड़ी सभी 13 जानकारियां अपलोड करनी होंगी।

यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे दलालों की भूमिका कम होगी और आम नागरिक सीधे सिस्टम से जुड़ सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और दस्तावेजों की ट्रैकिंग भी आसान होगी।

अपडेटेड जानकारी का विकल्प

सरकार ने पोर्टल पर एक विकल्प दिया है, जिसके तहत आवेदक जमीन की ‘अपडेटेड जानकारी’ देखने और सत्यापित करने का चयन कर सकते हैं। यदि आवेदक यह विकल्प नहीं चुनते हैं, तो निबंधन कार्यालय पहले की तरह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दस्तावेजों की जांच करेगा।

लेकिन यदि आवेदक अपडेटेड जानकारी का विकल्प चुनते हैं, तो संबंधित जानकारी सीधे संबंधित अंचलाधिकारी (CO) या राजस्व अधिकारी के लॉगिन में भेज दी जाएगी।

10 दिनों में होगी जांच, मैसेज से मिलेगी सूचना

जैसे ही जानकारी संबंधित अधिकारी के पास पहुंचेगी, वे लॉगिन के माध्यम से अपलोड की गई जानकारियों की जांच करेंगे। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद 10 दिनों के भीतर आवेदक को मैसेज के जरिए सूचित किया जाएगा कि जानकारी सही है या उसमें किसी प्रकार की त्रुटि है।

यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर रजिस्ट्री कार्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं मिलता है, तो इसे इस रूप में माना जाएगा कि आवेदक द्वारा दी गई जानकारी सही नहीं है या उसमें कोई कमी है। ऐसे मामलों में आवेदक को पुनः सही जानकारी प्रस्तुत करनी होगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम

सरकार का मानना है कि इस नई प्रणाली से:

  • फर्जी रजिस्ट्री पर रोक लगेगी
  • जमीन विवादों में कमी आएगी
  • रिकॉर्ड की शुद्धता बढ़ेगी
  • ऑनलाइन ट्रैकिंग से भ्रष्टाचार घटेगा
  • नागरिकों को समयबद्ध सेवा मिलेगी

डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए हर स्तर पर डेटा दर्ज होगा, जिससे भविष्य में किसी भी तरह की जांच या सत्यापन आसान होगा।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू

यह नया नियम राज्य के सभी जिलों, प्रखंडों और अंचलों में समान रूप से लागू होगा। चाहे जमीन ग्रामीण क्षेत्र की हो या शहरी क्षेत्र की—रजिस्ट्री के लिए एक समान प्रक्रिया अपनानी होगी।

इससे पहले कई बार अलग-अलग जिलों में प्रक्रियाओं में असमानता देखने को मिलती थी, लेकिन अब पूरे राज्य में एक समान डिजिटल ढांचा लागू किया जा रहा है।

दलाल प्रथा पर लगेगा अंकुश

जमीन रजिस्ट्री के दौरान अक्सर बिचौलियों की सक्रियता की शिकायतें मिलती रही हैं। आम लोगों को प्रक्रिया की जानकारी न होने के कारण उन्हें अतिरिक्त राशि देनी पड़ती थी। ई-निबंधन प्रणाली के जरिए आवेदक सीधे पोर्टल पर जानकारी भर सकेंगे, जिससे दलालों की भूमिका सीमित हो जाएगी।

क्या होगा यदि जानकारी गलत दी गई?

यदि जांच के दौरान पाया जाता है कि दी गई जानकारी गलत है, अधूरी है या जमीन के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है, तो रजिस्ट्री की प्रक्रिया रोक दी जाएगी। आवेदक को त्रुटियों को सुधारने का अवसर दिया जाएगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जानबूझकर गलत जानकारी देने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

डिजिटल बिहार की ओर एक और कदम

राज्य सरकार पहले से ही भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर काम कर रही है। ऑनलाइन जमाबंदी, भू-नक्शा और भूमि से संबंधित सेवाएं पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। अब जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल ढांचे में लाया जा रहा है।

यह कदम ‘डिजिटल गवर्नेंस’ को मजबूत करेगा और आम नागरिकों को घर बैठे सेवाएं प्राप्त करने में मदद करेगा।

आम लोगों के लिए क्या करें?

यदि आप 1 अप्रैल 2026 के बाद जमीन की रजिस्ट्री कराने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज पहले से अपडेट रखें
  • खाता, खेसरा और जमाबंदी की जानकारी सत्यापित करें
  • चौहद्दी और रकबा की स्पष्ट जानकारी जुटाएं
  • ई-निबंधन पोर्टल पर समय रहते अकाउंट बनाएं
  • मोबाइल नंबर अपडेट रखें ताकि मैसेज समय पर मिल सके

JEE Main 2026 Result: National Testing Agency ने जारी किया सेशन-1 का परिणाम, 12 छात्रों ने हासिल किए 100 पर्सेंटाइल, श्रेयस मिश्रा टॉपर

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक JEE Main 2026 के सेशन-1 का परिणाम आखिरकार जारी कर दिया गया है। परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था National Testing Agency (NTA) ने आधिकारिक वेबसाइट National Testing Agency के पोर्टल jeemain.nta.nic.in पर स्कोरकार्ड अपलोड कर दिए हैं। लंबे समय से लाखों छात्र-छात्राएं अपने परिणाम का इंतजार कर रहे थे। परिणाम घोषित होते ही वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक देखा गया।

जारी किए गए नतीजों के अनुसार इस बार कुल 12 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किया है। इनमें श्रेयस मिश्रा ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। परीक्षा परिणाम के साथ ही टॉप 10 छात्रों की सूची भी जारी कर दी गई है, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्तर साफ झलकता है।


100 पर्सेंटाइल हासिल करने वाले 12 छात्र

इस वर्ष JEE Main 2026 सेशन-1 में 100 पर्सेंटाइल स्कोर करने वाले छात्रों की संख्या 12 रही। यह उपलब्धि दर्शाती है कि देशभर में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और कड़ी मेहनत के साथ छात्र सर्वोच्च अंक हासिल कर रहे हैं।

टॉपर्स की सूची में शामिल प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

  1. श्रेयस मिश्रा
  2. नरेन्द्रबाबू गारी महित
  3. शुभम कुमार
  4. कबीर छिल्लर
  5. चिरंजीब कर
  6. भावेष पात्र
  7. अनय जै
  8. अर्नव गौत
  9. पासाला मोहित
  10. माधव विराड़िया

इन छात्रों ने न केवल 100 पर्सेंटाइल प्राप्त किया बल्कि देशभर के लाखों परीक्षार्थियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है।


रिजल्ट से पहले जारी हुई फाइनल आंसर की

परिणाम घोषित करने से एक दिन पहले, यानी 16 फरवरी 2026 को National Testing Agency ने JEE Main 2026 सेशन-1 की फाइनल आंसर की जारी की थी। NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक सूचना जारी करते हुए बताया कि उम्मीदवार वेबसाइट से पीडीएफ डाउनलोड कर अपने प्रश्नों के उत्तर सत्यापित कर सकते हैं।

इस बार परीक्षा में पूछे गए 9 प्रश्नों को हटा दिया गया। जिन प्रश्नों को हटाया गया, उनके अंक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित अभ्यर्थियों को दिए गए। फाइनल आंसर की जारी होने के बाद छात्रों को अपने संभावित स्कोर का अंदाजा हो गया था, जिसके बाद सभी की नजरें रिजल्ट पर टिक गई थीं।


13 लाख से अधिक छात्रों ने दी परीक्षा

JEE Main 2026 के पेपर-1 (BE/BTech) में इस बार कुल 13,04,653 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। यह संख्या दर्शाती है कि इंजीनियरिंग क्षेत्र में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

जेंडर के आधार पर आंकड़े:

  • पुरुष परीक्षार्थी: 8,55,085
  • महिला परीक्षार्थी: 4,49,568

कैटेगरी के अनुसार उपस्थिति:

  • सामान्य वर्ग: 4,52,825
  • ओबीसी-एनसीएल: 5,17,336
  • ईडब्ल्यूएस: 1,60,958
  • एससी: 1,29,902
  • एसटी: 43,632

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विभिन्न सामाजिक वर्गों से बड़ी संख्या में छात्र इस परीक्षा में शामिल हुए, जो उच्च शिक्षा में व्यापक भागीदारी को दर्शाता है।


कैसे करें JEE Main 2026 सेशन-1 का रिजल्ट डाउनलोड?

जो अभ्यर्थी अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड करना चाहते हैं, वे निम्नलिखित आसान स्टेप्स फॉलो करें:

  1. सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाएं।
  2. होमपेज पर “JEE Main 2026 Session-1 Result” लिंक पर क्लिक करें।
  3. अपना Application Number और Password/Date of Birth दर्ज करें।
  4. स्क्रीन पर दिख रहे Security Code को भरें।
  5. लॉगिन बटन पर क्लिक करें।
  6. आपका स्कोरकार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा।
  7. इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंटआउट सुरक्षित रखें।

स्कोरकार्ड में उम्मीदवार का पर्सेंटाइल स्कोर, ऑल इंडिया रैंक (जब जारी होगी), कैटेगरी रैंक और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज होती है।


पर्सेंटाइल सिस्टम को समझें

JEE Main में पर्सेंटाइल स्कोर नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के आधार पर तय किया जाता है। परीक्षा अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित की जाती है, इसलिए कठिनाई स्तर में अंतर को संतुलित करने के लिए यह प्रणाली लागू की जाती है। 100 पर्सेंटाइल का अर्थ है कि उम्मीदवार ने अपनी शिफ्ट में सभी परीक्षार्थियों से बेहतर प्रदर्शन किया है।


आगे क्या?

JEE Main के दो सेशन होते हैं। सेशन-1 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब छात्र सेशन-2 की तैयारी में जुट जाएंगे। अंतिम ऑल इंडिया रैंक दोनों सेशनों के सर्वश्रेष्ठ स्कोर के आधार पर तय की जाएगी। इसके बाद JEE Advanced के लिए पात्र उम्मीदवारों की सूची जारी होगी।

ममता सरकार का मास्टरस्ट्रोक: चुनाव से पहले ‘युवा साथी योजना’ पर उमड़ा जनसैलाब, 1 अप्रैल से हर महीने मिलेंगे 1,500 रुपये

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सरकार द्वारा घोषित ‘युवा साथी योजना’ ने बेरोजगार युवाओं के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है। योजना के तहत 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये की नकद सहायता दी जाएगी। रविवार को जैसे ही रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हुई, राज्य के कई जिलों में सुबह सूरज उगने से पहले ही लंबी कतारें देखने को मिलीं।

योजना को लेकर युवाओं का उत्साह इस बात का संकेत है कि बेरोजगारी का मुद्दा आगामी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। राज्य सरकार ने आलोचनाओं और भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों को देखते हुए अब ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।


जिलों में दिखा अभूतपूर्व उत्साह

रविवार सुबह से ही उत्तर 24 परगना, हुगली, मालदा, मुर्शिदाबाद, बर्धमान और दक्षिण 24 परगना सहित कई जिलों में युवा आवेदन शिविरों के बाहर कतारबद्ध नजर आए। कई स्थानों पर प्रशासन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। युवाओं का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में 1,500 रुपये की मासिक सहायता भी उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी।

सरकार का अनुमान है कि करीब 27.8 लाख युवा इस योजना से लाभान्वित होंगे। यही कारण है कि आवेदन की शुरुआत के साथ ही बड़ी संख्या में लोग पंजीकरण केंद्रों पर पहुंचे।


ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू

भीड़ और राजनीतिक आलोचना के बाद राज्य सरकार ने ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू कर दी है। अब आवेदक घर बैठे भी फॉर्म भर सकते हैं। इसके लिए ‘आमादेर पाड़ा आमादेर समाधान’ पोर्टल https://apas.wb.gov.in/ पर आवेदन किया जा सकता है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा गया है:

  1. बेसिक डिटेल्स भरना
  2. दस्तावेज अपलोड करना
  3. फाइनल सबमिट

फॉर्म सबमिट करने के बाद आवेदकों को उसकी प्रति डाउनलोड कर सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।


किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?

ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन के लिए निम्नलिखित दस्तावेज आवश्यक हैं:

  • माध्यमिक (मैट्रिक) या समकक्ष परीक्षा का एडमिट कार्ड
  • माध्यमिक या समकक्ष परीक्षा की मार्कशीट/सर्टिफिकेट
  • आधार कार्ड की प्रति
  • वोटर कार्ड की प्रति
  • बैंक पासबुक का पहला पन्ना
  • एससी/एसटी/ओबीसी प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
  • पासपोर्ट साइज फोटो (पीडीएफ/जेपीजी/पीएनजी फॉर्मेट में)
  • हस्ताक्षर (जेपीजी या पीएनजी फॉर्मेट में)

इसके अलावा, युवा व क्रीड़ा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://sportsandyouth.wb.gov.in/wbyouthservices/news-events से भी फॉर्म डाउनलोड किया जा सकता है। वर्ष 2026 लिंक पर क्लिक कर फॉर्म डाउनलोड करने के बाद संबंधित शिविर में दस्तावेजों के साथ जमा किया जा सकता है।


5,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान

‘युवा साथी योजना’ की घोषणा वर्ष 2026-27 के वोट-ऑन-अकाउंट बजट में की गई थी। इसके लिए 5,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पहले योजना का लाभ 15 अगस्त से शुरू होना प्रस्तावित था, लेकिन बाद में इसे 1 अप्रैल से लागू करने की घोषणा कर दी गई।

राज्य सरकार का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद युवाओं को आर्थिक सहारा देना उसकी प्राथमिकता है।


क्या बोलीं वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य?

राज्य की वित्त मंत्री Chandrima Bhattacharya ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बकाया राशि रोके जाने के बावजूद राज्य सरकार अपनी कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखे हुए है। उन्होंने कहा कि युवाओं को आर्थिक सहायता देना सरकार की सामाजिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि योजना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रारंभिक सहारा देना है, न कि उन्हें स्थायी रूप से सरकारी सहायता पर निर्भर बनाना।


चुनावी परिदृश्य में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बेरोजगारी अब एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनता दिख रहा है। मुख्य विपक्षी दल Bharatiya Janata Party ने संकेत दिए हैं कि प्रधानमंत्री Narendra Modi मार्च में कोलकाता में एक बड़ी रैली कर सकते हैं। 2021 के बाद पहली बार प्रधानमंत्री की कोलकाता में रैली प्रस्तावित है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष बेरोजगारी और रोजगार सृजन को प्रमुख मुद्दा बनाएगा, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ‘युवा साथी’ जैसी योजनाओं के जरिए युवाओं को साधने की कोशिश करेगी।


‘लक्ष्मी भंडार’ के बाद नया दांव

राज्य सरकार पहले ही ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के जरिए महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता दे रही है, जिसे व्यापक समर्थन मिला था। अब ‘युवा साथी योजना’ को उसी तर्ज पर युवाओं के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया, तो इसका राजनीतिक लाभ भी सत्तारूढ़ दल को मिल सकता है।


युवाओं की उम्मीदें और चुनौतियां

हालांकि 1,500 रुपये की राशि बड़ी नहीं मानी जा सकती, लेकिन बेरोजगार युवाओं के लिए यह सहायता प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। कई युवाओं का कहना है कि इससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, आवेदन शुल्क या दैनिक खर्चों में मदद ले सकेंगे।

दूसरी ओर, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नकद सहायता के साथ-साथ स्थायी रोजगार सृजन पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सके।

बिहार के प्रमुख शहरों के इस समय के न्यूज़ पोस्ट

बिहार आज की प्रमुख खबरें – 17 फरवरी 2026

📰 मुख्य समाचार

1. बिहार बोर्ड 10वीं परीक्षा आज से शुरू 📘
बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) की कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षाएँ आज से शुरू हो गई हैं। पहली पाली में मातृभाषा के पेपर होंगे। छात्रों को प्रवेश समय, आवश्यक पहचान दस्तावेज़ व कड़े सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

2. हजारों छात्रों ने किया पहले दिन परीक्षा में भाग 🎓
बीएसईबी के अनुसार लगभग 15.12 लाख छात्र इस बार मैट्रिक परीक्षा में उपस्थित हैं, जिसमें लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक है।

3. मुज़फ्फरपुर में वायरल वीडियो: माँ ने बेटी को ईंटों से भरा बैग उठाया दिया 😡
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक महिला अपनी बेटी को भारी ईंटों वाला बैग उठाकर मार्केट में चलाती दिख रही है। यह मामला गंभीर बाल उत्पीड़न का रूप ले रहा है और पुलिस जांच शुरू कर दी है।

4. मौसम में बदलाव: दिन में गर्मी, सुबह-रात में कोहरा ⛅
राज्य में आज मौसम में बदलाव देखने को मिला — दिन के समय हल्की गर्मी और शाम-सुबह में कोहरा। मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में घने कोहरे का अलर्ट भी जारी किया है।

5. भंवरगंज रेलवे स्टेशन पर 2 शराब तस्कर गिरफ्तार 🍾
भगलपुर रेलवे स्टेशन पर रेल सुरक्षा बल (RPF) ने दो शराब तस्करों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से कई बोतलें जब्त की हैं। जांच जारी है।

6. राजस्थान फैक्ट्री हादसा: बिहार के 5 मजदूर जलकर मरे 🔥
राजस्थान की एक फैक्ट्री में विस्फोट के बाद आग लग गई, जिसमें बिहार के पांच मजदूर गंभीर रूप से झुलसकर अपनी जान गंवा बैठे। यह घटना औद्योगिक सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ा रही है।

7. पटना-आसपास सड़क व ट्रैफिक अपडेट🚦
(लोकल अपडेट — मोबाइल नेटवर्क व अधिकारियों के अनुसार) राजधानी इलाके में आज सुबह यातायात सामान्य रहा, लेकिन कुछ मार्गों पर हल्का जाम देखा गया। (स्थानीय रिपोर्ट)

8. स्वास्थ्य और जीवनशैली ✨
डॉक्टरों ने मौसम बदलते समय आम ठंड-जुकाम से बचने के लिए हल्की गर्म कपड़ों और पर्याप्त आराम की सलाह दी है। (स्थानीय स्वास्थ्य विभाग)

9. शिक्षा-संस्कृति कार्यक्रम 🏫
कई स्कूलों में आज विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रेरक भाषण आयोजित किये जा रहे हैं ताकि परीक्षार्थी तनावमुक्त रह सकें। (शिक्षा बोर्ड, स्थानीय)

10. व्यापार और बाजार अपडेट 📈
बाजारों में आज सुबह तक सामान्य व्यावसायिक गतिविधि देखी गई। सब्जियों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में हल्का स्थिर रुख रहा। (व्यापार मंडल)

CBSE Board Exam 2026 Live Updates: सुबह 10 बजे बंद होगा एंट्री गेट, जानें आज की पूरी परीक्षा शेड्यूल और जरूरी दिशा-निर्देश

नई दिल्ली: देशभर में लाखों विद्यार्थियों का इंतजार खत्म हो गया है। Central Board of Secondary Education (CBSE) की 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 2026 आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गई हैं। परीक्षा के पहले ही दिन बोर्ड ने छात्रों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि परीक्षा केंद्र में प्रवेश सुबह 10 बजे तक ही मिलेगा। इसके बाद किसी भी छात्र को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं को लेकर सुरक्षा, समय-प्रबंधन, दो-परीक्षा प्रणाली और सुधार (इम्प्रूवमेंट) के अवसर को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। बोर्ड ने परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, तनावमुक्त और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए कई नए नियम लागू किए हैं।

नीचे हम आपको आज की परीक्षा का पूरा शेड्यूल, एंट्री नियम, जरूरी निर्देश, नई दो-परीक्षा प्रणाली की पूरी जानकारी, और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सलाह विस्तार से बता रहे हैं।


सुबह 10 बजे के बाद नहीं मिलेगी एंट्री

CBSE ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्र के गेट सुबह 10 बजे बंद कर दिए जाएंगे।

  • परीक्षा का समय सामान्यतः सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक रहेगा।
  • छात्रों को सलाह दी गई है कि वे कम से कम 30-45 मिनट पहले केंद्र पर पहुंच जाएं।
  • 10 बजे के बाद आने वाले छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, चाहे कारण कुछ भी हो।

यह नियम इसलिए सख्ती से लागू किया गया है ताकि प्रश्नपत्र वितरण, उपस्थिति प्रक्रिया और सुरक्षा जांच सुचारू रूप से पूरी की जा सके।


आज की परीक्षा का पूरा शेड्यूल

आज बोर्ड परीक्षा के पहले दिन विभिन्न विषयों की परीक्षा आयोजित की जा रही है। कक्षा 10 और 12 दोनों के लिए अलग-अलग विषय निर्धारित हैं।

कक्षा 10वीं

  • पहला पेपर: प्रमुख विषय (जैसे हिंदी, अंग्रेजी या क्षेत्रीय भाषा)
  • समय: 10:30 AM से 1:30 PM
  • प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए अतिरिक्त 15 मिनट (10:15 से 10:30)

कक्षा 12वीं

  • पहले दिन वैकल्पिक और मुख्य विषयों की परीक्षा
  • समय वही: 10:30 AM से 1:30 PM

छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपना एडमिट कार्ड पर अंकित विषय और केंद्र का नाम ध्यान से जांच लें।


दो-परीक्षा प्रणाली: क्या है नई व्यवस्था?

CBSE ने 2026 से कक्षा 10वीं के लिए दो बोर्ड परीक्षा प्रणाली लागू की है। इसका उद्देश्य छात्रों को एक अतिरिक्त अवसर देना है ताकि वे अपने अंकों में सुधार कर सकें।

लेकिन बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि:

  • पहली परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है।
  • छात्र पहली परीक्षा छोड़कर सीधे दूसरी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते।
  • दूसरी परीक्षा केवल सुधार (Improvement) के लिए है।

यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में कम से कम तीन मुख्य विषयों में शामिल नहीं होता, तो उसे दूसरी परीक्षा का अवसर नहीं मिलेगा और उसे अगले वर्ष मुख्य परीक्षा में बैठना होगा।


परीक्षा केंद्र पर क्या-क्या ले जाना जरूरी है?

छात्रों को निम्नलिखित चीजें साथ ले जानी अनिवार्य हैं:

✔️ एडमिट कार्ड (मूल प्रति)
✔️ स्कूल आईडी कार्ड
✔️ पारदर्शी पेन-पेंसिल बॉक्स
✔️ नीला/काला पेन
✔️ पेंसिल, रबर, स्केल


क्या ले जाना सख्त मना है?

❌ मोबाइल फोन
❌ स्मार्टवॉच
❌ ब्लूटूथ डिवाइस
❌ कैलकुलेटर (जब तक अनुमति न हो)
❌ किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक गैजेट

यदि कोई छात्र प्रतिबंधित वस्तु के साथ पकड़ा जाता है तो उसे अनुचित साधन (Unfair Means) के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।


सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

इस बार बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी की व्यवस्था की है।

  • सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
  • फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती की गई है।
  • प्रश्नपत्र वितरण की डिजिटल ट्रैकिंग की जा रही है।
  • संवेदनशील केंद्रों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

बोर्ड का उद्देश्य नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं को पूरी तरह रोकना है।


छात्रों के लिए बोर्ड की विशेष सलाह

CBSE ने छात्रों को परीक्षा को लेकर घबराने से बचने और शांत मन से पेपर देने की सलाह दी है।

परीक्षा से पहले:

  • रात में पर्याप्त नींद लें
  • हल्का और पौष्टिक भोजन करें
  • एडमिट कार्ड पहले से तैयार रखें

परीक्षा के दौरान:

  • पहले प्रश्नपत्र पूरा पढ़ें
  • समय का सही विभाजन करें
  • जिन प्रश्नों का उत्तर अच्छी तरह आता है, उन्हें पहले हल करें

परीक्षा के बाद:

  • अगले पेपर की तैयारी पर ध्यान दें
  • पिछले पेपर को लेकर तनाव न लें

अभिभावकों की भूमिका

बोर्ड ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें।

  • सकारात्मक माहौल बनाए रखें
  • तुलना करने से बचें
  • बच्चों का मनोबल बढ़ाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के समय मानसिक समर्थन उतना ही जरूरी है जितना शैक्षणिक तैयारी।


सुधार परीक्षा का पूरा प्रावधान

जो छात्र पहली परीक्षा में शामिल होते हैं और अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होते, उन्हें सुधार परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

  • अधिकतम 3 विषयों में सुधार का मौका
  • बेहतर अंक अंतिम परिणाम में जोड़े जाएंगे
  • सुधार परीक्षा का शेड्यूल अलग से जारी किया जाएगा

यह व्यवस्था छात्रों को तनाव से राहत देने और बेहतर परिणाम का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से लागू की गई है।


मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता

CBSE ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं।

  • डिजिटल मार्किंग सिस्टम
  • डबल वैरिफिकेशन
  • मॉडरेशन नीति में सुधार

छात्रों को परिणाम जारी होने के बाद उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त करने और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने का विकल्प भी मिलेगा।


परीक्षा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देश

हालांकि कोविड जैसी स्थिति अब सामान्य हो चुकी है, फिर भी बोर्ड ने स्वास्थ्य सावधानियों को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  • बीमार होने पर तुरंत सुपरवाइजर को सूचित करें
  • पानी की पारदर्शी बोतल साथ रखें
  • आवश्यक दवाइयों की जानकारी पहले से दें

विशेषज्ञों की राय: दो परीक्षा प्रणाली का प्रभाव

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई प्रणाली छात्रों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

फायदे:

  • तनाव कम होगा
  • बेहतर प्रदर्शन का दूसरा अवसर
  • प्रतिशत सुधारने का मौका

सावधानी:

  • पहली परीक्षा को हल्के में न लें
  • दूसरी परीक्षा को बैकअप न समझें

संभावित चुनौतियां

नई व्यवस्था के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं:

  • परीक्षा कैलेंडर लंबा होना
  • मूल्यांकन प्रक्रिया में समय
  • स्कूलों पर अतिरिक्त प्रशासनिक दबाव

हालांकि बोर्ड का कहना है कि वह सभी व्यवस्थाओं के लिए पूरी तरह तैयार है।


परिणाम कब आएंगे?

CBSE के अनुसार:

  • पहली परीक्षा का परिणाम मई-जून तक जारी किया जा सकता है
  • सुधार परीक्षा के बाद अंतिम परिणाम अपडेट होगा

छात्र अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट और डिजिलॉकर के माध्यम से देख सकेंगे।


छात्रों के लिए मोटिवेशनल संदेश

बोर्ड परीक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण चरण है।

  • अंक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे भविष्य की एकमात्र पहचान नहीं हैं।
  • आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास सफलता की कुंजी है।
  • सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा दें।

बिहार को 1 बिलियन डॉलर का ग्लोबल बूस्ट: ADB का 9000 करोड़ निवेश, उद्योग-टूरिज्म और हेल्थ सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट

बिहार की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के लिए एक ऐतिहासिक क्षण सामने आया है। राजधानी पटना में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में Asian Development Bank (एडीबी) के साथ 1 बिलियन डॉलर (करीब 9000 करोड़ रुपये से अधिक) के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी है। यह समझौता केवल वित्तीय सहयोग भर नहीं है, बल्कि बिहार को एक नई विकास दिशा देने वाला बहुआयामी रोडमैप है, जो उद्योग, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला उद्यमिता तक फैला हुआ है।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट संकेत दिए कि बिहार अब पारंपरिक विकास मॉडल से आगे बढ़कर संरचनात्मक सुधारों, आधुनिक बुनियादी ढांचे और वैश्विक साझेदारियों के सहारे तेज़ आर्थिक छलांग लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है। एडीबी के साथ यह भागीदारी राज्य को निवेश, नवाचार और संस्थागत सुधारों के नए युग में प्रवेश कराएगी।

औद्योगिक ढांचे में बड़ा बदलाव: गया और मुजफ्फरपुर बनेंगे विकास के नए इंजन

इस निवेश योजना का सबसे बड़ा और रणनीतिक हिस्सा औद्योगिक क्लस्टर विकास पर केंद्रित है। राज्य सरकार ने गया और मुजफ्फरपुर को एकीकृत औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

गया: आध्यात्मिक पहचान से औद्योगिक पहचान तक

Gaya अब तक मुख्य रूप से धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन नई योजना के तहत यहां एक आधुनिक औद्योगिक क्लस्टर विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विनिर्माण इकाइयों, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स पार्क और निर्यात-उन्मुख उद्योगों को एकीकृत मंच देना है।

  • भूमि अधिग्रहण और मास्टर प्लानिंग
  • कॉमन फैसिलिटी सेंटर
  • स्किल डेवलपमेंट हब
  • निर्यात सहायता तंत्र

इन पहलों से गया क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है।

मुजफ्फरपुर: कृषि और उद्योग का संगम

Muzaffarpur पहले से ही लीची उत्पादन और कृषि गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है। अब यहां एग्रो-प्रोसेसिंग, फूड प्रोसेसिंग और हल्के विनिर्माण उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • कोल्ड चेन नेटवर्क का विस्तार
  • प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना
  • निर्यात मानकों के अनुरूप पैकेजिंग अवसंरचना
  • MSME इकाइयों के लिए आसान वित्तपोषण

इससे कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन होगा और किसानों की आय में सीधा लाभ पहुंचेगा।

बिहार को उच्च उत्पादकता वाली अर्थव्यवस्था बनाने की रणनीति

राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार को एक उच्च उत्पादकता और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना है। इसके लिए केवल पूंजी निवेश ही नहीं, बल्कि संस्थागत सुधार और कौशल विकास भी समानांतर रूप से किए जाएंगे।

  • युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्किल ट्रेनिंग कार्यक्रम
  • इंडस्ट्री-अकादमिक साझेदारी
  • स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ई-गवर्नेंस

एडीबी तकनीकी सहायता, नीति परामर्श और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान में भी सहयोग देगा।

बौद्ध सर्किट का कायाकल्प: पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान

बिहार का बौद्ध सर्किट विश्व स्तर पर आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। Buddhist Circuit के अंतर्गत आने वाले स्थलों का व्यापक विकास प्रस्तावित है।

विश्वस्तरीय सुविधाओं का विकास

  • बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी
  • पर्यटक सुविधाएं और वे-साइड एमेनिटीज
  • डिजिटल सूचना केंद्र
  • स्वच्छता और सुरक्षा प्रबंधन

इससे दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान, कोरिया और श्रीलंका जैसे देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद है। पर्यटन में बढ़ोतरी से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय सेवाओं को सीधा लाभ मिलेगा।

कृषि और जल संसाधन में डिजिटल परिवर्तन

बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है। एडीबी के निवेश के तहत कृषि रूपांतरण परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है।

सिंचाई प्रणाली का आधुनिकीकरण

  • पुरानी नहर प्रणालियों का पुनरुद्धार
  • माइक्रो-इरिगेशन तकनीक
  • जल प्रबंधन के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग

कृषि में तकनीकी हस्तक्षेप

  • स्मार्ट फार्मिंग तकनीक
  • फसल विविधीकरण
  • बाजार तक सीधी पहुंच के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म

इससे उत्पादकता बढ़ेगी और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

ऊर्जा क्षेत्र में ‘स्मार्ट ग्रिड’ और नवीकरणीय ऊर्जा

ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत बनाने के लिए ‘स्मार्ट ग्रिड’ तकनीक लागू करने की योजना है।

  • बिजली वितरण नेटवर्क का आधुनिकीकरण
  • सोलर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार
  • ऊर्जा हानि में कमी
  • ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय आपूर्ति

इससे औद्योगिक विकास को स्थिर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति मिलेगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में परिवर्तनकारी निवेश

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बिहार स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा रूपांतरण परियोजना को गति दी जाएगी।

  • जिला अस्पतालों का आधुनिकीकरण
  • मेडिकल कॉलेजों का विस्तार
  • नई चिकित्सा तकनीक की स्थापना
  • डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के प्रशिक्षण कार्यक्रम

इससे राज्य में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच व्यापक होगी।

शिक्षा सुधार: बुनियाद मजबूत करने पर जोर

स्कूली शिक्षा में ‘स्कूल रेडीनेस गैप’ को कम करने के लिए व्यापक कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

  • प्रारंभिक कक्षाओं में लर्निंग आउटकम सुधार
  • शिक्षक प्रशिक्षण
  • डिजिटल लर्निंग टूल्स
  • इंफ्रास्ट्रक्चर उन्नयन

लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में बिहार की स्कूली शिक्षा राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रतिस्पर्धी बने।

महिलाओं के लिए MSME और PPP मॉडल को बढ़ावा

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की गई हैं।

  • महिला-केंद्रित MSME इकाइयों को प्रोत्साहन
  • आसान ऋण सुविधा
  • कौशल विकास प्रशिक्षण
  • पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल

इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को नई दिशा मिलेगी।

सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में सुधार

राज्य की वित्तीय सेहत को मजबूत करने के लिए राजस्व संग्रहण और व्यय प्रबंधन में सुधार की रणनीति बनाई गई है।

  • डिजिटल टैक्स मॉनिटरिंग
  • बजट प्रबंधन प्रणाली का उन्नयन
  • पारदर्शिता और जवाबदेही

एडीबी इन सुधारों में तकनीकी और संस्थागत सहयोग प्रदान करेगा।

बिहार के लिए दीर्घकालिक प्रभाव

यह 9000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश केवल परियोजनाओं का समूह नहीं, बल्कि बिहार की विकास यात्रा में एक मील का पत्थर है।

  • औद्योगिक आधार का विस्तार
  • रोजगार के व्यापक अवसर
  • पर्यटन से विदेशी मुद्रा आय
  • कृषि उत्पादकता में वृद्धि
  • स्वास्थ्य और शिक्षा में गुणवत्ता सुधार

यदि योजनाएं तय समयसीमा में लागू होती हैं, तो आने वाले दशक में बिहार पूर्वी भारत का एक प्रमुख औद्योगिक और सेवा क्षेत्र का केंद्र बन सकता है।

तीन दिन की गिरावट के बाद बाजार में धमाकेदार वापसी: सेंसेक्स 650 अंक उछला, निफ्टी 25,680 के पार; ओला इलेक्ट्रिक फिसला, फ्रैक्टल की कमजोर लिस्टिंग

16 फरवरी 2026 – आज भारतीय शेयर बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 ने लगातार गिरावट के दिनों के बाद लहराते हुए बाजार को सकारात्मक दिशा दी। सेंसेक्स में करीब 650 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 ने 211 अंकों का उछाल लगाया और 25,682.75 के स्तर पर बंद हुआ।

बाजार ने शुरुआत में कमजोर भाव दिखाए, लेकिन अंतिम कारोबार घंटे में भारी खरीदारी के चलते बाजार ने मजबूती हासिल की। इसी के साथ लगभग ₹3 लाख करोड़ का मार्केट कैप भी बढ़ा।

📊 आज की ट्रेडिंग – शुरुआती रुख और दिनभर का मिज़ाज़

सोमवार की सुबह बाजार ने कमजोर शुरुआत की थी। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 310 अंकों से गिरा, वहीं निफ्टी 50 25,450 के नीचे ट्रेड कर रहा था।

हालांकि, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, निवेशकों ने खरीदारी शुरू कर दी और निफ्टी तथा सेंसेक्स अपने निचले स्तरों से ऊपर उठने लगे। सुबह के शुरुआती सत्र में एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक जैसे बड़े शेयरों ने बाजार को सपोर्ट दिया

📌 मुख्य इंडेक्स का प्रदर्शन

सूचकांकआज का स्तरबदलाव
BSE सेंसेक्स~83,277+650 अंकों तक वृद्धि
NSE निफ्टी 50~25,682+211 अंकों का उछाल
सन्दर्भ: एनएसई व बीएसई closing data

🏆 टॉप गेनर्स (बड़े बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयर)

आज बाज़ार में निम्नलिखित शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया:

  • पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया – करीब 5% की तेजी के साथ अग्रणी प्रदर्शन।
  • कोल इंडिया – लगभग 3% तक बढ़त दर्ज की।
  • एचडीएफसी बैंक, अडानी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थकेयर ने भी सकारात्मक रुख दिखाया।

📉 टॉप लूज़र्स (कमज़ोर प्रदर्शन करने वाले शेयर)

कुछ शेयर आज गिरावट के साथ समाप्त हुए:

  • क्वालिटी वॉल्स (Kwality Wall’s) – अपनी डेब्यू ट्रेडिंग में करीब 2% की गिरावट के साथ कमजोर प्रदर्शन।
  • टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा मोटर्स (PV) – इन स्टॉक्स में भी गिरावट दर्ज की गई।

🚗 ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में गिरावट – Q3 के नतीजे का प्रभाव

आज की ट्रेडिंग में ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी Ltd. के शेयरों में भी गिरावट आई। कंपनी ने Q3 वित्तीय परिणाम जारी किए, जिसमें राजस्व में भारी कमी (-55%) दिखाई दी और नेट नुकसान ₹487 करोड़ रहा।इसके चलते कंपनी के शेयर लगभग 7% तक नीचे आए

यह गिरावट निवेशकों की ओर से आय और मांग की कमजोर उम्मीदों के कारण आई।

📊 फ्रैक्टल एनालिटिक्स IPO – सूची में गिरावट

भारत की प्रमुख AI कंपनी फ्रैक्टल एनालिटिक्स का IPO आज सूचीबद्ध हुआ, लेकिन निवेशकों की निराशा जारी रही। कंपनी का प्रीमियम IPO issue price के मुकाबले शुरू हुआ था लेकिन ट्रेडिंग के शुरुआती समय में शेयर लगभग 5% नीचे आए, जिससे यह IPO अपेक्षित प्रदर्शन नहीं दे सका।

💹 सेक्टर वाइड मूवमेंट और बाज़ार भावना

आज के ट्रेडिंग से पता चला कि बैंकिंग, ऊर्जा और फार्मा सेक्टरों में खरीदारी रही, जिससे बाजार को मजबूती मिली। वहीं आईटी और कुछ ऑटो शेयरों में कमजोरी के कारण कुछ दबाव भी दिखा।

इसके अलावा, निवेशकों की जोखिम-अहसास (India VIX) में हल्की बढ़त भी रूकी हुई भावना को दर्शाती है।

पटना हॉस्टल कांड में बड़ा मोड़: Bihar State Human Rights Commission की एंट्री, SSP को नोटिस; CBI जांच के बीच 8 हफ्ते में रिपोर्ट तलब

Patna NEET Student Case: पटना के कंकड़बाग स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। राज्य में बढ़ती जनचिंता और गंभीर सवालों के बीच Bihar State Human Rights Commission ने इस प्रकरण का संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए पटना के एसएसपी को नोटिस जारी किया है और आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

यह मामला पहले से ही केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) की जांच के दायरे में है। अब मानवाधिकार आयोग की सक्रियता से जांच प्रक्रिया पर और कड़ी निगरानी की उम्मीद जताई जा रही है। छात्रा जहानाबाद जिले की निवासी थी और पटना में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों ने पूरे प्रकरण को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान

मामले में मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार मामलों के जानकार अधिवक्ता एस.के. झा की ओर से राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि छात्रा की मौत की परिस्थितियां सामान्य नहीं थीं और शरीर पर चोटों के निशान गंभीर आपराधिक घटना की ओर संकेत करते हैं।

याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने प्रारंभिक रूप से इसे मानवाधिकार से जुड़ा संवेदनशील मामला माना। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि किसी छात्रा की सुरक्षा में चूक हुई है या जांच में लापरवाही बरती गई है, तो यह गंभीर अधिकार हनन की श्रेणी में आएगा।

इसी के तहत आयोग ने पटना एसएसपी को नोटिस जारी कर आठ सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि वह मामले की प्रगति की निगरानी करेगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे के निर्देश जारी करेगा।

8 सप्ताह में रिपोर्ट, 22 अप्रैल को अगली सुनवाई

आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि मामले की संपूर्ण तथ्यात्मक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम विवरण, जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक उठाए गए कदमों का ब्यौरा प्रस्तुत किया जाए।

मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित की गई है। इस दौरान यह देखा जाएगा कि पुलिस और अन्य एजेंसियों ने जांच में क्या प्रगति की है।

मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा ने आयोग से मांग की थी कि मामले की निगरानी अवकाश-प्राप्त न्यायाधीश की देखरेख में कराई जाए, ताकि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके। आयोग ने फिलहाल एसएसपी को तलब कर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई शंका

छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार शरीर पर चोटों के निशान पाए गए हैं, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह आत्महत्या का मामला है या किसी आपराधिक घटना का परिणाम।

परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी के साथ अन्याय हुआ है और पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। परिवार ने शुरू से ही निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

स्थानीय स्तर पर छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।

CBI की जांच तेज, जहानाबाद में घंटों पूछताछ

मामले की जांच फिलहाल Central Bureau of Investigation के हाथों में है। रविवार को सीबीआई की टीम जहानाबाद पहुंची, जहां छात्रा का पैतृक घर है। टीम ने परिजनों से कई घंटे तक पूछताछ की और छात्रा के दैनिक जीवन, पढ़ाई के दबाव, मित्र मंडली और हाल के घटनाक्रम के बारे में जानकारी जुटाई।

जांच के दौरान सीबीआई ने छात्रा की किताबें, कॉपियां, पेन, कपड़े, बैग और यहां तक कि उसकी व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं भी अपने कब्जे में ले लीं। इन सामग्रियों की फॉरेंसिक जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि छात्रा की मानसिक स्थिति क्या थी और घटना से पहले के संकेत क्या थे।

सीबीआई ने छात्रा के भाई का मोबाइल फोन भी जब्त किया है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डेटा की जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि घटना से पहले किन-किन लोगों से बातचीत हुई थी और कोई संदिग्ध संपर्क तो नहीं था।

SIT और CBI के बीच जांच का क्रम

सीबीआई के आने से ठीक एक रात पहले बिहार पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) भी परिजनों के घर पहुंची थी। हालांकि, परिजनों ने उस समय किसी भी वस्तु को सौंपने से इनकार कर दिया था।

परिजनों का कहना था कि वे केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में ही जांच चाहते हैं, ताकि उन्हें निष्पक्षता का भरोसा मिल सके। बाद में सीबीआई टीम ने औपचारिक प्रक्रिया के तहत सभी आवश्यक वस्तुएं जब्त कीं।

अब जब मानवाधिकार आयोग भी सक्रिय हो गया है, तो जांच प्रक्रिया की बहुस्तरीय निगरानी हो रही है—एक ओर सीबीआई की आपराधिक जांच, दूसरी ओर राज्य मानवाधिकार आयोग की वैधानिक निगरानी।

छात्रावास सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना ने पटना और अन्य शहरों में संचालित छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। शंभू गर्ल्स हॉस्टल, जहां छात्रा रह रही थी, कंकड़बाग जैसे व्यस्त इलाके में स्थित है।

परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि छात्रावास में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और प्रशासनिक सतर्कता होती, तो शायद इस घटना को रोका जा सकता था।

विशेषज्ञों का मानना है कि निजी छात्रावासों के लिए सुरक्षा मानकों, सीसीटीवी निगरानी, विजिटर रजिस्टर और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। यह मामला ऐसे संस्थानों के लिए चेतावनी है कि छात्राओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

सामाजिक और कानूनी प्रभाव

यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और छात्र सुरक्षा प्रणाली की परीक्षा बन गया है। मानवाधिकार आयोग की सक्रियता से यह संकेत गया है कि छात्राओं के अधिकारों और सुरक्षा के मामलों में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यदि जांच में लापरवाही या कदाचार साबित होता है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

साथ ही, यह मामला राज्य में छात्र सुरक्षा नीति और छात्रावास नियमन को लेकर व्यापक बहस का कारण बन सकता है।

पटना हॉस्टल कांड अब राज्यव्यापी चर्चा का विषय बन चुका है। Bihar State Human Rights Commission की एंट्री और Central Bureau of Investigation की सक्रिय जांच से उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी। यह केवल एक छात्रा के लिए न्याय की लड़ाई नहीं, बल्कि राज्य की हजारों छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न भी है।

बिहार में महिला सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल: CM Nitish Kumar ने 25 लाख महिलाओं के खातों में भेजे 2500 करोड़, 2 लाख तक की चरणबद्ध सहायता का रोडमैप तैयार

पटना : बिहार में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत राज्य की 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की पहली किस्त ट्रांसफर की। कुल 2500 करोड़ रुपये की यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई। पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक क्लिक के साथ राशि जारी की, जबकि जिला, प्रखंड, संकुल और ग्राम संगठन स्तर पर भी समानांतर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

यह पहल केवल आर्थिक सहायता का वितरण भर नहीं है, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करने, उन्हें वित्तीय रूप से सशक्त बनाने और परिवार तथा समाज में उनकी भूमिका को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना चरणबद्ध तरीके से महिलाओं को अधिकतम दो लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराएगी, ताकि वे छोटे व्यवसाय, कृषि-आधारित गतिविधियों, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई, फूड प्रोसेसिंग या अन्य स्थानीय उद्यम शुरू कर सकें।

राज्यभर में बहुस्तरीय आयोजन, 38 जिलों में एक साथ कार्यक्रम

मुख्यमंत्री द्वारा राशि जारी किए जाने के साथ ही राज्य के सभी 38 जिला मुख्यालयों में जिला पदाधिकारियों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में संबंधित विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 150 से 200 महिलाएं शामिल हुईं।

इन आयोजनों का उद्देश्य केवल राशि वितरण की औपचारिकता निभाना नहीं था, बल्कि महिलाओं को योजना की आगामी किस्तों, पात्रता शर्तों, स्वरोजगार के विकल्पों और प्रशिक्षण सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी देना भी था। कई जिलों में लाभार्थी महिलाओं ने मंच से अपने अनुभव साझा किए और बताया कि प्रारंभिक सहायता से वे किस प्रकार छोटे व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रही हैं।

राज्य सरकार के मुताबिक, जिला स्तर पर आयोजित इन कार्यक्रमों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पटना मुख्यालय से जोड़ा गया, जिससे मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी सीधे तौर पर जिलों की गतिविधियों से अवगत हो सके। इससे पारदर्शिता और निगरानी की व्यवस्था को भी मजबूती मिली।

1680 संकुल स्तरीय संघों और 70 हजार ग्राम संगठनों तक पहुंच

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का दायरा केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रहा। जीविका कार्यक्रम के तहत राज्य के 1680 संकुल स्तरीय संघों (Cluster Level Federation) में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रत्येक संकुल स्तरीय संघ में कम से कम 100 स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने भाग लिया।

इन कार्यक्रमों में महिलाओं को बताया गया कि किस प्रकार वे सामूहिक उद्यम मॉडल अपना सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, कई संकुलों में डेयरी, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, अगरबत्ती निर्माण, मसाला प्रोसेसिंग और सिलाई केंद्र जैसी गतिविधियों के मॉडल प्रस्तुत किए गए।

इसके अतिरिक्त, राज्य के लगभग 70,000 ग्राम संगठनों में भी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया। ग्राम स्तर पर यह सुनिश्चित किया गया कि अधिकतम महिलाएं योजना की जानकारी से अवगत हों और उन्हें आवेदन एवं आगे की प्रक्रिया समझने में कोई दिक्कत न हो। ग्राम संगठनों में बैठकों के दौरान बैंकिंग प्रक्रिया, डिजिटल लेन-देन और डीबीटी के महत्व पर भी चर्चा की गई।

पांच चरणों में 2 लाख रुपये तक की सहायता

योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी चरणबद्ध वित्तीय सहायता संरचना है। पहले चरण में 10,000 रुपये की राशि महिलाओं को उनके खाते में भेजी गई है। इसके बाद सहायता इस प्रकार दी जाएगी:

  • दूसरे चरण में 20,000 रुपये
  • तीसरे चरण में 40,000 रुपये
  • चौथे चरण में 80,000 रुपये
  • पांचवें और अंतिम चरण में 60,000 रुपये

इस प्रकार कुल मिलाकर प्रत्येक पात्र महिला को दो लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का कहना है कि चरणबद्ध भुगतान से यह सुनिश्चित होगा कि राशि का उपयोग नियोजित उद्यम के लिए ही हो। प्रत्येक चरण से पहले महिला की प्रगति की समीक्षा की जाएगी, ताकि यह देखा जा सके कि पहले दी गई राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया। यदि लाभार्थी ने सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय शुरू किया है और उसका विस्तार संभव है, तो अगली किस्त जारी की जाएगी।

3398 वार्डों में विशेष कर्मियों की तैनाती

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने 3398 वार्डों में विशेष कर्मियों की तैनाती का निर्णय लिया है। ये विशेष कर्मी ग्रामीण और शहरी निकायों के वार्ड स्तर पर जाकर लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) करेंगे।

भौतिक सत्यापन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सहायता राशि वास्तव में पात्र महिलाओं तक पहुंचे और उसका उपयोग स्वरोजगार गतिविधियों में हो। विशेष कर्मी यह भी जांच करेंगे कि महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी है या नहीं, उसका व्यवसाय किस चरण में है, और उसे प्रशिक्षण या मार्गदर्शन की आवश्यकता है या नहीं।

सरकार के अनुसार, पात्रता की पूरी पहचान के बाद ही अगली किस्त की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे योजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण सुनिश्चित होगा।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना केवल तात्कालिक आर्थिक राहत कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह राज्य की दीर्घकालिक महिला सशक्तिकरण रणनीति का हिस्सा है। बिहार में बड़ी संख्या में महिलाएं कृषि और अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं, लेकिन उनके पास पूंजी और बाजार तक पहुंच की कमी होती है।

इस योजना के जरिए सरकार महिलाओं को वित्तीय सहायता के साथ-साथ प्रशिक्षण, बाजार संपर्क और बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास कर रही है। स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क का उपयोग कर महिलाओं को संगठित किया जा रहा है, जिससे वे सामूहिक रूप से कच्चा माल खरीद सकें, उत्पाद तैयार कर सकें और बेहतर दाम पर बेच सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से हुआ, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। छोटे-छोटे उद्यमों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जिससे पलायन की प्रवृत्ति में भी कमी आ सकती है।

डीबीटी के माध्यम से पारदर्शी वितरण

पूरी राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से महिलाओं के बैंक खातों में भेजी गई है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और भ्रष्टाचार की संभावना कम होती है।

राज्य सरकार ने बैंकिंग तंत्र के साथ समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया कि राशि समय पर खातों में पहुंचे। कई जिलों में लाभार्थी महिलाओं को मोबाइल संदेश के जरिए राशि जमा होने की सूचना दी गई।

डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं को बैंक खाते संचालित करने, यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

योजना का सामाजिक प्रभाव भी व्यापक माना जा रहा है। जब महिलाओं के हाथ में आर्थिक संसाधन आते हैं, तो परिवार के स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण पर सकारात्मक असर पड़ता है। कई अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि महिलाओं द्वारा अर्जित आय का बड़ा हिस्सा परिवार के कल्याण पर खर्च होता है।

इसके अलावा, आर्थिक रूप से सशक्त महिला घरेलू और सामाजिक निर्णयों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाती है। इससे लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलता है।

बिहार सरकार का दावा है कि यह योजना राज्य की लाखों महिलाओं के जीवन में बदलाव लाने की क्षमता रखती है। यदि सभी चरणों में सहायता राशि समय पर जारी होती है और प्रभावी निगरानी होती है, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

बिहार के प्रमुख शहरों के इस समय के न्यूज़ पोस्ट

आज (16 फरवरी 2026) के ताज़ा अपडेट

🏙️ 1. पटना (राजधानी)

  • विधानसभा में विपक्ष का हंगामा और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम जारी।
  • मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: फरवरी में 25 लाख महिलाओं के खाते में 10,000 आर्थिक सहायता का पैसा ट्रांसफर हुआ — लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है।
  • मौसम में बदलाव: धूप बढ़ने के साथ तापमान में उछाल, आने वाले दिनों में गर्मी की शुरुआत का अनुमान है।
  • भूमि पोर्टल में सुधार:
    डिप्टी सीएम द्वारा बिहार भूमि पोर्टल की तकनीकी खामियों को ठीक कराकर उपयोगकर्ताओं को बेहतर सेवा उपलब्ध करने का आदेश जारी किया गया।

🚩 2. मुजफ्फरपुर

  • बड़े पैमाने पर अग्निवीर भर्ती (Agniveer Recruitment) शुरू हुई — 15 जिलों के 7040 उम्मीदवार शामिल होंगे।
  • शहर में मौसम गर्मी की ओर उभर रहा है, धूप अधिक मिलेगी।

🛕 3. भागलपुर

  • मौसम अपडेट: धूप और बढ़ता तापमान, लेकिन तापमान में दैनिक उतार-चढ़ाव बना है।
  • पक्षी बुखार से पहले अलर्ट (कुछ सप्ताह पहले नउगाचिया में कौओं की मौत से सावधानी बरती जा रही है) — प्रशासन सतर्क है।
  • GRP विवाद: भागलपुर में एक GRP कांस्टेबल का भोजपुरी गानों पर डांस करते वीडियो वायरल होने के कारण पुलिस विभाग की छवि पर सवाल उठे हैं।

🔍 4. दरभंगा

  • शहर और आसपास के क्षेत्रों में मौसम उम्मीद से गर्मी की ओर बढ़ रहा है।
  • शिक्षा से जुड़ी खबरों में बोर्ड और परीक्षा संबंधी अपडेट जारी (जैसे शेखपुरा के आदर्श परीक्षा सेंटर का समाचार) — दरभंगा सहित आसपास के जिलों के लिए।

📊 5. गया

  • मौसम में आम गर्मी का अनुभव, धूप और तापमान में तेजी।
  • स्थानीय प्रशासन और शिक्षा-समाचार में अपडेट के लिए लाइव समाचार चल रहे हैं।

📌 6. समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी और भोजपुर

  • अग्निवीर भर्ती केंद्रों में शामिल उम्मीदवारों की सूची में ये जिले शामिल हैं — भर्ती से जुड़े कई युवा शामिल हो रहे हैं।
  • मौसम सामान्य रूप से अन्य शहरों की तरह गर्मी की ओर।

📍 7. जहानाबाद में गोलीकांड:

जहानाबाद में सिगरेट के विवाद पर एक व्यक्ति को गोली मार दी गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने आरोपियों को पकड़कर पिटाई की। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

📍 राशन कार्डधारकों के लिए eKYC चेतावनी:

राज्य सरकार ने राशन कार्डधारकों से 28 फ़रवरी तक eKYC प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया है अन्यथा राशन सूची से निकलने का खतरा है।

गाजियाबाद डंपिंग ग्राउंड विवाद: मीरपुर में किसानों पर लाठीचार्ज का आरोप, 25 से अधिक घायल; पुलिस बोली– हल्का बल प्रयोग, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र के मीरपुर गांव में डंपिंग ग्राउंड को लेकर चल रहा विवाद रविवार को हिंसक झड़प में बदल गया। करीब दो महीने से नगर निगम द्वारा यमुना खादर क्षेत्र के किनारे बनाए गए कचरा निस्तारण स्थल के विरोध में धरना दे रहे किसानों और पुलिस के बीच उस समय टकराव हो गया, जब प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। किसानों का आरोप है कि पुलिस ने जबरन धरना स्थल खाली कराया, लाठीचार्ज किया और महिलाओं तक को नहीं बख्शा। वहीं पुलिस का कहना है कि लाठीचार्ज नहीं किया गया, बल्कि केवल “हल्का बल प्रयोग” कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।

यह पूरा मामला मीरपुर, पचायरा और बदरपुर गांवों के किसानों से जुड़ा है, जो पिछले दो महीनों से डंपिंग ग्राउंड को हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस कचरा स्थल से पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है, लोग बीमार हो रहे हैं और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का तर्क है कि इस जमीन पर स्कूल या अस्पताल बनाया जाना चाहिए, न कि कूड़ाघर।

दो महीने से जारी है विरोध

मीरपुर गांव के बाहरी इलाके में नगर निगम द्वारा यमुना नदी के खादर क्षेत्र के पास डंपिंग ग्राउंड विकसित किया गया है। यहां शहर का ठोस कचरा लाकर डाला जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से यहां कूड़ा डाला जाने लगा है, तब से आसपास के खेतों, घरों और जल स्रोतों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

गांववालों के अनुसार, दुर्गंध के कारण सांस लेने में परेशानी होती है, बच्चों और बुजुर्गों में त्वचा रोग और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ी हैं। किसानों का दावा है कि कचरे से निकलने वाला दूषित पानी जमीन में रिसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे पिछले दो महीने से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

रविवार को अचानक बढ़ा तनाव

रविवार दोपहर करीब 2 बजे स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारी किसान बड़ी संख्या में डंपिंग ग्राउंड स्थल पर पहुंच गए। इसी दौरान यह सूचना फैली कि पुलिस गिरफ्तारी के लिए ट्रक और वैन लेकर पहुंच रही है। देखते ही देखते वहां भीड़ बढ़ने लगी और नारेबाजी शुरू हो गई।

किसानों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें समझाने के बजाय बलपूर्वक हटाने की कोशिश की। जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वाहनों में बैठाकर ले जाना शुरू किया, तो भीड़ उग्र हो गई। कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।

महिलाओं का आरोप– खेतों में दौड़ाकर पीटा

घटना के दौरान मौजूद महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वे विरोध कर रही थीं, तब पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की। विरोध करने पर उन्हें खेतों की ओर दौड़ा लिया गया। कई महिलाएं भागते-भागते गिर गईं, जिसके बाद उन्हें घसीटकर पीटा गया।

एक बुजुर्ग महिला बेहोश हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि महिलाएं हाथ जोड़कर रहम की गुहार लगाती रहीं, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। इस दौरान कई महिलाएं घायल हो गईं। कुछ को सिर और कमर में गंभीर चोटें आई हैं।

25 से अधिक घायल होने का दावा

किसानों का दावा है कि लाठीचार्ज में करीब 25 लोग घायल हुए हैं। एक महिला के सिर में गंभीर चोट आई है, जबकि एक ग्रामीण का कूल्हा टूट गया। 70 वर्षीय किसान धन सिंह ने कहा कि उन्हें कई जगह चोट लगी है और हाथ की एक उंगली टूट गई है।

मीरपुर निवासी विनीत शर्मा का कहना है कि किसानों को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि पुलिस का कोई भी कर्मचारी घायल नहीं हुआ। हालांकि पुलिस का दावा इससे अलग है।

एक अन्य किसान भूरा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने गाली-गलौज की और मारपीट की। उन्होंने अपने शरीर पर चोट के निशान भी दिखाए। सोनू नामक किसान ने कहा कि उन्होंने तो हाथ बांध रखे थे, फिर भी पुलिस ने बेरहमी से लाठियां बरसाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी मां तक को नहीं छोड़ा गया।

पुलिस का पक्ष– लाठीचार्ज नहीं, हल्का बल प्रयोग

घटना को लेकर पुलिस प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने कहा कि किसानों को अधिकारियों को ज्ञापन देना था, लेकिन वे डंपिंग ग्राउंड का ताला तोड़कर अंदर घुस गए। उन्हें हटाने के दौरान दो पुलिसकर्मी घायल हुए, जिन्हें अस्पताल भेजा गया है।

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव किया गया, जिसकी वीडियो फुटेज भी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, लाठीचार्ज नहीं किया गया, बल्कि हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया गया।

घटना के दौरान डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात था। चार थानों से 100 से अधिक पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे। स्थिति बिगड़ने पर नगर निगम के अधिकारी और मजिस्ट्रेट मौके से चले गए।

धरना स्थल बदला, आंदोलन जारी

पुलिस द्वारा डंपिंग ग्राउंड स्थल खाली कराने के बाद ग्रामीण करीब 100 मीटर दूर स्थित मंदिर परिसर में धरने पर बैठ गए। सोमवार को भी किसान मीरपुर गांव के बाहर धरना दे रहे थे। हालांकि प्रदर्शनकारियों की संख्या घटकर 10-15 रह गई है, क्योंकि कई लोग घर लौट चुके हैं।

किसानों का कहना है कि जब तक डंपिंग ग्राउंड हटाया नहीं जाएगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा। वे प्रशासन से लिखित आश्वासन चाहते हैं।

विधायक का बयान– सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

लोनी विधानसभा से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने कहा कि वे इस समय लखनऊ में हैं, जहां विधानसभा सत्र चल रहा है। उन्होंने कहा कि डंपिंग ग्राउंड सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाया गया है, इसलिए वे इस पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था किसी भी हाल में नहीं बिगड़नी चाहिए और पुलिस व किसानों दोनों से बातचीत की जाएगी।

पर्यावरण बनाम विकास की बहस

यह विवाद केवल एक स्थानीय धरना नहीं, बल्कि पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन की बहस को भी सामने लाता है। शहरों के बढ़ते कचरे के निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड आवश्यक माने जाते हैं, लेकिन उनके स्थान चयन और प्रबंधन को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते हैं।

मीरपुर के किसान सवाल उठा रहे हैं कि क्या आबादी और कृषि भूमि के पास कचरा स्थल बनाना उचित है? उनका कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह स्थल बनाया गया है, तो भी स्थानीय लोगों की सहमति और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

प्रशासन के सामने चुनौती

प्रशासन के लिए यह मामला कानून-व्यवस्था और जनभावनाओं के बीच संतुलन साधने की चुनौती बन गया है। एक ओर नगर निगम के लिए कचरा निस्तारण जरूरी है, तो दूसरी ओर ग्रामीणों की सेहत और आजीविका का सवाल भी महत्वपूर्ण है।

यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित नहीं हुआ, तो यह विवाद आगे और गहरा सकता है। फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति को नियंत्रण में बताया जा रहा है।

पीएम मोदी की अनुपस्थिति में ओम बिरला करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व, तारिक रहमान के शपथ ग्रहण से नई दिल्ली-ढाका संबंधों में नई शुरुआत के संकेत

Bangladesh Swearing in Ceremony: बांग्लादेश की राजनीति में एक अहम मोड़ पर नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मंगलवार, 17 फरवरी को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे। उनके साथ भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद रहेंगे।

हालांकि बांग्लादेश सरकार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, लेकिन व्यस्त कार्यक्रमों के कारण पीएम मोदी इस समारोह में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को इस महत्वपूर्ण समारोह में भेजने का निर्णय लिया है।

विदेश मंत्रालय का बयान: लोकतांत्रिक मूल्यों की साझी विरासत

भारत के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा, “इस महत्वपूर्ण समारोह में लोकसभा अध्यक्ष का शामिल होना भारत और बांग्लादेश के लोगों के बीच गहरी मित्रता को दर्शाता है और हमारे दोनों देशों के जुड़ाव वाले लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति भारत के दृढ़ संकल्प की पुष्टि करता है।”

यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि नई दिल्ली ढाका के साथ अपने संबंधों को निरंतरता और मजबूती देना चाहती है, चाहे वहां की सत्ता में कोई भी दल क्यों न हो।

भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंध दशकों पुराने हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम से लेकर वर्तमान समय तक दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग, व्यापारिक संबंध और सुरक्षा सहयोग लगातार बढ़ते रहे हैं। ऐसे में नई सरकार के शपथ ग्रहण में भारत की सक्रिय भागीदारी इस रिश्ते के महत्व को रेखांकित करती है।

संसद परिसर के साउथ प्लाजा में होगा ऐतिहासिक आयोजन

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन राष्ट्रीय संसद परिसर के साउथ प्लाजा में तारिक रहमान और उनके मंत्रिमंडल को शपथ दिलाएंगे। यह आयोजन कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है।

अब तक बांग्लादेश में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया जाता रहा है, लेकिन इस बार परंपरा से हटकर राष्ट्रीय संसद परिसर के साउथ प्लाजा को चुना गया है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि नई सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को केंद्र में रखकर शासन चलाना चाहती है।

स्थानीय समाचारपत्रों ‘प्रोथोम आलो’ और ‘इत्तेफाक’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन नव-निर्वाचित सांसदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।

इस कार्यक्रम में देश-विदेश के कई गणमान्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं।

पीएम मोदी ने दी बधाई, जताई क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीद

भारत ने बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सफल समापन और नई सरकार के गठन का स्वागत किया है। चुनाव में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन कर तारिक रहमान को बधाई दी।

पीएम मोदी ने अपने संदेश में आशा जताई कि नई सरकार क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और आपसी सहयोग को और मजबूती देगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ मिलकर दक्षिण एशिया में शांति और समृद्धि के लिए काम करता रहेगा।

यह संवाद दोनों देशों के बीच सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब दक्षिण एशिया की राजनीति में कई चुनौतियां सामने हैं।

नई राजनीतिक वास्तविकता और भारत-बांग्लादेश संबंध

बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान के सलाहकार हुमायूं कबीर ने भी भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि बांग्लादेश में बीएनपी को मिले प्रचंड जनादेश के बाद बदली हुई राजनीतिक वास्तविकता को स्वीकार करना अब भारत की जिम्मेदारी है।

कबीर ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के लाभ के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि भारत सरकार बांग्लादेश की स्थिरता को प्रभावित करने के लिए शेख हसीना या अवामी लीग के अन्य नेताओं को अपनी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति न दे।

यह बयान स्पष्ट करता है कि नई सरकार भारत के साथ रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करना चाहती है। हालांकि भारत ने हमेशा यह नीति अपनाई है कि वह पड़ोसी देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों के साथ काम करता है।

बदलते समीकरणों के बीच कूटनीतिक संतुलन

बांग्लादेश की राजनीति में बदलाव का असर क्षेत्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। बीएनपी और अवामी लीग के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है। ऐसे में नई सरकार के गठन के बाद भारत को संतुलित और व्यावहारिक नीति अपनानी होगी।

भारत के लिए बांग्लादेश सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी, सीमा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, जल बंटवारा, ऊर्जा साझेदारी और व्यापारिक संबंध—इन सभी क्षेत्रों में बांग्लादेश की भूमिका अहम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली इस बात को लेकर सजग है कि ढाका के साथ संबंधों में निरंतरता बनी रहे। ओम बिरला का शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होना इसी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

लोकतंत्र की बहाली और जनादेश का संदेश

बांग्लादेश में हालिया चुनावों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बहाली के रूप में देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी चुनाव परिणामों पर नजर रखी थी। बीएनपी को मिला भारी जनादेश इस बात का संकेत है कि जनता परिवर्तन चाहती थी।

तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार के सामने कई चुनौतियां होंगी—आर्थिक सुधार, रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण, निवेश आकर्षित करना और क्षेत्रीय संबंधों को संतुलित रखना।

भारत के साथ संबंध इस पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। भारत बांग्लादेश का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। इसके अलावा बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा है।

आगे की राह: सहयोग और विश्वास की परीक्षा

तारिक रहमान का शपथ ग्रहण केवल एक औपचारिक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत भी है।

भारत के लिए यह अवसर है कि वह नई सरकार के साथ विश्वास और सहयोग की नई नींव रखे। वहीं बांग्लादेश के लिए भी यह जरूरी होगा कि वह संतुलित विदेश नीति अपनाए और क्षेत्रीय स्थिरता में रचनात्मक भूमिका निभाए।

ओम बिरला की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत इस बदलाव को सकारात्मक रूप से देख रहा है और लोकतांत्रिक मूल्यों के साझा मंच पर दोनों देश आगे बढ़ना चाहते हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को किस दिशा में ले जाती है और क्षेत्रीय कूटनीति में कौन से नए समीकरण उभरते हैं। फिलहाल 17 फरवरी का दिन बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज होने जा रहा है, जब तारिक रहमान औपचारिक रूप से देश की बागडोर संभालेंगे और दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होगा।

IND vs PAK: कोलंबो में गरजा भारत, ईशान किशन की तूफानी पारी से पाकिस्तान 61 रन से पस्त

कोलंबो, 15 फरवरी 2026
टी20 विश्व कप 2026 के हाई-वोल्टेज मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 61 रन से हराकर टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की और सुपर-8 में अपनी जगह लगभग पक्की कर ली। रोमांच से भरे इस मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 175 रन बनाए, जवाब में पाकिस्तान की टीम 114 रन पर सिमट गई।

Highlights

  • भारत ने 61 रन से दर्ज की शानदार जीत
  • 176 रन के लक्ष्य के जवाब में पाकिस्तान 114 पर सिमटा
  • ईशान किशन की 40 गेंदों पर 77 रन की विस्फोटक पारी
  • बुमराह, हार्दिक, अक्षर और वरुण को दो-दो विकेट
  • टॉस के दौरान कप्तानों ने नहीं मिलाए हाथ

भारत की मजबूत बल्लेबाज़ी

टॉस हारकर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी भारतीय टीम को तेज शुरुआत मिली। युवा सलामी बल्लेबाज़ Ishan Kishan ने 40 गेंदों पर 77 रन की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने 10 चौके और 3 छक्के जड़ते हुए 192.50 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए।

कप्तान Suryakumar Yadav ने 32 रन का योगदान दिया, जबकि शिवम दुबे ने 17 गेंदों में 27 रन बनाकर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। पाकिस्तान की ओर से साईम अयूब ने 3 विकेट झटके, लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ों की आक्रामकता पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगा सके।

पाकिस्तान की खराब शुरुआत, भारतीय गेंदबाज़ों का जलवा

176 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। पावरप्ले में ही चार विकेट गिर गए। कप्तान सलमान अली आगा और बाबर आज़म सस्ते में पवेलियन लौट गए।

पाकिस्तान की ओर से उस्मान खान ने सर्वाधिक 44 रन बनाए, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से सहयोग नहीं मिला।

भारतीय गेंदबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन किया। Hardik Pandya, Jasprit Bumrah, Axar Patel और वरुण चक्रवर्ती ने दो-दो विकेट लेकर पाक बल्लेबाज़ी की कमर तोड़ दी।

कप्तानों के बीच नहीं हुआ हैंडशेक

मुकाबले से पहले टॉस के दौरान भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव और पाकिस्तान के कप्तान के बीच हाथ नहीं मिलाने की घटना भी चर्चा का विषय रही। एशिया कप 2025 के बाद यह दूसरा बड़ा टूर्नामेंट है, जहां “नो हैंडशेक पॉलिसी” देखने को मिली।

दुर्गापुर के IQ City Medical College Hospital में द्वितीय वर्ष के छात्र ने की आत्महत्या, हॉस्टल के बाथरूम में मिला शव

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित IQ City Medical College Hospital में शनिवार रात एक दर्दनाक घटना सामने आई। बिहार के पटना निवासी 22 वर्षीय लावण्या प्रताप, जो द्वितीय वर्ष के मेडिकल छात्र थे, हॉस्टल के बाथरूम में फंदे से लटके पाए गए। घटना के बाद पूरे कैंपस में शोक और सनसनी का माहौल है।

सूचना मिलते ही दुर्गापुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। एसीपी सुबीर रॉय के अनुसार, अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया गया है और पोस्टमार्टम दुर्गापुर उपजिला अस्पताल में कराया जाएगा। पुलिस सहपाठियों और करीबी दोस्तों से पूछताछ कर रही है।

परीक्षा के दबाव में उठाया कदम?

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्र लगातार परीक्षाओं में असफल हो रहा था और एक भी सेमेस्टर पास नहीं कर पाया था। बताया जा रहा है कि रिजल्ट रिव्यू की प्रक्रिया चल रही थी, जिससे वह मानसिक दबाव में था। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है और किसी अन्य कारण की संभावना से भी इनकार नहीं किया है।

मृतक के पिता अनिल कुमार ने बताया कि बेटे की परीक्षा ठीक नहीं गई थी और संभवतः उसी तनाव में उसने यह कदम उठाया।

कॉलेज प्रशासन की चुप्पी

घटना के बाद कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। छात्र का शव फिलहाल अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। परिवार के दुर्गापुर पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

पहले भी सुर्खियों में रहा कॉलेज

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में इसी कॉलेज की एक प्रथम वर्ष छात्रा के साथ कैंपस के बाहर दुष्कर्म की घटना सामने आई थी, जिसमें कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है।

यह घटना मेडिकल शिक्षा संस्थानों में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और काउंसलिंग सुविधाओं की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही मौत के कारणों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

UP Codeine Cough Syrup Case: वाराणसी से पूर्व सपा युवा नेता गिरफ्तार, 2000 करोड़ के अवैध नेटवर्क की जांच तेज

उत्तर प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ यूनिट ने वाराणसी के हरहुआ रिंग रोड के पास से अमित यादव को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में पहले से मुकदमा दर्ज है।

गिरफ्तार अमित यादव वाराणसी के मैदागिन क्षेत्र का निवासी है। पूछताछ में उसने बताया कि वह हरिश्चंद्र पोस्टग्रेजुएट कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुका है और समाजवादी पार्टी की युवा सभा में राज्य सचिव की जिम्मेदारी भी निभा चुका है।

कैसे जुड़ा नेटवर्क से नाम?

एसटीएफ के अनुसार, कॉलेज के दिनों में उसकी मुलाकात शुभम जायसवाल से हुई थी। जांच में सामने आया है कि शुभम के पिता भोला प्रसाद की कंपनी ‘शैली ट्रेडर्स’ पर एबॉट कंपनी की ‘फेंसेडिल’ कफ सिरप की अवैध सप्लाई और तस्करी का आरोप है। कोडीनयुक्त कफ सिरप का इस्तेमाल नशे के रूप में किया जाता है, जिसकी मांग पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक बताई जा रही है।

पुलिस का दावा है कि अधिक मुनाफे के लालच में अमित यादव ने अपनी कंपनी ‘जीएल सर्जिकल’ के नाम से एक लाख से ज्यादा बोतलें खरीदीं। बाद में फर्जी कागजों के जरिए इन्हें दूसरी कंपनी के नाम पर ऊंची कीमत पर बेचा गया।

गंभीर आपराधिक मामले पहले से दर्ज

अधिकारियों के मुताबिक अमित यादव पर दंगा, हत्या के प्रयास और धोखाधड़ी जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस पूरे प्रदेश में कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने विधानसभा में विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सरकार के पास नकली दवाओं या कोडीन सिरप से मौत की कोई ठोस जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि मामले में शामिल कुछ आरोपियों के संबंध समाजवादी पार्टी से जुड़े पाए गए हैं।

सीएम योगी ने दावा किया था कि आरोपी अमित यादव की तस्वीर Akhilesh Yadav के साथ देखी गई है और कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल भी सपा से जुड़ा रहा है।

वहीं, अखिलेश यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष पर आरोप मढ़ रही है और निष्पक्ष जांच नहीं हो रही।

क्या है पूरा मामला?

मध्य प्रदेश में कथित तौर पर कफ सिरप के सेवन से 20 बच्चों की मौत के बाद यह मामला सुर्खियों में आया। जांच में खुलासा हुआ कि करीब 57 करोड़ रुपये की 37 लाख से ज्यादा कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें फर्जी दस्तावेजों और लाइसेंस के जरिए बेची गईं। यूपी पुलिस के अनुसार यह पूरा सिंडिकेट करीब 2,000 करोड़ रुपये के अवैध कारोबार से जुड़ा हो सकता है।

18 अक्टूबर को सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज में आबकारी विभाग ने दो संदिग्ध कंटेनरों से 11,967 बोतलें कोडीन कफ सिरप बरामद की थीं। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है। कई जिलों में एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 77 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

सरकार का कहना है कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। वहीं विपक्ष प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे संभव हैं।

टी 20 वर्ल्ड कप 2026 — भारत vs पाकिस्तान मैच में बिहार के Ishan Kishan ने पाकिस्तान को धज्जियाँ उड़ाई!

आज ICC मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप-A क्लैश में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ धमाकेदार बल्लेबाजी की। मुकाबला क़रीब कोलंबो के आर। प्रेमदासा स्टेडियम में खेला जा रहा है।

🏏 ईशान किशन का तूफानी प्रदर्शन:
🔹 ईशान किशन ने बेहद आक्रामक क्रिकेट खेलते हुए 40 गेंदों पर 77 रन बनाये, जिसमें 10 चौके और 3 छक्के शामिल थे।
🔹 उनका स्ट्राइक रेट करीब 192.50 रहा — जो पाकिस्तान के गेंदबाज़ों के लिए किसी सदमे से कम नहीं था।
🔹 किशन ने मैच के दौरान तीव्र 50 भी लगाई और इंड-पाक T20 मुकाबलों में बड़े रिकॉर्ड तोड़ दिए।

📈 टीम इंडिया का स्कोर:
भारत ने पाकिस्तान के सामने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए विराट तरीके से 125/2 का सम्मानजनक स्कोर बनाया (14 ओवर में) — किशन के मैच को संभालने वाले इनिंग के कारण।

पाकिस्तान के लिए चुनौती:
पाकिस्तानी गेंदबाज़ों ने कुछ सफलता हासिल की (जैसे कि शमीम अफ़रीदी और सलमान अघा), लेकिन किशन की तूफ़ानी पारी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी।

गया में जीतन राम मांझी का राहुल गांधी पर तीखा वार, बोले– किसानों के हित वाले बिल पर फैला रहे भ्रम

Bihar Politics: बिहार के गया में एक निजी अस्पताल के उद्घाटन समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री Jitan Ram Manjhi ने कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। मीडिया से बातचीत में मांझी ने कहा कि जिस किसान बिल को राहुल गांधी नुकसानदेह बता रहे हैं, वह वास्तव में अधिकांश लोगों के हित में है और विपक्ष उसे गलत तरीके से पेश कर रहा है।

‘उल्टी खोपड़ी’ वाली टिप्पणी

गया शहर के एसएसपी कोठी के पास आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों ने जब राहुल गांधी की किसान बिल पर आलोचना को लेकर सवाल किया, तो मांझी ने तंज कसते हुए कहा कि “राहुल गांधी की खोपड़ी उल्टी है।” उनका कहना था कि वे उस सच्चाई को देख ही नहीं पा रहे हैं, जो करोड़ों किसानों के भविष्य से जुड़ी है।

95 बनाम 5 का तर्क

केंद्रीय मंत्री ने बिल के समर्थन में आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि इससे देश के 95 प्रतिशत लोगों को सीधा फायदा हो रहा है। उनके मुताबिक, केवल 5 प्रतिशत मामलों में तकनीकी या लेन-देन से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं, जिन्हें विपक्ष बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।

मांझी ने कहा कि जब भारी बहुमत को लाभ मिल रहा हो, तो सीमित कमियों के आधार पर पूरे विधेयक को खारिज करना उचित नहीं है।

विपक्ष पर राजनीतिक आरोप

मांझी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता के सामने रखने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यह बिल किसानों और आम जनता के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, लेकिन इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के पास ठोस मुद्दों की कमी है, इसलिए जनहित की योजनाओं को विवादों में घसीटा जा रहा है।

शंभू गर्ल्स हॉस्टल मौत मामला: CBI ने गांव पहुंचकर की 4 घंटे पूछताछ, छात्रा का सामान और भाई का मोबाइल जब्त

पटना : पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रह रही नीट छात्रा की मौत मामले की जांच अब Central Bureau of Investigation (सीबीआई) के हाथों में है। रविवार सुबह करीब 9 बजे आईजी और एसपी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में 20 सदस्यीय टीम पांच वाहनों से जहानाबाद के शकूराबाद थाना क्षेत्र स्थित छात्रा के गांव पहुंची।

परिजनों से अलग-अलग कमरों में पूछताछ

सीबीआई टीम बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे छात्रा के घर पहुंची। वहां मौजूद माता-पिता, भाई, भाभी और दादी को अलग-अलग कमरों में बैठाकर करीब चार घंटे तक गहन पूछताछ की गई। अधिकारियों ने घटना से जुड़े हर पहलू पर विस्तार से जानकारी जुटाई। जांच के दौरान स्थानीय पुलिस बल भी तैनात रहा और मीडिया को घर से दूरी पर रखा गया।

छात्रा का सामान और भाई का मोबाइल जब्त

जांच पूरी करने के बाद टीम छात्रा की किताबें, कॉपियां, पेन, कपड़े, बैग और अन्य निजी सामान अपने साथ ले गई। इसके अलावा छात्रा के भाई का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। मोबाइल की कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच की जाएगी।

बताया जा रहा है कि सीबीआई के गांव पहुंचने से एक रात पहले बिहार पुलिस की एसआईटी भी सामान लेने आई थी, लेकिन परिजनों ने उन्हें कोई वस्तु नहीं सौंपी थी।

परिजनों को निष्पक्ष जांच का भरोसा

जांच के दौरान सीबीआई टीम ने घटना से जुड़े हर पहलू पर बारीकी से जानकारी ली। अधिकारियों ने घर के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण किया और परिवार द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों व अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया। टीम ने परिजनों को आश्वस्त किया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।

SIT जांच से असंतोष जता रहे थे परिजन

इससे पहले मामले की जांच राज्य की एसआईटी कर रही थी, लेकिन परिजन लगातार जांच प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे थे। उनका आरोप था कि जांच में पारदर्शिता की कमी है। अब मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद परिवार ने उम्मीद जताई है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और सच्चाई सामने आएगी।

शंभू गर्ल्स हॉस्टल में भी हुई पड़ताल

शनिवार को सीबीआई की टीम पटना स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल भी पहुंची थी। टीम के साथ एसआईटी के अधिकारी और केस की आईओ सचिवालय एसडीपीओ डॉ. अन्नू भी मौजूद थीं। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली जांच में उस कमरे की गहन तलाशी ली गई, जहां छात्रा रह रही थी।

CCTV और दस्तावेज खंगाले

सीबीआई अधिकारियों ने कमरे के साथ-साथ हॉस्टल के एंट्री और एग्जिट गेट का भी निरीक्षण किया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एसआईटी ने पूरी घटनाक्रम की जानकारी साझा की। छात्रा के हॉस्टल पहुंचने, ऑटो से उतरने, कमरे में जाने और तबीयत बिगड़ने तक की टाइमलाइन को खंगाला गया।

अब तक क्या हुआ?

6 जनवरी को पटना के शंभू हॉस्टल में छात्रा बेहोश हालत में मिली थी। 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार ने बिहार पुलिस की एसआईटी जांच पर सवाल उठाए थे और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर तक प्रदर्शन किया गया।

बढ़ते दबाव के बीच 31 जनवरी को राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके बाद सीबीआई ने दो दिन पहले मामला दर्ज कर अपनी कार्रवाई शुरू की है। परिजनों को अब निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद है।

JPSC CCE 2026: झारखंड सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी, अब 20 फरवरी तक करें अप्लाई

झारखंड में सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। Jharkhand Public Service Commission (जेपीएससी) ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (सीधी भर्ती) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब उम्मीदवार 20 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं, जबकि परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 21 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है।

पहले आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 फरवरी तय की गई थी, लेकिन अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने समयसीमा में विस्तार किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से राज्य की विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में कुल 103 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

103 पदों पर होगी भर्ती

इस परीक्षा के जरिए झारखंड सरकार की विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं में अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इनमें डिप्टी कलेक्टर, पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी), वित्त एवं लेखा सेवा सहित अन्य प्रशासनिक पद शामिल हैं। राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन पदों पर चयन के लिए हजारों अभ्यर्थी हर वर्ष आवेदन करते हैं।

महत्वपूर्ण तिथियां (Important Dates)

  • आवेदन की नई अंतिम तिथि: 20 फरवरी 2026
  • परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि: 21 फरवरी 2026
  • कुल पदों की संख्या: 103

कैसे करें आवेदन?

आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) प्रणाली के तहत संपन्न होगी। आवेदन करने के लिए अभ्यर्थियों को निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:

  1. सबसे पहले जेपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  2. Civil Services Examination 2026 से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना डाउनलोड करें और पात्रता, आयु सीमा व पदों की जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़ें।
  3. नया रजिस्ट्रेशन करें (यदि पहले से OTR नहीं किया है)।
  4. लॉगिन कर आवेदन फॉर्म सावधानीपूर्वक भरें।
  5. आवश्यक दस्तावेज, हालिया पासपोर्ट साइज फोटो, हस्ताक्षर और शैक्षणिक प्रमाणपत्र अपलोड करें।
  6. निर्धारित आवेदन शुल्क ऑनलाइन माध्यम से जमा करें।
  7. फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन फॉर्म भरते समय किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचें, क्योंकि गलत जानकारी देने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है।

वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) अनिवार्य

आवेदन प्रक्रिया वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) प्रणाली के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों की मूल जानकारी को एक बार दर्ज कर भविष्य की परीक्षाओं के लिए संरक्षित रखना है। इससे बार-बार व्यक्तिगत विवरण भरने की आवश्यकता नहीं पड़ती और आवेदन प्रक्रिया सरल हो जाती है।

जेपीएससी ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे आवेदन करने से पहले विस्तृत विज्ञापन और दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें। किसी भी प्रकार की तकनीकी या अन्य जानकारी के लिए आयोग द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 9431301636 और 9431301419 पर कार्य दिवसों में संपर्क किया जा सकता है।


चयन प्रक्रिया: तीन चरणों में होगी परीक्षा

झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाएगी:

  • प्रारंभिक परीक्षा (Prelims)
  • मुख्य परीक्षा (Mains)
  • साक्षात्कार (Interview)

1. प्रारंभिक परीक्षा

यह वस्तुनिष्ठ (Objective) प्रकार की परीक्षा होती है, जिसमें सामान्य अध्ययन से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रारंभिक परीक्षा केवल क्वालिफाइंग प्रकृति की होती है और इसके आधार पर मुख्य परीक्षा के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाता है।

2. मुख्य परीक्षा

मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक (Descriptive) होती है, जिसमें उम्मीदवार की विश्लेषण क्षमता, विषय की गहराई और अभिव्यक्ति कौशल का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें विभिन्न विषयों पर विस्तृत उत्तर लिखने होते हैं।

3. साक्षात्कार

मुख्य परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। इस चरण में उम्मीदवार के व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और प्रशासनिक समझ का आकलन किया जाता है।

अंतिम चयन मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की गई मेरिट सूची के अनुसार किया जाता है।

उत्तर प्रदेश में देश का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति संग्रहालय स्थापित किया जाएगा; परंपरा, विज्ञान और पर्यटन का अनूठा संगम

मथुरा, उत्तर प्रदेश: ब्रजभूमि की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश में देश का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति संग्रहालय स्थापित किया जाएगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना मथुरा स्थित Pandit Deen Dayal Upadhyay Pashuchikitsa Vigyan Vishwavidyalaya के परिसर में विकसित की जाएगी। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की पहल पर तैयार हो रही इस योजना को राज्य सरकार का विशेष समर्थन प्राप्त है।

अधिकारियों के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर के भीतर संग्रहालय निर्माण के लिए भूमि चिन्हित कर ली गई है और प्रारंभिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। यह संग्रहालय न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और आधुनिक तकनीक के माध्यम से गाय और उससे जुड़े उत्पादों की उपयोगिता को भी व्यापक रूप से प्रस्तुत करेगा।

परंपरा और विज्ञान का सेतु

आगरा मंडल के आयुक्त नगेंद्र प्रताप ने जानकारी देते हुए कहा कि यह संग्रहालय आमजन को भारतीय परंपरा में गाय के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व से परिचित कराएगा। साथ ही, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गाय के दूध, गोबर, गोमूत्र तथा अन्य उत्पादों की उपयोगिता को सरल और प्रमाणिक तरीके से समझाया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना अंधविश्वास नहीं, बल्कि परंपरा और विज्ञान के संतुलित समन्वय पर आधारित होगी। उद्देश्य यह है कि गो-संरक्षण, गो-पालन और गो-आधारित जीवनशैली को लेकर लोगों में व्यावहारिक और तार्किक समझ विकसित हो। भविष्य की पीढ़ियों को भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जैविक जीवनशैली से जोड़ना भी इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

निरीक्षण और प्रशासनिक सक्रियता

शनिवार को प्रस्तावित स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, मथुरा के जिलाधिकारी सीपी सिंह, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन, परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सूरज पटेल, पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा तथा विश्वविद्यालय के डॉ. अमित शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

निरीक्षण के दौरान संग्रहालय की संरचना, थीम, प्रदर्शनी की रूपरेखा और पर्यटक सुविधाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने इस परियोजना को राष्ट्रीय स्तर का मानक देने पर बल दिया, ताकि यह केवल एक संग्रहालय न होकर ज्ञान, शोध और पर्यटन का केंद्र बन सके।

क्या होगा इस संग्रहालय में खास?

1. सौ से अधिक गोवंश नस्लों के मॉडल

संग्रहालय में लगभग 100 प्रकार के गोवंश के प्रतिरूप (मॉडल) प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें देश की प्रमुख गायों की नस्लें—जैसे गिर, साहीवाल, थारपारकर, हरियाणा आदि—के साथ-साथ कुछ दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों को भी शामिल किया जाएगा। इससे आगंतुक एक ही स्थान पर भारत की समृद्ध गो-परंपरा का समग्र परिचय प्राप्त कर सकेंगे।

2. दुग्ध उत्पादों की आधुनिक प्रदर्शनी

यहां दूध और उससे बनने वाले उत्पाद—दही, पनीर, घी, मक्खन आदि—की विशेष प्रदर्शनी होगी। इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से इनके पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ और आयुर्वेदिक महत्व को सरल भाषा में समझाया जाएगा। बच्चों और विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे।

3. गो-आधारित उत्पादों का लाइव अनुभव

संग्रहालय परिसर में एक दुग्ध उत्पाद बूथ स्थापित किया जाएगा, जहां शुद्ध दूध और उससे बने उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। इसके अतिरिक्त जैविक खाद, पंचगव्य आधारित उत्पाद और ग्रामीण उद्योग से जुड़े सामानों को भी प्रदर्शित किया जा सकता है। इससे स्थानीय स्व-रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

4. आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयाम

भारतीय सनातन परंपरा में गाय को ‘गौमाता’ के रूप में सम्मानित किया गया है। संग्रहालय में वेदों, पुराणों और लोक परंपराओं में वर्णित गाय के महत्व को ऑडियो-विजुअल माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और गो-संस्कृति के ऐतिहासिक संबंध को भी विशेष रूप से दर्शाया जाएगा।

ब्रज क्षेत्र की पहचान को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किए जा रहे इस संग्रहालय से ब्रज क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी। मथुरा-वृंदावन पहले से ही देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों का केंद्र है। ऐसे में गो-संस्कृति संग्रहालय धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ शैक्षणिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति दे सकती है। होटल, परिवहन, गाइड सेवा और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

शिक्षा और शोध का केंद्र

चूंकि यह संग्रहालय पशुचिकित्सा विश्वविद्यालय परिसर में बनाया जाएगा, इसलिए शोध और अकादमिक गतिविधियों को भी इससे जोड़ा जा सकता है। पशुपालन, डेयरी विज्ञान और जैविक कृषि पर अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अध्ययन का अवसर मिलेगा। भविष्य में यहां गो-संरक्षण पर सेमिनार, कार्यशाला और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।

AI की दस्तक से हिला बाजार: IT शेयरों में गिरावट के पीछे क्या है असली वजह?

भारतीय शेयर बाजार इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की आहट से असामान्य उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। जिस तरह कभी इंटरनेट और स्मार्टफोन ने उद्योगों की संरचना बदल दी थी, उसी तरह अब AI को अगली बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है। हाल ही में अमेरिका में एक उन्नत AI टूल लॉन्च हुआ, जो वकीलों की तरह कॉन्ट्रैक्ट ड्राफ्ट कर सकता है और इंजीनियरों की तरह कोडिंग भी कर सकता है। इस खबर ने भारतीय बाजार, खासकर IT सेक्टर में चिंता की लहर पैदा कर दी।

निवेशकों के मन में सवाल उठने लगे—अगर AI वही काम कर सकता है जो हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर करते हैं, तो कंपनियों का भविष्य क्या होगा? और सबसे बड़ा सवाल, क्या भारतीय IT सेक्टर की चमक फीकी पड़ने वाली है?


क्यों गिरे Infosys और Tata Consultancy Services जैसे दिग्गजों के शेयर?

पिछले एक सप्ताह में IT शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। विशेष रूप से इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसे बड़े नामों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। बाजार पूंजीकरण में अरबों रुपये की गिरावट आई।

गिरावट की मुख्य वजह निवेशकों की आशंका है। उनका मानना है कि यदि AI कोडिंग, टेस्टिंग और डेटा एनालिसिस जैसे कार्यों को तेज और सस्ता बना देता है, तो पारंपरिक IT सेवाओं की मांग घट सकती है। भारतीय IT कंपनियों का बिजनेस मॉडल मुख्यतः मानव संसाधन आधारित है—यानी अधिक प्रोजेक्ट, अधिक इंजीनियर और अधिक बिलिंग।

अगर AI कम लोगों के साथ अधिक काम करने में सक्षम हो गया, तो यह मॉडल चुनौती में पड़ सकता है। यही डर बाजार में घबराहट का कारण बना।


क्या वाकई खतरे में है भारतीय IT सेक्टर?

हालांकि विशेषज्ञों की राय कुछ अलग है। उनका मानना है कि तकनीकी बदलाव हर बार नए अवसर भी लेकर आता है। जब क्लाउड कंप्यूटिंग आई थी, तब भी पारंपरिक IT सेवाओं को लेकर चिंता थी। लेकिन समय के साथ कंपनियों ने खुद को ढाल लिया।

AI के मामले में भी ऐसा ही हो सकता है। अगर कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सस्ता और तेज हो जाएगा, तो कंपनियां अधिक डिजिटल प्रोजेक्ट्स शुरू कर सकती हैं। इससे कुल काम की मात्रा बढ़ सकती है।

बैंकिंग, फिनटेक, हेल्थकेयर और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में डेटा सुरक्षा, अनुपालन (compliance) और कस्टम सॉल्यूशंस की जरूरत बनी रहेगी, जहां केवल AI पर्याप्त नहीं होगा। वहां मानव विशेषज्ञता की भूमिका अहम रहेगी।

Nifty IT इंडेक्स के पिछले एक साल के रिटर्न की तुलना निफ्टी 50 और अन्य इंडेक्स से


ऑटोमेशन बनाम मानव कौशल

यह सच है कि AI कई दोहराए जाने वाले (repetitive) कार्यों को स्वचालित कर सकता है। इससे एंट्री-लेवल नौकरियों पर असर पड़ सकता है। लेकिन उच्च स्तर की रणनीति, क्लाइंट मैनेजमेंट, सिस्टम आर्किटेक्चर और जटिल समस्या समाधान के लिए अभी भी अनुभवी पेशेवरों की जरूरत होगी।

इसके अलावा, AI खुद एक नया उद्योग बना रहा है—AI डेवलपमेंट, AI ट्रेनिंग, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में नई नौकरियां पैदा हो रही हैं।

इसलिए तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है, बल्कि यह बदलाव का दौर है।


निवेशकों के लिए क्या है संदेश?

अब सबसे अहम सवाल—क्या निवेश का तरीका बदलना चाहिए?

AI डेटा का विश्लेषण तेजी से कर सकता है, जोखिम का आकलन कर सकता है और बाजार की प्रवृत्तियों को समझने में मदद कर सकता है। कई निवेश प्लेटफॉर्म पहले से ही AI-आधारित एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

लेकिन AI केवल एक टूल है, अंतिम निर्णय निवेशक को ही लेना होगा। बाजार में घबराहट के समय धैर्य और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अधिक महत्वपूर्ण होता है।

IT सेक्टर की कंपनियां मजबूत बैलेंस शीट, वैश्विक क्लाइंट बेस और वर्षों के अनुभव के साथ खड़ी हैं। वे नई तकनीकों को अपनाने और खुद को बदलने की क्षमता रखती हैं।


आगे का रास्ता

AI का प्रभाव शेयर बाजार पर अल्पकालिक अस्थिरता ला सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह उत्पादकता बढ़ाने और नए अवसर पैदा करने का माध्यम भी बन सकता है।

भारतीय IT कंपनियों के लिए यह चुनौती जरूर है, लेकिन साथ ही यह अवसर भी है कि वे AI को अपनाकर अपनी सेवाओं को और उन्नत बनाएं। जो कंपनियां तेजी से अनुकूलन करेंगी, वे इस बदलाव से लाभ उठा सकती हैं।

IT शेयरों में हालिया गिरावट डर और अनिश्चितता का परिणाम है, न कि किसी तत्कालिक आर्थिक संकट का। AI तकनीक निश्चित रूप से कार्यशैली को बदलने वाली है, लेकिन यह पूरी इंडस्ट्री को खत्म नहीं करेगी।

निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है—भावनाओं में बहकर निर्णय न लें, बल्कि तथ्यों और दीर्घकालिक रणनीति पर भरोसा रखें। तकनीक बदलती है, बाजार बदलता है, लेकिन मजबूत कंपनियां हर बदलाव के साथ खुद को ढालना जानती हैं।

Railway Protection Force की बड़ी कार्रवाई: Indian flapshell turtle के 16 जिंदा कछुए बरामद, वन्यजीव तस्करी पर कसा शिकंजा

धनबाद | पूर्व मध्य रेल के धनबाद मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक अहम कार्रवाई करते हुए 16 जीवित कछुओं को बरामद किया है। यह कार्रवाई आरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन WILEP के तहत की गई। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस सटीक कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि रेल मार्गों के जरिए हो रही अवैध वन्यजीव तस्करी पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं।

गुप्त सूचना के आधार पर सक्रिय हुई टीम

आरपीएफ को विश्वसनीय स्रोतों से सूचना मिली थी कि ट्रेन संख्या 13010, Yog Nagari Rishikesh–Howrah Doon Express के माध्यम से कछुओं की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही आरपीएफ पोस्ट और अपराध अनुसंधान शाखा (सीआईबी) की संयुक्त टीम को सतर्क कर दिया गया।

जैसे ही ट्रेन धनबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या दो पर पहुंची, टीम ने बिना समय गंवाए जांच अभियान शुरू कर दिया। अधिकारियों ने विशेष रूप से सामान्य श्रेणी (जनरल कोच) के डिब्बों की गहन तलाशी ली, क्योंकि मिली सूचना इन्हीं कोचों से संबंधित थी।

लावारिस नीले थैले में मिला जूट का बोरा

तलाशी के दौरान इंजन की ओर से दूसरे जनरल कोच में एक सीट के नीचे नीले रंग का कपड़े का लावारिस थैला संदिग्ध अवस्था में मिला। मौके पर मौजूद यात्रियों से पूछताछ की गई, लेकिन किसी ने भी उस थैले पर अपना दावा नहीं किया।

संदेह गहराने पर ट्रेन के प्रस्थान से पहले थैले को प्लेटफॉर्म पर उतार लिया गया। गवाहों की उपस्थिति में जब थैले को खोला गया, तो उसके भीतर जूट के बोरे में रखे 16 जीवित कछुए बरामद हुए। सभी कछुए इंडियन फ्लैपशेल प्रजाति के थे, जिन्हें बेहद संकुचित और असुविधाजनक स्थिति में रखा गया था। इस तरह की पैकिंग से उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था।

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति

आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार बरामद कछुए Wildlife Protection Act, 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति में आते हैं। इस अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित जीवों की तस्करी, अवैध परिवहन या व्यापार गंभीर दंडनीय अपराध है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इंडियन फ्लैपशेल कछुए अक्सर अवैध व्यापार का शिकार होते हैं। इन्हें मांस, पालतू व्यापार या पारंपरिक मान्यताओं के कारण तस्करी के जरिए विभिन्न राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है।

वन विभाग को सौंपे जाएंगे कछुए

बरामदगी के तुरंत बाद आरपीएफ ने जब्ती सूची तैयार की और सभी कछुओं को अपने कब्जे में लेकर पोस्ट लाया। प्राथमिक जांच और आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई पूरी करने के बाद इन्हें वन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वन विभाग द्वारा कछुओं की चिकित्सकीय जांच कराई जाएगी और उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पुनर्वासित करने की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जीवित अवस्था में बरामदगी होना एक सकारात्मक पहलू है, क्योंकि समय रहते कार्रवाई से इनकी जान बचाई जा सकी।

ऑपरेशन WILEP के तहत लगातार कार्रवाई

ऑपरेशन WILEP के तहत रेलवे नेटवर्क के जरिए हो रही वन्यजीव तस्करी पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आरपीएफ और खुफिया इकाइयों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है।

इस कार्रवाई में आरपीएफ के चितरंजन सिंह, शशिकांत तिवारी, बबुलेश कुमार, प्रमोद कुमार, संजीव कुमार और अमित कुमार वर्मा की अहम भूमिका रही। टीम की तत्परता और सूझबूझ के कारण यह बड़ी बरामदगी संभव हो सकी।

तस्करों की पहचान के लिए जांच तेज

हालांकि थैला लावारिस मिला, लेकिन आरपीएफ ने इस मामले में तस्करों की पहचान के लिए जांच तेज कर दी है। सीसीटीवी फुटेज, टिकट विवरण और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश की जा रही है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: 16 फरवरी को 25 लाख महिलाओं के खातों में पहुंचेंगे 10,000, डीबीटी से ट्रांसफर होंगे 2500 करोड़

पटना | बिहार की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार 16 फरवरी को 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में दस-दस हजार रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर करेगी। यह राशि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत प्रदान की जा रही है। इस पहल के माध्यम से कुल 2500 करोड़ रुपये डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए लाभुक महिलाओं के खातों में भेजे जाएंगे।

राज्य सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें स्वरोजगार की ओर प्रोत्साहित करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। यह योजना खास तौर पर उन महिलाओं के लिए तैयार की गई है, जो स्वयं का छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं लेकिन पूंजी की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी राशि जारी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 16 फरवरी की सुबह 9:45 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस योजना के तहत पहली किस्त की राशि जारी करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन केवल राज्य मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जिला, प्रखंड, संकुल और ग्राम संगठन स्तर तक विस्तारित किया गया है।

राज्य के सभी 38 जिला मुख्यालयों में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इसका उद्देश्य योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाना और महिलाओं को आगे की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देना है।

महिलाओं को इस तरह मिलेगी कुल 2 लाख रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को चरणबद्ध तरीके से कुल 2 लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि एकमुश्त बड़ी राशि देने के बजाय चरणों में सहायता देना अधिक प्रभावी होगा, ताकि राशि का उपयोग सही दिशा में हो और व्यवसाय टिकाऊ बन सके।

सहायता राशि का वितरण इस प्रकार किया जाएगा:

  • पहला चरण: 10,000
  • दूसरा चरण: 20,000
  • तीसरा चरण: 40,000
  • चौथा चरण: 80,000
  • पांचवां और अंतिम चरण: 60,000

इस प्रकार कुल मिलाकर प्रत्येक पात्र महिला को 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। पहले चरण में 10 हजार रुपये की राशि जारी की जा रही है, जिसकी प्रक्रिया 16 फरवरी को पूरी की जाएगी।

पहले चरण के उपयोग का होगा मूल्यांकन

सरकार ने योजना में पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए एक निगरानी तंत्र भी तैयार किया है। पहले चरण में दी गई 10 हजार रुपये की राशि का उपयोग कैसे किया गया, इसका आकलन किया जाएगा।

यह जिम्मेदारी ग्राम संगठन को दी गई है। ग्राम संगठन यह देखेगा कि:

  • क्या महिला ने दुकान या कोई छोटा व्यवसाय शुरू किया है?
  • व्यवसाय की प्रकृति क्या है?
  • लाभुक की व्यवसाय के प्रति रुचि और गंभीरता कैसी है?
  • राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हुआ या नहीं?

ग्राम संगठन अपनी रिपोर्ट ब्लॉक स्तर पर भेजेगा। ब्लॉक स्तर से समीक्षा के बाद ही आगे की किस्त जारी करने का निर्णय लिया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सहायता राशि का दुरुपयोग न हो और वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं को ही लाभ मिले।

आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाएं छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करें — जैसे किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, डेयरी, मुर्गी पालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प या अन्य स्वरोजगार गतिविधियां। इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ेगी बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 25 लाख महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू करती हैं, तो इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय बाजारों में गतिविधि बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

डीबीटी के जरिए पारदर्शी भुगतान

राशि सीधे लाभुकों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रणाली से समय पर भुगतान और सही लाभार्थी तक राशि पहुंचाने में मदद मिलती है।

सरकार ने लाभुक महिलाओं के बैंक खातों और आधार लिंकिंग की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली है, ताकि भुगतान में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए।

पटना मेट्रो का काउंटडाउन शुरू: मार्च के दूसरे सप्ताह से मलाही पकड़ी तक दौड़ेगी ट्रेन, अंतिम सुरक्षा जांच 25 फरवरी को

पटना: राजधानी के लाखों लोगों के लिए बहुप्रतीक्षित खुशखबरी सामने आई है। शहर की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने जा रही Patna Metro Rail Corporation (PMRC) अब अपने प्रायोरिटी कॉरिडोर के विस्तार को अंतिम चरण में ले आई है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो मार्च के दूसरे सप्ताह से भूतनाथ स्टेशन से मलाही पकड़ी तक मेट्रो सेवा शुरू हो सकती है।

यह विस्तार न केवल दूरी बढ़ाएगा, बल्कि पटना में आधुनिक, सुरक्षित और तेज सार्वजनिक परिवहन की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। फिलहाल अंतिम सुरक्षा मंजूरी का इंतजार है, जिसके बाद उद्घाटन की तारीख घोषित की जाएगी।

प्रायोरिटी कॉरिडोर पर तैयारियां तेज

राजधानी में मेट्रो विस्तार को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। भूतनाथ से मलाही पकड़ी तक के सेक्शन में निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। स्टेशन संरचना, ट्रैक बिछाने, सिग्नलिंग और विद्युत आपूर्ति से जुड़े अधिकांश तकनीकी कार्य पूरे कर लिए गए हैं।

PMRC के अधिकारियों के अनुसार, अब मुख्य रूप से सुरक्षा और निरीक्षण संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। मार्च के दूसरे सप्ताह को संभावित शुरुआत की समयसीमा के रूप में देखा जा रहा है।

इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर जनरल की जांच पूरी

हाल ही में भारत सरकार के इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर जनरल (EIG) आनंद कुमार ने मलाही पकड़ी से भूतनाथ स्टेशन के बीच ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE), ट्रैक्शन सिस्टम और बिजली आपूर्ति व्यवस्था का विस्तृत निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान कैटेनेरी मेंटेनेंस व्हीकल के माध्यम से ओवरहेड वायरिंग और विद्युत ढांचे की बारीकी से जांच की गई। प्रारंभिक रिपोर्ट में सिस्टम को सुरक्षित और परिचालन योग्य पाया गया। हालांकि, कुछ छोटे तकनीकी सुधारों के निर्देश दिए गए हैं, जिन्हें तुरंत पूरा किया जा रहा है।

PMRC ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह निरीक्षण परिचालन तैयारी की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

25 फरवरी को अंतिम सुरक्षा परीक्षण

मेट्रो सेवा शुरू करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण चरण कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (CMRS) की स्वीकृति है। 25 फरवरी के आसपास उनकी टीम पटना पहुंचकर विस्तृत सुरक्षा निरीक्षण करेगी।

इस दौरान ट्रैक की स्थिरता, सिग्नलिंग सिस्टम, ब्रेकिंग सिस्टम, स्टेशन सुरक्षा मानक, इमरजेंसी रिस्पॉन्स मैकेनिज्म और विद्युत आपूर्ति का परीक्षण किया जाएगा। CMRS की अंतिम मंजूरी के बाद ही उद्घाटन की तारीख तय की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि सभी तकनीकी परीक्षण तेजी से पूरे किए जा रहे हैं ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर सेवा शुरू की जा सके।

मलाही पकड़ी स्टेशन लगभग तैयार

मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन अब उद्घाटन के बेहद करीब है। स्टेशन परिसर में फिनिशिंग कार्य, टिकटिंग सिस्टम इंस्टॉलेशन, एस्केलेटर और लिफ्ट परीक्षण तथा यात्रियों के लिए दिशासूचक संकेतों की स्थापना अंतिम चरण में है।

PMRC ने हाल ही में स्टेशन की प्रगति का वीडियो भी साझा किया, जिसमें निर्माण कार्य को लगभग पूर्ण बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और यात्रियों को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित अनुभव प्रदान करेगा।

खेमनीचक स्टेशन पर फिलहाल इंतजार

हालांकि मलाही पकड़ी तक मेट्रो पहुंचने वाली है, लेकिन बीच में स्थित खेमनीचक स्टेशन पर अभी ट्रेनें नहीं रुकेंगी। जमीन अधिग्रहण और तकनीकी कारणों से इस स्टेशन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है।

अधिकारियों के अनुसार, खेमनीचक स्टेशन को पूरी तरह कार्यात्मक बनने में अभी तीन से चार महीने और लग सकते हैं। तब तक ट्रेनें इस स्टेशन से बिना रुके गुजरेंगी।

तकनीकी रूप से उन्नत सिस्टम

भूतनाथ से मलाही पकड़ी तक का सेक्शन आधुनिक सिग्नलिंग, स्वचालित ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम और उच्च गुणवत्ता वाले ट्रैक्शन नेटवर्क से लैस है। ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) प्रणाली को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बिजली आपूर्ति निर्बाध रहे।

सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए स्टेशन परिसर में सीसीटीवी निगरानी, अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकास मार्ग भी तैयार किए गए हैं।

बिहार को बड़ी सौगात: सोनपुर में बनेगा देश का पांचवां सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, 1302 करोड़ की मंजूरी

पटना/सोनपुर: बिहार के बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने सोनपुर में एक विशाल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह एयरपोर्ट न केवल पूर्वी भारत का पहला, बल्कि देश का पांचवां सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बताया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 1302 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है, जबकि लगभग 4228 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।

यह परियोजना बिहार की हवाई कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। इसके बनने के बाद राज्य की राजधानी पटना और आसपास के जिलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

सोनपुर में कहां बनेगा एयरपोर्ट?

प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण सोनपुर-छपरा फोर लेन राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के उत्तर दिशा में और गंडक नदी के पश्चिम, दरियापुर चंवर क्षेत्र में किया जाएगा। यह स्थान भौगोलिक दृष्टि से उपयुक्त माना जा रहा है, क्योंकि यहां पर्याप्त समतल भूमि उपलब्ध है और पटना से इसकी दूरी भी कम है।

सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना को लेकर जल्द ही राज्य कैबिनेट की बैठक में औपचारिक निर्णय लिया जा सकता है, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण और निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरपोर्ट दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई और जेवर में विकसित हो रहे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स के बाद देश का पांचवां प्रमुख ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा। इससे बिहार की हवाई नक्शे पर स्थिति और मजबूत होगी।

4228 एकड़ भूमि का होगा अधिग्रहण

इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए करीब 4228 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इतनी बड़ी भूमि की आवश्यकता इसलिए है ताकि भविष्य में विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं बनी रहें। एयरपोर्ट परिसर में रनवे, टर्मिनल भवन, कार्गो टर्मिनल, मेंटेनेंस ज़ोन, पार्किंग एरिया और अन्य सहायक संरचनाएं विकसित की जाएंगी।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि प्रभावित किसानों और भूमि मालिकों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।

कितना लंबा होगा रनवे?

प्रस्तावित सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का रनवे लगभग 4200 मीटर लंबा होगा। यह लंबाई अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मानी जाती है। इतनी लंबाई का रनवे होने से बड़े-बड़े वाइड-बॉडी विमान भी यहां आसानी से उतर और उड़ान भर सकेंगे।

इससे यह स्पष्ट है कि एयरपोर्ट को केवल घरेलू उड़ानों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन के लिए भी विकसित किया जाएगा।

24 घंटे संचालन की सुविधा

सोनपुर में बनने वाला यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक तकनीकों से लैस होगा। यहां 24 घंटे विमानों के संचालन की सुविधा उपलब्ध होगी। वर्तमान में पटना एयरपोर्ट पर रनवे की लंबाई और शहरी घनी आबादी के कारण कई तरह की सीमाएं हैं। नए एयरपोर्ट के बनने से इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलेगी।

रात के समय भी विमानों की आवाजाही संभव होने से यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे और एयरलाइंस कंपनियों को भी नए रूट शुरू करने में सुविधा होगी।

पटना से बेहतर कनेक्टिविटी

सोनपुर एयरपोर्ट को पटना से जोड़ने के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, सिक्स लेन वाले दो नए पुलों का निर्माण किया जा रहा है—एक जेपी दीघा सेतु के समानांतर और दूसरा शेरपुर-दिघवारा सेतु। इन पुलों के बनने से पटना और सोनपुर के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।

बेहतर सड़क संपर्क के कारण यह एयरपोर्ट केवल सारण या सोनपुर क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पटना महानगर क्षेत्र और उत्तर बिहार के जिलों के लिए उपयोगी साबित होगा।

लाखों यात्रियों को मिलेगा लाभ

एयरपोर्ट के निर्माण से लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। वर्तमान में पटना एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या क्षमता से अधिक हो चुकी है। सीमित स्थान और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण विस्तार की संभावनाएं भी सीमित हैं।

सोनपुर में नया एयरपोर्ट बनने से हवाई यातायात का दबाव कम होगा और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इससे व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

अन्य जिलों में भी एयरपोर्ट की तैयारी

राज्य सरकार केवल सोनपुर तक ही सीमित नहीं है। सहरसा, रक्सौल, मुंगेर, सुपौल, बीरपुर, वाल्मीकिनगर, मोतिहारी, बेगूसराय, छपरा, भागलपुर, मधुबनी और गोपालगंज में भी एयरपोर्ट विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।

यदि ये परियोजनाएं चरणबद्ध तरीके से पूरी होती हैं, तो बिहार देश के उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां व्यापक हवाई नेटवर्क उपलब्ध होगा।

आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट का निर्माण केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक क्षेत्र, होटल, लॉजिस्टिक्स हब और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती हैं।

सोनपुर एयरपोर्ट के निर्माण से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। निर्माण चरण में हजारों लोगों को काम मिलेगा, जबकि संचालन के दौरान भी बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 6 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले, सुरक्षा तंत्र में व्यापक पुनर्संरचना

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य सरकार ने प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के कई वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला किया है। गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, राज्य में छह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। इस फेरबदल को चुनावी तैयारियों के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना, खुफिया सूचनाओं का संकलन, संवेदनशील जिलों की निगरानी और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना पुलिस प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।

राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन तबादलों का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाना, विभिन्न रेंज और जिलों में बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा चुनावी माहौल में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो चुकी हैं और विभिन्न दल चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

चुनाव से पहले प्रशासनिक रणनीति

विधानसभा चुनाव किसी भी राज्य के लिए संवेदनशील समय होता है। इस दौरान राजनीतिक रैलियाँ, जनसभाएँ, रोड शो और प्रचार अभियानों की संख्या बढ़ जाती है। कई क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र हो जाती है, जिससे कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ भी सामने आती हैं। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा पुलिस अधिकारियों के तबादले को रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

विशेष रूप से उन अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ दी गई हैं, जिनके पास प्रशासनिक अनुभव, खुफिया तंत्र की समझ और संवेदनशील इलाकों में काम करने का अनुभव है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।

राजीव मिश्र को दक्षिण बंगाल की कमान

तबादलों की सूची में सबसे प्रमुख नाम राजीव मिश्र का है। उन्हें एडीजी और आईजीपी (मॉडर्नाइजेशन एंड को-ऑर्डिनेशन) के पद से हटाकर एडीजी व आईजीपी (दक्षिण बंगाल) के पद पर नियुक्त किया गया है।

दक्षिण बंगाल राज्य का अत्यंत महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से सक्रिय क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में कई संवेदनशील जिले शामिल हैं, जहां चुनाव के दौरान अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता होती है। ऐसे में राजीव मिश्र जैसे अनुभवी अधिकारी को यहां की कमान सौंपना प्रशासनिक दृष्टि से अहम निर्णय माना जा रहा है।

मॉडर्नाइजेशन और को-ऑर्डिनेशन जैसे विभाग में काम करने के दौरान उन्होंने पुलिस तंत्र के आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन और विभिन्न इकाइयों के बीच समन्वय पर काम किया है। अब दक्षिण बंगाल की जिम्मेदारी संभालते हुए उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे चुनावी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था को मजबूती से नियंत्रित करेंगे और जिला प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखेंगे।

लक्ष्मी नारायण मीणा बने सीआईडी के एडीजीपी एंड आईजी

एडीजी एंड आईजी (संसोधनागार सेवाएं विभाग) के पद पर कार्यरत लक्ष्मी नारायण मीणा को अब सीआईडी (क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) का एडीजी एंड आईजीपी नियुक्त किया गया है।

सीआईडी राज्य की महत्वपूर्ण जांच एजेंसी है, जो गंभीर आपराधिक मामलों, आर्थिक अपराधों, संगठित अपराध और संवेदनशील मामलों की जांच करती है। चुनाव के दौरान फर्जी मतदान, हिंसा, अवैध हथियारों की तस्करी, नकदी और शराब के अवैध वितरण जैसे मामलों पर नजर रखने में सीआईडी की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

लक्ष्मी नारायण मीणा का प्रशासनिक अनुभव और जेल प्रशासन (संसोधनागार सेवाएं) में कार्य का अनुभव उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त बनाता है। जेल विभाग में रहते हुए उन्होंने बंदियों के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों पर काम किया। अब सीआईडी की कमान संभालते हुए वे जांच तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम करेंगे।

मुकेश को इंटेलिजेंस ब्यूरो में नई जिम्मेदारी

मुर्शिदाबाद और जंगीपुर रेंज के आईजीपी के पद पर कार्यरत मुकेश को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में आईजीपी का पदभार सौंपा गया है।

खुफिया तंत्र चुनावी माहौल में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संभावित तनाव, साम्प्रदायिक संवेदनशीलता, राजनीतिक गतिविधियों की निगरानी और बाहरी तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखना आईबी की जिम्मेदारी होती है। मुर्शिदाबाद और जंगीपुर जैसे क्षेत्रों में काम करने का अनुभव मुकेश को संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव देता है।

उनकी नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि चुनाव से पहले खुफिया नेटवर्क को और मजबूत किया जाएगा और किसी भी संभावित अवांछित गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।

सैयद वकार राजा बने मुर्शिदाबाद रेंज के डीआईजी

नदिया और राणाघाट रेंज के डीआईजी सैयद वकार राजा को मुर्शिदाबाद रेंज का डीआईजी नियुक्त किया गया है।

मुर्शिदाबाद जिला राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां चुनाव के दौरान विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है। सैयद वकार राजा को इस क्षेत्र का दायित्व सौंपना प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

नदिया और राणाघाट जैसे क्षेत्रों में काम करने के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई। अब मुर्शिदाबाद रेंज में उनकी प्राथमिकता शांति बनाए रखना, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगी।

जिलों में एसपी स्तर पर अदला-बदली

राज्य सरकार ने जिला स्तर पर भी बदलाव किए हैं।

अमरनाथ के बने जलपाईगुड़ी के एसपी

कृष्णानगर पुलिस जिला के एसपी अमरनाथ के को जलपाईगुड़ी का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। जलपाईगुड़ी उत्तर बंगाल का महत्वपूर्ण जिला है, जहां चुनाव के दौरान सीमावर्ती गतिविधियों और राजनीतिक कार्यक्रमों पर विशेष नजर रखने की आवश्यकता होती है।

वाइ रघुवंशी बने कृष्णानगर पुलिस जिला के एसपी

जलपाईगुड़ी के एसपी वाइ रघुवंशी को कृष्णानगर पुलिस जिला का एसपी बनाया गया है। इस अदला-बदली को प्रशासनिक संतुलन और अनुभव के बेहतर उपयोग के रूप में देखा जा रहा है।

चुनावी परिप्रेक्ष्य में तबादलों का महत्व

इन तबादलों को केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे चुनावी तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, चुनाव से पहले ऐसे अधिकारियों को बदला जाता है जो लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात हों या जिनकी निष्पक्षता पर प्रश्न उठ सकते हों।

इस तरह के कदमों से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है। राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों का लक्ष्य शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना होता है।

प्रशासनिक संतुलन और क्षेत्रीय रणनीति

तबादलों की सूची पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि बदलाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। दक्षिण बंगाल, मुर्शिदाबाद रेंज, उत्तर बंगाल के जिले और खुफिया विभाग—सभी स्तरों पर पुनर्संरचना की गई है।

इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार ने क्षेत्रीय संतुलन, अनुभव और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसी जगहों पर भेजा गया है जहां उनकी विशेषज्ञता का अधिकतम उपयोग हो सके।

पुलिस बल की भूमिका और अपेक्षाएँ

चुनाव के दौरान पुलिस बल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्हें न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखनी होती है, बल्कि आचार संहिता का पालन सुनिश्चित करना, राजनीतिक रैलियों की निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और मतगणना के दौरान सुरक्षा प्रदान करना भी होता है।

वरिष्ठ अधिकारियों की नई नियुक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि राज्य प्रशासन चुनाव को लेकर गंभीर है और सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं चाहता।

बंगाल की ‘वैलेंटाइन दीदी’: चुनाव से पहले भावनात्मक वीडियो के जरिए तृणमूल का सॉफ्ट कैंपेन

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल तेजी से बदल रहा है। इसी बीच सत्तारूढ़ दल All India Trinamool Congress (एआईटीसी) ने वैलेंटाइन डे के अवसर पर एक 59 सेकेंड का भावनात्मक वीडियो जारी कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने आधिकारिक हैंडल से यह वीडियो साझा करते हुए मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को “बंगाल की वैलेंटाइन दीदी” बताया।

वीडियो का केंद्रीय संदेश यह है कि प्यार केवल गुलाब के फूलों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि मुश्किल समय में साथ खड़े होने का नाम है। तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रतीकात्मक संदेश के माध्यम से मुख्यमंत्री की छवि एक संवेदनशील, स्नेही और संरक्षक नेता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वीडियो केवल एक भावनात्मक प्रस्तुति नहीं, बल्कि चुनाव से पहले मतदाताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

वैलेंटाइन डे का नया राजनीतिक अर्थ

वीडियो की शुरुआत में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हाथ में गुलाब लिए नजर आती हैं। वह बच्चियों से मिलती हैं, उन्हें दुलार करती हैं, उनके माथे को चूमती हैं और स्नेह जताती हैं। बैकग्राउंड में एक आवाज सुनाई देती है—“वैलेंटाइन डे का मतलब सिर्फ गुलाब फूल का एक्सचेंज नहीं होता, प्यार का मतलब है आफत-विपत्ति में साथ खड़े होना।”

यह संदेश स्पष्ट रूप से पारंपरिक रोमांटिक अवधारणा से हटकर सामाजिक और राजनीतिक अर्थ गढ़ने की कोशिश करता है। वीडियो में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि मुख्यमंत्री का प्रेम व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक और जन-केन्द्रित है।

मुश्किल घड़ी में साथ: सच्चे प्यार की परिभाषा

वीडियो में अलग-अलग अवसरों के फुटेज शामिल किए गए हैं। कहीं ममता बनर्जी बच्चों को गले लगाती दिखती हैं, तो कहीं किसी महिला के आंसू पोंछती नजर आती हैं। बुजुर्ग महिलाओं के बीच बैठकर संवाद करती हुई उनकी छवियां भी शामिल हैं।

बैकग्राउंड वॉयस कहती है—“मुश्किल घड़ी में किसी का हाथ थाम लेना ही सच्चा प्यार है।” इस कथन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मुख्यमंत्री केवल प्रशासनिक प्रमुख नहीं, बल्कि एक संवेदनशील अभिभावक की तरह जनता के साथ खड़ी रहती हैं।

एक महिला बांग्ला में कहती सुनाई देती है कि “दीदी हमें प्यार करती हैं, वही हमारे बारे में सोचती हैं, और कोई नहीं सोचता।” इस संवाद के माध्यम से वीडियो भावनात्मक जुड़ाव को और गहरा बनाने का प्रयास करता है।

अभिभावक की छवि को मजबूत करने की रणनीति

वीडियो में ममता बनर्जी को सफेद रंग की नीली पाड़ वाली साड़ी में दिखाया गया है—जो उनकी पहचान का स्थायी हिस्सा बन चुकी है। वह लोगों का अभिवादन करती हैं, बच्चों को गोद में उठाती हैं और सहजता से संवाद करती दिखती हैं।

बैकग्राउंड में आवाज आती है कि वह “ऐसी मुख्यमंत्री हैं, जो किसी अभिभावक की तरह हैं।” इस वाक्य के जरिए नेतृत्व को मातृत्व और संरक्षण की भावना से जोड़ा गया है। तृणमूल कांग्रेस ने लंबे समय से “दीदी” की छवि को एक भावनात्मक ब्रांड के रूप में स्थापित किया है, और यह वीडियो उसी ब्रांडिंग को और सुदृढ़ करता है।

परिवार जैसा रिश्ता: राजनीतिक संदेश का विस्तार

वीडियो के अगले हिस्से में कहा गया है कि ममता बनर्जी बंगाल के लोगों को अपने परिवार की तरह प्यार करती हैं। जब भी राज्य पर कोई संकट आता है, वह सबसे पहले लोगों के बीच पहुंचती हैं। प्राकृतिक आपदा हो, सामाजिक संकट हो या व्यक्तिगत त्रासदी—वीडियो यह दिखाने की कोशिश करता है कि मुख्यमंत्री हर परिस्थिति में मौजूद रहती हैं।

तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि यह रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि दिल का रिश्ता है—निःस्वार्थ और अटूट। अंत में वीडियो में संदेश दिया जाता है कि वैलेंटाइन डे के अवसर पर यह बंधन और मजबूत हो।

चुनावी संदर्भ में भावनात्मक अपील

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वीडियो आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। बंगाल की राजनीति में व्यक्तित्व-आधारित प्रचार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। तृणमूल कांग्रेस अक्सर ममता बनर्जी की व्यक्तिगत छवि—संघर्षशील, सादगीपूर्ण और जनता के करीब—को अपने अभियान का केंद्र बनाती रही है।

वैलेंटाइन डे जैसे अवसर का इस्तेमाल कर पार्टी ने एक सॉफ्ट इमोशनल कैंपेन की शुरुआत की है। इसमें आक्रामक राजनीतिक भाषणों या विरोधियों पर हमले की जगह भावनात्मक जुड़ाव और संवेदनशीलता पर जोर दिया गया है।

ICC Men’s T20 World Cup 2026: एडेन मार्करम की विस्फोटक पारी से South Africa national cricket team ने New Zealand national cricket team को 7 विकेट से हराया

टी20 विश्व कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका ने एक बार फिर अपने शानदार फॉर्म का प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। पहले गेंदबाजी करते हुए अफ्रीकी टीम ने न्यूजीलैंड को 20 ओवर में 7 विकेट पर 175 रन पर रोक दिया टी20 विश्व कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका ने एक बार फिर अपने शानदार फॉर्म का प्रदर्शन करते हुए न्यूजीलैंड को 7 विकेट से करारी शिकस्त दी। पहले गेंदबाजी करते हुए अफ्रीकी टीम ने न्यूजीलैंड को 20 ओवर में 7 विकेट पर 175 रन पर रोक दिया और फिर लक्ष्य का पीछा करते हुए महज 17.1 ओवर में तीन विकेट खोकर 178 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के नायक रहे कप्तान Aiden Markram, जिन्होंने नाबाद 86 रन की मैच जिताऊ पारी खेली।


दक्षिण अफ्रीका की लगातार तीसरी जीत

इस जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका ने टूर्नामेंट में अपनी लगातार तीसरी जीत दर्ज की और सेमीफाइनल की दौड़ में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला कप्तान एडेन मार्करम के लिए बिल्कुल सही साबित हुआ।

न्यूजीलैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम को 33 रन के स्कोर पर पहला झटका लगा, जब Tim Seifert 13 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद कीवी बल्लेबाजी नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही, जिससे वे बड़े स्कोर की ओर मजबूती से बढ़ नहीं सके।


न्यूजीलैंड की पारी: कुछ उपयोगी पारियां, लेकिन ठोस साझेदारी का अभाव

मध्यक्रम में Mark Chapman ने 48 रन की जुझारू पारी खेली और टीम को संभालने की कोशिश की। उनके अलावा Daryl Mitchell ने 32 रन, Finn Allen ने 31 रन और James Neesham ने 23 रन का योगदान दिया। हालांकि इन पारियों के बावजूद न्यूजीलैंड की टीम कोई बड़ी साझेदारी नहीं बना सकी, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

दक्षिण अफ्रीका की ओर से गेंदबाजी में Marco Jansen ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट झटके और कीवी बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। उनके अलावा Lungi Ngidi, Keshav Maharaj और Corbin Bosch ने एक-एक विकेट हासिल किया। अफ्रीकी गेंदबाजों ने सटीक लाइन-लेंथ और नियंत्रित गेंदबाजी से न्यूजीलैंड को 175 रन तक ही सीमित रखा।


लक्ष्य का पीछा: मार्करम का तूफान

176 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम ने आक्रामक शुरुआत की। हालांकि शुरुआती झटकों के बावजूद कप्तान एडेन मार्करम ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने 44 गेंदों पर नाबाद 86 रन बनाए, जिसमें 8 चौके और 4 छक्के शामिल थे। उनकी पारी में संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला।

ओपनर Quinton de Kock ने 20 रन बनाए, जबकि Ryan Rickelton और Dewald Brevis ने 21-21 रन का योगदान दिया। अंत में David Miller ने नाबाद 24 रन बनाकर टीम को जीत की दहलीज पार कराई।

मार्करम और मिलर के बीच हुई साझेदारी ने मैच का रुख पूरी तरह दक्षिण अफ्रीका की ओर मोड़ दिया। दोनों बल्लेबाजों ने संयमित लेकिन तेज रनगति बनाए रखी और 17.1 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया।


मैच का टर्निंग प्वाइंट

मार्को जानसेन की शुरुआती सफलताएं और मध्य ओवरों में कसी हुई गेंदबाजी मैच का अहम मोड़ साबित हुई। न्यूजीलैंड की टीम 190 के पार जाने की स्थिति में दिख रही थी, लेकिन नियमित अंतराल पर गिरते विकेटों ने उन्हें बड़ा स्कोर खड़ा करने से रोक दिया। जवाब में मार्करम की कप्तानी पारी ने अफ्रीकी टीम को दबाव में आने नहीं दिया।


अंक तालिका में मजबूती

लगातार तीसरी जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका ने अंक तालिका में मजबूत स्थिति बना ली है। टीम का आत्मविश्वास चरम पर है और बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी भी संतुलित नजर आ रही है। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड को इस हार के बाद अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा, खासकर मध्यक्रम की स्थिरता और डेथ ओवरों की गेंदबाजी को लेकर।

नवादा दौरे पर ड्रीम प्रोजेक्ट ‘गंगाजल उद्वह योजना’ का निरीक्षण किया नीतीश कुमार ने, दक्षिण बिहार के जल संकट समाधान की दिशा में बड़ा कदम

बिहार की राजनीति और विकास यात्रा में जल प्रबंधन हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। खासकर दक्षिण बिहार के जिलों—नवादा, गया और राजगीर—में वर्षों से पेयजल संकट एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में शनिवार की सुबह जब Nitish Kumar नवादा जिले के मोतनाजे डैम पहुंचे, तो यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि राज्य की एक महत्वाकांक्षी योजना की प्रगति का निर्णायक आकलन था।

मुख्यमंत्री ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट ‘गंगाजल उद्वह योजना’ की बारीकी से समीक्षा की और स्पष्ट संदेश दिया कि अब नवादा के हर घर तक गंगा जल पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के सख्त निर्देश दिए और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न करने की चेतावनी भी दी।

मोतनाजे डैम पर मुख्यमंत्री का सख्त रुख

नवादा के मोतनाजे डैम पर पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने निर्माण स्थल का व्यापक निरीक्षण किया। पाइपलाइन बिछाने, जल भंडारण, पंपिंग स्टेशन और शोधन इकाई से जुड़े कार्यों की जानकारी अधिकारियों से ली गई। तकनीकी विशेषज्ञों ने उन्हें तीसरे चरण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन से जुड़ा मिशन है। उन्होंने पूछा कि किस चरण में कितना काम पूरा हुआ है, किन स्थानों पर देरी हो रही है और उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

जिलाधिकारी रवि प्रकाश और एसपी अभिनव धीमान ने सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि निर्माण कार्य के दौरान पारदर्शिता बनी रहे और स्थानीय जनता को भी इसकी प्रगति से अवगत कराया जाए।

सात निश्चय योजना के तीसरे चरण की समीक्षा

यह दौरा ‘सात निश्चय योजना’ के तीसरे चरण की समीक्षा से भी जुड़ा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास योजनाओं की सफलता का मूल्यांकन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले परिणामों से होना चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि समय-समय पर फील्ड विजिट कर प्रगति का आकलन करें। जहां भी तकनीकी या प्रशासनिक अड़चनें हों, उन्हें तत्काल दूर किया जाए।

नवादा से पहले राजगीर का दौरा

नवादा पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री का काफिला Rajgir पहुंचा था। राजगीर, जो ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, राज्य सरकार की पर्यटन विकास नीति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

राजगीर में मुख्यमंत्री ने गिरियक स्थित घोड़ा कटोरा जलाशय का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए क्या दीर्घकालिक योजना बनाई गई है।

इसके बाद उन्होंने वेणुवन परिसर में आधुनिक ‘साउंड एंड लाइट सिस्टम’ की आधारशिला रखी। इस परियोजना का उद्देश्य राजगीर के ऐतिहासिक महत्व को आधुनिक तकनीक के माध्यम से पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करना है।

पर्यटन और बुनियादी विकास का संतुलन

राजगीर में साउंड एंड लाइट सिस्टम की स्थापना को सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का अर्थ केवल सड़क और पुल बनाना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित और सशक्त करना है। राजगीर, बोधगया और गया जैसे क्षेत्रों में पर्यटन को नई पहचान देने के लिए आधारभूत संरचना मजबूत की जा रही है।

गंगाजल उद्वह योजना: एक तकनीकी चमत्कार

‘गंगाजल उद्वह योजना’ दक्षिण बिहार के लिए एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। इस योजना के तहत Mokama (हथिदह) से गंगा नदी का पानी पंप कर लगभग 151 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए गया, बोधगया, राजगीर और नवादा तक पहुंचाया जा रहा है।

यह परियोजना केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है। इसमें उच्च क्षमता के पंपिंग स्टेशन, जल शोधन संयंत्र, भंडारण टैंक और वितरण नेटवर्क शामिल हैं।

मोतनाजे डैम इस परियोजना का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां पानी का भंडारण कर उसे शोधन के बाद घर-घर तक पहुंचाया जाएगा।

भूजल संकट से राहत की उम्मीद

दक्षिण बिहार के जिलों में वर्षों से भूजल स्तर गिरता जा रहा है। गर्मियों में स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब हैंडपंप और कुएं सूखने लगते हैं।

गंगाजल उद्वह योजना के माध्यम से सतही जल स्रोत को प्राथमिकता देकर भूजल पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पर्यावरण संतुलन भी बना रहेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधन सुरक्षित रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना पूरी होने के बाद नवादा शहर में हर नल से शुद्ध गंगाजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही

मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान स्पष्ट कर दिया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन हो और नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि स्थानीय लोगों की शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए। परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में समुचित संवाद बनाए रखने पर जोर दिया गया।

स्थानीय प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात

नवादा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय सांसदों, मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का लाभ तभी सार्थक है जब वह आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सरकार की योजनाओं की जानकारी घर-घर तक पहुंचाएं और लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने में सेतु की भूमिका निभाएं।

दक्षिण बिहार के लिए ‘वरदान’ साबित होगी योजना

नवादा, गया और राजगीर जैसे शहर दशकों से जल संकट का सामना कर रहे थे। ‘हर घर गंगाजल’ पहल को इन जिलों के लिए जीवनरेखा के रूप में देखा जा रहा है।

तकनीकी दृष्टि से यह परियोजना देश की अनूठी जल आपूर्ति योजनाओं में गिनी जा रही है। लंबी दूरी तक पानी पहुंचाने की यह व्यवस्था ऊर्जा, इंजीनियरिंग और प्रबंधन का समन्वित उदाहरण है।

पटना: फिल्मी अंदाज में ज्वेलरी शॉप में सेंधमारी, दीवार तोड़ी, लॉकर काटा और 60 लाख के गहने ले उड़े चोर

PATNA: बिहार की राजधानी Patna के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर अपराधियों ने दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देकर पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था को खुली चुनौती दी है। पालीगंज अनुमंडल के रानीतालाब थाना क्षेत्र स्थित पततू बाजार में स्थित ‘रजनीश ज्वेलर्स’ नामक आभूषण दुकान में चोरों ने बेहद सुनियोजित और फिल्मी अंदाज में सेंधमारी कर लाखों रुपये के गहनों पर हाथ साफ कर दिया। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय व्यापारियों को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।

सुबह दीवार में छेद और सीढ़ी देख उड़ गए होश

घटना का खुलासा उस समय हुआ जब सुबह-सुबह बाजार के कुछ लोग अपनी-अपनी दुकानें खोलने पहुंचे। रजनीश ज्वेलर्स की दुकान के पीछे की ओर दीवार में बड़ा सा छेद और वहां टिकाई गई एक सीढ़ी देखकर लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। तत्काल दुकान मालिक रजनीश कुमार को सूचना दी गई। जब तक वे मौके पर पहुंचे, आसपास भीड़ जुट चुकी थी।

दुकान के सामने का शटर पूरी तरह सुरक्षित और बंद था। ताला भी टूटा नहीं था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि चोरों ने सामने से नहीं, बल्कि पीछे की दीवार काटकर दुकान में प्रवेश किया। जिस तरीके से दीवार को काटा गया, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि चोरों के पास पेशेवर उपकरण थे और उन्होंने काफी समय लेकर पूरी तैयारी के साथ वारदात को अंजाम दिया।

अंदर का मंजर देख दंग रह गए मालिक

रजनीश कुमार ने जैसे ही दुकान का शटर खोलकर अंदर कदम रखा, वे सन्न रह गए। पूरा सामान बिखरा हुआ था। अलमारियां खुली थीं, शोकेस के शीशे हटाए गए थे और सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उन्होंने देखा कि दुकान का मुख्य लॉकर गैस कटर जैसे औजार से काट दिया गया है।

प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब 25 से 30 किलो चांदी के आभूषण, लगभग 150 ग्राम सोने के गहने और करीब 67 हजार रुपये नकद चोरी हो चुके थे। कुल नुकसान का अनुमान 50 से 60 लाख रुपये के बीच लगाया जा रहा है। हालांकि अंतिम आंकड़ा लिखित आवेदन और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पूरी प्लानिंग के साथ हुई वारदात

जिस तरीके से दीवार काटी गई, सीढ़ी लगाई गई और सीधे लॉकर तक पहुंच बनाई गई, उससे साफ है कि चोरों ने पहले दुकान की रेकी की थी। उन्हें दुकान के अंदरूनी ढांचे, लॉकर की स्थिति और बाजार की गतिविधियों की पूरी जानकारी थी। आशंका जताई जा रही है कि वारदात में तीन से पांच लोगों का गिरोह शामिल हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चोरी में आमतौर पर दो तरह के लोग शामिल होते हैं—एक जो बाहर निगरानी करते हैं और दूसरे जो अंदर जाकर चोरी को अंजाम देते हैं। दुकान के भीतर मिले खाली गहनों के डिब्बे और फैला सामान इस बात का संकेत देते हैं कि चोरों ने पर्याप्त समय लेकर चयनित गहनों को समेटा।

CCTV का DVR भी ले गए साथ

सबूत मिटाने के उद्देश्य से चोर दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर भी साथ ले गए। इससे जांच में शुरुआती स्तर पर कठिनाई आ सकती है। हालांकि पुलिस आसपास की अन्य दुकानों और मुख्य सड़क पर लगे कैमरों के फुटेज खंगाल रही है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सके।

सीसीटीवी का डीवीआर ले जाना इस बात का संकेत है कि अपराधी तकनीकी रूप से भी सतर्क थे और वे पहचान से बचने की पूरी तैयारी करके आए थे। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह पहले भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे चुका हो सकता है।

मुख्य सड़क से सटा बाजार, फिर भी वारदात

पततू बाजार मुख्य सड़क से सटा हुआ है और यहां रात के समय भी कभी-कभार आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में इतनी बड़ी चोरी का बिना किसी शोर-शराबे के हो जाना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर रात में नियमित गश्त होती, तो शायद इस तरह की घटना टाली जा सकती थी।

कुछ व्यापारियों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से इलाके में छोटी-मोटी चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन इस स्तर की वारदात पहली बार सामने आई है। इससे व्यापारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।

पुलिस, FSL और डॉग स्क्वॉड की जांच

सूचना मिलते ही रानीतालाब थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को बुलाया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने दीवार, लॉकर और दुकान के भीतर से फिंगरप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया।

डॉग स्क्वॉड की मदद भी ली गई, ताकि चोरों के भागने की दिशा का पता चल सके। हालांकि भीड़ और सुबह की गतिविधियों के कारण साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।

थानाध्यक्ष ने बताया कि दुकान मालिक से लिखित आवेदन प्राप्त होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर ली जाएगी और तकनीकी तथा मानवीय दोनों आधारों पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी। आसपास के मोबाइल टावर से कॉल डिटेल्स और संदिग्ध नंबरों की भी जांच की जा सकती है।

व्यापारियों में आक्रोश, बढ़ी गश्त की मांग

घटना के बाद पततू बाजार के व्यापारियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने एकजुट होकर पुलिस प्रशासन से रात में गश्त बढ़ाने, बाजार क्षेत्र में स्थायी पुलिस पिकेट स्थापित करने और सीसीटीवी निगरानी को मजबूत करने की मांग की है।

व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उनका तर्क है कि लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाएं व्यापार के माहौल को प्रभावित कर रही हैं और ग्राहक भी असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बाजारों में अक्सर सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जाती है। कई दुकानों में आधुनिक अलार्म सिस्टम या मजबूत सुरक्षा इंतजाम नहीं होते, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि व्यापारियों को भी अपने स्तर पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करना चाहिए, जैसे—उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे, क्लाउड बैकअप, अलार्म सिस्टम और मजबूत लॉकर की व्यवस्था।

बंगाल : कोलकाता में शुभेंदु अधिकारी का ममता सरकार पर बड़ा हमला; 2.15 करोड़ बेरोजगारी, 51 परियोजनाएं ठप और 10 लाख पद खाली होने का दावा

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर उस समय गर्मा गई जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari ने राजधानी Kolkata में आयोजित एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बेरोजगारी, उद्योगों की स्थिति, महिला सुरक्षा, सरकारी रिक्त पदों, युवाओं की योजनाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे कई मुद्दों को एक साथ उठाते हुए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। यह प्रेस वार्ता राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि राज्य में आगामी चुनावों को देखते हुए विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।

महाशिवरात्रि की शुभकामनाओं से शुरुआत

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत शुभेंदु अधिकारी ने राज्यवासियों को महाशिवरात्रि की अग्रिम शुभकामनाएं देकर की। उन्होंने कहा कि यह पर्व भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और सनातन परंपराओं का प्रतीक है। इसके बाद उन्होंने सीधे राज्य की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से इतर राज्य के युवाओं और आम नागरिकों के सामने गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां खड़ी हैं, जिन पर सरकार ध्यान नहीं दे रही।

2.15 करोड़ बेरोजगारी का दावा

सबसे बड़ा आरोप उन्होंने बेरोजगारी को लेकर लगाया। उनका दावा था कि पश्चिम बंगाल में 2 करोड़ 15 लाख लोग बेरोजगार हैं। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा केवल पंजीकृत बेरोजगारों का नहीं बल्कि वास्तविक स्थिति को दर्शाता है, जिसमें शिक्षित युवा, तकनीकी डिग्रीधारी छात्र, पारंपरिक उद्योगों से जुड़े श्रमिक और ग्रामीण क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार सृजन की गति बेहद धीमी है और निजी निवेश लगभग ठप पड़ चुका है। अधिकारी के अनुसार, रोजगार के अवसरों की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवा राज्य छोड़कर अन्य राज्यों में काम की तलाश में जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग एक करोड़ लोग पिछले वर्षों में काम के लिए राज्य से बाहर गए हैं।

51 औद्योगिक परियोजनाएं ठप

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में 51 औद्योगिक और निवेश परियोजनाएं फिलहाल बंद या ठप स्थिति में हैं। उनके अनुसार, निवेशकों का भरोसा सरकार की नीतियों, प्रशासनिक अस्थिरता और कथित भ्रष्टाचार के कारण कमजोर हुआ है।

उन्होंने कहा कि एक समय पश्चिम बंगाल उद्योगों का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज स्थिति यह है कि नई कंपनियां निवेश करने से हिचक रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योगपतियों को अनावश्यक राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

युवश्री योजना पर गंभीर सवाल

विपक्ष के नेता ने वर्ष 2013 में शुरू की गई ‘युवा उत्साह परियोजना’, जिसे बाद में ‘युवश्री’ नाम दिया गया, पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने दावा किया कि इस योजना के तहत 17 लाख युवाओं ने आवेदन किया था, लेकिन केवल लगभग एक लाख युवाओं को सीमित समय के लिए भत्ता मिला।

उन्होंने कहा कि शेष 16 लाख से अधिक युवा आज भी किसी सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अधिकारी ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव से पहले इस योजना का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए किया गया और बाद में इसे प्रभावी रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इन 17 लाख आवेदकों की वर्तमान स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करे और स्पष्ट करे कि योजना का वास्तविक लाभ किसे मिला।

सरकारी पदों में भारी रिक्तियां

शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में सरकारी पदों की स्थिति को भी गंभीर बताया। उनका आरोप था कि लगभग 6 लाख सरकारी पद समाप्त कर दिए गए हैं और करीब 10 लाख पद वर्तमान में खाली हैं।

उन्होंने कहा कि इनमें 3.30 लाख शिक्षक और गैर-शिक्षक पद शामिल हैं। इसके अलावा 1.50 लाख पुलिस कांस्टेबल पदों पर भी नियुक्तियां नहीं की गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा और कानून-व्यवस्था दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

उनके अनुसार, स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि पुलिस बल की कमी के कारण अपराध नियंत्रण पर असर पड़ रहा है।

महिला सुरक्षा का मुद्दा

महिला सुरक्षा के सवाल पर भी उन्होंने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार इन्हें रोकने में असफल रही है।

उन्होंने कुछ हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय मामलों को दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने विशेष रूप से सत्ताधारी दल All India Trinamool Congress के एक कथित मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आरोप गंभीर हैं तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।

प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक नहीं कर रही है। उन्होंने बेरोजगारी, सरकारी भर्तियों और उद्योग निवेश से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार के दावे सही हैं तो उसे डेटा के साथ जनता के सामने आना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए आंकड़ों को अस्पष्ट रखा जाता है।

‘चाकरी मांगे बांग्ला’ अभियान

युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा के ‘चाकरी मांगे बांग्ला’ अभियान में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अभियान युवाओं की आवाज को मजबूत करने के लिए चलाया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां रोजगार के अवसर अधिक हैं और निवेश का माहौल बेहतर है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भी बदलाव की जरूरत है ताकि युवाओं को राज्य छोड़कर बाहर न जाना पड़े।

एंटी-इन्कम्बेंसी का दावा

शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि राज्य में एंटी-इन्कम्बेंसी की भावना तेजी से बढ़ रही है। उनके अनुसार, लंबे समय से सत्ता में रहने के कारण सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही है।

उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनावों में जनता बदलाव का मन बना चुकी है और विपक्ष इस जनभावना को संगठित करने का प्रयास करेगा।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य

पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखी जा रही है। विधानसभा चुनावों के बाद भी दोनों दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

विपक्ष का आरोप है कि राज्य में लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए राज्य की छवि खराब कर रहा है।

राज्य सरकार की संभावित प्रतिक्रिया

हालांकि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए गए आरोपों पर तत्काल सरकार की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, लेकिन आम तौर पर सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को निराधार बताता रहा है। सरकार का दावा है कि उसने उद्योग, बुनियादी ढांचे, सामाजिक कल्याण योजनाओं और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है।

राज्य सरकार अक्सर यह भी कहती है कि बेरोजगारी राष्ट्रीय स्तर की समस्या है और केंद्र सरकार की नीतियों का भी राज्यों पर प्रभाव पड़ता है।

जेल से बाहर आते ही आक्रामक दिखे पप्पू यादव, बोले- बेटियों के लिए 100 बार मरना मंजूर

Pappu Yadav बेउर जेल से रिहा होते ही पहले से अधिक आक्रामक अंदाज में नजर आए। मीडिया से बातचीत में पूर्णिया सांसद ने अपनी गिरफ्तारी को ‘अन्याय’ करार दिया और बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि “बिहार की गिरती व्यवस्था” के खिलाफ है।

बिहार की मौजूदा राजनीति पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज की राजनीति बदले की भावना से संचालित हो रही है। उन्होंने इसे अंग्रेजी हुकूमत से भी बदतर बताते हुए कहा कि उस समय कम से कम संघर्ष का स्पष्ट मोर्चा था, लेकिन आज “दोस्त और दुश्मन की पहचान मुश्किल हो गई है।” उन्होंने सत्ता पक्ष पर ‘चरित्रहीन राजनीति’ करने का आरोप लगाया।

पप्पू यादव ने दावा किया कि बिहार में हर दिन 100 से 150 बच्चियां लापता हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां यह आंकड़ा 53 तक पहुंचा है, लेकिन बिहार में स्थिति कहीं अधिक भयावह है।

दरभंगा में 6 साल की बच्ची और गया में 14 साल की किशोरी के साथ हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने नेताओं और समाज की चुप्पी पर सवाल उठाए। भावुक होते हुए सांसद ने कहा, “बेटियों की इज्जत की रक्षा के लिए मैं 100 बार भी मरना पसंद करूंगा।”

अपनी सेहत और जेल के अनुभव साझा करते हुए सांसद ने प्रशासन की संवेदनहीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इलाज के दौरान Patna Medical College and Hospital (PMCH) में उन्हें 24 घंटे में एक बोतल पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि जेल के भीतर उनकी जान को खतरा था और पूरे मामले की शिकायत वे विधानसभा अध्यक्ष से करेंगे। उन्होंने प्रशासनिक कार्यप्रणाली की जांच की मांग करने की बात कही।

पप्पू यादव के इन बयानों से स्पष्ट है कि जेल से बाहर आने के बाद वे बिहार की राजनीति में आक्रामक तेवर के साथ सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज होने के आसार हैं।

होली पर घर जाना हुआ आसान: दिल्ली-कोलकाता से बिहार के लिए 26 स्पेशल ट्रेनें

नई दिल्ली: होली के मद्देनजर यात्रियों की भारी भीड़ को संभालने के लिए Indian Railways ने बड़ा फैसला लिया है। East Central Railway ने दिल्ली और कोलकाता रूट से बिहार के विभिन्न शहरों के लिए 13 जोड़ी यानी कुल 26 होली स्पेशल ट्रेनों की समय-सारणी जारी की है।

इस फैसले से त्योहार पर घर लौटने वाले लाखों यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी और यात्रा अधिक सुगम हो सकेगी।

नई दिल्ली और आनंद विहार से स्पेशल ट्रेनें

रेलवे ने Anand Vihar Terminal और New Delhi Railway Station से बिहार के प्रमुख शहरों के लिए विशेष गाड़ियां चलाने की घोषणा की है।

प्रमुख ट्रेनें और तिथियां:

  • 04070 आनंद विहार–शेखपुरा: 20, 24, 27 फरवरी और 03, 06 मार्च
    वापसी: 04069 शेखपुरा–आनंद विहार समान तिथियों पर
  • 04054 नई दिल्ली–बरौनी: 20 फरवरी से 06 मार्च
    वापसी: 04053 बरौनी–नई दिल्ली 22 फरवरी से 08 मार्च
  • 04060 नई दिल्ली–सुपौल: 20 फरवरी से 06 मार्च
    वापसी: 04059 सुपौल–नई दिल्ली 22 फरवरी से 08 मार्च
  • 04010 दिल्ली–सीतामढ़ी: 26 फरवरी, 05 मार्च
    वापसी: 04009 सीतामढ़ी–दिल्ली 27 फरवरी, 06 मार्च
  • 04014 आनंद विहार–लौकहा बाजार: 27 फरवरी, 06 मार्च
    वापसी: 04013 लौकहा बाजार–आनंद विहार 28 फरवरी, 07 मार्च
  • 04066 आनंद विहार–खोरधा रोड जं.: 27 फरवरी से 03 मार्च
    वापसी: 04065 खोरधा रोड जं.–आनंद विहार 28 फरवरी से 04 मार्च

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मांग बढ़ने पर अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों की घोषणा भी की जा सकती है।

कोलकाता और हावड़ा से भी विशेष इंतजाम

पश्चिम बंगाल में रहने वाले बिहारियों के लिए भी खास व्यवस्था की गई है। Howrah Junction railway station, Sealdah railway station और Kolkata से रक्सौल, मधुबनी और अन्य स्टेशनों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी।

प्रमुख ट्रेनें:

  • 03043 हावड़ा–रक्सौल: 28 फरवरी, 07 एवं 14 मार्च
    वापसी: 03044 रक्सौल–हावड़ा 01, 08 एवं 15 मार्च
  • 03045 हावड़ा–रक्सौल: 01, 02 मार्च
    वापसी: 03046 रक्सौल–हावड़ा 02, 03 मार्च
  • 03183 सियालदह–मधुबनी: 28 फरवरी, 07 मार्च
    वापसी: 03184 मधुबनी–सियालदह 01, 08 मार्च
  • 03185 कोलकाता–मधुबनी: 27 फरवरी
    वापसी: 03186 मधुबनी–लौकहा बाजार 27 फरवरी, 06 मार्च
  • 08753 दुर्ग–मधुबनी: 01 मार्च
    वापसी: 08754 मधुबनी–दुर्ग 02 मार्च
  • 03007 हावड़ा–खातीपुरा (जयपुर): 25 फरवरी, 11 मार्च
    वापसी: 03008 खातीपुरा–हावड़ा 27 फरवरी, 13 मार्च

क्लोन हमसफर एक्सप्रेस के फेरों में विस्तार

जयनगर और अमृतसर के बीच चलने वाली लोकप्रिय हमसफर क्लोन एक्सप्रेस (04651/04652) की परिचालन अवधि भी बढ़ा दी गई है। अब यह ट्रेन 1 मार्च से 31 मार्च तक चलेगी। इससे लंबी दूरी के यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा और भीड़ का दबाव कम होगा।

टिकट बुकिंग और सुविधाएं

इन स्पेशल ट्रेनों में स्लीपर और एसी कोच दोनों की व्यवस्था की गई है। यात्री टिकट की बुकिंग IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से कर सकते हैं।

रेलवे का कहना है कि जरूरत पड़ने पर और भी स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। इस पहल से खासकर प्रवासी मजदूरों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

होली के इस खास मौके पर रेलवे की यह पहल बिहार के यात्रियों के लिए बड़ी सौगात साबित हो सकती है।

बदला प्रधानमंत्री कार्यालय का पता – सेवा तीर्थ से चलेगी सरकार

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 13 फरवरी 2026 को राजधानी नई दिल्ली में अपने नए प्रधानमंत्री कार्यालय ’सेवा तीर्थ’ (Seva Teerth) का शानदार उद्घाटन किया, जिससे देश के प्रशासनिक ढांचे में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यह ऐतिहासिक बदलाव दशकों से चली आ रही परंपरा को तोड़कर ब्रिटिश-कालीन ‘साउथ ब्लॉक’ से प्रधान कार्यालय को नई, आधुनिक और सुविधाओं से लैस इमारत में स्थानांतरित कर रहा है।

’सेवा तीर्थ’ क्या है?

‘सेवा तीर्थ’ अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय को एक ही परिसर में रखता है। इससे पहले ये संस्थान अलग-अलग पुराने भवनों में फैले हुए थे, जिससे समन्वय और गति की परेशानी होती थी। नए परिसर का नाम “सेवा तीर्थ” इसलिए रखा गया है कि यह सेवा और जनहित की भावना को दर्शाता है।

यह अत्याधुनिक परिसर दारा शिकोह रोड पर स्थित है और इसे मोर्डन डिज़ाइन, डिजिटल कार्यप्रणाली, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, ऊर्जा दक्षता तथा सुरक्षा सुविधाओं के साथ तैयार किया गया है।

कर्तव्य भवन 1 और 2 भी उद्घाटित

उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री ने कर्तव्य भवन 1 और 2 का भी लोकार्पण किया। इन भवनों में कई प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों को स्थान दिया गया है, जिनमें वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, कृषि एवं किसान कल्याण, शिक्षा, सूचना और प्रसारण, कानून और न्याय, रसायन और उर्वरक, तथा जनजातीय मामलों जैसे विभाग शामिल हैं।

पुराने कार्यालय का भविष्य

PMO के पुराने भवन साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक अब सरकार के प्रशासनिक केंद्र के रूप में उपयोग नहीं होंगे। सरकार ने बताया है कि पुराने इमारतों को संग्रहालय और सांस्कृतिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि उनकी ऐतिहासिक महत्ता को संरक्षित रखा जा सके।

प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन के मौके पर कहा कि यह कदम नयी भारत की सेवा-oriented प्रशासनिक संरचना का प्रतीक है। इससे सरकार की कार्यकुशलता बढ़ेगी, निर्णय लेने में तेजी आएगी और नागरिकों के साथ जुड़ाव बेहतर होगा। उन्होंने यह भी बताया कि ‘सेवा तीर्थ’ भारत की जनभावना और विकास की ऊर्जा का प्रतीक है।

हजारीबाग में हाथियों का तांडव जारी: 24 घंटे में 8 की मौत, गांवों में दहशत

Hazaribagh : हजारीबाग जिले के चुरचू प्रखंड में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गोंदवार गांव में छह लोगों की जान लेने के 24 घंटे के भीतर ही हाथियों ने दो और लोगों को मौत के घाट उतार दिया। लगातार हो रही घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

भुरकुंडा टोला में महिला को कुचला

गोंदवार गांव से सटे बहेरा पंचायत के कजरी गांव के भुरकुंडा टोला में शुक्रवार रात पांच हाथियों के झुंड ने राजेश मुर्मु के घर पर हमला कर दिया। घर में सो रही उनकी पत्नी फुलमुनी देवी को हाथियों ने कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

हमले के दौरान राजेश मुर्मु किसी तरह दीवार फांदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे। ग्रामीणों ने शोर मचाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक महिला की जान जा चुकी थी।

गुरुवार को 6 लोगों की गई थी जान

इससे एक दिन पहले, गुरुवार देर रात आंगो थाना क्षेत्र और चुरचू प्रखंड के गोंदवार गांव में हाथियों ने तांडव मचाया था। पांच हाथियों के झुंड ने घरों के गेट उखाड़ दिए और अंदर घुसकर सो रहे लोगों को कुचल दिया।

मृतकों में सुमन कुमारी (26), धनेश्वर राम (52), सूरज राम (50), सविता देवी (25), अनुराग राम (1 वर्ष) और संजना कुमारी (3 माह) शामिल हैं। इनमें सूरज राम, सविता देवी और दोनों मासूम बच्चे एक ही परिवार के थे। घटना के वक्त सभी लोग अपने घरों में सो रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शी ने सुनाई आपबीती

हमले में बचे रोहित राम ने बताया कि रात में पहले हाथियों ने घर का दरवाजा तोड़ा। बाहर निकलने पर सामने हाथी दिखा। उन्होंने घर में रखी कढ़ाही से हाथी को मारकर खुद को बचाया और खिड़की से कूदकर बाहर भागे। इसके बाद शोर मचाकर अन्य लोगों को जगाया।

वन विभाग पर लापरवाही का आरोप

घटनाओं की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में हाथियों की लगातार मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाए। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई होती तो इतने लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

पंचायत भवन में शरण ले रहे ग्रामीण

लगातार हमलों से भयभीत ग्रामीणों ने रात पंचायत भवन में गुजारी। गांव में लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों में विशेष रूप से भय का माहौल है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से हाथियों को सुरक्षित जंगल क्षेत्र में खदेड़ने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष के गंभीर स्वरूप को उजागर कर दिया है।

बंगाल में SIR: पश्चिम बंगाल में SIR अंतिम चरण में, 32 लाख ‘अनमैप्ड’ नामों की सुनवाई से बढ़ी चुनौती

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। चुनाव आयोग ने 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का लक्ष्य तय किया है, जबकि 21 फरवरी तक सभी आपत्तियों और दावों की सुनवाई पूरी करनी अनिवार्य है।

आयोग के अनुमान के मुताबिक राज्य में करीब 32 लाख नाम ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में हैं, जिनकी जांच और सुनवाई की जानी है। इन मामलों के निस्तारण के लिए ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को दस्तावेजों की गहन पड़ताल करनी पड़ रही है। कई मामलों में दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

एक महीने के भीतर दो बच्चों का जन्म?

अंग्रेजी दैनिक The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके Metiabruz में एक परिवार के दस्तावेजों में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

एसके इरशाद और शेख नौसेद नाम के दो भाइयों की जन्मतिथि में एक महीने से भी कम का अंतर दर्ज है।

  • बड़े भाई की जन्मतिथि: 5 दिसंबर 1990
  • छोटे भाई की जन्मतिथि: 1 जनवरी 1991

SIR के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों में दोनों की उम्र में यह बेहद कम अंतर पाया गया। जांच में परिवार के कुल दस सदस्यों की पहचान हुई है। सभी दस्तावेजों में पिता के रूप में एसके अब्दुल और मां के रूप में मनोवारा बीबी का नाम दर्ज है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि दस बच्चों में से चार की जन्मतिथि 1 जनवरी दर्ज की गई है, जिसने अधिकारियों की शंका और बढ़ा दी है।

चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों की गहन जांच की जा रही है और संबंधित रिकॉर्ड की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है।

जन्म से दो दिन पहले जारी हुआ प्रमाणपत्र

इसी तरह का एक मामला Baranagar (उत्तर 24 परगना) में सामने आया है। यहां एक व्यक्ति का जन्म प्रमाणपत्र उसके जन्म से दो दिन पहले जारी होने का मामला दर्ज हुआ।

जांच में पाया गया कि पपील सरकार द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्र में जन्मतिथि 6 मार्च 1993 लिखी है, जबकि रजिस्ट्रेशन की तारीख 4 मार्च 1993 दर्ज है — यानी जन्म से दो दिन पहले प्रमाणपत्र जारी हो गया।

इसके अलावा, एक मतदाता को SIR 2002 में पांच वर्ष की आयु में मैप किया गया था, जबकि दूसरा रिकॉर्ड में 13 वर्ष का पाया गया। इस तरह की विसंगतियां सत्यापन प्रक्रिया को और लंबा कर रही हैं।

सत्यापन में लग रहा अतिरिक्त समय

SIR कार्य से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, ऐसे मामलों को सत्यापन के लिए संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के पास भेजा जाता है। जरूरत पड़ने पर अस्पताल अथॉरिटी और अन्य सरकारी अभिलेखों से भी पुष्टि की जाती है।

इन बहु-स्तरीय जांच प्रक्रियाओं के कारण सुनवाई में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। प्रशासन का कहना है कि अंतिम मतदाता सूची जारी करने से पहले सभी संदिग्ध प्रविष्टियों की जांच पूरी करना आवश्यक है, ताकि सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

राज्य में SIR की प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में है। आयोग के सामने चुनौती यह है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी अनमैप्ड नामों और दस्तावेजी विसंगतियों का समाधान कर पारदर्शी और त्रुटिरहित मतदाता सूची प्रकाशित की जाए।

अमेरिका की 93 रन से धमाकेदार जीत, हरमीत सिंह की फिरकी में फंसा नीदरलैंड्स

चेन्नई के ऐतिहासिक M. A. Chidambaram Stadium में खेले गए ग्रुप-A मुकाबले में ICC Men’s T20 World Cup के तहत अमेरिका ने नीदरलैंड्स पर एकतरफा जीत दर्ज की।

पहले बल्लेबाजी करते हुए अमेरिका ने 20 ओवर में 6 विकेट पर 196 रन बनाए और 197 रन का विशाल लक्ष्य दिया। जवाब में नीदरलैंड्स की पूरी टीम 103 रन पर सिमट गई। अमेरिका ने यह मुकाबला 93 रन से जीत लिया।


🔥 सैतेजा और शुभम की विस्फोटक पारियां

टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी अमेरिकी टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया।

  • सैतेजा मुक्कमल्ला ने 51 गेंदों पर 79 रन की शानदार पारी खेली।
    • उनकी पारी में कई दमदार चौके-छक्के शामिल रहे।
    • उन्होंने पावरप्ले के बाद भी रन गति को कम नहीं होने दिया।
  • शुभम रंजने ने भी तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 24 गेंदों पर 48 रन ठोके।
    • उन्होंने मिडिल ओवर्स में तेजी से रन जोड़कर स्कोर को 190 के पार पहुंचाया।

दोनों बल्लेबाजों की साझेदारी ने अमेरिकी पारी की नींव मजबूत कर दी।


🎯 एडवर्ड्स का टॉस फैसला पड़ा भारी

नीदरलैंड्स के कप्तान Scott Edwards ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी थी। चेन्नई में ओस को ध्यान में रखते हुए यह रणनीति बनाई गई थी, लेकिन अमेरिकी बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाकर इस फैसले को गलत साबित कर दिया।

नीदरलैंड्स की ओर से Bas de Leede ने तीन अहम विकेट लेकर कुछ हद तक नियंत्रण बनाने की कोशिश की, लेकिन दूसरे छोर से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।


😞 लक्ष्य का पीछा करते ही बिखर गई डच टीम

197 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी नीदरलैंड्स की टीम शुरुआत से दबाव में दिखी।

  • पहला विकेट सिर्फ 9 रन पर गिर गया।
  • दूसरे विकेट के लिए 32 रन की साझेदारी हुई, लेकिन इसके बाद विकेटों का पतन जारी रहा।
  • 75 रन तक पहुंचते-पहुंचते आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी।

कोई भी बल्लेबाज लंबी पारी नहीं खेल सका और पूरी टीम 103 रन पर ऑलआउट हो गई।


🌀 हरमीत और वैन शाल्कविक का कहर

अमेरिका की जीत के नायक रहे स्पिनर हरमीत सिंह

  • 4 ओवर में 21 रन देकर 4 विकेट
  • मिडिल ओवर्स में लगातार झटके देकर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया

वहीं तेज गेंदबाज शेडली वैन शाल्कविक ने भी शानदार गेंदबाजी की।

  • 2.5 ओवर में 21 रन देकर 3 विकेट
  • निचले क्रम को जल्दी समेटकर मैच खत्म किया

दोनों गेंदबाजों के सामने डच बल्लेबाज पूरी तरह असहाय नजर आए।


📊 मैच का सार

टीमस्कोर
अमेरिका196/6 (20 ओवर)
नीदरलैंड्स103 ऑलआउट
परिणामअमेरिका 93 रन से विजयी