बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में कृषि विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रभारी जिला कृषि पदाधिकारी हिमांशु कुमार और उनके ड्राइवर रामबाबू राय को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई ने न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि पूरे बिहार में प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायत से गिरफ्तारी तक: कैसे बिछाया गया जाल
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक खाद दुकानदार की शिकायत से हुई। दुकानदार ने पटना स्थित विशेष निगरानी इकाई के कार्यालय में लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया कि जिला कृषि कार्यालय की ओर से उसे लगातार परेशान किया जा रहा है। शिकायत के मुताबिक, जांच के नाम पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था और दुकान का लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी जा रही थी।
दुकानदार ने आरोप लगाया कि मामले को “सुलझाने” के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की गई। यह रकम सीधे अधिकारी की बजाय उनके ड्राइवर के माध्यम से मांगी गई थी। आरोप यह भी था कि यदि तय रकम नहीं दी गई तो लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा, जिससे उसका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो सकता था।
शिकायत मिलते ही SVU ने मामले को गंभीरता से लिया और प्राथमिक स्तर पर गुप्त सत्यापन (वेरिफिकेशन) कराया। सत्यापन के दौरान शिकायत में प्रथमदृष्टया सच्चाई पाई गई। इसके बाद अधिकारियों ने ट्रैप कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी।
ट्रैप टीम का गठन और सुनियोजित कार्रवाई
SVU ने इस ऑपरेशन के लिए एक विशेष धावा दल (ट्रैप टीम) का गठन किया। पुलिस उपाधीक्षक बिंदेश्वर प्रसाद और सुधीर कुमार के नेतृत्व में पूरी रणनीति तैयार की गई। टीम ने परिवादी (शिकायतकर्ता) को आवश्यक निर्देश दिए और तय योजना के अनुसार कार्रवाई का समय निर्धारित किया।
मंगलवार को मुजफ्फरपुर में पूरे प्लान के तहत जाल बिछाया गया। परिवादी को केमिकल-ट्रीटेड नोट दिए गए ताकि लेन-देन की पुष्टि वैज्ञानिक तरीके से की जा सके। जैसे ही ड्राइवर रामबाबू राय ने परिवादी से 50 हजार रुपये लिए, पहले से घात लगाए टीम के सदस्यों ने मौके पर ही दोनों आरोपियों को दबोच लिया।
मौके पर ही केमिकल टेस्ट (फेनॉलफ्थलीन परीक्षण) किया गया। परीक्षण में नोटों के संपर्क की पुष्टि हुई, जिससे रिश्वत लेने के आरोप की पुष्टि हो गई। टीम ने मौके से आवश्यक दस्तावेज और अन्य साक्ष्य भी जब्त किए।
कानूनी कार्रवाई: भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज
इस मामले में पटना निगरानी थाना में कांड संख्या 06/26 दर्ज किया गया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह धारा लोक सेवक द्वारा अवैध रूप से रिश्वत लेने या मांगने से संबंधित है।
फिलहाल दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह मामला अकेला है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।
एक महीने में दूसरी बड़ी गिरफ्तारी
मुजफ्फरपुर कृषि विभाग में यह एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले तत्कालीन जिला कृषि पदाधिकारी सुधीर कुमार को 18 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी।
उल्लेखनीय है कि उनकी गिरफ्तारी के बाद ही हिमांशु कुमार को जिला कृषि पदाधिकारी का प्रभार सौंपा गया था। लेकिन अब उनके खिलाफ भी इसी तरह के आरोप सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लगातार दूसरी गिरफ्तारी ने यह संकेत दिया है कि समस्या केवल व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवस्था के स्तर पर भी सुधार की आवश्यकता है।
लाइसेंस रद्द करने की धमकी: कारोबारियों में दहशत
खाद दुकानदारों का लाइसेंस कृषि विभाग द्वारा जारी किया जाता है। लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में संबंधित दुकानदार का पूरा व्यापार बंद हो सकता है। ऐसे में जांच के नाम पर दबाव बनाना और रिश्वत की मांग करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि कई बार छोटे व्यवसायियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। हालांकि, कई दुकानदार खुलकर सामने आने से हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन्हें प्रशासनिक प्रताड़ना का डर रहता है।
संपत्ति की जांच और आय से अधिक संपत्ति की पड़ताल
SVU की टीम अब आरोपियों की चल-अचल संपत्ति की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के आवास और अन्य ठिकानों की जानकारी जुटाई जा रही है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के संकेत मिलते हैं तो अलग से मामला दर्ज किया जा सकता है।
जांच एजेंसी बैंक खातों, निवेश, अचल संपत्ति और परिजनों के नाम पर की गई संपत्तियों की भी पड़ताल कर सकती है। यदि बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।