PATNA: बिहार की राजधानी Patna के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर अपराधियों ने दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देकर पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था को खुली चुनौती दी है। पालीगंज अनुमंडल के रानीतालाब थाना क्षेत्र स्थित पततू बाजार में स्थित ‘रजनीश ज्वेलर्स’ नामक आभूषण दुकान में चोरों ने बेहद सुनियोजित और फिल्मी अंदाज में सेंधमारी कर लाखों रुपये के गहनों पर हाथ साफ कर दिया। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय व्यापारियों को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
सुबह दीवार में छेद और सीढ़ी देख उड़ गए होश
घटना का खुलासा उस समय हुआ जब सुबह-सुबह बाजार के कुछ लोग अपनी-अपनी दुकानें खोलने पहुंचे। रजनीश ज्वेलर्स की दुकान के पीछे की ओर दीवार में बड़ा सा छेद और वहां टिकाई गई एक सीढ़ी देखकर लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। तत्काल दुकान मालिक रजनीश कुमार को सूचना दी गई। जब तक वे मौके पर पहुंचे, आसपास भीड़ जुट चुकी थी।
दुकान के सामने का शटर पूरी तरह सुरक्षित और बंद था। ताला भी टूटा नहीं था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि चोरों ने सामने से नहीं, बल्कि पीछे की दीवार काटकर दुकान में प्रवेश किया। जिस तरीके से दीवार को काटा गया, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि चोरों के पास पेशेवर उपकरण थे और उन्होंने काफी समय लेकर पूरी तैयारी के साथ वारदात को अंजाम दिया।
अंदर का मंजर देख दंग रह गए मालिक
रजनीश कुमार ने जैसे ही दुकान का शटर खोलकर अंदर कदम रखा, वे सन्न रह गए। पूरा सामान बिखरा हुआ था। अलमारियां खुली थीं, शोकेस के शीशे हटाए गए थे और सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उन्होंने देखा कि दुकान का मुख्य लॉकर गैस कटर जैसे औजार से काट दिया गया है।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब 25 से 30 किलो चांदी के आभूषण, लगभग 150 ग्राम सोने के गहने और करीब 67 हजार रुपये नकद चोरी हो चुके थे। कुल नुकसान का अनुमान 50 से 60 लाख रुपये के बीच लगाया जा रहा है। हालांकि अंतिम आंकड़ा लिखित आवेदन और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पूरी प्लानिंग के साथ हुई वारदात
जिस तरीके से दीवार काटी गई, सीढ़ी लगाई गई और सीधे लॉकर तक पहुंच बनाई गई, उससे साफ है कि चोरों ने पहले दुकान की रेकी की थी। उन्हें दुकान के अंदरूनी ढांचे, लॉकर की स्थिति और बाजार की गतिविधियों की पूरी जानकारी थी। आशंका जताई जा रही है कि वारदात में तीन से पांच लोगों का गिरोह शामिल हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चोरी में आमतौर पर दो तरह के लोग शामिल होते हैं—एक जो बाहर निगरानी करते हैं और दूसरे जो अंदर जाकर चोरी को अंजाम देते हैं। दुकान के भीतर मिले खाली गहनों के डिब्बे और फैला सामान इस बात का संकेत देते हैं कि चोरों ने पर्याप्त समय लेकर चयनित गहनों को समेटा।
CCTV का DVR भी ले गए साथ
सबूत मिटाने के उद्देश्य से चोर दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर भी साथ ले गए। इससे जांच में शुरुआती स्तर पर कठिनाई आ सकती है। हालांकि पुलिस आसपास की अन्य दुकानों और मुख्य सड़क पर लगे कैमरों के फुटेज खंगाल रही है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सके।
सीसीटीवी का डीवीआर ले जाना इस बात का संकेत है कि अपराधी तकनीकी रूप से भी सतर्क थे और वे पहचान से बचने की पूरी तैयारी करके आए थे। पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह पहले भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे चुका हो सकता है।
मुख्य सड़क से सटा बाजार, फिर भी वारदात
पततू बाजार मुख्य सड़क से सटा हुआ है और यहां रात के समय भी कभी-कभार आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में इतनी बड़ी चोरी का बिना किसी शोर-शराबे के हो जाना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर रात में नियमित गश्त होती, तो शायद इस तरह की घटना टाली जा सकती थी।
कुछ व्यापारियों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से इलाके में छोटी-मोटी चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन इस स्तर की वारदात पहली बार सामने आई है। इससे व्यापारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।
पुलिस, FSL और डॉग स्क्वॉड की जांच
सूचना मिलते ही रानीतालाब थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम को बुलाया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने दीवार, लॉकर और दुकान के भीतर से फिंगरप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया।
डॉग स्क्वॉड की मदद भी ली गई, ताकि चोरों के भागने की दिशा का पता चल सके। हालांकि भीड़ और सुबह की गतिविधियों के कारण साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
थानाध्यक्ष ने बताया कि दुकान मालिक से लिखित आवेदन प्राप्त होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर ली जाएगी और तकनीकी तथा मानवीय दोनों आधारों पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी। आसपास के मोबाइल टावर से कॉल डिटेल्स और संदिग्ध नंबरों की भी जांच की जा सकती है।
व्यापारियों में आक्रोश, बढ़ी गश्त की मांग
घटना के बाद पततू बाजार के व्यापारियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने एकजुट होकर पुलिस प्रशासन से रात में गश्त बढ़ाने, बाजार क्षेत्र में स्थायी पुलिस पिकेट स्थापित करने और सीसीटीवी निगरानी को मजबूत करने की मांग की है।
व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उनका तर्क है कि लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाएं व्यापार के माहौल को प्रभावित कर रही हैं और ग्राहक भी असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे बाजारों में अक्सर सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जाती है। कई दुकानों में आधुनिक अलार्म सिस्टम या मजबूत सुरक्षा इंतजाम नहीं होते, जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि व्यापारियों को भी अपने स्तर पर सुरक्षा उपायों को मजबूत करना चाहिए, जैसे—उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे, क्लाउड बैकअप, अलार्म सिस्टम और मजबूत लॉकर की व्यवस्था।